इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | उत्तर की लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर लिखिए |
| 2 अंक | लगभग 30–40 शब्द, या 2 बिंदु | पहले उत्तर, फिर कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | लगभग 60–80 शब्द, या 3 बिंदु | तीन अलग-अलग बातें, पूरे वाक्यों में |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द, या 5 बिंदु | भूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष |
| मानचित्र | सही जगह पर सही चिह्न | नाम साफ़ लिखिए |
★इस अध्याय के लिए तीन सलाह — 1. हर खनिज पर तीन बातें लिखिए — वर्ग · उपयोग · प्रमुख राज्य। 2. जहाँ प्रतिशत याद हो, वहाँ ज़रूर लिखिए — भूगोल में आँकड़ा ही अंक दिलाता है। 3. ★राजस्थान वाले सभी आठ बिंदु अलग से याद कीजिए — RBSE में यही सबसे ज़्यादा आते हैं।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1खनिज की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है।
2अब तक कितने खनिजों की पहचान हो चुकी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 2000 से अधिक।
3हमारे कुल पौष्टिक उपभोग का कितना भाग खनिज है?
उत्तर देखिए
उत्तर: केवल 0.3 प्रतिशत; परंतु इनके बिना हम 99.7 प्रतिशत भोज्य पदार्थों का उपयोग करने में असमर्थ होंगे।
4खनिजों के तीन मुख्य वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिज।
5धात्विक खनिजों के तीन उपवर्ग बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लौह धातु, अलौह और बहुमूल्य खनिज।
6लौह धातु खनिजों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल व कोबाल्ट।
7अलौह खनिजों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ताँबा, सीसा, जस्ता व बॉक्साइट।
8बहुमूल्य खनिज कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सोना, चाँदी और प्लेटिनम।
9ऊर्जा खनिज कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस।
10‘अयस्क’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: किसी भी खनिज में अन्य अवयवों या तत्त्वों के मिश्रण या संचयन को अयस्क कहते हैं।
11खनन का आर्थिक महत्त्व कब होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तभी जब अयस्क में खनिजों का संचयन पर्याप्त मात्रा में हो।
12आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में कौन-से खनिज मिलते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा।
13अवसादी चट्टानों में वाष्पीकरण से कौन-से खनिज बनते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम।
14चट्टानों के अपघटन से कौन-सा खनिज बनता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बॉक्साइट।
15‘प्लेसर निक्षेप’ क्या हैं और उनमें कौन-से खनिज मिलते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में मिलने वाले निक्षेप; इनमें सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम प्रमुख हैं।
16महासागरीय जल से कौन-से खनिज प्राप्त होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: नमक, मैगनीशियम तथा ब्रोमाइन; और महासागरीय तली मैंगनीज़ ग्रंथिकाओं (nodules) में धनी है।
17‘रैट होल खनन’ क्या है और कहाँ होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय के जोवाई व चेरापूँजी में परिवार के सदस्यों द्वारा एक लंबी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाने वाला कोयला खनन।
18रैट होल खनन को किसने अवैध घोषित किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने।
19राजस्थान में कौन-से खनिज पाए जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते हैं।
20उत्तरी भारत के जलोढ़ मैदानों में खनिजों की क्या स्थिति है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे आर्थिक महत्त्व के खनिजों से लगभग विहीन हैं।
21लौह खनिज धात्विक खनिजों के उत्पादन मूल्य में कितना योगदान करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: तीन-चौथाई भाग का।
22मैग्नेटाइट में कितना लोहांश होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 70 प्रतिशत।
23मैग्नेटाइट की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसमें सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण होते हैं, जो विद्युत उद्योगों में विशेष रूप से उपयोगी हैं।
24हेमेटाइट में कितना लोहांश होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 50 से 60 प्रतिशत।
25सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: हेमेटाइट।
262018-19 में लौह अयस्क का 97 प्रतिशत उत्पादन किन राज्यों से हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और झारखंड से।
27ओडिशा में उच्च कोटि का हेमेटाइट किन खदानों से निकाला जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मयूरभंज व केंदुझर ज़िलों में बादाम पहाड़ खदानों से।
28झारखंड के सिंहभूम ज़िले की दो लौह अयस्क खदानें कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: गुआ और नोआमुंडी।
29बेलाडिला किस राज्य में है और वहाँ क्या मिलता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में; वहाँ अति उत्तम कोटि का हेमेटाइट मिलता है जिसके 14 जमाव हैं।
30बेलाडिला का लौह अयस्क किस पत्तन से और किन देशों को निर्यात होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: विशाखापट्टनम् पत्तन से जापान तथा दक्षिण कोरिया को।
31कुद्रेमुख की खानों की क्या विशेषता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ये शत् प्रतिशत निर्यात इकाई हैं और कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने जाते हैं।
32कुद्रेमुख से लौह अयस्क किस रूप में और कहाँ भेजा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कर्दम (Slurry) रूप में पाइपलाइन द्वारा मंगलूरु के निकट एक पत्तन पर।
33महाराष्ट्र-गोआ पेटी का लौह अयस्क किस पत्तन से निर्यात होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मरमागाओ पत्तन से।
34कन्नड़ भाषा में ‘कुद्रे’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: घोड़ा।
35‘बेलाडिला’ नाम कैसे पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि वहाँ की पहाड़ियाँ बैल के डील (hump) से मिलती-जुलती हैं।
36एक टन इस्पात बनाने में कितना मैंगनीज़ लगता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 10 किग्रा.।
37मैंगनीज़ के तीन अन्य उपयोग बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ और पेंट बनाने में।
38मैंगनीज़ का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मध्य प्रदेश (33 प्रतिशत)।
39ताँबे के तीन गुण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: घातवर्ध्य (malleable), तन्य और ताप सुचालक।
40ताँबे का मुख्य उपयोग किन उद्योगों में होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बिजली के तार बनाने, इलैक्ट्रोनिक्स और रसायन उद्योगों में।
41देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा किन खदानों से आता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानों से।
42ताँबे के लिए राजस्थान की कौन-सी खदानें प्रसिद्ध थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: खेतड़ी खदानें।
43एल्यूमिनियम किस अयस्क से प्राप्त किया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बॉक्साइट से।
44एल्यूमिनियम के तीन गुण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लोहे जैसी शक्ति के साथ अत्यधिक हल्का, सुचालक, और इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता (malleability) पाई जाती है।
45बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है और कितने प्रतिशत?
उत्तर देखिए
उत्तर: ओडिशा — 65 प्रतिशत।
46ओडिशा का सबसे महत्त्वपूर्ण बॉक्साइट निक्षेप कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कोरापुट ज़िले में पंचपतमाली निक्षेप।
47भारत में बॉक्साइट के निक्षेप मुख्यत: कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियों तथा बिलासपुर-कटनी के पठारी प्रदेश में।
48अभ्रक की सबसे बड़ी भौतिक विशेषता क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसका चादरों में विपाटन (split) आसानी से हो सकता है; इसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं।
49अभ्रक किन रंगों का हो सकता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पारदर्शी, काले, हरे, लाल, पीले अथवा भूरे।
50अभ्रक विद्युत उद्योग में क्यों अपरिहार्य है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसकी सर्वोच्च परावैद्युत शक्ति, ऊर्जा ह्रास का निम्न गुणांक, विंसवाहन के गुण और उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता के कारण।
51अभ्रक की अग्रणी उत्पादक पेटी कौन-सी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बिहार-झारखंड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी।
52राजस्थान में अभ्रक के मुख्य उत्पादक क्षेत्र कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अजमेर के आस पास।
53आंध्र प्रदेश की महत्त्वपूर्ण अभ्रक पेटी कौन-सी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: नेल्लोर अभ्रक पेटी।
54चूना पत्थर किन चट्टानों में पाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैगनीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में; यह अधिकांशत: अवसादी चट्टानों में मिलता है।
55चूना पत्थर के दो मुख्य उपयोग बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: यह सीमेंट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल है, और लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य है।
56चूना पत्थर उत्पादन में कौन-सा राज्य पहले स्थान पर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान — 22 प्रतिशत के साथ।
57खनन को किस नाम से पुकारा गया है और क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘घातक उद्योग’ (Killer Industry) — क्योंकि इसमें श्रमिकों के स्वास्थ्य और जीवन दोनों को गंभीर ख़तरा रहता है।
58खनिकों को कौन-सी बीमारी सबसे अधिक होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में साँस लेने से फेफड़ों संबंधी बीमारियाँ।
59खनन योग्य निक्षेप भू-पर्पटी का कितना भाग है?
उत्तर देखिए
उत्तर: केवल एक प्रतिशत।
60खनिज संरक्षण के तीन उपाय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: धातुओं का पुन: चक्रण, रद्दी धातुओं का प्रयोग तथा अन्य प्रतिस्थापनों का उपयोग।
61ऊर्जा संसाधनों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: दो — परंपरागत और गैर-परंपरागत साधन।
62परंपरागत ऊर्जा साधनों के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लकड़ी, उपले, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत (जल विद्युत व ताप विद्युत दोनों)।
63गैर-परंपरागत ऊर्जा साधनों के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा।
64ग्रामीण घरों में कितनी ऊर्जा लकड़ी और उपलों से मिलती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 70 प्रतिशत से अधिक।
65उपलों का उपभोग क्यों हतोत्साहित किया जा रहा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इससे सर्वाधिक मूल्यवान खाद्य का उपभोग होता है जिसे कृषि में प्रयोग किया जा सकता है।
66कोयले के चार प्रकार क्रम से बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस और एंथ्रेसाइट।
67पीट की विशेषता क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह दलदलों में क्षय होते पादपों से उत्पन्न होता है, जिसमें कम कार्बन, नमी की उच्च मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है।
68लिग्नाइट के प्रमुख भंडार कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: तमिलनाडु के नैवेली में; इनका प्रयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
69वाणिज्यिक प्रयोग में सबसे लोकप्रिय कोयला कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बिटुमिनस।
70सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एंथ्रेसाइट।
71गोंडवाना कोयले की आयु कितनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक।
72टरशियरी कोयले की आयु कितनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 55 लाख वर्ष।
73गोंडवाना कोयले के प्रमुख क्षेत्र कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा झारखंड) में झरिया, रानीगंज और बोकारो।
74टरशियरी कोयला किन राज्यों में मिलता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में।
75भारी उद्योग और ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों के पास क्यों लगाए जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि कोयला स्थूल पदार्थ है, जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है।
76गुजरात का सबसे महत्त्वपूर्ण तेल क्षेत्र कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: अंकलेश्वर।
77भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: असम।
78असम के तीन महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: डिगबोई, नहरकटिया और मोरन-हुगरीजन।
79प्राकृतिक गैस खनिज तेल के ऊपर क्यों पाई जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि प्राकृतिक गैस हल्की होती है।
80एच.वी.जे. पाइपलाइन का पूरा नाम और लंबाई क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर; यह 1,700 किलोमीटर लंबी थी।
81आज भारत में क्रॉस-कंट्री गैस पाइपलाइन कितनी लंबी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1700 किलोमीटर से बढ़कर 18500 किलोमीटर तक, यानी दस गुना से अधिक।
82सी.एन.जी. और पी.एन.जी. का क्या उपयोग है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सी.एन.जी. परिवहन ईंधन के रूप में और पी.एन.जी. घरों में खाना पकाने के ईंधन के रूप में।
83विद्युत के प्रति व्यक्ति उपभोग को क्या माना जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: विकास का सूचकांक।
84जल विद्युत और ताप विद्युत में मूल अंतर क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जल विद्युत प्रवाही जल से बनती है और नवीकरण योग्य है, जबकि ताप विद्युत कोयला-पेट्रोलियम-गैस जलाकर बनती है और अनवीकरण योग्य जीवाश्मी ईंधन पर निर्भर है।
85जल विद्युत उत्पन्न करने वाली तीन परियोजनाएँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी कारपोरेशन और कोपिली हाइडल परियोजना।
86परमाणु ऊर्जा किन दो खनिजों से बनती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यूरेनियम और थोरियम से।
87यूरेनियम और थोरियम कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में।
88थोरियम और किस रेत में पाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: केरल में मिलने वाली मोनाजाइट रेत में।
89धूप को सीधे विद्युत में किस तकनीक से बदला जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा।
90भारत में पवन ऊर्जा फार्म की विशालतम पेटी कहाँ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरै तक।
91पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए कौन-से दो स्थान जाने जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: नागरकोइल और जैसलमेर।
92बायोगैस किसानों को किन दो प्रकार से लाभ पहुँचाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एक ऊर्जा के रूप में और दूसरा उन्नत प्रकार के उर्वरक के रूप में।
93गोबर गैस प्लांट किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले बायोगैस संयंत्रों को ग्रामीण भारत में ‘गोबर गैस प्लांट’ कहा जाता है।
94भारत में ज्वारीय ऊर्जा की आदर्श दशाएँ कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा पश्चिमी तट पर गुजरात में; और पश्चिम बंगाल में सुंदर वन क्षेत्र में गंगा के डेल्टा में।
95भू-तापीय ऊर्जा की दो प्रायोगिक परियोजनाएँ कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: हिमाचल प्रदेश में मणिकरण के निकट पार्वती घाटी में और लद्दाख में पूगा घाटी में।
96सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता प्रयोग।
97ऊर्जा दक्षता के मामले में भारत की क्या स्थिति है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वर्तमान में भारत विश्व के अल्पतम ऊर्जादक्ष देशों में गिना जाता है।
98अध्याय का अंतिम संदेश क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: “ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है।”
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1खनिज क्या हैं? (अभ्यास प्रश्न 2-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर: भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है। खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं जिसमें कठोर हीरा व नरम चूना तक सम्मिलित हैं, और अब तक 2000 से अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है।
2खनिजों में इतनी विविधता क्यों होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एक खनिज विशेष जो निश्चित तत्त्वों का योग है, उन तत्त्वों का निर्माण उस समय के भौतिक व रासायनिक परिस्थितियों का परिणाम है। इसके फलस्वरूप ही खनिजों में विविध रंग, कठोरता, चमक, घनत्व तथा विविध क्रिस्टल पाए जाते हैं, और भू-वैज्ञानिक इन्हीं विशेषताओं के आधार पर उनका वर्गीकरण करते हैं।
3लौह और अलौह खनिज में अंतर बताइए। (अभ्यास प्रश्न 2-i-क)
उत्तर देखिए
उत्तर: लौह खनिज वे हैं जिनमें लोहे का अंश होता है, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल और कोबाल्ट; ये धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं। अलौह खनिजों में लोहे का अंश नहीं होता, जैसे ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना; भारत में इनकी संचित राशि व उत्पादन अधिक संतोषजनक नहीं है, फिर भी ये धातु शोधन, इंजीनियरिंग व विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
4आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है? (अभ्यास प्रश्न 2-iii)
उत्तर देखिए
उत्तर: इन चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं; छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बृहत् जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। इनका निर्माण उस समय होता है जब ये तरल अथवा गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं और ऊपर आते हुए ठंडे होकर जम जाते हैं; जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा इसी तरह प्राप्त होते हैं।
5अवसादी चट्टानों में खनिज कैसे बनते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अनेक खनिज अवसादी चट्टानों के संस्तरों या परतों में पाए जाते हैं, जिनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन व जमाव का परिणाम है; कोयला तथा कुछ लौह अयस्कों का निर्माण लंबी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है। दूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम सम्मिलित हैं, जिनका निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरूप होता है।
6‘प्लेसर निक्षेप’ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में कुछ खनिज पाए जाते हैं, जिन्हें ‘प्लेसर निक्षेप’ कहा जाता है। इनमें प्राय: ऐसे खनिज होते हैं जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते, जैसे सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम।
7रैट होल खनन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में अधिकांश खनिज राष्ट्रीयकृत हैं, किंतु उत्तर-पूर्वी भारत के जनजातीय क्षेत्रों में खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत व समुदायों को प्राप्त है; मेघालय के जोवाई व चेरापूँजी में कोयले का खनन परिवार के सदस्य द्वारा एक लंबी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है, जिसे रैट होल खनन कहते हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इन क्रियाकलापों को अवैध घोषित किया है और सलाह दी है कि इसे तुरंत रोक दिया जाना चाहिए।
8मैग्नेटाइट और हेमेटाइट में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: मैग्नेटाइट सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क है जिसमें 70 प्रतिशत लोहांश पाया जाता है, और इसमें सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण होते हैं जो विद्युत उद्योगों में विशेष रूप से उपयोगी हैं। हेमेटाइट सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है जिसका अधिकतम मात्रा में उपभोग हुआ है, किंतु इसमें लोहांश 50 से 60 प्रतिशत तक ही पाया जाता है।
9कुद्रेमुख की खानों के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: कर्नाटक में पश्चिमी घाट में अवस्थित कुद्रेमुख की खानें शत् प्रतिशत निर्यात इकाई हैं, और कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने जाते हैं। यहाँ का लौह अयस्क कर्दम (Slurry) रूप में पाइपलाइन द्वारा मंगलूरु के निकट एक पत्तन पर भेजा जाता है।
10मैंगनीज़ का क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मैंगनीज़ मुख्य रूप से इस्पात के विनिर्माण में प्रयोग किया जाता है; एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किग्रा. मैंगनीज़ की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ व पेंट बनाने में भी किया जाता है, और मध्य प्रदेश इसका सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है (33 प्रतिशत)।
11भारत में ताँबे की क्या स्थिति है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में ताँबे के भंडार व उत्पादन क्रांतिक रूप से न्यून हैं; घातवर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण इसका उपयोग मुख्यत: बिजली के तार बनाने, इलैक्ट्रोनिक्स और रसायन उद्योगों में किया जाता है। मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पन्न करती हैं, झारखंड का सिंहभूम ज़िला भी मुख्य उत्पादक है, और राजस्थान की खेतड़ी खदानें भी ताँबे के लिए प्रसिद्ध थीं।
12एल्यूमिनियम एक महत्त्वपूर्ण धातु क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एल्यूमिनियम एक महत्त्वपूर्ण धातु इसलिए है क्योंकि यह लोहे जैसी शक्ति के साथ-साथ अत्यधिक हल्का एवं सुचालक भी होता है। इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता (malleability) भी पाई जाती है, और यह सबसे अधिक बॉक्साइट नामक अयस्क से प्राप्त किया जाता है।
13अभ्रक विद्युत उद्योग में अपरिहार्य क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसकी सर्वोच्च परावैद्युत शक्ति, ऊर्जा ह्रास का निम्न गुणांक, विंसवाहन के गुण और उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता के कारण अभ्रक विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले अपरिहार्य खनिजों में से एक है। यह प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है और इसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं।
14भारत में अभ्रक की प्रमुख पेटियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अभ्रक के निक्षेप छोटानागपुर पठार के उत्तरी पठारी किनारों पर पाए जाते हैं, और बिहार-झारखंड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी अग्रणी उत्पादक है। राजस्थान के मुख्य अभ्रक उत्पादक क्षेत्र अजमेर के आस पास हैं, और आंध्र प्रदेश की नेल्लोर अभ्रक पेटी भी देश की महत्त्वपूर्ण उत्पादक पेटी है।
15चूना पत्थर का क्या महत्त्व है और कौन-सा राज्य अग्रणी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: चूना पत्थर कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैगनीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है और यह सीमेंट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल है तथा लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य है। चूना पत्थर उत्पादन में राजस्थान 22 प्रतिशत के साथ देश में पहले स्थान पर है, उसके बाद आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश (13-13 प्रतिशत) आते हैं।
16खनन के जोखिम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में साँस लेते हुए फेफड़ों संबंधी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं, और खदानों की छतों के गिरने, जलप्लावित होने तथा कोयले की खदानों में आग लगने जैसे ख़तरे उनके लिए स्थाई हैं। इसके अलावा खदान क्षेत्रों में जल स्रोत संदूषित हो जाते हैं तथा अवशिष्ट पदार्थों के खत्ता लगाने से भूमि व मिट्टी का अवक्षय होता है और नदियों का प्रदूषण बढ़ता है।
17हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है? (अभ्यास प्रश्न 2-iv)
उत्तर देखिए
उत्तर: खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि असार्थक अंश है, अर्थात् भू-पर्पटी का केवल एक प्रतिशत; और जिन खनिज संसाधनों के निर्माण व सांद्रण में लाखों वर्ष लगे हैं, हम उनका शीघ्रता से उपभोग कर रहे हैं। खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी हैं कि उनके वर्तमान उपभोग की दर की तुलना में उनके पुनर्भरण की दर अपरिमित रूप से थोड़ी है, इसीलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य हैं।
18परंपरागत तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा साधन में अंतर बताइए। (अभ्यास प्रश्न 2-i-ख)
उत्तर देखिए
उत्तर: परंपरागत साधनों में लकड़ी, उपले, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत (दोनों जल विद्युत व ताप विद्युत) सम्मिलित हैं; इनमें से अधिकतर जीवाश्मी ईंधन हैं जो सीमित हैं और गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न करते हैं। गैर-परंपरागत साधनों में सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा शामिल की जाती हैं; ये नवीकरणीय हैं और भारत धूप, जल तथा जीवभार साधनों में समृद्ध है।
19कोयले के चार प्रकार बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: दलदलों में क्षय होते पादपों से पीट उत्पन्न होता है, जिसमें कम कार्बन, नमी की उच्च मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है; लिग्नाइट एक निम्न कोटि का भूरा कोयला है जो मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त होता है। गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कहा जाता है जो वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय है, और एंथ्रेसाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है।
20गोंडवाना और टरशियरी कोयले में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: गोंडवाना कोयला 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक पुराना है और यह धातुशोधन कोयला है; इसके प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा झारखंड) में झरिया, रानीगंज और बोकारो में स्थित हैं। टरशियरी निक्षेप लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं और यह कोयला उत्तर-पूर्वी राज्यों — मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड — में पाया जाता है।
21भारी उद्योग कोयला क्षेत्रों के निकट क्यों स्थापित किए जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि कोयला स्थूल पदार्थ है, जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है। इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही स्थापित किये जाते हैं, ताकि परिवहन की लागत कम रहे।
22पेट्रोलियम किन शैल संरचनाओं में पाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में अधिकांश पेट्रोलियम की उपस्थिति टरशियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति व भ्रंश ट्रैप में पाई जाती है; तेल धारक परत संरंध्र चूना पत्थर या बालुपत्थर होता है जिसमें से तेल प्रवाहित हो सकता है। मध्यवर्ती असरंध्र परतें तेल को ऊपर उठने व नीचे रिसने से रोकती हैं, और प्राकृतिक गैस हल्की होने के कारण खनिज तेल के ऊपर पाई जाती है।
23एच.वी.जे. पाइपलाइन के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: गेल द्वारा निर्मित पहली 1,700 किलोमीटर लंबी हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एच.वी.जे.) क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन ने मुंबई हाई और बसीन गैस क्षेत्रों को पश्चिमी और उत्तरी भारत के उर्वरक, बिजली और औद्योगिक परिसरों से जोड़ा। कुल मिलाकर भारत के गैस बुनियादी ढाँचे का विस्तार 1700 किलोमीटर से बढ़कर 18500 किलोमीटर तक, यानी दस गुना से अधिक हो गया है और जल्द ही 34000 किलोमीटर से अधिक तक पहुँचने की सम्भावना है।
24परमाणु ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है और इसके खनिज कहाँ मिलते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है; जब ऐसा परिवर्तन किया जाता है तो ऊष्मा के रूप में काफ़ी ऊर्जा विमुक्त होती है और इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है। यूरेनियम और थोरियम, जो झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में पाए जाते हैं, इसके उत्पादन में प्रयोग किए जाते हैं; केरल में मिलने वाली मोनाजाइट रेत में भी थोरियम की मात्रा पाई जाती है।
25भारत में पवन ऊर्जा की स्थिति बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन की महान संभावनाएँ हैं और पवन ऊर्जा फार्म की विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरै तक अवस्थित है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र तथा लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म हैं, और नागरकोइल तथा जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।
26बायोगैस के क्या लाभ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जैविक पदार्थों के अपघटन से बायोगैस उत्पन्न होती है, जिसकी तापीय सक्षमता मिट्टी के तेल, उपलों व चारकोल की अपेक्षा अधिक होती है; पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले संयंत्र ‘गोबर गैस प्लांट’ कहलाते हैं। ये किसानों को दो प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं — एक ऊर्जा के रूप में और दूसरा उन्नत प्रकार के उर्वरक के रूप में; साथ ही यह उपलों तथा लकड़ी को जलाने से होने वाले वृक्षों के नुक़सान को रोकता है।
27ज्वारीय ऊर्जा कैसे उत्पन्न की जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सँकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़ द्वार बना कर बाँध बनाए जाते हैं; उच्च ज्वार में इस सँकरी खाड़ीनुमा प्रवेश द्वार से पानी भीतर भर जाता है और द्वार बन्द होने पर बाँध में ही रह जाता है। बाढ़ द्वार के बाहर ज्वार उतरने पर बाँध के पानी को इसी रास्ते पाइप द्वारा समुद्र की तरफ़ बहाया जाता है, जो इसे ऊर्जा उत्पादक टरबाइन की ओर ले जाता है।
28भू-तापीय ऊर्जा क्या है और भारत में इसकी परियोजनाएँ कहाँ हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पृथ्वी के आंतरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं; भूमिगत जल चट्टानों से ऊष्मा का अवशोषण कर इतना तप्त हो जाता है कि ऊपर उठने पर भाप में बदल जाता है, जिससे टरबाइन चलाई जाती है। भारत में इसके दोहन के लिए दो प्रायोगिक परियोजनाएँ शुरू की गई हैं — एक हिमाचल प्रदेश में मणिकरण के निकट पार्वती घाटी में और दूसरी लद्दाख में पूगा घाटी में।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1खनिजों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- सामान्य व वाणिज्यिक उद्देश्य हेतु खनिजों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है — धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिज।
- धात्विक खनिजों के तीन उपवर्ग हैं — लौह धातु (जिसमें लोहे का अंश हो), जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल व कोबाल्ट; अलौह, जैसे ताँबा, सीसा, जस्ता व बॉक्साइट; और बहुमूल्य खनिज, जैसे सोना, चाँदी व प्लेटिनम।
- अधात्विक खनिजों में अभ्रक, नमक, पोटाश, सल्फर, चूना पत्थर, संगमरमर तथा बलुआ पत्थर आते हैं; और ऊर्जा खनिजों में कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस सम्मिलित हैं।
2खनिज किन-किन तरीक़ों से प्राप्त होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं — छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बृहत् जमाव परत के रूप में; जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा इसी तरह प्राप्त होते हैं।
- अवसादी चट्टानों के संस्तरों या परतों में कोयला तथा कुछ लौह अयस्क मिलते हैं, और शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण से जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम बनते हैं; इसके अलावा धरातलीय चट्टानों के अपघटन से बॉक्साइट का निर्माण होता है।
- प्लेसर निक्षेपों में सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम मिलते हैं, जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते; और महासागरीय जल से नमक, मैगनीशियम तथा ब्रोमाइन प्राप्त होते हैं, जबकि महासागरीय तली मैंगनीज़ ग्रंथिकाओं में धनी है।
3भारत में लौह अयस्क की पेटियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ओडिशा-झारखंड पेटी — ओडिशा में उच्च कोटि का हेमेटाइट मयूरभंज व केंदुझर ज़िलों में बादाम पहाड़ खदानों से निकाला जाता है, और झारखंड के सिंहभूम ज़िले में गुआ तथा नोआमुंडी से हेमेटाइट अयस्क का खनन होता है।
- दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में है; छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में बेलाडिला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अति उत्तम कोटि का हेमेटाइट पाया जाता है जिसके 14 जमाव मिलते हैं और जिसे विशाखापट्टनम् पत्तन से जापान तथा दक्षिण कोरिया को निर्यात किया जाता है।
- बल्लारि-चित्रदुर्ग, चिक्कमंगलूरु-तुमकूरु पेटी कर्नाटक में है, जहाँ कुद्रेमुख की खानें शत् प्रतिशत निर्यात इकाई हैं और अयस्क कर्दम रूप में पाइपलाइन द्वारा मंगलूरु भेजा जाता है; और महाराष्ट्र-गोआ पेटी में यद्यपि लोहा उत्तम प्रकार का नहीं है तथापि इसका दक्षता से दोहन होता है और मरमागाओ पत्तन से निर्यात किया जाता है।
4खनन के जोखिमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में साँस लेते हुए फेफड़ों संबंधी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
- खदानों की छतों के गिरने, जलप्लावित होने और कोयले की खदानों में आग लगने आदि के ख़तरे खदान श्रमिकों के लिए स्थाई हैं।
- खदान क्षेत्रों में खनन के कारण जल स्रोत संदूषित हो जाते हैं, तथा अवशिष्ट पदार्थों और खनिज तरल के मलबे के खत्ता लगाने से भूमि व मिट्टी का अवक्षय होता है और सरिताओं तथा नदियों का प्रदूषण बढ़ता है। इसीलिए खनन को ‘घातक उद्योग’ बनने से रोकने के लिए दृढ़ सुरक्षा विनियम और पर्यावरणीय क़ानूनों का क्रियांवयन अनिवार्य है।
5खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता और उपाय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि असार्थक अंश है, अर्थात् भू-पर्पटी का केवल एक प्रतिशत; और जिन खनिज संसाधनों के निर्माण व सांद्रण में लाखों वर्ष लगे हैं, हम उनका शीघ्रता से उपभोग कर रहे हैं।
- खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी हैं कि पुनर्भरण की दर उपभोग की तुलना में अपरिमित रूप से थोड़ी है; इसीलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य हैं और अल्पजीवी हैं। साथ ही अयस्कों के सतत् उत्खनन से लागत बढ़ती है क्योंकि गहराई बढ़ने के साथ गुणवत्ता घटती जाती है।
- उपाय ये हैं कि निम्न कोटि के अयस्कों का कम लागत पर प्रयोग करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का सतत् विकास किया जाए; तथा धातुओं का पुन: चक्रण, रद्दी धातुओं का प्रयोग और अन्य प्रतिस्थापनों का उपयोग किया जाए।
6गैर-परंपरागत ऊर्जा साधनों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ऊर्जा के बढ़ते उपभोग ने देश को कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर कर दिया है।
- गैस व तेल की बढ़ती क़ीमतों तथा इनकी संभाव्य कमी ने भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितताएँ उत्पन्न कर दी हैं, जिसके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं।
- इसके अतिरिक्त जीवाश्मी ईंधनों का प्रयोग गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न करता है; अत: सौर, पवन, ज्वारीय, जैविक तथा अवशिष्ट पदार्थ जनित ऊर्जा के उपयोग की बहुत ज़रूरत है, और सौभाग्य से भारत धूप, जल तथा जीवभार साधनों में समृद्ध है।
7ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता और उपाय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक आधारभूत आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक सेक्टर — कृषि, उद्योग, परिवहन, वाणिज्य व घरेलू आवश्यकताओं — की पूर्ति के लिए ऊर्जा चाहिए।
- सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार हैं — ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता प्रयोग; और यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि वर्तमान में भारत विश्व के अल्पतम ऊर्जादक्ष देशों में गिना जाता है।
- एक जागरूक नागरिक के रूप में हम यातायात के लिए निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का उपयोग करके, जब प्रयोग न हो रही हो तो बिजली बंद करके, विद्युत बचत करने वाले उपकरणों के प्रयोग से तथा ग़ैर-पारंपरिक ऊर्जा साधनों के प्रयोग से अपना योगदान दे सकते हैं — क्योंकि आख़िरकार ‘ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है।’
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)
1भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 3-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत में कोयला बहुतायात में पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है, जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का महत्त्वपूर्ण भाग प्रदान करता है; भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यत: कोयले पर निर्भर है।
- कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक संपीडन से हुआ है, इसीलिए संपीडन की मात्रा, गहराई और दबने के समय के आधार पर यह चार रूपों में मिलता है — पीट (कम कार्बन, उच्च नमी), लिग्नाइट (निम्न कोटि का भूरा कोयला, तमिलनाडु के नैवेली में, विद्युत उत्पादन में प्रयुक्त), बिटुमिनस (वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय; उच्च श्रेणी का धातुशोधन और लोहे के प्रगलन में) और एंथ्रेसाइट (सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला)।
- भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों की शैल क्रम में पाया जाता है — गोंडवाना, जिसकी आयु 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक है, और टरशियरी निक्षेप, जो लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं।
- गोंडवाना कोयला, जो धातुशोधन कोयला है, के प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा झारखंड) में झरिया, रानीगंज और बोकारो में स्थित हैं; ये देश के सबसे महत्त्वपूर्ण कोयला क्षेत्र हैं।
- इसके अतिरिक्त गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं।
- टरशियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों — मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड — में पाया जाता है।
निष्कर्ष — यह स्मरण रहे कि कोयला स्थूल पदार्थ है, जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है; इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही स्थापित किये जाते हैं।
2भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों? (अभ्यास प्रश्न 3-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं और वर्ष भर पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है।
- फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है, इसलिए इसमें न ईंधन जलाना पड़ता है और न ही प्रदूषण होता है।
- भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है, और कुछ बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र देश के विभिन्न भागों में स्थापित किए जा रहे हैं।
- यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि ग्रामीण घरों में आवश्यक ऊर्जा का 70 प्रतिशत से अधिक लकड़ी और उपलों से प्राप्त होता है, और घटते वन क्षेत्र के कारण इनका उपयोग करते रहना कठिन होता जा रहा है।
- ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा, फलस्वरूप यह पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा।
- और साथ ही कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी, क्योंकि उपलों का उपभोग घटने से गोबर उर्वरक के रूप में खेतों में लौट सकेगा।
निष्कर्ष — चूँकि गैस व तेल की क़ीमतें बढ़ रही हैं, उनकी संभाव्य कमी है और जीवाश्मी ईंधन गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा करते हैं, इसलिए सौर जैसे नवीकरणीय साधन ही सतत् पोषणीय ऊर्जा का आधार हैं।
3भारत में खनिजों के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत अच्छे और विविध प्रकार के खनिज संसाधनों में सौभाग्यशाली है, यद्यपि इनका वितरण असमान है, और यह विभिन्नता खनिजों की रचना में अंतर्ग्रस्त भू-गर्भिक संरचना, प्रक्रियाओं और समय के कारण है।
- प्रायद्वीपीय चट्टानों में कोयले, धात्विक खनिज, अभ्रक व अन्य अनेक अधात्विक खनिजों के अधिकांश भंडार संचित हैं।
- प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी पार्श्वों पर गुजरात और असम की तलछटी चट्टानों में अधिकांश खनिज तेल निक्षेप पाए जाते हैं।
- प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते हैं — यही कारण है कि वहाँ ताँबा (खेतड़ी) और अभ्रक (अजमेर) जैसे खनिज मिलते हैं।
- इसके विपरीत उत्तरी भारत के विस्तृत जलोढ़ मैदान आर्थिक महत्त्व के खनिजों से लगभग विहीन हैं।
- यह भी स्मरण रखना चाहिए कि अयस्क में खनिज का सांद्रण, उत्खनन की सुगमता और बाज़ार की निकटता किसी संचय की आर्थिक जीव्यता को प्रभावित करते हैं; इनके अनुकूल होने पर ही एक खनिज ‘निक्षेप’ अथवा ‘भंडार’ खदान में परिवर्तित होता है।
निष्कर्ष — इसी असमान वितरण के कारण देश के कुछ क्षेत्र खनिज-समृद्ध हैं और कुछ पूरी तरह खनिज-विहीन।
4अलौह खनिजों — ताँबा और बॉक्साइट — का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत में अलौह खनिजों की संचित राशि व उत्पादन अधिक संतोषजनक नहीं है; यद्यपि ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना जैसे ये खनिज धातु शोधन, इंजीनियरिंग व विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ताँबे के भंडार व उत्पादन भारत में क्रांतिक रूप से न्यून हैं; घातवर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण इसका उपयोग मुख्यत: बिजली के तार बनाने, इलैक्ट्रोनिक्स और रसायन उद्योगों में होता है।
- मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पन्न करती हैं; झारखंड का सिंहभूम ज़िला भी मुख्य उत्पादक है, और राजस्थान की खेतड़ी खदानें भी ताँबे के लिए प्रसिद्ध थीं।
- बॉक्साइट से ही सबसे अधिक एल्यूमिना प्राप्त की जाती है; इसके निक्षेपों की रचना एल्यूमिनियम सीलिकेटों से समृद्ध चट्टानों के विघटन से होती है।
- एल्यूमिनियम एक महत्त्वपूर्ण धातु है क्योंकि यह लोहे जैसी शक्ति के साथ-साथ अत्यधिक हल्का एवं सुचालक है, और इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता भी पाई जाती है।
- भारत में बॉक्साइट के निक्षेप मुख्यत: अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियों तथा बिलासपुर-कटनी के पठारी प्रदेश में हैं; ओडिशा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य (65 प्रतिशत) है, जहाँ कोरापुट ज़िले में पंचपतमाली निक्षेप सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
5गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है, जिससे ऊष्मा के रूप में काफ़ी ऊर्जा विमुक्त होती है; यूरेनियम और थोरियम, जो झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में पाए जाते हैं, इसमें प्रयुक्त होते हैं, और केरल की मोनाजाइट रेत में भी थोरियम मिलता है।
- सौर ऊर्जा — भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ इसके दोहन की असीम संभावनाएँ हैं; फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में बदला जाता है और इससे ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता न्यूनतम की जा सकेगी।
- पवन ऊर्जा — इसकी विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरै तक अवस्थित है; आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र तथा लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण फार्म हैं, और नागरकोइल तथा जैसलमेर प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।
- बायोगैस — झाड़ियों, कृषि अपशिष्ट, पशुओं और मानव जनित अपशिष्ट के अपघटन से बनती है, जिसकी तापीय सक्षमता मिट्टी के तेल, उपलों व चारकोल से अधिक होती है; ‘गोबर गैस प्लांट’ किसानों को ऊर्जा और उन्नत उर्वरक — दोनों रूपों में लाभ पहुँचाते हैं।
- ज्वारीय ऊर्जा — सँकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़ द्वार वाला बाँध बनाकर ज्वार के पानी से टरबाइन चलाई जाती है; भारत में खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी और सुंदर वन क्षेत्र में आदर्श दशाएँ हैं।
- भू-तापीय ऊर्जा — पृथ्वी के आंतरिक भागों के ताप से भूमिगत जल तप्त होकर भाप बनता है जिससे टरबाइन चलती है; भारत में दो प्रायोगिक परियोजनाएँ हैं — पार्वती घाटी (हिमाचल प्रदेश) और पूगा घाटी (लद्दाख)।
निष्कर्ष — ये सभी साधन नवीकरणीय हैं और सतत् पोषणीय ऊर्जा का आधार बनते हैं।
भाग ङ — आरेख-आधारित प्रश्न
आरेख 1 — चित्र 5.3: मैंगनीज़ उत्पादन में राज्यों का अंश
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? | मध्य प्रदेश — 33 प्रतिशत। |
| दूसरे और तीसरे स्थान पर कौन हैं? | महाराष्ट्र (27%) और ओडिशा (16%)। |
| पहले तीन राज्यों का कुल कितना हिस्सा है? | लगभग 76 प्रतिशत। |
आरेख 2 — चित्र 5.5: बॉक्साइट उत्पादन में राज्यों का अंश
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| कौन-सा राज्य सबसे आगे है और कितना? | ओडिशा — 65 प्रतिशत। |
| इससे क्या निष्कर्ष निकलता है? | कि बॉक्साइट का उत्पादन एक ही राज्य में अत्यधिक केंद्रित है — अकेला ओडिशा दो-तिहाई देता है। |
| ओडिशा का सबसे महत्त्वपूर्ण निक्षेप कौन-सा है? | कोरापुट ज़िले में पंचपतमाली। |
आरेख 3 — चित्र 5.7: चूना पत्थर उत्पादन में राज्यों का अंश
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| कौन-सा राज्य पहले स्थान पर है? | राजस्थान — 22 प्रतिशत। |
| दूसरे स्थान पर कौन-से दो राज्य बराबर हैं? | आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश — दोनों 13-13 प्रतिशत। |
| इस आँकड़े का राजस्थान के लिए क्या महत्त्व है? | चूँकि चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का आधारभूत कच्चा माल है, इसीलिए राजस्थान में सीमेंट उद्योग बहुत विकसित है। |
आरेख 4 — चित्र 5.1: खनिजों का वर्गीकरण
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| खनिजों के तीन मुख्य वर्ग बताइए। | धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिज। |
| धात्विक के तीन उपवर्ग और एक-एक उदाहरण दीजिए। | लौह धातु (लौह अयस्क), अलौह (ताँबा), बहुमूल्य (सोना)। |
| अधात्विक और ऊर्जा खनिजों के दो-दो उदाहरण दीजिए। | अधात्विक — अभ्रक, चूना पत्थर; ऊर्जा — कोयला, पेट्रोलियम। |
भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं
इस अध्याय से मानचित्र में खनिज क्षेत्र, कोयला-तेल क्षेत्र और ऊर्जा संयंत्र पूछे जाते हैं। पाठ्यपुस्तक में तीन मानचित्र हैं — पृष्ठ 46, 51 और 53।
1. महत्त्वपूर्ण खनिज (पृष्ठ 46 का मानचित्र)
| खनिज | मानचित्र पर कौन-से स्थान |
|---|---|
| लौह अयस्क खानें | मयूरभंज · केंदुझर · गुआ · बेलाडिला · बल्लारि · चित्रदुर्ग · कुद्रेमुख · चिक्कमंगलूरु · रत्नागिरि |
| लौह अयस्क निर्यातक पत्तन | पारादीप · विशाखापट्टनम · मरमागाओ · मंगलूरु |
| मैंगनीज़ | बालाघाट · नागपुर · भंडारा · सुंदरगढ़ · कोरापुट · शिवमोग्गा · तुमकूरु |
| बॉक्साइट | कटनी · अमरकंटक · बिलासपुर · मैकाल पहाड़ियाँ |
| ★अभ्रक | अजमेर और बेवर (राजस्थान) · गया और हजारीबाग (झारखंड) · नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) |
2. परंपरागत ऊर्जा स्रोत (पृष्ठ 51 का मानचित्र)
| प्रकार | स्थान |
|---|---|
| कोयला खानें/क्षेत्र | झरिया · रानीगंज · बोकारो · सिंगरौली · कोरबा · तलचर · नेवेली · सिंगरेनी |
| तेल क्षेत्र | मुंबई हाई · बसीन · अंकलेश्वर · कलोल · वडोदरा · डिगबोई · नहरकटिया · मोरन · सिबसागर |
| एच.वी.जे. गैस पाइपलाइन | हजीरा → विजयपुर → जगदीशपुर |
3. ऊर्जा संयंत्र (पृष्ठ 53 का मानचित्र)
| प्रकार | स्थान |
|---|---|
| आणविक (परमाणु) संयंत्र — छह | नरोरा (उ.प्र.) · रावतभाटा (राजस्थान) · काकरापार (गुजरात) · तारापुर (महाराष्ट्र) · कैगा (कर्नाटक) · कलपक्कम (तमिलनाडु) |
| तापीय संयंत्र (कुछ प्रमुख) | सिंगरौली · कोरबा · तलचर · चंद्रपुर · रामागुंडम · नेवेली · तूतीकोरिन · फ़रीदाबाद |
4. राजस्थान से जुड़े स्थान (RBSE के लिए अनिवार्य)★
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| खेतड़ी | ताँबे की प्रसिद्ध खदानें |
| अजमेर और बेवर | अभ्रक उत्पादक क्षेत्र |
| अरावली पर्वत श्रृंखला | यूरेनियम और थोरियम |
| रावतभाटा | परमाणु ऊर्जा संयंत्र |
| जैसलमेर | पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध |
5. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न
| प्रश्न | अंक |
|---|---|
| भारत के दिए गए रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित अंकित कीजिए — (क) बेलाडिला (ख) कुद्रेमुख (ग) खेतड़ी। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर झरिया, बोकारो और नेवेली कोयला क्षेत्र दिखाइए। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र अंकित कीजिए और उनके राज्यों के नाम लिखिए। | 3 |
★सबसे आसान तरीक़ा — लौह अयस्क = पूर्व-मध्य-दक्षिण · कोयला = पूर्व (दामोदर घाटी) · तेल = पश्चिम (मुंबई हाई-गुजरात) और पूर्वोत्तर (असम) · परमाणु = बिखरे हुए · पवन = दक्षिण (नागरकोइल) और पश्चिम (जैसलमेर)।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | मैग्नेटाइट में कितना लोहांश होता है? | 1 |
| 2 | ताँबे के लिए राजस्थान की कौन-सी खदानें प्रसिद्ध थीं? | 1 |
| 3 | यूरेनियम और थोरियम कहाँ पाए जाते हैं? | 1 |
| 4 | खनिज क्या हैं? | 2 |
| 5 | लौह और अलौह खनिज में अंतर बताइए। | 2 |
| 6 | खनिजों का वर्गीकरण कीजिए। | 3 |
| 7 | भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर बेलाडिला, कुद्रेमुख और खेतड़ी अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | चूना पत्थर उत्पादन में कौन-सा राज्य पहले स्थान पर है? | 1 |
| 2 | ‘रैट होल खनन’ क्या है? | 1 |
| 3 | पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए कौन-से दो स्थान प्रसिद्ध हैं? | 1 |
| 4 | आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है? | 2 |
| 5 | अभ्रक विद्युत उद्योग में अपरिहार्य क्यों है? | 2 |
| 6 | खनन के जोखिमों का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | गोंडवाना कोयले की आयु कितनी है? | 1 |
| 2 | भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य कौन-सा है? | 1 |
| 3 | एक टन इस्पात बनाने में कितना मैंगनीज़ लगता है? | 1 |
| 4 | परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा साधनों में अंतर बताइए। | 2 |
| 5 | हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है? | 2 |
| 6 | भारत में लौह अयस्क की पेटियों का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर झरिया, मुंबई हाई और डिगबोई अंकित कीजिए। | 5 |
अंतिम सलाह। यह अध्याय लंबा है, पर इसमें सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं — 1. हर खनिज की तीन बातें — वर्ग, उपयोग और प्रमुख राज्य। 2. प्रतिशत के आँकड़े — विशेषकर 33% (मैंगनीज़), 65% (बॉक्साइट) और 22% (चूना पत्थर — राजस्थान)। 3. मानचित्र — जिसमें राजस्थान के पाँच स्थान (खेतड़ी, अजमेर, अरावली, रावतभाटा, जैसलमेर) ज़रूर याद रखिए।