अध्याय 3भूमंडलीकृत विश्व का बनना

शिक्षक संदर्शिका18 मिनट

यह फ़ाइल केवल शिक्षक के लिए है। इसमें वह सब है जो कक्षा में जाने से पहले आपको मालूम होना चाहिए — अध्याय की असली संरचना, वे जगहें जहाँ बच्चे अटकते हैं, कठिन प्रश्नों के उत्तर और विषय की वह गहराई जो पाठ्यपुस्तक में नहीं है।


भाग 1 — अध्याय की असली संरचना

पाठ्यपुस्तक इसे चार भागों में बाँटती है, पर पढ़ाने के लिए इसे तीन प्रश्नों के रूप में देखिए —

प्रश्नपाठ का भागउत्तर
दुनिया कैसे जुड़ी?भाग 1 और 2 (पृ. 53–67)पहले सिल्क मार्ग, भोजन और बीमारियों से; फिर उन्नीसवीं सदी में तीन प्रवाहों से
वह जुड़ाव कैसे टूटा?भाग 3 (पृ. 68–73)दो महायुद्ध और महामंदी
वह फिर कैसे बना, और आज कैसा है?भाग 4 (पृ. 74–77)ब्रेटन वुड्स से, और 1970 के बाद के वैश्वीकरण से

अध्याय की केंद्रीय बात एक वाक्य में है, जिसे पूरे अध्याय में दोहराइए —

“दुनिया जुड़ती गई, पर इस जुड़ाव से सबको एक जैसा लाभ नहीं हुआ।”

यह वाक्य पाँच जगह अपने आप सिद्ध हो जाता है —

घटनाकिसे लाभकिसे हानि
आलू का यूरोप जानायूरोप के ग़रीबों का भोजन सुधरा, औसत उम्र बढ़ीआयरलैंड में लगभग 10 लाख लोग भूख से मरे
चेचक का अमेरिका जानास्पेनिश विजेताओं की विजय आसान हुईमूल निवासियों के पूरे समुदाय ख़त्म हो गए
रिंडरपेस्टयूरोपीय मालिकों को मज़दूर मिल गएअफ़्रीकियों की रोज़ी-रोटी ख़त्म हो गई
अनुबंध व्यवस्थाबागान मालिकों को सस्ता श्रम मिलामज़दूरों को ‘नयी दास प्रथा’ मिली
महामंदीशहरी वेतनभोगी और ज़मींदार सुरक्षित रहेकिसान क़र्ज़ में डूब गए, ज़मीन गिरवी पड़ गई

यदि आपके पास केवल एक कालांश हो और पूरा अध्याय पढ़ाना हो, तो यही तालिका पढ़ा दीजिए। पूरा अध्याय इसी में है।

भाग 2 — वे दस जगहें जहाँ बच्चे सबसे ज़्यादा अटकते हैं

1. “वैश्वीकरण” शब्द ही समझ में नहीं आता

समस्या: यह एक अमूर्त शब्द है। बच्चे इसे रटते हैं पर उसका अर्थ नहीं जानते।

उपाय: शब्द से मत शुरू कीजिए, चीज़ से शुरू कीजिए। कक्षा में किसी बच्चे का पेन या मोबाइल उठाकर पूछिए कि यह कहाँ बना है। फिर कहिए — “जब तुम्हारे हाथ की चीज़ किसी और देश में बनी है, तो तुम उस देश से जुड़े हुए हो। इसी जुड़ाव का नाम वैश्वीकरण है।” इसके बाद ही परिभाषा दीजिए।


2. तीन प्रवाह याद तो हो जाते हैं, पर उदाहरण नहीं आते

समस्या: बच्चे “व्यापार, श्रम, पूँजी” रट लेते हैं, पर परीक्षा में उदाहरण नहीं लिख पाते और पूरे अंक नहीं मिलते।

उपाय: तीनों को तीन शब्दों में बदलिए — सामान, आदमी, पैसा। फिर हर एक के आगे भारत का एक ही उदाहरण पक्का कराइए —

  • सामान = भारत से ब्रिटेन गया कच्चा कपास
  • आदमी = भारत से त्रिनिदाद गए गिरमिटिया मज़दूर
  • पैसा = ब्रिटेन का भारत में रेलवे और नहरों में निवेश

यह तीन उदाहरण ही तीन बार दोहराइए। तीसरी बार में बच्चे को याद हो जाता है।


3. “कॉर्न लॉ” का मक्का से कोई संबंध नहीं समझ आता

समस्या: बच्चे सोचते हैं कि यह केवल मक्के का क़ानून था और उसे मामूली समझकर छोड़ देते हैं।

उपाय: पहले बताइए कि अंग्रेज़ी में ‘corn’ का अर्थ केवल मक्का नहीं, अनाज भी होता है। फिर पूरा तर्क एक सवाल से शुरू कीजिए — “अगर सरकार बाहर से आने वाले गेहूँ पर रोक लगा दे तो हमारे यहाँ गेहूँ सस्ता होगा या महँगा?” बच्चे तुरंत कहते हैं “महँगा”। तब कहिए — “बस, यही कॉर्न लॉ था। और अब सोचो कि इससे फ़ायदा किसे हुआ? ज़मींदार को। नुक़सान किसे? शहर के मज़दूर को।”


4. रिंडरपेस्ट की कहानी का ‘अंत’ समझ में नहीं आता

समस्या: बच्चे बता देते हैं कि 90 प्रतिशत मवेशी मर गए, पर यह नहीं बता पाते कि इससे यूरोपीयों को क्या फ़ायदा हुआ।

उपाय: कहानी को उलटे क्रम से पूछिए। पहले पूछिए — “अगर तुम्हारे पास खेत और मवेशी हों, तो क्या तुम किसी की नौकरी करोगे?” बच्चे कहते हैं “नहीं”। फिर पूछिए — “और अगर सारे मवेशी मर जाएँ?” यहीं बात अपने आप पूरी हो जाती है। इसके बाद आँकड़ा और तारीख़ें दीजिए।


5. “व्यापार अधिशेष” और “होम चार्जेज” — सबसे कठिन अवधारणाएँ

समस्या: यह अध्याय का सबसे अमूर्त हिस्सा है। बच्चे इसे पूरी तरह छोड़ देते हैं।

उपाय: दुकान का उदाहरण दीजिए — “मान लो तुम एक दुकानदार से हर महीने 1,000 रुपये का सामान ख़रीदते हो, पर उसे केवल 400 रुपये का सामान बेचते हो। हर महीने 600 रुपये तुम्हारी जेब से जाते हैं और उसकी जेब में आते हैं। यही व्यापार अधिशेष है — बस, ब्रिटेन दुकानदार था और भारत ग्राहक।”

होम चार्जेज के लिए: “अब सोचो कि उसी दुकानदार ने तुम्हारे घर पर एक मुनीम बिठा दिया, और उस मुनीम की तनख़्वाह भी तुम्हारे ही पैसे से चुकाई जा रही है। यही होम चार्जेज था।”

यह उदाहरण देने के बाद यह वाक्य दोहराइए — “भारत अपने ही शोषण का ख़र्च ख़ुद उठा रहा था।”


6. गिरमिटिया मज़दूरों का हिस्सा तो याद रहता है, पर ‘होसे’ और ‘चटनी म्यूज़िक’ नहीं

समस्या: ये तीन नाम अजनबी लगते हैं और बच्चे इन्हें छोड़ देते हैं, जबकि यह अध्याय का सबसे सुंदर हिस्सा है।

उपाय: तीनों को तीन शब्दों में बाँधिए — मेला, धर्म, गाना।

  • मेला = होसे (त्रिनिदाद, मुहर्रम से बना)
  • धर्म = रास्ताफ़ारियानवाद (बॉब मार्ले)
  • गाना = चटनी म्यूज़िक (त्रिनिदाद और गुयाना)

अगर संभव हो तो कक्षा में एक बार बॉब मार्ले का नाम लिखकर पूछिए कि किसने सुना है — बड़े बच्चों में एक-दो हाथ ज़रूर उठते हैं और पूरी कक्षा जुड़ जाती है।


7. दो विश्वयुद्धों के देश आपस में मिल जाते हैं

समस्या: बच्चे पहले युद्ध के “मित्र राष्ट्र” और दूसरे युद्ध के “मित्र राष्ट्र” को गड्डमड्ड कर देते हैं।

उपाय: एक तालिका बोर्ड पर बनाइए और फ़र्क़ को रेखांकित कीजिए —

पहला विश्वयुद्धदूसरा विश्वयुद्ध
एक तरफ़ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस (मित्र राष्ट्र)ब्रिटेन, सोवियत संघ, फ़्रांस, अमेरिका (मित्र राष्ट्र)
दूसरी तरफ़जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन तुर्की (केंद्रीय शक्तियाँ)जर्मनी, जापान, इटली (धुरी शक्तियाँ)

याद रखने का सूत्र दीजिए — “जर्मनी दोनों बार दूसरी तरफ़ था।”


8. महामंदी का ‘अति उत्पादन’ वाला तर्क उलटा लगता है

समस्या: बच्चों को समझ नहीं आता कि ज़्यादा उगाने से नुक़सान कैसे हो सकता है।

उपाय: कक्षा में यह गतिविधि कीजिए। कहिए — “मान लो इस कक्षा के दस बच्चे कल आम बेचने बाज़ार जाएँगे। आज आम 40 रुपये किलो है। कल दाम गिरकर 20 हो गया। अब हर बच्चा सोचता है कि मैं दोगुने आम ले जाऊँगा। तो कल बाज़ार में कितने आम होंगे?” — बच्चे तुरंत समझ जाते हैं कि दाम और गिरेंगे।

फिर कहिए — “जो बात एक आदमी के लिए समझदारी है, वही सब लोगों के लिए एक साथ करने पर मूर्खता बन जाती है। इसे ही अर्थशास्त्री अति उत्पादन का संकट कहते हैं।”


9. ब्रेटन वुड्स की दो संस्थाएँ आपस में उलझ जाती हैं

समस्या: आई.एम.एफ़. और विश्व बैंक का काम बच्चे आपस में बदल देते हैं।

उपाय: दोनों के काम को दो शब्दों में बाँधिए —

  • आई.एम.एफ़. = व्यापार (सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटना)
  • विश्व बैंक = निर्माण (युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतज़ाम)

याद रखने का सूत्र — “बैंक बनाता है, फंड सँभालता है।”


10. सोने और डॉलर वाला वाक्य गड़बड़ है

समस्या: पाठ्यपुस्तक में लिखा है कि “एक डॉलर की क़ीमत 35 औंस सोने के बराबर निर्धारित की गई थी” — यह उलटा है।

उपाय: यह ग़लती कक्षा में ज़रूर बताइए, पर साथ यह भी कहिए कि बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही वाक्य लिखा जाए। असली तथ्य यह है कि एक औंस सोने की क़ीमत 35 डॉलर थी। विस्तार 07-NCERT से आगे वाली फ़ाइल में है।

कक्षा में इसे एक पहेली की तरह पेश कीजिए — “किताब में एक ग़लती है, जो तुम गणित से पकड़ सकते हो। 35 औंस लगभग एक किलो सोना होता है। क्या एक डॉलर में एक किलो सोना मिल सकता है?” इससे बच्चों में पाठ को सवाल की नज़र से पढ़ने की आदत बनती है।

भाग 3 — कक्षा में पूछे जाने वाले कठिन प्रश्न

“सर, अगर बीमारी अपने आप फैली थी तो इसमें यूरोपीय लोगों की क्या ग़लती?”

यह प्रश्न ज़रूर आता है और इसका उत्तर सावधानी से दीजिए।

“बिलकुल सही सवाल है। चेचक जान-बूझकर नहीं फैलाई गई थी, यह सच है। पर दो बातें देखो। पहली — पाठ्यपुस्तक ने बॉक्स 1 में जॉन विनथॉर्प का जो पत्र दिया है, उसमें वह लिख रहा है कि यह ईश्वर का वरदान है। यानी उन्हें अफ़सोस नहीं, ख़ुशी थी। दूसरी — रिंडरपेस्ट भी अपने आप आई थी, पर उसके बाद जो हुआ वह अपने आप नहीं हुआ। बचे-खुचे पशु उपनिवेशकारों ने जान-बूझकर अपने क़ब्ज़े में लिए। यानी बीमारी संयोग थी, पर उसका फ़ायदा उठाना संयोग नहीं था।”


“क्या वैश्वीकरण अच्छा है या बुरा?”

बच्चे यह सवाल ज़रूर पूछेंगे। इसका सीधा उत्तर मत दीजिए।

“इसका उत्तर ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ नहीं है। असली सवाल यह है कि जुड़ाव की शर्तें कौन तय कर रहा है। जब भारत का कपड़ा दुनिया में बिकता था, तब भी वैश्वीकरण था और भारत समृद्ध था। जब शर्तें ब्रिटेन ने तय कीं, तब भी वैश्वीकरण था, पर भारत केवल कच्चा माल भेजने वाला देश रह गया। इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि वैश्वीकरण अच्छा है या बुरा, तो पूछो — किसके लिए?”


“सर, चीन में चीज़ें सस्ती क्यों बनती हैं?”

“पाठ्यपुस्तक इसका सीधा उत्तर देती है — वहाँ वेतन कम हैं। यानी जो चीज़ तुम्हें सस्ती मिल रही है, उसकी क़ीमत किसी और ने चुकाई है — वहाँ के मज़दूर ने। यह ठीक वही बात है जो इस अध्याय में बार-बार आती है।”


“गिरमिटिया मज़दूर वापस क्यों नहीं आए, जब अनुबंध में लौटने की शर्त थी?”

“पाठ्यपुस्तक कहती है कि ज़्यादातर अनुबंधित श्रमिक अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद भी वापस नहीं लौटे। जो लौटे उनमें से भी अधिकांश केवल कुछ समय यहाँ बिता कर फिर अपने नए ठिकानों पर वापस चले गए। इसके कारण सोचो — पाँच साल में उनका घर-गाँव पीछे छूट चुका था, यहाँ ज़मीन नहीं बची थी, और वहाँ कम से कम काम तो था। यही कारण है कि आज त्रिनिदाद, गुयाना, मॉरिशस और फ़िजी में भारतीय मूल के लोगों की संख्या इतनी ज़्यादा है।”


“क्या आज भी गिरमिटिया मज़दूर जैसी स्थिति है?”

यह प्रश्न संवेदनशील है, पर इसका उत्तर देने से बच्चे अध्याय को अपने जीवन से जोड़ पाते हैं।

“आज क़ानून बहुत बदल चुके हैं। मज़दूर के पास आज अधिकार हैं, अदालत है, यूनियन है — जो 1900 में नहीं था। लेकिन कुछ बातें आज भी मिलती-जुलती हैं। आज भी लोग काम के लिए दूर देश जाते हैं, आज भी एजेंट झूठे वादे करते हैं, और आज भी बहुत सारे लोगों को यह नहीं पता होता कि वे किस स्थिति में जा रहे हैं। इतिहास पढ़ने का एक फ़ायदा यही है कि हम ये पैटर्न पहचानने लगते हैं।”

भाग 4 — विषय की वह गहराई जो शिक्षक को पता होनी चाहिए

यह हिस्सा कक्षा में पढ़ाने के लिए नहीं है, पर इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

(क) ‘सिल्क रोड’ शब्द उन्नीसवीं सदी का है, प्राचीन नहीं

यह नाम 1877 में जर्मन भूगोलवेत्ता फ़र्डिनांड फ़ॉन रिष्टहोफ़न ने गढ़ा था। उस काल के व्यापारी इसे ‘सिल्क रोड’ नहीं कहते थे। यह भी नहीं था कि कोई एक सड़क हो — यह रास्तों का एक जाल था, और कोई एक व्यापारी पूरा रास्ता तय नहीं करता था; माल हाथ-दर-हाथ आगे बढ़ता था। पाठ्यपुस्तक ‘बहुत सारे सिल्क मार्ग’ कहकर यह बात सही ढंग से पकड़ती है।

(ख) ‘कोलंबियन एक्सचेंज’ — वह शब्द जो पाठ्यपुस्तक नहीं देती

पाठ्यपुस्तक जिस प्रक्रिया का वर्णन करती है — अमेरिका से यूरोप-एशिया में फ़सलें जाना और यूरोप से अमेरिका में बीमारियाँ जाना — उसे इतिहास में ‘कोलंबियन एक्सचेंज’ कहा जाता है। यह शब्द अल्फ़्रेड क्रॉस्बी ने ही दिया था, जिनकी पुस्तक ‘इकोलॉजिकल इंपीरियलिज़्म’ से पाठ्यपुस्तक ने बॉक्स 1 लिया है। अगर कोई तेज़ बच्चा आगे पढ़ना चाहे तो उसे यह शब्द बता दीजिए।

(ग) कॉर्न लॉ का निरस्तीकरण 1846 में हुआ

पाठ्यपुस्तक कोई वर्ष नहीं देती। कॉर्न लॉ 1815 में लागू हुआ और 1846 में निरस्त हुआ। यह मुक्त व्यापार (free trade) की विजय का प्रतीक माना जाता है। वर्ष परीक्षा में नहीं पूछा जाता, इसलिए बच्चों पर बोझ मत डालिए, पर आपको मालूम होना चाहिए।

(द) दास प्रथा की समाप्ति और अनुबंध व्यवस्था का संबंध

ब्रिटिश साम्राज्य में दास प्रथा 1833–34 में समाप्त हुई। बागान मालिकों को मज़दूर चाहिए थे, इसलिए उसके तुरंत बाद अनुबंध व्यवस्था शुरू हुई। यही कारण है कि इतिहासकार इसे ‘नयी दास प्रथा’ कहते हैं — यह संयोग नहीं, उत्तराधिकार था। पाठ्यपुस्तक यह संदर्भ नहीं देती, इसलिए बच्चों को समझ नहीं आता कि यह प्रथा अचानक क्यों शुरू हुई। आप एक वाक्य में यह बता दीजिए।

(ङ) ब्रेटन वुड्स व्यवस्था 1971 में टूटी

पाठ्यपुस्तक केवल इतना कहती है कि “अंतत: स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था विफल हो गई।” वह वर्ष 1971 था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने डॉलर की सोने में परिवर्तनीयता समाप्त कर दी। यह वर्ष परीक्षा में नहीं पूछा जाता, पर जब बच्चे पूछें कि “कब टूटी?”, तो आपके पास उत्तर होना चाहिए।

(च) महामंदी और आज का संबंध

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की संरचना 1929 से बहुत मिलती-जुलती थी — क़र्ज़ पर ख़रीदारी, आवास क्षेत्र का उछाल, बैंकों का धराशायी होना। पाठ्यपुस्तक ‘हायर-परचेज़’ की जो व्यवस्था बताती है, वह आज की EMI ही है। यह जोड़ बड़े बच्चों को बहुत प्रभावित करता है।

भाग 5 — भाषा-संबंधी सावधानियाँ

कक्षा 10 हिंदी माध्यम के कमज़ोर बच्चों के लिए ये पाँच नियम अपनाइए —

  1. कठिन आर्थिक शब्द के तुरंत बाद उसका सरल अर्थ बोलिए। जैसे — “व्यापार अधिशेष, यानी व्यापार में हमेशा एक ही देश को फ़ायदा।”
  2. अंग्रेज़ी शब्द केवल कोष्ठक में दीजिए। “बृहत उत्पादन (Mass Production)” — कभी “मास प्रोडक्शन का मतलब बहुत सारा बनाना” जैसा मिला-जुला वाक्य मत बोलिए।
  3. आँकड़ा हमेशा किसी नाम के साथ जोड़िए। केवल “90 प्रतिशत” मत कहिए — “रिंडरपेस्ट ने 90 प्रतिशत मवेशी मार डाले।” अकेला आँकड़ा बच्चे भूल जाते हैं।
  4. प्रतिशत को टुकड़ों में बताइए। “90 प्रतिशत यानी हर दस में से नौ मवेशी।” इससे संख्या दिमाग़ में चित्र बन जाती है।
  5. उत्तर लिखवाते समय पूरे वाक्य पर ज़ोर दीजिए। बच्चा “रिंडरपेस्ट — 90% मवेशी” लिखेगा तो अंक नहीं मिलेंगे। उसे लिखना चाहिए — “रिंडरपेस्ट ने अपने रास्ते में आने वाले 90 प्रतिशत मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया।”

भाग 6 — मूल्यांकन की योजना

चरणकबक्या
निदानात्मककालांश 1 के आरंभ में“वैश्वीकरण कितना पुराना है?” — मौखिक चर्चा से पता चलेगा कि बच्चे क्या मानकर बैठे हैं
रचनात्मक 1कालांश 4 के बादतीन प्रवाहों की परिभाषा और भारत के उदाहरण — 5 अंक की लिखित जाँच
रचनात्मक 2कालांश 8 के बादगिरमिटिया मज़दूर पर स्रोत-आधारित प्रश्न — 4 अंक
रचनात्मक 3कालांश 11 के बादमहामंदी के कारण — 4 अंक का निबंधात्मक प्रश्न
संकलनात्मककालांश 12 के बाद05-प्रश्न बैंक का कोई एक नमूना पत्र, 20 अंक
योग्यता-आधारितअलग से08-PARAKH फ़ाइल से चार प्रश्न — इनके अंक अलग रखिए, मुख्य परीक्षा में मत जोड़िए

भाग 7 — अंतिम शिक्षक-टिप्पणी

इस अध्याय की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह ‘सूखा’ लगता है। इसमें न कोई नायक है, न कोई आंदोलन, न कोई क्रांति। इसलिए कक्षा में इसे कहानियों के रूप में ही पढ़ाइए।

पाँच कहानियाँ याद रखिए, बाक़ी सब उनके इर्द-गिर्द रखा जा सकता है —

  1. आलू की कहानी — एक फ़सल ने यूरोप के ग़रीबों को बचाया और आयरलैंड को मार डाला।
  2. चेचक की कहानी — एक बीमारी ने वह महाद्वीप जीत लिया जो सेनाएँ नहीं जीत सकती थीं।
  3. रिंडरपेस्ट की कहानी — मवेशियों की मौत ने आज़ाद पशुपालकों को मज़दूर बना दिया।
  4. राम नारायण तिवारी की कहानी — एक आदमी जो पाँच साल के वादे पर गया और दस साल फँसा रहा।
  5. हेनरी फ़ोर्ड की कहानी — बूचड़ख़ाने से मिला विचार जिसने कार सस्ती कर दी और मज़दूर को मशीन बना दिया।

इन पाँच कहानियों से अध्याय के आधे से ज़्यादा प्रश्न बन जाते हैं। आँकड़े और तारीख़ें इन कहानियों के अंदर डाल दीजिए, अलग से नहीं।

और अंत में, कक्षा के आख़िरी दिन यह प्रश्न ज़रूर पूछिए —

“आज तुम्हारे घर में जो सामान है, वह कहाँ-कहाँ से आया है? और जो लोग उसे बनाते हैं, उनका जीवन कैसा होगा?”

अगर बच्चे इस सवाल पर रुककर सोचने लगें, तो यह अध्याय अपना काम कर चुका है।