यह प्रश्न रटने से हल नहीं होते — इनमें बच्चे को आँकड़ा पढ़ना, दोनों पक्ष तौलना, केस सुलझाना और मूल्यांकन करना पड़ता है। NCF-2023 और PARAKH के प्रारूप पर आधारित।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — दो पड़ोसी देश
देश A में सरकार एक व्यक्ति चलाता है। फ़ैसले एक दिन में हो जाते हैं — सड़कें तेज़ी से बनती हैं। पर पिछले साल सरकार ने एक पूरे मोहल्ले को रातोंरात हटा दिया; अख़बारों में इसकी ख़बर छपने की अनुमति नहीं थी; और किसी नागरिक को यह पूछने का हक़ नहीं कि फ़ैसला किस नियम से हुआ। देश B में वही सड़क दो साल की बहस के बाद बनी — जन-सुनवाई हुई, मुआवज़ा तय हुआ, अदालत में चुनौती भी हुई। सड़क देर से बनी, पर कोई विस्थापित परिवार बिना मुआवज़े नहीं रहा।
1देश A के फ़ैसले तेज़ हैं — तो किताब उसे बेहतर क्यों नहीं मानती? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि तेज़ फ़ैसला “ऐसा फ़ैसला भी हो सकता है जिसे लोग स्वीकार न करें” — मोहल्ला हटाना इसी का उदाहरण है। देश B ने “पूरी प्रक्रिया को माना है इसलिए… लोग उसके फ़ैसलों को मानेंगे और वे ज़्यादा प्रभावी होंगे।” ★“लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता।”
2देश A में किस चीज़ की कमी सबसे साफ़ दिखती है? परिभाषा सहित। 2 अंक
उत्तर देखिए
पारदर्शिता की — नागरिक को यह जाँचने का “अधिकार और साधन” कि “फ़ैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।” देश A में न पूछने का हक़ है, न ख़बर छपने की अनुमति — और किताब कहती है: “यह चीज़ अक्सर गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में नहीं होती।”
3★अगर देश A की विकास दर ज़्यादा भी हो, तो भी देश B का चुनाव बेहतर क्यों? 3 अंक
उत्तर देखिए
चार्ट 1 दिखाता है कि गरीब देशों में दोनों की दर का “अंतर लगभग समाप्त” है (4.28 बनाम 4.34);
विकास दर “कई कारकों” पर निर्भर है — केवल शासन-प्रणाली पर नहीं;
और देश B के पास वे चीज़ें हैं जो A के पास कभी नहीं होंगी — ★वैधता (“लोगों की अपनी शासन व्यवस्था”), गरिमा, टकराव सँभालने का तरीक़ा और गलती सुधारने की गुंजाइश।
★किताब का फ़ैसला — “लोकतांत्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे हैं।”
केस 2 — चार्ट पढ़िए और बचिए
एक विद्यार्थी ने चार्ट 1 देखकर उत्तर लिखा — “तानाशाहियों की विकास दर (4.42) लोकतंत्रों (3.95) से ज़्यादा है। इससे सिद्ध होता है कि आर्थिक विकास के लिए तानाशाही बेहतर व्यवस्था है।”
1★★इस उत्तर की तीन ग़लतियाँ पकड़िए। 3 अंक
उत्तर देखिए
उसने नीचे की दो पंक्तियाँ पढ़ी ही नहीं — गरीब देशों की तुलना में “अंतर लगभग समाप्त हो जाता है” (4.34 बनाम 4.28);
उसने सह-संबंध को कारण मान लिया — जबकि विकास “कई कारकों” (जनसंख्या, वैश्विक स्थिति, सहयोग, प्राथमिकताएँ) पर निर्भर है, केवल शासन-प्रणाली पर नहीं;
उसने एक ही खाते से पूरा फ़ैसला सुना दिया — जबकि मूल्यांकन के पाँच खाते हैं, और बाक़ी चार में लोकतंत्र या तो बराबर है या आगे।
2सही उत्तर दो वाक्यों में लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
“1950–2000 में तानाशाहियों की विकास दर थोड़ी बेहतर रही, पर सिर्फ़ गरीब देशों की तुलना करने पर अंतर लगभग समाप्त हो जाता है। इसलिए ‘अकेले इसी कारण से लोकतंत्र को खारिज नहीं किया जा सकता’ — ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे हैं।’”
केस 3 — “वोट तो बराबर है, फिर भी…”
किसी लोकतांत्रिक देश के आँकड़े — ऊपर के 20% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 60% हिस्सा; नीचे के 20% के पास 3%। चुनाव नियमित होते हैं और गरीब मतदाता बहुसंख्यक हैं।
1यह स्थिति किताब के किस निष्कर्ष से मेल खाती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
“वास्तविक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज़्यादा सफल नहीं हो पाई हैं।” — यह चार्ट 2 के दक्षिण अफ्रीका/ब्राज़ील जैसी स्थिति है (64.8/2.9 और 63.0/2.6)।
2★गरीब बहुसंख्यक मतदाता हैं — फिर भी नीतियाँ उनके पक्ष में क्यों नहीं झुकतीं? किताब क्या कहती है, और तुम्हारा अपना एक कारण? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब“हमारे मतदाताओं में गरीबों की संख्या काफ़ी बड़ी है इसलिए कोई भी पार्टी उनके मतों से हाथ धोना नहीं चाहेगी। फिर भी लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकारें गरीबी के सवाल पर उतना ध्यान देने को तत्पर नहीं जान पड़तीं।” — किताब इसे विरोधाभास के रूप में दर्ज करती है।
अपना कारण (कोई भी तर्कसंगत) जैसे: चुनाव में पैसे की भूमिका (अध्याय 4 की चुनौती — धन देने वाले “नीतियों को प्रभावित करते हैं”); या गरीबों का असंगठित होना जबकि धनी समूह संगठित दबाव बना पाते हैं; या वोट कई मुद्दों पर बँट जाना।
3क्या इसका इलाज लोकतंत्र छोड़ना है? एक वाक्य में, कारण सहित। 2 अंक
उत्तर देखिए
नहीं — क्योंकि “तानाशाही में असमानताएँ नहीं होतीं” कहने का कोई आधार नहीं (प्रश्न 7 का ही जाल); इलाज है नागरिकों की सक्रियता — क्योंकि “लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है” — ★डेनमार्क-हंगरी (34.5/9.6, 34.4/10.0) दिखाते हैं कि लोकतंत्र में ही असमानता घटाई भी जा सकती है।
केस 4 — पंचायत की जन-सुनवाई
एक ग्राम पंचायत ने पिछले साल सड़क और नाली पर ख़र्च दिखाया है। गाँव की ग्राम सभा में कुछ लोगों ने बिलों का हिसाब माँगा। सरपंच ने कहा — “तुम लोग हर बात में शिकायत करते हो। इतनी शिकायतें इस बात का सबूत हैं कि गाँव में लोकतंत्र फेल हो गया है।”
1सरपंच की आख़िरी बात किताब के किस वाक्य से ग़लत सिद्ध होती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
★★“शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है। इससे पता चलता है कि लोग सचेत हो गए हैं और वे सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने लगे हैं।” — शिकायत विफलता नहीं, सफलता का लक्षण है।
2हिसाब माँगने वाले ग्रामीण किताब की किस अवधारणा का इस्तेमाल कर रहे हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
पारदर्शिता — नागरिक का यह हक़ कि वह जाँच सके “फ़ैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं”; और ग्राम सभा (अध्याय 2) का काम ही है “बजट पास करना और कामकाज की समीक्षा।”
3★★यह दृश्य “प्रजा” और “नागरिक” के फ़र्क़ को कैसे दिखाता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
प्रजा वह है जो जो मिले उसे चुपचाप स्वीकार कर ले; नागरिक वह है जो हिसाब माँगे। हिसाब माँगते ग्रामीण “प्रजा से नागरिक बनने की गवाही” हैं — ठीक जैसे नन्नू, जिसने RTI से अपनी अर्ज़ी की “दैनिक प्रगति” माँगी थी। ★और इतिहास गवाह है — राजस्थान की जन-सुनवाइयों की यही माँग (“हमारा पैसा, हमारा हिसाब”) आगे चलकर पूरे देश का RTI क़ानून बनी।
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1★“लोकतंत्र अपनी सारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए वह असफल व्यवस्था है।” — पक्ष-विपक्ष में दो-दो तर्क देकर संतुलित निष्कर्ष लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
पक्ष में जो कहा जा सकता है (1) असमानता घटाने में वह “ज़्यादा सफल नहीं”; (2) भ्रष्टाचार और सूचना साझा करने का record “खराब”; संवृद्धि में भी record “थोड़ा” पीछे।
विपक्ष में (3) ★वैधता में वह “निश्चित रूप से बेहतर” — “लोगों की अपनी शासन व्यवस्था”; गरिमा-आज़ादी में “काफ़ी आगे”; सामंजस्य के लिए “सबसे अच्छा”; (4) और असफलता का पैमाना ही ग़लत है — “लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है” — वह स्थितियाँ देता है, नतीजे नागरिकों की सक्रियता से आते हैं (नन्नू इसका प्रमाण)।
निष्कर्ष ★★ लोकतंत्र अधूरी सफलता है — पर वह अकेली व्यवस्था है जो अपने अधूरेपन की शिकायत की इजाज़त देती है और उसे सुधारने के साधन भी देती है। “शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है।”
2“बहुमत जीता है, इसलिए अब पाँच साल उसकी मर्ज़ी चलेगी।” — इस सोच की जाँच कीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
ग़लत। किताब की दो शर्तें — (1) “बहुमत को सदा ही अल्पमत का ध्यान रखना होता है… तभी सरकार जन-सामान्य की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर पाती है”; (2) “बहुमत के शासन का अर्थ धर्म, नस्ल अथवा भाषायी आधार के बहुसंख्यक समूह का शासन नहीं” — और “बहुमत और अल्पमत की राय कोई स्थायी चीज़ नहीं।”
★प्रश्न 6 भी यही कहता है — “बहुसंख्यकों का शासन” लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। (यह पूरी किताब का — अध्याय 1 से यहाँ तक — दोहराया हुआ सबसे बड़ा सबक़ है।)
3★“जब सरकार ही सब जानती है, तो नागरिक को जानने की क्या ज़रूरत?” — पृष्ठ 65 के कार्टून (“सरकार की नज़र”) के आलोक में उत्तर दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कार्टून का व्यंग्य ही यही है — सरकार दूरबीन से नागरिक के बारे में सब कुछ देखती है (राशन-कार्ड, पहचान-पत्र…), पर नागरिक सरकार के बारे में “बस इतना ही जान पाते हैं।”
लोकतंत्र इस रिश्ते को उलटता है — पारदर्शिता नागरिक को “जानने का अधिकार और साधन” देती है; RTI उसका औज़ार है; और नन्नू उदाहरण।
एक वाक्य में ★“तानाशाही में सरकार नागरिक पर नज़र रखती है; लोकतंत्र में नागरिक सरकार पर।”
भाग ग — आँकड़ा पढ़ना
1चार्ट 2 से — द.अफ्रीका (64.8/2.9) और डेनमार्क (34.5/9.6):
(अ) द.अफ्रीका में ऊपर के 20% के पास नीचे के 20% से कितने गुना हिस्सा है? 3 अंक
उत्तर देखिए
64.8 ÷ 2.9 ≈ 22 गुना से अधिक।
(ब) डेनमार्क में?
34.5 ÷ 9.6 ≈ 3.6 गुना।
(स) ★इन दोनों से क्या निष्कर्ष निकलता है?
दोनों लोकतांत्रिक देश हैं — पर असमानता में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़। यानी लोकतंत्र असमानता अपने आप नहीं घटाता, पर घटाने की गुंजाइश देता है — (डेनमार्क-हंगरी “इस मामले में कहीं ज़्यादा बेहतर कहे जाएँगे”) — नतीजा नीतियों और नागरिकों पर निर्भर है।
2“लोकतंत्र बेहतर” के आँकड़े — श्रीलंका 71 · भारत 70 · बांग्लादेश 69 · नेपाल 62 · पाकिस्तान 37:
(अ) सबसे बड़ा अपवाद कौन और किताब उसे कैसे दर्ज करती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पाकिस्तान (37) — “पाकिस्तान को छोड़कर हर जगह लोकतंत्र को तानाशाही के ऊपर वरीयता।”
(ब) ★श्रीलंका (71) का सबसे ऊपर होना क्यों ध्यान देने लायक है?
क्योंकि श्रीलंका गृहयुद्ध झेल चुका देश है (अध्याय 1) — फिर भी वहाँ की जनता लोकतंत्र को सबसे ज़्यादा वरीयता देती है; यानी संकट के बाद भी लोगों का भरोसा व्यवस्था के ‘विचार’ पर बना रहा — “अपने लिए समर्थन पैदा करने की लोकतंत्र की क्षमता भी लोकतंत्र का एक परिणाम ही है।”
(स) “वोट का असर पड़ता है” में भारत का अंक?
67 (नेपाल 75, द.एशिया 65)।
भाग घ — परियोजना और गतिविधि
1★★“लोकतंत्र का रिपोर्ट कार्ड” (अनिवार्य)
पाँचों खातों (शासन · संवृद्धि · असमानता · सामंजस्य · गरिमा) में 10 में से अंक दीजिए — हर अंक के नीचे किताब का एक प्रमाण और अपना एक तर्क। फिर कक्षा का औसत रिपोर्ट कार्ड बोर्ड पर बने और चर्चा हो — “सबसे कम अंक वाले खाते को सुधारने के लिए नागरिक क्या कर सकते हैं?”
2★नन्नू-नाटिका
पाँच पात्र — नन्नू · किरानी · इंस्पेक्टर · बड़ा अधिकारी · सूत्रधार। 10 मिनट का अभिनय, और अंत में दर्शक-कक्षा तय करे — “आवेदन वापस लेना चाहिए या नहीं?”
3चार्ट-निर्माण
चार्ट 1 और 2 से बार-ग्राफ़ — और हर ग्राफ़ के नीचे एक पंक्ति का सही निष्कर्ष (केस 2 की ग़लतियों से बचते हुए)।
4★रोज़ा पार्क्स खोज (किताब के कार्टून से)
पता कीजिए — रोज़ा पार्क्स कौन थीं, 1955 में मॉन्टगोमरी की बस में क्या हुआ, और उनकी कहानी इस अध्याय के किस खाते की प्रविष्टि है (गरिमा!)। पाँच पंक्तियाँँ + एक चित्र।
5माता-पिता से साक्षात्कार (किताब का ही सुझाव, पृष्ठ 74)
“अपनी समस्याओं के लिए सरकारी कर्मचारियों के पास जाने का अनुभव कैसा रहा?” — तीन अनुभव (बिना नाम); और हर अनुभव पर एक पंक्ति — “यहाँ पारदर्शिता के किस साधन से मदद मिल सकती थी?”
6★★“हमारा पैसा, हमारा हिसाब” — स्थानीय जन-सुनवाई का अभ्यास
विद्यालय के किसी छोटे सार्वजनिक ख़र्च (जैसे खेल-सामग्री या पुस्तकालय-कोष) का हिसाब कक्षा के सामने पढ़ा जाए — विद्यार्थी सवाल पूछें। ★यही वह तरीक़ा है जो राजस्थान के गाँवों से चलकर राष्ट्रीय क़ानून बना — इसे जीकर देखना ही इस अध्याय की सबसे बड़ी परियोजना है।
मूल्यांकन रूब्रिक (शिक्षक के लिए)
| स्तर | पहचान |
|---|---|
| उत्कृष्ट | चार्ट से सही निष्कर्ष निकालता है (गरीब-देश तुलना समेत), हर कमी के साथ संतुलन-वाक्य देता है, और “प्रजा-नागरिक” का फ़र्क़ अपने शब्दों में समझा पाता है |
| अच्छा | खाते और फ़ैसले याद हैं, पर आँकड़े का विश्लेषण अधूरा |
| सुधार चाहिए | ! चार्ट 1 से “तानाशाही बेहतर” निकालता है — केस 2 दोबारा कराइए |
| बहुत कमज़ोर | शिकायत को विफलता समझता है — नन्नू और जन-सुनवाई वाली गतिविधियाँ कराइए |
★★और सबसे असली मूल्यांकन — कक्षा से आख़िरी सवाल पूछिए — “लोकतंत्र में शिकायत करने वाला व्यक्ति व्यवस्था का दुश्मन है या सबूत कि व्यवस्था ज़िंदा है?” जितने बच्चे “सबूत” कहकर कारण बता दें — उतनी ही यह पूरी किताब सफल हुई।