अध्याय 3मुद्रा और साख

प्रश्न बैंक38 मिनट

हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है।

★तीन सलाह — 1. हर उत्तर में किताब का उदाहरण दीजिए — सलीम, स्वप्ना, श्यामल, अरुण, रमा, मेघा। 2. आँकड़ा और ब्याज दर ज़रूर लिखिए — 15%, 8.5%, 60%, 83/46। 3. जहाँ दो पक्ष हों (ऋण अच्छा या बुरा), वहाँ दोनों लिखिए — तभी पूरे अंक मिलते हैं।


भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)

1मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहते हैं?

उत्तर देखिए

क्योंकि मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है।

2आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है?

उत्तर देखिए

वह स्थिति जब दोनों पक्ष एक-दूसरे से चीज़ें ख़रीदने और बेचने पर सहमति रखते हों; अर्थात् एक व्यक्ति जो वस्तु बेचना चाहता है, वही वस्तु दूसरा ख़रीदना भी चाहता हो।

3वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

वह प्रणाली जहाँ मुद्रा का उपयोग किये बिना वस्तुओं का विनिमय होता है।

4मुद्रा दोहरे संयोग की समस्या कैसे हल करती है?

उत्तर देखिए

मुद्रा महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत को ख़त्म कर देती है।

5आधुनिक मुद्रा में क्या-क्या शामिल है?

उत्तर देखिए

करेंसी — काग़ज़ के नोट और सिक्के।

6प्रारंभिक काल में भारत में क्या मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होता था?

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अनाज और पशु।

7आधुनिक मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?

उत्तर देखिए

क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है।

8भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?

उत्तर देखिए

भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ से।

9क्या कोई व्यक्ति या संस्था मुद्रा जारी कर सकता है?

उत्तर देखिए

नहीं; भारतीय क़ानून के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है।

10क्या कोई रुपयों में अदायगी लेने से मना कर सकता है?

उत्तर देखिए

नहीं; भारत में कोई व्यक्ति क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।

1110 रुपये के नोट पर क्या लिखा होता है?

उत्तर देखिए

“मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हूँ”, और उस पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।

12लोग बैंकों में धन क्यों जमा करते हैं?

उत्तर देखिए

क्योंकि इससे उनका धन सुरक्षित रहता है, उस पर सूद मिलता है और आवश्यकता के अनुसार धन निकालने की सुविधा भी होती है।

13माँग जमा किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

बैंक खातों में जमा वह धन, जिसे माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है।

14चैक क्या है?

उत्तर देखिए

एक ऐसा काग़ज़ जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक ख़ास रकम का भुगतान करने का आदेश देता है।

15माँग जमा को मुद्रा क्यों समझा जाता है?

उत्तर देखिए

क्योंकि माँग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है।

16★बैंक जमा का कितना हिस्सा नकद रखते हैं?

उत्तर देखिए

लगभग 15 प्रतिशत।

17बैंक इतना ही नकद क्यों रखते हैं?

उत्तर देखिए

क्योंकि किसी एक विशेष दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने के लिए आते हैं।

18बैंक जमा राशि के बड़े भाग का क्या करते हैं?

उत्तर देखिए

उसे ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

19★बैंक की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?

उत्तर देखिए

कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिये गये ब्याज के बीच का अंतर।

20★ऋण की परिभाषा दीजिए।

उत्तर देखिए

ऋण एक ऐसी सहमति है जहाँ साहूकार कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में भविष्य में भुगतान करने का वादा लेता है।

21सलीम को कितने जूतों का ऑर्डर मिला था?

उत्तर देखिए

3000 जोड़ी जूते, जिन्हें एक महीने के अंदर पूरा करना था।

22सलीम ने किन दो स्रोतों से ऋण लिया?

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चमड़ा व्यापारी से (बाद में भुगतान का वादा) और बड़े व्यापारी से (1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान)।

23स्वप्ना के पास कितनी ज़मीन थी और वह क्या उगाती थी?

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3 एकड़ ज़मीन; वह मूँगफली उगाती थी।

24स्वप्ना की फसल क्यों बर्बाद हुई?

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कीटनाशकों के हमले से।

25★कर्ज़-जाल किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

वह स्थिति जब ऋण कमाई बढ़ाने के बजाय स्थिति बदतर कर दे और कर्ज़दार को ऐसी परिस्थिति में धकेल दे जहाँ से बाहर निकलना काफ़ी कष्टदायक हो।

26★★ऋण उपयोगी होगा या नहीं — यह किस पर निर्भर करता है?

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परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर।

27ग्रामीण क्षेत्रों में साख की मुख्य माँग किसलिए होती है?

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फसल उगाने के लिए।

28आगत ख़रीदने और फसल बिकने के बीच कितना अंतराल होता है?

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कम से कम 3-4 महीने।

29★ऋण की शर्तें क्या-क्या हैं?

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ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीक़े।

30★समर्थक ऋणाधार की परिभाषा दीजिए।

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ऐसी संपत्ति, जिसका मालिक कर्ज़दार है और जिसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारंटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान न हो जाए।

31समर्थक ऋणाधार के उदाहरण दीजिए।

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भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु तथा बैंकों में जमा पूँजी।

32यदि कर्ज़दार उधार न लौटा पाए तो?

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उधारदाता को भुगतान प्राप्ति के लिए संपत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।

33मेघा ने कितने का और कितने वर्षों का ऋण लिया?

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5 लाख रुपये का, 10 साल के लिए।

34मेघा के ऋण की ब्याज दर और अदायगी का स्वरूप क्या था?

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12 प्रतिशत वार्षिक; मासिक किस्तों में अदायगी।

35मेघा को कौन-से कागज़ात दिखाने पड़े और ऋणाधार क्या था?

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नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड; ऋणाधार के रूप में बैंक ने घर के सभी कागज़ रख लिए।

36श्यामल के पास कितनी ज़मीन है?

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1.5 एकड़।

37श्यामल महाजन को कितना ब्याज देता था?

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5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक।

38अब श्यामल किससे और कितने ब्याज पर ऋण लेता है?

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गाँव के एक व्यापारी से, 3 प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर।

39व्यापारी श्यामल से क्या वादा लेता है?

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कि वह अपनी फसल उसी को बेचेगा।

40अरुण के पास कितनी ज़मीन है और वह किससे ऋण लेता है?

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7 एकड़; वह बैंक से ऋण लेता है।

41★अरुण की ब्याज दर और अवधि क्या है?

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8.5 प्रतिशत वार्षिक; इसे अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटाया जा सकता है।

42रमा कौन है और उसे किससे ऋण मिलता है?

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एक भूमिहीन कृषि मज़दूर; उसे अपने भूस्वामी-नियोक्ता से ऋण मिलता है।

43रमा किस दर पर ऋण लेती है और कैसे चुकाती है?

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5 प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर; वह कर्ज़ भूस्वामी के यहाँ काम करके वापस करती है।

44रमा को अभी कितने रुपये देने हैं?

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5,000 रुपये।

45कृषक सहकारी समिति के कितने सदस्य हैं?

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2300 किसान सदस्य।

46सहकारी समिति बैंक से बड़ा ऋण कैसे लेती है?

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सदस्यों से प्राप्त जमा पूँजी को ऋणाधार मानकर।

47★ऋण के औपचारिक स्रोत कौन-से हैं?

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बैंक और सहकारी समितियाँ।

48अनौपचारिक ऋणदाता कौन हैं?

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साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त इत्यादि।

49आलेख 1 के अनुसार सबसे बड़ा ऋण-स्रोत कौन है?

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व्यावसायिक बैंक — 51 प्रतिशत।

50साहूकार का हिस्सा कितना है?

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23 प्रतिशत।

51सहकारी समितियों/बैंक तथा रिश्तेदार-मित्रों का हिस्सा कितना है?

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क्रमश: 10 प्रतिशत और 7 प्रतिशत।

52★आर.बी.आई. बैंकों पर किन बातों की नज़र रखता है?

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कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं; कि वे छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दे रहे हैं; और वे कितना, किनको तथा किस ब्याज दर पर ऋण दे रहे हैं।

53★अनौपचारिक क्षेत्रक की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

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वहाँ ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है; वे ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं और उन्हें नाजायज़ तरीक़ों से पैसे वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं है।

54★आलेख 2 के अनुसार गरीब शहरी परिवारों का कितना ऋण अनौपचारिक स्रोतों से आता है?

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54 प्रतिशत।

55★अमीर परिवारों का कितना ऋण औपचारिक स्रोतों से आता है?

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83 प्रतिशत; केवल 17 प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से।

56★औपचारिक स्रोत ग्रामीण परिवारों की कितनी ऋण-ज़रूरत पूरी करते हैं?

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केवल 50 प्रतिशत।

57गरीब बैंकों से ऋण क्यों नहीं ले पाते?

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ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है।

58साहूकार बिना ऋणाधार के ऋण क्यों दे देते हैं?

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क्योंकि वे कर्ज़दारों को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं।

59फिर भी साहूकार से ऋण लेना क्यों ठीक नहीं?

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क्योंकि महाजन ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा-पढ़ी भी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।

60★स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं?

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एक-दूसरे के पड़ोसी 15-20 सदस्य।

61प्रति व्यक्ति बचत कितनी होती है?

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25 रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक।

62समूह कब बैंक से ऋण लेने योग्य हो जाता है?

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एक या दो वर्षों के बाद, अगर वह नियमित रूप से बचत करता रहे।

63ऋण किसके नाम पर दिया जाता है?

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समूह के नाम पर।

64★बैंक बिना ऋणाधार के भी निर्धन महिलाओं को ऋण क्यों दे देते हैं?

उत्तर देखिए

क्योंकि एक भी सदस्य यदि ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं — यानी समूह ही ज़िम्मेदारी उठाता है।

65स्वयं सहायता समूह में बचत और ऋण संबंधी निर्णय कौन लेता है?

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समूह के सदस्य स्वयं।

66बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक कब शुरू हुआ?

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1970 में, एक छोटे पैमाने से।

672018 में उसके कितने सदस्य और कितने गाँव थे?

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9 लाख सदस्य, जो 81,600 गाँवों में फैले हुए थे।

68ग्रामीण बैंक के संस्थापक कौन हैं और उन्हें कौन-सा पुरस्कार मिला?

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प्रो. मोहम्मद युनूस; उन्हें 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।

भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)

1★मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या को कैसे सुलझाती है? (अभ्यास प्रश्न 2)

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उत्तर: वस्तु विनिमय प्रणाली में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग अनिवार्य विशिष्टता है, अर्थात् दोनों पक्षों को एक-दूसरे से चीज़ें ख़रीदने और बेचने पर सहमत होना पड़ता है; जैसे जूता निर्माता को ऐसा किसान ढूँढ़ना पड़ता जो न केवल गेहूँ बेचना चाहता हो बल्कि जूते भी ख़रीदना चाहता हो। मुद्रा महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके इस ज़रूरत को ख़त्म कर देती है — अब जूता निर्माता को केवल अपने जूते का ख़रीददार ढूँढ़ना है, और मुद्रा मिलने पर वह बाज़ार से गेहूँ या कोई भी वस्तु ख़रीद सकता है।

2आधुनिक मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?

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उत्तर: आधुनिक मुद्रा न तो बहुमूल्य धातुओं से बनी है और न ही अनाज-पशुओं की तरह रोज़मर्रा की चीज़ है; इसका अपना कोई इस्तेमाल नहीं है। फिर भी इसे स्वीकार किया जाता है क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है, किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है, और कोई व्यक्ति क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।

3माँग जमा को मुद्रा क्यों समझा जाता है?

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उत्तर: बैंक खातों में जमा धन को माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है, इसलिए इसे माँग जमा कहा जाता है; और इसके बदले चैक लिखने की सुविधा से बिना नकद का इस्तेमाल किये सीधा भुगतान करना संभव हो जाता है। चूँकि माँग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है।

4चैक द्वारा भुगतान की प्रक्रिया समझाइए।

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उत्तर: जूता निर्माता एम. सलीम को चमड़ा आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना है, इसलिए वह एक विशेष रकम का चैक लिखता है — अर्थात् वह अपने बैंक को यह रकम देने का आदेश देता है। चमड़ा आपूर्तिकर्ता यह चैक ले जाकर अपने बैंक खाते में जमा कर देता है; धन एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में कुछ दिनों में अंतरित हो जाता है और यह लेन-देन बिना नकद की अदायगी के पूरा हो जाता है।

5★बैंक अतिरिक्त मुद्रा वाले और ज़रूरतमंद लोगों के बीच मध्यस्थता कैसे करते हैं? (अभ्यास प्रश्न 3)

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उत्तर: लोग अपना अतिरिक्त धन बैंकों में जमा करते हैं; बैंक ये जमा स्वीकार करते हैं, उस पर सूद देते हैं और ज़रूरत पर निकालने की सुविधा भी देते हैं। बैंक जमा का केवल लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा नकद रखते हैं और शेष बड़े भाग को ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस तरह बैंक जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) एवं जिन्हें राशि की ज़रूरत है (कर्ज़दार) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं; और कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज तथा जमाकर्ताओं को दिये गये ब्याज के बीच का अंतर उनकी आय का प्रमुख स्रोत है।

6बैंक जमा का केवल 15 प्रतिशत नकद क्यों रखते हैं?

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उत्तर: यह प्रावधान किसी एक दिन में जमाकर्ताओं द्वारा धन निकालने की संभावना को देखते हुए किया गया है। चूँकि किसी एक विशेष दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने के लिए आते हैं, इसलिए बैंक का काम इतने नकद से आराम से चल जाता है और शेष राशि ऋण देने में लगाई जा सकती है।

7★सलीम के लिए ऋण किस प्रकार लाभदायक रहा?

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उत्तर: सलीम को शहर के एक बड़े व्यापारी से 3000 जोड़ी जूतों की माँग एक महीने के अंदर पूरी करनी थी, जिसके लिए उसे अतिरिक्त मज़दूर और कच्चा माल चाहिए था; उसने चमड़ा व्यापारी से उधार और बड़े व्यापारी से अग्रिम भुगतान — दो स्रोतों से ऋण लिया। महीने के आख़िर में वह जूते पहुँचाने में कामयाब हुआ, उसे अच्छा-ख़ासा लाभ भी हुआ और उसने उधार लिए धन की अदायगी भी कर दी; इस प्रकार ऋण ने उत्पादन की कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी करके एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा की।

8★स्वप्ना के लिए ऋण किस प्रकार कर्ज़-जाल बन गया?

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उत्तर: स्वप्ना ने अपनी 3 एकड़ ज़मीन पर मूँगफली उगाने के लिए साहूकार से ऋण लिया, इस उम्मीद पर कि फसल तैयार होने पर चुका देगी; परन्तु कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद हो गई और साल के अंदर वह कर्ज़ बड़ी रकम बन गया। अगले साल उसे दुबारा उधार लेना पड़ा और अंतत: कर्ज़ चुकाने के लिए अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा — यानी ऋण ने उसकी कमाई बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी; इसे कर्ज़-जाल कहते हैं।

9स्वप्ना की स्थिति को जोखिम भरा बनाने वाले कारण बताइए।

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उत्तर: पहला, कीटनाशक दवाइयाँ — वे महँगी हैं और फिर भी फसल को कीटों के हमले से नहीं बचा पाईं। दूसरा, साहूकार की भूमिका — उसकी ऊँची ब्याज दर के कारण कर्ज़ साल भर में बड़ी रकम बन गया। और तीसरा, मौसम — क्योंकि खेती मुख्यत: मौसम पर निर्भर है और उधार की अदायगी मुख्यत: फसल की कमाई पर निर्भर होती है।

10★समर्थक ऋणाधार क्या है और उधारदाता इसकी माँग क्यों करता है?

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उत्तर: समर्थक ऋणाधार ऐसी संपत्ति है, जिसका मालिक कर्ज़दार है (जैसे भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में पूँजी) और इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारंटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान न हो जाए। उधारदाता इसकी माँग इसलिए करता है क्योंकि यदि कर्ज़दार उधार वापस नहीं कर पाता, तो उसे भुगतान प्राप्ति के लिए संपत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।

11निर्धनता कर्ज़ लेने की क्षमता को कैसे प्रभावित करती है?

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उत्तर: हाँ, यह गहरे तक प्रभावित करती है, क्योंकि निर्धनों के पास बैंक में गिरवी रखने लायक़ समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात नहीं होते — और ऋणाधार की अनुपलब्धता ही वह प्रमुख कारण है जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते। इसलिए उन्हें साहूकार जैसे अनौपचारिक स्रोतों के पास जाना पड़ता है, जो बहुत ऊँची ब्याज दर लेते हैं — यही कारण है कि गरीब शहरी परिवारों की 54 प्रतिशत ऋण-ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं जबकि अमीर परिवारों की केवल 17 प्रतिशत।

12★श्यामल और अरुण की ऋण-शर्तों की तुलना कीजिए।

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उत्तर: श्यामल के पास केवल 1.5 एकड़ ज़मीन है; वह पहले महाजन से 5 प्रतिशत मासिक (60 प्रतिशत वार्षिक) पर ऋण लेता था और अब गाँव के व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक पर लेता है, जो उससे यह वादा भी लेता है कि वह फसल उसी को बेचेगा। अरुण के पास 7 एकड़ ज़मीन है और उसे बैंक से केवल 8.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण मिलता है, जिसे वह अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है — यानी जिसके पास ज़्यादा ज़मीन है, उसे उतना ही सस्ता और आसान ऋण मिलता है।

13रमा को ऋण किन शर्तों पर मिलता है?

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उत्तर: रमा एक भूमिहीन कृषि मज़दूर है, इसलिए उसे ऋण के लिए अपने मालिक — सोनपुर के मध्यवर्गीय भूस्वामी — पर आश्रित रहना पड़ता है, जो उसे 5 प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर ऋण देता है। वह उस कर्ज़ को भूस्वामी के यहाँ काम करके वापस करती है और अधिकांशत: पुराना ऋण लौटाए बिना ही नया ऋण लेना पड़ जाता है; अभी उसे 5,000 रुपये देने हैं, और यद्यपि भूस्वामी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, फिर भी वह लगातार काम करती है ताकि ज़रूरत पड़ने पर ऋण मिल सके।

14★ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों में क्या अंतर है?

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उत्तर: औपचारिक स्रोतों में बैंक और सहकारी समितियाँ आती हैं, जिनकी कार्यप्रणाली पर भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है और जिनकी ब्याज दरें कम होती हैं। अनौपचारिक स्रोतों में साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त आते हैं; इनकी गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है, वे ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं और उन्हें नाजायज़ तरीक़ों से अपने पैसे वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं है।

15ऋण की ऊँची लागत के क्या नुक़सान हैं?

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उत्तर: ऋण की ऊँची लागत का अर्थ है कि कर्ज़दार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण की अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है और उसके पास अपने लिए कम आय बचती है; कुछ मामलों में वापसी की रकम आय से भी अधिक हो जाती है, जिससे व्यक्ति ऋण-जाल में फँस जाता है। साथ ही ऐसा भी होता है कि जो लोग कर्ज़ लेकर अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं, वे ऋण की अधिक लागत देखकर पीछे हट जाते हैं।

16★स्वयं सहायता समूह का मूल विचार क्या है? (अभ्यास प्रश्न 6)

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उत्तर: इसका मूल विचार यह है कि ऋणाधार की अनुपलब्धता ही गरीबों के बैंक से ऋण न ले पाने का प्रमुख कारण है, इसलिए ऋणाधार की जगह समूह की सामूहिक ज़िम्मेदारी को गारंटी बना दिया जाए। इसमें 15-20 पड़ोसी नियमित रूप से मिलते हैं और 25 से 100 रुपए या अधिक बचाते हैं, तथा ज़रूरत पर समूह से ही साहूकार से कम ब्याज पर कर्ज़ लेते हैं। एक या दो वर्षों की नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने योग्य हो जाता है और ऋण समूह के नाम पर मिलता है; एक भी सदस्य ऋण न लौटाए तो अन्य सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं — इसी कारण बैंक निर्धन महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं, यद्यपि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता।

17स्वयं सहायता समूह के सामाजिक लाभ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: ये समूह ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों को संगठित करने में मदद करते हैं, जिससे न केवल महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाती हैं। बल्कि समूह की नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक आम मंच भी मिलता है, जहाँ वे स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा जैसे तरह-तरह के सामाजिक विषयों पर आपस में चर्चा कर पाती हैं।

18बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: बांग्लादेश ग्रामीण बैंक का उचित ब्याज दरों पर गरीबों की ऋण ज़रूरतों को पूरा करने का बड़ा सफल इतिहास रहा है; इसकी शुरुआत 1970 में एक छोटे पैमाने से हुई और 2018 में इसके 9 लाख सदस्य थे जो 81,600 गाँवों में फैले हुए थे। इससे ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ हैं जिनका संबंध समाज के गरीब तबके से है, और इन कर्ज़दारों ने दिखा दिया है कि न केवल गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं, बल्कि वे छोटी आय वाली गतिविधियों को सफलतापूर्वक चला सकने में भी सक्षम हैं।

भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)

1★हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की क्यों ज़रूरत है? (अभ्यास प्रश्न 5)

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  • क्योंकि औपचारिक स्रोत अभी भी ग्रामीण परिवारों की कुल ऋण ज़रूरतों का केवल 50 प्रतिशत पूरा कर पाते हैं, और बाक़ी ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं, जहाँ ब्याज की दरें बहुत अधिक होती हैं।
  • ऊँची लागत से कर्ज़दार की आय का अधिकतर हिस्सा अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है; कभी-कभी वापसी की रकम आय से भी अधिक हो जाती है और व्यक्ति ऋण-जाल में फँस जाता है; और कुछ लोग ऋण की अधिक लागत देखकर उद्यम शुरू करने से ही पीछे हट जाते हैं।
  • साथ ही अनौपचारिक क्षेत्रक में देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है — “वे ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं। उन्हें नाजायज़ तरीक़ों से अपने पैसे वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं है।” इसीलिए “सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।”

2★भारतीय रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों पर किस तरह नज़र रखता है और यह क्यों ज़रूरी है? (अभ्यास प्रश्न 8)

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  • आर.बी.आई. नज़र रखता है कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं — क्योंकि बैंक जमा का केवल लगभग 15 प्रतिशत ही नकद रखते हैं और जमाकर्ताओं का धन सुरक्षित रहना चाहिए।
  • वह यह भी देखता है कि बैंक केवल लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को ही ऋण नहीं दे रहे, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दे रहे हैं।
  • और समय-समय पर बैंकों को आर.बी.आई. को यह जानकारी देनी पड़ती है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं तथा उसकी ब्याज की दरें क्या हैं। यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इसके विपरीत अनौपचारिक क्षेत्रक में ऐसी कोई संस्था नहीं है, और वहाँ मनमानी ब्याज दरें तथा नाजायज़ वसूली चलती है।

3★क्या कारण हैं कि बैंक कुछ कर्ज़दारों को कर्ज़ देने के लिए तैयार नहीं होते? (अभ्यास प्रश्न 7)

उत्तर देखिए
  • समर्थक ऋणाधार का अभाव — बैंक ऐसी संपत्ति माँगते हैं “जिसका मालिक कर्ज़दार है (जैसे कि भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में पूँजी)”, जो निर्धनों के पास नहीं होती; “ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते।”
  • आवश्यक कागज़ातों का अभाव — जैसे मेघा को नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड दिखाने पड़े; अनियमित आय वाले लोगों के पास ऐसे कागज़ नहीं होते। साथ ही जिनकी आय मौसम या दैनिक काम पर निर्भर है, उनसे अदायगी अनिश्चित रहती है।
  • पहुँच की समस्या — “भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं। जहाँ कहीं मौजूद भी हैं, बैंक से कर्ज़ लेना अनौपचारिक स्रोत से कर्ज़ लेने की तुलना में ज़्यादा मुश्किल है।”

4★सोनपुर के लोगों की ऋण-शर्तों की तुलना कीजिए।

उत्तर देखिए
  • अरुण (मध्यम किसान, 7 एकड़) — बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक पर; तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है; आलू शीत भंडार गृह में रखकर उसके बदले नया ऋण भी ले सकता है।
  • श्यामल (छोटा किसान, 1.5 एकड़) — पहले महाजन से 5 प्रतिशत मासिक (60 प्रतिशत वार्षिक); अब व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक, पर उसे यह वादा भी करना पड़ता है कि फसल उसी को बेचेगा — और “फसल की क़ीमतें फसल काटते समय कम होती हैं”, इसलिए व्यापारी भारी मुनाफ़ा कमाता है।
  • रमा (भूमिहीन मज़दूर) — भूस्वामी-नियोक्ता से 5 प्रतिशत मासिक पर; कर्ज़ उसके यहाँ काम करके चुकाना पड़ता है और अधिकांशत: पुराना लौटाए बिना नया लेना पड़ता है। ★निष्कर्ष — “जिसके पास पहले से है, उसे सस्ता कर्ज़ मिलता है; जिसके पास नहीं, उसे महँगा।”

5औपचारिक ऋण के वितरण में असमानता को समझाइए।

उत्तर देखिए
  • आलेख 2 के अनुसार शहरी गरीब परिवारों की 54 प्रतिशत ऋण-ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं और केवल 46 प्रतिशत औपचारिक से; जबकि अमीर परिवारों के 83 प्रतिशत ऋण औपचारिक और केवल 17 प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से हैं। “इसी तरह की तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में भी है।”
  • इसका अर्थ है — “अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है।” कारण वही है — गरीबों के पास समर्थक ऋणाधार और कागज़ात नहीं होते।
  • इसलिए दो बातें ज़रूरी हैं — “बैंकों और सहकारी समितियों को अपनी गतिविधियाँ विशेषकर ग्रामीण इलाक़ों में बढ़ाने की ज़रूरत है”; और “यह ज़रूरी है कि औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।”

भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)

1★★विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 9)

उत्तर देखिए
  • ऋण की परिभाषा — “ऋण से हमारा तात्पर्य एक सहमति से है जहाँ साहूकार कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में भविष्य में कर्ज़दार से भुगतान करने का वादा लेता है।”
  • सकारात्मक भूमिका (सलीम) — उसे 3000 जोड़ी जूते एक महीने में पूरे करने थे, जिसके लिए अतिरिक्त मज़दूर और कच्चा माल चाहिए था। उसने दो स्रोतों से ऋण लिया, ऑर्डर पूरा किया, अच्छा-ख़ासा लाभ कमाया और उधार भी चुका दिया। “ऋण उसे उत्पादन के कार्यशील ख़र्चों तथा उत्पादन को समय पर पूरा करने में मदद करता है और वह अपनी कमाई बढ़ा पाता है। इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।”
  • नकारात्मक भूमिका (स्वप्ना) — 3 एकड़ पर मूँगफली के लिए साहूकार से ऋण; कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद; कर्ज़ साल भर में बड़ी रकम बन गया; अंतत: ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। “ऋण ने स्वप्ना की कमाई को बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी। इसे आम भाषा में कर्ज़-जाल कहा जाता है।”
  • शर्तों का असर — अरुण को 8.5 प्रतिशत वार्षिक पर बैंक ऋण मिलता है, इसलिए उसकी आय बढ़ती है; जबकि रमा को 5 प्रतिशत मासिक पर मिलता है, इसलिए उसका कर्ज़ समय के साथ बढ़ता जाता है।
  • इसलिए विकास के लिए क्या चाहिए — सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल ऋण, ताकि लोग “फसल उगा सकें, कोई कारोबार कर सकें, छोटे उद्योग लगा सकें”; साथ ही औपचारिक ऋण का समान वितरण, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।

निष्कर्ष — ★“ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।”

2★जोखिम वाली परिस्थितियों में ऋण कर्ज़दार के लिए और समस्याएँ खड़ी कर सकता है। स्पष्ट कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 1)

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  • यदि किसी कारण से कर्ज़दार की कमाई नहीं हो पाती, तो ऋण उसकी मदद के बजाय उसे और गहरे संकट में धकेल देता है — क्योंकि “उधार की अदायगी मुख्यत: फसल की कमाई पर निर्भर है” और खेती मौसम पर निर्भर है।
  • स्वप्ना का उदाहरण — कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद; वह कर्ज़ नहीं लौटा पाई और साल के अंदर वह कर्ज़ बड़ी रकम बन गया; अगले साल दुबारा उधार लेना पड़ा; इस साल फसल सामान्य रही पर इतनी कमाई नहीं हुई कि कर्ज़ चुक सके; अंतत: ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा।
  • रमा का उदाहरण — 5 प्रतिशत मासिक ब्याज पर लिया कर्ज़ वह भूस्वामी के यहाँ काम करके चुकाती है, फिर भी अधिकांशत: पुराना लौटाए बिना नया ऋण लेना पड़ता है; अभी 5,000 रुपये देने हैं।
  • श्यामल का उदाहरण — 60 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के कारण उसकी आय का अधिकतर हिस्सा अदायगी में ही चला जाता है, इसलिए “कर्ज़दारों के पास अपने लिए कम आय बचती है।”
  • और तीसरा नुक़सान — “ऐसा भी संभव है कि जो लोग कर्ज़ लेकर अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं, वे ऋण की अधिक लागत को देख कर पीछे हट जाएँ।”

निष्कर्ष — “इस मामले में ऋण कर्ज़दार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना काफ़ी कष्टदायक होता है।”

3★भारत में 80 प्रतिशत किसान छोटे किसान हैं। (अभ्यास प्रश्न 11)

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  • (क) बैंक हिचकिचाते क्यों हैं? क्योंकि छोटे किसानों के पास समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात नहीं होते; उनकी आय मौसम और फसल पर निर्भर है, इसलिए अदायगी अनिश्चित रहती है; और भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद भी नहीं हैं।
  • (ख) वे दूसरे कौन हैं? साहूकार/महाजन · व्यापारी · भूस्वामी-नियोक्ता · रिश्तेदार एवं मित्र · सहकारी समितियाँ · स्वयं सहायता समूह — जैसा सोनपुर में देखा गया।
  • (ग) शर्तें कैसे प्रतिकूल होती हैं? श्यामल को महाजन से 60 प्रतिशत वार्षिक पर ऋण लेना पड़ता था; अब व्यापारी से 36 प्रतिशत वार्षिक पर लेता है, पर उसे फसल उसी को बेचने का वादा करना पड़ता है और “वह किसानों से कम क़ीमत पर फसल ख़रीदकर और बाद में क़ीमत बढ़ने पर बेचकर भारी मुनाफ़ा कमाता है।” रमा को कर्ज़ मज़दूरी करके चुकाना पड़ता है और भूस्वामी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, फिर भी वह काम करती रहती है ताकि ज़रूरत पर ऋण मिले।
  • (घ) सस्ता ऋण कैसे मिले? (1) बैंकों और सहकारी समितियों को ग्रामीण इलाक़ों में गतिविधियाँ बढ़ानी चाहिए; (2) कृषक सहकारी समितियाँ बनें, जो सदस्यों की जमा को ऋणाधार मानकर बैंक से बड़ा ऋण लें (जैसे सोनपुर की 2300 सदस्यों वाली समिति); (3) स्वयं सहायता समूह बढ़ें, ताकि बिना ऋणाधार के उचित ब्याज दर पर ऋण मिले; (4) ऋणाधार और कागज़ातों की शर्तें सरल हों।

निष्कर्ष — “यह ज़रूरी है कि औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।”

4★निर्धनों के स्वयं सहायता समूहों पर विस्तार से लिखिए।

उत्तर देखिए
  • समस्या — “ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते।” साहूकार बिना ऋणाधार दे तो देते हैं, क्योंकि वे कर्ज़दारों को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं — पर “महाजन ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा पढ़ी भी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।”
  • बनावट — 15-20 पड़ोसी सदस्य, विशेषकर महिलाएँ, जो नियमित रूप से मिलते और बचत करते हैं; प्रति व्यक्ति बचत 25 से 100 रुपए या अधिक।
  • काम — सदस्य समूह से ही छोटे कर्ज़ ले सकते हैं, जिन पर ब्याज साहूकार से कम होता है; एक या दो वर्षों की नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने योग्य हो जाता है और ऋण समूह के नाम पर मिलता है। कर्ज़ गिरवी ज़मीन छुड़वाने, कार्यशील पूँजी (बीज, खाद, बाँस, कपड़े), घर बनाने, सिलाई मशीन, हथकरघा और पशु ख़रीदने के लिए दिए जाते हैं।
  • निर्णय — “बचत और ऋण गतिविधियों से संबंधी ज़्यादातर महत्त्वपूर्ण निर्णय समूह के सदस्य स्वयं लेते हैं” — ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और वापसी की अवधि।
  • ★मूल विचार — “एक भी सदस्य अगर ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं। इसी कारण, बैंक निर्धन महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं… यद्यपि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता।”

निष्कर्ष — लाभ केवल आर्थिक नहीं है: “न केवल महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाती हैं, बल्कि समूह की नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक आम मंच मिलता है, जहाँ वह… स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाती हैं।” यही बात बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक भी सिद्ध करता है।

5मुद्रा के आधुनिक रूपों और बैंकिंग प्रणाली के संबंध का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए
  • मुद्रा का सफ़र — प्रारंभिक काल में अनाज और पशु, फिर सोना, चाँदी और ताँबे के सिक्के (जिनका चलन पिछली सदी तक रहा), और आज करेंसी — काग़ज़ के नोट और सिक्के।
  • करेंसी की ख़ासियत — “आधुनिक मुद्रा का इस प्रकार का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है”; फिर भी स्वीकार की जाती है क्योंकि सरकार इसे प्राधिकृत करती है। भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है; किसी अन्य को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं; और कोई क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।
  • माँग जमा — लोग अतिरिक्त नकद बैंकों में जमा करते हैं; धन सुरक्षित रहता है, सूद मिलता है और ज़रूरत पर निकाला जा सकता है। “चूँकि बैंक खातों में जमा धन को माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा को ‘माँग जमा’ कहा जाता है।”
  • चैक — “बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक ख़ास रकम का भुगतान करने का आदेश”; इससे “बिना नकद का इस्तेमाल किये सीधा भुगतान करना संभव” हो जाता है।
  • इसीलिए माँग जमा भी मुद्रा है — “चूँकि माँग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है।”

निष्कर्ष — “मुद्रा के आधुनिक रूप — करेंसी और जमा — आधुनिक बैंक प्रणाली की कार्यप्रणाली से बहुत क़रीब से जुड़े हुए हैं।”

भाग ङ — आलेख और तालिका-आधारित प्रश्न

आलेख 1 — ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019

प्रश्नउत्तर
सबसे बड़ा स्रोत?व्यावसायिक बैंक — 51 प्रतिशत
सबसे बड़ा अनौपचारिक स्रोत?साहूकार — 23 प्रतिशत
कुल औपचारिक कितना?51 + 10 + 5 = 66 प्रतिशत
कुल अनौपचारिक कितना?23 + 7 + 3 + 1 = 34 प्रतिशत
सबसे छोटा हिस्सा?ज़मींदार — 1 प्रतिशत

आलेख 2 — शहरी परिवारों के ऋण★

परिवारऔपचारिकअनौपचारिक
गरीब46%54%
कम संपत्ति वाले62%38%
समृद्ध73%27%
अमीर83%17%

(क) क्या नियम दिखता है? → जो जितना अमीर है, उसे उतना अधिक औपचारिक (सस्ता) ऋण मिलता है। (ख) गरीबों के औपचारिक ऋण का हिस्सा कम क्यों? → क्योंकि उनके पास समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात नहीं होते, जो बैंक माँगते हैं।

सोनपुर तुलना-तालिका

कौनज़मीनस्रोतब्याज (वार्षिक)
अरुण7 एकड़बैंक8.5%
श्यामल1.5 एकड़महाजन → व्यापारी60% → 36%
रमाकुछ नहींभूस्वामी60%

भाग च — तीन नमूना परीक्षा-पत्र

नमूना पत्र 1 (20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1माँग जमा किसे कहते हैं?1
2बैंक जमा का कितना हिस्सा नकद रखते हैं?1
3ऋण की चार शर्तें बताइए।1
4मुद्रा दोहरे संयोग की समस्या कैसे सुलझाती है?2
5समर्थक ऋणाधार क्या है और उधारदाता इसकी माँग क्यों करता है?2
6हमें औपचारिक ऋण-स्रोत बढ़ाने की क्यों ज़रूरत है?3
7विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।5
8निर्धनों के स्वयं सहायता समूहों पर विस्तार से लिखिए।5

नमूना पत्र 2 (20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
110 रुपये के नोट पर क्या लिखा होता है?1
2कर्ज़-जाल किसे कहते हैं?1
3अरुण की ब्याज दर और अवधि क्या है?1
4बैंक की आय का प्रमुख स्रोत क्या है? समझाइए।2
5ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों में अंतर बताइए।2
6RBI बैंकों पर किस तरह नज़र रखता है और यह क्यों ज़रूरी है?3
7जोखिम वाली परिस्थितियों में ऋण और समस्याएँ खड़ी कर सकता है — स्पष्ट कीजिए।5
8आलेख 2 के आँकड़े लिखकर बताइए कि औपचारिक ऋण का वितरण असमान क्यों है।5

नमूना पत्र 3 (20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते हैं?1
2स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं?1
3बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के संस्थापक कौन हैं?1
4सलीम के लिए ऋण किस प्रकार लाभदायक रहा?2
5स्वप्ना की स्थिति को जोखिम भरा बनाने वाले कारण बताइए।2
6सोनपुर के लोगों की ऋण-शर्तों की तुलना कीजिए।3
7भारत में 80 प्रतिशत किसान छोटे किसान हैं — चारों उपप्रश्नों के उत्तर दीजिए।5
8मुद्रा के आधुनिक रूपों और बैंकिंग प्रणाली के संबंध का वर्णन कीजिए।5

अंतिम सलाह — इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं: सलीम-स्वप्ना की तुलना, समर्थक ऋणाधार की परिभाषा, और 83 बनाम 46 वाला आँकड़ा। और हर बड़े उत्तर के अंत में यह वाक्य लिखिए — “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।”