अध्याय 4राजनीतिक दल

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सेट 1 — परिभाषाएँ (कार्ड 1–10)

#प्रश्नउत्तर
1राजनीतिक दल क्या है?चुनाव लड़ने और सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से बना लोगों का संगठित समूह
2दल के तीन हिस्से?नेता · सक्रिय सदस्य · अनुयायी/समर्थक
3दल की पहचान किससे तय होती है?“नीतियों और सामाजिक आधार से”
4शासक दल?“जिस दल का शासन हो यानी जिसकी सरकार बनी हो”
5दल-बदल?निर्वाचित प्रतिनिधि का अपना दल छोड़कर दूसरे दल में जाना
6शपथपत्र?निजी सूचनाएँ + उनके सही होने की शपथ वाला दस्तावेज़
7गठबंधन/मोर्चा?बहुदलीय व्यवस्था में पार्टियों का चुनाव और सत्ता के लिए हाथ मिलाना
8मान्यता प्राप्त दल?जिन्हें आयोग अलग चुनाव चिह्न जैसी सुविधाएँ देता है
9“सामूहिक हित” कैसा विचार है?“सामूहिक हित एक विवादास्पद विचार है”
10100 साल पहले दुनिया में राजनीतिक दलों की क्या स्थिति थी?गिनती के देशों में ही दल थे; आज गिनती के देशों में ही नहीं हैं

सेट 2 — सात कार्य (कार्ड 11–20)

#प्रश्नउत्तर
11सातों कार्यों का सूत्र?“चुनाव · नीति · कानून · सरकार · विपक्ष · जनमत · पहुँच”
12भारत में उम्मीदवार कौन चुनता है?दलों के नेता (अमरीका में — सदस्य और समर्थक)
13नीतियों के बारे में दल क्या करते हैं?“तरह-तरह के विचारों को कुछ बुनियादी राय तक समेट लाती हैं”
14विधायिका में सदस्य कैसे फ़ैसला करते हैं?“अपने दल के नेता के निर्देश पर”
15सरकार कौन बनाता-चलाता है?दल — “नेता चुनती हैं, प्रशिक्षित करती हैं… मंत्री बनाती हैं”
★16हारे हुए दल का काम?विपक्ष — आलोचना + “आम जनता को भी गोलबंद”
17जनमत कैसे बनता है?“दलों द्वारा रखी जाने वाली राय के इर्द-गिर्द ही समाज की राय बनती जाती है”
18राजनीतिक दलों का सातवाँ कार्य?सरकारी मशीनरी और कल्याण कार्यक्रमों तक पहुँच
19कार्यकर्ता से जान-पहचान क्यों काम की?“सरकारी अधिकारी की तुलना में… आसान होता है”
★20दल जनता की क्यों सुनते हैं?“वरना अगले चुनाव में लोग उन्हें धूल चटा सकते हैं”

सेट 3 — ज़रूरत और व्यवस्थाएँ (कार्ड 21–32)

#प्रश्नउत्तर
21दल न हों तो उम्मीदवार कैसे होंगे?स्वतंत्र/निर्दलीय — बड़े नीतिगत वायदे कोई नहीं कर पाएगा
★22दल न हों तो सबसे बड़ी कमी?“देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा”
23गैर-दलीय पंचायत चुनाव में क्या होता है?“पूरा गाँव कई खेमों में बँट जाता है… हर खेमा ‘पैनल’ उतारता है”
24दलों का उदय किससे जुड़ा है?“प्रतिनिधित्व पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था के उभार के साथ”
★★25क्या राजनीतिक दल लोकतंत्र के लिए ज़रूरी हैं?“राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं”
26पंजीकृत दल कितने?750 से ज़्यादा
27एकदलीय व्यवस्था — देश और फ़ैसला?चीन; “यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है”
28दो दलीय व्यवस्था के देश?अमरीका और ब्रिटेन
292004 के तीन गठबंधन?राजग · संप्रग · वाम मोर्चा
30बहुदलीय व्यवस्था का गुण?“विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल जाता है”
★31“कौन-सी प्रणाली बेहतर?” का जवाब?“यह कोई बहुत अच्छा सवाल नहीं है… चुनाव करना किसी मुल्क के हाथ में नहीं”
32भारत में बहुदलीय क्यों?“दो-तीन पार्टियाँ… सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम”

सेट 4 — मान्यता और छह दल (कार्ड 33–46)

#प्रश्नउत्तर
! 33दुनिया में सबसे कम भरोसे वाली संस्था?राजनीतिक दल
★34दलों की सदस्यता में भारत किन देशों से आगे है?कनाडा, जापान, स्पेन, दक्षिण कोरिया से
★★35राज्यीय दल की शर्त?विधानसभा में 6% वोट + 2 सीटें
★★36राष्ट्रीय दल की शर्त?लोकसभा में 6% वोट (या 4 राज्यों में) + 4 लोकसभा सीटें
37छह राष्ट्रीय दल किस अधिसूचना से?2023 की भारत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना
38छहों के नाम का सूत्र?“आ-ब-भा-सी-कां-ए” — आप · बसपा · भाजपा · सीपीआई-एम · कांग्रेस · एनपीपी
39सबसे पुराना दल?कांग्रेस — 1885
40बसपा — वर्ष और संस्थापक?1984 · कांशीराम
41बसपा की प्रेरणा?साहू महाराज · फुले · पेरियार · आंबेडकर
42भाजपा किससे बनी और कब?भारतीय जनसंघ (श्यामा प्रसाद मुखर्जी, 1951) से — 1980 में
43भाजपा का प्रेरक सिद्धांत?समग्र मानवतावाद एवं अंत्योदय (दीनदयाल उपाध्याय)
44सीपीआई-एम — वर्ष और गढ़?1964; प.बंगाल (34 वर्ष शासन) · केरल · त्रिपुरा
45आप — गठन?26 नवंबर 2012 (2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद)
46एनपीपी की ख़ासियत?पूर्वोत्तर की पहली राष्ट्रीय पार्टी — पी.ए. संगमा, जुलाई 2013

सेट 5 — क्षेत्रीय दल, चुनौतियाँ, सुधार (कार्ड 47–60)

#प्रश्नउत्तर
47क्या राज्यीय दल विचारधारा में क्षेत्रीय ही होते हैं?नहीं — “यह ज़रूरी नहीं”; सपा, राजद के संगठन कई राज्यों में
★481996 के बाद क्या हुआ?“लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को… गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला”
★★49क्षेत्रीय दलों के गठबंधन सरकार में शामिल होने का नतीजा?“इससे हमारे देश में संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं”
50चार चुनौतियों का सूत्र?“अंदर का लोकतंत्र · वंशवाद · पैसा-अपराध · विकल्पहीनता”
51आंतरिक लोकतंत्र की कमी के तीन लक्षण?न खुली सूची · न सांगठनिक बैठकें · न आंतरिक चुनाव
★52आंतरिक लोकतंत्र की कमी का सबसे तीखा नतीजा?“नेता से निष्ठा ही ज़्यादा महत्वपूर्ण बन जाती है”
53वंशवाद से क्या नुकसान?“अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं”
54धन देने वाले क्या करते हैं?“पार्टी की नीतियों और फ़ैसलों को भी प्रभावित करते हैं”
55विकल्पहीनता का किताबी उदाहरण?ब्रिटेन की लेबर और कंजरवेटिव पार्टी — अंतर बहुत कम
56दल-बदल कानून की सीमा?“पार्टी में विरोध का कोई स्वर उठाना और भी मुश्किल”
57शपथपत्र की सीमा?सूचनाओं की “जाँच करने की कोई व्यवस्था नहीं”
58तीन सुझावों का सूत्र?“कानून · महिला (एक तिहाई) · सरकारी खर्च”
59ज़्यादा नियमों का ख़तरा?दल “कानून को दरकिनार करने का तरीका ढूँढ़ने लगेंगे”
★★60खराब राजनीति का समाधान क्या है?“खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”

अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए

सात कार्य — चुनाव · नीति · कानून · सरकार · विपक्ष · जनमत · पहुँच मान्यता — राज्यीय 6%+2 (विधानसभा) · राष्ट्रीय 6%+4 (लोकसभा) छह दल — आ-ब-भा-सी-कां-ए (1885 · 1964 · 1980 · 1984 · 2012 · 2013) चार चुनौतियाँ — अंदर का लोकतंत्र · वंशवाद · पैसा-अपराध · विकल्पहीनता सुधार — हो चुके: दल-बदल · शपथपत्र · आयोग — सुझाए: कानून · महिला · पैसा ★★और दो वाक्य — “दल लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त हैं” · “खराब राजनीति का समाधान — ज़्यादा और बेहतर राजनीति”