अध्याय 3जल संसाधन

पाठ योजना16 मिनट

कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल) · पुस्तक: समकालीन भारत–2 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 19–29 · कुल कालांश: 7 (+1 पुनरावृत्ति) · माध्यम: हिंदी

★यह पूरी पुस्तक का सबसे ‘राजस्थानी’ अध्याय है। टाँका, खादीन, जोहड़, पालर पानी, बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, इंदिरा गांधी नहर — सब इसी में हैं। RBSE की परीक्षा में इस अध्याय से सबसे ज़्यादा प्रश्न आते हैं, इसलिए इसे सबसे ज़्यादा समय दीजिए।


अधिगम प्रतिफल (इस अध्याय के बाद विद्यार्थी क्या कर पाएगा)

#प्रतिफल
1बता पाएगा कि जल नवीकरण योग्य संसाधन क्यों है, और फिर भी उसकी कमी क्यों होती है।
2जल दुर्लभता के तीनों कारण (अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग, असमान वितरण) लिख पाएगा और मात्रात्मक तथा गुणात्मक दुर्लभता में अंतर कर पाएगा।
3इज़राइल-भारत की तुलना से यह सिद्ध कर पाएगा कि समस्या पानी की नहीं, प्रबंधन की है।
4बहुउद्देशीय परियोजना की परिभाषा, उसके आठों उद्देश्य और दो उदाहरण दे पाएगा।
5बाँधों के लाभ और हानि दोनों संतुलित रूप से लिख पाएगा।
6राजस्थान की टाँका-प्रणाली पूरी प्रक्रिया सहित समझा पाएगा — यह 120 शब्दों का पक्का प्रश्न है।
7भारत के मानचित्र पर प्रमुख बाँध और नदियाँ अंकित कर पाएगा।

कालांश 1 — जल जीवन देता भी है और लेता भी है

उद्देश्य: अध्याय की केंद्रीय बहस पहले ही दिन खड़ी कर देना।

प्रवेश गतिविधि (10 मिनट) —

  • पहले पृष्ठ 19 की चिंटू-पिंकी वाली बातचीत दो बच्चों से अभिनय करके पढ़वाइए।
  • फिर बोर्ड पर पिंकी का वाक्य लिखिए — “जल जीवन दे भी सकता है और ले भी सकता है।”
  • पूछिए — “जल जीवन कैसे देता है? और कैसे लेता है?” (दोनों तरफ़ के जवाब बोर्ड पर लिखिए — यही पूरे अध्याय का ढाँचा बन जाएगा।)

मुख्य शिक्षण (20 मिनट) —

  • “तीन-चौथाई धरातल जल से ढका है, परंतु प्रयोग योग्य अलवणीय जल का अनुपात बहुत कम है।”
  • जलीय चक्र समझाइए — “इसी से जल का नवीकरण सुनिश्चित होता है” (यह अभ्यास प्रश्न 2-i का सीधा उत्तर है)।
  • और फिर वह बड़ा सवाल बोर्ड पर लिखकर छोड़ दीजिए — “2025 में 20 करोड़ लोग जल की नितांत कमी झेलेंगे। क्यों?”

गृहकार्य: अपने घर में एक दिन में कहाँ-कहाँ पानी इस्तेमाल होता है, इसकी सूची बनाइए और अनुमान लगाइए कि कुल कितने लीटर लगा।

कालांश 2 — पानी की कमी असल में होती क्यों है

उद्देश्य: यह ग़लतफ़हमी तोड़ना कि पानी की कमी सिर्फ़ रेगिस्तान में होती है।

प्रवेश (5 मिनट) —

  • पूछिए — “पानी की कमी सुनते ही तुम्हारे दिमाग़ में क्या तस्वीर आती है?”
  • बच्चे रेगिस्तान और मटका उठाए औरतें बताएँगे। कहिए — “किताब भी यही कहती है।” और पृष्ठ 19 की वह पंक्ति पढ़वाइए।
  • फिर पलटकर कहिए — “पर किताब कहती है कि यह असली कारण नहीं है।”

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • तीन असली कारण बोर्ड पर — अतिशोषण · अत्यधिक प्रयोग · असमान वितरण।
  • चित्र 3.1 की कोलकाता वाली तस्वीर दिखाइए — 180 मिमी. बारिश में डूबा शहर, और एक लड़का सड़क के पानी से पीने का पानी भर रहा है।
  • पूछिए — “यहाँ पानी की कमी है या ज़्यादती?” बच्चे ख़ुद ‘गुणात्मक दुर्लभता’ तक पहुँच जाएँगे।
  • इज़राइल बनाम भारत की तालिका बोर्ड पर बनवाइए — 25 सेमी. बनाम 114 सेमी.।
  • और वह निष्कर्ष लिखवाइए — “वर्षा का जल नदी-नालों में तेज़ी से बहकर समुद्र में चला जाता है, जिससे लगभग नौ महीने पानी की कमी रहती है।”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. जल दुर्लभता के तीन मुख्य कारण बताइए।
  2. इज़राइल में 25 सेमी. वर्षा होकर भी जल का अभाव क्यों नहीं है?

गृहकार्य: पृष्ठ 21 का क्रियाकलाप — जल संरक्षण के लिए एक संक्षिप्त प्रस्ताव लिखिए।

कालांश 3 — भौमजल, प्रदूषण और सरकारी योजनाएँ

उद्देश्य: दुर्लभता के मात्रात्मक और गुणात्मक — दोनों पहलू पूरे करना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • निजी कुएँ-नलकूप → भौम जलस्तर गिरना → भोजन सुरक्षा ख़तरे में — यह शृंखला बोर्ड पर बनाइए।
  • औद्योगीकरण और शहरीकरण वाली छह-कड़ी शृंखला लिखवाइए।
  • फिर गुणात्मक दुर्लभता पर आइए — घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, कीटनाशक, उर्वरक।
  • तीनों योजनाएँ तालिका में —
    • जल जीवन मिशन — प्रति व्यक्ति 55 लीटर
    • अटल भूजल योजना — 7 राज्य (राजस्थान भी), 80 ज़िले, 229 ब्लॉक, 8220 ग्राम पंचायत, लगभग 37 प्रतिशत
    • (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना कालांश 5 में आएगी)

कक्षा-संवाद (10 मिनट) —

  • अटल जल की वह पंक्ति पढ़वाइए — योजना का मुख्य पहलू “जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना” है।
  • पूछिए — “सरकार कुआँ खोदने की जगह लोगों का व्यवहार बदलना क्यों चाहती है?” यह सवाल कक्षा को बहुत आगे ले जाता है।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. जल जीवन मिशन का लक्ष्य क्या है?
  2. मात्रात्मक और गुणात्मक जल दुर्लभता में अंतर बताइए।

गृहकार्य: अटल भूजल योजना के सातों राज्य याद करके आइए।

कालांश 4 — बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ: ‘आधुनिक भारत के मंदिर’

उद्देश्य: बाँधों का पक्ष पूरी ताक़त से रखना — आलोचना अगले कालांश में।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • पहले प्राचीन भारत वाला बॉक्स पढ़वाइए — श्रिंगवेरा, चन्द्रगुप्त मौर्य, भोपाल झील (11वीं सदी), हौज़ खास (14वीं सदी)।
  • कहिए — “बाँध बनाना हमारे लिए नयी बात नहीं है; दो हज़ार साल पुरानी बात है।”
  • बाँध की परिभाषा शब्दश: लिखवाइए, और वह ख़ास पंक्ति ज़रूर — “बाँध का अर्थ जलाशय से लिया जाता है न कि इसके ढाँचे से।”
  • आठों उद्देश्य बोर्ड पर लिखवाइए।
  • दो उदाहरण — भाखड़ा-नांगल (सतलुज-ब्यास) और हीराकुड (महानदी)।
  • और अंत में नेहरू का कथन बोर्ड पर बड़े अक्षरों में — “आधुनिक भारत के मंदिर।”

समापन (10 मिनट) —

  • दामोदर का भादु लोकगीत पढ़वाइए।
  • पूछिए — “इस गीत में लोग नदी से लड़ रहे हैं या विनती कर रहे हैं?”
  • फिर बताइए कि दामोदर को ‘शोक की नदी’ कहा जाता है — और यही वह नदी है जिस पर बाद में बाँध बने।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. बाँध की परिभाषा लिखिए।
  2. बहुउद्देशीय परियोजना के कोई पाँच उद्देश्य बताइए।

गृहकार्य: पृष्ठ 24 का मानचित्र देखकर उत्तर, मध्य, पूर्व और दक्षिण भारत के दो-दो बाँधों के नाम लिखिए।

कालांश 5 — और अब दूसरा पक्ष: बाँधों की आलोचना

उद्देश्य: यह सिखाना कि हर विकास के दो चेहरे होते हैं।

प्रवेश (5 मिनट) —

  • बोर्ड पर कल वाला नेहरू का वाक्य अब भी लिखा रहने दीजिए।
  • उसके नीचे लिखिए — “पर पिछले कुछ वर्षों में ये परियोजनाएँ परिनिरीक्षण और विरोध के विषय बन गई हैं।”

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • चारों पारिस्थितिक आलोचनाएँ क्रम से — प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध · तलछट जमा · नदी टुकड़ों में बँटी · वनस्पति डूबी।
  • तीसरी आलोचना पर रुकिए — “अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है।” पूछिए — “मछली को नदी में ऊपर क्यों जाना होता है?”
  • फिर सामाजिक पक्ष — फसल प्रारूप बदला, जलगहन फसलें, मृदाओं का लवणीकरण।
  • और सबसे बड़ी विडंबना बोर्ड पर बड़े अक्षरों में लिखिए —

    “जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे बाढ़ आने के कारण बन जाते हैं।”

  • दोनों ‘क्या आप जानते हैं?’ बॉक्स पढ़वाइए — सरदार सरोवर (चार राज्य; बाड़मेर-जालौर में 2,46,000 हेक्टेयर) और कृष्णा-गोदावरी विवाद।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना — और उसका नारा ‘प्रति बूंद अधिक फसल’।

कक्षा-संवाद (10 मिनट) — यह इस अध्याय की सबसे अच्छी बहस है

  • कक्षा को दो दलों में बाँटिए — “बड़े बाँध चाहिए” बनाम “बड़े बाँध नहीं चाहिए”।
  • हर दल को किताब से ही तर्क निकालने होंगे।
  • अंत में विजेता घोषित मत कीजिए। कहिए — “किताब ने भी नहीं किया।”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाली कोई चार हानियाँ बताइए। (अभ्यास प्रश्न 2-iii)
  2. सरदार सरोवर परियोजना से राजस्थान को क्या लाभ है?

गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2-iii — लाभ और हानियों की तुलना तालिका बनाकर लिखिए।

कालांश 6 — वर्षा जल संग्रहण: छोटे तरीक़े, बड़ा असर (सबसे महत्त्वपूर्ण कालांश)

उद्देश्य: राजस्थान के पारंपरिक ज्ञान पर गर्व और समझ, दोनों देना।

प्रवेश (5 मिनट) —

  • पूछिए — “तुम्हारे घर या गाँव में बारिश का पानी कहाँ जाता है?”
  • फिर कहिए — “तुम्हारे परदादा जानते थे कि उसका क्या करना है।”

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • पहले तालिका बनवाइए — गुल/कुल (हिमालय) · छत संग्रहण (राजस्थान) · बाढ़ जल वाहिकाएँ (बंगाल) · खादीन (जैसलमेर) · जोहड़ (अन्य)।
  • फिर टाँका पर पूरा समय दीजिए —
    • कहाँ — बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर
    • आकार — फलोदी में 6.1 × 4.27 × 2.44 मीटर
    • प्रक्रिया — छत → पाइप → टाँका
    • ★वह ख़ास बात ज़रूर बताइए — “वर्षा का पहला जल छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था और संग्रहित नहीं किया जाता था।”
    • पूछिए — “ऐसा क्यों?” बच्चे ख़ुद बता देंगे — क्योंकि पहली बारिश छत की गंदगी लाती है। और तब कहिए — “यह तुम्हारे परदादाओं को पता था।”
    • पालर पानी — प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप।
    • और वह अनोखी बात — टाँके के साथ भूमिगत कमरे, जो गर्मी में ठंडक देते थे।

समापन-संवाद (10 मिनट) —

  • वह ‘दुख की बात’ वाला अनुच्छेद पढ़वाइए — इंदिरा गांधी नहर के कारण टाँके कम हो रहे हैं।
  • पूछिए — “नहर आने से टाँके बंद हो रहे हैं। यह अच्छी बात है या बुरी?”
  • और वह मज़ेदार पंक्ति ज़रूर पढ़वाइए — कुछ घरों में टाँके अभी भी हैं “क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है।”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. टाँका क्या है और उसमें पहली बारिश का पानी क्यों नहीं भरा जाता?
  2. खादीन और जोहड़ में क्या समानता है?

गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3-i — “राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है?” — 120 शब्दों में लिखिए।

कालांश 7 — आज के उदाहरण: शिलांग, गंडाथूर, बाँस ड्रिप और तमिलनाडु

उद्देश्य: यह दिखाना कि पुराना ज्ञान आज भी काम कर रहा है।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • चित्र 3.4 की छह-चरणीय प्रक्रिया बोर्ड पर बनवाइए — PVC पाइप → रेत-ईंट से छनन → भूमिगत पाइप → हौज़ → अतिरिक्त जल कुएँ तक → भूमिगत जल का पुनर्भरण।
  • शिलांग — चेरापूँजी और मॉसिनराम से सिर्फ़ 55 किमी. दूर, फिर भी पीने के पानी की कमी; हर घर में छत संग्रहण; 15–25 प्रतिशत माँग की पूर्ति।
  • पूछिए — “यह किस बात को दोहरा रहा है?” (इज़राइल-भारत वाली बात — समस्या प्रबंधन की है।)
  • गंडाथूर (मैसूर, कर्नाटक) — 200 घर, 1,000 मिमी. वर्षा, 80 प्रतिशत दक्षता, 10,00,000 लीटर प्रति वर्ष; ‘वर्षा जल संपन्न गाँव’।
  • बाँस ड्रिप सिंचाई (मेघालय) — 200 वर्ष पुरानी, 18–20 लीटर, सैकड़ों मीटर दूर, अंत में 20–80 बूँद प्रति मिनट।
  • यहाँ रुककर कहिए — “200 साल पहले, बिना बिजली और बिना प्लास्टिक के, सिर्फ़ बाँस और गुरुत्वाकर्षण से ड्रिप सिंचाई। आज की आधुनिक ड्रिप सिंचाई भी यही काम करती है।”
  • और अंत में तमिलनाडु — जहाँ छत वर्षाजल संग्रहण क़ानूनन अनिवार्य है।

समापन (10 मिनट) —

  • बोर्ड पर दोबारा वही दो सवाल लिखिए जिनसे अध्याय शुरू हुआ था —
    • “बड़े बाँध या छोटे टाँके?”
    • “पानी की कमी है, या प्रबंधन की?”
  • अब बच्चों से जवाब माँगिए। इस बार वे दोनों तरफ़ के तर्क देंगे — और यही इस अध्याय की सफलता है।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. शिलांग का उदाहरण क्या सिद्ध करता है?
  2. बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली का वर्णन कीजिए।

गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3-ii — 120 शब्दों में लिखिए।

कालांश 8 (वैकल्पिक) — पुनरावृत्ति और मानचित्र-परीक्षा

  • फ्लैशकार्ड (फ़ाइल 06) से 15 मिनट की तेज़ मौखिक जाँच — विशेषकर आँकड़ों वाला समूह।
  • ख़ाली भारत के मानचित्र पर बाँध-परीक्षा (5 अंक)।
  • प्रश्न बैंक (फ़ाइल 05) का नमूना पत्र 1 कक्षा में हल करवाइए।

कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता

समस्याक्या कीजिए
आँकड़े बहुत सारे लगते हैंसिर्फ़ छह अनिवार्य रखिए — 25 और 114 सेमी. · 55 लीटर · 6.1×4.27×2.44 मीटर · 55 किमी. · 200 वर्ष। बाक़ी बाद में।
बाँधों के नाम और नदियाँ मिल जाती हैंसिर्फ़ दो जोड़ियाँ पक्की करवाइए — भाखड़ा-नांगल = सतलुज-ब्यास, हीराकुड = महानदी। और राजस्थान के तीन — राणा प्रताप सागर, गांधी सागर, कोटा बैराज (तीनों चंबल पर)।
लाभ और हानि दोनों याद नहीं रहतेकॉपी में दो कॉलम बनवाइए और हर कालांश में एक-एक बिंदु जुड़वाइए। अध्याय ख़त्म होते-होते तालिका पूरी हो जाएगी।
टाँका, खादीन, जोहड़ में उलझ जाते हैंतीन शब्द — टाँका = पीने का पानी (भूमिगत टैंक) · खादीन = खेत का गड्ढा (जैसलमेर) · जोहड़ = खेत का गड्ढा (अन्य क्षेत्र)।
‘गुणात्मक दुर्लभता’ समझ नहीं आतीएक वाक्य — “पानी है, पर पीने लायक़ नहीं।” और कोलकाता वाली तस्वीर दिखा दीजिए।
लंबे उत्तर लिखने में डर लगता है05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़्ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में।

शिक्षण-सामग्री

सामग्रीउपयोग
भारत का बड़ा भौतिक/राजनीतिक मानचित्रहर कालांश — विशेषकर 4, 5 और 8
पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 24 का मानचित्र (मुख्य नदियाँ और बाँध)कालांश 4 और 8
ख़ाली भारत के मानचित्र (छायाप्रति)कालांश 4 और 8
चिंटू-पिंकी संवाद (पृष्ठ 19)कालांश 1 का प्रवेश — अभिनय करवाइए
चित्र 3.1 की चारों तस्वीरेंकालांश 2 — विशेषकर कोलकाता वाली
चित्र 3.2 (हीराकुड बाँध)कालांश 4
भादु लोकगीत (पृष्ठ 22)कालांश 4 का समापन
चित्र 3.4 (छत वर्षाजल संग्रहण के दो आरेख)कालांश 7
चित्र 3.7 (बाँस ड्रिप सिंचाई के छह चित्र)कालांश 7
एक खाली बोतल और छन्नीकालांश 7 — छनन की प्रक्रिया दिखाने के लिए

मूल्यांकन-संकेतक

स्तरविद्यार्थी क्या कर रहा है
प्रारंभिकआँकड़े और नाम बता पाता है, पर कारण नहीं जोड़ पाता।
विकासशीलजल दुर्लभता के कारण बता पाता है, पर मात्रात्मक और गुणात्मक में अंतर नहीं कर पाता।
दक्षबाँधों के लाभ और हानि — दोनों पक्ष उदाहरण सहित लिख पाता है और मानचित्र पर बाँध दिखा पाता है।
उन्नतयह समझा पाता है कि समस्या पानी की नहीं प्रबंधन की है, और अपने ज़िले के जल-स्रोतों से अध्याय जोड़ पाता है।

शिक्षक के लिए अंतिम सुझाव

  • इस अध्याय में किसी एक पक्ष के साथ मत खड़े होइए। पाठ्यपुस्तक ख़ुद नेहरू का ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ भी लिखती है और बाँधों की हर आलोचना भी। बच्चों को दोनों देने दीजिए — परीक्षा में भी यही चाहिए।
  • राजस्थान इस अध्याय की रीढ़ है। टाँका, खादीन, जोहड़, पालर पानी, इंदिरा गांधी नहर, सरदार सरोवर (बाड़मेर-जालौर), अटल भूजल योजना, राणा प्रताप सागर-गांधी सागर-कोटा बैराज — हर बार रुककर कहिए, “यह अपने राज्य की बात है।”
  • पारंपरिक ज्ञान को ‘पुरानी बात’ मत कहिए। जब आप बताते हैं कि पहली बारिश का पानी क्यों फेंका जाता था, या बाँस से ड्रिप सिंचाई 200 साल पहले कैसे होती थी — तो बच्चों को अपने पूर्वजों पर गर्व होता है, और यही इस अध्याय का सबसे बड़ा उपहार है।
  • और आख़िरी कालांश में यह सवाल छोड़कर जाइए —

    “इज़राइल में 25 सेंटीमीटर बारिश होती है और पानी की कमी नहीं। हमारे यहाँ 114 सेंटीमीटर होती है और हर साल कहीं न कहीं सूखा। तो कमी किसकी है — पानी की, या हमारी?”