अध्याय 5उपभोक्ता अधिकार

पाठ योजना38 मिनट

कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र · पृष्ठ — 74 से 89 · कालांश — 10 · अवधि — लगभग 2 सप्ताह

इस अध्याय का बड़ा विचार — “अधिकार क़ानून की किताब में लिखा होना काफ़ी नहीं है — जब तक उपभोक्ता जागरूक न हो, वह अधिकार काग़ज़ पर ही पड़ा रहता है।”

★और पूरे अध्याय भर बोर्ड के कोने में रहने वाला वाक्य — “उपभोक्ता का सबसे बड़ा हथियार क़ानून नहीं — रसीद है।”


क.1 यह अध्याय बाक़ी चार से अलग क्यों है★

पिछले चार अध्यायों में विद्यार्थी देखने वाला था। इस अध्याय में वह ख़ुद पात्र है — क्योंकि वह पहले ही दिन से उपभोक्ता है।

किताब की अपनी “शिक्षक के लिए निर्देश” (पृष्ठ 74) यही कहती है —

“नये उपभोक्ताओं को वास्तविकता से परिचित कराने और उपभोक्ता आंदोलन में भाग लेने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है — नये उपभोक्ताओं को उपभोक्ता के रूप में सावधान और जानकार नागरिक बनना है।” और — “इस अध्याय में प्रश्नों, संदर्भ अध्ययनों और गतिविधियों को शामिल किया गया है। इन मुद्दों पर छात्रों का समूहों में विचार-विमर्श करना बेहतर होगा।”

★इसका सीधा मतलब यह है — यह अध्याय व्याख्यान से नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। हर कालांश में कम से कम एक बार बच्चे बोलें और कम से कम एक बार कुछ करें। नीचे की योजना इसी शर्त पर बनी है।

! और किताब की एक और चेतावनी याद रखिए —

“हमें इस अध्याय के अभ्यासों की भाषा के प्रति संवेदनात्मक होना पड़ेगा।” क्योंकि इस अध्याय में ठगे जाने की बात होगी, और कक्षा में कुछ बच्चे ऐसे परिवारों से होंगे जो रोज़ ठगे जाते हैं। इसलिए किसी बच्चे या परिवार का उदाहरण नाम लेकर कभी न लें।

क.2 सामग्री — यह सब जुटा लीजिए (एक बार में, पूरे अध्याय के लिए)

#क्याकिस कालांश में चाहिए
1कोई भी पैकेटबंद खाद्य वस्तु — बिस्किट/नमकीन का ख़ाली पैकेट (4-5 अलग-अलग)कालांश 4, 8
2एक दवा का ख़ाली पत्ता (एक्सपायरी दिखने वाला)कालांश 4
3एक रसीद/बिल और एक वारंटी कार्ड (अपने घर का कोई भी)कालांश 6, 9
4कोई वस्तु जिस पर ISI / एगमार्क / हॉलमार्क / +F का चिह्न हो — जैसे बिजली का प्लग, तेल का पैकेटकालांश 8
5अख़बार की कतरनें — उपभोक्ता से जुड़ी कोई ख़बर (किताब का पृष्ठ 75 ऐसी ही कतरनों से भरा है — वही दिखाइए)कालांश 1
6चार्ट पेपर और स्केच पेन — पोस्टर के लिएकालांश 10
7छह अधिकारों की पट्टियाँ — छह काग़ज़ों पर छह नाम, कक्षा में टाँगने के लिएकालांश 3 से 7 तक, एक-एक करके

★सबसे ज़रूरी सामग्री यही है — असली पैकेट, असली रसीद, असली चिह्न। इस अध्याय में जो चीज़ हाथ में नहीं आई, वह याद भी नहीं रहेगी।

क.3 कक्षा-व्यवस्था

  • बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए और पूरे अध्याय भर वही समूह रहने दीजिए (समूह का एक नाम रख दीजिए)।
  • बोर्ड को तीन भागों में बाँटिए —
    • बायाँ किनारा (स्थायी) — बड़ा विचार और “रसीद” वाला वाक्य; पूरे अध्याय भर मत मिटाइए
    • बीच (रोज़ का काम) — आज का विषय
    • दायाँ किनारा (बढ़ती हुई सूची) — छह अधिकार, एक-एक करके जुड़ते जाएँ

खंड ख — अधिगम प्रतिफल

अध्याय के अंत तक विद्यार्थी यह कर पाएगा —

#प्रतिफलकालांशकैसे जाँचेंगे
1बाज़ार में शोषण के कम से कम पाँच तरीक़े बता पाएगा1निकास-पर्ची 1
2बता पाएगा कि अकेला उपभोक्ता कमज़ोर क्यों है1मौखिक
3उपभोक्ता आंदोलन का क्रम (1960 → 1985 → 1986 → 2019) सुना पाएगा2, 9निकास-पर्ची 2
4छहों अधिकारों के नाम क्रम से बता पाएगा और हर एक का एक उदाहरण दे पाएगा3–7कालांश 7 की जाँच
5किसी दिए गए मामले को सही अधिकार के खाने में रख पाएगा7, 10वर्गीकरण अभ्यास
6पैकेट पर देखने योग्य छह जानकारियाँ गिना पाएगा4पैकेट-जाँच गतिविधि
7बता पाएगा कि MRP सबसे ऊँची क़ीमत है, तय क़ीमत नहीं4निकास-पर्ची 4
8त्रिस्तरीय तंत्र की सीमाएँ (1 करोड़ / 1–10 करोड़ / 10 करोड़ से ऊपर) बता पाएगा7निकास-पर्ची 7
9शिकायत की पूरी प्रक्रिया क्रम से लिख पाएगा6क्रम वाला अभ्यास
10ISI, एगमार्क, हॉलमार्क, +F पहचान पाएगा और बता पाएगा कि किस पर लगते हैं8चिह्न-पहचान खेल
11आंदोलन की तीन उपलब्धियाँ और तीन कमियाँ बता पाएगा9दो-कॉलम अभ्यास
★12और सबसे ज़रूरी — अपनी अगली ख़रीद पर रसीद माँगेगा6 से आगेरसीद-डायरी

खंड ग — पूरी योजना एक नज़र में

कालांशविषयपृष्ठमुख्य गतिविधि
1बाज़ार में उपभोक्ता · शोषण के तरीक़े75–77“मुझे भी ठगा गया था” — कहानी-गोल
2उपभोक्ता आंदोलन · COPRA का जन्म77–78समय-रेखा बनवाना
3★सुरक्षा का अधिकार — रेजी79रेजी का पाठ — पहली हार पर रुकते या नहीं?
4★★सूचना का अधिकार · MRP · RTI80पैकेट-जाँच (हाथ में असली पैकेट)
5चयन का अधिकार — अबिरामी81“तुम्हें क्या-क्या जबरदस्ती दिया गया?”
6★★निवारण का अधिकार — प्रकाश की नौ सीढ़ियाँ82–83नौ सीढ़ियों का अभिनय
7प्रतिनिधित्व का अधिकार · त्रिस्तरीय तंत्र84मामला किस स्तर पर जाएगा?
8मानक चिह्न · जागरूक उपभोक्ता84–85चिह्न-पहचान खेल
9आंदोलन की समीक्षा · COPRA 201986–87दो कॉलम — क्या मिला, क्या रह गया
10अभ्यास · पोस्टर · सर्वेक्षण87–89पोस्टर बनाना + प्रश्नावली भरना

खंड घ — कालांश-दर-कालांश

हर कालांश का ढाँचा एक जैसा है — इससे बच्चों को भी लय बन जाती है: 🎯 उद्देश्य → 🎒 आज क्या ले जाना है → ⏱ मिनट-वार प्रवाह → 📋 बोर्ड-कार्य → ! यहाँ बच्चे अटकेंगे → 📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

कालांश 1 — बाज़ार में उपभोक्ता

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी बता पाए कि अकेला उपभोक्ता कमज़ोर क्यों है और शोषण किन-किन तरीक़ों से होता है।

🎒 आज ले जाइए — अख़बार की दो-तीन कतरनें; किताब का पृष्ठ 75 खुला रखिए।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · हुक★“मुझे भी ठगा गया था” — कहिए: “अपने घर की कोई एक बात बताओ जब लगा कि दुकानदार ने ठीक नहीं किया।” तीन-चार बच्चों को बोलने दीजिए। कुछ मत सुधारिए, बस सुनिए। (! किसी दुकान का नाम बोर्ड पर मत लिखिए।)
8–15 मिनट · जोड़किताब की पहली बात — “बाज़ार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में होती है।” ★अध्याय 2 से जोड़िए — “वहाँ तुमने आदमी का उत्पादक वाला चेहरा देखा था; आज दूसरा चेहरा देखेंगे — और यह चेहरा सबका है।”
15–25 मिनट · खोजसमूहों को 3 मिनट दीजिए — “बाज़ार में ठगने के जितने तरीक़े सोच सको, लिखो।” फिर हर समूह से एक-एक सुनकर बोर्ड पर सूची बनाइए। फिर किताब खुलवाइए और मिलाइए — कम तौलना · बिना बताए शुल्क · मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तु। ★जो बात बच्चों ने ख़ुद कही और किताब में भी निकली, उस पर टिक लगाइए — वे बहुत ख़ुश होते हैं।
25–33 मिनट · स्थापनअकेला उपभोक्ता क्यों कमज़ोर है — किताब का वाक्य पढ़वाइए और किसी बच्चे से दुकानदार की आवाज़ में बुलवाइए — “आपने जो ख़रीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” फिर पूछिए “यह वाक्य किसने सुना है?” — हाथ खड़े होंगे।
33–40 मिनट · बड़ा मोड़★दो असली उदाहरण — शिशु दूध पाउडर (“माता के दूध से बेहतर” का झूठा दावा, वर्षों के संघर्ष के बाद मानना पड़ा) और सिगरेट (कैंसर मनवाने के लिए न्यायालय में लंबी लड़ाई)। फिर बोर्ड पर लिखिए — “सच अपने आप बाहर नहीं आया। किसी ने वर्षों लड़कर उसे बाहर निकाला।”

📋 बोर्ड-कार्य

बड़ा विचार (मत मिटाइए): “उपभोक्ता का सबसे बड़ा हथियार क़ानून नहीं — रसीद है।” आज: शोषण के तरीक़े — 1. कम तौलना · 2. बिना बताए शुल्क · 3. मिलावट/दोषपूर्ण वस्तु · 4. ग़लत सूचना और विज्ञापन · 5. उपभोक्ता बिखरे हुए, कंपनी ताक़तवर याद रखिए: “सच अपने आप बाहर नहीं आया।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे सोचते हैं शोषण = सिर्फ़ ज़्यादा पैसा लेना। समझाइए कि झूठा विज्ञापन भी शोषण है, और वह ज़्यादा ख़तरनाक है क्योंकि उसमें ठगे जाने का पता तक नहीं चलता।

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (2 मिनट, काग़ज़ की पर्ची पर): “शोषण के तीन तरीक़े लिखो।” — पर्चियाँ इकट्ठी कीजिए, जाँच नहीं, बस देख लीजिए कौन नहीं लिख पाया।
  • गृहकार्य: “घर में किसी बड़े से पूछो — क्या कभी बाज़ार में उनके साथ ग़लत हुआ? उन्होंने क्या किया?” — दो लाइन में लिखकर लाना।

कालांश 2 — उपभोक्ता आंदोलन और COPRA

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी बता पाए कि यह अधिकार कहाँ से आए और उनकी समय-रेखा सुना पाए।

🎒 आज ले जाइए — कल का गृहकार्य सुनने का समय।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–7 मिनटगृहकार्य से तीन कहानियाँ सुनिए। ★हर कहानी के बाद एक ही सवाल पूछिए — “उन्होंने क्या किया?” — ज़्यादातर उत्तर होगा “कुछ नहीं” या “वहाँ से ख़रीदना बंद कर दिया”।
7–15 मिनट · मुख्य बात★★अब किताब की पंक्ति पढ़वाइए — ”…वह उस ब्रांड उत्पाद को ख़रीदना बंद कर देता था… यह मान लिया जाता था कि उपभोक्ता की ज़िम्मेदारी है कि वह ख़रीदते वक़्त सावधानी बरते।” और पूछिए — “पहले उपभोक्ता के पास एक ही हथियार था — ख़रीदना बंद कर देना। क्या यह काफ़ी था?”
15–20 मिनट · चर्चातीन कारण बच्चों से निकलवाइए — जो पैसा गया वह वापस नहीं आया · दुकानदार को फ़र्क़ नहीं पड़ा · अगर पूरे बाज़ार में वही चीज़ है तो जाएँ कहाँ।
20–32 मिनट · समय-रेखाबोर्ड पर एक लंबी रेखा खींचिए और बच्चों से भरवाइए — 1960 का दशक (खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट → आंदोलन का उदय) → 1970 का दशक (उपभोक्ता दल — राशन दुकानें, सड़क परिवहन) → 1985 (संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देश) → ★1986 (COPRA) → 2019 (संशोधन)।
32–40 मिनटउपभोक्ता इंटरनेशनल — 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाएँ। और अंत में — “24 दिसंबर 1986 को संसद ने COPRA पास किया। इसलिए 24 दिसंबर = राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस।” — पूछिए “इस साल तुम उस दिन क्या करोगे?”

📋 बोर्ड-कार्य

समय-रेखा: 1960 का दशक → 1970 का दशक → 1985 → 1986 (COPRA · 24 दिसंबर) → 2019 पहले का इकलौता हथियार: “ख़रीदना बंद कर देना” — और वह काफ़ी नहीं था

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

1985 और 1986 को गड्डमड्ड कर देते हैं। तरीक़ा — “1985 दुनिया की तारीख़ है (संयुक्त राष्ट्र), 1986 भारत की तारीख़ है (COPRA)। पहले दुनिया, फिर भारत।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “1985 में क्या हुआ और 1986 में क्या?”
  • गृहकार्य: समय-रेखा कॉपी में साफ़-साफ़ बनाकर लाना।

कालांश 3 — सुरक्षा का अधिकार (रेजी)★

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी सुरक्षा का अधिकार समझा पाए और बता पाए कि हार जाने पर भी रास्ता बंद नहीं होता।

🎒 आज ले जाइए — “सुरक्षा का अधिकार” लिखी पहली पट्टी, जो बोर्ड के दाएँ किनारे टँगेगी।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–5 मिनटपट्टी टाँगिए और कहिए — “आज से छह पट्टियाँ लगेंगी। अध्याय ख़त्म होते-होते छहों लग जाएँगी।” — इससे बच्चों को पूरे अध्याय का नक्शा दिख जाता है।
5–12 मिनट · अधिकारकिताब का वाक्य लिखवाइए — “हमें… सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए ख़तरनाक होते हैं।” फिर प्रेशर कुकर का सेफ़्टी वॉल्व वाला उदाहरण।
12–25 मिनट · कहानी★रेजी का कष्ट — किसी बच्चे से धीरे-धीरे पढ़वाइए। बीच में मत रोकिए। पढ़ने के बाद दस सेकंड चुप रहिए।
25–33 मिनट · मुख्य सवाल★★अब सवाल — “राज्य समिति ने कहा सबूत पर्याप्त नहीं और मामला ख़ारिज कर दिया। अगर रेजी के पिता वहीं रुक जाते, तो?” — बच्चों को बोलने दीजिए, फिर बताइए कि उन्होंने राष्ट्रीय आयोग में अपील की और अस्पताल दोषी पाया गया।
33–40 मिनट · सामान्य नियमबोर्ड पर — “हार जाने का मतलब रास्ता ख़त्म हो जाना नहीं है। ऊपर की अदालत खुली है।” ★यह वाक्य कालांश 7 में फिर काम आएगा — तब याद दिलाइए।

📋 बोर्ड-कार्य

अधिकार 1 — सुरक्षा का अधिकार रेजी मैथ्यू · कक्षा 9 · केरल · टॉन्सिल का ऑपरेशन · अनुचित बेहोशी · जीवन भर अपंग राज्य समिति → ख़ारिज (“सबूत पर्याप्त नहीं”) → राष्ट्रीय समिति → अस्पताल दोषी, हर्ज़ाना सबक़: हार जाने का मतलब रास्ता ख़त्म हो जाना नहीं है।

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे इसे केवल “डॉक्टर की ग़लती” की कहानी समझ लेते हैं। ज़ोर देकर बताइए कि यह अस्पताल की सेवा का मामला है — यानी COPRA सेवाओं पर भी लागू होता है, केवल सामान पर नहीं। (यह सीधे अभ्यास 13(क) का उत्तर है।)

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “रेजी का मामला किस अधिकार का है, और वह पहले कहाँ हारा था?”
  • गृहकार्य: पृष्ठ 79 का प्रश्न — “एल.पी.जी. सिलेंडर, सिनेमा थिएटर, सर्कस, दवाइयाँ, खाद्य तेल, विवाह पंडाल, बहुमंज़िली इमारत — इनमें उत्पादकों को कौन-से सुरक्षा नियम पालने चाहिए?” — किन्हीं तीन पर लिखकर लाना।

कालांश 4 — सूचना का अधिकार, MRP और RTI★★

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी पैकेट पर देखने योग्य जानकारियाँ गिना पाए और बता पाए कि MRP का असली अर्थ क्या है।

🎒 आज ले जाइए — ★4–5 ख़ाली पैकेट + एक दवा का पत्ता। (यह कालांश इनके बिना बेकार है।)

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–12 मिनट · खोज पहले, नियम बाद में★★हर समूह को एक पैकेट दीजिए और कहिए — “इस पर जो कुछ लिखा है, सब लिखो — 3 मिनट।” फिर हर समूह से सुनिए और बोर्ड पर जोड़ते जाइए। बच्चे ख़ुद ही पूरी सूची बना देंगे — तब किताब खोलिए और मिलाइए: अवयव · मूल्य · बैच संख्या · निर्माण की तारीख़ · ख़राब होने की अंतिम तिथि · निर्माता का पता।
12–18 मिनटदवा का पत्ता दिखाइए — “दवा पर दो चीज़ें और होती हैं — उचित प्रयोग के निर्देश और अन्य प्रभावों तथा ख़तरों की जानकारी।” और वस्त्र पर — धुलाई संबंधी निर्देश।
18–24 मिनट · क्योंकिताब का वाक्य — “तब उपभोक्ता वस्तु की किसी भी प्रकार की ख़राबी होने पर शिकायत कर सकता है, मुआवजा पाने या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है।” और तर्क — “यदि अंतिम तिथि छपी ही न हो, तो विनिर्माता दुकानदार पर आरोप लगा देगा और अपनी ज़िम्मेदारी नहीं मानेगा।”
24–33 मिनट · MRP★★यह कालांश का सबसे उपयोगी हिस्सा है। पहले पूछिए — “MRP का क्या मतलब है?” — ज़्यादातर कहेंगे “जो क़ीमत लिखी है, वही देनी है।” फिर किताब पढ़वाइए — “उपभोक्ता, विक्रेता से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं।” — और बोर्ड पर बड़े अक्षरों में — “MRP सबसे ऊँची क़ीमत है — तय क़ीमत नहीं।”
33–40 मिनट · RTIअक्टूबर 2005 — RTI। फिर अमृता की कहानी छोटी करके सुनाइए और अंत बताइए — “उसे न सिर्फ़ देरी का कारण पता चला, बल्कि नियुक्ति का पत्र भी मिल गया।”

📋 बोर्ड-कार्य

अधिकार 2 — सूचना का अधिकार पैकेट पर छह चीज़ें: अवयव · मूल्य · बैच संख्या · निर्माण तिथि · अंतिम तिथि · निर्माता का पता ★MRP सबसे ऊँची क़ीमत है — तय क़ीमत नहीं। RTI — अक्टूबर 2005 — सरकारी विभागों की सूचना पाने का अधिकार

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

  1. “MRP = तय क़ीमत” — यह सबसे आम और सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है। इसे आज ही तोड़िए।
  2. सूचना का अधिकार और RTI को एक ही चीज़ समझ लेते हैं। फ़र्क़ बताइए — “पैकेट वाली सूचना दुकानदार/कंपनी से मिलती है; RTI वाली सूचना सरकारी दफ़्तर से।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “दुकानदार कहे ‘यही रेट है, MRP है’ — तो अब तुम क्या कहोगे?”
  • गृहकार्य: “घर के तीन पैकेट देखो और हर एक की छहों जानकारियाँ कॉपी में उतारो। जो जानकारी न मिले, उस पर ✘ लगाओ।”

कालांश 5 — चयन का अधिकार (अबिरामी)

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी पहचान पाए कि जबरदस्ती जोड़ी गई ख़रीद चयन के अधिकार का उल्लंघन है।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · हुक★पूछिए — “कभी ऐसा हुआ कि तुम एक चीज़ लेने गए और दुकानदार ने दूसरी भी साथ लेने पर ही दी?” कई हाथ खड़े होंगे। सुनिए।
8–16 मिनटकिताब के दो उदाहरण — दंतमंजन के साथ ब्रश और गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा। और नियम — “अगर आप ब्रश ख़रीदने के इच्छुक नहीं हैं, तब आपके चुनने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।”
16–30 मिनट · कहानी★अबिरामी — “पैसे लौटाए गए”। बोर्ड पर आँकड़े रखते जाइए: 61,020 जमा → जिला आयोग ने 28,000 लौटवाए → संस्थान ने अपील की → राज्य आयोग ने 25,000 का दंड + 7,000 मुआवजा।
30–37 मिनट · सोचने वाला सवाल★★“अबिरामी को 28,000 वापस मिले। पर 25,000 का दंड अबिरामी को नहीं मिला — फिर वह क्यों लगाया गया?” — बच्चों को सोचने दीजिए, फिर बताइए: “ताकि आगे कोई संस्थान सिर्फ़ छात्र को थकाने के लिए अपील न करे। ★कुछ फ़ैसले एक आदमी के लिए नहीं, सबके लिए होते हैं।”
37–40 मिनटऔर वही हुआ भी — “राज्य आयोग ने सभी शिक्षा संस्थानों को पूरे साल की फ़ीस एडवांस लेने से मना कर दिया।” — पूछिए “यह फ़ैसला कितने लोगों के काम आया?”

📋 बोर्ड-कार्य

अधिकार 3 — चयन का अधिकार उल्लंघन: दंतमंजन + ब्रश · गैस कनेक्शन + चूल्हा अबिरामी: 61,020 → जिला: 28,000 वापस → राज्य: 25,000 दंड + 7,000 मुआवजा सबक़: कुछ फ़ैसले एक आदमी के लिए नहीं, सबके लिए होते हैं।

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे चयन और सूचना को मिला देते हैं। सूत्र दीजिए — “चीज़ के बारे में बताना = सूचना। चीज़ चुनने देना = चयन।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “चयन के अधिकार के उल्लंघन का एक ऐसा उदाहरण लिखो जो किताब में नहीं है।”
  • गृहकार्य: पृष्ठ 82 वाले लुभावने विज्ञापनों की सूची पढ़कर लिखना — “इनमें से कौन-सा विज्ञापन सचमुच उपभोक्ता को लाभ पहुँचाता है, और कौन-सा सिर्फ़ लुभाता है?”

कालांश 6 — निवारण का अधिकार (प्रकाश की नौ सीढ़ियाँ)★★

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी शिकायत की पूरी प्रक्रिया क्रम से बता पाए। यह पूरे अध्याय का सबसे व्यावहारिक कालांश है — इसे कभी मत छोड़िए।

🎒 आज ले जाइए — ★एक असली रसीद और एक वारंटी कार्ड।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · अधिकारकिताब का वाक्य — “यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।” और ★— “स्वयं किसी वकील के साथ अथवा वकील की सेवा के बिना”।
8–25 मिनट · अभिनय★★नौ सीढ़ियों का अभिनय। नौ बच्चों को खड़ा कीजिए, हर एक को एक सीढ़ी का पर्चा दीजिए, और उन्हें ख़ुद क्रम में लगने दीजिए। फिर हर बच्चा अपनी सीढ़ी एक वाक्य में बोले — प्रकाश पोस्ट-ऑफ़िस गया… पैसे नहीं मिले… पूछताछ की… जवाब नहीं मिला… परिषद् में सलाह ली… आयोग में मुक़दमा दर्ज किया… ख़ुद बहस की… जज ने दोनों को सुना… फ़ैसला आया।
25–32 मिनट · दो ख़ास सीढ़ियाँ★सीढ़ी 5 और 7 पर घेरा लगाइए — “पहले सलाह ली, सीधे अदालत नहीं गया। और ख़ुद बहस की, वकील नहीं किया।” ★निष्कर्ष — “यह रास्ता आम आदमी के लिए बना है।”
32–40 मिनट · रसीद★★अब रसीद और वारंटी कार्ड हाथ में उठाकर दिखाइए और किताब की कमी वाली पंक्ति पढ़िए — “अधिकांश ख़रीददारियों के समय रसीद नहीं दी जाती हैं, ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता।” फिर बोर्ड पर — “रसीद नहीं तो सबूत नहीं। सबूत नहीं तो अधिकार नहीं।”

📋 बोर्ड-कार्य

अधिकार 4 — क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार नौ सीढ़ियाँ (केवल क्रम लिखवाइए) — सीढ़ी 5 = परिषद् में सलाह · सीढ़ी 7 = ख़ुद बहस ★“रसीद नहीं तो सबूत नहीं। सबूत नहीं तो अधिकार नहीं।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे सोचते हैं “अदालत माने वकील, और वकील माने बहुत पैसा” — इसीलिए वे मानते ही नहीं कि आम आदमी शिकायत कर सकता है। इसीलिए सीढ़ी 7 पर ज़ोर देना ज़रूरी है।

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “प्रकाश ने आयोग जाने से पहले कहाँ सलाह ली?”
  • ★गृहकार्य — रसीद-डायरी शुरू: “आज से हर ख़रीद पर रसीद माँगो। कॉपी के आख़िरी पन्ने पर लिखो — तारीख़ · क्या ख़रीदा · रसीद मिली/नहीं। अध्याय के आख़िरी दिन गिनेंगे।” यह अध्याय का सबसे अच्छा गृहकार्य है — इसे रोज़ याद दिलाते रहिए।

कालांश 7 — प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय तंत्र

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी तीनों आयोगों की सीमाएँ बता पाए और तय कर पाए कि कौन-सा मामला कहाँ जाएगा।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–10 मिनटउपभोक्ता संगठन क्या करते हैं — मार्गदर्शन, प्रतिनिधित्व, और सरकार से वित्तीय सहयोग। और सबसे पास वाली संस्था — निवासी कल्याण संघ, जो “उनकी तरफ़ से मामले को देखती है।”
10–22 मिनट · तालिकाबोर्ड पर तीन ख़ाने बनाइए और भरवाइए — जिला: 1 करोड़ तक · राज्य: 1 से 10 करोड़ · राष्ट्रीय: 10 करोड़ से ऊपर। ★सूत्र — “एक — दस — ऊपर”
22–32 मिनट · अभ्यास★★तेज़ी से मामले बोलिए, बच्चे हाथ उठाकर बताएँ कि कौन-सा स्तर — “₹6,000 का मनीऑर्डर” (जिला) · “₹60 लाख का घर” (जिला) · “₹4 करोड़ का बीमा” (राज्य) · “₹50 करोड़ की परियोजना” (राष्ट्रीय)। यह खेल बच्चों को बहुत पसंद आता है।
32–40 मिनट · जोड़★अब कालांश 3 की बात लौटाइए — “जिला में ख़ारिज हो जाए तो राज्य में अपील, फिर राष्ट्रीय में। यही तो रेजी के पिता ने किया था।” — जब दोनों बातें जुड़ती हैं, तब पूरा तंत्र समझ आता है।

📋 बोर्ड-कार्य

अधिकार 5 — प्रतिनिधित्व का अधिकार जिला — 1 करोड़ तक | राज्य — 1 से 10 करोड़ | राष्ट्रीय — 10 करोड़ से ऊपर सूत्र: एक — दस — ऊपर अपील का रास्ता: जिला → राज्य → राष्ट्रीय (रेजी के पिता ने यही किया)

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे समझते हैं कि तीनों अदालतें अलग-अलग मामले देखती हैं। साफ़ कीजिए — “तीनों एक ही सीढ़ी के तीन डंडे हैं। रक़म से तय होता है कि शुरुआत कहाँ से होगी, और हार जाने पर ऊपर जाया जा सकता है।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “₹3 करोड़ का मामला किस आयोग में जाएगा?”
  • गृहकार्य: पृष्ठ 84 का क्रम वाला अभ्यास (अरिता की दीवाल घड़ी) — क्रम में लिखकर लाना।

कालांश 8 — मानक चिह्न और जागरूक उपभोक्ता

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी चारों मुख्य चिह्न पहचान पाए और बता पाए कि वे किस तरह के उत्पादों पर लगते हैं।

🎒 आज ले जाइए — ★ISI वाला प्लग/उपकरण · एगमार्क या FSSAI वाला तेल/मसाला पैकेट · सोने का कोई बिल जिस पर हॉलमार्क लिखा हो · +F वाला पैकेट।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–6 मिनटकल का क्रम वाला अभ्यास मिलाइए। ★छठी सीढ़ी पर रुकिए — “आयोग ने पहले बिल और वारंटी माँगे।” — रसीद वाली बात फिर याद दिला दीजिए।
6–20 मिनट · चिह्न-पहचान खेल★चीज़ें कक्षा में घुमाइए। हर समूह को चिह्न ढूँढ़कर नाम बताना है। फिर तालिका बनवाइए — ISI = औद्योगिक उत्पाद · एगमार्क = कृषि उत्पाद (अनाज, खाद्य तेल) · हॉलमार्क = आभूषण · +F = खाद्य पदार्थ में पोषक तत्व मिलाना।
20–30 मिनट · ईमानदार बात! किताब की पंक्ति पढ़वाइए — “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना ज़रूरी नहीं होता।” और फिर पूछिए (यह अभ्यास प्रश्न 5 ही है) — “तो बाज़ार में बिना ISI/एगमार्क वाली चीज़ें क्यों मिलती हैं?” — उत्तर निकलवाइए और अनिवार्य प्रमाणन वाले चार उत्पाद लिखवाइए: एल.पी.जी. सिलिंडर्स · खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री · सीमेंट · बोतलबंद पेयजल।
30–40 मिनट · अभ्यास 7सीधे अभ्यास प्रश्न 7 कराइए — “शहद की बोतल और बिस्किट का पैकेट — किस पर कौन-सा चिह्न देखोगे और क्यों?” बच्चों से उत्तर बनवाइए।

📋 बोर्ड-कार्य

ISI — औद्योगिक उत्पाद | एगमार्क — कृषि उत्पाद | हॉलमार्क — आभूषण | +F — खाद्य में पोषक तत्व अनिवार्य प्रमाणन: एल.पी.जी. · खाद्य रंग · सीमेंट · बोतलबंद पेयजल “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना ज़रूरी नहीं होता।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

एगमार्क को हर खाने की चीज़ पर लगा देते हैं। सूत्र — “एगमार्क = खेत से आई चीज़ (अनाज, तेल, शहद, मसाले)। डिब्बाबंद बना-बनाया खाना = FSSAI।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “सोने की अँगूठी पर कौन-सा चिह्न देखोगे?”
  • गृहकार्य: “घर में पाँच चीज़ों पर चिह्न ढूँढ़ो और लिखो — चीज़ का नाम, चिह्न का नाम।”

कालांश 9 — आंदोलन की समीक्षा और COPRA 2019

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी आंदोलन की तीन उपलब्धियाँ और तीन कमियाँ बता पाए।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–15 मिनट · जो मिलाबोर्ड पर दो कॉलम। बाएँ में भरवाइए — COPRA 1986 और 2019 का संशोधन · त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र (भारत उन थोड़े देशों में है जहाँ विशिष्ट न्यायालय हैं) · 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन · ऑनलाइन शिकायत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग।
15–22 मिनट · 2019 का संशोधनतीन बातें — इंटरनेट से ख़रीद भी शामिल · सेवा प्रदाता और निर्माता भी ज़िम्मेदार, जेल तक · तीनों स्तरों पर मध्यस्थता। ★पूछिए — “2019 में यह जोड़ना क्यों पड़ा?” → “क्योंकि 1986 में ऑनलाइन ख़रीदारी थी ही नहीं।”
22–35 मिनट · जो रह गया! दाएँ कॉलम में भरवाइए — 2000 संगठनों में केवल 50-60 पूर्ण संगठित · प्रक्रिया “जटिल, ख़र्चीली और समय साध्य” · ★रसीद न मिलने से प्रमाण जुटाना कठिन · 35 वर्ष बाद भी उपभोक्ता ज्ञान धीरे-धीरे फैल रहा है।
35–40 मिनट · अंत★★किताब की और पूरी किताब की आख़िरी पंक्ति बोर्ड पर लिखिए और पूरी कक्षा से एक साथ बुलवाइए — “उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है।”

📋 बोर्ड-कार्य

✓ क्या मिला | ! क्या रह गया COPRA 1986 + 2019 संशोधन | केवल 50-60 संगठन पूर्ण संगठित त्रिस्तरीय तंत्र, विशिष्ट न्यायालय | प्रक्रिया जटिल, ख़र्चीली, समय साध्य 2000 से अधिक संगठन | ★रसीद नहीं मिलती → प्रमाण नहीं ऑनलाइन शिकायत, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग | 35 वर्ष बाद भी ज्ञान धीरे फैल रहा

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

5 अंक के उत्तर में बच्चे केवल उपलब्धियाँ लिख आते हैं। नियम बना दीजिए — “समीक्षा माने दोनों तरफ़ — जो मिला और जो रह गया। एक तरफ़ का उत्तर आधा उत्तर है।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “आंदोलन की एक उपलब्धि और एक कमी लिखो।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 11 (आंदोलन की समीक्षा) पूरा लिखकर लाना।

कालांश 10 — अभ्यास, पोस्टर और सर्वेक्षण

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी सीखा हुआ इस्तेमाल करे — मामले वर्गीकृत करे, पोस्टर बनाए और अपनी जागरूकता जाँचे।

🎒 आज ले जाइए — चार्ट पेपर, स्केच पेन; पृष्ठ 89 की प्रश्नावली की फ़ोटोकॉपी (या बच्चे कॉपी में उतार लें)।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–12 मिनट · वर्गीकरणपृष्ठ 85 का अभ्यास कक्षा में ही कराइए — लता (सुरक्षा) · जॉन (निवारण) · एक्सपायरी दवा (सूचना) · इक़बाल (सूचना) · एक ही ऑपरेटर (चयन) · ख़राब कैमरा (निवारण)।
12–20 मिनट · सही/ग़लतअभ्यास 13 कराइए। ★दो पर रुकिए — (क) “कोपरा केवल सामानों पर लागू होता है” = ग़लत (रेजी, अबिरामी, प्रकाश — तीनों सेवाओं के मामले हैं); और (च) “प्रक्रिया अत्यंत सरल और शीघ्र होती है” = ग़लत।
20–33 मिनट · पोस्टर★हर समूह को एक अधिकार दीजिए और चार्ट पेपर पर पोस्टर बनवाइए — अधिकार का नाम + एक चित्र + एक नारा। किताब के नारे मददगार हैं: “सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता है” · “ग्राहक, सावधान” · “अपने अधिकारों को पहचानो” · “उठो, जागो और तब तक मत रुको…” — आख़िरी वाला बच्चों से पूरा करवाइए।
33–40 मिनट · अपनी जाँचपृष्ठ 89 की 17 प्रश्नों वाली प्रश्नावली भरवाइए (चुपचाप, किसी को दिखाए बिना) और नीचे दी टिप्पणी से बच्चे ख़ुद अपना स्कोर समझें। ! किसी बच्चे का उत्तर न पूछिए, न पढ़िए। फिर रसीद-डायरी गिनवाइए — “किसे कितनी बार रसीद मिली?” और उसी पर अध्याय ख़त्म कीजिए।

📋 बोर्ड-कार्य (अध्याय का अंतिम बोर्ड)

छह अधिकार — सु-सू-च-नि-प्र-शि तारीख़ें — 1960 · 1985 · 1986 (24 दिसंबर) · 2005 · 2019 तंत्र — एक · दस · ऊपर ★“उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है।”

खंड ङ — विभेदित शिक्षण (हर बच्चा साथ चले)

किसके लिएक्या कीजिए
जो बहुत पीछे हैंइनसे केवल तीन चीज़ें पक्की करवाइए — (1) छह अधिकारों के नाम (सु-सू-च-नि-प्र-शि), (2) 1986 = COPRA, (3) रसीद ज़रूरी है। इन्हें लंबे उत्तर याद कराने का दबाव मत डालिए; इनसे चित्र और पोस्टर का काम कराइए, जिसमें ये अच्छा करते हैं और आत्मविश्वास आता है।
औसत बच्चेइनसे पाँच नाम पक्के करवाइए — रेजी · अमृता · अबिरामी · प्रकाश · अरिता — और हर नाम के साथ एक अधिकार जुड़वाइए। नाम याद हो जाएँ तो उत्तर अपने आप बन जाता है।
तेज़ बच्चेइन्हें अतिरिक्त काम दीजिए — (1) पृष्ठ 88 की श्रीमती कृष्णा वाली परियोजना — उनके लिए उपभोक्ता आयोग को पत्र लिखना; (2) “अगर तुम्हें COPRA में एक और अधिकार जोड़ना हो, तो कौन-सा और क्यों?”; (3) अपने ज़िले के उपभोक्ता आयोग का पता पता करके कक्षा को बताना।
जो बोलने में झिझकते हैंइनसे पर्ची पर लिखवाइए और आप पढ़कर सुनाइए — “यह एक साथी का जवाब है।” नाम मत लीजिए। कुछ हफ़्तों में ये ख़ुद बोलने लगते हैं।

खंड च — मूल्यांकन योजना

च.1 सतत मूल्यांकन (कक्षा के भीतर)

साधनकबक्या देखेंगे
निकास-पर्चीहर कालांश के अंत में, 2 मिनटआज की एक मुख्य बात पकड़ में आई या नहीं
पैकेट-जाँचकालांश 4क्या बच्चा छहों जानकारियाँ ढूँढ़ पाया
चिह्न-पहचान खेलकालांश 8चारों चिह्न पहचान पाया या नहीं
नौ सीढ़ियों का अभिनयकालांश 6क्रम समझ आया या नहीं
★रसीद-डायरीकालांश 6 से 10व्यवहार बदला या नहीं — यही अध्याय की असली परीक्षा है

च.2 लिखित मूल्यांकन

प्रकारअंकक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ1तारीख़ें, चिह्न, आयोगों की सीमाएँ
अति लघूत्तरीय2परिभाषाएँ — MRP, COPRA, क्लास एक्शन सूट
लघूत्तरीय3कोई एक अधिकार + उसका उदाहरण
दीर्घ उत्तरीय5छह अधिकार · आंदोलन की समीक्षा · शोषण के कारण
केस-आधारित4एक मामला देकर पूछें — कौन-सा अधिकार, कहाँ जाना चाहिए, क्या सबूत चाहिए

च.3 अंक काटने का नियम पहले ही बता दीजिएध्यान

  1. “समीक्षा” वाले प्रश्न में एक तरफ़ का उत्तर = आधे अंक।
  2. अधिकार का नाम लिखा पर उदाहरण नहीं दिया = अधूरा उत्तर। इस अध्याय में हर अधिकार के साथ एक उदाहरण अनिवार्य है।

खंड छ — परियोजना और क्षेत्र-कार्य

किताब का शिक्षक-निर्देश साफ़ कहता है —

“इस अध्याय में कई गतिविधियों को रखा गया है, जिनको पूरा करने के लिए विभिन्न संस्थाओं से संपर्क करने की आवश्यकता पड़ेगी। यात्राओं की ज़रूरत पड़ेगी।”

#परियोजनाकैसे
1★रसीद-डायरी (अनिवार्य, सबके लिए)कालांश 6 से अध्याय के अंत तक। तारीख़ · क्या ख़रीदा · रसीद मिली/नहीं। आख़िरी दिन गिनती।
2मोहल्ला सर्वेक्षणपृष्ठ 89 की 17 प्रश्नों वाली प्रश्नावली लेकर पाँच लोगों से भरवाना, फिर बताना कि कितने लोग पूरी तरह जागरूक निकले। (यह किताब की अपनी परियोजना 6 है।)
3पत्र-लेखनपृष्ठ 88 की श्रीमती कृष्णा वाली स्थिति — 6 महीने की वारंटी वाला टी.वी., तीन महीने में ख़राब, दुकान ने इंजीनियर भेजा पर ठीक नहीं हुआ। उनके लिए उपभोक्ता आयोग को पत्र लिखना। ★पत्र में बिल की तारीख़, वारंटी और माँग ज़रूर हो।
4उपभोक्ता जागरूकता सप्ताहपोस्टर, नारे और एक छोटी सभा। ★24 दिसंबर के आसपास हो तो सबसे अच्छा।
5साक्षात्कारचार-पाँच लोगों से बात कि वे कैसे शोषण का शिकार बने और उन्होंने क्या किया।
6विद्यालय उपभोक्ता क्लबकिताब की परियोजना 3 — विद्यालय की कैंटीन, पुस्तक केन्द्र और आसपास की दुकानों के लिए एक छोटी निगरानी टोली। ★यह अध्याय ख़त्म होने के बाद भी चलती रहनी चाहिए — यही आंदोलन में भागीदारी है।

★अगर एक ही परियोजना करा सकें, तो रसीद-डायरी कराइए। वह सबसे छोटी है, सबसे सस्ती है, और व्यवहार बदलने वाली अकेली है।

खंड ज — शिक्षक के लिए पाँच चेतावनियाँ

  1. !! भाषा के प्रति संवेदनशील रहिए। किताब स्वयं यह कहती है। कक्षा में कुछ बच्चे ऐसे परिवारों से होंगे जो रोज़ ठगे जाते हैं — क्योंकि उन्हें पढ़ना नहीं आता, या क्योंकि उनके पास दूसरी दुकान पर जाने का विकल्प नहीं है। किसी बच्चे या परिवार का नाम लेकर उदाहरण कभी मत दीजिए।

  2. ! किसी दुकान या व्यक्ति का नाम बोर्ड पर मत लिखिए। कहानियाँ सुनिए, नाम नहीं। अन्यथा बात कक्षा से बाहर जाकर बच्चे के लिए मुसीबत बन सकती है।

  3. ! दुकानदार को खलनायक मत बना दीजिए। किताब कहती है कि “अधिकांश ख़रीददारियाँ छोटे फुटकर दुकानों से होती हैं” — और वे भी इसी अर्थव्यवस्था के छोटे लोग हैं। निशाना व्यक्ति नहीं, व्यवस्था है। यही संतुलन अध्याय 3 में साहूकार के साथ भी रखा था।

  4. ! यह अध्याय व्याख्यान से मत पढ़ाइए। किताब का निर्देश है — “इन मुद्दों पर छात्रों का समूहों में विचार-विमर्श करना बेहतर होगा।” अगर किसी कालांश में बच्चों ने एक बार भी नहीं बोला, तो वह कालांश अधूरा गया।

  5. ★और आख़िरी बात — यह पूरी किताब का आख़िरी अध्याय है। अंतिम कालांश में दो मिनट निकालकर पूरी किताब का धागा जोड़िए —

“अध्याय 1 में हमने पूछा था — विकास क्या है। अध्याय 2 में देखा कि लोग काम कहाँ करते हैं। अध्याय 3 में देखा कि पैसा और कर्ज़ कैसे चलता है। अध्याय 4 में देखा कि दुनिया कैसे जुड़ गई। ★और अध्याय 5 में हमने यह देखा कि इस पूरे बाज़ार में तुम्हारा अपना हक़ क्या है।* *पहले चार अध्यायों में तुम दर्शक थे। इस आख़िरी अध्याय में तुम खिलाड़ी हो।”