अध्याय 6भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ

प्रश्न बैंक54 मिनट

बोर्ड: RBSE, कक्षा XII | अंक-योजना: वस्तुनिष्ठ (1) • अति लघु (2) • लघु (3) • दीर्घ/निबंध (6-8) • स्रोत-आधारित (5) ! शिक्षक-सूचना: यह अध्याय अनेक धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। उत्तर-लेखन में NCERT की सटीक व संतुलित भाषा का ही प्रयोग करवाइए।

भाग अ — बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) — 40

1“महान” और “लघु” परंपराओं के शब्द किसने गढ़े?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) रॉबर्ट रेडफील्ड — बीसवीं शताब्दी के समाजशास्त्री

2NCERT इन शब्दों को उद्धरण-चिह्नों में क्यों रखती है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) — “विद्वान… इन शब्दों में जो पदसोपानात्मक स्वर उभर कर आता है उसकी अवमानना करते हैं”

3पुरी के जगन्नाथ को विष्णु के रूप में कब तक प्रस्तुत किया गया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) बारहवीं शताब्दी

4जगन्नाथ की प्रतिमा किससे बनाई जाती है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) लकड़ी — “स्थानीय जनजाति के विशेषज्ञों द्वारा”

5‘जगन्नाथ’ का शाब्दिक अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) संपूर्ण विश्व का स्वामी

6‘सगुण’ का अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (क) विशेषण सहित

7अलवार संत किसके भक्त थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) विष्णु

8‘तमिल वेद’ किसे कहा जाता था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) नलयिरादिव्यप्रबंधम्

9नलयिरादिव्यप्रबंधम् में कितने अलवारों की रचनाएँ हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) बारह — “चार हज़ार पावन रचनाएँ”

10‘तेवरम’ संकलन में किन संतों की कविताएँ हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) — इसमें कविताओं का संगीत के आधार पर वर्गीकरण हुआ

11स्रोत 1 के लेखक तोंदराडिप्पोडी कौन थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) ब्राह्मण अलवार

12‘एक राक्षसी?’ (स्रोत 3) किसकी रचना है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) कराइक्काल अम्मइयार — शिवभक्त, नयनार परंपरा

13चोल सम्राट परांतक प्रथम के किस वर्ष के अभिलेख का उल्लेख है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) 945 ईसवी — तीन संत-कवियों की धातु प्रतिमाएँ स्थापित करवाईं

14वीरशैव आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) बासवन्ना (1106-68) — ब्राह्मण, कलाचुरी राजा के दरबार में मंत्री

15‘लिंगायत’ का अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) लिंग धारण करने वाले — ‘वीरशैव’ = शिव के वीर

16लिंगायतों ने किन दो आचारों को मान्यता दी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख)

17लिंगायत अपने मृतकों के साथ क्या करते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) — क्योंकि उनका विश्वास है कि मृत्योपरांत भक्त शिव में लीन हो जाएँगे

18‘वचन’ किस भाषा में रचे गए?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) कन्नड़

19अरब सेनापति मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध कब विजित किया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) 711 ईसवी

20शरिया किन पर आधारित है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) — बाद में क़ियास व इजमा भी स्रोत माने गए

21‘क़ियास’ का अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) — ‘इजमा’ = समुदाय की सहमति

22‘ज़िम्मी’ कौन थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) संरक्षित श्रेणी — व्युत्पत्ति अरबी शब्द ‘ज़िम्मा’ से

23अकबर ने खम्भात के गिरजाघर संबंधी फ़रमान कब जारी किया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) 1598

24औरंगज़ेब ने जोगी को पत्र किस वर्ष लिखा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) 1661-62

25मालाबार तट के अरब मुसलमान व्यापारियों ने कौन-सी स्थानीय प्रथा अपनाई?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख)

26मस्जिद-स्थापत्य में कौन-सा तत्व सार्वभौमिक था?

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उत्तर: (ग) — जो मेहराब व मिम्बर से लक्षित होता था

27शाह हमदान मस्जिद का निर्माण कब हुआ?

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उत्तर: (ख) 1395 — श्रीनगर; कश्मीरी लकड़ी की स्थापत्य कला

28‘सूफ़ीवाद’ शब्द के लिए इस्लामी ग्रंथों में कौन-सा शब्द प्रयुक्त होता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) तसव्वुफ़

29‘सिलसिला’ का शाब्दिक अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) ज़ंजीर — पहली अटूट कड़ी पैगम्बर मोहम्मद से जुड़ी

30‘उर्स’ का शाब्दिक अर्थ है

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) विवाह — पीर की आत्मा का ईश्वर से मिलन

31शरिया की अवहेलना करने वाले सूफ़ी कहलाते थे

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ख) बे-शरिया — कलंदर, मदारी, मलंग, हैदरी

32शेख़ मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहाँ है?

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उत्तर: (ग) अजमेर (राजस्थान) — मृत्यु 1235

33शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया की मृत्यु कब हुई?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) 1325 — दरगाह दिल्ली में

34अकबर अजमेर की दरगाह पर कितनी बार गया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (ग) चौदह बार — यह परंपरा 1580 तक बनाए रखी

35ख़ानक़ाह में सामुदायिक रसोई किस पर चलती थी?

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उत्तर: (ख) फ़ुतूह

36‘कौल’ का प्रचलन किसने किया?

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उत्तर: (ख) अमीर खुसरो (1253-1325)

37‘पद्मावत’ के रचयिता कौन हैं?

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उत्तर: (ख) मलिक मोहम्मद जायसी

38कबीर की रचनाओं का कौन-सा संकलन राजस्थान के दादू पंथियों से संबंधित है?

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उत्तर: (ख) कबीर ग्रंथावली

39आदि ग्रंथ साहिब का संकलन किसने किया?

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उत्तर: (ख) पाँचवें गुरु अर्जन देव जी

40मीराबाई का जन्म कहाँ हुआ?

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उत्तर: (ख) — विवाह मेवाड़ के सिसोदिया कुल में हुआ

भाग ब — रिक्त स्थान की पूर्ति — 15

1“महान” व “लघु” परंपराओं के शब्द समाजशास्त्री ______ ने गढ़े।

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रॉबर्ट रेडफील्ड

2देवी की आराधना पद्धति को प्राय: ______ नाम से जाना जाता है।

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तांत्रिक

3धर्म के इतिहासकार भक्ति परंपरा को ______ और ______ में बाँटते हैं।

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सगुण, निर्गुण

4बासवन्ना ______ राजा के दरबार में मंत्री थे।

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कलाचुरी

5वीरशैव परंपरा की व्युत्पत्ति उन ______ से है जो कन्नड़ भाषा में रचे गए।

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वचनों

6हदीस का अर्थ है ______ से जुड़ी परंपराएँ।

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पैग़म्बर साहब

7______ नामक कर चुकाकर ज़िम्मी संरक्षण के अधिकारी हो जाते थे।

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जज़िया

8मस्जिद में प्रार्थना का आला ______ और व्यासपीठ ______ कहलाता है।

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मेहराब, मिम्बर

9ख़ानक़ाह का नियंत्रण ______ (अरबी), पीर अथवा मुर्शीद के हाथ में था।

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शेख़

10सूफ़ी अनुयायियों को ______ कहा जाता था।

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मुरीद

11______ अर्थात ईश्वर का मित्र वह सूफ़ी जो अल्लाह के नज़दीकी होने का दावा करता था।

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वली

12ख़्वाजा मुइनुद्दीन को ______ कहा जाता है।

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ग़रीब नवाज़

13कबीर की उलटी कही उक्तियाँ ______ कहलाती हैं।

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उलटबाँसी

14बाबा गुरु नानक के सेवक ______ रबाब बजाकर उनका साथ देते थे।

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मरदाना

15शंकरदेव के उपदेशों को ______ कह कर संबोधित किया जाता है।

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भगवती धर्म

भाग स — एक पंक्ति के उत्तर (One-liners) — 40

1समन्वय की दो प्रक्रियाएँ?

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ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रचार; तथा स्त्री, शूद्रों व अन्य वर्गों की आस्थाओं की स्वीकृति व नया रूप

2“महान”/“लघु” शब्द किसने गढ़े?

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रॉबर्ट रेडफील्ड (बीसवीं शताब्दी के समाजशास्त्री)

3इन्हें उद्धरण-चिह्नों में क्यों रखते हैं?

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क्योंकि इनमें पदसोपानात्मक (ऊँच-नीच का) स्वर है

4समन्वय का सबसे विशिष्ट उदाहरण?

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पुरी (उड़ीसा) के जगन्नाथ

5जगन्नाथ की प्रतिमा किससे और किसके द्वारा बनती है?

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लकड़ी से, स्थानीय जनजाति के विशेषज्ञों द्वारा

6तांत्रिक पूजा-पद्धति की दो विशेषताएँ?

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स्त्री-पुरुष दोनों शामिल; कर्मकांडी संदर्भ में वर्ग व वर्ण के भेद की अवहेलना

7कौन-से वैदिक देवता गौण हो गए?

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अग्नि, इंद्र और सोम

8सगुण व निर्गुण में अंतर?

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सगुण = विशेषण सहित (मूर्त); निर्गुण = विशेषण विहीन (अमूर्त, निराकार)

9अलवार व नयनार किसके भक्त?

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विष्णु; शिव

10प्रारंभिक भक्ति आंदोलन कब आरंभ हुआ?

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लगभग छठी शताब्दी

11नलयिरादिव्यप्रबंधम् का अर्थ?

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“चार हज़ार पावन रचनाएँ”; इसे ‘तमिल वेद’ कहा जाता था

12तेवरम में कविताओं का वर्गीकरण किस आधार पर हुआ?

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संगीत के आधार पर

13दो प्रमुख स्त्री भक्त?

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अंडाल (अलवार); कराइक्काल अम्मइयार (नयनार)

14अंडाल स्वयं को क्या मानती थीं?

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विष्णु की प्रेयसी

15NCERT के अनुसार इन स्त्रियों की विशिष्टता?

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उन्होंने सामाजिक कर्तव्यों का परित्याग किया, पर किसी वैकल्पिक व्यवस्था या भिक्षुणी समुदाय की सदस्या नहीं बनीं

16945 ई. के अभिलेख में क्या है?

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चोल सम्राट परांतक प्रथम ने अप्पार, संबंदर व सुंदरार की धातु प्रतिमाएँ शिव मंदिर में स्थापित करवाईं

17चोल-निर्मित तीन शिव मंदिर?

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चिदम्बरम, तंजावुर, गंगैकोंडचोलपुरम

18बासवन्ना कौन थे?

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ब्राह्मण; कलाचुरी राजा के दरबार में मंत्री (1106-68)

19‘जंगम’ कौन हैं?

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यायावर भिक्षु

20लिंगायत श्राद्ध क्यों नहीं करते?

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क्योंकि उनका विश्वास है कि मृत्योपरांत भक्त शिव में लीन हो जाते हैं और लौटते नहीं

21उत्तरी भारत में नए धार्मिक नेता कौन थे?

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नाथ, जोगी और सिद्ध

22इनका सामाजिक आधार?

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शिल्पी समुदाय, जिनमें जुलाहे शामिल थे

23711 ई. में क्या हुआ?

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मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध विजित कर उसे ख़लीफ़ा के क्षेत्र में शामिल किया

24शरिया के चार स्रोत?

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कुरान, हदीस, क़ियास, इजमा

25‘उलमा’ कौन थे?

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इस्लाम धर्म के ज्ञाता; धार्मिक, कानूनी व अध्यापन संबंधी ज़िम्मेदारी

26इस्लाम की पाँच ‘बातें’?

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अल्लाह एकमात्र ईश्वर; पैगम्बर मोहम्मद उनके दूत; पाँच बार नमाज़; ज़कात; रोज़ा व हज

27‘जीनन’ शब्द किससे निकला?

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संस्कृत शब्द ‘ज्ञान’ से

28मातृगृहता क्या है?

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वह परिपाटी जहाँ स्त्रियाँ विवाह के बाद अपने मायके में अपनी संतान के साथ रहती हैं

29आठवीं-चौदहवीं सदी में तुर्की मुसलमानों को क्या कहा जाता था?

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तुरुष्क

30‘म्लेच्छ’ का आशय?

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जो वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे और ऐसी भाषाएँ बोलते थे जो संस्कृत से नहीं उपजी थीं

31सूफ़ीमत किसके विरुद्ध उभरा?

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खिलाफ़त की बढ़ती विषयशक्ति के विरुद्ध

32‘इंसान-ए-कामिल’ किसे कहा गया?

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पैगम्बर मोहम्मद को

33ख़ानक़ाह में दीक्षा के अनुष्ठान?

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निष्ठा का वचन; सिर मुँड़ाना; थेगड़ी लगे वस्त्र धारण करना

34चिश्ती सिलसिले का नाम कहाँ से आया?

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मध्य अफ़गानिस्तान के चिश्ती शहर से

35कश्फ-उल-महजूब किसने लिखी?

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अली बिन उस्मान हुजविरी (दाता गंज बख़्श), फारसी में

36फवाइद-अल-फुआद किसका संकलन है?

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अमीर हसन सिजज़ी देहलवी द्वारा; शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया की बातचीत पर आधारित

37कबीर के तीन संकलन?

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कबीर बीजक; कबीर ग्रंथावली; आदि ग्रंथ साहिब

38आदि ग्रंथ साहिब में किन-किन की बानी है?

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बाबा गुरु नानक व चार उत्तराधिकारी; बाबा फरीद; रविदास; कबीर

39खालसा के पाँच प्रतीक?

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बिना कटे केश, कृपाण, कच्छ, कंघा, लोहे का कड़ा

40मीराबाई के गुरु कौन बताए जाते हैं?

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रैदास, जो एक चर्मकार थे (कुछ परंपराओं के अनुसार)

भाग द — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 18

1समन्वय की दो प्रक्रियाएँ कौन-सी थीं?

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(i) ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रचार — “इसका प्रसार पौराणिक ग्रंथों की रचना, संकलन और परिरक्षण द्वारा हुआ। ये ग्रंथ सरल संस्कृत छंदों में थे जो वैदिक विद्या से विहीन स्त्रियों और शूद्रों द्वारा भी ग्राह्य थे।”

(ii) “स्त्री, शूद्रों व अन्य सामाजिक वर्गों की आस्थाओं और आचरणों को ब्राह्मणों द्वारा स्वीकृत किया जाना और उसे एक नया रूप प्रदान करना।”

2“महान” और “लघु” परंपराओं से क्या आशय है? इन शब्दों की आलोचना क्यों की जाती है?

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रॉबर्ट रेडफील्ड के अनुसार “महान” परंपरा वे कर्मकांड थे जिनका पालन समाज के प्रभुत्वशाली वर्ग (पुरोहित व राजा) द्वारा किया जाता था; “लघु” परंपरा वे अन्य लोकाचार थे जिनका पालन कृषक समुदाय करता था और जो इनसे भिन्न थे।

★आलोचना“विद्वान… इन शब्दों में जो पदसोपानात्मक स्वर उभर कर आता है उसकी अवमानना करते हैं।” इसीलिए इन्हें उद्धरण-चिह्नों के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

3जगन्नाथ का उदाहरण समन्वय को कैसे दर्शाता है?

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बारहवीं शताब्दी तक पुरी के मुख्य देवता को जगन्नाथ (“संपूर्ण विश्व का स्वामी”), विष्णु के एक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। पर वे मूलत: एक स्थानीय देवता थे — “जिसकी प्रतिमा को पहले और आज भी लकड़ी से स्थानीय जनजाति के विशेषज्ञों द्वारा गढ़ा जाता है”। “विष्णु का यह रूप देश के अन्य भागों में मिलने वाले स्वरूपों से सर्वथा भिन्न था।” अर्थात् स्थानीय परंपरा मिटी नहीं — उसे एक नया नाम व स्थान मिला।

4तांत्रिक पूजा-पद्धति की दो विशेषताएँ बताइए।

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(i) “इसके अंतर्गत स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हो सकते थे।” (ii) “कर्मकांडी संदर्भ में वर्ग और वर्ण के भेद की अवहेलना की जाती थी।”

साथ ही “इस पद्धति के विचारों ने शैव और बौद्ध दर्शन को भी प्रभावित किया” — विशेषत: उपमहाद्वीप के पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी भागों में।

5सगुण और निर्गुण भक्ति में अंतर बताइए।

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सगुण (विशेषण सहित) — इसमें शिव, विष्णु तथा उनके अवतार व देवियों की आराधना आती है, “जिनकी मूर्त रूप में अवधारणा हुई।”

निर्गुण (विशेषण विहीन) — इसमें “अमूर्त, निराकार ईश्वर की उपासना की जाती थी।”

उदाहरणसगुण — अलवार, नयनार, मीराबाई; निर्गुण — कबीर, बाबा गुरु नानक।

6अलवार व नयनार संतों ने पावन स्थलों के साथ क्या किया?

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“अपनी यात्राओं के दौरान… संतों ने कुछ पावन स्थलों को अपने इष्ट का निवासस्थल घोषित किया। इन्हीं स्थलों पर बाद में विशाल मंदिरों का निर्माण हुआ और वे तीर्थस्थल माने गए। संत-कवियों के भजनों को इन मंदिरों में अनुष्ठानों के समय गाया जाता था और साथ ही इन संतों की प्रतिमा की भी पूजा की जाती थी।”

7‘तमिल वेद’ के दावे का क्या महत्त्व है?

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“अलवार और नयनार संतों की रचनाओं को वेद जितना महत्त्वपूर्ण बताकर इस परंपरा को सम्मानित किया गया।” नलयिरादिव्यप्रबंधम् का वर्णन तमिल वेद के रूप में होता था — “इस ग्रंथ का महत्व संस्कृत के चारों वेदों जितना बताया गया जो ब्राह्मणों द्वारा पोषित थे।”

★यह एक साथ चुनौती भी है और स्वीकृति भी — तमिल को संस्कृत के बराबर बताया गया, पर मानदंड फिर भी ‘वेद’ ही रहा।

8कराइक्काल अम्मइयार व अंडाल की तुलना में NCERT का मूल्यांकन क्या है?

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“हालाँकि इन स्त्रियों ने अपने सामाजिक कर्तव्यों का परित्याग किया। वह किसी वैकल्पिक व्यवस्था अथवा भिक्षुणी समुदाय की सदस्या नहीं बनीं। इन स्त्रियों की जीवन पद्धति और इनकी रचनाओं ने पितृसत्तात्मक आदर्शों को चुनौती दी।”

★मध्य वाला भाग विशेष महत्त्वपूर्ण है — उनके पास कोई संस्था नहीं थी; वे अकेली थीं।

9चोल सम्राटों ने भक्ति परंपरा को किन चार रूपों में समर्थन दिया?

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(i) विशाल शिव मंदिरों का निर्माण — चिदम्बरम, तंजावुर, गंगैकोंडचोलपुरम (ii) कांस्य में ढाली शिव प्रतिमाओं का निर्माण (iii) “तमिल भाषा के शैव भजनों का गायन इन मंदिरों में प्रचलित किया” (iv) “ऐसे भजनों का संकलन एक ग्रंथ (तेवरम) के रूप में करने का भी ज़िम्मा उठाया”।

साथ ही 945 ईसवी में परांतक प्रथम ने तीन संत-कवियों की धातु प्रतिमाएँ शिव मंदिर में स्थापित करवाईं।

10लिंगायतों ने किन बातों का विरोध किया और किन्हें मान्यता दी?

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विरोध (i) जाति की अवधारणा (ii) कुछ समुदायों के “दूषित” होने की ब्राह्मणीय अवधारणा (iii) पुनर्जन्म का सिद्धांत

मान्यता“धर्मशास्त्रों में जिन आचारों को अस्वीकार किया गया था जैसे वयस्क विवाह और विधवा पुनर्विवाह, लिंगायतों ने उन्हें मान्यता प्रदान की।”

परिणाम“ब्राह्मणीय सामाजिक व्यवस्था में जिन समुदायों को गौण स्थान मिला था वे लिंगायतों के अनुयायी हो गए।”

11उत्तरी भारत में नए धार्मिक नेताओं का प्रभाव क्यों बढ़ा?

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“उनमें से बहुत से लोग शिल्पी समुदाय के थे जिनमें जुलाहे शामिल थे। संयोजित दस्तकारी उत्पादन के विकास के साथ उनका महत्त्व बढ़ रहा था। नगरीय केंद्रों के विस्तार तथा मध्य व पश्चिमी एशिया के साथ व्यापार के प्रसार के साथ ही इन दस्तकारी की वस्तुओं की माँग बढ़ी।”

! पर “अपनी लोकप्रियता के बावजूद नवीन धार्मिक नेता विशिष्ट शासक वर्ग का प्रश्रय हासिल करने की स्थिति में नहीं थे।”

12शरिया के स्रोत बताइए। बाद में दो स्रोत क्यों जोड़े गए?

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शरिया मूलत: कुरान शरीफ़ और हदीस पर आधारित है। “जब अरब क्षेत्र से बाहर इस्लाम का प्रसार हुआ जहाँ के आचार-व्यवहार भिन्न थे तो क़ियास (सदृशता के आधार पर तर्क) और इजमा (समुदाय की सहमति) को भी कानून का स्रोत माना जाने लगा।” अत: शरिया = कुरान + हदीस + क़ियास + इजमा।

13‘ज़िम्मी’ कौन थे?

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“ज़िम्मी (व्युत्पत्ति अरबी शब्द ज़िम्मा से) अर्थात संरक्षित श्रेणी… ज़िम्मी वे लोग थे जो उद्घटित धर्मग्रंथ को मानने वाले थे जैसे इस्लामी शासकों के क्षेत्र में रहने वाले यहूदी और ईसाई। ये लोग जज़िया नामक कर चुका कर मुसलमान शासकों द्वारा संरक्षण दिए जाने के अधिकारी हो जाते थे। भारत में इसके अंतर्गत हिंदुओं को भी शामिल कर लिया गया।”

14मस्जिद-स्थापत्य में सार्वभौमिक और स्थानीय तत्व बताइए।

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सार्वभौमिक“इमारत का मक्का की तरफ़ अनुस्थापन जो मेहराब (प्रार्थना का आला) और मिम्बर (व्यासपीठ) की स्थापना से लक्षित होता था।”

स्थानीय (भिन्न)“बहुत से तत्व ऐसे थे जिनमें भिन्नता देखने में आती है जैसे छत और निर्माण का सामान।” उदाहरण — केरल की शिखर जैसी छत (चित्र 6.9), बांग्लादेश की ईंटों की अतिया मस्जिद (6.10), श्रीनगर की लकड़ी की शाह हमदान मस्जिद (6.11)।

15‘सिलसिला’ से क्या आशय है?

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“सिलसिला का शाब्दिक अर्थ है ज़ंजीर जो शेख़ और मुरीद के बीच एक निरंतर रिश्ते का द्योतक है, जिसकी पहली अटूट कड़ी पैगम्बर मोहम्मद से जुड़ी है। इस कड़ी के द्वारा आध्यात्मिक शक्ति और आशीर्वाद मुरीदों तक पहुँचता था।”

सिलसिलों के नाम या तो संस्थापक पर पड़े (कादरी) या जन्मस्थान पर (चिश्ती)।

16‘उर्स’ क्या है और क्यों मनाया जाता है?

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उर्स का अर्थ है विवाह, अर्थात् “पीर की आत्मा का ईश्वर से मिलन”। यह पीर की बरसी के अवसर पर मनाया जाता है — “क्योंकि लोगों का मानना था कि मृत्यु के बाद पीर ईश्वर से एकीभूत हो जाते हैं और इस तरह पहले के बजाय उनके अधिक करीब हो जाते हैं। लोग आध्यात्मिक और ऐहिक कामनाओं की पूर्ति के लिए उनका आशीर्वाद लेने जाते थे।”

17चिश्ती सिलसिला भारत में सबसे प्रभावशाली क्यों रहा?

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“बारहवीं शताब्दी के अंत में भारत आने वाले सूफ़ी समुदायों में चिश्ती सबसे अधिक प्रभावशाली रहे। इसका कारण यह था कि उन्होंने न केवल अपने आपको स्थानीय परिवेश में अच्छी तरह ढाला अपितु भारतीय भक्ति परंपरा की कई विशिष्टताओं को भी अपनाया।”

प्रमाण — शेख़ के सामने झुकना, पानी पिलाना, सिर मुंडन, यौगिक व्यायाम; तथा समा (संगीत) का महत्त्व।

18मीराबाई की क्या विशिष्टता थी?

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“हालाँकि मीराबाई के आसपास अनुयायियों का जमघट नहीं लगा और उन्होंने किसी निजी मंडली की नींव नहीं डाली किंतु फिर भी वह शताब्दियों से प्रेरणा का स्रोत रही हैं। उनके रचित पद आज भी स्त्रियों और पुरुषों द्वारा गाए जाते हैं। खासतौर से गुजरात व राजस्थान के गरीब लोगों द्वारा जिन्हें “नीच जाति” का समझा जाता है।”

अर्थात् संगठन के बिना भी उनका प्रभाव सबसे व्यापक रहा।

भाग य — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 17

1NCERT के अनुसार संत कवियों की रचनाओं का मूल्यांकन इतिहासकारों के लिए चुनौती क्यों है?

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“यह रचनाएँ… संतों के अनुयायियों द्वारा उनकी मृत्यु के उपरांत संकलित की गईं। ये परंपराएँ प्रवाहमान थीं — अनुयायियों की कई पीढ़ियों ने मूल संदेश का न केवल विस्तार किया अपितु उन विचारों को, जो भिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में संदिग्ध व अनावश्यक लगे, उन्हें या तो परिवर्तित कर दिया अथवा त्याग दिया। इन स्रोतों का मूल्यांकन इतिहासकारों के लिए एक चुनौती है।”

साथ ही जीवनियाँ “अक्षरश: सत्य नहीं हैं तथापि इनसे यह ज्ञात होता है कि अनुयायी इन पथ-प्रदर्शक स्त्री पुरुषों के जीवन को किस तरह से देखते थे।”

2वैदिक और पौराणिक परंपरा के बीच की विषमता स्पष्ट कीजिए।

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“वैदिक देवकुल के अग्नि, इंद्र और सोम जैसे देवता पूरी तरह गौण हो गए और साहित्य व मूर्तिकला दोनों में ही उनका निरूपण नहीं दिखता। हालाँकि वैदिक मंत्रों में विष्णु, शिव और देवी की झलक मिलती है, इसकी तुलना इनके विशद, पौराणिक मिथकों से कदापि नहीं की जा सकती। किंतु इन असंगतियों के बावजूद वेदों को प्रामाणिक माना जाता रहा।”

★अर्थात् लोकप्रियता और प्रामाणिकता दो अलग चीज़ें थीं।

3भक्ति परंपरा की चार विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखिए

(i) “संत कवि ऐसे नेता के रूप में उभरे जिनके आस-पास भक्तजनों के एक पूरे समुदाय का गठन हो गया” (ii) ! “बहुत सी भक्ति परंपराओं में ब्राह्मण, देवताओं और भक्तजन के बीच महत्त्वपूर्ण बिचौलिए बने रहे” (iii) “इन परंपराओं ने स्त्रियों और “निम्न वर्णों” को भी स्वीकृति व स्थान दिया” (iv) “भक्ति परंपरा की एक और विशेषता इसकी विविधता है।”

4अलवार-नयनार संतों की जाति संबंधी आलोचना पर NCERT का आकलन क्या है?

उत्तर देखिए

“कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा व ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज़ उठाई। कुछ हद तक यह बात सत्य प्रतीत होती है क्योंकि भक्ति संत विविध समुदायों से थे जैसे ब्राह्मण, शिल्पकार, किसान और कुछ तो उन जातियों से आए थे जिन्हें “अस्पृश्य” माना जाता था।”

! ध्यान दीजिए — NCERT ‘कुछ इतिहासकारों’ और ‘कुछ हद तक’ जैसे संयत शब्द प्रयोग करती है।

5स्रोत 1 और स्रोत 2 की तुलना कीजिए।

उत्तर देखिए
पहलूतोंदराडिप्पोडी (स्रोत 1)अप्पार (स्रोत 2)
परंपराअलवार (वैष्णव)नयनार (शैव)
समानताभक्ति को वेद-ज्ञान/कुल से ऊपर रखते हैं✓
स्वरतुलनात्मक — “उनसे भी ज़्यादा… पसंद करते हैं”तीखा — “हे धूर्तजन”, “भला किस काम का?”
बलभक्त की स्थिति — “चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों”शास्त्र-ज्ञान की व्यर्थता — “तुम्हारा गोत्र और कुल”
विशेषलेखक स्वयं ब्राह्मण — आलोचना भीतर से—

6राज्य ने भक्ति परंपरा का समर्थन क्यों किया?

उत्तर देखिए

“नयनार और अलवार संत वेल्लाल कृषकों द्वारा सम्मानित होते थे इसलिए आश्चर्य नहीं कि शासकों ने भी उनका समर्थन पाने का प्रयास किया। उदाहरणत: चोल सम्राटों ने दैवीय समर्थन पाने का दावा किया और अपनी सत्ता के प्रदर्शन के लिए सुंदर मंदिरों का निर्माण कराया जिनमें पत्थर और धातु से बनी मूर्तियाँ सुसज्जित थीं।”

साथ ही बौद्ध व जैन धर्म से प्रतिस्पर्धा भी एक कारण थी — “परस्पर विरोधी धार्मिक समुदायों में राजकीय अनुदान को लेकर प्रतिस्पर्धा थी।”

7लिंगायतों के मृत्यु-संबंधी विश्वास और आचार को जोड़कर समझाइए।

उत्तर देखिए

विश्वास“मृत्योपरांत भक्त शिव में लीन हो जाएँगे तथा इस संसार में पुन: नहीं लौटेंगे।”

आचार 1“धर्मशास्त्र में बताए गए श्राद्ध संस्कार का वे पालन नहीं करते” — क्योंकि श्राद्ध पुनर्जन्म व पितृ-लोक की धारणा से जुड़ा है

आचार 2“अपने मृतकों को विधिपूर्वक दफनाते हैं” — दाह-संस्कार नहीं

★यह दिखाता है कि एक विश्वास बदलने से पूरी अंत्येष्टि-परंपरा बदल जाती है।

8स्रोत 4 (बसवन्ना का वचन) का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर देखिए

संरचना — दो समानांतर विरोधाभास

निर्जीव के प्रतिसजीव के प्रति
पत्थर के साँप को दूधअसली साँप को “मारो-मारो”
प्रतिमा को व्यंजनभूखे सेवक को “चले जाओ”
रवैया: वे अनुष्ठान का नहीं, उस पाखंड का विरोध करते हैं जिसमें प्रतीक की पूजा होती है पर जीवित प्राणी की उपेक्षा। उनके लिए आचरण अनुष्ठान से बड़ा है।
समझाने की विधि: रोज़मर्रा की परिचित छवियाँ (साँप, दूध, भोजन); कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं; उपदेश नहीं — दृश्य दिखाकर श्रोता को स्वयं निष्कर्ष निकालने देना; सरल कन्नड़।

9शासकों की धार्मिक नीति में सिद्धांत और व्यवहार का अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखिए

सिद्धांत“सैद्धांतिक रूप से मुसलमान शासकों को उलमा के मार्गदर्शन पर चलना होता था। उलमा से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे शासन में शरिया का अमल सुनिश्चित करवाएँगे।”

! पर व्यवहार“किंतु उपमहाद्वीप में स्थिति जटिल थी क्योंकि बड़ी जनसंख्या इस्लाम धर्म को मानने वाली नहीं थी।” अत: “वास्तव में शासक शासितों की तरफ़ काफ़ी लचीली नीति अपनाते थे… बहुत से शासकों ने भूमि अनुदान व कर की छूट हिंदू, जैन, पारसी, ईसाई और यहूदी धर्मसंस्थाओं को दी… ऐसे अनुदान, अनेक मुगल बादशाहों जिनमें अकबर और औरंगज़ेब शामिल थे, द्वारा दिए गए।”

प्रमाणस्रोत 5 (अकबर का फ़रमान, 1598) व स्रोत 6 (औरंगज़ेब का पत्र, 1661-62)।

10‘लोक प्रचलन में इस्लाम’ के तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर देखिए

(i) खोजा इस्माइली (शिया) — “कुरान के विचारों की अभिव्यक्ति के लिए देशी साहित्यिक विधा का सहारा लिया। जीनन (संस्कृत शब्द ज्ञान से) नाम से भक्ति गीत, जो राग में निबद्ध थे, पंजाबी, मुल्तानी, सिंधी, कच्छी, हिंदी और गुजराती में दैनिक प्रार्थना के दौरान गाए जाते थे।”

(ii) मालाबार तट के अरब व्यापारी — “उन्होंने न केवल स्थानीय मलयालम भाषा को अपनाया अपितु स्थानीय आचारों जैसे मातृकुलीयता और मातृगृहता को भी अपनाया।”

(iii) मस्जिद-स्थापत्य — सार्वभौमिक अनुस्थापन के साथ स्थानीय छत व निर्माण-सामग्री।

11आठवीं से चौदहवीं शताब्दी के ग्रंथों में लोगों का वर्गीकरण कैसे होता था?

उत्तर देखिए

“इन इतिहासकारों ने… इस तथ्य को उजागर किया कि इनमें ‘मुसलमान’ शब्द का शायद ही कहीं प्रयोग हुआ हो। इसके विपरीत लोगों का वर्गीकरण उनके जन्मस्थान के आधार पर किया जाता था।”

तुरुष्क (तुर्की), ताजिक (तजाकिस्तान), पारसीक (फारस); तथा शक व यवन जैसे पुराने नाम भी नए प्रवासियों पर लगाए गए। एक अधिक सामान्य शब्द म्लेच्छ था — “जो… इंगित करता है कि वह वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे और ऐसी भाषाएँ बोलते थे जो संस्कृत से नहीं उपजी थीं।”

! NCERT का संतुलन: “हालाँकि ऐसे शब्दों में हीनभावना निहित थी किंतु उन्हें एक ऐसे विशिष्ट मुसलमान धार्मिक समुदाय के लिए शायद ही प्रयुक्त किया जाता था जो हिंदू समुदाय के विपक्ष में हों।”

12सूफ़ी मत की चार मूल स्थापनाएँ बताइए।

उत्तर देखिए

(i) “रूढ़िवादी परिभाषाओं तथा धर्माचार्यों द्वारा की गई कुरान और सुन्ना की बौद्धिक व्याख्या की आलोचना की” (ii) “मुक्ति की प्राप्ति के लिए ईश्वर की भक्ति और उनके आदेशों के पालन पर बल दिया” (iii) “पैगम्बर मोहम्मद को इंसान-ए-कामिल बताते हुए उनका अनुसरण करने की सीख दी” (iv) ★ “सूफ़ियों ने कुरान की व्याख्या अपने निजी अनुभवों के आधार पर की।”

13ख़ानक़ाह की व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

“संस्थागत दृष्टि से सूफ़ी अपने को एक संगठित समुदाय — ख़ानक़ाह (फ़ारसी) — के इर्द-गिर्द स्थापित करते थे। ख़ानक़ाह का नियंत्रण शेख़ (अरबी), पीर अथवा मुर्शीद (फारसी) के हाथ में था।”

शेख़ के चार कार्य (i) अनुयायियों (मुरीदों) की भर्ती (ii) वारिस (खलीफ़ा) की नियुक्ति (iii) आध्यात्मिक व्यवहार के नियम निर्धारित करना (iv) “ख़ानक़ाह में रहने वालों के बीच के संबंध और शेख़ व जनसामान्य के बीच के रिश्तों की सीमा नियत करते थे।”

14शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह में कौन-कौन आते थे और क्यों?

उत्तर देखिए

ख़ानक़ाह दिल्ली की बाहरी सीमा पर यमुना नदी के किनारे ग़ियासपुर में थी। यहाँ लंगर फ़ुतूह (बिना माँगी खैर) पर चलता था।

“सुबह से देर रात तक सब तबके के लोग — सिपाही, गुलाम, गायक, व्यापारी, कवि, राहगीर, धनी और निर्धन, हिंदू जोगी और कलंदर यहाँ अनुयायी बनने, इबादत करने, ताबीज़ लेने अथवा विभिन्न मसलों पर शेख़ की मध्यस्थता के लिए आते थे।”

प्रसिद्ध आगंतुकों में अमीर हसन सिजज़ी, अमीर खुसरो तथा दरबारी इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी थे — “इन सभी लोगों ने शेख़ के बारे में लिखा।”

15अजमेर की दरगाह लोकप्रिय क्यों हुई?

उत्तर देखिए

(i) “शेख़ की सदाचारिता और धर्मनिष्ठा तथा उनके आध्यात्मिक वारिसों की महानता और राजसी मेहमानों द्वारा दिए गए प्रश्रय के कारण”

(ii) ★भौगोलिक कारण — “चूँकि यह दरगाह दिल्ली और गुजरात को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्ग पर थी अत: अनेक यात्री यहाँ आते थे।”

(iii) राजकीय संरक्षण — मुहम्मद बिन तुगलक पहला सुल्तान; गियासुद्दीन खलजी ने पहली इमारत बनवाई; अकबर चौदह बार आया, 1568 में विशाल देग़ भेंट की।

16सूफ़ियों ने राज्य से मिले दान का क्या किया, और इसका क्या परिणाम हुआ?

उत्तर देखिए

“चिश्ती धन और सामान के रूप में दान स्वीकार करते थे किंतु इनको सँजोने के बजाय खाने, कपड़े, रहने की व्यवस्था और अनुष्ठानों जैसे समा की महफिलों पर पूरी तरह खर्च कर देते थे। इस तरह शेख़ के नैतिक अधिकार की पुष्टि होती थी और आम लोगों का उनकी ओर झुकाव बढ़ता था।”

★और इसी लोकप्रियता के कारण “शासक भी उनका समर्थन हासिल करना चाहते थे।”

17कबीर ने परम सत्य को वर्णित करने के लिए किन परंपराओं का सहारा लिया?

उत्तर देखिए

“कबीर बानी की एक और विशिष्टता यह है कि उन्होंने परम सत्य को वर्णित करने के लिए अनेक परिपाटियों का सहारा लिया।”

| परंपरा | शब्द |

|---|---|

| इस्लामी दर्शन | अल्लाह, खुदा, हजरत, पीर |

| वेदांत दर्शन | अलख (अदृश्य), निराकार, ब्रह्मन्, आत्मन् |

| योगी परंपरा | शब्द, शून्य |

! पर “विविध और कभी तो विरोधात्मक विचार इन पदों में व्यंजित होते हैं।”

भाग र — दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (6-8 अंक) — 10

★उत्तर-लेखन का सूत्र: भूमिका → NCERT का कथन/उद्धरण → उदाहरण → सीमा या सावधानी → संतुलित निष्कर्ष।

1उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि संप्रदाय के समन्वय से इतिहासकार क्या अर्थ निकालते हैं? (NCERT प्र. 1)

उत्तर देखिए

ढाँचा (i) परिभाषा — ""महान” संस्कृत-पौराणिक परिपाटी तथा “लघु” परंपरा के बीच हुए अविरल संवाद का परिणाम” (ii) ★दो प्रक्रियाएँ (iii) ★जगन्नाथ, पुरी — चार तत्व (iv) देवी संप्रदाय — सिंदूर से पोते पत्थर; लक्ष्मी/पार्वती (v) भागवत पुराण — तमिल भक्ति का संस्कृत परंपरा में समावेश (vi) ★इस्लामी परंपरा से — मालाबार के अरब व्यापारी (मलयालम + मातृकुलीयता व मातृगृहता); मस्जिद-स्थापत्य (vii) ! सावधानी — ‘महान’/‘लघु’ के पदसोपानात्मक स्वर की आलोचना

2किस हद तक उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली मस्जिदों का स्थापत्य स्थानीय परिपाटी और सार्वभौमिक आदर्शों का सम्मिश्रण है? (NCERT प्र. 2)

उत्तर देखिए

ढाँचा (i) सार्वभौमिक — मक्का की ओर अनुस्थापन, मेहराब, मिम्बर (ii) स्थानीय — छत व निर्माण-सामग्री (iii) तीन उदाहरण — केरल (शिखर जैसी छत, 13वीं सदी), अतिया मस्जिद (ईंट, 1609, बांग्लादेश), शाह हमदान (लकड़ी व पेपरमैशी, 1395, श्रीनगर) (iv) ★निष्कर्ष — “एक सार्वभौमिक धर्म के स्थानीय आचारों के संग जटिल मिश्रण का सर्वोत्तम उदाहरण”; धार्मिक आवश्यकता समान, भौतिक अभिव्यक्ति स्थानीय

3बे शरिया और बा शरिया सूफ़ी परंपरा के बीच एकरूपता और अंतर, दोनों को स्पष्ट कीजिए। (NCERT प्र. 3)

उत्तर देखिए

! प्रश्न ‘दोनों’ माँगता है।

(क) एकरूपता: दोनों सूफ़ी व रहस्यवादी; दोनों मुक्ति के लिए ईश्वर की भक्ति पर बल; दोनों रूढ़िवादी बौद्धिक व्याख्या से असंतुष्ट; दोनों ने सादगी व त्याग को महत्त्व दिया

(ख) अंतर:

| | बा-शरिया | बे-शरिया |

|---|---|---|

| शरिया | पालन | अवहेलना |

| संस्था | ख़ानक़ाह, सिलसिला, दीक्षा, शेख़-मुरीद | ख़ानक़ाह का तिरस्कार |

| जीवन | संगठित समुदाय | फकीर की ज़िंदगी; “निर्धनता और ब्रह्मचर्य को गौरव” |

| उदाहरण | चिश्ती, सुहरावर्दी, कादरी, नक्शबंदी | कलंदर, मदारी, मलंग, हैदरी |

4चर्चा कीजिए कि अलवार, नयनार और वीरशैवों ने किस प्रकार जाति प्रथा की आलोचना प्रस्तुत की। (NCERT प्र. 4)

उत्तर देखिए

ढाँचा

(क) अलवार-नयनार: ! “कुछ इतिहासकारों का मानना… कुछ हद तक सत्य प्रतीत” • विविध सामाजिक आधार (ब्राह्मण, शिल्पकार, किसान, “अस्पृश्य”) • ★‘तमिल वेद’ का दावा • स्रोत 1 (“चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों”) • स्रोत 2 (“गोत्र और कुल भला किस काम का?”)

(ख) वीरशैव: जाति की अवधारणा व “दूषित” होने की धारणा का विरोध • पुनर्जन्म पर प्रश्न • ★वयस्क विवाह व विधवा पुनर्विवाह को मान्यता • सामाजिक परिणाम — गौण समुदाय अनुयायी बने • स्रोत 4

(ग) ★संतुलित निष्कर्ष: अलवार-नयनार ने मुख्यत: आध्यात्मिक समानता का दावा किया; लिंगायतों ने सामाजिक आचारों में ठोस परिवर्तन किए।

5कबीर अथवा बाबा गुरु नानक के मुख्य उपदेशों का वर्णन कीजिए। इन उपदेशों का किस तरह संप्रेषण हुआ? (NCERT प्र. 5)

उत्तर देखिए

(क) कबीर: एकेश्वरवाद (स्रोत 10) • ★तीन परंपराओं की शब्दावली • आडंबर व मूर्तिपूजा की आलोचना • ! “विरोधात्मक विचार” • उलटबाँसी • संप्रेषण: मौखिक व संगीतबद्ध → तीन संकलन (कबीर बीजक, कबीर ग्रंथावली, आदि ग्रंथ साहिब) → ! सभी मृत्यु के बहुत बाद → 19वीं सदी में मुद्रण

(ख) बाबा गुरु नानक: निर्गुण भक्ति • पाँच अस्वीकार • “रब का कोई लिंग या आकार नहीं” • नाम-जाप • संप्रेषण: पंजाबी में शबद, अलग-अलग रागों में, मरदाना का रबाब → संगत → अंगद को गुरुपद, 200 वर्ष → आदि ग्रंथ साहिब (गुरु अर्जन देव) → गुरु ग्रंथ साहिब (गुरु गोबिन्द सिंह) • ★आकलन: “किसी नवीन धर्म की संस्थापना नहीं करना चाहते थे, किंतु… अनुयायियों ने… पृथक चिह्नित किया”

6सूफ़ी मत के मुख्य धार्मिक विश्वासों और आचारों की व्याख्या कीजिए। (NCERT प्र. 6)

उत्तर देखिए

ढाँचा (आठ खंड) (i) उद्भव — खिलाफ़त की विषयशक्ति के विरुद्ध (ii) ★चार मूल विश्वास (iii) शब्दावली — तसव्वुफ़; ‘सूफ़ीवाद’ 19वीं सदी का अंग्रेज़ी शब्द (iv) ★संस्थागत आचार — ख़ानक़ाह, शेख़/पीर/मुर्शीद, मुरीद, खलीफ़ा, सिलसिला, दीक्षा (v) ★उपासना — ज़िक्र, समा, कव्वाली, कौल (vi) ★दरगाह — वली, ज़ियारत, उर्स, बरकत, करामात (vii) सामाजिक आचार — लंगर व फ़ुतूह; सब तबके के लोग; स्थानीय परंपराओं का आत्मसातीकरण (यौगिक व्यायाम आदि) (viii) ★आंतरिक विविधता — बा-शरिया बनाम बे-शरिया

7क्यों और किस तरह शासकों ने नयनार और सूफ़ी संतों से अपने संबंध बनाने का प्रयास किया? (NCERT प्र. 7)

उत्तर देखिए

! ‘क्यों’ और ‘किस तरह’ — दोनों अलग-अलग लिखिए।

(क) नयनार — चोल सम्राट

क्यों संत वेल्लाल कृषकों द्वारा सम्मानित • दैवीय समर्थन का दावा • सत्ता-प्रदर्शन • बौद्ध-जैन से प्रतिस्पर्धा

किस तरहविशाल शिव मंदिर • कांस्य प्रतिमाएँ • शैव भजनों का गायन • तेवरम का संकलन • ★945 ई. — परांतक प्रथम की धातु प्रतिमाएँ व जुलूस • भूमि-अनुदान

(ख) सूफ़ी — सुल्तान व मुगल

क्यों★ “सुल्तान जानते थे कि उनकी अधिकांश प्रजा इस्लाम धर्म मानने वाली नहीं है” → उलमा की शरिया-माँग ठुकराई → सूफ़ी की सत्ता “अल्लाह से उद्भूत” थी, उलमा की व्याख्या पर निर्भर नहीं • लोकप्रियता (धर्मनिष्ठा, विद्वता, चमत्कारी शक्ति) • मध्यस्थता

किस तरहइनाम भूमि व दान-न्यास • ★अकबर की 14 यात्राएँ, 1568 की देग़, मस्जिद • गियासुद्दीन खलजी की पहली इमारत • ★क़ब्रें दरगाहों के नज़दीक

(ग) ! तनाव भी: झुककर प्रणाम, कदम चूमना; ‘सुल्तान-उल-मशेख’; स्रोत 9 (भूमि का पट्टा अस्वीकार)

8उदाहरण सहित विश्लेषण कीजिए कि क्यों भक्ति और सूफ़ी चिंतकों ने अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए विभिन्न भाषाओं का प्रयोग किया? (NCERT प्र. 8)

उत्तर देखिए

(क) पाँच कारण: जनसाधारण तक पहुँच • वेदों/शास्त्रों की सत्ता को चुनौती • संगीत के साथ प्रस्तुति • ★स्थानीय परिवेश में ढलना (चिश्ती) • रहस्यवादी अनुभव की अभिव्यक्ति (उलटबाँसी)

(ख) भक्ति के उदाहरण: तमिल (अलवार-नयनार) • कन्नड़ (बसवन्ना के वचन) • मराठी (अभंग) • संत भाषा (कबीर) • पंजाबी (नानक के शबद) • राजस्थानी (मीराबाई) • असमिया (शंकरदेव का कीर्तनघोष)

(ग) सूफ़ी के उदाहरण: हिंदवी (दिल्ली के चिश्ती) • ★क्षेत्रीय भाषा (बाबा फरीद — गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित) • फ़ारसी मसनवी (पद्मावत — जायसी; पद्मिनी व चित्तौड़ के रतनसेन; “आत्मा की परमात्मा तक पहुँचने की यात्रा”) • ★दक्खनी (बीजापुर; “चक्की पीसते और चरखा कातते हुए”; लोरीनामा, शादीनामा) • छह भाषाओं में जीनन (खोजा इस्माइली) • ★मिश्रित (कौल के बाद “फारसी, हिंदवी अथवा उर्दू… तीनों ही भाषाओं के शब्द”)

(घ) ★निष्कर्ष: “लिंगायतों द्वारा लिखे गए कन्नड़ के वचन और पंढरपुर के संतों द्वारा लिखे मराठी के अभंगों ने भी उन पर अपना प्रभाव छोड़ा। इस माध्यम से इस्लाम दक्कन के गाँवों में जगह पाने में सफल हुआ।” — भाषा केवल माध्यम नहीं, स्वयं समन्वय का साधन बनी।

9इस अध्याय में प्रयुक्त किन्हीं पाँच स्रोतों का अध्ययन कीजिए और उनमें निहित सामाजिक व धार्मिक विचारों पर चर्चा कीजिए। (NCERT प्र. 9)

उत्तर देखिए
स्रोतसामाजिक विचारधार्मिक विचार
1 (तोंदराडिप्पोडी)वर्ण-व्यवस्था के परे लोगों की स्वीकृतिभक्ति > वेद-ज्ञान
3 (कराइक्काल अम्मइयार)स्त्री-सौंदर्य के मानक का अस्वीकार; स्त्री की स्वायत्तताघोर तपस्या; शिव-भक्ति
4 (बसवन्ना)जीवित प्राणी की उपेक्षा की आलोचनाआचरण > अनुष्ठान
8 (चरखानामा)स्त्री-श्रम का सम्मान; घर ही उपासना-स्थलज़िक्र की दैनिक साधना; पीर को समर्पण
10 (कबीर)समुदायों के बीच भेद की व्यर्थताएकेश्वरवाद; “विभिन्नताएँ तो केवल शब्दों में हैं”

★प्रत्येक के लिए तीन-वाक्य का ढाँचा(1) स्रोत क्या कहता है (2) इसमें कौन-सा सामाजिक/धार्मिक विचार है (3) यह अध्याय की किस धुरी — समन्वय या असहमति — से जुड़ता है।

10“धार्मिक परंपराएँ भी अन्य परंपराओं की तरह परिवर्तनशील हैं।” — इस कथन की अध्याय के आधार पर विवेचना कीजिए। (विश्लेषणात्मक)

उत्तर देखिए

ढाँचा

(i) भूमिका — अध्याय का समापन-अनुच्छेद उद्धृत कीजिए

(ii) ★परिवर्तन के प्रमाण — भक्ति परंपरा में: वैदिक देवता गौण हो गए; स्थानीय देवता पौराणिक ढाँचे में समाहित (जगन्नाथ); भागवत पुराण की रचना

(iii) ★परिवर्तन के प्रमाण — इस्लामी परंपरा में: शरिया में क़ियास व इजमा का जुड़ना (क्योंकि “अरब क्षेत्र से बाहर… आचार-व्यवहार भिन्न थे”); लोक-प्रचलन में विविधता; मस्जिद-स्थापत्य

(iv) ★परिवर्तन के प्रमाण — सूफ़ी परंपरा में: चिश्तियों द्वारा यौगिक व्यायाम व स्थानीय आचार अपनाना; दक्खनी व हिंदवी का प्रयोग

(v) ★अनुयायियों द्वारा परिवर्तन: प्रस्तावना — “अनुयायियों की कई पीढ़ियों ने… परिवर्तित कर दिया अथवा त्याग दिया”; बाबा गुरु नानक के बाद अनुयायियों ने “अपने को हिंदू और मुसलमान दोनों से पृथक चिह्नित किया”

(vi) ★स्रोतों में परिवर्तन: “कुछ को सुरक्षित किया गया… कुछ में संशोधन हो गया… कुछ हमेशा के लिए विस्मृत हो गए”

(vii) ★★निष्कर्ष: “परिपाटी की निरन्तरता इतिहासकारों के लिए लाभदायक सिद्ध होती है… किंतु चूँकि ये परंपराएँ आज भी लोगों के जीवन का हिस्सा हैं, लोगों के लिए यह मानना आसान नहीं होता कि समय के साथ बदलाव आया होगा।” — यही इतिहासकार की सबसे बड़ी चुनौती है।

भाग ल — स्रोत-आधारित प्रश्न (5 अंक प्रत्येक) — 5 सेट

सेट 1 — स्रोत 4 : “अनुष्ठान और यथार्थ संसार” (बसवन्ना का वचन)★

“जब वे एक पत्थर से बने सर्प को देखते हैं तो उस पर दूध चढ़ाते हैं यदि असली साँप आ जाए तो कहते हैं “मारो-मारो”। देवता के उस सेवक को, जो भोजन परसने पर खा सकता है वे कहते हैं “चले जाओ! चले जाओ।” किन्तु ईश्वर की प्रतिमा को जो खा नहीं सकती, वे व्यंजन परोसते हैं।”

(क) बसवन्ना कौन थे? यह रचना किस विधा की है? (1)

बासवन्ना (1106-68) एक ब्राह्मण थे जो कलाचुरी राजा के दरबार में मंत्री थे और जिन्होंने बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक में वीरशैव/लिंगायत आंदोलन का नेतृत्व किया। यह रचना वचन विधा की है, जो कन्नड़ भाषा में रची गई।

(ख) इस वचन में कौन-से दो विरोधाभास दर्शाए गए हैं? (2)

(i) लोग पत्थर के साँप को दूध चढ़ाते हैं, पर असली साँप को देखकर “मारो-मारो” कहते हैं। (ii) वे ईश्वर की प्रतिमा को, जो खा नहीं सकती, व्यंजन परोसते हैं; पर देवता के जीवित सेवक को, जो सचमुच खा सकता है, “चले जाओ” कहते हैं।

(ग) ★अनुष्ठानों के प्रति बसवन्ना का रवैया क्या है? वे अपनी बात कैसे समझाते हैं? (2)

रवैया: वे अनुष्ठान मात्र का विरोध नहीं करते — वे उस पाखंड का विरोध करते हैं जिसमें प्रतीक की पूजा होती है पर जीवित प्राणी की उपेक्षा। उनके लिए आचरण अनुष्ठान से बड़ा है। यह लिंगायतों की उस व्यापक दृष्टि से मेल खाता है जिसमें उन्होंने जाति की अवधारणा व “दूषित” होने की धारणा का विरोध किया। समझाने की विधि (चार बिंदु): (i) समानांतर विरोधाभास — दो जोड़े आमने-सामने (ii) रोज़मर्रा की परिचित छवियाँ — साँप, दूध, भोजन; कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं (iii) ★उपदेश नहीं, दृश्य — वे ‘यह ग़लत है’ नहीं कहते; श्रोता को स्वयं निष्कर्ष निकालने देते हैं (iv) सरल कन्नड़ (लोकभाषा)।

सेट 2 — स्रोत 7 : “मुगल शहज़ादी जहाँआरा की तीर्थयात्रा, 1643”★

”…यह फकीरा जहाँआरा… राजधानी आगरा से अपने पिता (बादशाह शाहजहाँ) के संग पाक और बेजोड़ अजमेर के लिए निकली… मैं इस बात के लिए वायदापरस्त थी कि हर रोज़ और हर मुकाम पर मैं दो बार की अख़्तियारी नमाज़ अदा करूँगी… बहुत दिन… मैं रात को बाघ के चमड़े पर नहीं सोई और अपने पैर मुकद्दस दरगाह की तरफ नहीं फैलाए, न ही मैंने अपनी पीठ उनकी तरफ़ की। वीरवार को रमज़ान के मुकद्दस महीने के चौथे रोज़ मुझे चिराग और इत्र में डूबे दरगाह की ज़ियारत की खुशी हासिल हुई… मैं दरगाह के भीतर गई और अपने जर्द चेहरे को उसकी चौखट की धूल से रगड़ा। दरवाज़े से मुकद्दस दरगाह तक मैं नंगे पाँव वहाँ की ज़मीन को चूमती हुई गई… मैंने मज़ार के चारों ओर सात फेरे लिए। आख़िर में… मैंने सबसे उम्दा इतर छिड़का। चूँकि गुलाबी दुपट्टा जो मेरे सिर पर था, मैं उतार चुकी थी इसलिए उसे मैंने मुकद्दस मज़ार के ऊपर रखा।”

(क) यह अंश किस ग्रंथ से लिया गया है और वह किस पर है? (1)

यह जहाँआरा द्वारा रचित शेख़ मुइनुद्दीन चिश्ती की जीवनी ‘मुनिस-अल-अरवाह’ (अर्थात् ‘आत्मा का विश्वस्त’) से लिया गया है।

(ख) जहाँआरा किन चेष्टाओं का ज़िक्र करती हैं जो शेख़ के प्रति उनकी भक्ति दर्शाती हैं? (2)

स्वयं को ‘फकीरा’ कहना (शहज़ादी होते हुए भी) • हर मुकाम पर दो बार नमाज़ का वायदा • बाघ के चमड़े पर न सोना • ★दरगाह की तरफ़ पैर न फैलाना, पीठ न करना • पेड़ के नीचे दिन बिताना • चौखट की धूल से चेहरा रगड़ना • नंगे पाँव ज़मीन चूमते हुए जाना • ★मज़ार के चारों ओर सात फेरे • उम्दा इत्र छिड़कना • ★अपना दुपट्टा मज़ार पर चढ़ाना।

(ग) ★वे दरगाह की खासियत को किस तरह दर्शाती हैं? इस स्रोत का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है? (2)

खासियत: “पाक और बेजोड़ अजमेर”; “चिराग और इत्र में डूबे दरगाह”; बार-बार “मुकद्दस दरगाह”; “गुम्बद के भीतर रोशनी से भरी दरगाह”; तथा रमज़ान के महीने में ज़ियारत का विशेष महत्त्व। ★ऐतिहासिक महत्त्व (दो बिंदु): (i) यह एक स्त्री द्वारा, स्वयं के अनुभव का विवरण है — मुगल शहज़ादी होते हुए भी वे स्वयं को ‘फकीरा’ कहती हैं (ii) ★‘सात फेरे’ और ‘नंगे पाँव’ जैसी चेष्टाएँ दर्शाती हैं कि चिश्ती परंपरा ने स्थानीय आचारों को आत्मसात किया — जो §7.1 के इस कथन को प्रमाणित करता है कि “स्थानीय परंपराओं को आत्मसात करने का प्रयत्न किया गया।”

सेट 3 — स्रोत 8 : “चरखानामा”★★

“जैसे आप रुई लेते हैं, आप ज़िक्र-ए-जाली करें। जैसे आप रुई को धुनते हैं, आप ज़िक्र-ए-कल्बी करें। जैसे आप धागे को फिरकी पर लपेटते हैं, आप ज़िक्र-ए-आइनी करें। ज़िक्र पेट से छाती तक उच्चारित किया जाए। उसे धागे की तरह गले से उतारें स्वास के धागे एक-एक गिनें, बहन / चौबीस हज़ार तक गिनें सुबह-शाम ऐसा करें और इसे तोहफ़े में अपने पीर को पेश करें।”

(क) यह गीत किस धुन पर आधारित है? ‘ज़िक्र’ का क्या अर्थ है? (1)

यह गीत चरखे के चलने की धुन पर आधारित है। ज़िक्र = ईश्वर का नाम-जाप।

(ख) कताई के चरणों और आध्यात्मिक क्रियाओं का मिलान कीजिए। (2)

कताई का चरणज़िक्र का रूप
रुई लेनाज़िक्र-ए-जाली
रुई धुननाज़िक्र-ए-कल्बी
धागा फिरकी पर लपेटनाज़िक्र-ए-आइनी
धागे गिननासाँसें गिनना — चौबीस हज़ार तक
तैयार सूतपीर को तोहफ़ा

(ग) ★इस गीत के विचार और अभिव्यक्ति के तरीके स्रोत 7 (जहाँआरा की ज़ियारत) से कैसे समान और भिन्न हैं? (2)

पहलूस्रोत 7 — जहाँआरास्रोत 8 — चरखानामा
कौनमुगल शहज़ादीसाधारण स्त्री (कातने वाली)
स्थानदरगाह (अजमेर) — विशेष स्थानघर — रोज़ का स्थान
समयविशेष अवसर (तीर्थयात्रा, रमज़ान)★सुबह-शाम, प्रतिदिन
क्रियाशारीरिक चेष्टाएँ — फेरे, चूमना, इत्र★श्रम की क्रियाएँ — कातना, धुनना
भाषाअलंकृत गद्यसरल गीत, लोक-लय में

★समानताएँ (चार): (i) दोनों में पीर/शेख़ के प्रति समर्पण केंद्रीय (ii) दोनों भेंट चढ़ाती हैं — जहाँआरा दुपट्टा, कातने वाली सूत (iii) दोनों स्त्री-स्वर हैं (iv) दोनों में दोहराव का महत्त्व — नमाज़/सात फेरे बनाम चौबीस हज़ार बार ज़िक्र। ★निष्कर्ष: “शहज़ादी दरगाह गई, कातने वाली ने घर को ही दरगाह बना लिया — भक्ति दोनों में एक ही थी।”

सेट 4 — स्रोत 9 : “शाही भेंट अस्वीकार” (1313)★

“मेरी (अमीर हसन सिजज़ी) अच्छी किस्मत थी कि मैं उनके (निज़ामुद्दीन औलिया) कदम चूम सका… इस समय एक स्थानीय शासक ने दो बगीचे और बहुत सी ज़मीन का पट्टा शेख़ साहब को भेजा है… शासक ने यह भी साफ़ किया है कि वह बगीचों और ज़मीन पर अपना हक कहते हैं: “इस ज़मीन, खेत और बगीचे का मुझे क्या करना है?… हमारे कोई भी आध्यात्मिक गुरु ने इस तरह का काम नहीं किया।” फिर उन्होंने एक उचित कहानी सुनाई ”…सुल्तान गियासुद्दीन… शेख़ फरीदुद्दीन से मिलने आए। उन्होंने शेख़ को कुछ धनराशि और चार गाँवों का पट्टा भेंट किया… मुस्कुराते हुए शेख-अल-इस्लाम (फ़रीदुद्दीन) ने कहा: मुझे धन दे दो मैं इसे दरवेशों में बाँट दूँगा, पर जहाँ तक ज़मीन के पट्टे का सवाल है उसे उन लोगों को दे दो जिन्हें उनकी कामना है…।”

(क) यह अंश किस प्रकार के स्रोत से है? इसका संकलनकर्ता कौन है? (1)

यह मलफ़ुज़ात (सूफ़ी संतों की बातचीत) प्रकार का स्रोत है — विशेष रूप से फवाइद-अल-फुआद, जिसका संकलन अमीर हसन सिजज़ी देहलवी ने किया और जो शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया की बातचीत पर आधारित है।

(ख) सूफ़ियों और राज्य के बीच संबंध का कौन-सा पहलू इस कहानी से स्पष्ट होता है? (2)

(i) शासक स्वयं, बिना माँगे, भेंट भेजता है — यह चिश्ती नियम से मेल खाता है: “सत्ताधारी विशिष्ट वर्ग अगर बिना माँगे अनुदान या भेंट देता था तो सूफ़ी संत उसे स्वीकार करते थे।” (ii) ★पर भेद किया जाता है — धन स्वीकार्य है (क्योंकि वह दरवेशों में बाँट दिया जाएगा), पर भूमि का पट्टा अस्वीकार्य (क्योंकि वह स्थायी संपत्ति व सत्ता का स्रोत है)। (iii) परंपरा का हवाला — “हमारे कोई भी आध्यात्मिक गुरु ने इस तरह का काम नहीं किया।” यह §7.4 के सिद्धांत की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है — “इनको सँजोने के बजाय… खर्च कर देते थे।”

(ग) ★यह किस्सा शेख़ और उनके अनुयायियों के बीच संपर्क के तरीकों के बारे में क्या बताता है? (2)

(i) कदम चूमना — शारीरिक श्रद्धा-प्रदर्शन (ii) ★कहानी के माध्यम से शिक्षा — “फिर उन्होंने एक उचित कहानी सुनाई”; सीधा उपदेश नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती शेख़ का दृष्टांत (iii) ★‘मुस्कुराते हुए’ — कठोर निषेध नहीं, सौम्य अस्वीकार (iv) ★अनुयायी ने उसे लिख लिया — इसीलिए यह हम तक पहुँचा; मलफ़ुज़ात परंपरा का यही महत्त्व है

सेट 5 — स्रोत 10 : “एक ईश्वर” (कबीर)★★

“हे भाई यह बताओ, किस तरह हो सकता है कि संसार के एक नहीं दो स्वामी हों? किसने तुम्हें भ्रमित किया है? ईश्वर को अनेक नामों से पुकारा जाता है: जैसे अल्लाह, राम, करीम, केशव, हरि तथा हज़रत। विभिन्नताएँ तो केवल शब्दों में हैं जिनका आविष्कार हम स्वयं करते हैं। कबीर कहते हैं दोनों ही भुलावे में हैं। इनमें से कोई एक राम को प्राप्त नहीं कर सकता। एक बकरे को मारता है और दूसरा गाय को। वे पूरा जीवन विवादों में ही गँवा देते हैं।”

(क) कबीर का काल क्या था? उनकी बानी किन तीन संकलनों में मिलती है? (1)

लगभग चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी। तीन संकलन — कबीर बीजक (कबीर पंथियों द्वारा, वाराणसी), कबीर ग्रंथावली (राजस्थान के दादू पंथियों से संबंधित), तथा आदि ग्रंथ साहिब।

(ख) विभिन्न समुदायों के ईश्वर के बीच पार्थक्य के विरुद्ध कबीर क्या दलील देते हैं? (2)

चार दलीलें: (i) तार्किक प्रश्न — “किस तरह हो सकता है कि संसार के एक नहीं दो स्वामी हों?” (ii) ★नामों की एक ही सूची — अल्लाह, राम, करीम, केशव, हरि, हज़रत — दोनों परंपराओं के नाम साथ-साथ (iii) ★★भाषिक तर्क — “विभिन्नताएँ तो केवल शब्दों में हैं जिनका आविष्कार हम स्वयं करते हैं।” अर्थात् भेद ईश्वर में नहीं, हमारे अपने गढ़े शब्दों में है (iv) दोनों पक्षों की समान आलोचना — “दोनों ही भुलावे में हैं… एक बकरे को मारता है और दूसरा गाय को।”

(ग) ★अंतिम पंक्ति का क्या महत्त्व है? कबीर की भाषा व दृष्टि की क्या विशेषता है? (2)

अंतिम पंक्ति — “वे पूरा जीवन विवादों में ही गँवा देते हैं।” — यह बताती है कि कबीर के लिए विवाद स्वयं समय की बर्बादी है; असली लक्ष्य (“राम को प्राप्त करना”) दोनों से छूट जाता है। विशेषताएँ: (i) ★वे किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करते — दोनों को समान रूप से आलोचित करते हैं (ii) उनकी बानी संत भाषा में है और अनेक परंपराओं की शब्दावली (इस्लामी, वेदांत, योगी) का प्रयोग करती है (iii) ! NCERT यह भी स्वीकार करती है कि उनके पदों में “विविध और कभी तो विरोधात्मक विचार” मिलते हैं, और “क्या ये सभी कविताएँ कबीर द्वारा रची गईं? यह कहना मुश्किल है।”

भाग व — मानचित्र-आधारित प्रश्न

1भारत के मानचित्र पर 3 सूफ़ी स्थल चिह्नित कीजिए। (NCERT प्र. 10)

उत्तर देखिए

अजमेर (राजस्थान) — शेख़ मुइनुद्दीन चिश्ती • दिल्ली — कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी / निज़ामुद्दीन औलिया / नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहली • फतेहपुर सीकरी — शेख़ सलीम चिश्ती

(उपमहाद्वीप में: अजोधन — फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर; लाहौर — अल हुजविरी; मुल्तान — बहाउद्दीन ज़कारिया)

23 मंदिर-स्थल चिह्नित कीजिए (विष्णु, शिव तथा देवी से जुड़ा एक-एक)।

उत्तर देखिए

विष्णु — पुरी (उड़ीसा), जगन्नाथ मंदिर • शिव — चिदम्बरम / तंजावुर / गंगैकोंडचोलपुरम (तमिलनाडु) • देवी — अपने क्षेत्र का एक प्रसिद्ध देवी-मंदिर (पाठ में विशिष्ट नाम नहीं दिया गया)

3काल-रेखा के आधार पर बताइए कि निम्न किस क्षेत्र से थे — बसवन्ना, मीराबाई, शंकरदेव, लाल देद।

उत्तर देखिए

बसवन्ना — कर्नाटक • मीराबाई — राजस्थान • शंकरदेव — असम • लाल देद — कश्मीर

भाग श — अभिकथन-कारण प्रश्न (1 अंक)

1अभिकथन (A): NCERT “महान” और “लघु” शब्दों को उद्धरण-चिह्नों में रखती है।
कारण (R): विद्वान इन शब्दों में निहित पदसोपानात्मक स्वर की अवमानना करते हैं।

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (क)

2अभिकथन (A): लिंगायत धर्मशास्त्र में बताए गए श्राद्ध संस्कार का पालन नहीं करते।
कारण (R): उनका विश्वास है कि मृत्योपरांत भक्त शिव में लीन हो जाएँगे और इस संसार में पुन: नहीं लौटेंगे।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है

3अभिकथन (A): सुल्तानों ने उलमा द्वारा शरिया लागू किए जाने की माँग ठुकरा दी।
कारण (R): सुल्तान जानते थे कि उनकी अधिकांश प्रजा इस्लाम धर्म मानने वाली नहीं है।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है

4अभिकथन (A): चिश्ती सिलसिला भारत में सबसे अधिक प्रभावशाली रहा।
कारण (R): उन्होंने स्वयं को स्थानीय परिवेश में ढाला और भारतीय भक्ति परंपरा की कई विशिष्टताओं को अपनाया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है

5अभिकथन (A): कबीर और रामानंद को जोड़ने वाली परंपराएँ इतिहासकारों द्वारा स्वीकार नहीं की जातीं।
कारण (R): दोनों का समकालीन होना कालक्रम की दृष्टि से मुश्किल प्रतीत होता है।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है

★पर ध्यान दीजिए NCERT यह भी जोड़ती है कि “उनसे यह अवश्य पता चलता है कि कबीर की विरासत बाद की पीढ़ी के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण थी।”