RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार · कुल 60 प्रश्न
खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
1भारत में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम (COPRA) कब बना?
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सही उत्तर: (स) 1986
2राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है
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सही उत्तर: (स) 24 दिसंबर
3संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा-निर्देश कब अपनाए?
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सही उत्तर: (ब) 1985
4RTI (सूचना पाने का अधिकार) क़ानून लागू हुआ
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सही उत्तर: (स) अक्टूबर 2005 में
5COPRA में संशोधन हुआ
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सही उत्तर: (द) 2019
6भारत में व्यवस्थित उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ
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सही उत्तर: (ब) 1960 के दशक में
7उपभोक्ता इंटरनेशनल आज कितने देशों की संस्थाओं का संरक्षक है?
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सही उत्तर: (ब) 100 से अधिक
8उपभोक्ता इंटरनेशनल से कितनी संस्थाएँ जुड़ी हैं?
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सही उत्तर: (ब) 200
9जिला उपभोक्ता आयोग कितने तक के दावों पर विचार करता है?
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सही उत्तर: (स) 1 करोड़
10राज्य आयोग किन दावों को देखता है?
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सही उत्तर: (ब) 1 करोड़ से 10 करोड़ तक
11राष्ट्रीय आयोग किन दावों को देखता है?
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सही उत्तर: (स) 10 करोड़ से ऊपर
12एगमार्क किन उत्पादों पर लगता है?
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सही उत्तर: (ब) कृषि उत्पाद
13हॉलमार्क किसकी गुणवत्ता का प्रमाण है?
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सही उत्तर: (स) आभूषण
14ISI चिह्न जारी करता है
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सही उत्तर: (ब) भारतीय मानक ब्यूरो
15MRP का अर्थ है
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सही उत्तर: (ब) अधिकतम खुदरा मूल्य
16रेजी मैथ्यू किस राज्य का था?
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सही उत्तर: (स) केरल
17अबिरामी ने कोचिंग संस्थान में कितने रुपये जमा किए थे?
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सही उत्तर: (स) 61,020
18भारत में आज कितने उपभोक्ता संगठन हैं?
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सही उत्तर: (द) 2000 से अधिक
19इनमें से कितने संगठन पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं?
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सही उत्तर: (अ) केवल 50-60
20जब उपभोक्ता एक समूह के रूप में शिकायत दर्ज कराते हैं तो उसे कहते हैं
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सही उत्तर: (ब) क्लास एक्शन सूट
खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
1बाज़ार में हमारी भागीदारी ______ और ______ दोनों रूपों में होती है।
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बाज़ार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में होती है।
2अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को ______ स्थिति में पाता है।
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अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमज़ोर स्थिति में पाता है।
3उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम ______ को ______ के नाम से जाना जाता है।
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उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 को COPRA के नाम से जाना जाता है।
4उपभोक्ता ______ से ______ दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं।
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उपभोक्ता MRP से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं।
5रेजी मैथ्यू का मामला पहले ______ समिति ने ख़ारिज कर दिया था, पर ______ समिति ने अस्पताल को दोषी पाया।
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रेजी मैथ्यू का मामला पहले राज्य समिति ने ख़ारिज कर दिया था, पर राष्ट्रीय समिति ने अस्पताल को दोषी पाया।
6______ में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा-निर्देश अपनाए।
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1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा-निर्देश अपनाए।
7दंतमंजन के साथ ब्रश लेने का दबाव ______ के अधिकार का उल्लंघन है।
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दंतमंजन के साथ ब्रश लेने का दबाव चयन के अधिकार का उल्लंघन है।
8उपभोक्ता आयोग में शिकायत ______ भी दर्ज कराई जा सकती है।
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उपभोक्ता आयोग में शिकायत वकील की सेवा के बिना भी दर्ज कराई जा सकती है।
9______ के लिए प्रमाणन ______ होता है।
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एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल के लिए प्रमाणन अनिवार्य होता है।
10COPRA में ______ के संशोधन के बाद ______ के माध्यम से की गई ख़रीद भी इसमें शामिल है।
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COPRA में 2019 के संशोधन के बाद इंटरनेट के माध्यम से की गई ख़रीद भी इसमें शामिल है।
खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न
1COPRA केवल वस्तुओं पर लागू होता है, सेवाओं पर नहीं।
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ग़लत
2MRP से कम दाम पर मोल-भाव करना उपभोक्ता का अधिकार है।
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सही
3उपभोक्ता निवारण की प्रक्रिया अत्यंत सरल और शीघ्र होती है।
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ग़लत (किताब: “जटिल, ख़र्चीली और समय साध्य”)
4सभी उत्पादकों के लिए ISI या एगमार्क प्रमाणन लेना अनिवार्य है।
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ग़लत
5जिला आयोग में मुक़दमा ख़ारिज हो जाए तो राज्य और फिर राष्ट्रीय आयोग में अपील की जा सकती है।
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सही
खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न
1उपभोक्ता किसे कहते हैं?
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वह व्यक्ति जो अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुएँ या सेवाएँ ख़रीदता है और उनका उपभोग करता है। किताब के अनुसार — “उपभोक्ता के रूप में लोगों द्वारा उपभोग किए जानेवाली ये अंतिम वस्तुएँ होती हैं।”
2COPRA क्या है?
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उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986, जिसे COPRA कहते हैं। इसे 24 दिसंबर 1986 को भारतीय संसद ने पारित किया; इसने उपभोक्ता को छह अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र दिया। 2019 में इसमें संशोधन हुआ।
3MRP का क्या अर्थ है और उपभोक्ता को इससे क्या हक़ मिलता है?
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MRP का अर्थ है अधिकतम खुदरा मूल्य। “यदि कोई व्यक्ति मुद्रित मूल्य से अधिक मूल्य पर वस्तु बेचता है तो कोई भी उसका विरोध और शिकायत कर सकता है।” ★और इससे भी बड़ी बात — “उपभोक्ता, विक्रेता से MRP से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं।” यानी MRP सबसे ऊँची क़ीमत है, तय क़ीमत नहीं।
4उपभोक्ता इंटरनेशनल क्या है?
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उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था। 1985 में संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के बाद यह “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आंदोलन का आधार” बनी। आज यह “100 से भी अधिक देशों के 200 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था” है।
5क्लास एक्शन सूट क्या है?
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जब उपभोक्ता एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक समूह के रूप में मिलकर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उसे क्लास एक्शन सूट कहा जाता है।
6एगमार्क और ISI में क्या अंतर है?
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एगमार्क — कृषि उत्पादों (अनाज और खाद्य तेल) की गुणवत्ता का प्रमाण।
ISI — भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा औद्योगिक उत्पादों को दिया जाने वाला गुणवत्ता चिह्न।
7किन उत्पादों के लिए प्रमाणन अनिवार्य होता है और क्यों?
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एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल। क्योंकि ये ऐसे उत्पाद हैं जो “उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है।”
8सुरक्षा का अधिकार क्या है?
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“जब हम एक उपभोक्ता के रूप में बहुत-सी वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, तो हमें वस्तुओं के बाज़ारीकरण और सेवाओं की प्राप्ति के ख़िलाफ़ सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए ख़तरनाक होते हैं।” उदाहरण — प्रेशर कुकर का सेफ़्टी वॉल्व।
9निवासी कल्याण संघ उपभोक्ता की क्या मदद करता है?
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“यदि उनके किसी सदस्य के साथ कोई अनुचित व्यावसायिक कार्रवाई होती है, तो उनकी तरफ़ से संस्था मामले को देखती है।” — यह प्रतिनिधित्व के अधिकार का सबसे नज़दीकी उदाहरण है।
10राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
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24 दिसंबर को — क्योंकि “1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया था।”
खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न
1बाज़ार में उपभोक्ता का शोषण किन-किन तरीक़ों से होता है?
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कम वज़न तौलना — “दुकानदार उचित वज़न से कम वज़न तौलते हैं”;
बिना बताए शुल्क जोड़ना — “व्यापारी उन शुल्कों को जोड़ देते हैं, जिनका वर्णन पहले न किया गया हो”;
मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना;
ग़लत सूचना और भ्रामक विज्ञापन — बड़ी कंपनियाँ “उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए… मीडिया और अन्य स्रोतों से ग़लत सूचना” देती हैं;
बाज़ार की असमान शक्ति — “जब उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली होते हैं और उपभोक्ता… बिखरे हुए होते हैं, तो बाज़ार उचित तरीक़े से कार्य नहीं करता”;
जबरदस्ती जोड़ी गई ख़रीद और रसीद न देना।
2“अकेला उपभोक्ता कमज़ोर होता है” — समझाइए।
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किताब कहती है — “अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमज़ोर स्थिति में पाता है।” शिकायत होने पर “विक्रेता सारा उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने का प्रयास करता है” और उसकी प्रतिक्रिया होती है — “आपने जो ख़रीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” “मानो, बिक्री हो जाने के बाद विक्रेता की कोई ज़िम्मेदारी नहीं रह जाती।”
दूसरी ओर उत्पादक “थोड़े और शक्तिशाली” होते हैं और उपभोक्ता “कम मात्रा में ख़रीददारी” करते हैं और “बिखरे हुए” होते हैं। इसी असमानता के कारण नियमों और विनियमों की आवश्यकता पड़ती है, और उपभोक्ता आंदोलन “इस स्थिति को बदलने का एक प्रयास” है।
3भारत में उपभोक्ता आंदोलन का विकास बताइए।
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भारत में यह आंदोलन ‘सामाजिक बल’ के रूप में जन्मा, “अनैतिक और अनुचित व्यवसाय कार्यों से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता के साथ।”
1960 के दशक — अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट के कारण व्यवस्थित रूप में आंदोलन का उदय हुआ;
1970 के दशक तक उपभोक्ता संस्थाएँ “उपभोक्ता अधिकार से संबंधित आलेखों के लेखन और प्रदर्शनी” करने लगीं और सड़क यात्री परिवहन में भीड़-भाड़ तथा राशन दुकानों के अनुचित कार्यों पर नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल बनाए;
1986 में इसी दबाव का परिणाम COPRA के रूप में आया, और 2019 में उसका संशोधन हुआ। आज “भारत में उपभोक्ता दलों की संख्या में भारी वृद्धि” हुई है।
4सूचना का अधिकार क्या है? पैकेट पर कौन-सी जानकारियाँ अनिवार्य हैं?
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उपभोक्ता को “जिन वस्तुओं और सेवाओं को ख़रीदता है, उसके बारे में उसे सूचना पाने का अधिकार है”; और तब वह “किसी भी प्रकार की ख़राबी होने पर शिकायत कर सकता है, मुआवजा पाने या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है।”
अनिवार्य जानकारियाँ वस्तु के अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख़, ख़राब होने की अंतिम तिथि और वस्तु बनाने वाले का पता। दवा पर “उचित प्रयोग के बारे में निर्देश” तथा “अन्य प्रभावों और ख़तरों से संबंधित जानकारी”, और वस्त्र पर “धुलाई संबंधी निर्देश” भी।
क्यों ज़रूरी“यदि वस्तु ख़राब होने की अंतिम समय-सीमा उस पर नहीं छपी है, तब विनिर्माता दुकानदार पर आरोप लगा देगा और अपनी ज़िम्मेदारी नहीं मानेगा।”
5चयन का अधिकार समझाइए और दो उदाहरण दीजिए।
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“किसी भी उपभोक्ता को… चाहे वह किसी भी आयु या लिंग का हो और किसी भी तरह की सेवा प्राप्त करता हो, उसको सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार होगा।”
उदाहरण1 — दुकानदार कहे कि दंतमंजन तभी मिलेगा जब ब्रश भी ख़रीदोगे — “अगर आप ब्रश ख़रीदने के इच्छुक नहीं हैं, तब आपके चुनने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।”
उदाहरण2 — नया गैस कनेक्शन लेते समय डीलर साथ में चूल्हा लेने का दबाव डाले।
सबसे बड़ा उदाहरण — अबिरामी, जिसे कोचिंग संस्थान ने पाठ्यक्रम छोड़ने पर पैसे लौटाने से मना किया; जिला आयोग ने 28,000 लौटाने का आदेश दिया “यह कहते हुए कि छात्रा को चुनने का अधिकार है।”
6उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने की प्रक्रिया बताइए।
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(प्रकाश का उदाहरण)
पहले समस्या की जगह पर शिकायत — प्रकाश ने पोस्ट-ऑफ़िस में पूछताछ की, पर “संतोषजनक जवाब नहीं” मिला;
फिर ★क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह — सीधे अदालत नहीं;
फिर नज़दीकी उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मुक़दमा दर्ज, रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म भरा; “अदालत दूसरे पक्ष को नोटिस भेजती है”;
★प्रकाश ने स्वयं बहस की — क्योंकि उपभोक्ता “स्वयं किसी वकील के साथ अथवा वकील की सेवा के बिना” शिकायत दर्ज करा सकता है;
जज ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं;
फिर फ़ैसला सुनाया।
★इससे यही सिद्ध होता है कि यह रास्ता आम आदमी के लिए बना है।
7त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र समझाइए।
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COPRA के तहत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र बना है —
जिला प्राधिकरण / जिला उपभोक्ता आयोग — 1 करोड़ तक के दावों से संबंधित मुक़दमों पर विचार;
राज्य आयोग — 1 करोड़ से 10 करोड़ तक;
राष्ट्रीय आयोग — 10 करोड़ से ऊपर।
अपील का रास्ता ★ “यदि कोई मुक़दमा जिला स्तर के आयोग में ख़ारिज कर दिया जाता है, तो उपभोक्ता राज्य स्तर के आयोग में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर के आयोग में भी अपील कर सकता है।” रेजी के पिता ने यही किया था।
8मानक चिह्नों का क्या महत्त्व है? फिर भी बाज़ार में बिना प्रमाणन वाली वस्तुएँ क्यों मिलती हैं?
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महत्त्व “जब उपभोक्ता कोई वस्तु या सेवाएँ ख़रीदता है, तो ये शब्दचिह्न (लोगो) और प्रमाणक चिह्न उन्हें अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में मदद करते हैं।” प्रमाणन संस्थाएँ उत्पादकों को “श्रेष्ठ गुणवत्ता पालन करने की स्थिति में” ही चिह्न प्रयोग की अनुमति देती हैं। मुख्य चिह्न — ISI (औद्योगिक), एगमार्क (कृषि), हॉलमार्क (आभूषण), +F (फूड फ़ोर्टिफ़िकेशन)।
! फिर भी क्यों — क्योंकि किताब स्वयं कहती है — “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना ज़रूरी नहीं होता।” प्रमाणन केवल उन उत्पादों पर अनिवार्य है जो “उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है” — जैसे एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल। साथ ही “इन नियमों का पर्यवेक्षण उचित रूप से नहीं हो रहा है और उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज़्यादा मजबूत नहीं है।”
खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 7 प्रश्न
1★★उपभोक्ता के छह अधिकारों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
सुरक्षा का अधिकार — “हमें वस्तुओं के बाज़ारीकरण और सेवाओं की प्राप्ति के ख़िलाफ़ सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए ख़तरनाक होते हैं।” उत्पादकों को सुरक्षा नियमों और विनियमों का पालन करना चाहिए — जैसे प्रेशर कुकर के सेफ़्टी वॉल्व की उच्च गुणवत्ता। उदाहरण — रेजी मैथ्यू, जो अनुचित बेहोशी के कारण जीवन भर के लिए अपंग हो गया।
सूचना का अधिकार — पैकेट पर अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण तिथि, ख़राब होने की अंतिम तिथि और निर्माता का पता देना अनिवार्य है; दवा पर प्रयोग के निर्देश और ख़तरों की जानकारी, वस्त्र पर धुलाई के निर्देश। इसी का विस्तार RTI (अक्टूबर 2005) है। उदाहरण — अमृता, जिसे RTI से न केवल देरी का कारण पता चला बल्कि नियुक्ति का बुलावा पत्र भी मिला।
चयन का अधिकार — “किसी भी उपभोक्ता को… सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार होगा।” दंतमंजन के साथ ब्रश या गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा थोपना इसका उल्लंघन है। उदाहरण — अबिरामी, जिसे 28,000 रुपये वापस मिले और संस्थान पर 25,000 का दंड लगा।
क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार — “यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।” उपभोक्ता वकील के बिना भी और इंटरनेट के माध्यम से भी शिकायत कर सकता है। उदाहरण — श्री प्रकाश, जिनका मनीऑर्डर बेटी तक नहीं पहुँचा।
प्रतिनिधित्व का अधिकार — उपभोक्ता संरक्षण परिषदें “इन आयोगों में व्यक्ति विशेष (उपभोक्ता) का प्रतिनिधित्व भी करते हैं”; निवासी कल्याण संघ भी अपने सदस्य की तरफ़ से मामला देखता है। अधिनियम ने “उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार देकर हमें समर्थ बनाया” है।
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार — उपभोक्ता को अपने अधिकारों की जानकारी पाने का हक़ है, क्योंकि “एक जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए निपुणता और ज्ञान प्राप्त करने की ज़रूरत होती है।”
2बाज़ार में नियमों और विनियमों की आवश्यकता क्यों पड़ती है? उदाहरण सहित।
उत्तर देखिए
मूल कारण“अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमज़ोर स्थिति में पाता है।” शिकायत पर “विक्रेता सारा उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने का प्रयास करता है” और कहता है “आपने जो ख़रीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।”
छोटे स्तर का शोषण (1) कम वज़न तौलना; (2) बिना बताए शुल्क जोड़ना; (3) मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना।
बड़े स्तर का शोषण “जब उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली होते हैं और उपभोक्ता… बिखरे हुए होते हैं, तो बाज़ार उचित तरीक़े से कार्य नहीं करता।” बड़ी कंपनियाँ “चालाकीपूर्वक बाज़ार को प्रभावित” करती हैं और “मीडिया और अन्य स्रोतों से ग़लत सूचना” देती हैं।
किताब के दो प्रमाण (1) एक कंपनी ने “माता के दूध से हमारा उत्पाद बेहतर है” का दावा करके वर्षों तक शिशु दूध पाउडर बेचा, और “कई वर्षों के लगातार संघर्ष के बाद कंपनी को यह स्वीकार करना पड़ा कि वह झूठे दावे करती आ रही थी”; (2) सिगरेट कंपनियों से यह मनवाने के लिए कि उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है, न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।
इसीलिए जैसे असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों, साहूकारों की ऊँची ब्याज दर और पर्यावरण के लिए नियम ज़रूरी हैं, वैसे ही “उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियम और विनियमों की आवश्यकता है।”
3भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत, विकास और उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
शुरुआत आंदोलन का प्रारंभ उपभोक्ताओं के असंतोष से हुआ, क्योंकि “विक्रेता कई अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में शामिल” थे और “बाज़ार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई क़ानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।” पहले असंतुष्ट उपभोक्ता के पास केवल ख़रीदना बंद कर देने का रास्ता था, और “यह मान लिया जाता था कि उपभोक्ता की ज़िम्मेदारी है कि वह ख़रीदते वक़्त सावधानी बरते।”
विकास भारत में यह ‘सामाजिक बल’ के रूप में जन्मा। 1960 के दशक में खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी और मिलावट ने इसे व्यवस्थित रूप दिया। 1970 के दशक तक आलेख-लेखन, प्रदर्शनी और उपभोक्ता दल (राशन दुकानें, सड़क परिवहन) का काम शुरू हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय समर्थन1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा-निर्देश अपनाए, जो “‘उपभोक्ता की वकालत करने वाले समूह’ के लिए, एक हथियार” बने; और उपभोक्ता इंटरनेशनल आज 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाओं का संरक्षक है।
उपलब्धियाँ (1) 1986 में COPRA और 2019 में उसका संशोधन; (2) त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र — “भारत उन देशों में से एक है, जहाँ… विशिष्ट न्यायालय हैं”; (3) 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन; (4) अब ऑनलाइन शिकायत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा; (5) 24 दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस।
4★भारत में उपभोक्ता आंदोलन की सीमाओं/कमियों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर देखिए
किताब स्वयं आंदोलन की ईमानदार समीक्षा करती है —
संगठनों की गुणवत्ता — “आज देश में 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन हैं, जिनमें से केवल 50-60 ही अपने कार्यों के लिए पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं।”
प्रक्रिया — “उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया जटिल, ख़र्चीली और समय साध्य साबित हो रही है”; “कई बार उपभोक्ताओं को वकीलों का सहारा लेना पड़ता है”; और मुक़दमे “काफ़ी समय लेते हैं।”
★सबूत की समस्या — “अधिकांश ख़रीददारियों के समय रसीद नहीं दी जाती हैं, ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता”, और “बाज़ार में अधिकांश ख़रीददारियाँ छोटे फुटकर दुकानों से होती हैं।”
जागरूकता — “कोपरा के अधिनियम के 35 वर्ष बाद भी भारत में उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे-धीरे फैल रहा है।”
क़ानून का पालन — “श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए क़ानूनों के लागू होने के बावजूद, ख़ास तौर से असंगठित क्षेत्र में ये कमज़ोर हैं। इस प्रकार, बाज़ारों के कार्य करने के लिए नियमों और विनियमों का प्राय: पालन नहीं होता।”
निष्कर्ष ★ “फिर भी, उपभोक्ताओं को अपनी भूमिका और अपना महत्त्व समझने की ज़रूरत है… उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की ज़रूरत है।”
5एक जागरूक उपभोक्ता के कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
किताब कहती है — “जब हम… अपने अधिकारों के प्रति सचेत होंगे, तब हम अच्छे और बुरे में फ़र्क करने तथा श्रेष्ठ चुनाव करने में सक्षम होंगे। एक जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए निपुणता और ज्ञान प्राप्त करने की ज़रूरत होती है।”
★हर ख़रीद पर रसीद माँगना और उसे सुरक्षित रखना — क्योंकि रसीद के बिना “प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता”;
पैकेट पर अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण तिथि, अंतिम तिथि और निर्माता का पता जाँचना;
ISI, एगमार्क, हॉलमार्क जैसे मानक चिह्न देखना;
MRP से अधिक क़ीमत न देना, और यह जानना कि MRP से कम पर मोल-भाव किया जा सकता है;
वज़न और माप की जाँच करना;
अनचाही जुड़ी ख़रीद स्वीकार न करना, क्योंकि यह चयन के अधिकार का उल्लंघन है;
भ्रामक विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करना;
ठगे जाने पर चुप न रहना — पहले विक्रेता से, फिर उपभोक्ता संरक्षण परिषद् से, और ज़रूरत हो तो उपभोक्ता आयोग में शिकायत करना;
और दूसरों को भी जागरूक बनाना, क्योंकि आंदोलन “सक्रिय भागीदारी” से ही चलता है।
6COPRA 1986 और उसमें 2019 के संशोधन का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
COPRA 1986 उपभोक्ता आंदोलन के दबाव के परिणामस्वरूप “1986 में भारत सरकार द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया… उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 क़ानून का बनना, जो COPRA के नाम से प्रसिद्ध है।” इसने —
उपभोक्ता को छह अधिकार दिए — सुरक्षा, सूचना, चयन, निवारण, प्रतिनिधित्व और उपभोक्ता शिक्षा;
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र बनाया — क्रमश: 1 करोड़ तक, 1 से 10 करोड़, और 10 करोड़ से ऊपर के दावों के लिए;
केंद्र और राज्य सरकारों में उपभोक्ता मामले के अलग विभाग स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई;
उपभोक्ता को “उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार देकर… समर्थ बनाया।”
★2019 का संशोधन — “उपभोक्ता के अधिकारों को मज़बूती देने हेतु” —
“अब इंटरनेट के माध्यम से ख़रीद भी शामिल है”;
“यदि कोई सेवा में कमी या दोषपूर्ण उत्पाद है, तो सेवा प्रदाता और निर्माता को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा और दंडित किया जाएगा। यहाँ तक कि जेल भी हो सकती है।”;
“तटस्थ मध्यस्थ की सहायता से विवादों के निपटारे को अब उपभोक्ता आयोग के सभी तीन स्तरों पर प्रोत्साहित किया गया है।”
7★रेजी, अबिरामी और प्रकाश के उदाहरणों से उपभोक्ता जागरूकता का महत्त्व सिद्ध कीजिए।
उत्तर देखिए
रेजी मैथ्यू (सुरक्षा का अधिकार) केरल का कक्षा 9 का स्वस्थ लड़का टॉन्सिल के ऑपरेशन में अनुचित बेहोशी के कारण जीवन भर के लिए अपंग हो गया। पिता ने राज्य समिति में 5,00,000 का मुआवजा माँगा, पर समिति ने “सबूत पर्याप्त नहीं” कहकर ख़ारिज कर दिया। ★उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय समिति में अपील की — जहाँ “अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और हर्ज़ाना देने का निर्देश दिया।” सबक़ — हार जाने का मतलब रास्ता ख़त्म होना नहीं है।
अबिरामी (चयन का अधिकार) कोचिंग संस्थान में 61,020 रुपये जमा किए, पर पढ़ाई का स्तर ठीक नहीं मिला और पैसे लौटाने से मना कर दिया गया। जिला आयोग ने 28,000 लौटाने का आदेश दिया; संस्थान की बेकार अपील पर राज्य आयोग ने उस पर 25,000 का दंड लगाया और 7,000 मुआवजा भी दिलाया — और आगे के लिए सभी संस्थानों को पूरे साल की फ़ीस एडवांस लेने से मना कर दिया। सबक़ — कुछ फ़ैसले एक आदमी के लिए नहीं, सबके लिए होते हैं।
श्री प्रकाश (निवारण का अधिकार) बेटी की शादी के लिए भेजा मनीऑर्डर महीनों बाद भी नहीं पहुँचा और पोस्ट-ऑफ़िस ने “संतोषजनक जवाब नहीं” दिया। उन्होंने पहले क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह ली, फिर जिला आयोग में मुक़दमा दर्ज किया और ★वकील के बिना स्वयं बहस की। सबक़ — यह रास्ता आम आदमी के लिए बना है।
तीनों से एक ही बात सिद्ध होती है ★ अधिकार तो 1986 से मौजूद थे, पर वे इन तीनों के काम इसलिए आए क्योंकि इन्हें अपने अधिकार का पता था और इन्होंने चुप रहना स्वीकार नहीं किया। इसीलिए किताब कहती है — “उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है।”