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1वस्तु विनिमय प्रणाली में, जहाँ मुद्रा के बिना वस्तुओं का विनिमय होता है, कौन-सी बात अनिवार्य है?
व्याख्या: वस्तु विनिमय में जो चीज़ एक व्यक्ति बेचना चाहता है, वही चीज़ दूसरे व्यक्ति को ख़रीदनी भी होनी चाहिए। जूता निर्माता को ऐसा किसान ढूँढ़ना पड़ता, जो गेहूँ बेचना भी चाहे और बदले में जूते ख़रीदना भी। इसी को आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39
2मुद्रा को "विनिमय का माध्यम" क्यों कहा जाता है?
व्याख्या: जूता निर्माता पहले जूते बेचकर मुद्रा लेता है और फिर उसी मुद्रा से गेहूँ ख़रीदता है। मुद्रा दोनों सौदों के बीच की कड़ी बनती है, इसलिए उसे विनिमय का माध्यम कहते हैं। आज की मुद्रा कीमती धातु की बनी भी नहीं होती।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39, 40
3आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है। फिर भी उसे विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?
व्याख्या: करेंसी-कागज़ के नोट और सिक्के न सोने-चाँदी के बने हैं, न अनाज और पशुओं की तरह रोज़मर्रा की चीज़ हैं। लोग उन्हें इसलिए स्वीकार करते हैं, क्योंकि सरकार उन्हें प्राधिकृत करती है। भारत में कानून किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं देता।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40
4भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?
व्याख्या: भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है। भारतीय कानून के अनुसार किसी और व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है। व्यावसायिक बैंक जमा लेते हैं और ऋण देते हैं, नोट जारी नहीं करते।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40
5बैंक खातों में जमा धन को 'माँग जमा' क्यों कहा जाता है?
व्याख्या: लोग अपना अतिरिक्त नकद अपने नाम से खाता खोलकर बैंक में जमा करते हैं। बैंक इस पर सूद देता है, और लोग अपनी ज़रूरत के अनुसार इसमें से धन माँगकर निकाल सकते हैं। इसलिए इसे माँग जमा कहते हैं। विकल्प (द) ग़लत है, क्योंकि बैंक जमा पर सूद देते हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40
6चैक क्या है?
व्याख्या: चैक वही काटता है, जिसका किसी बैंक में खाता हो। जूता निर्माता सलीम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक देता है, आपूर्तिकर्ता उसे अपने खाते में जमा करता है, और कुछ दिनों में धन एक खाते से दूसरे खाते में चला जाता है। माँग जमा को भी मुद्रा समझा जाता है; चैक उसे एक खाते से दूसरे खाते में भेजने का आदेश है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 41
7किताब के अनुसार आजकल भारत में बैंक अपनी जमा का कितना हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं?
व्याख्या: किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं, इसलिए बैंक का काम जमा के छोटे हिस्से से आराम से चल जाता है। आजकल भारत में यह हिस्सा केवल 5 प्रतिशत है। जमा राशि का बड़ा भाग बैंक ऋण देने में लगाते हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42
8बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?
व्याख्या: बैंक जमा पर जो ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ब्याज ऋण पर लेते हैं। इन दोनों का अंतर बैंक की आय का प्रमुख स्रोत है। जमाकर्ताओं को दिया गया ब्याज बैंक की आय नहीं, उसका ख़र्च है, और नोट केवल भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42
9किताब के अनुसार ऋण (उधार) किसे कहते हैं?
व्याख्या: ऋण में आज कुछ मिलता है और बदले में बाद में चुकाने का वादा किया जाता है। सलीम ने चमड़ा अभी लिया और भुगतान बाद में करने का वादा किया; यह भी ऋण है। सीधी अदला-बदली वस्तु विनिमय है, ऋण नहीं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43
10त्यौहार के मौसम में जूता निर्माता सलीम ने ऋण किस ज़रूरत के लिए लिया?
व्याख्या: सलीम को एक महीने के अंदर 3000 जोड़ी जूते पहुँचाने थे। इसके लिए उसे सिलाई और चिपकाने के काम के लिए अतिरिक्त मज़दूर रखने थे और कच्चा माल ख़रीदना था। ऋण से उसने कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी की, ऑर्डर समय पर पहुँचाया, लाभ कमाया और उधार भी चुका दिया।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43
11स्वप्ना की फसल बर्बाद हुई, वह कर्ज़ नहीं लौटा सकी और उसे अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। ऐसी स्थिति को आम भाषा में क्या कहा जाता है?
व्याख्या: ऋण ने स्वप्ना की कमाई बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी। ऐसी स्थिति को आम भाषा में कर्ज–ज़ाल कहते हैं, जिससे बाहर निकलना काफ़ी कष्टदायक होता है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44
12समर्थक ऋणाधार किसे कहते हैं?
व्याख्या: भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु और बैंकों में जमा पूँजी इसके उदाहरण हैं। कर्ज़दार ऋण न लौटा पाए, तो उधारदाता को भुगतान पाने के लिए यह संपत्ति बेचने का अधिकार होता है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44
13ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीके, इन सबको मिलाकर क्या कहते हैं?
व्याख्या: ये चारों बातें मिलकर ऋण की शर्तें कहलाती हैं। एक ऋण व्यवस्था से दूसरी में इनमें काफ़ी फ़र्क होता है, और ये उधारदाता और कर्ज़दार की प्रकृति पर भी निर्भर करती हैं। मेघा के आवास ऋण में ब्याज 12 प्रतिशत वार्षिक था, अदायगी 10 साल में मासिक किश्तों में, कागज़ात नौकरी और वेतन के रिकार्ड, और ऋणाधार नए घर के सभी कागज़।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 45
14सोनपुर के अरुण को खेती के लिए बैंक से मिले ऋण पर वार्षिक ब्याज दर कितनी है?
व्याख्या: अरुण के पास 7 एकड़ ज़मीन है, और वह सोनपुर के उन कुछ लोगों में से है, जिन्हें खेती के लिए बैंक से ऋण मिला है। यह ऋण अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटाया जा सकता है। 3 और 5 प्रतिशत तो सोनपुर में व्यापारी और महाजन की मासिक दरें हैं, और 60 प्रतिशत महाजन की 5 प्रतिशत मासिक दर का वार्षिक रूप है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46
15रमा के अनुसार सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत कौन है?
व्याख्या: खेतिहर मज़दूर रमा अपने मालिक, सोनपुर के एक मध्यवर्गीय भूस्वामी, से 5 प्रतिशत मासिक ब्याज पर कर्ज़ लेती है और उसके यहाँ काम करके कर्ज़ लौटाती है। वह बताती है कि सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46
16इनमें से कौन ऋण का औपचारिक स्रोत है?
व्याख्या: औपचारिक क्षेत्रक में बैंकों और सहकारी समितियों से लिए कर्ज़ आते हैं। साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त अनौपचारिक उधारदाता हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48
17आलेख 1 के अनुसार 2019 में ग्रामीण भारत में ऋण का सबसे बड़ा स्रोत कौन था?
व्याख्या: आलेख 1 में व्यावसायिक बैंकों का हिस्सा 51 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर साहूकार हैं, 23 प्रतिशत के साथ। सहकारी समितियाँ/बैंक 10 प्रतिशत और रिश्तेदार एवं मित्र 7 प्रतिशत हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48
18आलेख 2 के अनुसार शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों के कुल ऋण का कितना प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से था?
व्याख्या: गरीब परिवारों के ऋण में 54 प्रतिशत अनौपचारिक और 46 प्रतिशत औपचारिक है। अमीर परिवारों की तस्वीर उलटी है: केवल 17 प्रतिशत अनौपचारिक और 83 प्रतिशत औपचारिक। 46 गरीब परिवारों का औपचारिक हिस्सा है, अनौपचारिक नहीं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 49
19स्वयं सहायता समूह को बैंक से ऋण किसके नाम पर दिया जाता है?
व्याख्या: एक या दो वर्ष तक नियमित बचत करने के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है। ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है, और इसे लौटाने की ज़िम्मेदारी भी समूह की होती है। इसका मकसद सदस्यों के लिए स्वरोज़गार के अवसरों का सृजन करना है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51
20बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस को 2006 में कौन-सा सम्मान मिला?
व्याख्या: किताब के बॉक्स में प्रो. मोहम्मद युनूस को ग्रामीण बैंक का संस्थापक और 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बताया गया है। ग्रामीण बैंक का उचित ब्याज दरों पर गरीबों की ऋण ज़रूरतें पूरी करने का बड़ा सफल इतिहास रहा है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 52

