अध्याय 4राजनीतिक दल

परख प्रश्न14 मिनट

यह प्रश्न रटने से हल नहीं होते — इनमें बच्चे को पहचानना, गणना करना, दोनों पक्ष रखना और नई स्थिति में नियम लगाना पड़ता है। NCF-2023 और PARAKH के प्रारूप पर आधारित।

! शिक्षक के लिए — सारे केस काल्पनिक दलों (“पार्टी X”, “पार्टी Y”) पर हैं — कक्षा में भी उन्हें काल्पनिक ही रखिए। किसी असली दल पर इन्हें मत उतारिए।


भाग क — केस-आधारित प्रश्न

केस 1 — मान्यता मिलेगी या नहीं?

चार काल्पनिक पार्टियों के नतीजे — पार्टी A — राज्य विधानसभा चुनाव में 8% वोट, पर 1 सीट। पार्टी B — राज्य विधानसभा चुनाव में 6% वोट और 3 सीटें। पार्टी C — लोकसभा चुनाव में 7% वोट और 3 सीटें। पार्टी D — चार राज्यों की विधानसभाओं में 6-6% वोट, और लोकसभा में 5 सीटें।

1हर पार्टी के लिए बताइए — कौन-सी मान्यता मिलेगी और क्यों/क्यों नहीं। 4 अंक

उत्तर देखिए
पार्टीफ़ैसलाकारण
A! कोई मान्यता नहींवोट 6% से ऊपर हैं, पर कम से कम 2 सीटें चाहिए — केवल 1 है
B★राज्यीय दल6% + 2 से अधिक सीटें — दोनों शर्तें पूरी
C! राष्ट्रीय दल नहींवोट-शर्त पूरी, पर लोकसभा में कम से कम 4 सीटें चाहिए — केवल 3 हैं (हाँ, अपने राज्य में शर्तें पूरी हों तो राज्यीय दल बन सकती है)
D★★राष्ट्रीय दल“चार राज्यों के विधान सभाई चुनाव में… 6 प्रतिशत + लोकसभा की कम से कम 4 सीटें” — दोनों रास्ते की शर्तें पूरी

2मान्यता मिलने से पार्टी B को व्यवहार में क्या मिलेगा? 2 अंक

उत्तर देखिए

वह ‘मान्यता प्राप्त’ दल बन जाएगी — आयोग उसे “अलग चुनाव चिह्न” देगा “जिसका प्रयोग पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार ही कर सकता है”, और ऐसी ही कुछ विशेष सुविधाएँ।

3★आयोग “सभी दलों को समान मानता है” — फिर बड़े दलों को सुविधाएँ क्यों? 2 अंक

उत्तर देखिए

क्योंकि पंजीकरण और मान्यता दो अलग बातें हैं — पंजीकरण सबका हक़ है (“नागरिकों का कोई भी समूह राजनीतिक दल बना सकता है”), पर मान्यता जनता के समर्थन का प्रमाण माँगती है — 6% वोट यानी लाखों मतदाताओं का भरोसा। “हर दल चुनाव में गंभीर चुनौती देने की स्थिति में नहीं होता” — मान्यता गंभीर और ग़ैर-गंभीर का फ़र्क़ करती है।


केस 2 — एक पार्टी के भीतर

काल्पनिक पार्टी X के बारे में चार तथ्य — (अ) पिछले 15 वर्षों से अध्यक्ष एक ही परिवार से हैं; अब उनके बेटे को उपाध्यक्ष बनाया गया है। (ब) पार्टी में आज तक कोई आंतरिक चुनाव नहीं हुआ; सदस्यों की कोई सूची नहीं है। (स) टिकट उन्हीं को मिलता है “जो चुनाव का ख़र्च ख़ुद उठा सकें।” (द) पार्टी का घोषणापत्र दूसरी बड़ी पार्टी जैसा ही है — बस नाम अलग है।

1चारों तथ्यों को किताब की चार चुनौतियों से मिलाइए। 4 अंक

तथ्यचुनौती
(अ)
(ब)
(स)
(द)
उत्तर देखिए
तथ्यचुनौती
(अ)वंशवाद
(ब)आंतरिक लोकतंत्र का न होना
(स)पैसा (और अपराधी तत्वों) की घुसपैठ
(द)विकल्पहीनता

2★पार्टी X के एक ईमानदार कार्यकर्ता के पास किताब के अनुसार कौन-कौन से रास्ते हैं? 3 अंक

उत्तर देखिए
1

भीतर रहकर आवाज़ उठाना — पर किताब चेताती है कि “जो उनसे असहमत होते हैं उनका पार्टी में टिके रह पाना मुश्किल हो जाता है”;

2

जनता के दबाव से जुड़ना — “चिट्ठियाँ लिखने, प्रचार करने और आंदोलनों के जरिये”; दबाव समूह और मीडिया की मदद;

3

★और अंतत: वही जो किताब का अंतिम संदेश है — बेहतर राजनीति में ज़्यादा भागीदारी — जैसे यूनुस ने (अभ्यास 11) शिकायत की जगह नया, पारदर्शी दल बनाने का रास्ता चुना।

3पार्टी X की चारों बीमारियों के चार तोड़ — किताब के सुझावों से — लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

(अ) वंशवाद ↔ “सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव”;

(ब) आंतरिक लोकतंत्र ↔ “सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें” + विवाद में स्वतंत्र प्राधिकारी पंच;

(स) पैसा ↔ “चुनाव का खर्च सरकार उठाए” (पेट्रोल-कागज-फोन या मतों के अनुपात में नकद);

(द) विकल्पहीनता ↔ नीतियों-कार्यक्रमों में स्पष्ट अंतर — यही “सार्थक विकल्प” है।


केस 3 — गणना कीजिए

किसी काल्पनिक राज्य के विधानसभा चुनाव में कुल 50 लाख वैध वोट पड़े। पार्टी Y को 3.2 लाख वोट और 4 सीटें मिलीं।

1पार्टी Y का वोट-प्रतिशत निकालिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

(3.2 ÷ 50) × 100 = 6.4%

2क्या उसे राज्यीय दल की मान्यता मिलेगी? 2 अंक

उत्तर देखिए

हाँ — 6.4% > 6% और 4 सीटें > 2 सीटें — दोनों शर्तें पूरी।

3★अगर उसे वोट तो 6.4% मिलते पर सीट एक भी नहीं — तो? इससे नियम की कौन-सी समझ बनती है? 2 अंक

उत्तर देखिए

मान्यता नहीं मिलती। नियम वोट और सीट — दोनों माँगता है, क्योंकि वोट फैला हुआ समर्थन दिखाते हैं और सीटें जीतने की क्षमता — “गंभीर चुनौती देने की स्थिति” दोनों से मिलकर बनती है।


केस 4 — “मुझे राजनीति से नफ़रत है”

दसवीं की एक छात्रा कहती है — “राजनीति गंदी चीज़ है। नेता सब एक जैसे हैं। मैं बड़ी होकर इनसे दूर ही रहूँगी।”

1उसकी बात में किताब की कौन-सी सच्चाइयाँ झलकती हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए

किताब ख़ुद मानती है — “अधिकतर लोग आम तौर पर दलों के बारे में ख़राब राय रखते हैं” और “पूरी दुनिया में राजनीतिक दल ही एक ऐसी संस्था है जिस पर लोग सबसे कम भरोसा करते हैं।” चारों चुनौतियाँ वास्तविक हैं — छात्रा की नाराज़गी निराधार नहीं है।

2★★पर किताब उसकी “दूर रहूँगी” वाली बात से सहमत क्यों नहीं होगी? 3 अंक

उत्तर देखिए
1

दल “लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त” हैं — उनसे दूरी का अर्थ है लोकतंत्र से दूरी;

2

“लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है। अगर आम नागरिक खुद राजनीति में हिस्सा न लें और बाहर से ही बातें करते रहें तो सुधार मुश्किल है”;

3

★इसलिए किताब का जवाब उल्टा है — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।” — “अगर अच्छे लोग दूर रहेंगे, तो जगह किनके लिए ख़ाली छूटेगी?”

3भागीदारी के तीन ठोस रूप बताइए जो एक आम नागरिक कर सकता है। 2 अंक

उत्तर देखिए
1

दबाव — चिट्ठियाँ, प्रचार, आंदोलनों और मीडिया/दबाव समूहों से जुड़ना; (2) सूचित मतदान — शपथपत्र पढ़कर, नीतियाँ तुलना करके वोट देना; (3) ★सदस्यता/सक्रियता — किसी दल में शामिल होकर भीतर से बेहतर बनाना (भारत में सदस्यता विकसित देशों से ज़्यादा है — यानी यह रास्ता आम लोगों ने अपनाया भी है)।

भाग ख — तर्क और मूल्यांकन

1“एकदलीय व्यवस्था में स्थिरता ज़्यादा होती है, इसलिए वही सबसे अच्छी है।” — जाँच कीजिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

स्थिरता वाली बात में आंशिक सच हो सकता है — बहुदलीय व्यवस्था “बहुत घालमेल वाली लगती है और देश को राजनीतिक अस्थिरता की तरफ़ ले जाती है।”

! पर निष्कर्ष ग़लत है — किताब दो-टूक कहती है: “हम एकदलीय व्यवस्था को अच्छा विकल्प नहीं मान सकते क्योंकि यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है।” वहाँ (जैसे चीन में) क़ानूनन दल बन भी सकें तो “चुनाव प्रणाली सत्ता के लिए स्वतंत्र प्रतिद्वंद्विता की अनुमति नहीं देती।”

★कसौटी — “किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कम से कम दो दलों को… चुनाव में प्रतिद्वंद्विता की अनुमति तो होनी ही चाहिए” — स्थिरता लोकतंत्र की क़ीमत पर नहीं ख़रीदी जा सकती।

2“दल-बदल कानून पूरी तरह अच्छा साबित हुआ।” — दोनों पक्ष रखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

पक्ष “अपना दल-बदलने वाले सांसद या विधायक को अपनी सीट गँवानी होगी। इस नए कानून से दल-बदल में कमी आई है” — विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर अंकुश।

! विपक्ष — “इससे पार्टी में विरोध का कोई स्वर उठाना और भी मुश्किल हो गया है। पार्टी नेतृत्व जो कोई फ़ैसला करता है, सांसद और विधायक को उसे मानना ही होता है” — यानी इसने पहली चुनौती (आंतरिक लोकतंत्र की कमी) को और गहरा कर दिया।

निष्कर्ष ★ एक बीमारी का इलाज दूसरी को बढ़ा गया — इसीलिए किताब कहती है कि “महज कानूनी समाधान” से सावधान रहना चाहिए।

3“क्षेत्रीय दलों का बढ़ना देश के लिए बुरा है।” — पक्ष-विपक्ष में दो-दो तर्क और निष्कर्ष। 4 अंक

उत्तर देखिए

कथन के पक्ष में जो कहा जाता है (1) बहुत से दल = “घालमेल” और अस्थिरता का अंदेशा; (2) गठबंधन सरकारों में फ़ैसले कठिन — (किताब का कार्टून: “गठबंधन जैसी चीज़ को कैसे बना-संभाल लेते हैं!”)।

विपक्ष में — और यही किताब का पक्ष है (3) “इससे भारतीय संसद विविधताओं से और भी ज़्यादा संपन्न हुई है”; (4) ★★“1996 के बाद से लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को… गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। इससे हमारे देश में संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं।”

निष्कर्ष ★ किताब के तराज़ू में लाभ भारी है — क्योंकि भारत जैसे देश में “दो-तीन पार्टियाँ… सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम” हैं; क्षेत्रीय दल उन आवाज़ों को संसद तक लाते हैं।

4★“चुनाव का खर्च सरकार उठाए” — इस सुझाव के एक लाभ और एक संभावित कठिनाई पर तर्क दीजिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

लाभ इससे तीसरी चुनौती (पैसे की घुसपैठ) की जड़ कटती है — दलों को “ज़्यादा धन देने वाली कंपनियों और अमीर लोगों” पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, तो नीतियाँ भी उनके दबाव से मुक्त होंगी; और साधनहीन पर योग्य उम्मीदवार भी लड़ पाएँगे।

! कठिनाई — पैसा किस अनुपात में बँटे? (किताब का ही सुझाव — “पिछले चुनाव में मिले मतों के अनुपात में”) — पर तब नए दलों को कम मिलेगा; और सरकारी धन के दुरुपयोग की निगरानी भी चाहिए।

संतुलित राय ★ आंशिक सहायता (पेट्रोल, कागज, फोन जैसी वस्तु-रूप में) + कड़ा हिसाब — किताब का सुझाव इसी रूप में व्यावहारिक है।

भाग ग — वर्गीकरण और मिलान

1नीचे की गतिविधियों को दलों के सात कार्यों में से सही कार्य से मिलाइए 4 अंक

गतिविधिकार्य
एक दल ने घोषणापत्र जारी कर मुफ़्त बिजली की नीति रखी
हारे हुए दल ने मूल्य-वृद्धि के विरुद्ध प्रदर्शन किया
एक नागरिक ने राशन कार्ड के लिए स्थानीय कार्यकर्ता से संपर्क किया
दल के सांसदों ने नेता के निर्देश पर विधेयक के पक्ष में मत दिया
उत्तर देखिए
गतिविधिकार्य
एक दल ने घोषणापत्र जारी कर मुफ़्त बिजली की नीति रखीनीतियाँ-कार्यक्रम रखना
हारे हुए दल ने मूल्य-वृद्धि के विरुद्ध प्रदर्शन कियाविपक्ष की भूमिका (जनता को गोलबंद करना)
एक नागरिक ने राशन कार्ड के लिए स्थानीय कार्यकर्ता से संपर्क कियासरकारी मशीनरी/कल्याण कार्यक्रमों तक पहुँच
दल के सांसदों ने नेता के निर्देश पर विधेयक के पक्ष में मत दियाकानून-निर्माण में निर्णायक भूमिका

2पहचानिए — कौन-सी दलीय व्यवस्था? 3 अंक

उत्तर देखिए
स्थितिव्यवस्था
देश में क़ानूनन एक ही दल शासन कर सकता हैएकदलीय — ! “लोकतांत्रिक विकल्प नहीं”
कई दल हैं, पर सत्ता दो के ही बीच झूलती हैदो दलीय
गठबंधन बनाकर ही सरकारें बनती हैंबहुदलीय

3किताब के छह राष्ट्रीय दलों को उनके एक-एक पहचान-तथ्य से मिलाइए 3 अंक

तथ्यदल
1885 — सबसे पुराने दलों में से एक
कांशीराम — बहुजन समाज
जनसंघ से 1980 में; समग्र मानवतावाद
1964; प.बंगाल में 34 वर्ष शासन
2011 के आंदोलन से; 26 नवंबर 2012
पूर्वोत्तर की पहली राष्ट्रीय पार्टी
उत्तर देखिए
तथ्यदल
1885 — सबसे पुराने दलों में से एकइंडियन नेशनल काँग्रेस
कांशीराम — बहुजन समाजबसपा
जनसंघ से 1980 में; समग्र मानवतावादभाजपा
1964; प.बंगाल में 34 वर्ष शासनसीपीआई-एम
2011 के आंदोलन से; 26 नवंबर 2012आम आदमी पार्टी
पूर्वोत्तर की पहली राष्ट्रीय पार्टीएनपीपी

भाग घ — परियोजना और गतिविधि

1★★“हमारी कक्षा-पार्टी” (अनिवार्य — महीने भर)

कक्षा के असली मुद्दे (पुस्तकालय-समय, सफ़ाई, खेल) पर दो दल बनें — नीति-पत्र → प्रचार → चुनाव → सरकार → और हारा हुआ दल हर हफ़्ते ‘विपक्ष की समीक्षा’ पेश करे।

★महीने के अंत में पूछिए — “विपक्ष के होने से जीते हुए दल के काम में क्या फ़र्क़ पड़ा?” — यही पाँचवें कार्य की असली सीख है।

2कतरन-संग्रह (किताब की अपनी गतिविधि, पृष्ठ 50)

अख़बार से दलों की गतिविधियों की तीन कतरनें — हर एक के नीचे लिखो कि वह सातों में से कौन-सा कार्य है। ! कतरनें गतिविधि की हों — भाषण/विवाद की नहीं।

3नक्शा-कार्य

पृष्ठ 56 के नक्शे से — पाँच राज्य + उनके क्षेत्रीय दल की सूची; और दो प्रश्न: “किन राज्यों के आगे कोई दल अंकित नहीं?” तथा “सबसे पुराना कौन-सा दल दिखता है?” (संकेत — शिरोमणि अकाली दल, 1920)।

4★“मेरी पार्टी का संविधान”

समूह में एक काल्पनिक दल बनाइए और उसका संविधान लिखिए जिसमें चारों चुनौतियों के चार तोड़ दर्ज हों — खुले आंतरिक चुनाव · पद योग्यता से (परिवार से नहीं) · चंदे का सार्वजनिक हिसाब · दूसरों से स्पष्ट अलग नीतियाँ। ★सबसे अच्छे संविधान को कक्षा में पढ़वाइए।

5शपथपत्र-साक्षरता

शिक्षक ECI/CEO वेबसाइट से किसी पुराने चुनाव का एक नमूना शपथपत्र (नाम ढककर) दिखाएँ — विद्यार्थी सूची बनाएँ कि उसमें क्या-क्या घोषित है, और बताएँ कि मतदाता उसका उपयोग कैसे करे।

मूल्यांकन रूब्रिक (शिक्षक के लिए)

स्तरपहचान
उत्कृष्टनियम को नई स्थिति में लगा पाता है (मान्यता की गणना), दोनों पक्ष रखता है, और किताब के उद्धरण से पुष्टि करता है
अच्छाकार्य/चुनौतियाँ सही पहचानता है, पर गणना या दूसरा पक्ष छूट जाता है
सुधार चाहिएसूचियाँ रटी हैं — पर केस में लागू नहीं कर पाता; सुधार-सुझाव मिला देता है
! बहुत कमज़ोर“राजनीति गंदी चीज़ है” पर अटका है — केस 4 दोबारा कराइए, यही इस अध्याय की असली गाँठ है

★★और सबसे असली मूल्यांकन — अध्याय के अंत में पूछिए — “क्या राजनीति से दूर रहना समझदारी है?” जितने बच्चे किताब का वाक्य — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति” — अपने शब्दों में समझा दें, उतना अध्याय सफल हुआ।