इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर |
| 2 अंक | 30–40 शब्द | उत्तर + कारण/उदाहरण |
| 3 अंक | 60–80 शब्द | तीन अलग बिंदु, पूरे वाक्यों में |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द | भूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष |
| मानचित्र | — | सही जगह, साफ़ नाम |
★इस अध्याय के लिए तीन सलाह — 1. हर उद्योग पर तीन बातें लिखिए — कच्चा माल · कहाँ स्थित · क्यों वहीं। 2. हर 5 अंक के उत्तर में दोनों पक्ष आने चाहिए — उद्योग का लाभ और प्रदूषण। 3. जहाँ वर्ष या आँकड़ा याद हो, वहाँ ज़रूर लिखिए — 1854, 1855, 1904, 4:2:1, आठ गुना।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1विनिर्माण किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है।
2काग़ज़, चीनी, लोहा-इस्पात और एल्यूमिनियम किससे बनते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: काग़ज़ लकड़ी से, चीनी गन्ने से, लोहा-इस्पात लौह-अयस्क से तथा एल्यूमिनियम बॉक्साइट से बनता है।
3विनिर्माण कौन-सी क्रिया है?
उत्तर देखिए
उत्तर: द्वितीयक क्रिया।
4किसी देश की आर्थिक उन्नति किससे मापी जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: विनिर्माण उद्योगों के विकास से।
5उद्योगों के वर्गीकरण के पाँच आधार बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रयुक्त कच्चे माल का स्रोत, प्रमुख भूमिका, पूँजी निवेश, स्वामित्व तथा कच्चे व तैयार माल की मात्रा व भार।
6कृषि आधारित उद्योगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी तथा वनस्पति तेल उद्योग।
7खनिज आधारित उद्योगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लोहा तथा इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार तथा पेट्रोरसायन उद्योग।
8आधारभूत उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे उद्योग जिनके उत्पाद या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं, जैसे लोहा-इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन।
9उपभोक्ता उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे उद्योग जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं, जैसे चीनी, दंतमंजन, काग़ज़, पंखे और सिलाई मशीन।
10लघु उद्योग में अधिकतम कितना निवेश स्वीकार्य है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वर्तमान में अधिकतम निवेश एक करोड़ रुपये तक स्वीकार्य है।
11सार्वजनिक क्षेत्र के दो उद्योगों के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) तथा स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।
12निजी क्षेत्र के तीन उद्योगों के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड और डाबर उद्योग।
13संयुक्त उद्योग का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)।
14सहकारी उद्योगों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: महाराष्ट्र के चीनी उद्योग तथा केरल के नारियल पर आधारित उद्योग।
15भारी और हल्के उद्योग का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारी — लोहा तथा इस्पात; हल्के — विद्युतीय उद्योग।
16देश का वह अकेला उद्योग कौन-सा है जो कच्चे माल से तैयार माल तक आत्मनिर्भर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वस्त्र उद्योग।
17वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य की श्रृंखला बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: रेशा उत्पादन → धुनाई कताई → बुनाई → रंगाई व परिष्करण → वस्त्र विनिर्माण; और उपोत्पाद क्रमश: कच्चा रेशा, सूत, कपड़ा तथा वस्त्र (गारमेंट) हैं।
18पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग कब और कहाँ लगाया गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1854 में मुंबई में।
19औपनिवेशिक काल में भारतीय वस्त्र उद्योग को हानि क्यों हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि हमारे उद्योग इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये।
20विश्व-युद्धों के समय भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन क्यों मिला?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यूरोप दो विश्व-युद्धों से जूझ रहा था और भारत इंग्लैंड के अधीन था, इसलिए इंग्लैंड में कपड़े की माँग की आपूर्ति भारतीय उद्योग से हुई।
21सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के कारक बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: कपास की उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम तथा नमीयुक्त जलवायु।
22भारत में कताई कहाँ केंद्रित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: महाराष्ट्र, गुजरात तथा तमिलनाडु में।
23भारत का बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यह देश में उत्पादित उच्च स्तरीय धागे का अधिक प्रयोग नहीं कर पाता।
24बुनाई का कार्य कहाँ-कहाँ होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: हथकरघों, विद्युतकरघों व मिलों में।
25खादी किस रूप में रोज़गार देती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: हाथ से बुनी खादी कुटीर उद्योग के रूप में बुनकरों को उनके घरों में बड़े पैमाने पर रोज़गार प्रदान कराती है।
26पटसन उत्पादन और निर्यात में भारत का क्या स्थान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत पटसन व पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा बांग्लादेश के पश्चात् दूसरा बड़ा निर्यातक है।
272010-11 में भारत में कितने पटसन उद्योग थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 80।
28हुगली की पटसन मेखला कितनी लंबी और चौड़ी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 98 किमी. लंबी तथा 3 किमी. चौड़ी।
29पहला पटसन उद्योग कब और कहाँ लगा?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1855 में कोलकाता के निकट रिशरा में।
301947 के विभाजन का पटसन उद्योग पर क्या असर पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: पटसन मिलें तो भारत में रह गईं लेकिन तीन-चौथाई जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान अर्थात् बांग्लादेश में चले गए।
31चीनी उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: दूसरा; लेकिन गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में प्रथम।
32चीनी मिलों का कितना प्रतिशत उत्तर प्रदेश तथा बिहार में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 60 प्रतिशत।
33चीनी उद्योग सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यह उद्योग मौसमी है।
34लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं।
35लोहा-इस्पात उद्योग भारी उद्योग क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इसमें प्रयुक्त कच्चा तथा तैयार माल दोनों ही भारी और स्थूल होते हैं और इसके लिए अधिक परिवहन लागत की आवश्यकता होती है।
36★लोहा-इस्पात उद्योग में कच्चे माल का अनुपात क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लौह-अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का अनुपात लगभग 4:2:1 है।
37इस्पात को कठोर बनाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मैंगनीज़ की कुछ मात्रा।
38भारत में अधिकांश लोहा-इस्पात उद्योग कहाँ संकेंद्रित हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में।
39झोंकदार भट्ठी में चूना पत्थर की क्या भूमिका है?
उत्तर देखिए
उत्तर: चूना पत्थर एक सहायक खनिज है जो लौह-अयस्क में मिलाया जाता है और इससे धातु का मैल हटाया जाता है।
40अयस्क को गर्म करने के लिए किस ईंधन का प्रयोग होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कोक का।
41इस्पात को शुद्ध करने के लिए कौन-सी धातुएँ मिलाई जाती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मैंगनीज़, निकल तथा क्रोमियम।
42धातु को आकार देने के चार तरीक़े बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: रोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई और गढ़ाई।
43भारत में दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एल्यूमिनियम प्रगलन।
44एल्यूमिनियम के पाँच गुण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है।
45एल्यूमिनियम किन धातुओं के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के।
46★बॉक्साइट से एल्यूमिनियम का अनुपात क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 4 से 6 टन बॉक्साइट से 2 टन एल्यूमिना और उससे 1 टन एल्यूमिनियम बनता है।
47एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग की दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: नियमित ऊर्जा की पूर्ति तथा कम क़ीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता।
48एल्यूमिनियम प्रगलन के लिए कितनी विद्युत चाहिए?
उत्तर देखिए
उत्तर: 18,600 कि.वाट प्रति टन अयस्क।
49क्रायोलाइट क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एक पिघली धातु जो एल्यूमिनियम प्रगलन में इलैक्ट्रोलाइट का काम करती है।
50रसायन उद्योग का GDP में कितना योगदान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 3 प्रतिशत।
51रसायन उद्योग का एशिया और विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एशिया का तीसरा बड़ा तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12वें स्थान पर।
52अकार्बनिक रसायनों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सलफ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश तथा कास्टिक सोडा।
53सलफ्यूरिक अम्ल किन चीज़ों के निर्माण में प्रयुक्त होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन और डाई में।
54सोडा ऐश किन चीज़ों में प्रयुक्त होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: काँच, साबुन, शोधक या अपमार्जक तथा काग़ज़ में।
55कार्बनिक रसायनों में क्या शामिल है और वे कहाँ स्थापित होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कार्बनिक रसायनों में पेट्रोरसायन शामिल हैं, जो तेल शोधन शालाओं या पेट्रोरसायन संयंत्रों के समीप स्थापित होते हैं।
56उर्वरकों के तीन प्रकार बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: नाइट्रोजनी उर्वरक (मुख्यत: यूरिया), फ़ास्फ़ेटिक उर्वरक (D.A.P.) तथा मिश्रित उर्वरक।
57★पोटाश पूर्णत: आयात क्यों किया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि हमारे देश में वाणिज्यिक रूप से या किसी भी रूप में प्रयुक्त होने वाला पोटाश या पोटाशियम यौगिकों के भंडार नहीं हैं।
58उर्वरक उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत किन राज्यों से आता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल।
59सीमेंट उद्योग का कच्चा माल क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: चूना पत्थर, सिलिका और जिप्सम; साथ ही कोयला तथा विद्युत ऊर्जा भी आवश्यक है।
60पहला सीमेंट उद्योग कब और कहाँ लगा?
उत्तर देखिए
उत्तर: सन् 1904 में चेन्नई में।
61सीमेंट की इकाइयाँ गुजरात में क्यों लगाई गईं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यहाँ से इसे खाड़ी के देशों के बाज़ार की उपलब्धता है।
62मोटरगाड़ी उद्योग में वृद्धि कब से हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: उदारीकरण के पश्चात्, जब नए और आधुनिक मॉडल के वाहनों का बाज़ार तथा माँग बढ़ी।
63भारत की इलैक्ट्रॉनिक राजधानी किसे कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बेंगलुरु को।
64इलैक्ट्रोनिक उद्योग का सर्वाधिक संकेंद्रण कहाँ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बेंगलुरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में।
65भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर का निरंतर विकास।
66उद्योग किन चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वायु, जल, भूमि तथा ध्वनि प्रदूषण।
67वायु प्रदूषण करने वाली दो मुख्य गैसें कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड।
68निलंबित कणनुमा पदार्थों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: धूलि, स्प्रे, कुहासा तथा धुआँ।
69भारत के मुख्य औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: फ्लाई एश, फ़ोस्फ़ो-जिप्सम तथा लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag)।
70तापीय प्रदूषण क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जब कारख़ानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।
71परमाणु अपशिष्ट से कौन-सी बीमारियाँ होती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कैंसर, जन्मजात विकार तथा अकाल प्रसव।
72ध्वनि प्रदूषण के क्या प्रभाव हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: खिन्नता तथा उत्तेजना ही नहीं वरन् श्रवण असक्षमता, हृदय गति, रक्त चाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती हैं।
73ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारख़ानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारख़ाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल।
74★एक लिटर औद्योगिक अपशिष्ट कितना स्वच्छ जल दूषित करता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग आठ गुना।
75औद्योगिक अपशिष्ट के शोधन के तीन चरण कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन, जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन तथा जैविक-रासायनिक-भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन।
76वायु प्रदूषण कम करने के उपकरण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ऊँची चिमनियाँ, एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषकों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के उपकरण।
77NTPC के पास कौन-सा प्रमाण पत्र है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पर्यावरण प्रबंधतंत्र (EMS) 14001 के लिए आई.एस.ओ. (ISO) प्रमाण पत्र।
78अध्याय का अंतिम संदेश क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सतत् पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की ज़रूरत है।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1विनिर्माण क्या है? (अभ्यास प्रश्न 2-i)
उत्तर देखिए
उत्तर: कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है। जैसे लकड़ी से काग़ज़, गन्ने से चीनी, लौह-अयस्क से लोहा-इस्पात तथा बॉक्साइट से एल्यूमिनियम बनाया जाता है; यह एक द्वितीयक क्रिया है और किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है।
2आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ। (अभ्यास प्रश्न 2-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर: आधारभूत उद्योग वे उद्योग हैं जिनके उत्पाद या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं। इनके उदाहरण लोहा-इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग हैं; लोहा तथा इस्पात उद्योग इसीलिए आधारभूत है क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं।
3आधारभूत और उपभोक्ता उद्योग में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: आधारभूत उद्योग वे हैं जिनके उत्पाद या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं, जैसे लोहा-इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन। उपभोक्ता उद्योग वे हैं जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं, जैसे चीनी, दंतमंजन, काग़ज़, पंखे तथा सिलाई मशीन।
4सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग वे हैं जो सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित होते हैं, जैसे भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) तथा स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL)। निजी क्षेत्र के उद्योग वे हैं जिनका एक व्यक्ति के स्वामित्व में और उसके द्वारा संचालित अथवा लोगों के स्वामित्व में या उनके द्वारा संचालित होते हैं, जैसे टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड तथा डाबर उद्योग।
5सहकारी उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सहकारी उद्योग वे हैं जिनका स्वामित्व कच्चे माल की पूर्ति करने वाले उत्पादकों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है। इनमें संसाधनों का कोष संयुक्त होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन भी अनुपातिक होता है; जैसे महाराष्ट्र के चीनी उद्योग और केरल के नारियल पर आधारित उद्योग।
6विनिर्माण उद्योग कृषि पर निर्भरता कैसे कम करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं वरन् द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोज़गार उपलब्ध कराकर कृषि पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं। इससे गाँव के लोगों को खेती के अलावा दूसरा रोज़गार मिल जाता है और खेत पर पड़ने वाला बोझ घट जाता है।
7उद्योगों की स्थापना से क्षेत्रीय असमानताएँ कैसे कम होती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: देश में औद्योगिक विकास बेरोज़गारी तथा ग़रीबी उन्मूलन की एक आवश्यक शर्त है, और भारत में सार्वजनिक तथा संयुक्त क्षेत्र में लगे उद्योग इसी विचार पर आधारित थे। जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना का उद्देश्य भी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना था।
8कृषि और उद्योग एक दूसरे के पूरक कैसे हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है और ये उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि पर निर्भर हैं। दूसरी ओर इनके द्वारा निर्मित उत्पाद — जैसे सिंचाई के लिए पंप, उर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, प्लास्टिक पाइप, मशीनें व कृषि औज़ार — पर किसान निर्भर है; इसलिए दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
9वस्त्र उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का अपना अलग महत्त्व है क्योंकि इसका औद्योगिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान है। देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।
10सूती वस्त्र उद्योग आरंभ में महाराष्ट्र और गुजरात तक ही सीमित क्यों था?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि ये कपास उत्पादन क्षेत्र थे और यहाँ कपास की उपलब्धता थी। इसके अतिरिक्त बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम तथा नमीयुक्त जलवायु जैसे कारकों ने भी इसके स्थानीयकरण को बढ़ावा दिया।
11सूती वस्त्र उद्योग का कृषि से क्या संबंध है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस उद्योग का कृषि से निकट का संबंध है और यह कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिज़ाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को जीविका प्रदान करता है। इसके कारण रसायन रंजक, मिल-स्टोर, पैकेजिंग सामग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की माँग भी बढ़ती है, फलस्वरूप इन उद्योगों का विकास होता है।
12! भारत में बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यद्यपि भारत में कताई उत्पादन विश्व स्तर का है, तथापि बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला है क्योंकि यह देश में उत्पादित उच्च स्तरीय धागे का अधिक प्रयोग नहीं कर पाता। कताई कार्य महाराष्ट्र, गुजरात तथा तमिलनाडु में केंद्रित है, लेकिन बुनाई अत्यधिक विकेंद्रीकृत है और वह हथकरघों, विद्युतकरघों व मिलों में होती है।
13महात्मा गांधी ने सूत कातने तथा खादी बुनने पर क्यों बल दिया?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि खादी कुटीर उद्योग के रूप में बुनकरों को उनके ही घरों में बड़े पैमाने पर रोज़गार प्रदान कराती थी, और इसके लिए बड़ी पूँजी या मशीन की आवश्यकता नहीं थी। इसके अतिरिक्त विदेशी मिल-कपड़ा ख़रीदना अंग्रेज़ी उद्योग को मज़बूत करना था, जबकि खादी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई।
14भारत में पटसन उद्योग की स्थिति बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत पटसन व पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा बांग्लादेश के पश्चात् दूसरा बड़ा निर्यातक भी है। वर्ष 2010-11 में भारत में लगभग 80 पटसन उद्योग थे, जिनमें अधिकांश पश्चिम बंगाल में हुगली नदी तट पर 98 किमी. लंबी तथा 3 किमी. चौड़ी एक सँकरी मेखला में स्थित हैं; पहला पटसन उद्योग 1855 में कोलकाता के निकट रिशरा में लगा था।
15★1947 के विभाजन का पटसन उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1947 में देश के विभाजन के पश्चात् पटसन मिलें तो भारत में रह गईं, लेकिन तीन-चौथाई जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान अर्थात् बांग्लादेश में चले गए। इससे भारत के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि मिलें तो थीं पर उनके लिए कच्चा पटसन नहीं था।
16चीनी उद्योग की मिलें गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास ही क्यों लगाई जाती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल भारी होता है तथा ढुलाई में इसके सूक्रोस की मात्रा घट जाती है। इसलिए यदि गन्ना दूर ले जाया जाए तो चीनी कम बनेगी और लागत भी बढ़ेगी।
17चीनी उद्योग दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यहाँ के गन्ने में अधिक सूक्रोस की मात्रा है और अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु भी गुणकारी है। इसके अतिरिक्त इन राज्यों में सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिलता है।
18चीनी उद्योग मौसमी क्यों है और इसका क्या लाभ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह उद्योग मौसमी है क्योंकि गन्ना वर्ष में कुछ ही महीनों में आता है, इसलिए मिल पूरे साल नहीं चलती। इसीलिए यह सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है, क्योंकि किसान ख़ुद मिलकर मिल चलाते हैं तो उन्हें फसल का दाम भी मिलता है और लाभ भी बँटता है।
19लोहा-इस्पात उद्योग को विकास का पैमाना क्यों माना जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इस्पात से विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफ़ोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं का निर्माण होता है। इसीलिए इस्पात के उत्पादन तथा खपत को प्राय: एक देश के विकास का पैमाना माना जाता है।
20★छोटानागपुर पठारी क्षेत्र में लोहा-इस्पात उद्योग क्यों संकेंद्रित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस प्रदेश में इस उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल सापेक्षिक परिस्थितियाँ हैं। इनमें लौह अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाज़ार में इनकी माँग की विशाल संभाव्यता सम्मिलित है।
21एल्यूमिनियम का महत्त्व क्यों बढ़ा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है, और इसका प्रयोग हवाई जहाज़, बर्तन तथा तार बनाने में किया जाता है। कई उद्योगों में इसका महत्त्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ा है।
22एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग की दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहली आवश्यकता नियमित ऊर्जा की पूर्ति है, क्योंकि इसमें प्रति टन अयस्क पर 18,600 कि.वाट विद्युत लगती है। दूसरी आवश्यकता कम क़ीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता है, क्योंकि एक टन एल्यूमिनियम के लिए 4 से 6 टन तक बॉक्साइट चाहिए।
23रसायन उद्योग स्वयं भी एक बड़ा उपभोक्ता क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि आधारभूत रसायन एक प्रक्रिया द्वारा अन्य रसायन उत्पन्न करते हैं। इन रसायनों का उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोग, कृषि अथवा उपभोक्ता बाज़ारों के लिए किया जाता है, इसलिए यह उद्योग अपना ही उत्पाद ख़ुद खपाता है।
24रसायन उद्योग का देश में विस्तृत फैलाव क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इनका कच्चा माल देश के लगभग हर भाग में उपलब्ध है और इनका बाज़ार भी पूरे देश में फैला है, क्योंकि हर उद्योग को किसी न किसी रसायन की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त इसमें लघु तथा बृहत् दोनों प्रकार की विनिर्माण इकाइयाँ सम्मिलित हैं, इसलिए यह किसी एक स्थान पर बँधा नहीं रहता।
25★भारत को पोटाश आयात क्यों करना पड़ता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि हमारे देश में वाणिज्यिक रूप से या किसी भी रूप में प्रयुक्त होने वाला पोटाश या पोटाशियम यौगिकों के भंडार नहीं हैं। इसीलिए मिश्रित उर्वरक के तीन मुख्य पोषक तत्त्वों — नाइट्रोजन, फ़ास्फ़ेट व पोटाश — में से तीसरा अर्थात् पोटाश पूर्णत: आयात किया जाता है।
26सीमेंट विनिर्माण इकाइयों की स्थापना कहाँ आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगी?
उत्तर देखिए
उत्तर: वहाँ जहाँ चूना पत्थर, सिलिका, जिप्सम, कोयला और विद्युत ऊर्जा पास-पास उपलब्ध हों तथा रेल परिवहन की सुविधा हो। इसका कारण यह है कि इस उद्योग को भारी व स्थूल कच्चे माल की आवश्यकता होती है, जिसे दूर से लाना महँगा पड़ता है।
27गुजरात में सीमेंट उद्योग की इकाइयाँ क्यों लगाई गई हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यहाँ से इसे खाड़ी के देशों के बाज़ार की उपलब्धता है। अर्थात् गुजरात के पत्तनों से सीमेंट को समुद्र मार्ग द्वारा खाड़ी देशों को आसानी से निर्यात किया जा सकता है।
28सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग भारत में सफल क्यों हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर का निरंतर विकास है। बेंगलुरु भारत की इलैक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में उभरा है, और इस उद्योग का सर्वाधिक संकेंद्रण बेंगलुरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में है।
29तापीय प्रदूषण क्या है और इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जब कारख़ानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है। इससे जल में घुली ऑक्सीजन घट जाती है और मछलियों तथा अन्य जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है।
30मृदा और जल प्रदूषण आपस में कैसे संबंधित हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मलबे का ढेर, विशेषकर काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-कर्कट मृदा को अनुपजाऊ बनाता है। वर्षा जल के साथ ये प्रदूषक ज़मीन से रिसते हुए भूमिगत जल तक पहुँच कर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं, इसलिए दोनों प्रदूषण आपस में जुड़े हुए हैं।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1विनिर्माण उद्योगों का महत्त्व बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं वरन् द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोज़गार उपलब्ध कराकर कृषि पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं; और देश में औद्योगिक विकास बेरोज़गारी तथा ग़रीबी उन्मूलन की एक आवश्यक शर्त है।
- निर्मित वस्तुओं का निर्यात वाणिज्य व्यापार को बढ़ाता है जिससे अपेक्षित विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है; और जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना से क्षेत्रीय असमानताएँ कम होती हैं।
- वे देश ही विकसित हैं जो कच्चे माल को विभिन्न तथा अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं; और चूँकि कृषि तथा उद्योग एक दूसरे के पूरक हैं, इसलिए विनिर्माण के विकास से न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है, अपितु उत्पादन प्रक्रिया भी सक्षम हुई है।
2उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर — कृषि आधारित (सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी, वनस्पति तेल) तथा खनिज आधारित (लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार, पेट्रोरसायन)।
- प्रमुख भूमिका के आधार पर — आधारभूत (लोहा-इस्पात, ताँबा व एल्यूमिनियम प्रगलन) तथा उपभोक्ता (चीनी, दंतमंजन, काग़ज़, पंखे, सिलाई मशीन); और पूँजी निवेश के आधार पर लघु उद्योग, जिसमें अधिकतम निवेश एक करोड़ रुपये तक स्वीकार्य है।
- स्वामित्व के आधार पर — सार्वजनिक (BHEL, SAIL), निजी (टिस्को, बजाज ऑटो, डाबर), संयुक्त (OIL) तथा सहकारी (महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, केरल के नारियल उद्योग); और माल के भार के आधार पर भारी (लोहा-इस्पात) तथा हल्के (विद्युतीय उद्योग)।
3★हुगली नदी तट पर पटसन उद्योग के केंद्रित होने के कारण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, सस्ता जल परिवहन, तथा सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल जो कच्चे माल को मिलों तक ले जाने में सहायक है।
- कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल की उपलब्धता, तथा पश्चिम बंगाल एवं समीपवर्ती राज्यों — ओडिशा, बिहार व उत्तर प्रदेश — से सस्ता श्रमिक मिलना।
- कोलकाता का एक बड़े नगरीय केंद्र के रूप में बैंकिंग, बीमा और जूट के सामान के निर्यात के लिए पत्तन की सुविधाएँ प्रदान करना।
4इस्पात निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- सबसे पहले कच्चे माल का कारख़ानों तक परिवहन किया जाता है; फिर झोंकदार भट्ठी में लौह-अयस्क को गलाया जाता है, जिसमें चूना पत्थर एक सहायक खनिज के रूप में मिलाया जाता है और धातु का मैल हटाया जाता है; अयस्क को गर्म करने के लिए कोक का ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है।
- इसके बाद तरल पदार्थ को साँचों में डाला जाता है जिससे ढलवाँ लोहा तैयार होता है।
- फिर ढलवाँ लोहे को पुन: गलाकर ऑक्सीकरण द्वारा अशुद्धता हटाकर तथा मैंगनीज़, निकल व क्रोमियम मिलाकर शुद्ध किया जाता है — इसे इस्पात बनाना कहते हैं; और अंत में रोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई और गढ़ाई द्वारा धातु को आकार दिया जाता है।
5रसायन उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत में रसायन उद्योग तेज़ी से विकसित हो रहा तथा फैल रहा है; सकल घरेलू उत्पाद में इसकी भागीदारी लगभग 3 प्रतिशत है, और यह एशिया का तीसरा बड़ा तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12वें स्थान पर है। इसमें लघु तथा बृहत् दोनों प्रकार की इकाइयाँ हैं।
- अकार्बनिक रसायनों में सलफ्यूरिक अम्ल (उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन, डाई में प्रयुक्त), नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश (काँच, साबुन, शोधक, काग़ज़ में) तथा कास्टिक सोडा शामिल हैं।
- कार्बनिक रसायनों में पेट्रोरसायन शामिल हैं जो कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक, रंजक पदार्थ, दवाइयाँ व औषध रसायन बनाने में प्रयोग किये जाते हैं; ये उद्योग तेल शोधन शालाओं या पेट्रोरसायन संयंत्रों के समीप स्थापित हैं। साथ ही रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है।
6उर्वरक उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- उर्वरक उद्योग नाइट्रोजनी उर्वरक (मुख्यत: यूरिया), फ़ास्फ़ेटिक उर्वरक (D.A.P.) तथा अमोनियम फ़ास्फ़ेट और मिश्रित उर्वरक के उत्पादन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केंद्रित है; मिश्रित उर्वरक में तीन मुख्य पोषक तत्त्व — नाइट्रोजन, फ़ास्फ़ेट व पोटाश — शामिल हैं।
- ! तीसरा अर्थात् पोटाश पूर्णत: आयात किया जाता है, क्योंकि हमारे देश में वाणिज्यिक रूप से या किसी भी रूप में प्रयुक्त होने वाला पोटाश या पोटाशियम यौगिकों के भंडार नहीं हैं।
- हरित क्रांति के पश्चात् यह उद्योग देश के अन्य अनेक भागों में भी फैल गया; गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल कुल उर्वरक उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत उत्पादन करते हैं, और अन्य महत्त्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा, ★राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, गोआ, दिल्ली, मध्य प्रदेश तथा कर्नाटक हैं।
7औद्योगिक जल प्रदूषण के कारण और प्रभाव बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- जल प्रदूषण उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से फैलता है।
- इसके प्रमुख कारक उद्योग हैं — काग़ज़, लुगदी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलैक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग, जो रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा सीसा व पारा जैसी भारी धातुएँ, कीटनाशक, उर्वरक, कार्बन, प्लास्टिक और रबर सहित कृत्रिम रसायन जल में वाहित करते हैं।
- भारत के मुख्य अपशिष्ट पदार्थों में फ्लाई एश, फ़ोस्फ़ो-जिप्सम तथा लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag) हैं। इसके अतिरिक्त तापीय प्रदूषण भी होता है, जब गर्म जल बिना ठंडा किए नदियों व तालाबों में छोड़ दिया जाता है।
8औद्योगिक अपशिष्ट के शोधन के तीन चरण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- प्राथमिक शोधन — यांत्रिक साधनों द्वारा, जिसमें अपशिष्ट पदार्थों की छँटाई, उनके छोटे-छोटे टुकड़े करना, ढकना तथा तलछट जमाव सम्मिलित हैं।
- द्वितीयक शोधन — जैविक प्रक्रियाओं द्वारा।
- तृतीयक शोधन — जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा; इसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुन: प्रयोग योग्य बनाया जाता है।
9NTPC द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उपाय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- NTPC के पास पर्यावरण प्रबंधतंत्र (EMS) 14001 के लिए ISO प्रमाण पत्र है; यह निगम आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का सही उपयोग करता है तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार करता है।
- यह अधिकतम राख का इस्तेमाल कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन करता है, और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करता है।
- साथ ही तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राख युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख-संग्रह (Ash pond) प्रबंधन द्वारा प्रदूषण कम करता है, और सभी ऊर्जा संयंत्रों का पारिस्थितिकीय रूप से मॉनीटर तथा समीक्षा करते हुए ऑनलाइन आँकड़ों का प्रबंधन करता है।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)
1उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं? (अभ्यास प्रश्न 3-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- यद्यपि उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका है, तथापि इनके द्वारा बढ़ते भूमि, वायु, जल तथा पर्यावरण प्रदूषण को नकारा नहीं जा सकता। उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं, और इनमें ताप विद्युतगृह भी सम्मिलित हैं।
- वायु प्रदूषण — अधिक अनुपात में अनचाही गैसों जैसे सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड की उपस्थिति से; साथ ही वायु में निलंबित कणनुमा पदार्थों में धूलि, स्प्रे, कुहासा तथा धुआँ होते हैं। रसायन व काग़ज़ उद्योग, ईंटों के भट्टे, तेल शोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योग तथा छोटे-बड़े कारख़ाने नियमों का उल्लंघन करते हुए धुआँ निष्कासित करते हैं। ज़हरीली गैसों का रिसाव बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है, जैसा भोपाल गैस त्रासदी में हुआ।
- जल प्रदूषण — उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से। काग़ज़, लुगदी, रसायन, वस्त्र, रंगाई उद्योग, तेल शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलैक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा सीसा-पारा जैसी भारी धातुएँ, कीटनाशक, उर्वरक, कार्बन, प्लास्टिक और रबर जल में वाहित करते हैं। मुख्य अपशिष्ट फ्लाई एश, फ़ोस्फ़ो-जिप्सम तथा लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag) हैं।
- तापीय प्रदूषण और परमाणु अपशिष्ट — जब कारख़ानों तथा तापघरों से गर्म जल बिना ठंडा किए नदियों-तालाबों में छोड़ा जाता है तो तापीय प्रदूषण होता है; और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अपशिष्ट व परमाणु शस्त्र उत्पादक कारख़ानों से कैंसर, जन्मजात विकार तथा अकाल प्रसव जैसी बीमारियाँ होती हैं।
- भूमि प्रदूषण — काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-कर्कट मृदा को अनुपजाऊ बनाते हैं, और वर्षा जल के साथ ये प्रदूषक ज़मीन से रिसते हुए भूमिगत जल तक पहुँच कर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं।
- ध्वनि प्रदूषण — औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारख़ानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारख़ाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल से; इससे खिन्नता और उत्तेजना ही नहीं, वरन् श्रवण असक्षमता, हृदय गति, रक्त चाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती हैं।
निष्कर्ष — इस प्रकार जो उद्योग देश को समृद्ध बनाते हैं, वही हवा, पानी, मिट्टी और शांति — चारों को नष्ट भी कर रहे हैं।
2उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के उपायों की चर्चा कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 3-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पहले यह जान लेना आवश्यक है कि कारख़ानों द्वारा निष्कासित एक लिटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुना स्वच्छ जल दूषित होता है — इसी से समस्या की गंभीरता समझ आती है।
- जल के लिए तीन सुझाव — (क) विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग तथा दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुन: उपयोग; (ख) जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण; और (ग) नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन।
- शोधन के तीन चरण — यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन, जिसमें अपशिष्ट पदार्थों की छँटाई, छोटे-छोटे टुकड़े करना, ढकना तथा तलछट जमाव होता है; जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन; और जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन, जिसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुन: प्रयोग योग्य बनाया जाता है। जहाँ भूमिगत जल का स्तर कम है, वहाँ उद्योगों द्वारा अधिक निष्कासन पर क़ानूनी प्रतिबंध होना चाहिए।
- वायु के लिए — कारख़ानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण (electrostatic precipitators), स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के उपकरण होने चाहिए; और कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लाई जा सकती है।
- ध्वनि के लिए — मशीनों व उपकरणों का कम उपयोग, जेनरेटरों में साइलेंसर, ऐसी मशीनरी जो ऊर्जा सक्षम हो तथा कम ध्वनि प्रदूषण करे, ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरण, तथा कारीगरों को कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण पहनने चाहिए।
- NTPC ने मार्ग दिखाया है — उसके पास EMS 14001 का ISO प्रमाण पत्र है और वह आधुनिकतम तकनीक, अधिकतम राख का इस्तेमाल, वृक्षारोपण, तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा ऑनलाइन मॉनीटरिंग द्वारा प्रदूषण कम करता है।
निष्कर्ष — अंतत: सतत् पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की ज़रूरत है। अर्थात् उद्योग बंद नहीं करने हैं, समझदारी से चलाने हैं।
3भारत में सूती वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का अपना अलग महत्त्व है, क्योंकि देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है — रेशा → सूत → कपड़ा → वस्त्र।
- इतिहास — प्राचीन भारत में सूती वस्त्र हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई से बनते थे; अठारहवीं शताब्दी के बाद विद्युतीय करघों का उपयोग होने लगा। औपनिवेशिक काल में हमारे परंपरागत उद्योगों को बहुत हानि हुई क्योंकि वे इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये। पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में लगा, और विश्व-युद्धों के समय इंग्लैंड में कपड़े की माँग के कारण इसे प्रोत्साहन मिला।
- स्थानीयकरण — आरंभिक वर्षों में यह उद्योग महाराष्ट्र तथा गुजरात के कपास उत्पादन क्षेत्रों तक ही सीमित था; कपास की उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम तथा नमीयुक्त जलवायु ने इसे बढ़ावा दिया।
- रोज़गार — इस उद्योग का कृषि से निकट का संबंध है और यह कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिज़ाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को जीविका देता है। इसके कारण रसायन रंजक, मिल-स्टोर, पैकेजिंग सामग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की माँग भी बढ़ती है।
- ! भारत की कमज़ोरी — कताई कार्य महाराष्ट्र, गुजरात तथा तमिलनाडु में केंद्रित है, पर बुनाई अत्यधिक विकेंद्रीकृत है; कताई उत्पादन विश्व स्तर का है लेकिन बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला है, क्योंकि यह देश में उत्पादित उच्च स्तरीय धागे का अधिक प्रयोग नहीं कर पाता।
निष्कर्ष — हाथ से बुनी खादी कुटीर उद्योग के रूप में बुनकरों को उनके घरों में बड़े पैमाने पर रोज़गार प्रदान कराती है — यही इस उद्योग की सबसे बड़ी सामाजिक भूमिका है।
4भारत में लोहा तथा इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- लोहा तथा इस्पात उद्योग एक आधारभूत (basic) उद्योग है, क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफ़ोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात आवश्यक है।
- इसीलिए इस्पात के उत्पादन तथा खपत को प्राय: एक देश के विकास का पैमाना माना जाता है।
- यह एक भारी उद्योग है, क्योंकि इसमें प्रयुक्त कच्चा तथा तैयार माल दोनों ही भारी और स्थूल होते हैं और इसके लिए अधिक परिवहन लागत की आवश्यकता होती है; निर्मित माल को बाज़ार तथा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए भी सक्षम परिवहन चाहिए।
- कच्चा माल — इस उद्योग के लिए लौह-अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का अनुपात लगभग 4:2:1 का है, और इस्पात को कठोर बनाने के लिए मैंगनीज़ की कुछ मात्रा भी चाहिए।
- प्रक्रिया — कच्चे माल का परिवहन → झोंकदार भट्ठी → ढलवाँ लोहा → इस्पात बनाना → धातु को आकार देना (रोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई और गढ़ाई)।
- स्थान — भारत में छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं, क्योंकि यहाँ लौह अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाज़ार में माँग की विशाल संभाव्यता है। प्रमुख संयंत्र जमशेदपुर, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बोकारो, बर्नपुर, विशाखापट्टनम, विजयनगर, भद्रावती तथा सेलम में हैं।
5एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत में एल्यूमिनियम प्रगलन दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है।
- गुण — यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है।
- उपयोग — हवाई जहाज़ बनाने में, बर्तन तथा तार बनाने में इसका प्रयोग होता है; और कई उद्योगों में इसका महत्त्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ा है।
- कच्चा माल — प्रगालकों (smelters) में बॉक्साइट का प्रयोग किया जाता है, जो भारी, गहरे लाल रंग की चट्टान जैसा होता है। अनुपात इस प्रकार है — 4 से 6 टन बॉक्साइट → 2 टन एल्यूमिना → 1 टन एल्यूमिनियम।
- दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ — नियमित ऊर्जा की पूर्ति (विद्युत 18,600 कि.वाट प्रति टन अयस्क) तथा कम क़ीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता।
- स्थान — देश के एल्यूमिनियम प्रगलन संयंत्र ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्यों में स्थित हैं।
निष्कर्ष — चूँकि एक टन धातु के लिए छह टन तक चट्टान खोदनी पड़ती है और भारी मात्रा में बिजली लगती है, इसलिए यह उद्योग कच्चे माल और सस्ती बिजली — दोनों के पास ही लग सकता है।
भाग ङ — आरेख-आधारित प्रश्न
आरेख 1 — चित्र 6.1: वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| श्रृंखला के पाँच चरण बताइए। | रेशा उत्पादन → धुनाई कताई → बुनाई → रंगाई व परिष्करण → वस्त्र विनिर्माण। |
| हर चरण पर क्या बनता है? | कच्चा रेशा → सूत → कपड़ा → वस्त्र (गारमेंट)। |
| ‘अतिरिक्त मूल्य’ का क्या अर्थ है? | हर चरण पर वस्तु का मूल्य बढ़ता जाता है — रेशा सस्ता, गारमेंट सबसे महँगा। |
आरेख 2 — चित्र 6.2: इस्पात निर्माण प्रक्रिया
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| झोंकदार भट्ठी में क्या होता है? | लौह-अयस्क गलाया जाता है, चूना पत्थर मिलाकर धातु का मैल हटाया जाता है, और कोक ईंधन के रूप में प्रयुक्त होता है। |
| ढलवाँ लोहा कैसे बनता है? | तरल पदार्थ को साँचों में डालने से। |
| इस्पात बनाने में कौन-सी धातुएँ मिलाई जाती हैं? | मैंगनीज़, निकल और क्रोमियम। |
आरेख 3 — चित्र 6.4: एल्यूमिनियम तथा अयस्क का अनुपात
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1 टन एल्यूमिनियम के लिए कितना बॉक्साइट चाहिए? | 4 से 6 टन। |
| बीच का चरण क्या है? | 2 टन एल्यूमिना। |
| इससे क्या निष्कर्ष निकलता है? | कि यह उद्योग बहुत अधिक कच्चा माल खाता है, इसलिए इसे खान के पास ही लगना चाहिए। |
भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं
इस अध्याय से मानचित्र में लोहा-इस्पात संयंत्र, वस्त्र उद्योग केंद्र और सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स पूछे जाते हैं। पाठ्यपुस्तक में तीन मानचित्र हैं — पृष्ठ 61, 63 और 67।
1. लोहा और इस्पात संयंत्र (पृष्ठ 63)
| संयंत्र | राज्य |
|---|---|
| जमशेदपुर | झारखंड |
| बोकारो | झारखंड |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल |
| बर्नपुर | पश्चिम बंगाल |
| राउरकेला | ओडिशा |
| भिलाई | छत्तीसगढ़ |
| विशाखापट्टनम | आंध्र प्रदेश |
| विजयनगर | कर्नाटक |
| भद्रावती | कर्नाटक |
| सेलम | तमिलनाडु |
2. वस्त्र उद्योग (पृष्ठ 61)
| प्रकार | प्रमुख केंद्र |
|---|---|
| सूती वस्त्र | मुंबई · अहमदाबाद · कानपुर · कोयंबटूर · मदुरै · इंदौर · सोलापुर · वडोदरा · नागपुर · चेन्नई |
| ऊनी वस्त्र | लुधियाना · अमृतसर · ★बीकानेर · ★जयपुर · ग्वालियर · कानपुर · श्रीनगर · मिर्ज़ापुर |
| रेशम वस्त्र | मैसूरु · बेंगलूरु · कोलार · श्रीनगर · अनंतनाग · बारामूला · मुर्शिदाबाद · बेलगावि |
3. सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स (पृष्ठ 67)
श्रीनगर · मोहाली · नोएडा · ★जयपुर · गाँधीनगर · इंदौर · मुंबई · पुणे · हैदराबाद · बेंगलूरु · मैसूरु · चेन्नई · थिरुवनंथपुरम · विशाखापट्टनम · भुवनेश्वर · कोलकाता · गुवाहाटी
4. पटसन उद्योग
हुगली नदी तट — कोलकाता, हावड़ा, रिशरा (पहला उद्योग, 1855)
5. राजस्थान से जुड़े स्थान★
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| बीकानेर | ऊनी वस्त्र उद्योग |
| जयपुर | ऊनी वस्त्र उद्योग और सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क — दोनों |
6. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न
| प्रश्न | अंक |
|---|---|
| भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्न लोहा-इस्पात संयंत्र अंकित कीजिए — (क) जमशेदपुर (ख) भिलाई (ग) राउरकेला। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर तीन सूती वस्त्र केंद्र और एक ऊनी वस्त्र केंद्र दिखाइए। | 4 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर बेंगलूरु, हैदराबाद और जयपुर के सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क अंकित कीजिए। | 3 |
★सबसे आसान तरीक़ा — लोहा-इस्पात = पूर्व-मध्य (छोटानागपुर) · सूती वस्त्र = पश्चिम-दक्षिण · ऊनी वस्त्र = उत्तर-पश्चिम (ठंडे क्षेत्र) · रेशम = दक्षिण और कश्मीर · पटसन = पूर्व (हुगली) · सॉफ़्टवेयर = बिखरे हुए।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग कब और कहाँ लगा? | 1 |
| 2 | भारत की इलैक्ट्रॉनिक राजधानी किसे कहते हैं? | 1 |
| 3 | लोहा-इस्पात उद्योग में कच्चे माल का अनुपात क्या है? | 1 |
| 4 | विनिर्माण क्या है? | 2 |
| 5 | आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ। | 2 |
| 6 | उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। | 3 |
| 7 | उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर जमशेदपुर, भिलाई और राउरकेला अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | पहला पटसन उद्योग कब और कहाँ लगा? | 1 |
| 2 | भारत पोटाश आयात क्यों करता है? | 1 |
| 3 | एक लिटर औद्योगिक अपशिष्ट कितना स्वच्छ जल दूषित करता है? | 1 |
| 4 | सहकारी उद्योग किसे कहते हैं? | 2 |
| 5 | चीनी उद्योग दक्षिणी राज्यों में क्यों बढ़ रहा है? | 2 |
| 6 | हुगली तट पर पटसन उद्योग के केंद्रित होने के कारण बताइए। | 3 |
| 7 | उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के उपायों की चर्चा कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर (वस्त्र उद्योग) अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | लघु उद्योग में अधिकतम कितना निवेश स्वीकार्य है? | 1 |
| 2 | पहला सीमेंट उद्योग कब और कहाँ लगा? | 1 |
| 3 | तापीय प्रदूषण क्या है? | 1 |
| 4 | भारत में बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला क्यों है? | 2 |
| 5 | एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग की दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ क्या हैं? | 2 |
| 6 | इस्पात निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | भारत में सूती वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर बेंगलूरु, हैदराबाद और नोएडा (सॉफ़्टवेयर पार्क) अंकित कीजिए। | 5 |
अंतिम सलाह। इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं — 1. उद्योगों का वर्गीकरण — पाँच आधार, हर एक के साथ दो उदाहरण। 2. प्रदूषण के चारों प्रकार — और उनके उपाय; यही 5 अंक का पक्का प्रश्न है। 3. मानचित्र — जिसमें राजस्थान के दो स्थान (बीकानेर और जयपुर) ज़रूर याद रखिए।