अध्याय 3समकालीन दक्षिण एशिया

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 29–44.

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स्रोत-चिह्न: ◆ प्राथमिक (सरकार/संयुक्त राष्ट्र/IMF/सचिवालय) · ◇ सशक्त द्वितीयक · 【पाठ】 NCERT का संदर्भ, जहाँ प्रासंगिक। पूरी सूची भाग XI में।

विषय-सूची

भागशीर्षक
Iकेंद्रीय प्रश्न
II‘दक्षिण एशिया’ — एक बनाई हुई श्रेणी
IIIराज्य-निर्माण की सात कहानियाँ
IV★★लोकतंत्र का वास्तविक रिकॉर्ड — 2026 तक अद्यतन
V★★संघर्ष की संरचना — और भारत-पाकिस्तान का 2025 का संकट
VIएकीकरण की कोशिशें — दक्षेस मृत, बिम्सटेक जीवित
VIIबाहरी शक्तियाँ
VIII★★आठ देश, आठ प्रोफ़ाइल — अगस्त 2026 की स्थिति
IXदस बहसें जिन पर परीक्षा में राय माँगी जाती है
X★★संयुक्त कालक्रम (2021–26), तथ्य-पट्टिका, भ्रमित युग्म और ‘सत्यापित नहीं हो सका’
XIस्रोत-सूची

भाग I — केंद्रीय प्रश्न

दक्षिण एशिया दुनिया का वह हिस्सा है जहाँ मानवता का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रहता है — और जो दुनिया के सबसे कम आपस में जुड़े क्षेत्रों में गिना जाता है।

यह विरोधाभास ही केंद्रीय प्रश्न है: जिन देशों की भाषाएँ मिलती हैं, भोजन मिलता है, संगीत और महाकाव्य साझे हैं, और जिनके बीच 1947 तक कोई सीमा ही नहीं थी — वे आपस में व्यापार क्यों नहीं करते?

इसके चार उप-प्रश्न हैं, और यह अध्याय चारों का उत्तर है:

  1. यह ‘क्षेत्र’ है क्या — और यह परिभाषा बनाता कौन है?
  2. यहाँ लोकतंत्र का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है — और क्या वह सुधर रहा है?
  3. एकीकरण क्यों नहीं हुआ — और उसका क्या विकल्प निकला?
  4. ★★2024–26 में भारत-पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और अफ़गानिस्तान में जो हुआ, वह इन तीनों उत्तरों को किस तरह बदलता या पुष्ट करता है?

भाग II — ‘दक्षिण एशिया’ — एक बनाई हुई श्रेणी

2.1 सीमाएँ

भौगोलिक रूप से यह भारतीय उपमहाद्वीप है — उत्तर में हिमालय, दक्षिण में हिंद महासागर, पश्चिम में अरब सागर और पूरब में बंगाल की खाड़ी से घिरा। यह एक अलग विवर्तनिक प्लेट पर स्थित है, जिसकी टक्कर से हिमालय बना — यानी इसकी अलग पहचान भूगर्भीय भी है।

2.2 पर सूची स्थिर नहीं है

सूचीकौन शामिल
पारंपरिक ‘सात’बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका
दक्षेस के आठ★+ अफ़गानिस्तान (2007 से)
कभी-कभीम्यांमार, तिब्बत, ईरान का पूर्वी हिस्सा — और बिम्सटेक के ज़रिये म्यांमार अब सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है
! कभी नहींचीन — भले ही वह क्षेत्र का सबसे बड़ा पड़ोसी है और इसकी हर बड़ी घटना को प्रभावित करता है

★इसलिए ‘दक्षिण एशिया’ एक राजनीतिक श्रेणी भी है, केवल भौगोलिक नहीं। यह परिभाषा बनाता कौन है? — प्रायः बाहरी शक्तियाँ और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, जिन्हें इस क्षेत्र से निपटने के लिए एक नाम चाहिए था। यही कारण है कि सूची बदलती रहती है, और यही कारण है कि म्यांमार जैसे देश बिना दक्षेस-सदस्य बने भी क्षेत्र की राजनीति में केंद्रीय हो जाते हैं (भाग VIII देखिए)।

2.3 साझी विरासत, बँटा हुआ वर्तमान

  • भाषा: इंडो-आर्य और द्रविड़ — दोनों परिवार सीमाओं के आर-पार फैले हैं। बंगाली भारत और बांग्लादेश दोनों में; पंजाबी भारत और पाकिस्तान दोनों में; तमिल भारत और श्रीलंका दोनों में।
  • धर्म: हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म — चारों का जन्म इसी उपमहाद्वीप में; और इस्लाम के अनुयायियों की संख्या यहाँ किसी भी अन्य क्षेत्र से अधिक है।
  • राज्य-निर्माण: 1947 से पहले अधिकांश हिस्सा एक ही प्रशासनिक ढाँचे में था — जिसमें रेल, डाक, मुद्रा और कानून की व्यवस्था साझी थी। ◇

! और यही समस्या की जड़ भी है: जहाँ यूरोप ने अलग राष्ट्रों को जोड़कर एकीकरण किया, वहाँ दक्षिण एशिया ने एक इकाई को तोड़कर राष्ट्र बनाए। एकीकरण यहाँ ‘निर्माण’ नहीं, ‘पुनर्निर्माण’ है — और वह कहीं कठिन है।

भाग III — राज्य-निर्माण की सात कहानियाँ

देशस्वतंत्रताप्रारंभिक व्यवस्था2026 तक की व्यवस्था
भारत15 अगस्त 1947संसदीय लोकतांत्रिक गणराज्य (1950)वही
पाकिस्तान14 अगस्त 1947अधिराज्य → इस्लामी गणराज्य (1956)संसदीय; सेना का गहरा प्रभाव — फरवरी 2024 के चुनाव में भी दिखा
श्रीलंका4 फरवरी 1948 (तब सिलोन)अधिराज्य → गणराज्य (1972)★अर्ध-अध्यक्षात्मक; 2024 से वामपंथी NPP-नीत सरकार
नेपालकभी उपनिवेश नहींराजतंत्र★★संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य (2008); मार्च 2026 से RSP-नीत सरकार, सबसे युवा PM
भूटानकभी उपनिवेश नहींपूर्ण राजतंत्रसंवैधानिक राजतंत्र (2008); जनवरी 2024 से PDP-नीत सरकार
मालदीव1965सल्तनत → गणराज्य (1968)★अध्यक्षात्मक; 2023 से मुइज़्ज़ू, 2025-26 में भारत-नीति में सुधार
बांग्लादेश★16 दिसंबर 1971संसदीय★★संसदीय; अगस्त 2024–फरवरी 2026 अंतरिम सरकार; फरवरी 2026 से निर्वाचित BNP सरकार
◇

3.1 दो अनुपनिवेशित देश★

नेपाल और भूटान कभी उपनिवेश नहीं रहे — यह दक्षिण एशिया की सबसे कम चर्चित बात है। इसीलिए इनका राज्य-निर्माण बाहर से थोपे गए ढाँचे से नहीं, भीतर से हुआ — और इसीलिए राजतंत्र से लोकतंत्र तक की यात्रा इनमें सबसे देर से पूरी हुई (दोनों 2008 में)। ★★यहाँ तक कि 2025 में नेपाल में राजतंत्र-बहाली की माँग पर हिंसक प्रदर्शन भी हुए — यह दिखाता है कि यह यात्रा अभी भी पूरी तरह तय नहीं है।

3.2 दो विभाजन, एक ही क्षेत्र★

  • 1947 — धर्म के आधार पर विभाजन (भारत–पाकिस्तान);
  • ★1971 — भाषा और प्रतिनिधित्व के आधार पर विभाजन (पाकिस्तान–बांग्लादेश)।

★★1971 इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि उसने सिद्ध किया कि साझा धर्म राष्ट्र बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं। यह ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ की सबसे बड़ी व्यावहारिक परीक्षा थी।

भाग IV — लोकतंत्र का वास्तविक रिकॉर्ड — 2026 तक अद्यतन★★

4.1 चार अलग-अलग रास्ते

प्रकारदेशविवरण
निरंतर लोकतंत्रभारत, श्रीलंकाआज़ादी से अब तक चुनाव कभी नहीं रुके (भारत में 1975–77 का आपातकाल अपवाद)
लोकतंत्र-सेना का चक्रपाकिस्तान, बांग्लादेशबार-बार सैनिक/असंवैधानिक हस्तक्षेप, बार-बार जन-आंदोलन से वापसी
राजतंत्र से लोकतंत्रनेपाल, भूटानदोनों 2008 में — एक क्रांति से, दूसरा राजा की अपनी पहल से; ★पर नेपाल में 2025 में उलटी दिशा में भी आंदोलन हुआ
सल्तनत से गणराज्यमालदीव1968 गणराज्य; 2005 बहुदलीय; 2023 से भारत-विरोधी से भारत-समर्थक की ओर वापसी

4.2 एक पैटर्न जो बार-बार दोहराता है — ‘सड़क से लोकतंत्र’★★

दक्षिण एशिया में सत्ता-परिवर्तन का एक विशिष्ट रूप है — निर्वाचन के बीच में ही, सड़क के दबाव से सत्ता का बदलना।

वर्षदेशक्या हुआ
1990बांग्लादेशछात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से जेनरल इरशाद का इस्तीफा
1990नेपालजन-आंदोलन से नया लोकतांत्रिक संविधान
अप्रैल 2006नेपालसात दलों का गठबंधन + माओवादी; राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद बहाल की
2022श्रीलंकाआर्थिक पतन के बाद जन-आंदोलन; राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़ना पड़ा ◇
★★अगस्त 2024बांग्लादेशछात्र-आंदोलन से प्रधानमंत्री शेख हसीना का इस्तीफा (5 अगस्त); मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ◇
★★सितंबर 2025नेपाल‘जेन-ज़ी’ आंदोलन — सोशल मीडिया प्रतिबंध से भड़का; 8 सितंबर को 19 मृत; 9 सितंबर को प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा; पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री ◇

और फिर, पहली बार, यह पैटर्न पूरा चक्र होकर मतपेटी तक लौटा —

वर्षदेशक्या हुआ
★★फरवरी 2026बांग्लादेश13वाँ संसदीय चुनाव — BNP (तारिक़ रहमान) की भारी जीत; यूनुस का प्रस्थान; निर्वाचित सरकार की वापसी ◇
★★मार्च 2026नेपालRSP (बालेन शाह) की ऐतिहासिक जीत; कार्की का अंतरिम कार्यकाल समाप्त; नेपाल के सबसे युवा निर्वाचित प्रधानमंत्री ◇

★★इससे तीन निष्कर्ष निकलते हैं — (1) लोकतांत्रिक आकांक्षा इस क्षेत्र में असाधारण रूप से मज़बूत है। जनता हर बार सत्ता को झुका देती है, चाहे वह सेना हो, राजा हो या निर्वाचित सरकार। (2) लोकतांत्रिक संस्थाएँ उतनी मज़बूत नहीं हैं। क्योंकि यदि होतीं, तो बदलाव पहले-पहल चुनाव से आता, सड़क से नहीं। ★★(3) पर 2026 में एक नया चरण दिखा — सड़क से आया परिवर्तन आगे चलकर चुनाव से वैध बना दिया गया। बांग्लादेश और नेपाल — दोनों में अंतरिम सरकारों ने तय समय-सीमा के भीतर सत्ता निर्वाचित सरकारों को सौंपी। यह इस क्षेत्र के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अपेक्षाकृत नयी और आशाजनक बात है — 1975 के बांग्लादेश या 1999 के पाकिस्तान में सैनिक-शासकों ने ऐसा तुरंत नहीं किया था।

4.3 जन-समर्थन का प्रमाण

पाँच बड़े देशों के 19 हजार से अधिक नागरिकों के सर्वेक्षण (स्टेट ऑव डेमोक्रेसी इन साउथ एशिया, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2007) में — 88% ने माना कि लोकतंत्र उनके देश के लिए उपयुक्त है।

★इसका सैद्धांतिक महत्व बड़ा है। बीसवीं सदी के मध्य तक यह मान्यता प्रबल थी कि लोकतंत्र के लिए पहले समृद्धि और साक्षरता चाहिए (लिप्सेट की ‘आधुनिकीकरण थ्योरी’)। दक्षिण एशिया — और विशेषकर भारत — इस थ्योरी का सबसे बड़ा अपवाद है। ◇

4.4 अपवाद जो नियम को जटिल बनाता है — नेपाल का राजतंत्र-समर्थक आंदोलनध्यान

ठीक उसी वर्ष जब नेपाल ने जेन-ज़ी आंदोलन से नया, सबसे युवा नेतृत्व चुना, उसी वर्ष के आरंभ में (मार्च 2025) राजतंत्र-बहाली की माँग को लेकर बड़े हिंसक प्रदर्शन भी हुए — 9 मार्च को ~10,000 समर्थकों का जमावड़ा, 28 मार्च को दंगे जिनमें 2 मृत। ◇

★★इससे ‘लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य है’ वाला निष्कर्ष पूरी तरह सरल नहीं रहता — यह दिखाता है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएँ बार-बार निराश करती हैं, तो कुछ नागरिक विकल्प के रूप में अतीत की ओर भी देखते हैं। पर संवैधानिक बाधा (दो-तिहाई बहुमत) और मार्च 2026 के चुनाव-परिणाम — दोनों दिखाते हैं कि यह अल्पमत की आवाज़ रही, बहुमत की नहीं।

भाग V — संघर्ष की संरचना — और भारत-पाकिस्तान का 2025 का संकट★★

5.1 भूगोल ही ढाँचा है★

भारत हर दूसरे दक्षिण एशियाई देश की सीमा से लगता है — पर उनमें से कोई दो देश (अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान को छोड़कर) आपस में सीमा साझा नहीं करते। इसका सीधा परिणाम यह है कि —

  • हर द्विपक्षीय विवाद में एक पक्ष भारत होता है;
  • हर बहुपक्षीय बातचीत वास्तव में ‘भारत बनाम शेष’ बन जाती है;
  • और भारत की जनसंख्या तथा अर्थव्यवस्था बाकी सबके योग से भी बड़ी है — यानी असममितता संरचनात्मक है, नीतिगत नहीं।

5.2 चार प्रकार के संघर्ष

प्रकारउदाहरण
सीमा-विवादभारत-पाकिस्तान (कश्मीर), भारत-चीन, भारत-नेपाल (कालापानी)
नदी-जलसिंधु (भारत-पाक), गंगा और तीस्ता (भारत-बांग्लादेश), महाकाली (भारत-नेपाल)
जनसंख्या-आवागमनरोहिंग्या (म्यांमार → बांग्लादेश, भारत), लोत्शाम्पा (भूटान → नेपाल), बांग्लादेशी आप्रवास
आंतरिक संघर्ष का बाहरी असरश्रीलंका का तमिल संघर्ष → भारत; नेपाल का माओवादी आंदोलन → भारत; अफ़गानिस्तान → पाकिस्तान; ★म्यांमार का गृहयुद्ध → भारत का पूर्वोत्तर

5.3 भारत-पाकिस्तान — पूरा संघर्ष-कालक्रम, 1947 से 2025 तक★★

2025 के संकट को समझने के लिए उससे पहले का पूरा इतिहास जानना ज़रूरी है — यह वह इतिहास है जो हर बार पीछे लौटकर देखा जाता है।

वर्षघटनापरिणाम
1947–48विभाजन के तुरंत बाद कश्मीर पर पहला युद्धकश्मीर के दो हिस्से — भारत का जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK); नियंत्रण-सीमा रेखा (LoC) बनी
सितंबर 1960★सिंधु-जल संधि पर हस्ताक्षर (विश्व बैंक की मध्यस्थता में, कराची)पूर्वी नदियाँ भारत को, पश्चिमी नदियाँ पाकिस्तान को — 65 वर्ष तक कायम रही
1965दूसरा युद्धकोई निर्णायक परिणाम नहीं; 1966 का ताशकंद समझौता (सोवियत मध्यस्थता)
1971तीसरा युद्ध — बांग्लादेश-मुक्ति★★पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना; भारत की निर्णायक जीत
जुलाई 1972शिमला-समझौतायुद्धविराम-रेखा ‘LoC’ औपचारिक बनी; विवादों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाने का सिद्धांत तय
मई 1998★★दोनों देशों के परमाणु-परीक्षण (भारत — पोखरण; पाकिस्तान — चगाई)क्षेत्र औपचारिक रूप से परमाणु-शक्ति-संपन्न बना
फरवरी 1999वाजपेयी की लाहौर बस-यात्रा; शांति-घोषणापत्र—
★जून–जुलाई 1999करगिल-युद्ध (‘ऑपरेशन विजय’)लाहौर घोषणापत्र के कुछ ही महीने बाद — भारत की सैन्य बढ़त, पाकिस्तानी सेना पीछे हटी
2001आगरा-शिखर वार्ता विफल—
2008मुंबई आतंकी हमले (26/11)भारत-पाक संबंधों में लंबे समय तक तनाव
2016उड़ी हमला19वें दक्षेस शिखर सम्मेलन का बहिष्कार और रद्द होना
फरवरी 2019पुलवामा हमला और बालाकोट हवाई-कार्रवाई1971 के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना का सीमा-पार हमला (2025 से पहले)
★★अप्रैल–मई 2025पहलगाम हमला → सिंधु-जल संधि स्थगन → ऑपरेशन सिंदूर → युद्धविराम(विस्तार से 5.4 और भाग VIII.1 में)

★★इस पूरे कालक्रम से एक पैटर्न स्पष्ट होता है — हर बड़े सैन्य टकराव (1965, 1971, 1999, 2019, 2025) से पहले एक शांति-प्रयास हुआ (ताशकंद, शिमला, लाहौर, आगरा) — और हर टकराव के बाद फिर एक नया शांति-प्रयास शुरू हुआ। यह चक्र बार-बार दोहराता है, टूटता नहीं — पर हल भी नहीं होता।

5.4 2025 — जब सबसे टिकाऊ व्यवस्था भी हिली★★

सिंधु-जल संधि (सितंबर 1960) दुनिया की सबसे टिकाऊ जल-संधियों में गिनी जाती थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई इस संधि में पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को और पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को दी गईं। यह 1965, 1971 और 1999 — तीनों युद्धों के बावजूद चलती रही। ◇

★★यह 2025 में बदल गया। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए — भारत ने इसके लिए ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ और अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया। 23 अप्रैल 2025 को भारत ने सिंधु-जल संधि को ‘स्थगन में’ रखने की घोषणा की — 65 वर्षों में पहली बार। ◇

इसके बाद 6–10 मई 2025 को भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के बाद का सबसे बड़ा सैन्य टकराव हुआ — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (भारत के हवाई हमले) और पाकिस्तान का जवाबी ‘बुनियान-उम-मरसूस’। 10 मई को DGMO-स्तर की सीधी बातचीत से युद्धविराम हुआ, जो अगस्त 2026 तक ज़मीनी स्तर पर कायम है, हालाँकि दोनों देशों के बीच व्यापार, वीज़ा और उच्चायुक्त-स्तरीय संबंध पूरी तरह जमे हुए हैं। ◇ (पूर्ण विवरण भाग VIII.1 में)

★यही इस पूरे विषय की सबसे आशाजनक और सबसे चिंताजनक बात एक साथ है — तकनीकी, स्पष्ट और तीसरे पक्ष द्वारा निगरानी वाली व्यवस्थाएँ राजनीतिक टकराव से बचती रही हैं, पर 2025 ने दिखाया कि गहरे संकट में वे भी सुरक्षित नहीं रहतीं।

भाग VI — एकीकरण की कोशिशें — दक्षेस मृत, बिम्सटेक जीवित

6.1 दक्षेस (SAARC)

मदतथ्य
स्थापना★8 दिसंबर 1985, ढाका — इसीलिए 8 दिसंबर ‘सार्क चार्टर दिवस’
संस्थापकसात देश
आज सदस्यआठ — अफ़गानिस्तान 2007 में
सचिवालय★काठमांडू
चार्टर की विशेषता! द्विपक्षीय और विवादास्पद मुद्दे एजेंडे से बाहर — और फिर भी वे हावी रहे
व्यापार-समझौतेSAPTA (1993) — वरीयता; SAFTA — 2002 दस्तख़त, फरवरी 2004 हस्ताक्षर (12वाँ सम्मेलन, इस्लामाबाद), 1 जनवरी 2006 प्रभावी
18वाँ शिखर सम्मेलन26–27 नवंबर 2014, काठमांडू
★★19वाँ शिखर सम्मेलननवंबर 2016, इस्लामाबाद — रद्द। उड़ी हमले के बाद भारत ने बहिष्कार किया; फिर बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और भूटान भी हटे ◇
!! अगस्त 2026 तकदस वर्ष से अधिक — कोई शिखर सम्मेलन नहीं; विश्लेषक इसे “संस्थागत जीवन-रक्षक प्रणाली पर” बताते हैं; यूनुस (बांग्लादेश) और मालदीव की ओर से 2024-26 में पुनरुद्धार की माँगें आई हैं, पर कोई तारीख तय नहीं

6.2 विकल्प — बिम्सटेक, जो 2024-25 में सचमुच सक्रिय हो गया★★

मदतथ्य
पूरा नामबंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल
स्थापना1997, बैंकॉक घोषणा
सदस्य — सातबांग्लादेश · भूटान · भारत · म्यांमार · नेपाल · श्रीलंका · थाईलैंड
★मुख्य बात! पाकिस्तान नहीं; म्यांमार और थाईलैंड हैं
सचिवालयढाका
★★चार्टर लागू20 मई 2024 — कानूनी व्यक्तित्व मिला ◆
★★छठा शिखर सम्मेलन2–4 अप्रैल 2025, बैंकॉक — 7 वर्षों में पहला प्रत्यक्ष सम्मेलन; “बैंकॉक विज़न 2030” अपनाया गया ◆

★★यह भारत की रणनीति का सार है: जहाँ दक्षेस भारत-पाक विवाद में जकड़ा है, वहाँ बिम्सटेक दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है — और ठीक उसी दशक में जब दक्षेस निष्क्रिय हुआ, बिम्सटेक ने अपना चार्टर पाया और 7 वर्षों बाद पहला शिखर सम्मेलन किया। यह दक्षिण एशियाई सहयोग का ‘पता बदलना’ है, समाप्त होना नहीं।

6.3 आर्थिक एकीकरण का हिसाबध्यान

  • दक्षिण एशिया का आंतरिक व्यापार उसके कुल व्यापार का एक बहुत छोटा हिस्सा है — विश्व बैंक और अन्य संस्थाएँ इसे विश्व के सबसे कम एकीकृत क्षेत्रों में गिनती हैं। ◇
  • तुलना: आसियान में यह हिस्सा कहीं अधिक है, और यूरोपीय संघ में तो अधिकांश व्यापार आंतरिक है।
  • कारण — भारत-पाक व्यापार पूर्णतः बंद (2025 के बाद और भी सख्ती से), गैर-शुल्क बाधाएँ, परिवहन-संपर्क की कमी, वीज़ा व्यवस्था, और दक्षेस का ठप होना।

★इसलिए SAFTA की विफलता शुल्क की नहीं, अवसंरचना और विश्वास की विफलता है।

भाग VII — बाहरी शक्तियाँ

शक्तिभूमिका, 2026 तक अद्यतन
चीनपाकिस्तान से रणनीतिक साझेदारी; बेल्ट एंड रोड के तहत CPEC; श्रीलंका (कोलंबो पोर्ट सिटी, ~4.7 अरब डॉलर का ऋण), ★बांग्लादेश (यूनुस की पहली विदेश-यात्रा चीन, ~2.1 अरब डॉलर निवेश), नेपाल और मालदीव (मुक्त व्यापार समझौता, जनवरी 2025 से प्रभावी) में बड़ी अवसंरचना-परियोजनाएँ; अफ़गानिस्तान में तालिबान को मान्यता देने वाला अकेला देश (जुलाई 2025)
★★अमरीकाशीतयुद्ध में पाकिस्तान से गठबंधन; अफ़गान युद्ध (2001–21); मई 2025 के भारत-पाक युद्धविराम में मध्यस्थता का दावा (राष्ट्रपति ट्रम्प, जिसे भारत ने नकारा — विवाद अनसुलझा); आज भारत से सामरिक साझेदारी और क्वाड
खाड़ी देशदक्षिण एशियाई प्रवासी श्रमिकों का सबसे बड़ा गंतव्य — और इसीलिए प्रेषण (remittances) का सबसे बड़ा स्रोत, जो नेपाल और बांग्लादेश जैसी अर्थव्यवस्थाओं का आधार है
जापान और यूरोपीय संघविकास-सहायता और अवसंरचना-वित्त के बड़े स्रोत; जापान श्रीलंका के ऋण-पुनर्रचना में प्रमुख भागीदार (पेरिस फ़ोरम, जून 2024)
रूस★★जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने वाला विश्व का पहला देश — एक नयी, कम-चर्चित भूमिका

★इस क्षेत्र की एक स्थायी विडंबना: जो देश आपस में बात नहीं कर पाते, वे अपने विवाद बाहरी राजधानियों में सुलझवाते हैं — 1966 का ताशकंद समझौता सोवियत मध्यस्थता में हुआ था; 1960 की सिंधु-जल संधि विश्व बैंक की; श्रीलंका की शांति-वार्ताओं में नार्वे मध्यस्थ था; और 2025 के भारत-पाक युद्धविराम में भी बाहरी भूमिका का दावा हुआ — भले ही एक पक्ष ने उसे नकार दिया हो।

भाग VIII — आठ देश, आठ प्रोफ़ाइल — अगस्त 2026 की स्थिति★★

8.1 भारत–पाकिस्तान★★

2025 का संकट क्षेत्र की सबसे बड़ी सुरक्षा-घटना रही। 22 अप्रैल 2025 — पहलगाम हमला, 26 मृत। 23 अप्रैल — भारत ने सिंधु-जल संधि स्थगित की, सीमा-व्यापार-वीज़ा बंद किए। 6–7 मई — भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान/PoK के 9 ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। 7–10 मई — ड्रोन-मिसाइल टकराव, दोनों ओर के हवाई-अड्डों पर हमले। 10 मई — DGMO-स्तरीय बातचीत से युद्धविराम। हताहतों और विमान-क्षति के आँकड़े दोनों ओर से विवादित हैं; अमरीकी मध्यस्थता का दावा भारत ने सार्वजनिक रूप से नकारा। अगस्त 2026 तक संबंध “गहरी जमावट” में हैं — युद्धविराम कायम, पर व्यापार-वीज़ा-उच्चायुक्त सब बंद; अनौपचारिक ट्रैक-2 वार्ता जारी, औपचारिक सफलता अब तक नहीं। ◇

8.2 बांग्लादेश★★

जुलाई-अगस्त 2024 का छात्र-नेतृत्व आंदोलन (कोटा-सुधार से शुरू, राज्य-हिंसा से भड़का — UN के अनुसार ~1,400 मृत) ने 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को इस्तीफे और भारत-पलायन पर मजबूर किया। नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस ने 8 अगस्त 2024 को ‘मुख्य सलाहकार’ पद संभाला। 12 मई 2025 — अवामी लीग पर प्रतिबंध और पंजीकरण-निलंबन। 17 नवंबर 2025 — अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को (अनुपस्थिति में) मृत्युदंड सुनाया। 12 फरवरी 2026 — चुनाव में BNP (तारिक़ रहमान) की भारी जीत; 16-17 फरवरी को यूनुस का प्रस्थान और निर्वाचित सरकार की वापसी — अगस्त 2024 के बाद पहली। भारत ने प्रत्यर्पण-माँग को “समीक्षाधीन” बताया है; चुनाव-परिणाम के बाद संबंधों में सतर्क सुधार शुरू हुआ है, जबकि बांग्लादेश की चीन-पाकिस्तान से निकटता भी इसी दौर में बढ़ी। ◇

8.3 श्रीलंका★★

अप्रैल 2022 की संप्रभु ऋण-चूक और राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के पलायन के बाद, मार्च 2023 का IMF कार्यक्रम (~3 अरब डॉलर) और जून 2024 का द्विपक्षीय ऋण-पुनर्रचना समझौता श्रीलंका को संकट से बाहर लाया। सितंबर 2024 में वामपंथी अनुरा कुमारा दिसानायके (NPP/JVP) राष्ट्रपति चुने गए — पहली बार किसी JVP-संबद्ध नेता की जीत; नवंबर 2024 में NPP को संसद में दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिला। अप्रैल 2025 में मोदी की यात्रा से रक्षा-सहयोग समझौता हुआ। अगस्त 2026 तक श्रीलंका अभी भी IMF कार्यक्रम में है, पर अर्थव्यवस्था स्थिर वृद्धि (~3-5%) पर है — यह क्षेत्र का इकलौता उदाहरण है जहाँ आर्थिक पतन के बाद सत्ता पूरी तरह संवैधानिक-चुनावी रास्ते से बदली। ◇

8.4 नेपाल★★

सितंबर 2025 का ‘जेन-ज़ी’ आंदोलन (सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार-विरोध से भड़का, 19 मृत) ने 9 सितंबर को प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफे पर मजबूर किया; पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की — नेपाल की पहली महिला सरकार-प्रमुख — अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं, छह महीने में चुनाव के जनादेश के साथ। 5 मार्च 2026 के चुनाव में रैपर-से-मेयर बने बालेंद्र ‘बालेन’ शाह की राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी ने 165 में से 122 सीटें जीतीं — नेपाल के इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत; 27 मार्च को शाह नेपाल के सबसे युवा (35 वर्ष) प्रधानमंत्री बने। !! इसी दौरान, मार्च 2025 में उलटी दिशा के प्रदर्शन भी हुए — राजतंत्र-बहाली की माँग पर, जिनमें 2 मृत — पर संवैधानिक बाधा और चुनाव-परिणाम ने दिखाया कि यह अल्पमत की आवाज़ थी। ◇

8.5 भूटान★

जनवरी 2024 के चुनाव में शेरिंग तोबगे की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद, भूटान क्षेत्र का सबसे स्थिर देश बना रहा। इसकी सबसे बड़ी नई पहल — गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी, एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र जो 2035 तक विकसित होना है। भारत-भूटान जल-विद्युत सहयोग 2025-26 में और गहरा हुआ — पुनातसांगछू-II परियोजना का उद्घाटन नवंबर 2025 में मोदी की यात्रा के दौरान हुआ। ◇

8.6 मालदीव★★

मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने 2023 में स्पष्ट भारत-विरोधी ‘इंडिया आउट’ प्रचार पर जीत हासिल की और मई 2024 तक सभी भारतीय सैन्य-कर्मियों को हटवा दिया, जबकि चीन से रणनीतिक साझेदारी गहरी की। पर 2025 में तस्वीर बदलने लगी — जुलाई 2025 में मोदी की मालदीव-यात्रा और ~76 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता से संबंध “व्यापक आर्थिक और समुद्री-सुरक्षा साझेदारी” तक उन्नत हुए, और मुइज़्ज़ू ने पहलगाम हमले की निंदा भी की। अगस्त 2026 तक मालदीव भारत और चीन — दोनों के साथ समानांतर, संतुलित संबंध रख रहा है। ◇

8.7 अफ़गानिस्तान★★

15 अगस्त 2021 को काबुल तालिबान के हाथों गिरा; 30 अगस्त को अमरीकी सेनाओं की पूर्ण वापसी हुई। तालिबान शासन में लड़कियों की माध्यमिक-उच्च शिक्षा पर पूर्ण प्रतिबंध (विश्व में इकलौता ऐसा देश) और महिलाओं पर व्यापक कार्य-प्रतिबंध जारी हैं। जुलाई 2025 में रूस विश्व का पहला देश बना जिसने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता दी — अगस्त 2026 तक कोई अन्य देश ऐसा नहीं करता, और तालिबान को लगातार चौथे वर्ष UN-सीट नहीं मिली। भारत ने अक्टूबर 2025 में अपने काबुल-मिशन को दूतावास का दर्जा दिया — मान्यता नहीं, पर बड़ा व्यावहारिक क़दम। !! फरवरी-मार्च 2026 में पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर बड़ा सैन्य संघर्ष हुआ, जिसमें सैकड़ों हताहतों के दावे हैं — (यह विवरण मुख्यतः द्वितीयक संकलन-स्रोतों से है, प्रकाशन से पहले और पुष्टि आवश्यक)। ◇

8.8 म्यांमार★

1 फरवरी 2021 का सैन्य तख्तापलट, जिसने आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार हटाई, आज भी जारी गृहयुद्ध की जड़ है — प्रतिरोध बलों का अनुमानतः ~60% क्षेत्र पर नियंत्रण है। दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में जुंटा ने सीमित, विवादास्पद ‘चुनाव’ कराया जिसे UN और पश्चिमी देशों ने “दिखावटी” बताया; अप्रैल 2026 में मिन आंग हलाइंग औपचारिक रूप से राष्ट्रपति बने। भारत जुंटा से व्यावहारिक जुड़ाव बनाए हुए है — जून 2026 में मिन आंग हलाइंग की भारत-यात्रा हुई। ◇

8.9 एक क्रॉस-कटिंग विषय — दक्षिण एशिया, विश्व की सबसे पुरानी महिला-नेतृत्व की परंपरा★★

यह अध्याय जिन देशों की बात करता है, वे विश्व-राजनीति के एक असाधारण रिकॉर्ड के भी मालिक हैं — निर्वाचित महिला सरकार-प्रमुखों की सबसे लंबी और सबसे पुरानी परंपरा, पश्चिम के लोकतंत्रों से भी पहले।

नेतादेशपदवर्ष
★★सिरिमावो बंडारनायकेश्रीलंका (तब सिलोन)विश्व की पहली निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री1960
★इंदिरा गांधीभारतप्रधानमंत्री1966–77, 1980–84
★★बेनज़ीर भुट्टोपाकिस्तानकिसी मुस्लिम-बहुल देश की पहली निर्वाचित महिला सरकार-प्रमुख1988–90, 1993–96
ख़ालिदा ज़ियाबांग्लादेशप्रधानमंत्री1991–96, 2001–06
शेख हसीनाबांग्लादेशप्रधानमंत्री (विश्व की सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला सरकार-प्रमुखों में)1996–2001, 2009–2024
चंद्रिका कुमारतुंगाश्रीलंकाराष्ट्रपति1994–2005
★सुशीला कार्कीनेपालपहली महिला सरकार-प्रमुख (पूर्व प्रधान न्यायाधीश, अंतरिम प्रधानमंत्री)2025–26

★★यह पैटर्न आकस्मिक नहीं है — शोधकर्ता प्रायः इसे ‘राजवंशीय उत्तराधिकार’ से जोड़ते हैं: बंडारनायके, गांधी, भुट्टो, ज़िया और हसीना — सभी किसी हत्या या राजनीतिक शहादत का शिकार हुए पिता/पति के उत्तराधिकार से सत्ता में आईं। ★सुशीला कार्की इस पैटर्न का अपवाद हैं — वे किसी राजनीतिक परिवार से नहीं, बल्कि न्यायपालिका से आईं, और एक जन-आंदोलन ने उन्हें सत्ता सौंपी। यह इस परंपरा के एक नए, गैर-वंशवादी चरण का संकेत हो सकता है। ◇

भाग IX — दस बहसें जिन पर परीक्षा में राय माँगी जाती है

#बहसपक्षविपक्ष
1क्या दक्षिण एशिया कभी एक ‘क्षेत्र’ बन पाएगा?साझी भाषा, धर्म और इतिहास एक मज़बूत आधार हैं! आंतरिक व्यापार दुनिया में सबसे कम; दक्षेस दस वर्ष से ठप
2क्या लोकतंत्र दक्षिण एशिया में ‘स्वीकृत मूल्य’ है?★★छह बार (1990×2, 2022, 2024, 2025×2) जनता ने सत्ता झुकाई; 88% इसे उपयुक्त मानते हैं! हर बार यह सड़क से आया, चुनाव से नहीं — संस्थाएँ कमज़ोर हैं
3क्या 2025 का भारत-पाक संकट ‘नया सामान्य’ बन गया है?!! पहली बार सिंधु-जल संधि टूटी; 1971 के बाद पहला सीमा-पार हवाई हमलायुद्धविराम चार दिन में हुआ और ज़मीनी स्तर पर कायम है — यह पूर्ण युद्ध नहीं बना
4क्या बांग्लादेश और नेपाल के 2024-26 के बदलाव ‘क्रांति’ हैं या ‘सुधार’?★दोनों जगह नेतृत्व और सत्ताधारी दल पूरी तरह बदलेसंस्थागत ढाँचा (संविधान, चुनाव-आयोग) बना रहा — यह क्रमिक सुधार भी है
5क्या श्रीलंका का मॉडल बाकी क्षेत्र के लिए नमूना है?★★आर्थिक पतन के बावजूद सत्ता पूरी तरह संवैधानिक रास्ते से बदली! यह अभी भी IMF कार्यक्रम में है — ‘सफलता’ जल्दबाज़ी होगी
6क्या दक्षेस को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए?यूनुस और मालदीव जैसे नेता माँग उठा रहे हैं!! भारत-पाक विवाद जब तक अनसुलझा है, दक्षेस आगे नहीं बढ़ सकता — बिम्सटेक बेहतर विकल्प है
7क्या तालिबान को मान्यता दी जानी चाहिए?व्यावहारिक जुड़ाव से मानवीय सहायता बेहतर पहुँचती है — भारत का दूतावास-स्तरीय क़दम इसी तर्क पर है!! महिलाओं-लड़कियों पर अभूतपूर्व प्रतिबंध — रूस के अलावा किसी देश ने मान्यता नहीं दी
8क्या छोटे पड़ोसी देशों का भारत की ओर झुकाव-विरोध चक्रीय है?★★मालदीव 2023 में ‘इंडिया आउट’, 2025 में ‘रीसेट’ — यह पैटर्न श्रीलंका और नेपाल में भी दिख चुका हैहर बार कारण आर्थिक निर्भरता होता है, राजनीतिक बदलाव नहीं — यानी यह स्थायी सुधार नहीं
9क्या भारत अपने पड़ोस में ‘वर्चस्व’ रखता है?आकार, अर्थव्यवस्था और भूगोल — तीनों में भारत असममित रूप से बड़ा है★2025 का पहलगाम-सिंदूर प्रकरण दिखाता है कि भारत भी पड़ोस में जोखिम और सीमाओं का सामना करता है — यह एकतरफा वर्चस्व नहीं
10क्या म्यांमार को ‘दक्षिण एशिया’ का हिस्सा मानना चाहिए?बिम्सटेक के ज़रिये यह क्षेत्र से गहरा आर्थिक-राजनीतिक रूप से जुड़ा है! यह पारंपरिक रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा है और दक्षेस का सदस्य कभी नहीं रहा

भाग X — त्वरित तथ्य-पट्टिका और ‘सत्यापित नहीं हो सका’

10.1 पूरे क्षेत्र का संयुक्त कालक्रम, 2021–2026(देश-वार अध्यायों को जोड़कर एक साथ पढ़िए)★★

तिथिदेशघटना
1 फरवरी 2021म्यांमारसैन्य तख्तापलट; मिन आंग हलाइंग सत्ता-प्रमुख
15 अगस्त 2021अफ़गानिस्तानकाबुल तालिबान के हाथों गिरा
30 अगस्त 2021अफ़गानिस्तानअमरीकी/नाटो सेनाओं की पूर्ण वापसी
अप्रैल 2022श्रीलंकापहली संप्रभु ऋण-चूक
जुलाई 2022श्रीलंकाराष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे का पलायन; विक्रमसिंघे राष्ट्रपति
मार्च 2023श्रीलंकाIMF का 48-माह EFF कार्यक्रम स्वीकृत
नवंबर 2023मालदीवमुइज़्ज़ू ‘इंडिया आउट’ पर विजयी और शपथग्रहण
जनवरी 2024भूटानPDP/तोबगे चुनावी विजय
मई 2024मालदीवभारतीय सैन्य-कर्मियों की पूर्ण वापसी
मई 2024बिम्सटेकचार्टर लागू, कानूनी व्यक्तित्व प्राप्त
जून 2024श्रीलंकाद्विपक्षीय ऋण-पुनर्रचना पर पेरिस फ़ोरम में सहमति
जुलाई–अगस्त 2024बांग्लादेशछात्र-आंदोलन; हसीना का इस्तीफा और पलायन (5 अगस्त)
सितंबर–नवंबर 2024श्रीलंकादिसानायके राष्ट्रपति; NPP को संसद में दो-तिहाई बहुमत
★★22 अप्रैल 2025भारत-पाकिस्तानपहलगाम आतंकी हमला
★★23 अप्रैल–10 मई 2025भारत-पाकिस्तानसिंधु-जल संधि स्थगन → ऑपरेशन सिंदूर → युद्धविराम
अप्रैल 2025बिम्सटेकछठा शिखर सम्मेलन, बैंकॉक
अप्रैल 2025श्रीलंकामोदी की यात्रा; रक्षा-सहयोग समझौता
मई 2025बांग्लादेशअवामी लीग पर प्रतिबंध
जुलाई 2025अफ़गानिस्तानरूस द्वारा तालिबान-सरकार की मान्यता
जुलाई 2025मालदीवमोदी की यात्रा; भारत-मालदीव ‘रीसेट’
अगस्त-सितंबर 2025नेपालजेन-ज़ी आंदोलन; ओली का इस्तीफा; कार्की अंतरिम PM
अक्टूबर 2025अफ़गानिस्तानभारत के काबुल-मिशन को दूतावास का दर्जा
नवंबर 2025बांग्लादेशICT द्वारा शेख हसीना को मृत्युदंड
दिसंबर 2025–जनवरी 2026म्यांमारजुंटा का सीमित, विवादित चुनाव
★★फरवरी 2026बांग्लादेशचुनाव; BNP विजयी; यूनुस का प्रस्थान
★★फरवरी–मार्च 2026अफ़गानिस्तान-पाकिस्तानसीमा-संघर्ष ! (विवरण अपुष्ट)
★★मार्च 2026नेपालचुनाव; RSP/बालेन शाह विजयी
अप्रैल 2026म्यांमारमिन आंग हलाइंग राष्ट्रपति के रूप में शपथ

★★इस संयुक्त कालक्रम से एक बात स्पष्ट दिखती है — 2024-26 के दो वर्षों में दक्षिण एशिया के आठ में से कम-से-कम पाँच देशों (बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार) में सरकार-प्रमुख या सत्ता-संरचना बदली, और भारत-पाकिस्तान ने अपने इतिहास का एक नया, गंभीर सैन्य टकराव देखा। किसी भी दो वर्ष की अवधि में यह क्षेत्र इतनी तेज़ी से शायद ही पहले बदला हो।

10.2 एक-पृष्ठ तथ्य-पट्टिका(परीक्षा-पूर्व त्वरित दोहराव के लिए)

देश2024–26 की सबसे बड़ी घटनातिथिपरिणाम
भारत-पाकिस्तानपहलगाम हमला → ऑपरेशन सिंदूर → सिंधु-जल संधि स्थगितअप्रैल–मई 2025युद्धविराम, “गहरी जमावट”
बांग्लादेशछात्र-आंदोलन → हसीना का इस्तीफा → यूनुस अंतरिम सरकारअगस्त 2024फरवरी 2026 चुनाव में BNP विजयी
श्रीलंका2022 का पतन पहले से जारी, अब दिसानायके (NPP/JVP) राष्ट्रपतिसितंबर–नवंबर 2024IMF कार्यक्रम में स्थिरता
नेपालजेन-ज़ी आंदोलन → ओली का इस्तीफा → कार्की अंतरिम PMसितंबर 2025मार्च 2026 चुनाव में RSP/बालेन शाह विजयी
भूटानPDP/तोबगे की चुनावी वापसी; गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की शुरुआतजनवरी 2024स्थिरता जारी
मालदीवमुइज़्ज़ू का भारतीय सैनिकों को हटाना, फिर भारत-रीसेटमई 2024 / जुलाई 2025संतुलित द्विपक्षीय नीति
अफ़गानिस्तानरूस की तालिबान-मान्यता; भारत का दूतावास-उन्नयनजुलाई / अक्टूबर 2025अंतरराष्ट्रीय अलगाव बना हुआ
म्यांमारजुंटा का सीमित चुनाव; मिन आंग हलाइंग राष्ट्रपतिदिसंबर 2025–अप्रैल 2026गृहयुद्ध जारी
दक्षेसकोई सम्मेलन नहीं, दस वर्ष से अधिकनिरंतरबिम्सटेक अधिक सक्रिय
बिम्सटेकचार्टर लागू; छठा शिखर सम्मेलन, बैंकॉकमई 2024 / अप्रैल 2025दक्षेस का व्यावहारिक विकल्प

10.3 ‘सत्यापित नहीं हो सका’ — ईमानदार सीमाएँध्यान

यह अध्याय “100% सटीक” होने का दावा नहीं करता। जो नीचे है, उसे कक्षा में ‘रिपोर्ट किया गया है’ कहकर ही प्रस्तुत करें, निश्चित तथ्य के रूप में नहीं:

  • !! भारत-पाकिस्तान 2025 के हताहत और विमान-क्षति के आँकड़े — दोनों पक्षों के दावे परस्पर-विरोधी हैं और किसी तटस्थ स्रोत से पुष्ट नहीं हुए। अमरीकी मध्यस्थता का दावा भी विवादित है — पाकिस्तान इसका श्रेय देता है, भारत सार्वजनिक रूप से नकारता है।
  • ! बांग्लादेश के फरवरी 2026 चुनाव में BNP की सीट-संख्या — स्रोतों में 209 से 212 के बीच भिन्नता है।
  • ! बांग्लादेश में अल्पसंख्यक-हिंसा के आँकड़े (2,442 घटनाएँ, 66 मृत) — ये वकालत-समूहों (हिंदू- बौद्ध-ईसाई एकता परिषद) के आँकड़े हैं, सरकारी या UN-सत्यापित नहीं।
  • ! श्रीलंका का ‘चक्रवात दित्वाह’ — IMF दस्तावेज़ों में संदर्भित, पर स्वतंत्र रूप से पूरी तरह सत्यापित नहीं हो सका।
  • !! फरवरी-मार्च 2026 का पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान संघर्ष — विशेषकर काबुल के अस्पताल पर हमले में 400+ हताहतों का दावा — यह विवरण मुख्यतः द्वितीयक संकलन-स्रोतों (जिनमें Wikipedia भी शामिल है) से मिला है; तालिबान और पाकिस्तान के आधिकारिक दावे सीधे विरोधाभासी हैं। प्रकाशन-पूर्व Reuters/AP या UN स्रोत से पुनः-पुष्टि अनुशंसित।
  • दक्षेस-पुनरुद्धार की चर्चा — यह अभी केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है, कोई तय तारीख या ठोस योजना नहीं।

10.4 भ्रमित करने वाले युग्म — परीक्षा से ठीक पहले दोहराइए★

युग्मभेद
यूनुस बनाम कार्कीयूनुस — बांग्लादेश के अंतरिम ‘मुख्य सलाहकार’, अर्थशास्त्री, नोबेल विजेता; कार्की — नेपाल की अंतरिम ‘प्रधानमंत्री’, पूर्व प्रधान न्यायाधीश
तारिक़ रहमान बनाम बालेन शाहरहमान — बांग्लादेश के निर्वाचित PM (फरवरी 2026), BNP, वंशानुगत नेता (ज़िया परिवार); शाह — नेपाल के निर्वाचित PM (मार्च 2026), RSP, रैपर-से-मेयर बने, वंशवाद-विरोधी छवि
ऑपरेशन सिंदूर बनाम बुनियान-उम-मरसूससिंदूर — भारत का मई 2025 का हवाई अभियान; बुनियान-उम-मरसूस — पाकिस्तान का जवाबी अभियान
दिसानायके बनाम विक्रमसिंघेविक्रमसिंघे — 2022 में संसद-निर्वाचित अंतरिम राष्ट्रपति (संकट-प्रबंधन); दिसानायके — सितंबर 2024 में सीधे जनता से निर्वाचित, वामपंथी
मुइज़्ज़ू 2023 बनाम 20252023 — ‘इंडिया आउट’ प्रचार पर विजय; 2025 — मोदी की यात्रा और वित्तीय सहायता से ‘रीसेट’
तालिबान की मान्यता — रूस बनाम शेष विश्वरूस — जुलाई 2025 से औपचारिक मान्यता; भारत सहित शेष विश्व — केवल व्यावहारिक जुड़ाव, मान्यता नहीं
मिन आंग हलाइंग — 2021 बनाम 20262021 — तख्तापलट से सत्ता-प्रमुख बने; 2026 — विवादित चुनाव के बाद औपचारिक राष्ट्रपति बने
दक्षेस बनाम बिम्सटेकदक्षेस — 1985, आठ सदस्य, पाकिस्तान शामिल, दस वर्ष से निष्क्रिय; बिम्सटेक — 1997, सात सदस्य, पाकिस्तान शामिल नहीं, 2024-25 में सक्रिय
पहलगाम बनाम पुलवामापुलवामा (2019) — CRPF काफ़िले पर हमला → बालाकोट हवाई-कार्रवाई; पहलगाम (2025) — पर्यटकों पर हमला → ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु-जल संधि स्थगन
अवामी लीग बनाम BNPअवामी लीग — शेख हसीना का दल, मई 2025 से प्रतिबंधित और 2026 चुनाव से बाहर; BNP — तारिक़ रहमान का दल, फरवरी 2026 का विजेता

भाग XI — स्रोत-सूची

भारत-पाकिस्तान 2025 【प्रा/द्वि】

बांग्लादेश 2024–26 【प्रा/द्वि】

श्रीलंका 2022–26 【प्रा/द्वि】

नेपाल, भूटान, मालदीव 2024–26 ◇

अफ़गानिस्तान, म्यांमार, दक्षेस, बिम्सटेक 【प्रा/द्वि】

लोकतंत्र का जन-समर्थन ◆

  • एस डी एस ए टीम, स्टेट ऑव डेमोक्रेसी इन साउथ एशिया, नयी दिल्ली, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2007 (पाठ्यपुस्तक का भी स्रोत)

अंतिम अनुस्मारक: ! यह अध्याय पाठ्यपुस्तक से स्वतंत्र है। जहाँ यह NCERT से आगे जाता है — भारत-पाकिस्तान का 2025 का संकट, बांग्लादेश और नेपाल के 2024-26 के सत्ता-परिवर्तन, श्रीलंका का दिसानायके-युग, मालदीव और अफ़गानिस्तान की स्थिति, म्यांमार का ‘चुनाव’, बिम्सटेक का उदय — वहाँ बोर्ड परीक्षा में NCERT का ही उत्तर लिखिए। ★★और याद रखें — भाग X.2 में सूचीबद्ध तथ्य अपुष्ट या विवादित हैं। किसी को “निश्चित” बताकर मत लिखिए — “सत्यापित नहीं हो सका” कहना कमज़ोरी नहीं, ईमानदारी है।