अध्याय 3मुद्रा और साख

रिवीजन नोट्स17 मिनट

परीक्षा से एक रात पहले सिर्फ़ यही फ़ाइल पढ़िए।


पूरा अध्याय एक पैराग्राफ़ में

मुद्रा विनिमय का माध्यम है, जो आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या ख़त्म कर देती है। उसके आधुनिक रूप करेंसी (RBI द्वारा जारी) और माँग जमा (जिसे चैक से इस्तेमाल किया जाता है) हैं। बैंक जमा का केवल 15 प्रतिशत नकद रखकर बाक़ी से जमाकर्ता और कर्ज़दार के बीच मध्यस्थता करते हैं, और ब्याज का अंतर ही उनकी आय है। साख का असर परिस्थिति पर निर्भर है — सलीम के लिए वह लाभ लाई, स्वप्ना के लिए कर्ज़-जाल बनी। ऋण की चार शर्तें होती हैं, जिनमें समर्थक ऋणाधार सबसे निर्णायक है — इसीलिए अमीरों को 83 प्रतिशत औपचारिक ऋण मिलता है और गरीबों को केवल 46 प्रतिशत। औपचारिक स्रोत (बैंक और सहकारी समितियाँ) पर RBI नज़र रखता है; अनौपचारिक (साहूकार, व्यापारी, मालिक) पर कोई नहीं। इसीलिए ज़रूरी है कि औपचारिक ऋण बढ़े और उसका समान वितरण हो, और स्वयं सहायता समूह जैसे रास्ते बनें जहाँ ज़मीन की जगह भरोसा गिरवी रखा जा सके।

अध्याय की आत्मा★★

“ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” (पृष्ठ 44)

और एक वाक्य में — सलीम के लिए ऋण ने कमाई बढ़ाई; स्वप्ना के लिए उसी ऋण ने ज़मीन बिकवा दी।

तालिका 1 — आवश्यकताओं का दोहरा संयोग★★

शब्दपरिभाषा
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग“दोनों पक्ष एक दूसरे से चीज़ें ख़रीदने और बेचने पर सहमति रखते हों… एक व्यक्ति जो वस्तु बेचने की इच्छा रखता है, वही वस्तु दूसरा व्यक्ति ख़रीदने की भी इच्छा रखता हो।”
वस्तु विनिमय प्रणाली“जहाँ मुद्रा का उपयोग किये बिना वस्तुओं का विनिमय होता है” — वहाँ दोहरा संयोग अनिवार्य विशिष्टता है।
मुद्रा का हल“मुद्रा महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत को ख़त्म कर देती है।”
विनिमय का माध्यम“चूँकि मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है, इसे विनिमय का माध्यम कहा जाता है।”

जूता निर्माता वाला उदाहरण — बिना मुद्रा के उसे ऐसा किसान ढूँढ़ना पड़ता जो “न केवल गेहूँ बेचना चाहता हो, बल्कि साथ में जूते भी ख़रीदना चाहता हो”; मुद्रा के साथ “उसे केवल अपने जूते के लिए ख़रीददार ढूँढ़ना है।”

तालिका 2 — मुद्रा के आधुनिक रूप

मुद्रा का सफ़र

भारतीय अनाज और पशु → सोना, चाँदी और ताँबे के सिक्के (चलन पिछली सदी तक) → करेंसी (काग़ज़ के नोट और सिक्के)

करेंसी को स्वीकार क्यों किया जाता है — चार कड़ियाँ★★

#कारण
1“इसे विनिमय का माध्यम इसलिए स्वीकार किया जाता है, क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है।”
2“भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है।”
3“भारतीय क़ानून के अनुसार, किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है।”
4★“भारत में कोई व्यक्ति क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।”

और यह भी याद रखिए — “आधुनिक मुद्रा का इस प्रकार का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है” (न धातु का मूल्य, न अनाज की तरह उपयोग)। 10 रुपये के नोट पर लिखा होता है — “मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हूँ”, साथ में RBI गवर्नर के हस्ताक्षर।

बैंकों में निक्षेप और माँग जमा

बातविवरण
लोग बैंक में क्यों रखते हैंधन सुरक्षित रहता है · सूद मिलता है · आवश्यकता के अनुसार निकालने की सुविधा
★माँग जमा“चूँकि बैंक खातों में जमा धन को माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा को ‘माँग जमा’ कहा जाता है।”
चैक“वह काग़ज़ है, जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक ख़ास रकम का भुगतान करने का आदेश देता है।”
★माँग जमा मुद्रा क्यों“चूँकि माँग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है।”

चैक से भुगतान — सलीम चैक लिखता है → चमड़ा आपूर्तिकर्ता उसे अपने बैंक खाते में जमा करता है → धन एक खाते से दूसरे खाते में अंतरित हो जाता है → “यह लेन-देन बिना नकद की अदायगी के पूरा हो जाता है।” सलीम-प्रेम वाला उत्तर — (ख) सलीम के खाते में शेष घटता है और प्रेम के खाते में बढ़ता है।

तालिका 3 — बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ★★

बातविवरण
कितना नकद“भारत में बैंक जमा का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं”
क्यों“क्योंकि किसी एक विशेष दिन में, केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने के लिए आते हैं”
★बैंक की भूमिका“बैंक जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) एवं जिन्हें राशि की ज़रूरत है (कर्ज़दार) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं”
★आय का स्रोत“कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिये गये ब्याज के बीच का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है।”

तालिका 4 — साख की दो स्थितियाँ (सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला भाग)★★

ऋण की परिभाषा — शब्दश:

“ऋण (उधार) से हमारा तात्पर्य एक सहमति से है जहाँ साहूकार कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में भविष्य में कर्ज़दार से भुगतान करने का वादा लेता है।”

प्रश्नसलीम (त्यौहार का मौसम)स्वप्ना की समस्या
ऋण क्यों चाहिए थाउत्पादन की कार्यशील पूँजी — 3000 जोड़ी जूते एक महीने में पूरे करने हेतु अतिरिक्त मज़दूर और कच्चा मालखेती के ख़र्चों के लिए — 3 एकड़ पर मूँगफली उगाने हेतु
कहाँ सेदो स्रोत — (1) चमड़ा व्यापारी (बाद में भुगतान का वादा); (2) बड़ा व्यापारी (1000 जूतों का अग्रिम भुगतान)साहूकार
जोखिमसमय पर ऑर्डर पूरा न हो पानाफसल का बर्बाद हो जाना
परिणामजूते पहुँचाने में कामयाब · अच्छा-ख़ासा लाभ · उधार की अदायगी भीफसल कीटनाशकों से बर्बाद · कर्ज़ बड़ी रकम बन गया · अंतत: ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा
निष्कर्ष“ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।”“ऋण ने स्वप्ना की कमाई को बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी। इसे आम भाषा में कर्ज़-जाल कहा जाता है।”

स्वप्ना की स्थिति को जोखिम भरा बनाने वाले तीन कारण★

कीटनाशक दवाइयाँ (महँगी हैं, फिर भी फसल नहीं बचती) · साहूकार की भूमिका (ऊँची ब्याज दर, कर्ज़ साल भर में बड़ी रकम) · मौसम (खेती मुख्यत: उसी पर निर्भर)

और ग्रामीण साख की एक ज़रूरी बात

“इन आगतों को ख़रीदने और फसल की बिक्री होने के बीच कम से कम 3-4 महीने का अंतराल होता है… उधार की अदायगी मुख्यत: फसल की कमाई पर निर्भर है।”

तालिका 5 — ऋण की शर्तें★

“ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीक़ों को सम्मिलित रूप से ऋण की शर्तें कहा जाता है।”

समर्थक ऋणाधार — परिभाषा शब्दश:★★

“समर्थक ऋणाधार ऐसी संपत्ति है, जिसका मालिक कर्ज़दार है (जैसे कि भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में पूँजी) और इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारंटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता।” “यदि कर्ज़दार उधार वापस नहीं कर पाता, तो उधारदाता को भुगतान प्राप्ति के लिए संपत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।”

मेघा का आवास ऋण

विवरणउत्तर
ऋण राशि5 लाख रुपये
ऋण-अवधि10 साल
आवश्यक कागज़ातनौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड
ब्याज दर12 प्रतिशत वार्षिक
अदायगी का स्वरूपमासिक किस्तें
समर्थक ऋणाधारघर के सभी कागज़

तालिका 6 — सोनपुर गाँव (यह तुलना ज़रूर याद रखिए)★★

कौनज़मीनकिससेब्याजख़ास शर्त
अरुण (मध्यम किसान)7 एकड़बैंक8.5% वार्षिकतीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है
श्यामल (छोटा किसान)1.5 एकड़पहले महाजन, अब व्यापारी5% मासिक (60% वार्षिक) → 3% मासिकव्यापारी वादा लेता है कि फसल उसी को बेचेगा
रमा (भूमिहीन मज़दूर)कुछ नहींभूस्वामी-नियोक्ता5% मासिककर्ज़ उसके यहाँ काम करके चुकाती है; अभी ₹5,000 देने हैं
कृषक सहकारी समिति—2300 किसान सदस्य—सदस्यों की जमा को ऋणाधार मानकर बैंक से बड़ा ऋण

★★एक ही नियम — “जिसके पास पहले से है, उसे सस्ता कर्ज़ मिलता है। जिसके पास नहीं है, उसे महँगा।” रमा का ऋण समय के साथ — बढ़ जाएगा। और अरुण बैंक से ले पाता है क्योंकि “बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जो कि हर किसी के पास नहीं होती।”

तालिका 7 — औपचारिक और अनौपचारिक साख★★

औपचारिकअनौपचारिक
कौनबैंक और सहकारी समितियाँसाहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त
निगरानीभारतीय रिज़र्व बैंक“कोई संस्था नहीं है”
ब्याज दरकम“ऐच्छिक दरों पर” — बहुत अधिक
वसूलीनियम-क़ायदे से“उन्हें नाजायज़ तरीक़ों से अपने पैसे वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं है”

आलेख 1 — ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019★

स्रोत%वर्ग
व्यावसायिक बैंक51औपचारिक
साहूकार23अनौपचारिक
सहकारी समितियाँ/बैंक10औपचारिक
रिश्तेदार एवं मित्र7अनौपचारिक
अन्य औपचारिक एजेंसियाँ5औपचारिक
अन्य अनौपचारिक एजेंसियाँ3अनौपचारिक
ज़मींदार1अनौपचारिक

जोड़ — औपचारिक 66%, अनौपचारिक 34%।

RBI के तीन काम★★

  1. “नज़र रखता है कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं”
  2. “नज़र रखता है कि बैंक केवल लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को ही ऋण मुहैया नहीं करा रहे, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्ज़दारों इत्यादि को भी ऋण दे रहे हैं”
  3. “समय-समय पर, बैंकों द्वारा आर.बी.आई. को यह जानकारी देनी पड़ती है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं और उसकी ब्याज की दरें क्या हैं”

ऊँची लागत के तीन नुक़सान

  1. “कर्ज़दार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण की अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है” (श्यामल)
  2. “कर्ज़ वापस करने की रकम कर्ज़दार की आय से भी अधिक हो जाती है… व्यक्ति ऋण-जाल में फँस जाता है” (रमा)
  3. “जो लोग कर्ज़ लेकर अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं, वे ऋण की अधिक लागत को देख कर पीछे हट जाएँ”

तालिका 8 — किसे क्या मिलता है (आलेख 2)★★

शहरी परिवारऔपचारिक स्रोतअनौपचारिक स्रोत
गरीब46%54%
कम संपत्ति वाले62%38%
समृद्ध73%27%
अमीर83%17%

★“अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है।” और “इसी तरह की तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में भी है।”

दो निष्कर्ष

#बात
पहला“औपचारिक स्रोत अभी भी ग्रामीण परिवारों की कुल ऋण ज़रूरतों का केवल 50 प्रतिशत पूरा कर पाता है” → इसलिए “बैंकों और सहकारी समितियों को अपनी गतिविधियाँ विशेषकर ग्रामीण इलाक़ों में बढ़ाने की ज़रूरत”
दूसरा“यह ज़रूरी है कि औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।”

तालिका 9 — स्वयं सहायता समूह★★

समस्या

“ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते।” और साहूकार बिना ऋणाधार दे तो देते हैं, पर “महाजन ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा पढ़ी भी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।”

बनावट

बातविवरण
सदस्य15-20 पड़ोसी, विशेषकर महिलाएँ
बैठक और बचतनियमित रूप से मिलते और बचत करते हैं; ₹25 से ₹100 या अधिक प्रति व्यक्ति
छोटे कर्ज़समूह से ही; ब्याज साहूकार से कम
★बैंक से ऋणएक या दो वर्षों की नियमित बचत के बाद; ऋण समूह के नाम पर
मक़सदस्वरोज़गार के अवसरों का सृजन
किन कामों के लिएगिरवी ज़मीन छुड़वाने · कार्यशील पूँजी (बीज, खाद, बाँस, कपड़े) · घर बनाने · सिलाई मशीन, हथकरघा, पशु
निर्णय कौन लेता हैसमूह के सदस्य स्वयं — ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर, वापसी की अवधि

मूल विचार★★

“एक भी सदस्य अगर ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं। इसी कारण, बैंक निर्धन महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं जब वे अपने को स्वयं सहायता समूहों में संगठित कर लेती हैं, यद्यपि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता।” ★एक वाक्य में — यहाँ ज़मीन की जगह भरोसा गिरवी रखा जाता है।

तीन लाभ

  1. ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारते हैं
  2. समयानुसार उचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है
  3. ★“न केवल महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाती हैं, बल्कि समूह की नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक आम मंच मिलता है, जहाँ वह… स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाती हैं।”

तालिका 10 — बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक

बातआँकड़ा
शुरुआत1970, छोटे पैमाने से
2018 में9 लाख सदस्य, 81,600 गाँवों में
कौन“ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ… समाज के गरीब तबके से”
संस्थापकप्रो. मोहम्मद युनूस — 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार

★“अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी-छोटी गतिविधियों के जरिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”

तालिका 11 — अनिवार्य आँकड़े

आँकड़ाकिसका
15 प्रतिशतबैंक जमा का नकद हिस्सा
3000 जोड़ी / एक महीनासलीम का ऑर्डर
3 एकड़स्वप्ना की ज़मीन
5 लाख · 12% · 10 सालमेघा का आवास ऋण
1.5 एकड़ · 60% → 36% वार्षिकश्यामल
7 एकड़ · 8.5% वार्षिक · 3 वर्षअरुण
5% मासिक · ₹5,000रमा
2300 सदस्यकृषक सहकारी समिति
51 · 23 · 10 · 7 · 5 · 3 · 1आलेख 1 के सात हिस्से
46/54 · 62/38 · 73/27 · 83/17आलेख 2 — गरीब से अमीर तक
केवल 50 प्रतिशतग्रामीण ऋण-ज़रूरत जो औपचारिक स्रोत पूरी करते हैं
15-20 · ₹25-100 · 1-2 वर्षस्वयं सहायता समूह
1970 · 9 लाख · 81,600 · 2006ग्रामीण बैंक और नोबेल
80 प्रतिशतभारत में छोटे किसान

पाँच सूत्र

सूत्रक्या
“दोहरा संयोग = दोनों को दोनों चाहिए”वस्तु विनिमय की समस्या
“15 नकद, 85 कर्ज़”बैंक का काम
“सलीम बनाम स्वप्ना”ऋण की दो स्थितियाँ
“ब्याज · ऋणाधार · कागज़ · अदायगी”ऋण की चार शर्तें
“83 बनाम 46”अमीर बनाम गरीब — औपचारिक ऋण का हिस्सा

अभ्यास के छोटे उत्तर (एक नज़र में)

रिक्त स्थान — (क) गरीब · (ख) ऊँची · (ग) भारतीय रिज़र्व बैंक · (घ) जमा · (ङ) समर्थक ऋणाधार बहुविकल्पी — (क) सदस्यों द्वारा · (ख) नियोक्ता सलीम-प्रेम — (ख) सलीम के खाते में शेष घटता है और प्रेम के खाते में बढ़ता है रमा का ऋण — बढ़ जाएगा अरुण बैंक से ले पाता है क्योंकि — बैंक समर्थक ऋणाधार माँगते हैं जो हर किसी के पास नहीं होती

अंतिम पंक्ति

“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।”