अध्याय 2वन एवं वन्य जीव संसाधन

रिवीजन नोट्स17 मिनट

कक्षा 10 · समकालीन भारत–2 (भूगोल) · पृष्ठ 13–18 (परीक्षा से पहले पढ़ने के लिए — केवल काम की बातें, पूरे वाक्यों में)


पहले पूरी कहानी एक पैराग्राफ़ में

भारत जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, जहाँ विश्व की सारी जैव उपजातियों की 8 प्रतिशत संख्या यानी लगभग 16 लाख उपजातियाँ पाई जाती हैं। वन पारिस्थितिकी तंत्र में प्राथमिक उत्पादक हैं, जिन पर बाक़ी सभी जीव निर्भर करते हैं। पर पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना के कारण इन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ा है। इसीलिए 1972 में भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम लागू किया गया, राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्य जीव पशुविहार बनाए गए, और 1973 में प्रोजेक्ट टाईगर शुरू हुआ, क्योंकि बाघों की संख्या 55,000 से घटकर मात्र 1,827 रह गई थी। वनों को तीन वर्गों में बाँटा गया है — आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत। लेकिन वन संरक्षण की परंपरा भारत में क़ानून से बहुत पुरानी है — पवित्र पेड़ों के झुरमट, बिश्नोई गाँवों के हिरण, अलवर की भैरोंदेव डाकव सोंचुरी, चिपको आंदोलन और टिहरी का बीज बचाओ आंदोलन इसके उदाहरण हैं। 1988 में ओडिशा ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया। अध्याय का निष्कर्ष यही है कि वही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।

यही पूरा अध्याय है। अब इसे भागों में देखिए।

अध्याय की धुरी

वन और वन्य जीवन को केवल क़ानून नहीं बचा सकता — उसे बचाने के लिए समुदाय चाहिए।

पाठ्यपुस्तक पहले सरकारी प्रयास गिनाती है (1972, 1973, राष्ट्रीय उद्यान), फिर समुदाय के प्रयास (बिश्नोई, सरिस्का, चिपको, JFM), और अंत में साफ़ कहती है कि “स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए।”

भाग 1 — भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात

पहला विचार★

  • “इस ग्रह पर हम सूक्ष्म-जीवाणुओं और बैक्टीरिया, जोंक से लेकर वटवृक्ष, हाथी और ब्लू व्हेल तक करोड़ों दूसरे जीवधारियों के साथ रहते हैं।”
  • “मानव और दूसरे जीवधारी एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसका हम मात्र एक हिस्सा हैं।”
  • तीन ज़रूरी चीज़ें — वायु जिसमें हम साँस लेते हैं, जल जिसे हम पीते हैं, और मृदा जो अनाज पैदा करती है।
  • “पौधे, पशु और सूक्ष्मजीवी इनका पुन: सृजन करते हैं।”

★★“वन पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि ये प्राथमिक उत्पादक हैं जिन पर दूसरे सभी जीव निर्भर करते हैं।”

जैव विविधता की परिभाषा (साइड-नोट, पृष्ठ 13)★

“वन्य जीवन और कृषि फसल उपजातियों में अत्यधिक जैव विविधताएँ पाई जाती हैं। यह आकार और कार्य में विभिन्न हैं परंतु अंतर्निर्भरताओं के जटिल जाल द्वारा एक तंत्र में गुँथी हुई हैं।”

एक वाक्य में — “आकार अलग, काम अलग — पर सब एक ही जाल में बँधे हैं।”

भारत की जैव विविधता के आँकड़े★★

तथ्यआँकड़ा
भारतजैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक
विश्व की जैव उपजातियों का हिस्सा8 प्रतिशत
कितनी उपजातियाँलगभग 16 लाख
अभी खोजी जानी बाक़ीज्ञात उपजातियों से दो या तीन गुना
  • “ये विविध वनस्पतिजात और प्राणिजात हमारे हर रोज़ के जीवन में इतने गुँथे हुए हैं कि हम इसकी क़द्र नहीं करते।”
  • “परंतु पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना के कारण पिछले कुछ समय से इन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ा है।”

भाग 2 — वन और वन्य जीवन का संरक्षण

संरक्षण क्यों आवश्यक है — चार कारण★★

क्रमकारण
1संरक्षण से पारिस्थितिकी विविधता बनी रहती है।
2हमारे जीवन साध्य संसाधन — जल, वायु और मृदा — बने रहते हैं।
3यह विभिन्न जातियों में बेहतर जनन के लिए वनस्पति और पशुओं में जीन (genetic) विविधता को भी संरक्षित करती है।
4हम कृषि में अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, और जलीय जैव विविधता मछली पालन बनाए रखने पर निर्भर है।

भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम, 1972 — सात बिंदु★★

  • 1960 और 1970 के दशकों के दौरान पर्यावरण संरक्षकों ने राष्ट्रीय वन्यजीवन सुरक्षा कार्यक्रम की पुरजोर माँग की।
क्रमअधिनियम ने क्या किया
11972 में लागू किया गया
2वन्य-जीवों के आवास रक्षण के अनेक प्रावधान
3सारे भारत में रक्षित जातियों की सूची प्रकाशित की गई
4बची हुई संकटग्रस्त जातियों के बचाव पर ज़ोर
5शिकार प्रतिबंधन
6वन्यजीव आवासों का क़ानूनी रक्षण
7जंगली जीवों के व्यापार पर रोक
  • इसके बाद केंद्रीय सरकार व कई राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव पशुविहार (sanctuary) स्थापित किए।

दो अलग सूचियाँ — इन्हें आपस में मत मिलाइए★★

किनके लिए परियोजनाएँ बनींकिनके शिकार-व्यापार पर प्रतिबंध लगा
बाघभारतीय हाथी
एक सींग वाला गैंडाकाला हिरण
कश्मीरी हिरण अथवा हंगुल (hangul)चिंकारा
तीन प्रकार के मगरमच्छ — स्वच्छ जल मगरमच्छ, लवणीय जल मगरमच्छ और घड़ियालभारतीय गोडावन (bustard)
एशियाई शेरहिम तेंदुआ

दूसरी सूची पर “संपूर्ण अथवा आंशिक प्रतिबंध” लगाकर क़ानूनी रक्षण दिया गया — यह शब्द भी याद रखिए।

बाघ परियोजना — यह पूरा बॉक्स याद कीजिए★★

बाघों की संख्या —

समयसंख्या
20वीं शताब्दी के आरंभ में (अनुमानित)55,000
1973 मेंमात्र 1,827

★घटने के चार मुख्य कारण —

क्रमकारण
1बाघों को मारकर उनको व्यापार के लिए चोरी करना
2आवासीय स्थलों का सिकुड़ना
3भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की संख्या कम होना
4जनसंख्या में वृद्धि

और दो कारण —

  • बाघों की खाल का व्यापार
  • उनकी हड्डियों का एशियाई देशों में परंपरागत औषधियों में प्रयोग
  • ”…के कारण यह जाति विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गई है।”

भारत-नेपाल की स्थिति —

★“चूँकि भारत और नेपाल दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं, अत: ये देश ही शिकार, चोरी और गैर-क़ानूनी व्यापार करने वालों के मुख्य निशाने पर हैं।”

प्रोजेक्ट टाईगर —

  • “‘प्रोजेक्ट टाईगर’ विश्व की बेहतरीन वन्य जीव परियोजनाओं में से एक है और इसकी शुरुआत 1973 में हुई।”
  • ★★“बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।”

छह बाघ रिज़र्व और उद्यान — मानचित्र के लिए अनिवार्य★★

उद्यान / रिज़र्वराज्य
कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यानउत्तराखण्ड
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यानपश्चिम बंगाल
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यानमध्य प्रदेश
सरिस्का वन्य जीव पशुविहारराजस्थान
मानस बाघ रिज़र्वअसम
पेरियार बाघ रिज़र्वकेरल

और चित्र 2.2 — काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम) में गैंडा और हिरन।

संरक्षण की दिशा कैसे बदली★

  • “आजकल संरक्षण परियोजनाएँ जैव विविधताओं पर केंद्रित होती हैं न कि इसके विभिन्न घटकों पर।”
  • “संरक्षण नियोजन में कीटों को भी महत्त्व मिल रहा है।”
वर्षक्या जोड़ा गया
वन्य जीव अधिनियम 1980 और 1986सैकड़ों तितलियों, पतंगों, भृंगों और एक ड्रैगनफ्लाई को संरक्षित जातियों में शामिल किया गया
1991पौधों की 6 जातियाँ पहली बार इस सूची में रखी गईं

सोच बदली — ‘बड़े जानवर बचाओ’ से ‘पूरा तंत्र बचाओ’ तक।

भाग 3 — वनों के प्रकार और वितरण

तीन प्रकार (यह अभ्यास प्रश्न 2 है)★★

प्रकारपरिभाषाकितना क्षेत्र
आरक्षित वनवन और वन्य प्राणियों के संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवानदेश में आधे से अधिक वन क्षेत्र
रक्षित वनवन भूमि जो और अधिक नष्ट होने से बचाई जाती हैकुल वन क्षेत्र का एक-तिहाई
अवर्गीकृत वनअन्य सभी प्रकार के वन और बंजरभूमि जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में हैं—

★तीन शब्दों में — आरक्षित = सबसे मूल्यवान · रक्षित = और नष्ट होने से बचाना · अवर्गीकृत = बाक़ी सब।

स्थायी वन क्षेत्र★

“आरक्षित और रक्षित वन ऐसे स्थायी वन क्षेत्र हैं जिनका रख-रखाव इमारती लकड़ी, अन्य वन पदार्थों और उनके बचाव के लिए किया जाता है।”

यानी — स्थायी वन क्षेत्र = आरक्षित + रक्षित। (अवर्गीकृत इसमें नहीं आते।)

राज्यवार वितरण — यह तालिका सीधे परीक्षा में आती है★★

श्रेणीराज्य
स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्रमध्य प्रदेश — कुल वन क्षेत्र का 75 प्रतिशत
आरक्षित वनों का बड़ा अनुपातजम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र
रक्षित वनों का बड़ा अनुपातबिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान
अवर्गीकृत वन, स्थानीय समुदायों के प्रबंधन मेंपूर्वोत्तर के सभी राज्य और गुजरात

★राजस्थान रक्षित वनों वाली सूची में है — RBSE में पूछा जाता है। और यह ध्यान दीजिए — पूर्वोत्तर में वन सरकार के नहीं, समुदायों के प्रबंधन में हैं। यह अगले भाग से जुड़ता है।

समाचार-पत्र बॉक्स (पृष्ठ 16)

कतरनविषय
“Gharial on the brink”घड़ियाल की संख्या 1970 के दशक के बाद से सबसे कम; लेखक — रोमुलस व्हिटेकर और जानकी लेनिन
“Bird deaths blamed on dirty Yamuna”ठहरे हुए पानी में विषैले तत्त्वों से पक्षियों की मौत

सीख — वन्य जीवन को ख़तरा सिर्फ़ शिकार से नहीं, प्रदूषण और आवास बिगड़ने से भी है।

भाग 4 — समुदाय और वन संरक्षण (अध्याय का दिल)

पहला विचार★

  • “वन संरक्षण की नीतियाँ हमारे देश में कोई नई बात नहीं है।”
  • “हम आमतौर पर इस बात से अनजान हैं कि वन हमारे देश में कुछ मानव प्रजातियों के आवास भी हैं।”
  • “स्थानीय समुदाय सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर अपने आवास स्थलों के संरक्षण में जुटे हैं, क्योंकि इसी से ही दीर्घकाल में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है।”

राजस्थान के दो उदाहरण★★

(क) सरिस्का बाघ रिज़र्व —

“सरिस्का बाघ रिज़र्व में राजस्थान के गाँवों के लोग वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बन्द करवाने के लिए संघर्षरत हैं।”

(ख) भैरोंदेव डाकव ‘सोंचुरी’ —

बिंदुविवरण
कहाँराजस्थान के अलवर ज़िले में
कितने गाँव5 गाँव
कितनी भूमि1,200 हेक्टेयर वन भूमि
क्या घोषित किया‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’
किसके नियमअपने ही नियम क़ानून
वे नियम क्या करते हैंशिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से वन्य जीवन को बचाते हैं
  • “कई क्षेत्रों में तो लोग स्वयं वन्य जीव आवासों की रक्षा कर रहे हैं और सरकार की ओर से हस्तक्षेप भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।”

पवित्र पेड़ों के झुरमट — यह अभ्यास प्रश्न 4(ii) का सीधा उत्तर है★★

  • “प्रकृति की पूजा सदियों पुराना जनजातीय विश्वास है, जिसका आधार प्रकृति के हर रूप की रक्षा करना है।”
  • “इन्हीं विश्वासों ने विभिन्न वनों को मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है, जिन्हें पवित्र पेड़ों के झुरमट (देवी-देवताओं के वन) कहते हैं।”
  • “इन बड़े भागों में स्थानीय लोग ही घुसते हैं तथा न ही किसी और को छेड़छाड़ करने देते।”

★तीन जोड़ियाँ —

कौनकहाँकिस पेड़ की पूजा
मुंडा और संथाल जनजातियाँछोटानागपुर क्षेत्रमहुआ और कदंब
ओडिशा और बिहार की जनजातियाँओडिशा और बिहारशादी के दौरान इमली और आम
हममें से बहुत से व्यक्तिपूरे भारत मेंपीपल और वटवृक्ष

अन्य पारंपरिक तरीक़े★

  • “आमतौर पर झरनों, पहाड़ी चोटियों, पेड़ों और पशुओं को पवित्र मानकर उनका संरक्षण किया जाता है।”
  • “अनेक मंदिरों के आस पास बंदर और लंगूर पाएँगी। उपासक उन्हें खिलाते-पिलाते हैं।”

★★बिश्नोई —

“राजस्थान में बिश्नोई गाँवों के आस पास आप काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोरों के झुंड देख सकते हैं जो वहाँ के समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं और कोई उनको नुकसान नहीं पहुँचाता।”

चारों जानवर याद कीजिए — काला हिरण · चिंकारा · नीलगाय · मोर।

तीन जन-आंदोलन★★

आंदोलनकहाँक्या दिखाया
चिपको आंदोलनहिमालय(1) कई क्षेत्रों में वन कटाई रोकने में कामयाब रहा; (2) यह भी दिखाया कि स्थानीय पौधों की जातियों को प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण अभियान सफल बनाया जा सकता है
बीज बचाओ आंदोलन और नवदानयटिहरीदिखाया कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन संभव है

चिपको की दोनों उपलब्धियाँ लिखिए — केवल ‘वन कटाई रुकी’ लिखने पर आधे अंक कटते हैं।

संयुक्त वन प्रबंधन (JFM)★★

बिंदुविवरण
क्या करता हैक्षरित वनों के प्रबंध और पुनर्निर्माण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को उजागर करता है
औपचारिक शुरुआत1988 में
किस राज्य नेओडिशा ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया
संस्थाएँ कहाँगाँव के स्तर पर, जिनमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य करते हैं
समुदाय को क्या मिलता हैगैर-इमारती वन उत्पादों के हक़दार होते हैं तथा सफल संरक्षण से प्राप्त इमारती लकड़ी लाभ में भी भागीदार होते हैं

★JFM एक वाक्य में — “जंगल बचाओ, और उसका फ़ायदा भी लो।”

अध्याय का निष्कर्ष — हर बड़े उत्तर में लिखिए★★

“स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए।” “परंतु स्थानीय समुदायों को फैसले लेने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका में आने में अभी देर है।” “अत: वे ही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हो और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।”

गौतम बुद्ध का उद्धरण (पृष्ठ 17)

“पेड़ एक विशेष असीमित दयालु और उदारपूर्ण जीवधारी हैं जो अपने सतत् पोषण के लिए कोई माँग नहीं करता… यह सभी की रक्षा करता है और स्वयं पर कुल्हाड़ी चलाने वाले विनाशक को भी छाया प्रदान करता है।” — गौतम बुद्ध (487 ई.पू.)

अंत में — याद रखने के आसान तरीक़े

1. सिर्फ़ तीन वर्ष अनिवार्य

वर्षघटना
1972भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम
1973प्रोजेक्ट टाईगर की शुरुआत
1988ओडिशा ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया

(और अगर समय हो — 1980 व 1986 में कीट जोड़े गए, 1991 में पौधों की 6 जातियाँ।)

2. सिर्फ़ पाँच आँकड़े अनिवार्य

आँकड़ाकिससे जुड़ा
8 प्रतिशत / 16 लाखभारत की जैव विविधता
55,000 → 1,827बाघों की संख्या
दो-तिहाईभारत-नेपाल में दुनिया के बाघ
75 प्रतिशतमध्य प्रदेश में स्थायी वन
5 गाँव / 1,200 हेक्टेयरभैरोंदेव डाकव सोंचुरी, अलवर

3. छह उद्यान = छह दिशाएँ

कॉर्बेट (उत्तर) · सुंदरबन (पूर्व) · बांधवगढ़ (मध्य) · सरिस्का (पश्चिम) · मानस (पूर्वोत्तर) · पेरियार (दक्षिण)

4. तीन जोड़ियाँ — जनजाति और पेड़

मुंडा-संथाल = महुआ-कदंब · ओडिशा-बिहार = इमली-आम · हम सब = पीपल-वटवृक्ष

5. राजस्थान इस अध्याय में चार बार आता है

कहाँक्या
बाघ परियोजनासरिस्का वन्य जीव पशुविहार
वनों का वितरणराजस्थान रक्षित वनों वाली सूची में
समुदाय और संरक्षणसरिस्का में खनन-विरोधी संघर्ष; अलवर की भैरोंदेव डाकव सोंचुरी
रीति-रिवाजबिश्नोई गाँव — काला हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोर

RBSE की परीक्षा में ये चारों पूछे जाते हैं। इन्हें अलग से याद कीजिए।

6. और अगर सब भूल जाएँ, तो यह याद रखिए

“बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।” और अध्याय का निष्कर्ष — “वही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।”