अध्याय 5उपभोक्ता अधिकार

रिवीजन नोट्स14 मिनट

परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़िए।


1. छह अधिकार — सबसे पहले यही★★

याद रखने का सूत्र — “सु-सू-च-नि-प्र-शि” सुरक्षा · सूचना · चयन · निवारण · प्रतिनिधित्व · शिक्षा

#अधिकारएक पंक्ति मेंउदाहरण
1सुरक्षा का अधिकार“हमें… सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए ख़तरनाक होते हैं।”रेजी मैथ्यू · प्रेशर कुकर का सेफ़्टी वॉल्व
2सूचना का अधिकारपैकेट पर अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण तिथि, अंतिम तिथि और निर्माता का पता देना अनिवार्यअमृता और RTI (अक्टूबर 2005)
3चयन का अधिकार“किसी भी उपभोक्ता को… सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार होगा।”अबिरामी · दंतमंजन + ब्रश · गैस + चूल्हा
4क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार“क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।”श्री प्रकाश का मनीऑर्डर
5प्रतिनिधित्व का अधिकारउपभोक्ता संगठन आयोगों में उपभोक्ता का प्रतिनिधित्व करते हैंउपभोक्ता संरक्षण परिषद् · निवासी कल्याण संघ
6उपभोक्ता शिक्षा का अधिकारअपने अधिकारों की जानकारी पाने का हक़यह पूरा अध्याय ही

2. बाज़ार में उपभोक्ता — नियम क्यों चाहिए★

मूल कारण — “अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमज़ोर स्थिति में पाता है।” शिकायत पर विक्रेता का जवाब — “आपने जो ख़रीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” — “मानो, बिक्री हो जाने के बाद विक्रेता की कोई ज़िम्मेदारी नहीं रह जाती।”

शोषण के तरीक़े —

#तरीक़ा
1दुकानदार उचित वज़न से कम वज़न तौलते हैं
2ऐसे शुल्क जोड़ देना जिनका वर्णन पहले न किया गया हो
3मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना
4ग़लत सूचना और भ्रामक विज्ञापन — “मीडिया और अन्य स्रोतों से ग़लत सूचना”
5बाज़ार की असमान शक्ति — “उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली”, उपभोक्ता “बिखरे हुए”
6जबरदस्ती जोड़ी गई ख़रीद
7रसीद न देना

★किताब के दो असली उदाहरण — • शिशु दूध पाउडर — कंपनी ने दावा किया कि “माता के दूध से हमारा उत्पाद बेहतर है”; “कई वर्षों के लगातार संघर्ष के बाद कंपनी को यह स्वीकार करना पड़ा कि वह झूठे दावे करती आ रही थी।” • सिगरेट — यह मनवाने के लिए कि “उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है”, न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।

3. समय-रेखा — पाँच तारीख़ें★★

कबक्या
1960 का दशकअत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट → भारत में व्यवस्थित उपभोक्ता आंदोलन का उदय
1970 का दशकउपभोक्ता संस्थाएँ आलेख और प्रदर्शनी; उपभोक्ता दल — राशन दुकानें और सड़क यात्री परिवहन पर नज़र
1985संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा-निर्देश अपनाए — “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह उपभोक्ता आंदोलन का आधार बना”
★1986 (24 दिसंबर)COPRA — उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम; इसी दिन के कारण 24 दिसंबर = राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस
अक्टूबर 2005RTI — सूचना पाने का अधिकार
2019COPRA में संशोधन

★गड़बड़ी से बचने का सूत्र — “1985 दुनिया की तारीख़ है, 1986 भारत की।”

4. उपभोक्ता आंदोलन

क्यों शुरू हुआ — “विक्रेता कई अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में शामिल होते थे” और “बाज़ार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई क़ानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।” पहले क्या करता था — असंतुष्ट होने पर “उस ब्रांड उत्पाद को ख़रीदना बंद कर देता था या उस दुकान से ख़रीददारी करना बंद कर देता था”; और “यह मान लिया जाता था कि उपभोक्ता की ज़िम्मेदारी है कि वह… ख़रीदते वक़्त सावधानी बरते।” क्या बदला — आंदोलन ने “वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी विक्रेताओं पर भी डाल दिया।”

उपभोक्ता इंटरनेशनल — 1985 के दिशा-निर्देशों के बाद बना अंतर्राष्ट्रीय आधार; आज “100 से भी अधिक देशों के 200 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था।”

5. तीन कहानियाँ — तीन अधिकार★

रेजी मैथ्यू — सुरक्षा

क्याविवरण
कौनकक्षा 9 का स्वस्थ लड़का, केरल
क्या हुआनिजी चिकित्सालय में टॉन्सिल का ऑपरेशन; अनुचित बेहोशी से दिमाग़ी असामान्यता, जीवन भर अपंग
दावाराज्य उपभोक्ता विवाद निवारण समिति में 5,00,000 का मुआवजा
! पहला नतीजाख़ारिज — “सबूत पर्याप्त नहीं है”
★फिरराष्ट्रीय समिति में अपील → अस्पताल चिकित्सा में लापरवाही का दोषी, हर्ज़ाना देने का निर्देश

★सबक़ — “हार जाने का मतलब रास्ता ख़त्म हो जाना नहीं है। ऊपर की अदालत खुली है।”

अबिरामी — चयन

दिल्ली के कोचिंग संस्थान के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 61,020 रुपये जमा किए; पढ़ाई का स्तर ठीक नहीं मिला, साल के अंत में छोड़ा, पर पैसे लौटाने से मना कर दिया गया। जिला आयोग — 28,000 लौटाने का आदेश, “यह कहते हुए कि छात्रा को चुनने का अधिकार है।” राज्य आयोग — जिला का आदेश सुरक्षित रखा, संस्थान पर बेकार की अपील के लिए 25,000 का दंड, और 7,000 मुआवजे और याचिका खर्च के रूप में छात्रा को। ★और सबके लिए — “सभी शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक संस्थाओं को विद्यार्थियों से पूरे साल की फ़ीस को एडवांस में लेने से भी मना किया… उल्लंघन पर दंड शुल्क… साथ ही जेल भी हो सकती है।”

श्री प्रकाश — निवारण (नौ सीढ़ियाँ)★★

सीढ़ीक्या
1बेटी के लिए मनीऑर्डर भेजने पोस्ट-ऑफ़िस गए
2पता चला रुपये बेटी को नहीं मिले
3पोस्ट-ऑफ़िस में पूछताछ की
4संतोषजनक जवाब नहीं मिला
★5क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह ली
6उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मुक़दमा दर्ज; रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म; अदालत ने दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा
★7स्वयं बहस की (वकील के बिना)
8जज ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं
9फ़ैसला सुनाया गया

★सीढ़ी 5 और 7 सबसे ज़रूरी हैं — पहले सलाह, फिर ख़ुद बहस। “यह रास्ता आम आदमी के लिए बना है।”

6. सूचना का अधिकार और MRP★★

पैकेट पर छह जानकारियाँ — अवयव · मूल्य · बैच संख्या · निर्माण की तारीख़ · ख़राब होने की अंतिम तिथि · निर्माता का पता

  • दवा पर और — उचित प्रयोग के निर्देश; अन्य प्रभावों और ख़तरों की जानकारी
  • वस्त्र पर — धुलाई संबंधी निर्देश

क्यों ज़रूरी — “यदि वस्तु ख़राब होने की अंतिम समय-सीमा उस पर नहीं छपी है, तब विनिर्माता दुकानदार पर आरोप लगा देगा और अपनी ज़िम्मेदारी नहीं मानेगा।” और — “यदि लोग अंतिम तिथि समाप्त हो गई दवाओं को बेचते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही की जा सकती है।”

MRP — यह पंक्ति सोने की है★★

“यदि कोई व्यक्ति मुद्रित मूल्य से अधिक मूल्य पर वस्तु बेचता है तो कोई भी उसका विरोध और शिकायत कर सकता है।” ★★“उपभोक्ता, विक्रेता से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं।” एक वाक्य में — “MRP सबसे ऊँची क़ीमत है — तय क़ीमत नहीं।”

RTI — अक्टूबर 2005

”…जो अपने नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्य-कलापों की सभी सूचनाएँ पाने के अधिकार को सुनिश्चित करता है।” अमृता — इंजीनियरिंग स्नातक; रिज़ल्ट नहीं मिला, कर्मचारियों ने जवाब देने से इनकार किया; RTI का प्रयोग किया — और उसे न केवल देरी का कारण बताया गया बल्कि नियुक्ति का बुलावा पत्र भी मिला।

7. त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र★★

स्तरदावों की सीमा
जिला आयोग1 करोड़ तक
राज्य आयोग1 करोड़ से 10 करोड़ तक
राष्ट्रीय आयोग10 करोड़ से ऊपर

★सूत्र — “एक — दस — ऊपर” अपील — “यदि कोई मुक़दमा जिला स्तर के आयोग में ख़ारिज कर दिया जाता है, तो उपभोक्ता राज्य स्तर के आयोग में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर के आयोग में भी अपील कर सकता है।” ★रेजी के पिता ने यही किया था।

और यह भी याद रखिए —

  • उपभोक्ता “स्वयं किसी वकील के साथ अथवा वकील की सेवा के बिना” शिकायत दर्ज करा सकता है
  • वह “एक व्यक्ति के रूप में या एक समूह के रूप में (क्लास एक्शन सूट)”, “शारीरिक रूप में अथवा इंटरनेट के माध्यम से” शिकायत कर सकता है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कार्यवाही करा सकता है

8. मानक चिह्न★

चिह्नकिस पर
आई.एस.आई. (ISI)औद्योगिक उत्पाद — भारतीय मानक ब्यूरो
एगमार्ककृषि उत्पाद — अनाज और खाद्य तेल
हॉलमार्कआभूषण
फूड फ़ोर्टिफ़िकेशन (+F)खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना
कॉयर मार्कनारियल रेशे के उत्पाद

! किताब की ईमानदार बात — “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना ज़रूरी नहीं होता।” ★पर कुछ उत्पादों पर अनिवार्य है — जो “उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है” — एल.पी.जी. सिलिंडर्स · खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री · सीमेंट · बोतलबंद पेयजल

9. आंदोलन की समीक्षा — दोनों कॉलम★★

✓ जो मिला! जो रह गया
COPRA 1986 और 2019 का संशोधन“केवल 50-60 ही… पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं”
त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र — “भारत उन देशों में से एक है, जहाँ… विशिष्ट न्यायालय हैं”प्रक्रिया “जटिल, ख़र्चीली और समय साध्य”; कई बार वकील का सहारा
2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन★“अधिकांश ख़रीददारियों के समय रसीद नहीं दी जाती हैं, ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता”
ऑनलाइन शिकायत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग“कोपरा के अधिनियम के 35 वर्ष बाद भी भारत में उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे-धीरे फैल रहा है”
24 दिसंबर — राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस“बाज़ारों के कार्य करने के लिए नियमों और विनियमों का प्राय: पालन नहीं होता”

COPRA 2019 का संशोधन — तीन बातें★

  1. अब इंटरनेट के माध्यम से ख़रीद भी शामिल है
  2. सेवा में कमी या दोषपूर्ण उत्पाद पर सेवा प्रदाता और निर्माता को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा और दंडित किया जाएगा; यहाँ तक कि जेल भी हो सकती है
  3. आयोग के बाहर तटस्थ मध्यस्थ की सहायता से निपटारा — अब तीनों स्तरों पर प्रोत्साहित

10. अनिवार्य आँकड़े — एक ही जगह

आँकड़ाकिसका
1960 / 1970 का दशकआंदोलन का उदय / उपभोक्ता दल
1985 · 1986 · 2005 · 2019UN दिशा-निर्देश · COPRA · RTI · संशोधन
24 दिसंबरराष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस
100+ देश, 200 संस्थाएँउपभोक्ता इंटरनेशनल
2000 से अधिक / केवल 50-60भारत में उपभोक्ता संगठन / पूर्ण संगठित
1 करोड़ · 1–10 करोड़ · 10 करोड़ से ऊपरजिला · राज्य · राष्ट्रीय आयोग
5,00,000रेजी के पिता का मुआवजा दावा
61,020 · 28,000 · 25,000 · 7,000अबिरामी — जमा · वापसी · दंड · मुआवजा
35 वर्षCOPRA के बाद भी उपभोक्ता ज्ञान धीरे फैल रहा है

11. परीक्षा में जहाँ बच्चे मार खाते हैंध्यान

ग़लतीसही बात
“कोपरा केवल सामानों पर लागू होता है”ग़लत — सेवाओं पर भी; रेजी (चिकित्सा), अबिरामी (शिक्षा), प्रकाश (डाक) — तीनों सेवा के मामले हैं
“MRP तय क़ीमत है”ग़लत — MRP सबसे ऊँची क़ीमत है; कम दाम पर मोल-भाव किया जा सकता है
“निवारण की प्रक्रिया सरल और शीघ्र है”ग़लत — किताब कहती है “जटिल, ख़र्चीली और समय साध्य”
“बड़े नुक़सान पर ही आयोग जाना चाहिए”ग़लत — प्रकाश का मामला केवल ₹6,000 का था
समीक्षा में केवल उपलब्धियाँ लिखनादोनों कॉलम चाहिए — जो मिला और जो रह गया
अधिकार का नाम लिखा, उदाहरण नहींइस अध्याय में हर अधिकार के साथ एक उदाहरण अनिवार्य है
एगमार्क को हर खाने की चीज़ पर लगानाएगमार्क = खेत से आई चीज़ (अनाज, तेल, शहद, मसाले)

अंतिम पंक्ति — यही मत भूलिए

★★“उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की ज़रूरत है।”

और व्यवहार की एक बात, जो किसी भी परिभाषा से ज़्यादा काम आएगी — “रसीद नहीं तो सबूत नहीं। सबूत नहीं तो अधिकार नहीं।”