अध्याय 4राजनीतिक दल

रिवीजन नोट्स11 मिनट

परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़िए।


“राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं।” “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”

2. अर्थ और तीन हिस्से★

परिभाषा — “राजनीतिक दल को लोगों के एक ऐसे संगठित समूह के रूप में समझा जा सकता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है। समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर यह समूह कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।”

  • “सामूहिक हित एक विवादास्पद विचार है” — इसी आधार पर दल कहते हैं कि उनकी नीतियाँ औरों से बेहतर हैं
  • ★“दल किसी समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं… उसका नज़रिया समाज के उस वर्ग/समुदाय विशेष की तरफ़ झुका होता है”
  • पहचान — “नीतियों और सामाजिक आधार से”
  • तीन हिस्से — नेता · सक्रिय सदस्य · अनुयायी या समर्थक

3. सात कार्य — सूत्र: “चुनाव · नीति · कानून · सरकार · विपक्ष · जनमत · पहुँच”★★

#कार्यएक पहचान-पंक्ति
1चुनाव लड़नाभारत में “दलों के नेता ही उम्मीदवार चुनते हैं”; अमरीका में सदस्य और समर्थक
2नीतियाँ-कार्यक्रम रखना“पार्टियाँ तरह-तरह के विचारों को कुछ बुनियादी राय तक समेट लाती हैं”
3कानून-निर्माणसदस्य “अपने दल के नेता के निर्देश पर फ़ैसला करते हैं”
4सरकार बनाना-चलाना“पार्टियाँ नेता चुनती हैं, प्रशिक्षित करती हैं… मंत्री बनाती हैं”
★5विपक्षहारे दल आलोचना करते हैं और “आम जनता को भी गोलबंद करते हैं”
6जनमत-निर्माण“दलों द्वारा रखी जाने वाली राय के इर्द-गिर्द ही समाज के लोगों की राय बनती जाती है”
7सरकारी मशीनरी तक पहुँच“राजनीतिक कार्यकर्ता से जान-पहचान बनाना… आसान होता है” — और “वरना अगले चुनाव में लोग उन्हें धूल चटा सकते हैं”

4. दलों की ज़रूरत★

  • बिना दलों के — उम्मीदवार निर्दलीय; “बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में… चुनावी वायदे” कोई नहीं कर पाएगा; सरकार की “उपयोगिता संदिग्ध”; ★“देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा।”
  • गैर-दलीय पंचायत चुनाव का प्रमाण — “पूरा गाँव कई खेमों में बँट जाता है और हर खेमा… अपने उम्मीदवारों का ‘पैनल’ उतारता है। राजनीतिक दल भी ठीक यही काम करते हैं।”
  • उदय — “प्रतिनिधित्व पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था के उभार के साथ”; बड़े-जटिल समाजों को माध्यम/एजेंसी चाहिए
  • ★★निष्कर्ष — “राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं।”

5. कितने दल?★

व्यवस्थादेशयाद रखने की बात
एकदलीयचीन! “यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है”
दो दलीयअमरीका · ब्रिटेनदूसरी पार्टियाँ हैं, पर दो ही प्रबल दावेदार
★बहुदलीयभारतगठबंधन/मोर्चा; 2004 के तीन — राजग · संप्रग · वाम मोर्चा
  • भारत में पंजीकृत दल — 750 से ज़्यादा (किताब के अनुसार)
  • बहुदलीय के दो पक्ष — घालमेल/अस्थिरता बनाम “विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व”
  • ★“कौन-सी बेहतर?” — “यह कोई बहुत अच्छा सवाल नहीं है। दलीय व्यवस्था का चुनाव करना किसी मुल्क के हाथ में नहीं है… हर मुल्क और हर स्थिति में कोई एक ही आदर्श प्रणाली चले यह संभव नहीं है।”
  • भारत में बहुदलीय क्यों — “दो-तीन पार्टियाँ इतने बड़े मुल्क की सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम हैं।”

6. जन-भागीदारी(पृष्ठ 52)

  • ! “पूरी दुनिया में राजनीतिक दल ही एक ऐसी संस्था है जिस पर लोग सबसे कम भरोसा करते हैं।”
  • ★पर भारत में सदस्यता का अनुपात “कनाडा, जापान, स्पेन और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों से भी ज़्यादा” — और पिछले तीन दशकों में बढ़ता गया; करीबी बताने वालों का अनुपात भी बढ़ा।

7. मान्यता के नियम★★

पंजीकरण हर दल का (निर्वाचन आयोग में); मान्यता कुछ को — अलग चुनाव चिह्न जैसी सुविधाओं के साथ = ‘मान्यता प्राप्त’ दल

दलशर्त
राज्यीय दलविधानसभा चुनाव में 6% वोट + कम से कम 2 सीटें
राष्ट्रीय दललोकसभा में 6% वोट (अथवा चार राज्यों की विधानसभाओं में 6%) + लोकसभा की कम से कम 4 सीटें

★सूत्र — “राज्यीय: 6% + 2 (विधानसभा) · राष्ट्रीय: 6% + 4 (लोकसभा)” “2023 में जारी भारत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार देश में छः मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं।”

8. छह राष्ट्रीय दल — “आ-ब-भा-सी-कां-ए”★★

दलगठनएक पहचान-तथ्य2019
आम आदमी पार्टी26 नवंबर 20122011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से; जवाबदेही-पारदर्शिता-सुशासन; पंजाब और दिल्ली में सरकार1 सीट
बहुजन समाज पार्टी1984 — कांशीरामबहुजन समाज (दलित, आदिवासी, पिछड़ी जातियाँ, धार्मिक अल्पसंख्यक); प्रेरणा — साहू महाराज, फुले, पेरियार, आंबेडकर; मुख्य आधार उ.प्र.3.63% · 10 सीटें
भारतीय जनता पार्टी1980 (जनसंघ — श्यामा प्रसाद मुखर्जी, 1951 — से)दीनदयाल उपाध्याय के विचार — समग्र मानवतावाद एवं अंत्योदय; सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (हिंदुत्व); 1998 में राजग के नेता के रूप में सत्ता303 सीटें — सबसे बड़ा दल
सीपीआई-एम1964मार्क्सवाद-लेनिनवाद; प.बंगाल, केरल, त्रिपुरा; प.बंगाल में लगातार 34 वर्ष शासन~1.75% · 3 सीटें
इंडियन नेशनल काँग्रेस1885सबसे पुराने दलों में से एक; नेहरू — आधुनिक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य; मध्यमार्गी; 1971 तक लगातार और 1980–89; 2004–14 संप्रग19.5% · 52 सीटें
नेशनल पीपुल्स पार्टीजुलाई 2013 — पी.ए. संगमापूर्वोत्तर की पहली राष्ट्रीय पार्टी; मेघालय में सरकार1 सीट

9. क्षेत्रीय दल★

  • आयोग की भाषा में ‘राज्यीय दल’; “यह ज़रूरी नहीं… कि विचारधारा या नज़रिए में ये पार्टियाँ क्षेत्रीय ही हों” — सपा, राजद के संगठन कई राज्यों में; बीजद, सिक्किम लोकतांत्रिक मोर्चा, मिजो नेशनल फ्रंट, तेलंगाना राष्ट्र समिति अपनी क्षेत्रीय पहचान को लेकर सचेत।
  • ★★“पिछले तीन दशकों में क्षेत्रीय दलों की संख्या और ताकत में वृद्धि… 2014 तक किसी एक राष्ट्रीय दल का लोकसभा में बहुमत नहीं रहा… 1996 के बाद से लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को एक या दूसरी गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। इससे हमारे देश में संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं।” (अध्याय 2 की कड़ी)

10. चार चुनौतियाँ — “अंदर का लोकतंत्र · वंशवाद · पैसा-अपराध · विकल्पहीनता”★★

#चुनौतीमुख्य पंक्तियाँ
1आंतरिक लोकतंत्र का न होना“सारी ताकत एक या कुछेक नेताओं के हाथ में”; न खुली सूची, न बैठकें, न आंतरिक चुनाव; ★“नेता से निष्ठा ही ज़्यादा महत्वपूर्ण बन जाती है”
2वंशवाद“शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार”; “अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर”; ★“कमोबेश पूरी दुनिया में”
! 3पैसा और अपराधी तत्व“कोई भी जायज़-नाजायज़ तरीका”; धन देने वाले “नीतियों और फ़ैसलों को भी प्रभावित”; “चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का समर्थन”
4विकल्पहीनता“वैचारिक अंतर कम” (★किताबी उदाहरण — ब्रिटेन की लेबर-कंजरवेटिव); “वही थोड़े से नेता हर दल में आते-जाते रहते हैं”

11. सुधार — “हो चुके ✓” और “सुझाए गए →”★★

हो चुके(हर एक की सीमा साथ लिखिए)

सुधार+! सीमा
दल-बदल कानून (संविधान संशोधन)सीट गँवानी होगी → दल-बदल घटा“पार्टी में विरोध का कोई स्वर उठाना और भी मुश्किल”
शपथपत्र (उच्चतम न्यायालय का आदेश)संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा अनिवार्य“सूचनाएँ सही हैं या नहीं, जाँच की कोई व्यवस्था नहीं”
आयोग का आदेशसांगठनिक चुनाव + आयकर रिटर्न“सिर्फ़ खानापूरी”

सुझाए गए — “कानून · महिला · पैसा”

  1. आंतरिक कामकाज का कानून — सदस्यों की सूची · अपने संविधान का पालन · विवाद में स्वतंत्र प्राधिकारी पंच · बड़े पदों के खुले चुनाव
  2. ★महिलाओं को करीब एक तिहाई टिकट और प्रमुख पदों पर आरक्षण
  3. चुनाव का खर्च सरकार उठाए — पेट्रोल-कागज-फोन के रूप में, या मतों के अनुपात में नकद

! किताब की चेतावनी — “दलों को ज़रूरत से ज़्यादा नियमों से जकड़ना नुकसानदेह भी हो सकता है… सभी दल कानून को दरकिनार करने का तरीका ढूँढ़ने लगेंगे।”

और दो अंतिम तरीके★★

(1) जनता का दबाव — चिट्ठियाँ · प्रचार · आंदोलन · दबाव समूह · मीडिया (2) ख़ुद शामिल होना — “लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है… खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”

12. अनिवार्य तथ्य — एक जगह

तथ्यब्योरा
100 साल पहलेगिनती के देशों में दल; आज गिनती के देशों में ही नहीं
750+पंजीकृत दल
2004तीन गठबंधन — राजग · संप्रग · वाम मोर्चा
★6% + 2 / 6% + 4राज्यीय / राष्ट्रीय मान्यता
2023आयोग की अधिसूचना — छह राष्ट्रीय दल
गठन-वर्ष1885 कांग्रेस · 1964 सीपीआई-एम · 1980 भाजपा (1951 जनसंघ) · 1984 बसपा · 2012 आप · 2013 एनपीपी
2014 तक / 1996 के बादकिसी राष्ट्रीय दल का बहुमत नहीं / हर क्षेत्रीय दल को गठबंधन का अवसर
34 वर्षप.बंगाल में सीपीआई-एम का लगातार शासन
2019भाजपा 303 · कांग्रेस 19.5% व 52 · बसपा 3.63% व 10 · सीपीआई-एम ~1.75% व 3 · आप 1 · एनपीपी 1

13. परीक्षा में जहाँ बच्चे मार खाते हैंध्यान

ग़लतीसही
मान्यता की शर्तों में सदन उलट देनाराज्यीय = विधानसभा (2 सीट) · राष्ट्रीय = लोकसभा (4 सीट)
“बसपा के संस्थापक आंबेडकर”कांशीराम (आंबेडकर प्रेरणा-स्रोत हैं — प्रश्न 8 का जाल)
भाजपा का प्रेरक सिद्धांत “आधुनिकता”समग्र मानवतावाद (प्रश्न 9)
“सरकार चलाने के लिए दल ज़रूरी नहीं”ग़लत — दल “अनिवार्य शर्त” हैं (प्रश्न 10-स)
सात कार्यों में सिर्फ़ नामहर कार्य के साथ एक पंक्ति चाहिए
सुधार और सुझाव मिला देना“हो चुके ✓” और “सुझाए गए →” अलग-अलग
दल-बदल कानून को सिर्फ़ अच्छा बताना! सीमा भी — “विरोध का स्वर उठाना और भी मुश्किल”

अंतिम पंक्ति — यही मत भूलिए

★★“राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं।” और उनकी ख़ामियों का इलाज — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”