ये प्रश्न रटने से हल नहीं होते। इनमें आपको सोचना, आँकड़े पढ़ना, दूसरों की जगह ख़ुद को रखकर देखना, और अपने आसपास देखना पड़ता है।
तीन आयाम —
| आयाम | क्या जाँचा जाता है | भार |
|---|---|---|
| जागरूकता | तथ्य और आँकड़े को समझकर नयी स्थिति में लगाना | 50% |
| संवेदनशीलता | विस्थापितों, किसानों, महिलाओं और भावी पीढ़ी के प्रति ज़िम्मेदारी | 20% |
| सृजनात्मकता | योजना बनाना, समाधान सोचना, ‘यदि…तो’ सोच | 30% |
उत्तर देखिए
उत्तर लिखने का तरीक़ा: इन प्रश्नों में ‘सही उत्तर’ एक नहीं होता। जो भी लिखें, उसके साथ कारण ज़रूर लिखें, और हो सके तो एक आँकड़ा या एक जगह का नाम भी दें।
भाग क — जागरूकता (50%)
1आँकड़ा-व्याख्या 4 अंक
नीचे दो देशों के आँकड़े दिए गए हैं —
| देश | औसत वार्षिक वर्षा | जल की स्थिति |
|---|---|---|
| इज़राइल | 25 सेंटीमीटर | जल का कोई अभाव नहीं |
| भारत | 114 सेंटीमीटर | हर वर्ष कहीं न कहीं सूखा |
(क) भारत में इज़राइल से लगभग कितने गुना ज़्यादा वर्षा होती है? (1 अंक)
(ख) फिर भी भारत में सूखा क्यों पड़ता है? (2 अंक)
(ग) इस आँकड़े से आप एक वाक्य का निष्कर्ष लिखिए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) लगभग साढ़े चार गुना (114 ÷ 25 ≈ 4.56)।
- (ख) क्योंकि जल की उपलब्धता और उसके स्वरूप के अनुसार समुचित जलप्रबंधन नहीं है; इसलिए वर्षा का जल नदी-नालों में तेज़ी से बहकर समुद्र में चला जाता है और वर्षा के बाद के लगभग नौ महीने पानी की कमी रहती है।
- (ग) “समस्या पानी की मात्रा की नहीं, प्रबंधन की है।”
2केस-आधारित 4 अंक
नीचे दी गई स्थिति पढ़िए —
एक शहर में भारी बारिश हुई और पूरी सड़क पानी से भर गई। ट्रैफ़िक रुक गया, घरों में पानी घुस गया। उसी शाम टी.वी. पर ख़बर आई कि उसी शहर के कुछ मोहल्लों में पीने का पानी टैंकर से भेजना पड़ा।
(क) एक ही शहर में एक ही दिन बाढ़ और पानी की कमी — दोनों कैसे हो सकते हैं? (2 अंक)
(ख) इस स्थिति को पाठ्यपुस्तक के किस चित्र से जोड़ा जा सकता है? (1 अंक)
(ग) इसका एक व्यावहारिक हल सुझाइए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) क्योंकि जल की मात्रा और उसकी उपयोगिता दो अलग बातें हैं। बारिश का पानी नालियों में बहकर चला जाता है और उसे रोका नहीं जाता; साथ ही जो पानी सड़क पर खड़ा है वह प्रदूषित होने के कारण पीने लायक़ नहीं है — यही गुणात्मक दुर्लभता है। पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है कि “प्रचुर मात्रा में जल संसाधन होने के बावजूद भी वहाँ जल की दुर्लभता हो सकती है — हमारे कई शहर इसके उदाहरण हैं।”
- (ख) चित्र 3.1 से — जिसमें कोलकाता में 180 मिलीमीटर की रिकॉर्ड बारिश के बाद एक लड़का सड़क के पानी से पीने का पानी भर रहा है।
- (ग) छत वर्षाजल संग्रहण — जिससे वही पानी बहने की जगह संग्रहित हो जाए और भूमिगत जल का पुनर्भरण भी करे।
3दावा-कारण 4 अंक
हर जोड़े के लिए बताइए कि (i) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है, (ii) दोनों सही हैं पर R व्याख्या नहीं है, (iii) A सही है पर R ग़लत, या (iv) A ग़लत है पर R सही।
| # | दावा (A) | कारण (R) |
|---|---|---|
| 1 | बाढ़ नियंत्रण के लिए बने बाँध ही कभी-कभी बाढ़ का कारण बन जाते हैं। | उनके जलाशयों में तलछट जमा हो जाता है। |
| 2 | काली मिट्टी की तरह वर्षाजल को भी शुद्धतम माना जाता है। | राजस्थान में वर्षाजल को ‘पालर पानी’ कहते हैं। |
| 3 | टाँके में वर्षा का पहला जल संग्रहित नहीं किया जाता था। | पहली बारिश का पानी कम होता है। |
| 4 | शिलांग में पीने के जल की गंभीर समस्या है। | वहाँ बहुत कम वर्षा होती है। |
उत्तर देखिए
- 1 → (i)। यही पाठ्यपुस्तक का दिया हुआ कारण है।
- 2 → (ii)। दोनों कथन सही हैं, पर ‘पालर पानी’ नाम होना उसके ‘शुद्धतम’ होने का कारण नहीं है — वह तो उसका नाम भर है।
- 3 → (iii)। दावा सही है, पर कारण ग़लत। असली कारण यह है कि पहला जल छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था।
- 4 → (iii)। दावा सही है, पर कारण बिलकुल उलटा है — विश्व की सबसे अधिक वर्षा वाले चेरापूँजी और मॉसिनराम शिलांग से केवल 55 किलोमीटर दूर हैं। समस्या वर्षा की कमी नहीं, प्रबंधन की है।
4वर्गीकरण 4 अंक
नीचे बारह बातें दी गई हैं। इन्हें तीन ख़ानों में बाँटिए — (अ) बड़ी परियोजनाएँ, (ब) पारंपरिक/छोटे तरीक़े, (स) जल दुर्लभता के कारण।
- भाखड़ा-नांगल
- खादीन
- अतिशोषण
- टाँका
- हीराकुड
- असमान वितरण
- गुल / कुल
- सरदार सरोवर
- बाँस ड्रिप सिंचाई
- औद्योगिक अपशिष्ट से प्रदूषण
- जोहड़
- निजी नलकूपों से भौम जलस्तर गिरना
उत्तर देखिए
- (अ) बड़ी परियोजनाएँ — 1, 5, 8
- (ब) पारंपरिक/छोटे तरीक़े — 2, 4, 7, 9, 11
- (स) जल दुर्लभता के कारण — 3, 6, 10, 12
इसके बाद यह पूछिए“किस ख़ाने में सबसे ज़्यादा चीज़ें आईं?” (ब) में। और फिर — “तो क्या इसका मतलब है कि छोटे तरीक़े बड़े तरीक़ों से बेहतर हैं?” यहाँ बच्चों को दोनों तरफ़ सोचने दीजिए — पाठ्यपुस्तक भी किसी एक का पक्ष नहीं लेती।
5तुलना 4 अंक
नीचे दो व्यवस्थाएँ दी गई हैं —
व्यवस्था A: सरदार सरोवर बाँध — गुजरात के 15 ज़िलों के 3112 गाँवों की 18.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई। व्यवस्था B: गंडाथूर गाँव — 200 घर, हर वर्ष लगभग 10,00,000 लीटर वर्षाजल संग्रह।
(क) दोनों में क्या समानता है? (1 अंक)
(ख) तीन बड़े अंतर बताइए। (3 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) दोनों का उद्देश्य जल की उपलब्धता बढ़ाना है।
| पक्ष | व्यवस्था A (बड़ा बाँध) | व्यवस्था B (वर्षाजल संग्रहण) |
|---|---|---|
| पैमाना | लाखों हेक्टेयर, कई राज्य | एक गाँव, 200 घर |
| कौन बनाता है | सरकार | लोग ख़ुद |
| नुक़सान | विस्थापन, तलछट, नदी का बहाव रुकना, लवणीकरण | लगभग कोई पारिस्थितिक नुक़सान नहीं |
| निर्भरता | नदी और बड़े निवेश पर | स्थानीय वर्षा पर |
6हिसाब लगाइए 4 अंक
गंडाथूर गाँव के आँकड़े ये हैं — 200 घर, हर घर लगभग 50,000 लीटर प्रति वर्ष।
(क) पूरे गाँव का वार्षिक संग्रह कितना हुआ? (1 अंक)
(ख) अगर एक व्यक्ति को जल जीवन मिशन के अनुसार प्रति दिन 55 लीटर चाहिए, तो एक व्यक्ति को साल भर में कितना पानी चाहिए? (1 अंक)
(ग) उपरोक्त हिसाब से 50,000 लीटर एक घर के कितने लोगों के लिए साल भर काफ़ी होगा? (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) 200 × 50,000 = 1,00,00,000 लीटर, यानी लगभग 10,00,000 लीटर (पाठ्यपुस्तक का दिया आँकड़ा)।
- (ख) 55 × 365 = 20,075 लीटर प्रति वर्ष।
- (ग) 50,000 ÷ 20,075 ≈ 2 से 3 लोग — यानी एक छोटे परिवार की पूरे साल की पीने-रसोई की ज़रूरत अकेले वर्षाजल से पूरी हो सकती है।
★यह प्रश्न बच्चों को चौंका देता है — क्योंकि वे पहली बार समझते हैं कि वर्षाजल संग्रहण कोई प्रतीकात्मक बात नहीं, असली विकल्प है।
7कारण-परिणाम शृंखला 4 अंक
नीचे की शृंखला में तीन कड़ियाँ ग़ायब हैं। उन्हें भरिए —
| क्रम | कड़ी |
|---|---|
| 1 | बढ़ती जनसंख्या के लिए अधिक अनाज चाहिए। |
| 2 | __________ |
| 3 | किसान निजी कुएँ और नलकूप लगाते हैं। |
| 4 | __________ |
| 5 | लोगों के लिए जल की उपलब्धता में कमी आती है। |
| 6 | __________ |
उत्तर देखिए
- 2 — इसलिए सिंचित क्षेत्र बढ़ाना पड़ता है, और सिंचित कृषि में जल का सबसे ज़्यादा उपयोग होता है।
- 4 — इससे भौम जलस्तर नीचे गिरने लगता है।
- 6 — और अंतत: भोजन सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है।
फिर पूछिए“यह चक्र कहाँ से तोड़ा जा सकता है?” उत्तर की दिशा — शुष्क कृषि तकनीकों और सूखा प्रतिरोधी फसलों से, तथा ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ जैसी जल-बचत प्रौद्योगिकियों से।
8स्थानीय अनुप्रयोग 4 अंक
अपने गाँव या मोहल्ले के बारे में सोचकर उत्तर दीजिए —
(क) आपके घर में पानी कहाँ से आता है — नल, कुआँ, हैंडपंप, टैंकर या कोई और? (1 अंक)
(ख) क्या आपके आसपास कोई पुराना जल-ढाँचा है — बावड़ी, जोहड़, नाड़ी, टाँका या तालाब? वह आज किस हालत में है? (2 अंक)
(ग) आपके घर की छत का बारिश का पानी कहाँ जाता है? (1 अंक)
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-नियमजो विद्यार्थी अपने आसपास से सही और ईमानदार उदाहरण दे, उसे पूरे अंक दीजिए — भले ही वह पाठ्यपुस्तक के शब्दों में न हो।
और (ग) का जवाब लगभग हमेशा “नाली में” होता है — यही इस अध्याय का असली सवाल है।
भाग ख — संवेदनशीलता (20%)
9दृष्टिकोण-विविधता 4 अंक
एक बड़े बाँध का प्रस्ताव है। नीचे चार लोग हैं। हर एक की तरफ़ से दो-दो वाक्य लिखिए —
| व्यक्ति | उसका पक्ष |
|---|---|
| सूखा-प्रभावित इलाक़े का किसान | |
| वह परिवार जिसका गाँव जलाशय में डूबेगा | |
| बिजली विभाग का अधिकारी | |
| नदी के निचले हिस्से का मछुआरा |
उत्तर देखिए
- किसान — मेरे खेत सूखा प्रवण हैं; सरदार सरोवर से बाड़मेर-जालौर के 2,46,000 हेक्टेयर को पानी मिलेगा, वैसे ही मुझे भी मिलेगा।
- डूबने वाला परिवार — यह ज़मीन पीढ़ियों से हमारी है; पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है कि इन परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका ख़त्म होती है।
- अधिकारी — बाँध से जल विद्युत मिलेगी, जिससे उद्योग चलेंगे और गाँवों तक बिजली पहुँचेगी।
- मछुआरा — बाँध नदी को टुकड़ों में बाँट देते हैं, जिससे अंडे देने की ऋतु में मछलियों का स्थानांतरण रुक जाता है और मेरी रोज़ी-रोटी घटती है।
मूल्यांकन-नियमसबसे ज़्यादा अंक उस उत्तर को दीजिए जो किसी को ‘ग़लत’ न बताए। पाठ्यपुस्तक ख़ुद दोनों पक्ष रखती है और किसी एक का फ़ैसला नहीं सुनाती।
10नैतिक विवेक 4 अंक
पाठ्यपुस्तक कहती है कि आज पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षाजल संग्रहण की रीति कम होती जा रही है, और इसे “दुख की बात” कहती है।
(क) लेखक ने इसे ‘दुख की बात’ क्यों कहा, जबकि लोगों को अब नहर से बारहमासी पानी मिल रहा है? (2 अंक)
(ख) क्या नहर आना अच्छी बात है या बुरी? अपना पक्ष कारण सहित लिखिए। (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) क्योंकि इससे एक सदियों पुराना ज्ञान और आत्मनिर्भरता ख़त्म हो रही है। टाँका सिर्फ़ पानी का टैंक नहीं था — वह घर को ठंडा भी रखता था, वर्षाजल का शुद्धतम रूप देता था, और उसे किसी बाहरी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। अगर कभी नहर का पानी रुक जाए, तो अब लौटने के लिए कुछ बचेगा नहीं।
- (ख) दोनों तरफ़ के तर्क स्वीकार्य। सबसे अच्छा उत्तर वह होगा जो कहे — “नहर आना अच्छी बात है, पर टाँके बंद करना ज़रूरी नहीं था। दोनों साथ चल सकते थे।”
11‘पानी लाना’ किसका काम है 4 अंक
पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 19) लिखती है कि जल की कमी की बात करते ही हमारे मन में “जल से भरे मटके संतुलित करती हुई और जल भरने के लिए लंबा रास्ता तय करती पनिहारिनों” के चित्र आ जाते हैं। चित्र 3.1 में भी मटके लिए कतार में खड़ी महिलाएँ हैं।
(क) पानी लाने का काम ज़्यादातर कौन करता है? (1 अंक)
(ख) इससे उनके जीवन पर क्या असर पड़ता होगा? कम से कम दो बातें लिखिए। (2 अंक)
(ग) जल जीवन मिशन जैसी योजना से इस स्थिति में क्या बदलाव आ सकता है? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) ज़्यादातर महिलाएँ और लड़कियाँ।
- (ख) रोज़ कई घंटे इसी में चले जाते हैं; लड़कियों की पढ़ाई छूट सकती है; भारी मटके ढोने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है; और उनके पास अपने लिए या कमाई के लिए समय नहीं बचता।
- (ग) जल जीवन मिशन का लक्ष्य ही यही है — “जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना और विशेष रूप से जीवनयापन को आसान बनाना”; हर घर तक नल का पानी आने से यह बोझ बहुत कम हो जाता है।
शिक्षक के लिएयह प्रश्न कक्षा में ज़रूर पूछिए, ख़ासकर लड़कियों से। उनके अपने अनुभव सबसे अच्छा उत्तर बन जाते हैं।
12सहयोगात्मक बहस 4 अंक
कक्षा को दो दलों में बाँटिए और यह विषय दीजिए —
“भारत को बड़े बाँधों की ज़रूरत है।”
दल अ — पक्ष में। दल ब — विपक्ष में। हर दल को पाठ्यपुस्तक से कम से कम तीन प्रमाण देने होंगे।
उत्तर देखिए
| दल अ (हाँ, ज़रूरत है) | दल ब (नहीं, विकल्प बेहतर हैं) |
|---|---|
| आठ उद्देश्य एक साथ पूरे होते हैं — सिंचाई, बिजली, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण आदि | नदी का प्राकृतिक बहाव रुकता है और तलछट जलाशय में जमा होता है |
| नेहरू ने इन्हें ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा; इनसे कृषि, उद्योग और नगरीय अर्थव्यवस्था का समन्वित विकास होता है | नदियाँ टुकड़ों में बँटती हैं और अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का स्थानांतरण रुकता है |
| सरदार सरोवर से बाड़मेर-जालौर के 2,46,000 हेक्टेयर को पानी मिलेगा, जहाँ संपूर्ण कमांड क्षेत्र सूखा प्रवण है | मृदाओं का लवणीकरण; विस्थापन; भूकंप की संभावना; जल-जनित बीमारियाँ |
| भाखड़ा-नांगल और हीराकुड जैसे उदाहरण सफल रहे | सबसे बड़ी विडंबना — बाढ़ रोकने वाले बाँध ही बाढ़ का कारण बन जाते हैं; और गंडाथूर जैसे गाँव बिना बाँध के भी 10 लाख लीटर जुटा लेते हैं |
शिक्षक के लिएबहस के अंत में विजेता घोषित मत कीजिए। बोर्ड पर सिर्फ़ यह लिखिए — “पाठ्यपुस्तक ने भी नहीं किया।”
भाग ग — सृजनात्मकता (30%)
13अपने विद्यालय का जल-नक़्शा 5 अंक
अपने विद्यालय का एक नक़्शा बनाइए और उस पर दिखाइए —
- पानी कहाँ से आता है (नल, टंकी, हैंडपंप, बोरवेल)
- कहाँ-कहाँ ख़र्च होता है
- कहाँ बर्बाद होता है (टपकते नल, खुली टंकी)
- और छत का बारिश का पानी कहाँ जाता है
फिर तीन सुझाव लिखिए जिनसे विद्यालय में पानी बचाया जा सके।
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-संकेतसबसे अच्छा उत्तर वह है जिसमें सुझाव लागू करने योग्य हों — जैसे “टपकते नल की मरम्मत”, “छत के पाइप को टंकी से जोड़ना”, “हाथ धोने का पानी क्यारी में मोड़ना”। सामान्य नारे (जैसे “पानी बचाओ”) पर कम अंक दीजिए।
14डिज़ाइन-चुनौती: अपना टाँका 5 अंक
आपको अपने घर के लिए एक टाँका डिज़ाइन करना है।
(क) उसका चित्र बनाइए और उसमें दिखाइए — छत, पाइप, छन्नी और भूमिगत टैंक। (3 अंक)
(ख) नीचे लिखिए कि आप पहली बारिश के पानी का क्या करेंगे और क्यों। (2 अंक)
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-संकेत(ख) का सही उत्तर — पहली बारिश का पानी संग्रहित नहीं करेंगे, क्योंकि वह छत और नलों को साफ़ करने में जाता है। यह वही बात है जो पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 26 पर कहती है। जो विद्यार्थी यह पकड़ ले, उसे पूरे अंक दीजिए।
15प्रति-तथ्यात्मक (‘यदि… तो’) 5 अंक
नीचे तीन ‘यदि’ दिए गए हैं। हर एक के लिए दो-दो परिणाम कारण सहित लिखिए —
| # | यदि… | तो क्या होता? |
|---|---|---|
| 1 | यदि इंदिरा गांधी नहर न बनी होती | |
| 2 | यदि हर घर में टाँका अनिवार्य कर दिया जाए (जैसे तमिलनाडु में) | |
| 3 | यदि बाँधों में तलछट जमा न होता |
उत्तर देखिए
- 1 — पश्चिमी राजस्थान में बारहमासी पेयजल न होता, इसलिए टाँकों की परंपरा आज भी ज़िंदा होती; पर साथ ही श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जैसे ज़िलों में गेहूँ और कपास की खेती भी न हो पाती।
- 2 — भूमिगत जल का पुनर्भरण होता, नालियों में बहने वाला पानी बचता, और गर्मी में टैंकर की निर्भरता घटती; पर इसे लागू करवाना और लोगों का व्यवहार बदलना सबसे मुश्किल काम होता — यही तो अटल जल का मुख्य लक्ष्य है।
- 3 — बाँध बाढ़ नियंत्रण में ज़्यादा सफल रहते और उनकी उम्र लंबी होती; साथ ही तलछट (जो प्राकृतिक उर्वरक है) बाढ़ के मैदानों तक पहुँचती रहती और भूमि निम्नीकरण कम होता।
मूल्यांकन-नियमसबसे ऊँचे अंक उस उत्तर को दीजिए जो दोनों तरफ़ सोचे — यानी “यह अच्छा होता, पर यह नुक़सान भी होता।”
16विचार-संयोजन 5 अंक
अध्याय 1, 2 और 3 को जोड़कर एक तालिका पूरी कीजिए —
| पिछली बात | इस अध्याय में वह कहाँ दिखती है |
|---|---|
| अध्याय 1 — “अधिक सिंचाई से जलाक्रांतता और लवणीकरण होता है” | |
| अध्याय 1 — “जल नवीकरण योग्य–सतत/प्रवाह संसाधन है” | |
| अध्याय 2 — “स्थानीय समुदायों को संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए” | |
| अध्याय 1 — “संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं” |
उत्तर देखिए
- पहली — इसी अध्याय में सिंचाई से मृदाओं के लवणीकरण की चेतावनी दी गई है।
- दूसरी — यहाँ बताया गया है कि जल का नवीकरण जलीय चक्र से होता है।
- तीसरी — गंडाथूर के 200 घर, तमिलनाडु का क़ानून और राजस्थान के टाँके — तीनों में लोगों ने ख़ुद किया।
- चौथी — यही सबसे गहरी कड़ी है: बारिश का पानी तब तक ‘संसाधन’ नहीं है जब तक हम उसे रोककर न रखें। नहीं तो वह नदी-नालों से बहकर समुद्र में चला जाता है।
17साक्षात्कार-परियोजना 5 अंक
अपने घर या मोहल्ले के किसी बुज़ुर्ग से बात कीजिए और नीचे की तालिका भरिए —
| प्रश्न | उनका उत्तर |
|---|---|
| आपके बचपन में घर में पानी कहाँ से आता था? | |
| तब कुआँ कितना गहरा था? अब कितना गहरा खोदना पड़ता है? | |
| क्या आपके गाँव में कोई तालाब, बावड़ी, जोहड़ या नाड़ी थी? वह अब किस हालत में है? | |
| तब बारिश का पानी कहाँ जाता था? अब कहाँ जाता है? |
फिर पाँच-छह वाक्यों में लिखिए कि इस बातचीत से आपने क्या सीखा।
उत्तर देखिए
शिक्षक के लिएदूसरा सवाल सबसे ज़्यादा असर करता है। जब कोई बुज़ुर्ग कहता है कि “पहले बीस हाथ पर पानी मिल जाता था, अब सौ हाथ खोदना पड़ता है” — तो बच्चों को ‘भौम जलस्तर नीचे गिरना’ रटाना नहीं पड़ता।
18पत्र लिखिए 5 अंक
कल्पना कीजिए कि आपके गाँव/मोहल्ले में गर्मियों में हर साल पानी की कमी हो जाती है।
अपने सरपंच या पार्षद को एक पत्र लिखिए जिसमें —
- समस्या बताइए (एक अनुच्छेद)
- कारण बताइए (पाठ्यपुस्तक से कम से कम दो कारण जोड़िए)
- और तीन ठोस सुझाव दीजिए
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-संकेतअच्छा उत्तर वह है जिसमें कारण पाठ्यपुस्तक से जुड़े हों (अतिशोषण, असमान वितरण, भौम जलस्तर गिरना, प्रदूषण) और सुझाव व्यावहारिक हों (छत वर्षाजल संग्रहण, पुराने तालाब/जोहड़ की सफ़ाई, टपकते नल की मरम्मत, ड्रिप सिंचाई)। ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का हवाला देने वाले उत्तर को अतिरिक्त अंक दीजिए।
अंक-विभाजन
| भाग | प्रश्न | कुल अंक |
|---|---|---|
| क — जागरूकता | 1 से 8 | 32 |
| ख — संवेदनशीलता | 9 से 12 | 16 |
| ग — सृजनात्मकता | 13 से 18 | 30 |
(यह वितरण सुझावात्मक है; परीक्षा में कुछ ही प्रश्न चुनकर पूछे जाएँगे।)
मूल्यांकन रूब्रिक
| स्तर | जागरूकता | संवेदनशीलता | सृजनात्मकता |
|---|---|---|---|
| प्रारंभिक | आँकड़े बता पाता है, पर उनसे निष्कर्ष नहीं निकाल पाता। | केवल एक पक्ष देख पाता है। | पाठ्यपुस्तक की बात ज्यों-की-त्यों दोहरा देता है। |
| विकासशील | आँकड़े की व्याख्या कर पाता है, पर नयी स्थिति पर लागू नहीं कर पाता। | दूसरे पक्ष को पहचानता है, पर उसका कारण नहीं समझा पाता। | सुझाव देता है, पर वे सामान्य नारे होते हैं। |
| दक्ष | आँकड़ा, कारण और उदाहरण — तीनों जोड़कर लिख पाता है। | दोनों पक्षों के कारण बता पाता है, बिना किसी को ‘ग़लत’ कहे। | अपने गाँव या घर का असली उदाहरण देकर लागू करने योग्य योजना बनाता है। |
| उन्नत | आँकड़ों से ख़ुद हिसाब लगाकर नया निष्कर्ष निकालता है और उसकी सीमा भी बताता है। | किसान, विस्थापित, महिला और भावी पीढ़ी — सबके नज़रिये से सोच पाता है। | दूसरे अध्यायों और विषयों से जोड़कर मौलिक निष्कर्ष निकालता है। |
शिक्षक के लिए तीन सुझाव
- इस अध्याय के PARAKH प्रश्नों में हिसाब लगवाना सबसे कारगर है। प्रश्न 6 (गंडाथूर का हिसाब) के बाद बच्चे पहली बार समझते हैं कि वर्षाजल संग्रहण कोई प्रतीकात्मक बात नहीं, असली विकल्प है।
- प्रश्न 17 (साक्षात्कार) ज़रूर गृहकार्य दीजिए और अगली कक्षा में उत्तर सुनवाइए। कुएँ की गहराई वाला जवाब पूरी कक्षा को वह सिखा देता है जो पन्ने नहीं सिखा पाते।
- और सबसे ज़रूरी — इस अध्याय में किसी एक पक्ष के साथ खड़े मत होइए। पाठ्यपुस्तक ख़ुद नेहरू का ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ भी लिखती है और बाँधों की हर आलोचना भी। बच्चों को दोनों देने दीजिए — यही असली योग्यता है।