अध्याय 4कृषि

रिवीजन नोट्स22 मिनट

कक्षा 10 · समकालीन भारत–2 (भूगोल) · पृष्ठ 30–41 (परीक्षा से पहले पढ़ने के लिए — केवल काम की बातें, पूरे वाक्यों में)


पहले पूरी कहानी एक पैराग्राफ़ में

कृषि की दृष्टि से भारत एक महत्त्वपूर्ण देश है और इसकी दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। भारत में चार प्रकार की कृषि होती है — प्रारंभिक जीविका निर्वाह (कर्तन दहन प्रणाली, जिसे झूम, पामलू, दीपा और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में वालरे कहते हैं), गहन जीविका, वाणिज्यिक और रोपण कृषि। देश में तीन शस्य ऋतुएँ हैं — रबी (सर्दी, गेहूँ), खरीफ (बरसात, चावल) और ज़ायद (गर्मी, तरबूज)। मुख्य फसलें चावल, गेहूँ, मोटे अनाज, दालें, गन्ना, तिलहन, चाय, कॉफी, रबड़, कपास और जूट हैं, और हर फसल का क्षेत्र उसके तापमान, वर्षा और मिट्टी की ज़रूरत से तय होता है। दालों में भारत विश्व में पहले स्थान पर है, और चावल, गन्ना, तिलहन, चाय, फल-सब्ज़ी तथा कपास में दूसरे। कृषि के विकास के लिए सरकार ने चकबंदी, ज़मींदारी की समाप्ति, हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और न्यूनतम सहायता मूल्य जैसे क़दम उठाए। और विनोबा भावे के भूदान-ग्रामदान आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा गया।

यही पूरा अध्याय है। अब इसे भागों में देखिए।

इस अध्याय को पढ़ने का तरीक़ा अलग हैध्यान

इसमें कोई बहस नहीं है, कोई कहानी नहीं है (सिवाय भूदान-ग्रामदान के)। यह सूचना का अध्याय है। इसलिए इसे पैराग्राफ़ में मत पढ़िए — तालिका में पढ़िए। नीचे दी गई बड़ी फसल-तालिका ही आधा अध्याय है। और हर फसल के लिए बस पाँच खाने याद कीजिए — ऋतु · तापमान · वर्षा · मिट्टी · राज्य।

भाग 1 — कृषि के चार प्रकार

अध्याय की शुरुआत के चार तथ्य★

  • “कृषि की दृष्टि से भारत एक महत्त्वपूर्ण देश है।”
  • “इसकी दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।”
  • “कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है।”
  • “खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है”; और चाय, कॉफी, मसाले आदि का निर्यात भी होता है।

1. प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि★★

बिंदुविवरण
कहाँभूमि के छोटे टुकड़ों पर
औज़ारलकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी
श्रमपरिवार अथवा समुदाय का
किस पर निर्भरमानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता

★कर्तन दहन प्रणाली (slash and burn) की पाँच कड़ियाँ —

क्रमक्या होता है
1किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं
2मृदा की उर्वरता कम होने पर वे उस टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं
3और भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ़ करते हैं
4इस स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है
5चूँकि उर्वरक या आधुनिक तकनीक का प्रयोग नहीं होता, इसलिए उत्पादकता कम होती है

स्थानांतरी कृषि के नाम — भारत में★★

नामकहाँ
झूमअसम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड (और उत्तर पूर्वी प्रदेश)
पामलूमणिपुर
दीपाछत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले और अंडमान निकोबार द्वीप समूह
बेबर या दहियामध्य प्रदेश
पोडु या पेंडाआंध्र प्रदेश
पामाडाबी / कोमान / बरीगाँओडिशा
कुमारीपश्चिम घाट
★वालरे या वाल्टरेदक्षिण-पूर्वी राजस्थान
खिलहिमालयन क्षेत्र
कुरुवाझारखंड

स्थानांतरी कृषि के नाम — दुनिया में★

नामकहाँ
मिल्पामैक्सिको और मध्य अमेरिका
कोनुकोवेनेजुएला
रोकाब्राज़ील
मसोलेमध्य अफ़्रीका
लदांगइंडोनेशिया
रेवियतनाम

2. गहन जीविका कृषि★

  • “उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।”
  • “यह श्रम-गहन खेती है जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।”

और इसकी समस्या — तीन कड़ी —

  • भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है
  • किसान वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं
  • अत: कृषि भूमि पर बहुत अधिक दबाव है

3. वाणिज्यिक कृषि★★

  • मुख्य लक्षण — आधुनिक निवेश: अधिक पैदावार देने वाले बीज, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक।
  • ★“कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है। उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।”

★इसका मतलब — कोई फसल अपने आप वाणिज्यिक या जीविका नहीं होती। यह इस पर निर्भर है कि किसान उसे बेचने के लिए उगा रहा है या खाने के लिए।

4. रोपण कृषि★★

बिंदुविवरण
मुख्य विशेषतालंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल
यह क्या है“उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface)”
कैसेव्यापक क्षेत्र, अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से
उत्पादन“सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है”
भारत की फसलेंचाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला
कहाँअसम और उत्तरी बंगाल — चाय; कर्नाटक — कॉफी
किस पर निर्भर“इसके विकास में परिवहन और संचार साधन से संबंधित उद्योग और बाज़ार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं”

भाग 2 — तीन शस्य ऋतुएँ

यह तालिका सबसे पक्का प्रश्न है★★

ऋतुकब बोईकब काटीमुख्य फसलें
रबीअक्टूबर से दिसंबर (शीत ऋतु)अप्रैल से जून (ग्रीष्म ऋतु)गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों
खरीफमानसून के आगमन के साथसितंबर-अक्तूबरचावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर (अरहर), मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन
ज़ायदरबी और खरीफ के बीच, ग्रीष्म ऋतु में—तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलें

★तीन शब्दों में — रबी = सर्दी (गेहूँ) · खरीफ = बरसात (चावल) · ज़ायद = गर्मी (तरबूज)।

रबी के तीन ज़रूरी तथ्य

  • महत्त्वपूर्ण राज्य — पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश।
  • “शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है।”
  • ★“पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में हरित क्रांति की सफलता भी उपर्युक्त रबी फसलों की वृद्धि में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।”

खरीफ के तीन ज़रूरी तथ्य

  • चावल के मुख्य राज्य — असम, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र (विशेषकर कोंकण तटीय क्षेत्र), उत्तर प्रदेश और बिहार।
  • “पिछले कुछ वर्षों में चावल पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली महत्त्वपूर्ण फसल बन गई है।”
  • ★“असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसलें — आँस, अमन और बोरो — बोई जाती हैं।”

ज़ायद के बारे में

  • मुख्यत: तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलें।
  • ★“गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है।”

भाग 3 — सभी फसलों की एक तालिका (यही आधा अध्याय है)★★

फसलऋतुतापमानवर्षामिट्टीमुख्य राज्य
चावलखरीफ25° सेल्सियस से ऊपर100 सेमी. से अधिक—असम, प. बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र (कोंकण), उ.प्र., बिहार; नहरों से पंजाब, हरियाणा, प. उ.प्र., राजस्थान
गेहूँरबीशीत ऋतु; पकते समय खिली धूप50–75 सेमी. समान वितरित—पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., म.प्र., बिहार, राजस्थान के कुछ भाग
ज्वारखरीफ—वर्षा पर निर्भर; सिंचाई की ज़रूरत नहीं—महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, म.प्र.
बाजराखरीफ——बलुआ और उथली कालीराजस्थान, उ.प्र., महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा
रागीखरीफशुष्क प्रदेशों की फसल—लाल, काली, बलुआ, दोमट, उथली कालीकर्नाटक, हि.प्र., उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश
मक्काखरीफ (बिहार में रबी भी)21°–27° सेल्सियस—पुरानी जलोढ़कर्नाटक, म.प्र., उ.प्र., बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
दालेंखरीफ और रबी दोनों—कम नमी; शुष्क परिस्थितियों में भी—म.प्र., राजस्थान, महाराष्ट्र, उ.प्र., कर्नाटक
गन्नालगभग एक वर्ष21°–27° सेल्सियस75–100 सेमी.अनेक मिट्टियों मेंउ.प्र., महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब, हरियाणा
मूँगफलीखरीफ———गुजरात (प्रमुख), राजस्थान, तमिलनाडु
चायरोपण कृषिवर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहितवर्ष भर समान बौछारेंह्यूमस-जीवांश युक्त गहरी; ढलवाँ, सुगम जल निकासअसम, प. बंगाल (दार्जिलिंग-जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु, केरल; तथा हि.प्र., उत्तराखण्ड, मेघालय, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा
कॉफीरोपण कृषि———कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु (नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास)
रबड़—25° सेल्सियस से अधिक200 सेमी. से अधिक—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार, मेघालय (गारो पहाड़ियाँ)
कपासखरीफ (6–8 महीने)उच्च तापमान; ★210 पाला रहित दिन; खिली धूपहल्की वर्षा या सिंचाईकाली मिट्टी (दक्कन पठार के शुष्कतर भाग)महाराष्ट्र, गुजरात, म.प्र., कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उ.प्र.
जूट—उच्च तापमान—बाढ़ के मैदानों की जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टीप. बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, मेघालय

भाग 4 — हर फसल की ख़ास बातें (जो तालिका में नहीं आतीं)

चावल★

  • “भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है।”
  • “हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।”
  • उगाया जाता है — उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में।
  • ★“नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।”

गेहूँ★

  • “गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है।”
  • ★दो मुख्य क्षेत्र — (1) उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान, (2) दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।

मोटे अनाज★★

“यद्यपि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है। उदाहरणतया, रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।”

  • ज्वार — “क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल”; वर्षा पर निर्भर; आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।
  • बाजरा — बलुआ और उथली काली मिट्टी; राजस्थान सबसे पहले।
  • रागी — शुष्क प्रदेशों की फसल; लोहा, कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक से भरपूर।

दालें★★

  • “भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है।”
  • “शाकाहारी खाने में दालें सबसे अधिक प्रोटीन दायक होती हैं।”
  • मुख्य दलहनी फसलें — तुर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना।
  • ★★“फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं। अत: इन फसलों को आमतौर पर अन्य फसलों के आवर्तन (rotating) में बोया जाता है।”

‘अरहर को छोड़कर’ — यह बात अकसर छूट जाती है और इसी पर अंक कटते हैं।

गन्ना★

  • “ब्राज़ील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।”
  • “यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम आता है।”
  • “इसके लिए बुआई से लेकर कटाई तक काफ़ी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।”

तिलहन★

  • 2018 में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक; तोरिया में कनाडा और चीन के बाद तीसरा।
  • कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर तिलहन।
  • नौ फसलें — मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी।
  • कुछ का प्रयोग साबुन, प्रसाधन और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी होता है।

★तिलहन की ऋतु —

फसलऋतु
मूँगफलीखरीफ — “मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से”
अलसी और सरसोंरबी
तिलउत्तरी भारत में खरीफ, दक्षिणी भारत में रबी
अरंडीखरीफ और रबी दोनों

चाय (अभ्यास प्रश्न 2-i)★★

  • “चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है।”
  • “जिसे शुरुआत में अंग्रेज़ भारत में लाए थे; आज अधिकतर चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं।”
  • ज़रूरतें — उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु · ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी · सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र।
  • “चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है।”
  • “वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं।”
  • “चाय एक श्रम-सघन उद्योग है; इसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए।”
  • “इसकी ताज़गी बनाए रखने के लिए चाय की पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं।”
  • 2018 में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश था।

कॉफी★

  • “भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है।”
  • अरेबिका किस्म, जो आरम्भ में यमन से लाई गई थी; इसकी विश्व भर में अधिक माँग है।
  • शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से हुई; आज नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में।

बागवानी फसलें★

फलराज्य
आममहाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल
संतरेनागपुर और चेरापूँजी (मेघालय)
केलेकेरल, मिजोरम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु
लीचीउत्तर प्रदेश और बिहार
अनन्नासमेघालय
अंगूरआंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र
सेब, नाशपाती, खूबानी, अखरोटहिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर
  • सब्ज़ियों में भारत का मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन और आलू उत्पादन में प्रमुख स्थान है।

रेशेदार फसलें★

“कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं। इनमें से पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से प्राप्त होता है जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है।” “रेशम के कीड़ों का पालन ‘रेशम उत्पादन’ (Sericulture) कहलाता है।”

कपास★

  • “भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है।”
  • “सूती कपड़ा उद्योग में कपास एक मुख्य कच्चा माल है।”
  • कपास उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान (2017)।
  • “दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।”
  • ★ज़रूरत — उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप।

जूट★

  • “जूट को ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है।”
  • “बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है।”
  • उपयोग — बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ।

भाग 5 — विश्व में भारत का स्थान★

फसल / वर्गस्थानकिसके बादवर्ष
दालेंपहला (सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता)——
चावलदूसराचीन—
गन्नादूसराब्राज़ील—
तिलहनदूसराचीन2018
चायदूसराचीन2018
फल और सब्ज़ियाँदूसराचीन2018
कपासदूसराचीन2017
तोरियातीसराकनाडा और चीन2018

★दो अपवाद याद रखिए — दालों में भारत पहले स्थान पर है, और गन्ने में ब्राज़ील के बाद (बाक़ी सबमें चीन के बाद)।

भाग 6 — प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार

समस्या क्या है

  • “प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है।”
  • “सिंचाई के साधनों का विकास होने के बावजूद भी देश का एक बड़ा भाग अभी भी मानसून और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर है।”
  • ★“60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है।”

सुधारों का क्रम★

समयक्या हुआ
स्वतंत्रता के पश्चात्जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी आदि समाप्त करने को प्राथमिकता
प्रथम पंचवर्षीय योजनाभूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था
! पर“भूमि सुधार के क़ानून तो बने परंतु इनके लागू करने में ढील की गई”
1960 और 1970 के दशकहरित क्रांति (पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित) तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड); पर विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया
1980 तथा 1990 के दशकव्यापक भूमि विकास कार्यक्रम — संस्थागत और तकनीकी सुधारों पर आधारित

छह उपाय (अभ्यास प्रश्न 2-iii और 3-i)★★

#उपाय
1फसल बीमा — सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए
2कम दर पर ऋण के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना
3किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
4व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (पीएआईएस)
5आकाशवाणी और दूरदर्शन पर मौसम बुलेटिन और कृषि कार्यक्रम
6न्यूनतम सहायता मूल्य और लाभदायक ख़रीद मूल्य — ताकि किसान बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचें

★दो हिस्सों में याद कीजिए — पैसे की मदद (1, 2, 3, 4) और जानकारी व क़ीमत की मदद (5, 6)।

भाग 7 — भूदान-ग्रामदान (अध्याय की एकमात्र कहानी)★★

क्रमघटना
1महात्मा गांधी ने विनोबा भावे को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित किया था
2विनोबा भावे की गांधी जी के ग्राम स्वराज की अवधारणा में गहरी आस्था थी
3गांधी जी की शहादत के बाद उन्होंने लगभग पूरे देश की पदयात्रा की
4आंध्र प्रदेश के गाँव पोचमपल्ली में कुछ भूमिहीन ग़रीब ग्रामीणों ने भूमि माँगी
5विनोबा ने वायदा तो नहीं किया, पर आश्वासन दिया कि यदि वे सहकारी खेती करें तो वे भारत सरकार से बात करेंगे
6★अचानक श्री राम चन्द्र रेड्डी उठ खड़े हुए और 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की
7इसे ‘भूदान’ के नाम से जाना गया
8बाद में विनोबा ने यात्राएँ कीं और यह विचार पूरे भारत में फैलाया
9कुछ ज़मींदारों ने भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की — इसे ‘ग्रामदान’ कहा गया
10! “परंतु कुछ ज़मींदारों ने तो भूमि सीमा क़ानून से बचने के लिए अपनी भूमि का एक हिस्सा दान किया था”
11★इस आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ का भी नाम दिया गया

तीन शब्द अनिवार्य — भूदान · ग्रामदान · रक्तहीन क्रांति। और बिंदु 10 भी लिखिए — पाठ्यपुस्तक ईमानदारी से बताती है कि कुछ दान क़ानून से बचने के लिए थे।

अंत में — याद रखने के आसान तरीक़े

1. सिर्फ़ छह फसलें पक्की कीजिए

चावल · गेहूँ · बाजरा · गन्ना · चाय · कपास — परीक्षा में इन्हीं से सबसे ज़्यादा आता है।

2. तीन जोड़ियाँ — तापमान और वर्षा

चावल = 25°+ / 100 सेमी.+ · गेहूँ = 50–75 सेमी. · रबड़ = 25°+ / 200 सेमी.+

3. तीन शब्द — शस्य ऋतुएँ

रबी = सर्दी (गेहूँ) · खरीफ = बरसात (चावल) · ज़ायद = गर्मी (तरबूज)

4. चार ख़ास आँकड़े

210 पाला रहित दिन (कपास) · 6–8 महीने (कपास) · लगभग एक वर्ष (गन्ना) · 12 प्रतिशत (तिलहन का क्षेत्र)

5. चार ख़ास नाम

‘सुनहरा रेशा’ = जूट · ‘रक्तहीन क्रांति’ = भूदान-ग्रामदान · अरेबिका-बाबा बूदन = कॉफी · आँस-अमन-बोरो = धान

6. राजस्थान इस अध्याय में सात बार आता है★

#कहाँक्या
1स्थानांतरी कृषिवालरे या वाल्टरे — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
2रबी फसलेंहरित क्रांति राजस्थान के कुछ भागों में
3चावलनहरों-नलकूपों से राजस्थान के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल
4गेहूँराजस्थान के कुछ भाग मुख्य उत्पादक
5बाजराराजस्थान सबसे पहले
6दालेंराजस्थान मुख्य उत्पादक राज्यों में
7मूँगफलीराजस्थान अन्य मुख्य उत्पादक (2019–20)

RBSE की परीक्षा में ये सब पूछे जाते हैं — विशेषकर बाजरा और वालरे/वाल्टरे।

7. और अगर सब भूल जाएँ, तो यह याद रखिए

हर फसल की तीन चीज़ें तय करती हैं कि वह कहाँ उगेगी — तापमान, वर्षा और मिट्टी। इसीलिए चावल असम में है और गेहूँ पंजाब में; बाजरा राजस्थान में है और रबड़ केरल में। राज्यों के नाम रटिए मत — कारण समझिए।