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प्रयोग — दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 60 कार्ड।
सेट 1 — परिभाषाएँ (कार्ड 1–12)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | श्रम का लैंगिक विभाजन? | वह तरीक़ा जिसमें घर के अंदर के सारे काम परिवार की औरतें करती हैं |
| ★2 | लैंगिक असमानता का आधार क्या है? | जैविक बनावट नहीं — बल्कि रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ |
| 3 | नारीवादी? | “औरत और मर्द के समान अधिकारों और अवसरों में विश्वास करने वाली महिला या पुरुष” |
| 4 | पितृ-प्रधान? | पुरुषों को ज़्यादा महत्व और शक्ति देने वाली व्यवस्था |
| 5 | लिंग अनुपात? | प्रति हज़ार लड़कों पर लड़कियों की संख्या |
| ★6 | सांप्रदायिकता? | “राजनीति में धर्म को इस तरह जोड़ना” कि एक धर्म श्रेष्ठ माना जाए और राज्य उसके पक्ष में सत्ता का इस्तेमाल करे |
| 7 | पारिवारिक कानून? | विवाह, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार से संबंधित कानून |
| 8 | वर्ण-व्यवस्था? | जाति समूहों का पदानुक्रम — एक जाति हर हाल में सबसे ऊपर |
| 9 | जातिवाद? | यह मान्यता कि जाति ही समुदाय के गठन का एकमात्र आधार है |
| 10 | शहरीकरण? | “ग्रामीण इलाकों से निकलकर लोगों का शहरों में बसना” |
| 11 | वोट बैंक? | वह जाति जिसके ज़्यादातर लोग एक ही पार्टी को वोट देते हैं (सभी नहीं) |
| 12 | धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति? | जो धार्मिक आस्था के आधार पर भेदभाव न करे |
सेट 2 — लैंगिक मसले (कार्ड 13–26)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 13 | क्या सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए खतरा है? | “सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नहीं होती” |
| ★14 | “घर में रसोइया औरत, होटल में पुरुष” — क्यों? | क्योंकि बाहर उसी काम के पैसे मिलते हैं — “अधिकांश दर्जी या होटल के रसोइए पुरुष होते हैं” |
| 15 | महिलाओं के काम को मूल्य क्यों नहीं मिलता? | “इसके लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते इसलिए औरतों का काम दिखाई नहीं देता” |
| 16 | समय का उपयोग — कुल काम? | औरत 7:30 से ज़्यादा · मर्द 6:30 |
| ★17 | घर के कामों में अंतर? | महिला 5:00 · पुरुष 0:30 |
| 18 | साक्षरता दर? | महिलाएँ 54% · पुरुष 76% |
| 19 | लिंग अनुपात कितना? | 919; कहीं 850, कहीं-कहीं 800 से भी नीचे |
| 20 | समान मज़दूरी अधिनियम क्या कहता है? | “समान काम के लिए समान मज़दूरी दी जाएगी” — पर व्यवहार में नहीं होता |
| 21 | महिला आंदोलनों ने क्या माँगा? | वोट का अधिकार · राजनीतिक-वैधानिक दर्जा · शिक्षा और रोज़गार · पारिवारिक जीवन में बराबरी |
| 22 | कहाँ महिलाओं की भागीदारी सबसे ऊँची? | स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड — स्कैंडिनेवियाई देश |
| ★23 | लोकसभा में महिलाएँ? | 14.36% — “पहली बार 2019 में ही” |
| 24 | विधान सभाओं में महिलाओं की भागीदारी? | 5 फ़ीसदी से भी कम |
| 25 | राष्ट्रीय संसदों में महिलाओं का प्रतिशत (अक्टूबर 2018) — भारत / विश्व औसत / नॉर्डिक देश? | 11.8 / 24 / 42.3 (पृ. 34 का ग्राफ़ — 2019 के चुनाव से पहले के आँकड़े) |
| ★26 | स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी? | एक तिहाई पद आरक्षित; 10 लाख से ज़्यादा निर्वाचित महिलाएँ |
सेट 3 — धर्म और सांप्रदायिकता (कार्ड 27–42)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★27 | नारी शक्ति वंदन अधिनियम? | 2023 — लोकसभा, विधानसभा और दिल्ली विधानसभा में 33% आरक्षण |
| 28 | लैंगिक भाग का निष्कर्ष? | “जब सामाजिक विभाजन एक राजनीतिक मुद्दा बन जाता है तो वंचित समूहों को लाभ होता है” |
| ★29 | गांधी जी और धर्म? | “धर्म को कभी भी राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता” — पर “धर्म से उनका मतलब… नैतिक मूल्यों से था” |
| 30 | मानवाधिकार समूहों की माँग? | सांप्रदायिक दंगे रोकना और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा |
| 31 | महिला-आंदोलन की माँग? | पारिवारिक कानूनों को समतामूलक बनाना |
| ★32 | धर्म-राजनीति की कसौटी? | “अगर शासन सभी धर्मों के साथ समान बरताव करता है तो… कोई बुराई नहीं है” |
| 33 | धर्म और राजनीति के मेल में समस्या कब शुरू होती है? | “जब धर्म को राष्ट्र का आधार मान लिया जाता है” |
| 34 | सांप्रदायिक सोच की मान्यता? | “धर्म ही सामाजिक समुदाय का निर्माण करता है” |
| ★★35 | सांप्रदायिक सोच की मान्यता का खंडन? | “हर व्यक्ति कई तरह की भूमिका निभाता है। उसकी हैसियत और पहचान अलग-अलग होती है।” |
| 36 | चार रूपों का सूत्र? | “रोज़ · प्रभुत्व · गोलबंदी · हिंसा” |
| ★37 | सांप्रदायिकता का सबसे आम रूप? | दैनंदिन जीवन — “ये हमारे अंदर ही बैठी होती हैं” |
| 38 | धर्मनिरपेक्षता का पहला प्रावधान? | “किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में अंगीकार नहीं किया” |
| 39 | किन देशों में राजकीय धर्म है, और कौन-सा? | श्रीलंका (बौद्ध) · पाकिस्तान (इस्लाम) · इंग्लैंड (ईसाई) |
| ★40 | धर्मनिरपेक्षता का चौथा प्रावधान? | शासन को धार्मिक मामलों में दखल का अधिकार — “यह छुआछूत की इजाज़त नहीं देता” |
| ★★41 | धर्मनिरपेक्षता क्या है? | “कुछ पार्टियों की विचारधारा भर नहीं — यह विचार हमारे संविधान की बुनियाद है” |
| 42 | धार्मिक आबादी (2011)? | हिंदू 79.8 · मुसलमान 14.2 · ईसाई 2.3 · सिख 1.7 |
सेट 4 — जाति (कार्ड 43–56)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★43 | सच्चर समिति का आकलन? | मुस्लिम आबादी का अनुपात “अगले पचास सालों में भी… 3–4 प्रतिशत तक ही” बढ़ेगा |
| ★44 | जाति विभाजन कहाँ मिलता है? | “सिर्फ़ भारतीय समाज में ही” |
| 45 | जाति व्यवस्था दूसरे समाजों से अलग कैसे? | वहाँ भी पेशा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाता है, “लेकिन जाति व्यवस्था इसका एक अतिवादी और स्थायी रूप है” |
| 46 | जाति-व्यवस्था के ख़िलाफ़ काम करने वाले चार समाज सुधारक? | ज्योतिबा फुले · महात्मा गांधी · डॉ. आंबेडकर · पेरियार रामास्वामी नायकर |
| 47 | जाति-व्यवस्था में बदलाव के पाँच कारण? | आर्थिक विकास · शहरीकरण · साक्षरता-शिक्षा · पेशे की आज़ादी · ज़मींदारी का कमज़ोर पड़ना |
| ! 48 | जाति-व्यवस्था में क्या नहीं बदला? | अपनी जाति में शादी · छुआछूत पूरी तरह समाप्त नहीं · शिक्षा और आर्थिक हैसियत में पुराना असर |
| ★49 | जाति और आर्थिक हैसियत? | “जाति और आर्थिक हैसियत में काफ़ी निकट का संबंध है” |
| 50 | अ.जा. / अ.ज.जा. / अन्य पिछड़ी? | 16.6% · 8.6% · करीब 41% |
| 51 | जातिवाद का खंडन? | “जाति हमारे जीवन का एक पहलू ज़रूर है लेकिन यही एकमात्र या सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण पहलू नहीं है” |
| ★52 | राजनीति का सकारात्मक असर? | सार्वभौम वयस्क मताधिकार से “उन जातियों में नयी चेतना पैदा हुई जिन्हें… छोटा और नीच माना जाता था” |
| ★★53 | “चुनाव जाति का खेल” — सबसे बड़ा खंडन? | “सत्तारूढ़ दल, वर्तमान सांसदों और विधायकों को अक्सर हार का सामना करना पड़ता है” |
| 54 | किसी क्षेत्र में एक जाति का बहुमत? | नहीं — इसलिए एक से ज़्यादा जातियों का भरोसा चाहिए |
| 55 | “जाति भी राजनीतिग्रस्त” का अर्थ? | हर जाति ख़ुद को बड़ा बनाना चाहती है; दूसरी जातियों से मोल-तोल; ‘अगड़ा-पिछड़ा’ जैसी नई गोलबंदी |
| ★56 | जाति-राजनीति का लाभ? | “दलित और पिछड़ी जातियों के लिए सत्ता तक पहुँचने… की स्थिति भी पैदा की” |
सेट 5 — निष्कर्ष (कार्ड 57–60)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ! 57 | जाति-राजनीति की हानि? | “गरीबी, विकास, भ्रष्टाचार जैसे ज़्यादा बड़े मुद्दों से ध्यान भटकता है”; और तनाव, टकराव और हिंसा |
| 58 | तीनों विभाजनों का फ़ैसला? | लिंग = ज़रूरी · धर्म = ख़तरा · जाति = दोनों |
| ★59 | धर्मनिरपेक्ष संविधान काफ़ी है? | नहीं — “अकेले इसी के बूते सांप्रदायिकता का मुकाबला नहीं किया जा सकता” |
| ★★60 | अध्याय का सार एक वाक्य में? | “पहचान एक नहीं होती। और जो किसी को सिर्फ़ एक पहचान में क़ैद कर दे — वही सांप्रदायिकता है, वही जातिवाद है।” |
अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए
तीन विभाजन — लिंग (ज़रूरी) · धर्म (ख़तरा) · जाति (दोनों) छह आँकड़े — 54/76 · 919 · 14.36% · 11.8 · 16.6/8.6 · 79.8/14.2 तीन सूत्र — सांप्रदायिकता के चार रूप “रोज़ · प्रभुत्व · गोलबंदी · हिंसा” · धर्मनिरपेक्षता के चार प्रावधान · चार सुधारक “फुले · गांधी · आंबेडकर · पेरियार” दो परिभाषाएँ शब्दश: — “लैंगिक असमानता का आधार… रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ हैं” और “राजनीति में धर्म को इस तरह जोड़ना ही सांप्रदायिकता है” ★★और एक वाक्य — “हर व्यक्ति कई तरह की भूमिका निभाता है। उसकी हैसियत और पहचान अलग-अलग होती है।”