Chapter 7राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

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परीक्षा से एक रात पहले सिर्फ़ यही फ़ाइल पढ़िए। इसमें वही है जो पूछा जाता है।


पूरा अध्याय एक पैराग्राफ़ में

वस्तुएँ तथा सेवाएँ माँग स्थल से आपूर्ति स्थल पर अपने आप नहीं पहुँच जातीं — इसलिए परिवहन, संचार और व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं। परिवहन तीन तरह का है — स्थल (सड़क, रेल, पाइपलाइन), जल और वायु। भारत का सड़क जाल विश्व में दूसरा (62.16 लाख किमी.) है और सड़क, रेल से पहले शुरू हुई। रेल देश का सर्वाधिक बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का प्राधिकरण है — पहली रेल 1853, मुंबई-थाणे, 34 किमी.; आज 67,956 किमी., 17 प्रखंड। पाइपलाइन की चलने की लागत सबसे कम है और उसमें वाहनांतरण देरी व हानियाँ लगभग नहीं हैं। जल परिवहन सबसे सस्ता है और देश का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्रों से होता है — 12 प्रमुख पत्तन। वायु परिवहन तीव्रतम है और उत्तरी-पूर्वी राज्यों के लिए सबसे ज़रूरी। भारत का डाक-संचार तंत्र विश्व का वृहत्तम है और दूर संचार में भारत एशिया में अग्रणी। और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देश का ‘आर्थिक बैरोमीटर’ है। इन सबको मिलाकर ही इन्हें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ कहा जाता है।

अध्याय की आत्मा★

“अगर देश एक शरीर है, तो परिवहन और संचार उसकी नसें हैं। खून बनना काफ़ी नहीं — उसका पूरे शरीर में पहुँचना ज़रूरी है।”

और किताब का अपना वाक्य —

“परिवहन, संचार व व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं।”

तालिका 1 — परिवहन के साधन (चित्र 7.1)

मुख्य वर्गउपवर्ग
स्थलसड़क परिवहन · रेल परिवहन · पाइपलाइन
जलआंतरिक जल परिवहन · समुद्री परिवहन
वायुघरेलू विमान सेवा (सार्वजनिक प्राधिकरण, निजी विमान सेवा) · अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा

तालिका 2 — सड़क परिवहन★★

दो आँकड़े: विश्व में दूसरा सर्वाधिक सड़क जाल · 62.16 लाख किमी. (2020-21) एक तथ्य: भारत में सड़क परिवहन, रेल परिवहन से पहले प्रारंभ हुआ

रेल की अपेक्षा सड़क की बढ़ती महत्ता — छह कारण

#कारण
1रेलवे लाइन की अपेक्षा निर्माण लागत बहुत कम
2ऊबड़-खाबड़ व विच्छिन्न भू-भागों पर बनाई जा सकती हैं
3अधिक ढाल प्रवणता तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी बन सकती हैं
4कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में मितव्ययी
5घर-घर सेवाएँ; सामान चढ़ाने-उतारने की लागत कम
6अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी — रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पत्तनों को जोड़ती है

सूत्र — “सस्ती · ऊबड़-खाबड़ · पहाड़ · थोड़े के लिए · घर तक · कड़ी”

सड़कों के छह वर्ग

वर्गपहचान
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग6 लेन; दिल्ली-कोलकाता, चेन्नई-मुंबई व दिल्ली; दो गलियारे — ★उत्तर-दक्षिण (श्रीनगर ↔ कन्याकुमारी) और ★पूर्व-पश्चिम (सिलचर, असम ↔ पोरबंदर, गुजरात); उद्देश्य — मेगासिटी के मध्य दूरी व समय न्यूनतम; NHAI के अधीन
राष्ट्रीय राजमार्गदूरस्थ भागों को जोड़ते; प्राथमिक सड़क तंत्र
राज्य राजमार्गराज्यों की राजधानियों ↔ ज़िला मुख्यालय
ज़िला मार्गप्रशासनिक केंद्र ↔ ज़िला मुख्यालय
अन्य सड़केंगाँव ↔ शहर; प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना — हर गाँव को पक्की सड़कों से जोड़ना
सीमांत सड़केंसीमा सड़क संगठन (BRO), 1960; उत्तर व उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व; इससे दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी

अटल टनल★

विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग — 9.02 किमी., BRO द्वारा; मनाली ↔ लाहौल-स्पीति घाटी को पूरे साल जोड़ती है (पहले घाटी 6 महीने अलग-थलग); पीरपंजाल पर्वतमाला, समुद्र तल से 3000 मीटर ऊपर।

सामग्री के आधार पर — पक्की (सीमेंट, कंक्रीट, तारकोल — बारहमासी) / कच्ची (वर्षा ऋतु में अनुपयोगी)

तालिका 3 — रेल परिवहन★★

तथ्यविवरण
सार्वजनिक क्षेत्रदेश का सर्वाधिक बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का प्राधिकरण
समन्वयक150 वर्षों से भी अधिक समय से
पहली रेलगाड़ी1853, मुंबई ↔ थाणे, 34 किमी.
प्रखंड17
किसके लिए उत्तरदायीअर्थव्यवस्था, उद्योगों व कृषि के तीव्र विकास के लिए

तालिका 7.1 — रेलवे मार्ग

गेजरूट (किमी.)
बड़ी लाइन (1.676)63,950
मीटर लाइन (1.000)2,402
छोटी लाइन (0.762 व 0.610)1,604
कुल67,956

वितरण को प्रभावित करने वाले कारक

“भू-आकृतिक, आर्थिक व प्रशासकीय कारक प्रमुख हैं।”

क्षेत्रस्थिति
उत्तरी मैदानअनुकूल — विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधन; पर नदियों पर पुल बनाने में बाधा
प्रायद्वीपऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्र, छोटी पहाड़ियाँ, सुरंगें
हिमालयप्रतिकूल — दुर्लभ उच्चावच, विरल जनसंख्या, आर्थिक अवसरों की कमी
★कठिन क्षेत्रपश्चिमी राजस्थान, गुजरात के दलदली भाग, म.प्र. के वन-क्षेत्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा व झारखंड
सह्याद्रिघाट या दर्रों से ही पार
कोंकण रेलवेपश्चिमी तट; समस्याएँ — भूस्खलन तथा रेलवे ट्रैक का धँसना

तीन समस्याएँ — बिना टिकट यात्रा · रेल संपत्ति की हानि व चोरी · ज़ंजीर खींचकर गाड़ी रोकना

तालिका 4 — पाइपलाइन★

दो लाभ (यही पूछे जाते हैं):

  1. “पाइपलाइन बिछाने की प्रारंभिक लागत अधिक है लेकिन इसको चलाने (Running) की लागत न्यूनतम है।”
  2. “वाहनांतरण देरी तथा हानियाँ इसमें लगभग नहीं के बराबर हैं।”

अन्य बातें —

  • पहले पानी के लिए; अब कच्चा तेल, पेट्रोल उत्पाद, प्राकृतिक गैस
  • ठोस पदार्थों को तरल अवस्था (Slurry) में बदलकर
  • ★इसी के कारण बरौनी, मथुरा, पानीपत जैसी सुदूर आंतरिक शोधनशालाएँ संभव हुईं

तीन प्रमुख जाल

#जाल
1ऊपरी असम → गुवाहाटी, बरौनी, इलाहाबाद → कानपुर; शाखाएँ — बरौनी→राजबंध→हल्दिया; राजबंध→मौरी ग्राम; गुवाहाटी→सिलिगुड़ी
2सलाया (गुजरात) → वीरमगाँव, मथुरा, दिल्ली, सोनीपत → जालंधर (पंजाब); शाखा — कोयली को चक्षु से
3HVJ — हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर, 1,700 किमी.; मुंबई हाई व बसीन को पश्चिमी-उत्तरी भारत के उर्वरक, बिजली व औद्योगिक परिसरों से; कुल गैस पाइपलाइन 1700 → 18,500 किमी.

तालिका 5 — जल परिवहन और पाँच राष्ट्रीय जलमार्ग★★

तीन ख़ूबियाँ — सबसे सस्ता साधन · भारी व स्थूलकाय वस्तुओं के अनुकूल · ऊर्जा सक्षम तथा पर्यावरण अनुकूल दो आँकड़े — अंत:स्थलीय जलमार्ग 14,500 किमी., पर केवल 5,685 किमी. मशीनीकृत नौकाओं द्वारा

संख्यामार्गलंबाई
NW-1हल्दिया ↔ इलाहाबाद — गंगा1620 किमी.
NW-2सदिया ↔ धुबरी — ब्रह्मपुत्र891 किमी.
NW-3केरल — पश्चिम-तटीय नहर (कोट्टापुरम ↔ कोल्लम), उद्योगमंडल व चंपक्कारा नहरें205 किमी.
NW-4काकीनाडा-पुदुच्चेरी नहर + गोदावरी और कृष्णा1078 किमी.
NW-5मातई नदी, महानदी डेल्टा चैनल, ब्राह्मणी नदी व पूर्वी तटीय नहर588 किमी.

अन्य अंतर जलमार्ग — माण्डवी, जुआरी, कम्बरजुआ, सुन्दरवन, बराक, केरल का पश्चजल

★★“देश का 95 प्रतिशत व्यापार (मुद्रा रूप में 68 प्रतिशत) समुद्रों द्वारा ही होता है।”

तालिका 6 — बारह प्रमुख पत्तन★★

आँकड़े — तट रेखा 7,516.6 किमी. · 12 प्रमुख + 200 मध्यम-छोटे · प्रमुख पत्तन 95% विदेशी व्यापार संचालित

पश्चिमी तट (उत्तर से दक्षिण)

पत्तनपहचान
★कांडला (दीनदयाल)स्वतंत्रता के बाद पहला विकसित पत्तन; कारण — कराची पाकिस्तान में चला गया + मुंबई का दबाव कम करना; ज्वारीय पत्तन; जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, ★राजस्थान व गुजरात का आयात-निर्यात
मुंबईवृहत्तम पत्तन; प्राकृतिक खुले, विस्तृत व सुचारु पोताश्रय
जवाहरलाल नेहरूमुंबई के सामने, पूरे क्षेत्र को समूह पत्तन की सुविधा
मरमागाओलौह-अयस्क — देश के कुल निर्यात का आधा (50%)
न्यू-मैंगलोरकुद्रेमुख खानों का लौह-अयस्क
कोच्चिलैगून के मुहाने पर प्राकृतिक पोताश्रय

पूर्वी तट (दक्षिण से उत्तर)

पत्तनपहचान
तूतीकोरनप्राकृतिक पोताश्रय, समृद्ध पृष्ठभूमि; श्रीलंका, मालदीव से व्यापार
चेन्नईदेश का प्राचीनतम कृत्रिम पत्तन; व्यापार में मुंबई के बाद दूसरा
★विशाखापट्नमस्थल से घिरा, गहरा व सुरक्षित; प्रारंभ में लौह-अयस्क निर्यातक
पारादीपओडिशा; विशेषत: लौह-अयस्क निर्यात
कोलकाताअंत:स्थलीय नदीय (Riverine) पत्तन; गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन को सेवाएँ; ज्वारीय, हुगली की तलछट नियमित साफ़ करनी पड़ती है
हल्दियाकोलकाता का सहायक पत्तन

तालिका 7 — वायु परिवहन और संचार

वायु परिवहन

  • तीव्रतम, आरामदायक व प्रतिष्ठित
  • दुर्गम स्थान — ऊँचे पर्वत, मरुस्थल, घने जंगल, लंबे समुद्री रास्ते
  • ★उत्तरी-पूर्वी राज्यों के लिए सबसे ज़रूरी — बड़ी नदियाँ, विच्छिन्न धरातल, घने जंगल, निरंतर बाढ़
  • पवन हंस हेलीकाप्टर लिमिटेड — ONGC की अपतटीय संक्रियाओं में तथा उत्तरी-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल व उत्तराखण्ड के आंतरिक क्षेत्रों में
  • ★उड़ान = ‘उड़े देश का आम नागरिक’ — विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली योजना; नागर विमानन मंत्रालय की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS)

संचार सेवाएँ

भागमुख्य बातें
डाक★विश्व का वृहत्तम डाक-संचार तंत्र; प्रथम श्रेणी — कार्ड व लिफ़ाफ़ा बंद चिट्ठी, वायुयान से; द्वितीय श्रेणी — रजिस्टर्ड पैकेट, किताबें, अख़बार, मैगज़ीन, धरातलीय डाक से; छ: डाक मार्ग — राजधानी, मेट्रो, ग्रीन, व्यापार, भारी, दस्तावेज़ चैनल
दूर संचार★एशिया महाद्वीप में अग्रणी; दो तिहाई से अधिक गाँव STD से जुड़े; प्रत्येक गाँव में चौबीस घंटे STD; STD की दरें नियमित
जन-संचारआकाशवाणी (राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व स्थानीय भाषा); ★दूरदर्शन — देश का राष्ट्रीय समाचार व संदेश माध्यम, विश्व के बृहत्तम संचार-तंत्र में एक; समाचार-पत्र लगभग 100 भाषाओं व बोलियों में — सर्वाधिक हिंदी, फिर अंग्रेज़ी व उर्दू; ★भारत विश्व में सर्वाधिक चलचित्रों का उत्पादक; केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड
डिजिटल भारतIT (भारतीय प्रतिभा) + IT (सूचना प्रौद्योगिकी) = IT (कल का भारत)

तालिका 8 — अंतर्राष्ट्रीय व्यापार★★

“एक देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रगति उसके आर्थिक वैभव का सूचक है। इसीलिए इसे राष्ट्र का आर्थिक बैरोमीटर भी कहा जाता है।”

शब्दअर्थ
व्यापारराज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान
बाज़ारवह जगह जहाँ विनिमय होता है
स्थानीय व्यापारशहरों, क़स्बों व गाँवों में
राज्यस्तरीयदो या अधिक राज्यों के मध्य
अंतर्राष्ट्रीयदो देशों के मध्य — समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गों से

क्यों ज़रूरी — “संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है अर्थात् इनका वितरण असमान है।”

स्थितिनाम
निर्यात मूल्य > आयात मूल्यअनुकूल व्यापार संतुलन
आयात > निर्यातअसंतुलित व्यापार
निर्यातआयात
रत्न व जवाहरात · रसायन एवं संबंधित उत्पाद · कृषि एवं संबंधित उत्पादकच्चा पेट्रोलियम तथा उत्पाद · रत्न व जवाहरात · आधार धातुएँ · मशीनें · कृषि व अन्य उत्पाद

★“भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ़्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।”

तालिका 9 — पर्यटन

  • पिछले तीन दशकों में महत्त्वपूर्ण वृद्धि
  • ★150 लाख से अधिक व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से संलग्न
  • राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित; स्थानीय हस्तकला व सांस्कृतिक उद्यमों को प्रश्रय; संस्कृति तथा विरासत की समझ विकसित करने में सहायक
  • छह प्रकार — विरासत · पारि-पर्यटन (eco-tourism) · रोमांचकारी · सांस्कृतिक · चिकित्सा · व्यापारिक

तालिका 10 — अनिवार्य आँकड़े

आँकड़ाकिसका
62.16 लाख किमी.सड़क जाल — विश्व में दूसरा
6 लेनस्वर्णिम चतुर्भुज
1960सीमा सड़क संगठन (BRO)
9.02 किमी. / 3000 मी.अटल टनल
1853 / 34 किमी.पहली रेलगाड़ी, मुंबई-थाणे
17रेल प्रखंड
67,956 किमी.कुल रेल मार्ग
1700 → 18,500 किमी.HVJ / कुल गैस पाइपलाइन
14,500 / 5,685 किमी.जलमार्ग / मशीनीकृत भाग
1620 · 891 · 205 · 1078 · 588NW 1 से 5
95% (मुद्रा में 68%)समुद्रों द्वारा व्यापार
7,516.6 किमी.समुद्री तट रेखा
12 + 200प्रमुख + मध्यम-छोटे पत्तन
50%मरमागाओ से लौह-अयस्क निर्यात
100भाषाएँ/बोलियाँ — समाचार-पत्र
150 लाख से अधिकपर्यटन में प्रत्यक्ष रोज़गार
छ:डाक मार्ग

राजस्थान इस अध्याय में★

#कहाँक्या
1कांडला पत्तनकांडला (दीनदयाल) पत्तन राजस्थान के औद्योगिक तथा खाद्यान्नों के आयात-निर्यात को संचालित करता है
2रेल परिवहनपश्चिमी राजस्थान में रेल लाइन निर्माण कठिन (मरुस्थल)
3मानचित्र पृ. 74राजमार्ग — श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, ब्यावर, उदयपुर, कोटा
4मानचित्र पृ. 77रेलमार्ग — बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, जयपुर, बाड़मेर, मुनाबो
5पर्यटनराजस्थान में विरासत, सांस्कृतिक और रोमांचकारी — तीनों पर्यटन की भारी संभावना

★पहला बिंदु सबसे कीमती है — “राजस्थान में समुद्र नहीं है, फिर भी कांडला उसका पत्तन है।” यही ‘जीवन रेखा’ का असली अर्थ समझा देता है।

मानचित्र में क्या-क्या आता है

श्रेणीस्थान
राजमार्ग गलियारेउत्तर-दक्षिण — श्रीनगर ↔ कन्याकुमारी; पूर्व-पश्चिम — सिलचर ↔ पोरबंदर
प्रमुख पत्तन (पश्चिम)कांडला · मुंबई · जवाहरलाल नेहरू · मरमागाओ · न्यू-मैंगलोर · कोच्चि
प्रमुख पत्तन (पूर्व)तूतीकोरन · चेन्नई · विशाखापट्नम · पारादीप · कोलकाता · हल्दिया
अंतर्राष्ट्रीय हवाई पत्तनइंदिरा गांधी (दिल्ली) · छत्रपति शिवाजी (मुंबई) · नेताजी सुभाषचंद्र बोस (कोलकाता) · मीनाम्बक्कम (चेन्नई) · श्री गुरु रामदास जी (अमृतसर) · हैदराबाद · थिरुवनंथपुरम
राष्ट्रीय जलमार्गहल्दिया-इलाहाबाद (गंगा) · सदिया-धुबरी (ब्रह्मपुत्र)

पाँच सूत्र जो सब कुछ बाँध देते हैं

सूत्रक्या
स्थल-जल-वायुपरिवहन के तीन मुख्य वर्ग
सस्ती-ऊबड़-पहाड़-थोड़े-घर-कड़ीसड़क की महत्ता के छह कारण
1853 · 34 · 17 · 67,956रेल के चार आँकड़े
6-6पश्चिम में छह पत्तन, पूर्व में छह
95 और 68समुद्रों से व्यापार — मात्रा में 95%, मुद्रा में 68%

#संकेतउत्तर
1उत्तरी-दक्षिणी गलियारे का उत्तरी छोरSRINAGAR
2दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालयCHENNAI
31.676 मीटर चौड़ाई वाला रेल मार्गBROAD GAUGE
4एक नदीय पत्तनKOLKATA
5उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शनMUGHALSARAI

अंतिम पंक्ति — जो उत्तर के अंत में लिखने लायक़ है

“स्थानिक से अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय व्यापार ने अर्थव्यवस्था को जीवन शक्ति दी है। इसने हमारे जीवन को समृद्ध किया है तथा आरामदायक जीवन के लिए सुविधाओं व साधनों में बढ़ोतरी की है।”

यानी — बनाना काफ़ी नहीं; पहुँचाना भी उतना ही ज़रूरी है।