इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | उत्तर की लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर लिखिए, भूमिका मत बाँधिए |
| 2 अंक | लगभग 30 से 40 शब्द, या 2 बिंदु | पहले एक वाक्य में उत्तर, फिर एक वाक्य में कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | लगभग 60 से 80 शब्द, या 3 बिंदु | तीन अलग-अलग बातें लिखिए; हर बात पूरे वाक्य में |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द, या 5 बिंदु | एक वाक्य की भूमिका, फिर पाँच बिंदु, फिर एक वाक्य का निष्कर्ष |
| मानचित्र | केवल सही जगह पर सही चिह्न | नाम साफ़ लिखिए और चिह्न बनाइए |
भूगोल के लिए तीन विशेष सलाह — 1. हर बड़े उत्तर में कम से कम एक आँकड़ा और एक राज्य का नाम ज़रूर लिखिए। भूगोल में यही अंक दिलाता है। 2. जहाँ ‘वर्णन कीजिए’ पूछा जाए, वहाँ कहाँ · कितना · क्यों — तीनों बताइए। 3. मानचित्र-कार्य को आख़िरी दिन के लिए मत छोड़िए। यह 5 अंक का पक्का हिस्सा है और सबसे आसान भी।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध प्रत्येक वह वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सके, जिसको बनाने के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध हो, जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य हो।
2संसाधन के रूप में किसी वस्तु के लिए चार शर्तें कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वह आवश्यकता पूरी करे, उसे बनाने की प्रौद्योगिकी उपलब्ध हो, वह आर्थिक रूप से संभाव्य हो, और सांस्कृतिक रूप से मान्य हो।
3“संसाधन प्रकृति का उपहार हैं” — क्या यह कथन सही है?
उत्तर देखिए
उत्तर: नहीं, पाठ्यपुस्तक के अनुसार संसाधन प्रकृति का उपहार नहीं बल्कि मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं।
4चित्र 1.1 के अनुसार वस्तुओं की रूपांतरण प्रक्रिया किन तीन चीज़ों के पारस्परिक संबंध में निहित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रकृति (भौतिक पर्यावरण), प्रौद्योगिकी और संस्थाओं के।
5संसाधनों के वर्गीकरण के चार आधार कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: उत्पत्ति, समाप्यता, स्वामित्व और विकास का स्तर।
6उत्पत्ति के आधार पर संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: दो प्रकार के — जैव और अजैव।
7जैव संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे संसाधन जिनकी उत्पत्ति जीवमंडल से होती है और जिनमें जीवन है — जैसे मनुष्य, वनस्पति जगत, प्राणी जगत, मत्स्य जीवन और पशुधन।
8अजैव संसाधन के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: चट्टानें और धातुएँ।
9नवीकरण योग्य संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा दोबारा उत्पन्न किया जा सकता है — जैसे सौर और पवन ऊर्जा, जल, वन और वन्य जीवन।
10अनवीकरण योग्य संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे संसाधन जिनका विकास एक लंबे भूगर्भीय अंतराल में होता है और जो एक बार समाप्त होने पर दोबारा नहीं बनते — जैसे खनिज और जीवाश्म ईंधन।
11नवीकरण योग्य संसाधनों के दो उपवर्ग कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सतत् अथवा प्रवाह (जैसे पवन और जल) तथा जैव (जैसे प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव)।
12‘पुन: चक्रीय’ अनवीकरण योग्य संसाधन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: धातु।
13‘अचक्रीय’ अनवीकरण योग्य संसाधन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: जीवाश्म ईंधन।
14स्वामित्व के आधार पर संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: चार प्रकार के — व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय।
15सामुदायिक संसाधन के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: गाँव की चरागाह और तालाब, तथा शहरों के सार्वजनिक पार्क, पिकनिक स्थल और खेल के मैदान।
16राष्ट्रीय संसाधनों में तट रेखा से कितनी दूरी तक का महासागरीय क्षेत्र शामिल है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 12 समुद्री मील तक।
17अंतर्राष्ट्रीय संसाधन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: तट रेखा से 200 समुद्री मील की दूरी से परे खुले महासागरीय संसाधन, जिनका नियमन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ करती हैं।
18विकास के स्तर के आधार पर संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: चार प्रकार के — संभावी, विकसित, भंडार और संचित कोष।
19संभावी संसाधन का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान और गुजरात में पवन तथा सौर ऊर्जा, जिनका अभी पूरा विकास नहीं हुआ है।
20‘भंडार’ का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पानी में मौजूद हाइड्रोजन, जो ऊर्जा का समृद्ध स्रोत है पर जिसके उपयोग की तकनीक अभी विकसित नहीं है।
21‘संचित कोष’ का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बाँधों में जमा जल, जिससे विद्युत बनाई जा सकती है और जिसका उपयोग भविष्य में किया जा सकता है।
22संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से पैदा हुई तीन समस्याएँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: संसाधनों का ह्रास, समाज का अमीर और गरीब में बँटवारा, तथा वैश्विक पारिस्थितिकी संकट।
23वैश्विक पारिस्थितिकी संकट के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भूमंडलीय तापन, ओज़ोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण।
24सतत् पोषणीय विकास का अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ऐसा विकास जो पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए हो और जिसकी वर्तमान प्रक्रिया भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता की अवहेलना न करे।
25रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: जून 1992 में ब्राज़ील के शहर रियो डी जेनेरो में।
26रियो सम्मेलन में कितने राष्ट्राध्यक्ष एकत्रित हुए थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: 100 से भी अधिक।
27रियो सम्मेलन में किन दो विषयों पर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर हुए?
उत्तर देखिए
उत्तर: भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन और जैविक विविधता पर।
28रियो सम्मेलन में किन सिद्धांतों पर सहमति जताई गई?
उत्तर देखिए
उत्तर: भूमंडलीय वन सिद्धांतों (Forest Principles) पर।
29एजेंडा 21 क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1992 में रियो डी जेनेरो में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) के तत्वाधान में स्वीकृत वह कार्यसूची, जिसका उद्देश्य विश्व सहयोग द्वारा पर्यावरणीय क्षति, ग़रीबी और रोगों से निपटना है।
30एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे।
31संसाधन नियोजन के तीन सोपान कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: संसाधनों की पहचान और तालिका बनाना; उपयुक्त प्रौद्योगिकी, कौशल तथा संस्थागत ढाँचा तैयार करना; और संसाधन विकास योजनाओं का राष्ट्रीय विकास योजना से समन्वय करना।
32भारत में संसाधन नियोजन के प्रयास कब से शुरू हुए?
उत्तर देखिए
उत्तर: स्वाधीनता के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही।
33किन तीन राज्यों में खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।
34अरुणाचल प्रदेश में किस संसाधन की प्रचुरता है और किसकी कमी?
उत्तर देखिए
उत्तर: वहाँ जल संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, परंतु मूल विकास की कमी है।
35राजस्थान में किन संसाधनों की बहुतायत है और किसकी कमी?
उत्तर देखिए
उत्तर: पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत है, लेकिन जल संसाधनों की कमी है।
36लद्दाख की क्या विशेषता और क्या कमी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह प्रदेश सांस्कृतिक विरासत का धनी है, परंतु यहाँ जल, आधारभूत अवसंरचना तथा कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों की कमी है और यह शीत मरुस्थल देश के अन्य भागों से अलग-थलग पड़ता है।
37गांधी जी ने संसाधन संरक्षण पर क्या कहा था?
उत्तर देखिए
उत्तर: “हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं।”
38गांधी जी के अनुसार संसाधन ह्रास के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लालची और स्वार्थी व्यक्ति तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की शोषणात्मक प्रवृत्ति।
39गांधी जी किस तरह के उत्पादन के पक्षधर थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे अत्यधिक उत्पादन के विरुद्ध थे और उसके स्थान पर अधिक बड़े जनसमुदाय द्वारा उत्पादन के पक्षधर थे।
40संसाधन संरक्षण की वकालत सबसे पहले किसने और कब की?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्लब ऑफ़ रोम ने 1968 में।
41‘स्माल इज़ ब्यूटीफुल’ किसकी पुस्तक है और कब आई?
उत्तर देखिए
उत्तर: शुमेसर की, 1974 में।
42सतत् पोषणीय विकास की संकल्पना किस रिपोर्ट ने प्रस्तुत की?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड आयोग रिपोर्ट ने।
43ब्रुन्ड्टलैंड रिपोर्ट बाद में किस शीर्षक से पुस्तक के रूप में छपी?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘हमारा साझा भविष्य’ (Our Common Future)।
44भारत में मैदान, पर्वत और पठार कितने प्रतिशत क्षेत्र में हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मैदान लगभग 43 प्रतिशत, पर्वत 30 प्रतिशत और पठार लगभग 27 प्रतिशत।
45भारत के पठारी क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस क्षेत्र में खनिजों, जीवाश्म ईंधन और वनों का अपार संचय कोष है।
46भारत के पर्वतीय क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे कुछ बारहमासी नदियों के प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं, पर्यटन विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं और पारिस्थितिकी के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
47भू-उपयोग की पाँच श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वन; कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि; परती भूमि के अतिरिक्त अन्य कृषि अयोग्य भूमि; परती भूमि; और शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र।
48‘वर्तमान परती’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वह भूमि जहाँ एक कृषि वर्ष या उससे कम समय से खेती न की गई हो।
49‘पुरातन परती’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वह परती भूमि जहाँ 1 से 5 कृषि वर्ष से खेती न की गई हो।
50‘कृषि योग्य बंजर भूमि’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वह भूमि जहाँ पाँच से अधिक वर्षों से खेती न की गई हो।
51शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वह भूमि जिस पर फ़सलें उगाई व काटी जाती हैं।
52सकल कृषित क्षेत्र क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र और एक कृषि वर्ष में एक बार से अधिक बोया गया क्षेत्र मिलाकर सकल कृषित क्षेत्र कहलाता है।
53भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 32.8 लाख वर्ग किमी.।
54भारत के कितने प्रतिशत भाग के भू-उपयोग आँकड़े उपलब्ध हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: केवल 93 प्रतिशत भाग के।
55भू-उपयोग को निर्धारित करने वाले भौतिक कारक कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: भू-आकृति, जलवायु और मृदा के प्रकार।
56भू-उपयोग को निर्धारित करने वाले मानवीय कारक कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जनसंख्या घनत्व, प्रौद्योगिक क्षमता, संस्कृति और परंपराएँ।
57भारत के कुल सूचित क्षेत्र के कितने हिस्से पर खेती हो सकती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 54 प्रतिशत हिस्से पर।
58किन दो राज्यों में 80 प्रतिशत भूमि पर खेती होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पंजाब और हरियाणा में।
59किन क्षेत्रों में 10 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र बोया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में।
60राष्ट्रीय वन नीति कब बनी और उसमें कितना वन क्षेत्र वांछित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1952 में; उसमें 33 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वनों के अंतर्गत वांछित है।
61राष्ट्रीय वन नीति द्वारा निर्धारित सीमा क्यों आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए।
62बंजर भूमि में क्या-क्या शामिल है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहाड़ी चट्टानें, सूखी और मरुस्थलीय भूमि।
63गैर-कृषि प्रयोजनों में लगाई गई भूमि में क्या आता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बस्तियाँ, सड़कें, रेल लाइन और उद्योग इत्यादि।
64हम अपनी मूल आवश्यकताओं का कितना भाग भूमि से प्राप्त करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: भोजन, मकान और कपड़े की मूल आवश्यकताओं का 95 प्रतिशत भाग।
65भारत में कितनी भूमि निम्नीकृत है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर।
66निम्नीकृत भूमि में जल अपरदित क्षेत्र कितना है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 56 प्रतिशत।
67निम्नीकृत भूमि का कितना भाग वनों के अंतर्गत अपरदित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 28 प्रतिशत।
68किन राज्यों में खनन भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है?
उत्तर देखिए
उत्तर: झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में।
69किन राज्यों में अति पशुचारण भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है?
उत्तर देखिए
उत्तर: गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में।
70किन राज्यों में अधिक सिंचाई भूमि निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
71जलाक्रांतता से मृदा में क्या बढ़ जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लवणीयता और क्षारीयता।
72किन दो उद्योगों की धूल से मृदा की जल सोखने की प्रक्रिया अवरुद्ध होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सीमेंट उद्योग (चूना पत्थर पीसने से) और मृदा बर्तन उद्योग (खड़िया मृदा तथा सेलखड़ी के प्रयोग से)।
73मृदा किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह सबसे महत्त्वपूर्ण नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधन है।
74कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में कितना समय लगता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लाखों वर्ष।
75मृदा बनने के पाँच मुख्य कारक कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: उच्चावच, जनक शैल अथवा संस्तर शैल, जलवायु, वनस्पति व अन्य जैव पदार्थ, और समय।
76मृदा किन दो प्रकार के पदार्थों से बनती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जैव (ह्यूमस) और अजैव दोनों प्रकार के पदार्थों से।
77मृदा परिच्छेदिका की सबसे ऊपरी परत कौन-सी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ऊपरी संस्तर की मृदा।
78भारत में मृदा कितने प्रकार की है?
उत्तर देखिए
उत्तर: छह — जलोढ़, काली, लाल और पीली, लेटराइट, मरुस्थली तथा वन मृदा।
79संपूर्ण उत्तरी मैदान किस मृदा से बना है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जलोढ़ मृदा से।
80जलोढ़ मृदा किन तीन नदी तंत्रों के निक्षेपों से बनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों के।
81पूर्वी तट के किन नदी डेल्टाओं में जलोढ़ मृदा मिलती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टों में।
82जलोढ़ मृदा में कौन-से तीन कण पाए जाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: रेत, सिल्ट और मृत्तिका।
83बांगर और खादर में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बांगर पुराना जलोढ़ है जिसमें ‘कंकर’ ग्रंथियों की मात्रा ज़्यादा होती है, जबकि खादर नया जलोढ़ है जिसमें ज़्यादा महीन कण पाए जाते हैं।
84जलोढ़ मृदा किन पोषक तत्त्वों से युक्त होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पोटाश, फास्फोरस और चूने से।
85जलोढ़ मृदा किन फ़सलों के लिए उपयुक्त है?
उत्तर देखिए
उत्तर: गन्ना, चावल, गेहूँ, अन्य अनाजों और दलहन फ़सलों के लिए।
86मोटे कण वाली जलोढ़ मृदाएँ किन क्षेत्रों में मिलती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पर्वतों की तलहटी पर बने मैदानों जैसे द्वार, ‘चो’ क्षेत्र और तराई में।
87काली मृदा के दो अन्य नाम क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘रेगर’ मृदा और ‘काली कपास मृदा’।
88काली मृदा किन जनक शैलों से बनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लावा जनक शैलों से; यह दक्कन पठार के बेसाल्ट क्षेत्र में पाई जाती है।
89काली मृदा की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है।
90काली मृदा किन तत्त्वों से परिपूर्ण है और किसकी कमी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूने से परिपूर्ण है, परंतु इसमें फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
91काली मृदा की जुताई मानसून की पहली बौछार से ही क्यों शुरू कर दी जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि गीली होने पर यह मृदा चिपचिपी हो जाती है और इसे जोतना मुश्किल हो जाता है।
92गर्म और शुष्क मौसम में काली मृदा में क्या होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे इसमें अच्छी तरह वायु मिश्रण हो जाता है।
93लाल मृदा का रंग लाल क्यों होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: रवेदार आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु के प्रसार के कारण।
94लाल मृदा का रंग कहीं-कहीं पीला क्यों हो जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जलयोजन के कारण।
95‘लेटराइट’ शब्द कहाँ से आया है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ग्रीक भाषा के शब्द ‘लेटर’ (Later) से, जिसका अर्थ है ईंट।
96लेटराइट मृदा किसका परिणाम है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारी वर्षा से होने वाले अत्यधिक निक्षालन (leaching) का।
97लेटराइट मृदा की अम्लीयता कितनी होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: pH 6.0 से कम।
98लेटराइट मृदा पर कौन-सी फ़सलें उगाई जाती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में चाय तथा कॉफ़ी; और तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा केरल की लाल लेटराइट मृदाओं पर काजू।
99मरुस्थली मृदा का रंग कैसा होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लाल और भूरा।
100मरुस्थली मृदा में ह्यूमस और नमी कम क्यों होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: शुष्क जलवायु और उच्च तापमान के कारण वहाँ वाष्पीकरण दर अधिक होती है।
101मरुस्थली मृदा में जल अंत:स्यंदन क्यों अवरुद्ध हो जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि मृदा की नीचे की परतों में चूने के कंकर की सतह पाई जाती है।
102मरुस्थली मृदा को कृषि योग्य कैसे बनाया जा रहा है और कहाँ?
उत्तर देखिए
उत्तर: सही तरीक़े से सिंचाई करके; जैसा कि पश्चिमी राजस्थान में हो रहा है।
103वन मृदा कहाँ पाई जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में, जहाँ पर्याप्त वर्षा-वन उपलब्ध हैं।
104हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों की वन मृदा कैसी होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इनका बहुत अपरदन होता है और ये अधिसिलिक (acidic) तथा ह्यूमस रहित होती हैं।
105वन मृदा कहाँ सबसे उपजाऊ होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: नदी घाटियों के निचले क्षेत्रों में, विशेषकर नदी सोपानों और जलोढ़ पंखों में।
106मृदा अपरदन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मृदा के कटाव और उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहा जाता है।
107कौन-सी मानवीय क्रियाएँ मृदा अपरदन बढ़ाती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वनोन्मूलन, अति पशुचारण, निर्माण और खनन।
108कौन-से प्राकृतिक तत्त्व मृदा अपरदन करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पवन, हिमनदी और जल।
109अवनलिकाएँ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: बहते जल द्वारा मृत्तिकायुक्त मृदाओं को काटते हुए बनाई गई गहरी वाहिकाएँ।
110उत्खात भूमि (bad land) किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अवनलिकाओं से कटी वह भूमि जो जोतने योग्य नहीं रहती।
111चंबल बेसिन में उत्खात भूमि को क्या कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: खड्ड (ravine) भूमि।
112चादर अपरदन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जब जल विस्तृत क्षेत्र को ढके हुए ढाल के साथ नीचे बहता है और उस क्षेत्र की ऊपरी मृदा घुलकर जल के साथ बह जाती है, तो इसे चादर अपरदन कहते हैं।
113पवन अपरदन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पवन द्वारा मैदान अथवा ढालू क्षेत्र से मृदा को उड़ा ले जाने की प्रक्रिया।
114समोच्च जुताई क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ढाल वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के समानांतर हल चलाना, जिससे ढाल के साथ जल बहाव की गति घटती है।
115सोपान कृषि कहाँ काफ़ी विकसित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पश्चिमी और मध्य हिमालय में।
116पट्टी कृषि क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बड़े खेतों को पट्टियों में बाँटकर फ़सलों के बीच घास की पट्टियाँ उगाना, जो पवनों द्वारा जनित बल को कमज़ोर करती हैं।
117रक्षक मेखला क्या है और उसका क्या योगदान रहा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पेड़ों को कतारों में लगाकर बनाई गई पट्टी, जो पवनों की गति कम करती है; इसका पश्चिम भारत में रेत के टीलों के स्थायीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
118शुष्क क्षेत्रों में रेतीले टीलों को कैसे स्थिर बनाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: उन पर काँटेदार झाड़ियाँ लगाकर।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1संसाधन की परिभाषा दीजिए और उसकी शर्तें बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध प्रत्येक वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रयुक्त की जा सकती है और जिसको बनाने के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य है, एक संसाधन है। इस प्रकार किसी वस्तु के संसाधन बनने के लिए चार शर्तें हैं — वह आवश्यकता पूरी करे, प्रौद्योगिकी उपलब्ध हो, वह आर्थिक रूप से संभाव्य हो और सांस्कृतिक रूप से मान्य हो।
2“संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं” — इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पाठ्यपुस्तक के अनुसार संसाधनों को प्राकृतिक उपहार समझना ग़लत है, क्योंकि मानव स्वयं संसाधनों का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे पर्यावरण में पाए जाने वाले पदार्थों को संसाधनों में परिवर्तित करते हैं तथा उन्हें प्रयोग करते हैं; जैसे राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा हमेशा से थी, पर वह तभी संसाधन बनी जब उसका उपयोग करने की तकनीक आई।
3चित्र 1.1 के अनुसार संसाधन बनने की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पर्यावरण में उपलब्ध वस्तुओं की रूपांतरण प्रक्रिया प्रकृति, प्रौद्योगिकी और संस्थाओं के पारस्परिक क्रियात्मक संबंध में निहित है। मानव प्रौद्योगिकी द्वारा प्रकृति के साथ क्रिया करते हैं और अपने आर्थिक विकास की गति को तेज़ करने के लिए संस्थाओं का निर्माण करते हैं।
4जैव और अजैव संसाधनों में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: जैव संसाधन वे हैं जिनकी उत्पत्ति जीवमंडल से होती है और जिनमें जीवन है, जैसे मनुष्य, वनस्पति जगत, प्राणी जगत, मत्स्य जीवन और पशुधन। इसके विपरीत अजैव संसाधन वे सभी वस्तुएँ हैं जो निर्जीव पदार्थों से बनी हैं, जैसे चट्टानें और धातुएँ।
5नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य संसाधनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: नवीकरण योग्य संसाधन वे हैं जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा दोबारा उत्पन्न किया जा सकता है, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, जल, वन और वन्य जीवन। अनवीकरण योग्य संसाधनों का विकास एक लंबे भूगर्भीय अंतराल में होता है, इसलिए वे एक बार समाप्त होने पर दोबारा नहीं बनते, जैसे खनिज और जीवाश्म ईंधन।
6‘पुन: चक्रीय’ और ‘अचक्रीय’ संसाधनों में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पुन: चक्रीय संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे धातुओं को गलाकर फिर से उपयोग में लाया जा सकता है। अचक्रीय संसाधन एक बार उपयोग होने पर समाप्त हो जाते हैं और दोबारा इस्तेमाल नहीं किए जा सकते, जैसे जीवाश्म ईंधन।
7राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संसाधनों में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: राष्ट्रीय संसाधन वे सभी संसाधन हैं जो देश की सीमा के भीतर हैं और जिन पर देश का अधिकार है; इनमें तट रेखा से 12 समुद्री मील तक का महासागरीय क्षेत्र भी शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय संसाधन वे हैं जिनका नियमन कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ करती हैं, जैसे तट रेखा से 200 समुद्री मील से परे खुले महासागरीय संसाधन, जिन्हें किसी देश की अनुमति के बिना कोई उपयोग नहीं कर सकता।
8‘भंडार’ और ‘संचित कोष’ में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भंडार वे पदार्थ हैं जो मानव आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं, पर उपयुक्त प्रौद्योगिकी न होने के कारण अभी उपयोग में नहीं हैं — जैसे पानी में मौजूद हाइड्रोजन। संचित कोष भंडार का वह हिस्सा है जिसे उपलब्ध तकनीकी ज्ञान से इस्तेमाल किया जा सकता है, पर अभी उसका उपयोग शुरू नहीं हुआ — जैसे बाँधों में जमा जल।
9संभावी संसाधन क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: संभावी संसाधन वे संसाधन हैं जो किसी प्रदेश में मौजूद हैं, परंतु उनका उपयोग अभी नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए राजस्थान और गुजरात में पवन तथा सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं, पर उनका पूरा विकास अभी नहीं हुआ है।
10संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से कौन-सी तीन समस्याएँ पैदा हुई हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहली, कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का ह्रास हुआ है; दूसरी, संसाधन समाज के कुछ ही लोगों के हाथ में आ गए, जिससे समाज संसाधन संपन्न और संसाधनहीन अर्थात् अमीर और गरीब में बँट गया। तीसरी, संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गया है, जैसे भूमंडलीय तापन, ओज़ोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण।
11सतत् पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सतत् पोषणीय आर्थिक विकास का अर्थ है कि विकास पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए हो। और यह भी कि वर्तमान विकास की प्रक्रिया भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता की अवहेलना न करे।
12रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: जून 1992 में 100 से भी अधिक राष्ट्राध्यक्ष ब्राज़ील के शहर रियो डी जेनेरो में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन में एकत्रित हुए, जिसका आयोजन विश्व स्तर पर उभरते पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास की समस्याओं का हल ढूँढ़ने के लिए किया गया था। इसमें भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन और जैविक विविधता पर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर हुए, भूमंडलीय वन सिद्धांतों पर सहमति जताई गई तथा एजेंडा 21 को स्वीकृति दी गई।
13एजेंडा 21 क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एजेंडा 21 वह घोषणा है जिसे 1992 में रियो डी जेनेरो में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) के तत्वाधान में राष्ट्राध्यक्षों द्वारा स्वीकार किया गया; इसका उद्देश्य भूमंडलीय सतत् पोषणीय विकास हासिल करना है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे।
14भारत में संसाधन नियोजन क्यों आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में संसाधनों की उपलब्धता में बहुत अधिक विविधता है — यहाँ ऐसे प्रदेश भी हैं जहाँ एक तरह के संसाधनों की प्रचुरता है परंतु दूसरी तरह के संसाधनों की कमी है। कुछ प्रदेश संसाधनों की उपलब्धता में आत्मनिर्भर हैं और कुछ में महत्त्वपूर्ण संसाधनों की अत्यधिक कमी है, इसलिए राष्ट्रीय, प्रांतीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर संतुलित संसाधन नियोजन आवश्यक है।
15संसाधन नियोजन के तीन सोपान लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पहला, देश के विभिन्न प्रदेशों में संसाधनों की पहचान कर उनकी तालिका बनाना, जिसमें क्षेत्रीय सर्वेक्षण, मानचित्र बनाना और संसाधनों का गुणात्मक एवं मात्रात्मक अनुमान लगाना व मापन करना शामिल है। दूसरा, संसाधन विकास योजनाएँ लागू करने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी, कौशल और संस्थागत नियोजन ढाँचा तैयार करना; और तीसरा, संसाधन विकास योजनाओं और राष्ट्रीय विकास योजना में समन्वय स्थापित करना।
16राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश के संसाधनों की तुलना कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत है, लेकिन वहाँ जल संसाधनों की कमी है। इसके विपरीत अरुणाचल प्रदेश में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, परंतु वहाँ मूल विकास की कमी है।
17“मात्र संसाधनों की उपलब्धता से विकास संभव नहीं है” — क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि प्रौद्योगिकी और संस्थाओं में तदनुरूपी परिवर्तनों के अभाव में केवल संसाधन होने से विकास नहीं होता; देश में बहुत से क्षेत्र संसाधन समृद्ध होते हुए भी आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। इसके विपरीत कुछ प्रदेश संसाधनों की कमी होते हुए भी आर्थिक रूप से विकसित हैं, इसलिए संसाधन तभी योगदान देते हैं जब उपयुक्त प्रौद्योगिकी विकास और संस्थागत परिवर्तन किए जाएँ।
18उपनिवेशवाद और संसाधनों का क्या संबंध रहा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: उपनिवेशन का इतिहास बताता है कि उपनिवेशों में संसाधन संपन्न प्रदेश विदेशी आक्रमणकारियों के लिए मुख्य आकर्षण रहे हैं। उपनिवेशकारी देशों ने बेहतर प्रौद्योगिकी के सहारे उपनिवेशों के संसाधनों का शोषण किया तथा उन पर अपना आधिपत्य स्थापित किया।
19संसाधन संरक्षण पर गांधी जी के विचार लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: गांधी जी ने कहा था — “हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं”, अर्थात् हमारे पास पेट भरने के लिए बहुत है लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं। उनके अनुसार संसाधन ह्रास के लिए लालची और स्वार्थी व्यक्ति तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की शोषणात्मक प्रवृत्ति ज़िम्मेदार है, और वे अत्यधिक उत्पादन की जगह अधिक बड़े जनसमुदाय द्वारा उत्पादन के पक्षधर थे।
20संसाधन संरक्षण के क्षेत्र में 1968 से 1992 तक के प्रमुख प्रयास बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1968 में क्लब ऑफ़ रोम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित तरीक़े से संसाधन संरक्षण की वकालत की और 1974 में शुमेसर ने अपनी पुस्तक ‘स्माल इज़ ब्यूटीफुल’ में गांधी जी के दर्शन को दोहराया। 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड आयोग रिपोर्ट ने सतत् पोषणीय विकास की संकल्पना प्रस्तुत की, जो बाद में ‘हमारा साझा भविष्य’ नाम से प्रकाशित हुई, और 1992 में रियो डी जेनेरो में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित हुआ।
21भारत की मुख्य भू-आकृतियों का प्रतिशत बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत के लगभग 43 प्रतिशत भू-क्षेत्र मैदान हैं, जो कृषि और उद्योग के विकास के लिए सुविधाजनक हैं, और 30 प्रतिशत भाग पर पर्वत विस्तृत हैं। देश के क्षेत्रफल का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा पठारी क्षेत्र है, जिसमें खनिजों, जीवाश्म ईंधन और वनों का अपार संचय कोष है।
22पर्वतीय क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पर्वत कुछ बारहमासी नदियों के प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं और पर्यटन विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। इसके अलावा वे पारिस्थितिकी के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं।
23भारत के केवल 93 प्रतिशत भाग के भू-उपयोग आँकड़े क्यों उपलब्ध हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि पूर्वोत्तर प्रांतों में असम को छोड़कर अन्य प्रांतों के सूचित क्षेत्र के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान तथा चीन अधिकृत क्षेत्रों के भूमि उपयोग का सर्वेक्षण भी नहीं हुआ है।
24‘वर्तमान परती’ और ‘पुरातन परती’ में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: वर्तमान परती वह भूमि है जहाँ एक कृषि वर्ष या उससे कम समय से खेती न की गई हो। पुरातन परती वह भूमि है जहाँ 1 से 5 कृषि वर्ष से खेती न की गई हो।
25शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र और सकल कृषित क्षेत्र में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र वह भूमि है जिस पर फ़सलें उगाई व काटी जाती हैं। यदि एक कृषि वर्ष में एक बार से अधिक बोए गए क्षेत्र को इसमें जोड़ दिया जाए तो वह सकल कृषित क्षेत्र कहलाता है।
26राष्ट्रीय वन नीति 1952 के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इस नीति द्वारा वनों के अंतर्गत 33 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वांछित है, जिसकी तुलना में वास्तविक वन क्षेत्र काफ़ी कम है। यह सीमा पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका इस पर निर्भर करती है।
27पंजाब-हरियाणा और पूर्वोत्तर राज्यों के बोए गए क्षेत्र में क्या अंतर है और क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तर: पंजाब और हरियाणा में 80 प्रतिशत भूमि पर खेती होती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 10 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र बोया जाता है। इसका कारण यह है कि पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपों में पहाड़ी तथा वनाच्छादित क्षेत्र अधिक है, ढाल तीव्र है और मिट्टी की परत पतली है, जिससे खेती के लिए समतल भूमि बहुत कम मिलती है।
28भारत में भूमि निम्नीकरण के आँकड़े बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इस समय भारत में लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर भूमि निम्नीकृत है, जिसमें से लगभग 28 प्रतिशत वनों के अंतर्गत अपरदित है। इसमें 56 प्रतिशत क्षेत्र जल अपरदित है और शेष क्षेत्र लवणीय तथा क्षारीय है।
29अधिक सिंचाई से भूमि निम्नीकरण कैसे होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक सिंचाई भूमि निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है। अति सिंचन से उत्पन्न जलाक्रांतता से मृदा में लवणीयता और क्षारीयता बढ़ जाती है।
30खनन से भूमि निम्नीकरण कैसे होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: खनन के उपरांत खदानों वाले स्थानों को गहरी खाइयों और मलबे के साथ खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे भूमि बेकार हो जाती है। इसके अलावा खनन के कारण झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों में वनोन्मूलन भी हुआ है।
31खनिज प्रक्रियाएँ भूमि निम्नीकरण का कारण कैसे बनती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सीमेंट उद्योग में चूना पत्थर को पीसने और मृदा बर्तन उद्योग में चूने (खड़िया मृदा) तथा सेलखड़ी के प्रयोग से बहुत अधिक मात्रा में वायुमंडल में धूल विसर्जित होती है। जब इसकी परत भूमि पर जम जाती है तो मृदा की जल सोखने की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है।
32भूमि निम्नीकरण रोकने के चार उपाय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: वनारोपण और चरागाहों का उचित प्रबंधन, पेड़ों की रक्षक मेखला लगाना, तथा पशुचारण नियंत्रण इसमें मदद कर सकते हैं। इसके अलावा रेतीले टीलों को काँटेदार झाड़ियाँ लगाकर स्थिर बनाया जा सकता है, बंजर भूमि का उचित प्रबंधन तथा खनन नियंत्रण किया जा सकता है, और औद्योगिक जल को परिष्करण के पश्चात् विसर्जित करके प्रदूषण कम किया जा सकता है।
33मृदा को नवीकरण योग्य संसाधन क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि मृदा एक जीवंत तंत्र है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं से लगातार बनती रहती है और पौधों के विकास का माध्यम बनकर पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीवों का पोषण करती है। हालाँकि यह बहुत धीरे बनती है — कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं।
34मृदा बनने की प्रक्रिया में कौन-कौन से कारक योगदान देते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मृदा बनने की प्रक्रिया में उच्चावच, जनक शैल अथवा संस्तर शैल, जलवायु, वनस्पति और अन्य जैव पदार्थ तथा समय मुख्य कारक हैं। इसके अलावा प्रकृति के अनेकों तत्त्व जैसे तापमान परिवर्तन, बहते जल की क्रिया, पवन, हिमनदी और अपघटन क्रियाएँ भी योगदान देती हैं।
35बांगर और खादर मृदा में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: आयु के आधार पर जलोढ़ मृदाएँ दो प्रकार की हैं — पुराना जलोढ़ बांगर कहलाता है और नया जलोढ़ खादर। बांगर मृदा में ‘कंकर’ ग्रंथियों की मात्रा ज़्यादा होती है, जबकि खादर मृदा में बांगर की तुलना में ज़्यादा महीन कण पाए जाते हैं।
36जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि जलोढ़ मृदाएँ बहुत उपजाऊ होती हैं और पोटाश, फास्फोरस तथा चूनायुक्त होने के कारण गन्ने, चावल, गेहूँ, अन्य अनाजों और दलहन फ़सलों की खेती के लिए उपयुक्त हैं। अधिक उपजाऊपन के कारण इन क्षेत्रों में गहन कृषि की जाती है, जिससे यहाँ जनसंख्या घनत्व भी अधिक हो जाता है।
37काली मृदा को ‘काली कपास मृदा’ क्यों कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इन मृदाओं का रंग काला है और ये कपास की खेती के लिए सबसे उचित समझी जाती हैं। इसी कारण इन्हें ‘रेगर’ मृदा और ‘काली कपास मृदा’ दोनों नामों से जाना जाता है।
38काली मृदा में कौन-से पोषक तत्त्व हैं और किसकी कमी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: काली मृदाएँ कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूने जैसे पौष्टिक तत्त्वों से परिपूर्ण होती हैं। परंतु इनमें फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
39लाल और पीली मृदा का रंग अलग-अलग क्यों होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इन मृदाओं का लाल रंग रवेदार आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में लौह धातु के प्रसार के कारण होता है। और इनका पीला रंग इनमें जलयोजन के कारण होता है।
40लेटराइट मृदा कैसे बनती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लेटराइट मृदा का निर्माण उष्णकटिबंधीय तथा उपोषण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में आर्द्र तथा शुष्क ऋतुओं के एक के बाद एक आने के कारण होता है। यह भारी वर्षा से होने वाले अत्यधिक निक्षालन (leaching) का परिणाम है, इसलिए यह अधिकतर गहरी तथा अम्लीय (pH<6.0) होती है और इसमें पौधों के पोषक तत्त्वों की कमी होती है।
41लेटराइट मृदा में ह्यूमस की मात्रा कहाँ अधिक और कहाँ कम होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जहाँ इस मिट्टी में पर्णपाती और सदाबहार वन मिलते हैं, वहाँ इसमें ह्यूमस पर्याप्त रूप में पाया जाता है। लेकिन विरल वनस्पति और अर्ध शुष्क पर्यावरण में इसमें ह्यूमस की मात्रा कम पाई जाती है।
42मरुस्थली मृदा की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: मरुस्थली मृदाओं का रंग लाल और भूरा होता है और ये आम तौर पर रेतीली तथा लवणीय होती हैं; कुछ क्षेत्रों में नमक की मात्रा इतनी अधिक है कि झीलों से जल वाष्पीकृत करके खाने का नमक बनाया जाता है। शुष्क जलवायु और उच्च तापमान के कारण इनमें वाष्पीकरण दर अधिक तथा ह्यूमस और नमी की मात्रा कम होती है, और नीचे की परतों में चूने के कंकर की सतह के कारण जल अंत:स्यंदन अवरुद्ध हो जाता है।
43वन मृदा की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: वन मृदाएँ पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ पर्याप्त वर्षा-वन उपलब्ध हैं, और इनके गठन में पर्वतीय पर्यावरण के अनुसार बदलाव आता है। नदी घाटियों में ये दोमट और सिल्टदार होती हैं परंतु ऊपरी ढालों पर इनका गठन मोटे कणों का होता है; हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों में इनका बहुत अपरदन होता है और ये अधिसिलिक तथा ह्यूमस रहित होती हैं।
44मृदा अपरदन क्या है और इसका संतुलन कैसे बिगड़ता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मृदा के कटाव और उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहा जाता है; मृदा के बनने और अपरदन की क्रियाएँ आमतौर पर साथ-साथ चलती हैं और दोनों में संतुलन होता है। परंतु मानवीय क्रियाओं जैसे वनोन्मूलन, अति पशुचारण, निर्माण और खनन इत्यादि से कई बार यह संतुलन भंग हो जाता है, तथा पवन, हिमनदी और जल जैसे प्राकृतिक तत्त्व मृदा अपरदन करते हैं।
45अवनलिका अपरदन और उत्खात भूमि के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बहता जल मृत्तिकायुक्त मृदाओं को काटते हुए गहरी वाहिकाएँ बनाता है, जिन्हें अवनलिकाएँ कहते हैं; ऐसी भूमि जोतने योग्य नहीं रहती और इसे उत्खात भूमि (bad land) कहते हैं। चंबल बेसिन में ऐसी भूमि को खड्ड (ravine) भूमि कहा जाता है।
46चादर अपरदन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कई बार जल विस्तृत क्षेत्र को ढके हुए ढाल के साथ नीचे की ओर बहता है। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र की ऊपरी मृदा घुलकर जल के साथ बह जाती है, जिसे चादर अपरदन (sheet erosion) कहा जाता है।
47ग़लत ढंग से हल चलाने से मृदा अपरदन कैसे होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ढाल पर ऊपर से नीचे की ओर हल चलाने से वाहिकाएँ बन जाती हैं। इन वाहिकाओं के अंदर से बहता पानी आसानी से मृदा का कटाव करता है।
48समोच्च जुताई और सोपान कृषि में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: समोच्च जुताई में ढाल वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के समानांतर हल चलाया जाता है, जिससे ढाल के साथ जल बहाव की गति घटती है। सोपान कृषि में ढाल वाली भूमि पर सीढ़ीनुमा सोपान बनाए जाते हैं, जो अपरदन को नियंत्रित करते हैं; पश्चिमी और मध्य हिमालय में यह काफ़ी विकसित है।
49पट्टी कृषि और रक्षक मेखला कैसे काम करती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पट्टी कृषि में बड़े खेतों को पट्टियों में बाँटा जाता है और फ़सलों के बीच में घास की पट्टियाँ उगाई जाती हैं, जो पवनों द्वारा जनित बल को कमज़ोर करती हैं। रक्षक मेखला में पेड़ों को कतारों में लगाया जाता है जिससे पवनों की गति कम होती है; इन रक्षक पट्टियों का पश्चिम भारत में रेत के टीलों के स्थायीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1संसाधनों का वर्गीकरण किन-किन आधारों पर किया जाता है? प्रत्येक के प्रकार बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- उत्पत्ति के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं — जैव और अजैव। जैव संसाधनों की उत्पत्ति जीवमंडल से होती है जैसे मनुष्य और पशुधन, जबकि अजैव संसाधन निर्जीव पदार्थों से बने होते हैं जैसे चट्टानें और धातुएँ।
- समाप्यता के आधार पर संसाधन नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य होते हैं। नवीकरण योग्य को दोबारा उत्पन्न किया जा सकता है जैसे सौर और पवन ऊर्जा, जबकि अनवीकरण योग्य लंबे भूगर्भीय अंतराल में बनते हैं जैसे खनिज और जीवाश्म ईंधन।
- स्वामित्व के आधार पर ये व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय होते हैं; तथा विकास के स्तर के आधार पर संभावी, विकसित, भंडार और संचित कोष होते हैं।
2भारत में संसाधनों की प्रादेशिक विविधता को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि प्रांतों में खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार हैं।
- अरुणाचल प्रदेश में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं परंतु वहाँ मूल विकास की कमी है; इसके विपरीत राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत है लेकिन जल संसाधनों की कमी है।
- लद्दाख का शीत मरुस्थल देश के अन्य भागों से अलग-थलग पड़ता है; यह प्रदेश सांस्कृतिक विरासत का धनी है परंतु यहाँ जल, आधारभूत अवसंरचना तथा कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों की कमी है। इसीलिए राष्ट्रीय, प्रांतीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर संतुलित संसाधन नियोजन की आवश्यकता है।
3भारत में भू-उपयोग प्रारूप को निर्धारित करने वाले तत्त्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भू-उपयोग को निर्धारित करने वाले भौतिक कारकों में भू-आकृति, जलवायु और मृदा के प्रकार शामिल हैं।
- मानवीय कारकों में जनसंख्या घनत्व, प्रौद्योगिक क्षमता, संस्कृति और परंपराएँ इत्यादि शामिल हैं।
- भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी. है, परंतु इसके केवल 93 प्रतिशत भाग के भू-उपयोग आँकड़े उपलब्ध हैं, क्योंकि असम को छोड़कर पूर्वोत्तर प्रांतों के सूचित क्षेत्र की जानकारी नहीं है और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान तथा चीन अधिकृत क्षेत्रों का सर्वेक्षण नहीं हुआ है।
4भारत में भूमि निम्नीकरण के मुख्य कारण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- खनन भूमि निम्नीकरण का बड़ा कारण है; खनन के उपरांत खदानों वाले स्थानों को गहरी खाइयों और मलबे के साथ खुला छोड़ दिया जाता है और इससे वनोन्मूलन भी होता है। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में यह मुख्य कारण है।
- अति पशुचारण गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है, क्योंकि इससे वनस्पति समाप्त हो जाती है।
- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक सिंचाई उत्तरदायी है, क्योंकि अति सिंचन से उत्पन्न जलाक्रांतता से मृदा में लवणीयता और क्षारीयता बढ़ जाती है। इसके अलावा खनिज प्रक्रियाओं की धूल और औद्योगिक अपशिष्ट भी भूमि तथा जल प्रदूषण का मुख्य स्रोत हैं।
5भूमि निम्नीकरण की समस्या को सुलझाने के उपाय लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- वनारोपण और चरागाहों का उचित प्रबंधन इसमें कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, तथा पेड़ों की रक्षक मेखला लगाना और पशुचारण नियंत्रण भी आवश्यक है।
- रेतीले टीलों को काँटेदार झाड़ियाँ लगाकर स्थिर बनाने की प्रक्रिया से भूमि कटाव की रोकथाम शुष्क क्षेत्रों में की जा सकती है।
- बंजर भूमि के उचित प्रबंधन, खनन नियंत्रण, और औद्योगिक जल को परिष्करण के पश्चात् विसर्जित करके जल और भूमि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
6जलोढ़ मृदा की विशेषताएँ और उसके वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- यह मृदा विस्तृत रूप से फैली हुई है और देश की सबसे महत्त्वपूर्ण मृदा है; संपूर्ण उत्तरी मैदान जलोढ़ मृदा से बना है, जो हिमालय की तीन महत्त्वपूर्ण नदी तंत्रों — सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र — द्वारा लाए गए निक्षेपों से बनी है। एक सँकरे गलियारे द्वारा यह राजस्थान और गुजरात तक तथा महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के पूर्वी तटीय डेल्टों में भी फैली है।
- इसमें रेत, सिल्ट और मृत्तिका के विभिन्न अनुपात पाए जाते हैं; नदी के मुहाने से घाटी में ऊपर की ओर जाते हुए कणों का आकार बढ़ता चला जाता है और मोटे कण वाली मृदाएँ द्वार, ‘चो’ क्षेत्र और तराई में मिलती हैं।
- आयु के आधार पर यह बांगर (पुराना जलोढ़, जिसमें कंकर ग्रंथियाँ अधिक) और खादर (नया जलोढ़, जिसमें महीन कण अधिक) में बँटी है। यह पोटाश, फास्फोरस और चूनायुक्त होने के कारण गन्ने, चावल, गेहूँ और दलहन के लिए उपयुक्त है, इसलिए यहाँ गहन कृषि होती है और जनसंख्या घनत्व भी अधिक है।
7काली मृदा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- इन मृदाओं का रंग काला है और इन्हें ‘रेगर’ मृदा भी कहा जाता है; कपास की खेती के लिए उचित समझी जाने के कारण इन्हें ‘काली कपास मृदा’ के नाम से भी जाना जाता है। ये लावा जनक शैलों से बनी हैं और दक्कन पठार (बेसाल्ट) के उत्तर-पश्चिमी भागों — महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के पठार पर और गोदावरी-कृष्णा घाटियों तक — पाई जाती हैं।
- यह बहुत महीन कणों अर्थात् मृत्तिका से बनी है, इसलिए इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है; यह कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूने से परिपूर्ण होती है परंतु इसमें फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
- गर्म और शुष्क मौसम में इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं जिससे अच्छी तरह वायु मिश्रण हो जाता है; गीली होने पर ये चिपचिपी हो जाती हैं और इन्हें जोतना मुश्किल होता है, इसलिए इनकी जुताई मानसून प्रारंभ होने की पहली बौछार से ही शुरू कर दी जाती है।
8लेटराइट मृदा की विशेषताएँ और उसका आर्थिक महत्त्व बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- लेटराइट शब्द ग्रीक भाषा के ‘लेटर’ (Later) से लिया गया है जिसका अर्थ है ईंट; इस मृदा का निर्माण उष्णकटिबंधीय तथा उपोषण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में आर्द्र और शुष्क ऋतुओं के एक के बाद एक आने के कारण होता है और यह भारी वर्षा से अत्यधिक निक्षालन का परिणाम है।
- यह अधिकतर गहरी तथा अम्लीय (pH<6.0) होती है और इसमें सामान्यत: पौधों के पोषक तत्त्वों की कमी होती है; यह दक्षिणी राज्यों, महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्रों, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के कुछ भागों तथा उत्तर-पूर्वी प्रदेशों में पाई जाती है।
- मृदा संरक्षण की उचित तकनीक अपनाकर इन मृदाओं पर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में चाय तथा कॉफ़ी उगाई जाती है, और तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा केरल की लाल लेटराइट मृदाएँ काजू की फ़सल के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
9मरुस्थली मृदा का वर्णन कीजिए और बताइए कि उसे कृषि योग्य कैसे बनाया जा सकता है।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- मरुस्थली मृदाओं का रंग लाल और भूरा होता है; ये आम तौर पर रेतीली और लवणीय होती हैं और कुछ क्षेत्रों में नमक की मात्रा इतनी अधिक है कि झीलों से जल वाष्पीकृत करके खाने का नमक भी बनाया जाता है।
- शुष्क जलवायु और उच्च तापमान के कारण वाष्पीकरण दर अधिक है और मृदाओं में ह्यूमस तथा नमी की मात्रा कम होती है; मृदा की सतह के नीचे कैल्शियम की मात्रा बढ़ती चली जाती है और नीचे की परतों में चूने के कंकर की सतह पाई जाती है, जिसके कारण जल अंत:स्यंदन अवरुद्ध हो जाता है।
- इस मृदा को सही तरीक़े से सिंचित करके कृषि योग्य बनाया जा सकता है, जैसा कि पश्चिमी राजस्थान में हो रहा है।
10मृदा अपरदन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- बहता जल मृत्तिकायुक्त मृदाओं को काटते हुए गहरी वाहिकाएँ बनाता है, जिन्हें अवनलिकाएँ कहते हैं; ऐसी भूमि जोतने योग्य नहीं रहती और इसे उत्खात भूमि (bad land) कहते हैं, तथा चंबल बेसिन में इसे खड्ड (ravine) भूमि कहा जाता है।
- कई बार जल विस्तृत क्षेत्र को ढके हुए ढाल के साथ नीचे बहता है और इस क्षेत्र की ऊपरी मृदा घुलकर जल के साथ बह जाती है, जिसे चादर अपरदन कहा जाता है।
- पवन द्वारा मैदान अथवा ढालू क्षेत्र से मृदा को उड़ा ले जाने की प्रक्रिया को पवन अपरदन कहते हैं; इसके अलावा ढाल पर ऊपर से नीचे की ओर हल चलाने जैसे कृषि के ग़लत तरीक़ों से भी वाहिकाएँ बन जाती हैं जिनके अंदर से बहता पानी मृदा का कटाव करता है।
11पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? (अभ्यास प्रश्न 2-iii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ढाल वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के समानांतर हल चलाने से ढाल के साथ जल बहाव की गति घटती है; इसे समोच्च जुताई (contour ploughing) कहा जाता है।
- ढाल वाली भूमि पर सोपान बनाए जा सकते हैं, जो अपरदन को नियंत्रित करते हैं; पश्चिमी और मध्य हिमालय में सोपान अथवा सीढ़ीदार कृषि काफ़ी विकसित है।
- बड़े खेतों को पट्टियों में बाँटकर फ़सलों के बीच घास की पट्टियाँ उगाई जाती हैं, जो पवनों द्वारा जनित बल को कमज़ोर करती हैं; इसे पट्टी कृषि कहते हैं। इसके साथ ही पेड़ों को कतारों में लगाकर रक्षक मेखला बनाना और वनारोपण करना भी आवश्यक है।
12तीन राज्यों के नाम बताएँ जहाँ काली मृदा पाई जाती है। इस पर मुख्य रूप से कौन-सी फ़सल उगाई जाती है? (अभ्यास प्रश्न 2-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- काली मृदा मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पाई जाती है; इसके अलावा यह सौराष्ट्र (गुजरात) और मालवा के पठार पर भी फैली है।
- यह दक्षिण-पूर्वी दिशा में गोदावरी और कृष्णा नदियों की घाटियों तक विस्तृत है।
- इस पर मुख्य रूप से कपास उगाई जाती है, इसीलिए इसे ‘काली कपास मृदा’ के नाम से भी जाना जाता है।
13पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर किस प्रकार की मृदा पाई जाती है? इसकी तीन मुख्य विशेषताएँ बताइए। (अभ्यास प्रश्न 2-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पूर्वी तटीय मैदान, विशेषकर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टे जलोढ़ मृदा से बने हैं।
- पहली विशेषता — इसमें रेत, सिल्ट और मृत्तिका के विभिन्न अनुपात पाए जाते हैं। दूसरी विशेषता — यह पोटाश, फास्फोरस और चूनायुक्त होती है।
- तीसरी विशेषता — यह बहुत उपजाऊ होती है और गन्ने, चावल, गेहूँ, अन्य अनाजों तथा दलहन फ़सलों की खेती के लिए उपयुक्त है; इसी कारण इन क्षेत्रों में गहन कृषि होती है और जनसंख्या घनत्व भी अधिक है।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)
1भारत में भूमि उपयोग प्रारूप का वर्णन करें। वर्ष 1960–61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, इसका क्या कारण है? (अभ्यास प्रश्न 3-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
भारत में भूमि उपयोग प्रारूप को भौतिक और मानवीय दोनों तरह के कारक निर्धारित करते हैं।
- भौतिक कारकों में भू-आकृति, जलवायु और मृदा के प्रकार आते हैं, जबकि मानवीय कारकों में जनसंख्या घनत्व, प्रौद्योगिक क्षमता, संस्कृति और परंपराएँ शामिल हैं।
- भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी. है, परंतु इसके केवल 93 प्रतिशत भाग के भू-उपयोग आँकड़े उपलब्ध हैं। इसका कारण यह है कि असम को छोड़कर अन्य पूर्वोत्तर प्रांतों के सूचित क्षेत्र की जानकारी नहीं है और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान तथा चीन अधिकृत क्षेत्रों का सर्वेक्षण नहीं हुआ है।
- भू-उपयोग की पाँच श्रेणियाँ हैं — वन; कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि; परती के अतिरिक्त अन्य कृषि अयोग्य भूमि; परती भूमि; और शुद्ध बोया गया क्षेत्र।
- कुल सूचित क्षेत्र के लगभग 54 प्रतिशत हिस्से पर ही खेती हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में 80 प्रतिशत भूमि पर खेती होती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर और अंडमान निकोबार में 10 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र बोया जाता है।
- वन क्षेत्र 1960–61 में 18.11 प्रतिशत था जो 2014–15 में बढ़कर 23.3 प्रतिशत हुआ, जबकि राष्ट्रीय वन नीति (1952) 33 प्रतिशत चाहती है।
वन क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वृद्धि न होने के कारण —
- बढ़ती जनसंख्या के लिए बस्तियों, सड़कों, रेल लाइनों और उद्योगों की माँग बढ़ी, इसीलिए गैर-कृषि प्रयोजनों की भूमि 4.95 प्रतिशत से बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गई।
- वनोन्मूलन, खनन और अति पशुचारण जैसी मानवीय क्रियाओं ने वन क्षेत्र को बढ़ने नहीं दिया।
इसी कारण लंबे समय तक भूमि संरक्षण और प्रबंधन की अवहेलना से भू-संसाधनों का निम्नीकरण हो रहा है, जिससे समाज और पर्यावरण पर गंभीर आपदा आ सकती है।
2प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपभोग कैसे हुआ है? (अभ्यास प्रश्न 3-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- लंबे समय तक यह विश्वास किया जाता रहा कि संसाधन प्रकृति की देन हैं, परिणामस्वरूप मानव ने इनका अंधाधुंध उपयोग किया।
- बेहतर प्रौद्योगिकी के आने से खनन, वनोन्मूलन और सिंचाई तेज़ हुई, जिससे संसाधनों का दोहन कई गुना बढ़ गया।
- इससे तीन बड़ी समस्याएँ पैदा हुईं — पहली, कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का ह्रास हुआ; दूसरी, संसाधन कुछ ही लोगों के हाथ में आ गए जिससे समाज संसाधन संपन्न और संसाधनहीन में बँट गया; और तीसरी, वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गया, जैसे भूमंडलीय तापन, ओज़ोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण।
- इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण उपनिवेशवाद है — उपनिवेशकारी देशों ने बेहतर प्रौद्योगिकी के सहारे उपनिवेशों के संसाधनों का शोषण किया तथा उन पर अपना आधिपत्य स्थापित किया।
- गांधी जी ने इसी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि “हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं”; उनके अनुसार इसके लिए लालची व स्वार्थी व्यक्ति तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की शोषणात्मक प्रवृत्ति ज़िम्मेदार है।
इसीलिए 1968 के क्लब ऑफ़ रोम से लेकर 1974 की ‘स्माल इज़ ब्यूटीफुल’, 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड रिपोर्ट और 1992 के रियो सम्मेलन तक संसाधन संरक्षण तथा सतत् पोषणीय विकास की ज़रूरत बार-बार उठाई गई।
3संसाधन नियोजन क्या है? भारत में इसकी आवश्यकता और इसके सोपानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए नियोजन एक सर्वमान्य रणनीति है, और भारत जैसे देश में जहाँ संसाधनों की उपलब्धता में बहुत अधिक विविधता है, यह और भी महत्त्वपूर्ण है।
- यहाँ ऐसे प्रदेश हैं जहाँ एक तरह के संसाधनों की प्रचुरता है परंतु दूसरे की कमी है — जैसे झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में खनिज और कोयला प्रचुर हैं; अरुणाचल प्रदेश में जल प्रचुर है पर मूल विकास की कमी है; राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा की बहुतायत है पर जल की कमी है; और लद्दाख सांस्कृतिक विरासत का धनी है पर वहाँ जल, अवसंरचना तथा कुछ खनिजों की कमी है।
- इसलिए राष्ट्रीय, प्रांतीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर संतुलित संसाधन नियोजन की आवश्यकता है।
- इसके तीन सोपान हैं — (क) देश के विभिन्न प्रदेशों में संसाधनों की पहचान कर उनकी तालिका बनाना, जिसमें क्षेत्रीय सर्वेक्षण, मानचित्र बनाना तथा गुणात्मक एवं मात्रात्मक अनुमान लगाना व मापन शामिल है; (ख) संसाधन विकास योजनाएँ लागू करने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी, कौशल और संस्थागत नियोजन ढाँचा तैयार करना; और (ग) संसाधन विकास योजनाओं तथा राष्ट्रीय विकास योजना में समन्वय स्थापित करना।
- स्वाधीनता के बाद भारत में इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही प्रयास किए गए।
पर ध्यान रहे कि मात्र संसाधनों की उपलब्धता से विकास संभव नहीं है — इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी विकास और संस्थागत परिवर्तन भी आवश्यक हैं।
4भारत में पाई जाने वाली मृदाओं का वर्गीकरण कीजिए और उनकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
भारत में अनेक प्रकार के उच्चावच, भू-आकृतियाँ, जलवायु और वनस्पतियाँ पाई जाती हैं, इसी कारण यहाँ छह प्रकार की मृदाएँ विकसित हुई हैं।
| मृदा | कहाँ | विशेषता और फ़सल |
|---|---|---|
| जलोढ़ | संपूर्ण उत्तरी मैदान; सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र के निक्षेपों से; पूर्वी तटीय डेल्टे | रेत, सिल्ट और मृत्तिका से बनी; पोटाश, फास्फोरस और चूनायुक्त; गन्ना, चावल, गेहूँ और दलहन के लिए उपयुक्त; बांगर और खादर दो प्रकार |
| काली | दक्कन पठार का उत्तर-पश्चिमी भाग; महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, म.प्र., छत्तीसगढ़ | लावा जनक शैलों से बनी; नमी धारण क्षमता अधिक; कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटाश और चूने से परिपूर्ण पर फास्फोरस कम; कपास के लिए |
| लाल और पीली | दक्कन पठार के पूर्वी-दक्षिणी हिस्से; ओडिशा, छत्तीसगढ़, प. घाट का पहाड़ी पद | लौह धातु के प्रसार से लाल और जलयोजन से पीली |
| लेटराइट | दक्षिणी राज्य, महाराष्ट्र के प. घाट, ओडिशा, प. बंगाल, उत्तर-पूर्वी प्रदेश | निक्षालन का परिणाम; गहरी और अम्लीय; चाय, कॉफ़ी और काजू के लिए |
| मरुस्थली | पश्चिमी राजस्थान | लाल-भूरी, रेतीली और लवणीय; सिंचाई से कृषि योग्य बनाई जा रही है |
| वन | पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र | नदी घाटियों में दोमट-सिल्टदार, ऊपरी ढालों पर मोटे कण; हिमाच्छादित क्षेत्रों में अधिसिलिक और ह्यूमस रहित |
निष्कर्ष — मृदा सबसे महत्त्वपूर्ण नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधन है, पर कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं; इसीलिए इसका संरक्षण अनिवार्य है।
5संसाधन संरक्षण क्यों आवश्यक है? इस दिशा में हुए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- संसाधन किसी भी तरह के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, परंतु उनके विवेकहीन उपभोग और अति उपयोग से कई सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा हो सकती हैं, इसलिए विभिन्न स्तरों पर उनका संरक्षण आवश्यक है।
- गांधी जी ने कहा था — “हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं।” वे अत्यधिक उत्पादन के विरुद्ध थे और अधिक बड़े जनसमुदाय द्वारा उत्पादन के पक्षधर थे।
- 1968 में क्लब ऑफ़ रोम ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित तरीक़े से संसाधन संरक्षण की वकालत की।
- 1974 में शुमेसर ने अपनी पुस्तक ‘स्माल इज़ ब्यूटीफुल’ में गांधी जी के दर्शन की एक बार फिर पुनरावृत्ति की।
- 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड आयोग रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर मूलाधार योगदान करते हुए सतत् पोषणीय विकास की संकल्पना प्रस्तुत की; यह रिपोर्ट बाद में ‘हमारा साझा भविष्य’ शीर्षक से पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई।
- जून 1992 में ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में 100 से भी अधिक राष्ट्राध्यक्ष प्रथम अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन में एकत्रित हुए, जहाँ भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन और जैविक विविधता पर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर हुए, वन सिद्धांतों पर सहमति बनी और एजेंडा 21 को स्वीकृति दी गई।
एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे — यानी संरक्षण की ज़िम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, हर नगरपालिका और पंचायत की है।
भाग ङ — आरेख-आधारित प्रश्न
आरेख 1 — चित्र 1.3: मुख्य भू-आकृतियों के अंतर्गत क्षेत्र
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| इस वृत्त चित्र में कौन-सी तीन भू-आकृतियाँ दिखाई गई हैं? | मैदान, पर्वत और पठार। |
| सबसे बड़ा हिस्सा किसका है और कितना? | मैदान का, लगभग 43 प्रतिशत। |
| पर्वत और पठार का प्रतिशत बताइए। | पर्वत 30 प्रतिशत और पठार लगभग 27 प्रतिशत। |
| मैदानी क्षेत्र का सबसे बड़ा लाभ क्या है? | यह कृषि और उद्योग के विकास के लिए सुविधाजनक है। |
आरेख 2 — चित्र 1.4: सामान्य भू-उपयोग संवर्ग, 1960–61 और 2014–15
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1960–61 और 2014–15 में शुद्ध बोया गया क्षेत्र कितना था? | क्रमश: 45.26 प्रतिशत और 45.5 प्रतिशत। |
| इससे क्या निष्कर्ष निकलता है? | कि 54 वर्षों में शुद्ध बोए गए क्षेत्र में लगभग कोई वृद्धि नहीं हुई। |
| वन क्षेत्र में कितना परिवर्तन आया? | 18.11 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हुआ, जो राष्ट्रीय वन नीति के 33 प्रतिशत लक्ष्य से अब भी काफ़ी कम है। |
| कौन-सा संवर्ग लगभग दोगुना हो गया और यह क्या बताता है? | गैर-कृषि प्रयोजनों के अंतर्गत क्षेत्र, जो 4.95 प्रतिशत से बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो गया; यह बताता है कि बस्तियाँ, सड़कें, रेल लाइनें और उद्योग तेज़ी से बढ़े हैं। |
| इन आँकड़ों का स्रोत क्या है? | डायरेक्टरेट ऑफ़ इकोनोमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स, मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर, 2017। |
आरेख 3 — चित्र 1.5: मृदा परिच्छेदिका
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| मृदा परिच्छेदिका की चारों परतें ऊपर से नीचे क्रम में लिखिए। | ऊपरी संस्तर की मृदा; उप-मृदा (अपक्षयित चट्टानें — बालू, गाद व मृत्तिका); अध:स्तरीय अपक्षयित आधारी चट्टानें; और अपक्षय रहित आधारी चट्टानें। |
| सबसे नीचे की परत कौन-सी है? | अपक्षय रहित आधारी चट्टानें। |
| इस आरेख से क्या पता चलता है? | कि ऊपर से नीचे जाते-जाते मृदा कम और चट्टान अधिक होती जाती है, यानी मृदा जनक शैल के अपक्षय से ही बनती है। |
आरेख 4 — चित्र 1.2: संसाधनों का वर्गीकरण
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| संसाधनों के दो मुख्य वर्ग कौन-से हैं? | प्राकृतिक और मानवीय। |
| प्राकृतिक संसाधनों के दो उपवर्ग बताइए। | नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य। |
| नवीकरण योग्य के दो उपवर्ग और उनके उदाहरण दीजिए। | सतत् अथवा प्रवाह (जैसे पवन और जल) तथा जैव (जैसे प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव)। |
| अनवीकरण योग्य के दो उपवर्ग और उनके उदाहरण दीजिए। | पुन: चक्रीय (जैसे धातु) और अचक्रीय (जैसे जीवाश्म ईंधन)। |
| मानवीय संसाधनों के दो उपवर्ग कौन-से हैं? | संरचनाएँ एवं संस्थाएँ; तथा मात्रा एवं गुणवत्ता। |
भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं
भूगोल की परीक्षा में मानचित्र-कार्य निश्चित रूप से आता है। इसे कभी मत छोड़िए। तरीक़ा — पहले भारत का नक़्शा बनाइए, फिर सही जगह पर छोटा-सा चिह्न बनाकर नाम साफ़ अक्षरों में लिखिए।
1. मृदाओं का वितरण (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 8 का मानचित्र)
भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित मृदाओं के क्षेत्र पहचानिए और छायांकित कीजिए —
| # | मृदा | कहाँ दिखानी है |
|---|---|---|
| 1 | जलोढ़ मृदा | संपूर्ण उत्तरी मैदान — पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम; तथा पूर्वी तटीय डेल्टे |
| 2 | काली मृदा | महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग, गुजरात (सौराष्ट्र), छत्तीसगढ़ का पश्चिमी हिस्सा |
| 3 | लाल और पीली मृदा | ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक का पूर्वी भाग, उत्तर-पूर्वी राज्य |
| 4 | लेटराइट मृदा | केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट के किनारे, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ भाग, उत्तर-पूर्वी प्रदेश |
| 5 | शुष्क (मरुस्थली) मृदा | पश्चिमी राजस्थान |
| 6 | पर्वत और वन मृदा | जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तथा उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र |
2. राज्य पहचानिए — भूमि निम्नीकरण के कारण
भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित राज्यों को अंकित कीजिए —
| कारण | राज्य जो दिखाने हैं |
|---|---|
| खनन से भूमि निम्नीकरण | झारखंड · छत्तीसगढ़ · मध्य प्रदेश · उड़ीसा |
| अति पशुचारण से भूमि निम्नीकरण | गुजरात · राजस्थान · मध्य प्रदेश · महाराष्ट्र |
| अधिक सिंचाई से भूमि निम्नीकरण | पंजाब · हरियाणा · पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
3. नदियाँ जिनका इस अध्याय में उल्लेख है
| नदी | क्यों महत्त्वपूर्ण |
|---|---|
| सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र | इनके निक्षेपों से जलोढ़ मृदा बनी |
| महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी | इनके पूर्वी तटीय डेल्टे जलोढ़ मृदा से बने |
| गोदावरी और कृष्णा | इनकी घाटियों तक काली मृदा फैली है |
| चंबल | यहाँ के अवनलिका अपरदन वाले क्षेत्र को ‘खड्ड’ भूमि कहते हैं |
4. अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| दक्कन पठार | काली मृदा का बेसाल्ट क्षेत्र |
| पश्चिमी घाट | लेटराइट मृदा; लाल-पीली मृदा का पहाड़ी पद |
| पश्चिमी और मध्य हिमालय | सोपान कृषि यहाँ काफ़ी विकसित है |
| तराई क्षेत्र | मोटे कण वाली जलोढ़ मृदा |
5. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न
| प्रश्न | अंक |
|---|---|
| भारत के दिए गए रेखा-मानचित्र पर काली मृदा के क्षेत्र को छायांकित कीजिए और उसके किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए। | 2 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर वे तीन राज्य दिखाइए जहाँ अधिक सिंचाई भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर लेटराइट मृदा का क्षेत्र दिखाइए और वहाँ उगाई जाने वाली दो फ़सलों के नाम लिखिए। | 3 |
★मानचित्र-कार्य का सबसे आसान तरीक़ा — हर मृदा को एक ‘दिशा’ से जोड़ दीजिए: जलोढ़ = उत्तर का मैदान · काली = पश्चिम-मध्य · लाल-पीली = पूर्व-दक्षिण · लेटराइट = दक्षिण-पश्चिमी किनारा · मरुस्थली = पश्चिम · वन = पहाड़।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | ‘भंडार’ का एक उदाहरण दीजिए। | 1 |
| 2 | भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल कितना है? | 1 |
| 3 | लेटराइट शब्द कहाँ से आया है? | 1 |
| 4 | नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य संसाधनों में अंतर बताइए। | 2 |
| 5 | काली मृदा की जुताई मानसून की पहली बौछार से क्यों शुरू कर दी जाती है? | 2 |
| 6 | भारत में भूमि निम्नीकरण के मुख्य कारण बताइए। | 3 |
| 7 | भारत में भूमि उपयोग प्रारूप का वर्णन कीजिए और बताइए कि वन क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वृद्धि क्यों नहीं हुई। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर काली मृदा और मरुस्थली मृदा के क्षेत्र दिखाइए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | राष्ट्रीय वन नीति कब बनी और कितना वन क्षेत्र वांछित है? | 1 |
| 2 | एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य क्या है? | 1 |
| 3 | चंबल बेसिन की उत्खात भूमि को क्या कहते हैं? | 1 |
| 4 | ‘भंडार’ और ‘संचित कोष’ में अंतर स्पष्ट कीजिए। | 2 |
| 5 | भारत के केवल 93 प्रतिशत भाग के भू-उपयोग आँकड़े क्यों उपलब्ध हैं? | 2 |
| 6 | जलोढ़ मृदा की विशेषताएँ और वितरण बताइए। | 3 |
| 7 | संसाधन नियोजन क्या है? भारत में इसकी आवश्यकता और तीनों सोपानों का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर वे चार राज्य दिखाइए जहाँ अति पशुचारण भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है। | 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | मैदान, पर्वत और पठार का प्रतिशत बताइए। | 1 |
| 2 | सतत् पोषणीय विकास की संकल्पना किस रिपोर्ट ने दी? | 1 |
| 3 | बांगर और खादर में एक अंतर बताइए। | 1 |
| 4 | राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश के संसाधनों की तुलना कीजिए। | 2 |
| 5 | चादर अपरदन क्या है? | 2 |
| 6 | पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? | 3 |
| 7 | प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपभोग कैसे हुआ है? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर जलोढ़ और लेटराइट मृदा के क्षेत्र दिखाइए। | 5 |
अंतिम सलाह। भूगोल में सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं — आँकड़ा, राज्य का नाम, और मानचित्र। हर बड़े उत्तर में एक आँकड़ा और एक राज्य ज़रूर लिखिए, और मानचित्र-कार्य कभी मत छोड़िए। यह पाँच अंक बिना रटे मिल जाते हैं।