कक्षा 12 • राजनीति विज्ञान • समकालीन विश्व राजनीति • अध्याय 2 — सत्ता के समकालीन केन्द्र
कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) · पृष्ठ — 15 से 28
सोवियत संघ टूटा, अमरीका अकेली महाशक्ति बन गया। तो क्या दुनिया में कोई और बचा ही नहीं?
नहीं। “राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के वैकल्पिक केंद्र कुछ हद तक अमरीका के प्रभुत्व को सीमित करेंगे।” इस अध्याय के पाँच केंद्र • यूरोपीय संघ • आसियान • चीन • जापान • दक्षिण कोरिया
0 | पहले एक चेतावनी | यह अध्याय पहले ‘अध्याय 4’ था
दो अध्याय हटा दिए गए हैं
पाठ्यक्रम युक्तिकरण
- हाशिये का QR कोड
12108CH04है — यानी मूलतः यह अध्याय 4 था। - हटाए गए — पुराना अध्याय 1 (‘शीतयुद्ध का दौर’) और पुराना अध्याय 3 (‘समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व’)।
- ★इसीलिए ‘अमरीका का प्रभुत्व’ इस अध्याय की पहली पंक्ति में है, पर उसकी व्याख्या कहीं नहीं।
- ! और पृ. 22 पर लिखा है — “अध्याय दो में हम सोवियत संघ की… चर्चा कर चुके हैं।” वह अब अध्याय 1 है।
अतः शुरुआत वहीं से जहाँ किताब शुरू नहीं करती।
एक सवाल, तीन उत्तर
अकेली महाशक्ति वाली दुनिया में एक क्षेत्र अपनी जगह कैसे बनाए?
1 | यूरोपीय संघ | दुश्मनी से ‘लगभग राष्ट्र-राज्य’ तक
1945 — यूरोप के सामने दो रास्ते
‘यूरोप के सवाल’
- ★“क्या यूरोप को अपनी पुरानी दुश्मनियों को फिर से शुरू करना चाहिए, या अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सकारात्मक योगदान करने वाले सिद्धांतों और संस्थाओं के आधार पर उसे अपने संबंधों को नए सिरे से बनाना चाहिए?”
- 1945 तक यूरोपीय देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं की बर्बादी तो झेली ही, उन मान्यताओं को भी ध्वस्त होते देख लिया जिन पर यूरोप खड़ा हुआ था।
- ★“1945 के बाद यूरोप के देशों में मेल-मिलाप को शीतयुद्ध से भी मदद मिली।”
यूरोप ने दूसरा रास्ता चुना।
पहले चार कदम
- मार्शल योजना — अमरीका ने यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए जबरदस्त मदद की।
- नाटो — अमरीका ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को जन्म दिया।
- ★1948 — यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन, मार्शल योजना के तहत; व्यापार और आर्थिक मामलों में एक-दूसरे की मदद का मंच।
- ★1949 — यूरोपीय परिषद्, “राजनीतिक सहयोग के मामले में एक अगला कदम।”
1957 में यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी का गठन → यूरोपीयन पार्लियामेंट के बाद राजनीतिक स्वरूप।
यूरोपीय एकता के महत्त्वपूर्ण पड़ाव
- 1951अप्रैल — पेरिस संधि; छह देशों ने यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय बनाया
- 1957मार्च — रोम की संधि; EEC और Euratom
- 1973जनवरी — डेनमार्क, आयरलैंड और ब्रिटेन भी शामिल
- 1979जून — यूरोपीय संसद के लिए पहला प्रत्यक्ष चुनाव
- 1985जून — शांगेन संधि ने सीमा नियंत्रण समाप्त किया
- 1990अक्टूबर — जर्मनी का एकीकरण
- 1992फरवरी — मास्ट्रिस्ट संधि; यूरोपीय संघ की स्थापना
- 2002जनवरी — नई मुद्रा यूरो को 12 सदस्य देशों ने अपनाया
- 2004मई — दस देश एक साथ शामिल
- 2009दिसम्बर — लिस्बन संधि लागू
- 2012यूरोपीय संघ कोनोबेल शांति पुरस्कार
- 2013क्रोएशिया — 28वाँ सदस्य
- 2016ब्रिटेन का जनमत संग्रह — 51.9% ने Brexit चुना
छह संस्थापक देश
अप्रैल 1951 · पेरिस संधि
- फ्रांस
- पश्चिम जर्मनी
- इटली
- बेल्जियम
- नीदरलैंड
- लक्जमबर्ग
यही छह देश 1957 की रोम की संधि से EEC और Euratom भी बनाते हैं।
अब यह क्या बन गया है
- ★“आर्थिक सहयोग वाली व्यवस्था से बदलकर ज्यादा से ज्यादा राजनैतिक रूप लेता गया है।”
- ★“अब यूरोपीय संघ स्वयं काफी हद तक एक विशाल राष्ट्र-राज्य की तरह ही काम करने लगा है।”
- संविधान बनाने की कोशिश असफल — पर अपना झंडा, गान, स्थापना-दिवस और अपनी मुद्रा है।
- काफी हद तक साझी विदेश और सुरक्षा नीति भी बना ली है।
- ! असहमति: “अनेक देशों के लोग इस बात को लेकर उत्साहित नहीं थे कि जो ताकत उनके देश की सरकार को हासिल थी वह अब यूरोपीय संघ को दे दी जाए।”
नये सदस्य मुख्यत: भूतपूर्व सोवियत खेमे के थे।
अमरीका से तीन गुनी
विश्व व्यापार में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी — अमरीका के मुकाबले
ताकत के चार आयाम
| आयाम | तथ्य |
|---|---|
| आर्थिक | 2024 में GDP लगभग 19.35 खरब डॉलर (अनुमान) • यूरो अमरीकी डालर के प्रभुत्व के लिए खतरा • WTO के अंदर महत्वपूर्ण समूह |
| कूटनीतिक | फ्रांस सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमरीकी नीतियों को प्रभावित किया |
| सैनिक | दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना • रक्षा बजट अमरीका के बाद • फ्रांस के पास करीब 335 परमाणु हथियार |
| तकनीकी | अंतरिक्ष विज्ञान और संचार प्रौद्योगिकी में दुनिया में दूसरा स्थान |
और यही इसकी सीमा भी है
अधिराष्ट्रीय होने की कीमत
- ★“अनेक मामलों में इसके सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति है जो कई बार एक-दूसरे के खिलाफ भी होती है।”
- इराक युद्ध — ब्रिटेन के टोनी ब्लेयर अमरीका के साथ; जर्मनी और फ्रांस खिलाफ। कई नए सदस्य भी अमरीकी गठबंधन में।
- यूरो — यूरोप के कुछ हिस्सों में लागू करने के कार्यक्रम को लेकर काफी नाराजगी।
- ★मार्गरेट थैचर ने ब्रिटेन को यूरोपीय बाज़ार से अलग रखा।
- ★डेनमार्क और स्वीडन ने मास्ट्रिस्ट संधि और यूरो का प्रतिरोध किया।
★“इससे विदेशी और रक्षा मामलों में काम करने की यूरोपीय संघ की क्षमता सीमित होती है।”
झंडे के बारह सितारे — सबसे आम भ्रांति
इसमें 12 सितारे हैं क्योंकि बारह की संख्या को वहाँ पारंपरिक रूप से पूर्णता, समग्रता और एकता का प्रतीक माना जाता है।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 16 — यह सदस्य-संख्या नहीं दर्शाता
और 2003 में एक कोशिश डूब गई
2003 में यूरोपीय संघ ने एक साझा संविधान बनाने की कोशिश की थी। यह कोशिश नाकामयाब रही। कार्टूनिस्ट ने यूरोपीय संघ को टाइटैनिक जहाज के रूप में क्यों दिखाया है?
NCERT, अध्याय 2, पृ. 19 — कार्टून
2 | आसियान | जिसने अधिराष्ट्रीय बनने सेइनकार किया
तीन मुसीबतें, एक जवाब
दक्षिण-पूर्व एशिया
- ★दूसरे विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान यह हिस्सा बार-बार यूरोपीय और जापानी उपनिवेशवाद का शिकार हुआ तथा भारी राजनैतिक और आर्थिक कीमत चुकाई।
- युद्ध के बाद — राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक पिछड़ापन और गरीबी।
- ★शीतयुद्ध के दौर में किसी एक महाशक्ति के साथ जाने के दबाव भी झेलने पड़े।
- बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन “अनौपचारिक स्तर पर सहयोग और मेलजोल कराने के मामले में कारगर नहीं हो रहे थे।”
इसी के चलते इन देशों ने एक वैकल्पिक पहल की।
1967
बैंकॉक घोषणा — पाँच देशों ने आसियान की स्थापना की
पाँच से दस तक
| कब | कौन |
|---|---|
| संस्थापक (1967) | इंडोनेशिया · मलेशिया · फिलिपींस · सिंगापुर · थाईलैंड |
| बाद में | ब्रुनेई दारुस्सलाम · वियतनाम · लाओस · म्यांमार · कंबोडिया |
| कुल | दस — और झंडे में धान की दस बालियाँ इन्हीं को इंगित करती हैं |
दो घोषित उद्देश्य
- ★आर्थिक विकास को तेज करना और उसके माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक विकास हासिल करना।
- ★कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र के कायदों पर आधारित क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना।
वृत्त आसियान की एकता का प्रतीक है।
अध्याय का सबसे विशिष्ट वाक्य
यूरोपीय संघ की तरह इसने खुद को अधिराष्ट्रीय संगठन बनाने या उसकी तरह अन्य व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लेने का लक्ष्य नहीं रखा।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 20
‘आसियान शैली’ — ASEAN way
तीन विशेषण
- ★“अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप का नया उदाहरण पेश करके आसियान ने काफी यश कमाया है और इसको ‘आसियान शैली’ ही कहा जाने लगा है।”
- ★“आसियान के कामकाज में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहा है।”
- यह कमज़ोरी नहीं, चुनाव था — और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बना।
यही प्रश्नावली के प्रश्न 2 का उत्तर है।
आसियान समुदाय के तीन स्तंभ — 2003
| स्तंभ | उद्देश्य |
|---|---|
| आसियान सुरक्षा समुदाय | क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाने की सहमति पर आधारित |
| आसियान आर्थिक समुदाय | साझा बाज़ार और उत्पादन आधार; सामाजिक-आर्थिक विकास; आर्थिक विवाद निपटाने की व्यवस्था सुधारना |
| आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय | सामाजिक और सांस्कृतिक विकास |
वचनबद्धता और मंच
- 2003 तक के समझौतों में हर सदस्य ने वचनबद्धता जाहिर की — ★शांति, निष्पक्षता, सहयोग, अहस्तक्षेप, तथा आपसी अंतर और संप्रभुता के अधिकारों का सम्मान।
- ★1994 — आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF): सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल के लिए।
- ★विजन दस्तावेज़ 2020 — अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में बहिर्मुखी भूमिका; यह “टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा देने की नीति से ही निकली है।”
- इसी तरकीब से — कंबोडिया का टकराव समाप्त किया, पूर्वी तिमोर का संकट सम्भाला, और 1999 से नियमित वार्षिक बैठक।
मुक्त व्यापार क्षेत्र (FTA) पर अमरीका और चीन ने बातचीत की पहल कर दी है।
भारत और आसियान
लुक ईस्ट → एक्ट ईस्ट
- “शुरुआती वर्षों में भारतीय विदेश नीति ने आसियान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।”
- ★1991 से ‘लुक ईस्ट’ (Look East) और ★2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East)।
- इससे पूर्वी एशिया के देशों — आसियान, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया — से आर्थिक संबंधों में बढ़ोत्तरी हुई।
- मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते।
- ★2010 — आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था लागू।
★25 जनवरी 2018 — नई दिल्ली में भारत-आसियान साझेदारी की रजत जयंती; डाक टिकट जारी।
आसियान की असली ताकत
यह एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्रीय संगठन है जो एशियाई देशों और विश्व शक्तियों को राजनैतिक और सुरक्षा मामलों पर चर्चा के लिए राजनैतिक मंच उपलब्ध कराता है।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 22
3 | चीन | जिसने ‘शॉक थेरेपी’ सेइनकार किया
पहला मॉडल — सोवियत तर्ज़ पर
1949 · माओ
- 1949 में माओ के नेतृत्व में साम्यवादी क्रांति के बाद चीनी जनवादी गणराज्य; आर्थिकी सोवियत मॉडल पर।
- पूँजीवादी दुनिया से रिश्ते तोड़ लिए — “अपने ही संसाधनों से गुजारा करने के अलावा कोई चारा न था।”
- ★रणनीति — “खेती से पूँजी निकाल कर सरकारी नियंत्रण में बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था।”
- विदेशी मुद्रा की कमी → आयातित सामानों को धीरे-धीरे घरेलू स्तर पर तैयार करवाना।
थोड़े समय तक सोवियत मदद और सलाह भी मिली।
इस मॉडल ने क्या दिया — और क्या नहीं
- सभी नागरिकों को रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ।
- ★“अपने नागरिकों को शिक्षित करने और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के मामले में चीन सबसे विकसित देशों से भी आगे निकल गया।”
- अर्थव्यवस्था का विकास 5 से 6 फीसदी की दर से।
- ! पर — “जनसंख्या में 2–3 फीसदी की वार्षिक वृद्धि इस विकास दर पर पानी फेर रही थी।”
- ! कृषि अधिशेष अपर्याप्त • औद्योगिक उत्पादन धीमा • विदेशी व्यापार न के बराबर • प्रति व्यक्ति आय बहुत कम।
! किताब यहाँ कहती है “अध्याय दो में…” — वह अब अध्याय 1 है।
तीन निर्णायक वर्ष
- 1972अमरीका से संबंध बनाकर राजनीतिक और आर्थिक एकांतवास खत्म किया
- 1973चाऊ एनलाई — कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी में आधुनिकीकरण के चार प्रस्ताव
- 1978देंग श्याओपेंग — आर्थिक सुधार और ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा
- 1982खेती का निजीकरण
- 1998उद्योगों का निजीकरण
- 2001विश्व व्यापार संगठन में शामिल
अध्याय 1 से सबसे बड़ा जोड़
चीन ने ‘शॉक थेरेपी’ पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 23
खुले द्वार की नीति — और उसका असर
1978 के बाद
- नीति — “विदेश पूंजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता को प्राप्त किया जाए।”
- व्यापार संबंधी अवरोध सिर्फ ‘विशेष आर्थिक क्षेत्रों’ (SEZ) के लिए हटाए गए, जहाँ विदेशी निवेशक उद्यम लगा सकते हैं।
- कृषि के निजीकरण से कृषि-उत्पादों और ग्रामीण आय में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी; ग्रामीण उद्योगों की तादाद तेजी से बढ़ी।
- ★“चीन पूरे विश्व में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा।”
- विदेशी मुद्रा का विशाल भंडार — इसके दम पर दूसरे देशों में निवेश।
★“अब चीन की योजना विश्व आर्थिकी से अपने जुड़ाव को और गहरा करके भविष्य की विश्व व्यवस्था को एक मनचाहा रूप देने की है।”
2040
वह वर्ष जब तक चीन के दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति — अमरीका से भी आगे — बनने का अनुमान है
सुधारों की लागत
| क्षेत्र | क्या हुआ |
|---|---|
| बेरोजगारी | बढ़ी — 10 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में |
| महिलाएँ | रोजगार और काम के हालात उतने ही खराब जितने यूरोप में 18वीं और 19वीं सदी में थे |
| पर्यावरण | नुकसान बढ़ा |
| भ्रष्टाचार | बढ़ा |
| असमानता | गाँव-शहर तथा तटीय-मुख्यभूमि के लोगों के बीच आर्थिक फासला बढ़ता जा रहा है |
| SEZ | चीन में सिर्फ छह — भारत में 200 से ज्यादा को मंजूरी |
वैश्विक प्रभाव
- ★“अपने व्यावसायिक साझीदारों पर चीन का जबरदस्त प्रभाव बन चुका है” — इसीलिए जापान, अमरीका, आसियान और रूस, सभी व्यापार के आगे चीन से बाकी विवादों को भुला चुके हैं।
- ★1997 के वित्तीय संकट के बाद आसियान देशों की अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में चीन के आर्थिक उभार ने काफी मदद की।
- ★लातिनी अमरीका और अफ्रीका में निवेश और मदद → “विकासशील देशों के मामले में चीन एक नई विश्व शक्ति के रूप में उभरता जा रहा है।”
- चीन और ताइवान के मतभेद खत्म होने की उम्मीद।
“चीन पूर्व एशिया के विकास का इंजन-जैसा बना हुआ है।”
‘चीनी साइकिल’ — दो पहिये
विश्व में सबसे ज्यादा साइकिलें चीन में इस्तेमाल की जाती हैं। कार्टून में साइकिल का इस्तेमाल आज के चीन के दोहरेपन को इंगित करने के लिए किया गया है। यह दोहरापन क्या है? क्या हम इसे अंतर्विरोध कह सकते हैं?
NCERT, अध्याय 2, पृ. 24 — एक पहिया हँसिया-हथौड़ा, दूसरा डॉलर
4 | भारत और चीन | कभी नहीं टकराए — फिर टकरा गए
एक चौंकाने वाली बात
इतिहास
- ★“पश्चिमी साम्राज्यवाद के उदय से पहले भारत और चीन एशिया की महाशक्ति थे।”
- चीनी राजवंशों के लम्बे शासन में मंगोलिया, कोरिया, हिन्द-चीन के कुछ इलाके और तिब्बत इसकी अधीनता मानते रहे।
- ★“पर चीन और भारत अपने प्रभाव क्षेत्रों के मामले में कभी नहीं टकराए थे।”
- ★परिणाम — “दोनों देश एक दूसरे को ज्यादा अच्छी तरह से नहीं जान सके, और जब बीसवीं सदी में दोनों देश एक दूसरे से टकराए तो दोनों को ही एक-दूसरे के प्रति विदेश नीति विकसित करने में मुश्किलें आईं।”
इसी अनजानेपन से पूरी कहानी शुरू होती है।
टकराव से बातचीत तक
- 1950चीन द्वारा तिब्बत को हड़पना; सीमा पर बस्तियाँ → संबंध एकदम गड़बड़
- 1962युद्ध — अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाके और लद्दाख का अक्साई-चिन; भारत को सैनिक पराजय
- 1976इस वर्ष तककूटनैतिक संबंध समाप्त ही रहे
- 1981सीमा विवादों पर वार्ताओं की शृंखला शुरू
- 1988दिसम्बर — राजीव गांधी का चीन दौरा; सुधार के प्रयासों को बढ़ावा
- 1998भारत का परमाणु हथियार परीक्षण — फिर भी संपर्क कम नहीं हुआ
- 1999इस वर्ष सेव्यापार 30 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है
33.8 करोड़ → 84 अरब
2017 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार — 1992 में यह 33 करोड़ 80 लाख डॉलर था
अब क्या बदला है
- ★“अब इनके संबंधों का रणनीतिक ही नहीं, आर्थिक पहलू भी है।”
- ★“दोनों ही खुद को विश्व-राजनीति की उभरती शक्ति मानते हैं और दोनों ही एशिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहेंगे।”
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विज्ञान-तकनीक में सहयोग, और व्यापार के लिए सीमा पर चार पोस्ट खोलने के समझौते।
- विदेशों में ऊर्जा सौदा हासिल करने जैसे विभेदकारी मसलों पर भी सहयोग।
- ★WTO जैसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों के संबंध में एक जैसी नीतियाँ।
2018 में मोदी चीन गए; 2019 में शी जिनपिंग भारत आए।
विवाद के मुद्दे
| मुद्दा | पाठ्यपुस्तक क्या कहती है |
|---|---|
| पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम | “पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में भी चीन को मददगार माना जाता है।” |
| बांग्लादेश और म्यांमार | चीन के सैनिक संबंध “दक्षिण एशिया में भारतीय हितों के खिलाफ माने जाते हैं।” |
| सीमा-विवाद | हाल की गिरावट का पहला कारण |
| चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा | दूसरा कारण |
| आतंकवाद पर रुख़ | संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद विरोधी भारतीय प्रस्ताव के विरुद्ध चीन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन |
और फिर भी — पाठ का संतुलन-वाक्य
पर इसमें से कोई भी मुद्दा दोनों मुल्कों में टकराव करवा देने लायक नहीं माना जाता। इस बात का एक प्रमाण यह है कि इन चीजों के बने रहने के बावजूद सीमा विवाद सुलझाने की बातचीत और सैन्य स्तर पर सहयोग का कार्यक्रम जारी है।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 26
5 | जापान और दक्षिण कोरिया | दो और वैकल्पिक केंद्र
जापान — ताकत
संसाधन कम, प्रगति ज्यादा
- सोनी, पैनासोनिक, कैनन, सुजुकी, होंडा, ट्योटा और माज्दा — उच्च प्रौद्योगिकी के उत्पाद।
- ★“जापान के पास प्राकृतिक संसाधन कम हैं और वह ज्यादातर कच्चे माल का आयात करता है” — फिर भी दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बड़ी तेजी से प्रगति।
- 1964 में OECD का सदस्य; ★2017 में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।
- ★“एशिया के देशों में अकेला जापान ही समूह-7 के देशों में शामिल है।”
- ★संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में 10 प्रतिशत का योगदान — अंशदान में दूसरा सबसे बड़ा देश।
आबादी के लिहाज से विश्व में ग्यारहवाँ स्थान। परमाणु बम की विभीषिका झेलने वाला एकमात्र देश।
जापान का विरोधाभास — संविधान का अनुच्छेद 9
राष्ट्र के संप्रभु अधिकार के रूप में युद्ध को तथा अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में बल-प्रयोग अथवा धमकी से काम लेने के तरीके को जापान के लोग हमेशा के लिए त्याग करते हैं।
जापान का संविधान, अनुच्छेद 9 — NCERT, अध्याय 2, पृ. 27
जापान — और फिर भी
- 1951 से जापान का अमरीका के साथ सुरक्षा-गठबंधन है।
- ★सैन्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1 प्रतिशत — फिर भी सैन्य व्यय के लिहाज से विश्व में सातवाँ स्थान।
- आसीमो — विश्व का सबसे अत्याधुनिक मानवरूपी रोबोट।
पाठ का प्रश्न — “वैकल्पिक शक्ति-केंद्र के रूप में जापान कितना प्रभावकारी होगा?”
दक्षिण कोरिया — ‘हान नदी पर चमत्कार’
विभाजन से समृद्धि तक
- ★द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में कोरियाई प्रायद्वीप 38वें समानांतर के साथ-साथ विभाजित — दक्षिण कोरिया और उत्तरी कोरिया।
- 1950–53 का कोरियाई युद्ध और शीत युद्ध की गतिशीलता ने प्रतिद्वंद्विता तेज़ कर दी।
- ★17 सितंबर 1991 को दोनों कोरिया संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने।
- ★1960 के दशक से 1980 के दशक के बीच तेज़ी से आर्थिक विकास — “हान नदी पर चमत्कार”।
- 1996 में OECD का सदस्य; 2017 में ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था; सैन्य खर्च में दसवाँ स्थान।
सैमसंग, एलजी और हुंडई भारत में प्रसिद्ध हो गए हैं।
उच्च मानव विकास के कारण — दक्षिण कोरिया
| श्रेणी | कारक |
|---|---|
| मुख्य चार | सफल भूमि सुधार · ग्रामीण विकास · व्यापक मानव संसाधन विकास · तीव्र न्यायसंगत आर्थिक वृद्धि |
| अन्य | निर्यात उन्मुखीकरण · मजबूत पुनर्वितरण नीतियाँ · सार्वजनिक अवसंरचना विकास · प्रभावी संस्थाएँ और शासन |
| HDI रैंक | 18 (मानव विकास रिपोर्ट 2016) |
6 | निचोड़ | एक सवाल, तीन उत्तर
यूरोपीय संघ बनाम आसियान — एक स्लाइड में
| कसौटी | यूरोपीय संघ | आसियान |
|---|---|---|
| स्थापना / सदस्य | 1992 / 28 (प्रक्रिया 1951 से) | 1967 / दस |
| प्रकृति | अधिराष्ट्रीय — “विशाल राष्ट्र-राज्य की तरह” | जानबूझकर अधिराष्ट्रीय नहीं |
| शैली | संधि-आधारित, संस्थागत | ‘आसियान शैली’ — अनौपचारिक, टकरावरहित, सहयोगात्मक |
| संप्रभुता | सदस्य ताकत संघ को सौंपते हैं — और इसी पर विरोध है | राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान सर्वोपरि |
| साधन | यूरो · दूसरी सबसे बड़ी सेना · 335 परमाणु हथियार | कोई साझी मुद्रा नहीं, कोई सैन्य गठबंधन नहीं |
| मंच | यूरोपीय संसद, यूरोपीय परिषद् | ARF (1994) — एशिया का एकमात्र ऐसा मंच |
| कमज़ोरी | सदस्यों की अपनी विदेश-रक्षा नीति (इराक, यूरो, Brexit) | अर्थव्यवस्था अमरीका, EU और जापान से काफी छोटी |
पूरा अध्याय एक स्लाइड में
- सवाल — अकेली महाशक्ति वाली दुनिया में एक क्षेत्र अपनी जगह कैसे बनाए?
- यूरोप का उत्तर — संप्रभुता का हिस्सा साझा करो → 1948 → 1951 → 1957 → 1992 यूरोपीय संघ; अधिराष्ट्रीय।
- उसकी कीमत — इराक पर बँटवारा, यूरो पर नाराजगी, थैचर, और 2016 का Brexit (51.9%)।
- आसियान का उत्तर — संप्रभुता को हाथ मत लगाओ; बात करते रहो → 1967 बैंकॉक घोषणा, ‘आसियान शैली’, 2003 के तीन स्तंभ।
- चीन का उत्तर — अकेले चलो, पर धीरे-धीरे खुलो → 1978 खुले द्वार; 1982 खेती, 1998 उद्योग; शॉक थेरेपी नहीं।
- भारत कहाँ — 1991 लुक ईस्ट → 2014 एक्ट ईस्ट; चीन से 1962 का युद्ध और 2017 का 84 अरब डॉलर का व्यापार, दोनों।
- जापान और दक्षिण कोरिया — आर्थिक रूप से विशाल, सैनिक रूप से सीमित (अनुच्छेद 9; 1951 का गठबंधन)।
★तीनों रास्ते अलग थे, और तीनों काम कर गए — यही अध्याय का असली पाठ है।
और अध्याय का सबसे सधा हुआ वाक्य
राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के वैकल्पिक केंद्र कुछ हद तक अमरीका के प्रभुत्व को सीमित करेंगे।
NCERT, अध्याय 2, पृ. 15 — ‘सीमित करेंगे’, ‘हटा देंगे’ नहीं