अध्याय 4वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

इंटरैक्टिव अध्याय45 मिनट

NCERT — आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 4 (पृ. 55–73)।

कक्षा 10 · अर्थशास्त्र · अध्याय 4

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

बाज़ार में चीन के खिलौने, अमेरिका की कंपनी की कारें, विदेशी ग्राहकों के लिए भारत के कॉल सेंटर: यह अध्याय दिखाता है कि देश आपस में इतनी तेज़ी से कैसे जुड़ रहे हैं, किसने यह जुड़ाव संभव बनाया, और इसका लाभ किसे मिला, किसे नहीं। दस पड़ावों में चलिए।

किताब एक सवाल से शुरू होती है: आज हमारे बाज़ारों में इतने विकल्प कहाँ से आए? दो दशक पहले भारत के बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं थी। जवाब है वैश्वीकरण। अध्याय के तीन हिस्से हैं।

देश कैसे जुड़ते हैं

कई देशों में फैला उत्पादन, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेश व्यापार

पड़ाव 1–3

वैश्वीकरण और उसके कारक

परिभाषा, प्रौद्योगिकी, उदारीकरण, विश्व व्यापार संगठन

पड़ाव 4–7

असर और आगे का रास्ता

किसे लाभ मिला, छोटे उत्पादक और श्रमिक, न्यायसंगत वैश्वीकरण

पड़ाव 8–10

इस्तेमाल कैसे करें

  • हर पड़ाव एक सवाल से शुरू होता है। पहले उस पर ख़ुद सोचिए, फिर आगे पढ़िए।
  • छाँटिए, क्रम लगाइए, जोड़ियाँ मिलाइए, सही-ग़लत चुनिए: हर काम किताब के अपने उदाहरण पर बना है।
  • किताब के हर प्रश्न और गतिविधि के नीचे "जवाब देखिए" दबाइए।
  • हर पड़ाव के अंत में छोटी जाँच है। सब पूरी होने पर ऊपर की पट्टी भर जाती है।

दस पड़ाव, दस सवाल

  1. अन्तरदेशीय उत्पादन · एक ही कंपनी का सामान कई देशों में मिलकर कैसे बनता है, और ऐसी कंपनी को क्या कहते हैं?
  2. उत्पादन को जोड़ना · बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों के उत्पादन पर अपना असर किन तरीकों से जमाती हैं?
  3. विदेश व्यापार · जब दूसरे देश का सस्ता माल हमारे बाज़ार में आता है, तो किसे लाभ होता है और किसे नुकसान?
  4. वैश्वीकरण क्या है · वैश्वीकरण आख़िर है क्या, और देशों के बीच क्या-क्या आता-जाता है?
  5. संभव बनाने वाले कारक · कई देशों में फैला उत्पादन चलाना पहले इतना आसान क्यों नहीं था? किस चीज़ ने इसे संभव बनाया?
  6. उदारीकरण · सरकार विदेशी माल को रोकती क्यों है, और 1991 के आसपास भारत ने यह रोक क्यों हटाई?
  7. विश्व व्यापार संगठन · जो संगठन सबसे व्यापार की रोकें हटाने को कहता है, क्या उसके नियम सब पर बराबर लागू होते हैं?
  8. भारत पर प्रभाव · भारत में वैश्वीकरण से किसे लाभ मिला?
  9. छोटे उत्पादक और श्रमिक · बढ़ी प्रतिस्पर्धा का छोटे उत्पादकों और श्रमिकों पर क्या असर पड़ा?
  10. न्यायसंगत वैश्वीकरण · वैश्वीकरण का लाभ सब तक कैसे पहुँचे, और इसमें कौन क्या कर सकता है?

1अन्तरदेशीय उत्पादन

इस पड़ाव का सवालपृ. 55–56

एक ही कंपनी का सामान कई देशों में मिलकर कैसे बनता है, और ऐसी कंपनी को क्या कहते हैं?

पिछली बात से कड़ी अध्याय 3 में मुद्रा और ऋण की बात हुई: पैसा जमाकर्ताओं से कर्ज़दारों तक कैसे पहुँचता है। अब देखिए कि उत्पादन और पैसा देशों की सीमाएँ पार करके कैसे चलते हैं।

बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन ज़्यादातर देशों की सीमाओं के अंदर ही होता था। सीमा पार जाते थे कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद। देशों को जोड़ने का मुख्य ज़रिया व्यापार था।

अब ऐसी कंपनियाँ हैं जिनका उत्पादन कई देशों में होता है। किताब इन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनी कहती है:

"एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।"

ये कंपनियाँ कारखाने और कार्यालय वहाँ लगाती हैं जहाँ सस्ता श्रम और दूसरे संसाधन मिलें, ताकि उत्पादन लागत कम हो और लाभ अधिक।

किताब का उदाहरण (पृ. 56): औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बड़ी कंपनी

  1. संयुक्त राज्य अमेरिकाकंपनी के अनुसंधान केन्द्र में उत्पादों का डिज़ाइन तैयार होता है।
  2. चीनपुर्ज़े यहाँ बनते हैं, फिर जहाज़ में लादकर आगे भेजे जाते हैं।
  3. मेक्सिको और पूर्वी यूरोपपुर्ज़ों को जोड़कर उपकरण तैयार होता है।
  4. पूरा विश्वतैयार उपकरण विश्व भर में बिकता है।
  5. भारतइस बीच कंपनी की ग्राहक सेवा भारत के कॉल सेंटरों से चलती है।

यानी कंपनी सिर्फ़ तैयार माल ही दुनिया भर में नहीं बेच रही, वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन भी विश्व स्तर पर कर रही है। उत्पादन छोटे भागों में बँटकर कई देशों में फैल गया है।

छोटे-छोटे केबिनों में बैठे युवा, कान पर हेडफ़ोन और मुँह के पास माइक लगाए; आगे वाली युवती की मेज़ पर कीबोर्ड और कागज़ हैं, और बीच में एक युवक खड़ा है।

कॉल सेंटर: भारत का एक कॉल सेंटर। ऐसे केन्द्रों से फ़ोन और इंटरनेट के ज़रिए दूसरे देशों के ग्राहकों को सेवा दी जाती है।

Photograph by Sonamsaxena (English Wikipedia); Wikimedia Commons, public domain.

कौन-सा देश क्यों? (पृ. 56–57)

बाईं ओर एक देश दबाइए, फिर दाईं ओर कंपनी को वहाँ क्या मिलता है।

सही जोड़ियाँ

संयुक्त राज्य अमेरिका
अनुसंधान केन्द्र: उत्पादों का डिज़ाइन
चीन
सस्ता विनिर्माण स्थल: पुर्ज़े
मेक्सिको और पूर्वी यूरोप
अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से निकटता: उपकरण का संयोजन
भारत
कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक: ग्राहक सेवा

किताब के अनुसार इस तरह उत्पादन फैलाने से कंपनी की लागत में लगभग 50–60 प्रतिशत की बचत हो सकती है।

कंपनी उत्पादन की जगह कैसे चुनती है

  • जगह बाज़ार के नज़दीक हो;
  • वहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले;
  • उत्पादन के दूसरे कारक भी उपलब्ध हों;
  • सरकारी नीतियाँ कंपनी के हितों का ध्यान रखें।

बहुराष्ट्रीय है या नहीं?

परिभाषा याद रखिए: एक से अधिक देशों में उत्पादन। हर कार्ड को सही खाने में रखिए (कार्ड दबाइए, फिर खाना दबाइए)।

सही खाने

बहुराष्ट्रीय कंपनी
फोर्ड मोटर्स: विश्व के 26 देशों में फैली अमेरिकी कंपनी · कारगिल फूड्स: अमेरिकी कंपनी, जिसके तेल शोधक केन्द्र भारत में हैं · टाटा मोटर्स: भारतीय कंपनी, जो विश्व स्तर पर अपना काम फैला रही है
बहुराष्ट्रीय नहीं
होसुर में रवि की संधारित्र बनाने वाली कंपनी · लुधियाना का एक घर, जहाँ एक बड़ी कंपनी के ऑर्डर पर फुटबाल बनते हैं

आओ–इस पर विचार करें (पृ. 57)

एक ब्रांड लेबल पर "मेड इन थाइलैण्ड" लिखा है, पर उसमें एक भी थाई उत्पाद नहीं है। किताब का कथन "…कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है…" से शुरू होता है। इसे पूरा करके दिखाइए कि वस्त्र उद्योग में उत्पादन विश्व भर में कैसे फैला है।

एक संभावित जवाब देखिए
  • कोई एक तय उत्तर नहीं है; बस हर चरण अलग देश में दिखाना है। एक संभव पूर्ति: कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है, किसी दूसरे देश में उसकी बुनाई और रंगाई करा सकती है, बटन और ज़िप किसी तीसरे देश से मँगा सकती है, और अंत में सिलाई थाइलैण्ड में कराकर लेबल लगा सकती है। हर चरण वहाँ होता है जहाँ वह सबसे अच्छा और सस्ता हो, इसलिए एक कपड़े का उत्पादन कई देशों में फैल जाता है।

जाँच पड़ाव

  1. 1बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं?

  2. 2किताब के अनुसार कई देशों में उत्पादन फैलाने से बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत में लगभग कितनी बचत हो सकती है?

  3. 3किताब के उदाहरण (पृ. 56) में कंपनी की ग्राहक सेवा कहाँ से होती है?

2उत्पादन को जोड़ना

इस पड़ाव का सवालपृ. 57–59

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों के उत्पादन पर अपना असर किन तरीकों से जमाती हैं?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 1 में एक कंपनी का उत्पादन कई देशों में बँटा दिखा। अब देखिए कि वह दूसरे देशों की कंपनियों और छोटे उत्पादकों से कैसे जुड़ती है।

बहुराष्ट्रीय कंपनी दूसरे देशों के उत्पादन से कई तरह से जुड़ती है। किताब इसके ये रास्ते बताती है:

स्थानीय कंपनी से साझेदारी (संयुक्त उत्पादन)
स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ होता है: बहुराष्ट्रीय कंपनी अतिरिक्त निवेश के लिए धन दे सकती है, जैसे तेज़ उत्पादन की मशीनें खरीदने के लिए; और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी भी ला सकती है।
स्थानीय कंपनी को खरीदना
किताब के शब्दों में: "बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।"
छोटे उत्पादकों को ऑर्डर
वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान जैसे उद्योगों में विकसित देशों की बड़ी कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देती हैं और माल अपने ब्राण्ड नाम से बेचती हैं। मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करने की इनकी "प्रचण्ड क्षमता" होती है।
स्थानीय कंपनियों से निकट प्रतिस्पर्धा
बाज़ार में स्थानीय कंपनियों से सीधी होड़ करके भी ये दूर के उत्पादन पर असर डालती हैं।

निवेश और विदेशी निवेश

भूमि, भवन, मशीन और दूसरे उपकरण जैसी परिसंपत्तियाँ खरीदने में लगाया गया पैसा निवेश है। निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ कमाएँगी।

"बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।"

कारगिल फूड्स (पृ. 58)

अमेरिकी कंपनी कारगिल फूड्स ने परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियाँ खरीदीं। परख फूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में हैं। आज कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है।

कितनी बड़ी? कई शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के पूरे बजट से भी अधिक है।

किताब की दो तस्वीरें (पृ. 58): लुधियाना के एक घर में एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए फुटबाल बनाते लोग; और विकासशील देशों में बनी जीन्स, जो अमेरिका में 6500 रु. में बेची जा रही है।

कौन-सा तरीका?

हर उदाहरण को उसके तरीके वाले खाने में रखिए।

सही खाने

साझेदारी
फोर्ड मोटर्स ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से चेन्नई के निकट संयंत्र लगाया · स्थानीय कंपनी को तेज़ उत्पादन की मशीनों के लिए धन और नई प्रौद्योगिकी मिलती है
स्थानीय कंपनी खरीदना
कारगिल फूड्स ने परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियाँ खरीदीं · परख फूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में हैं
छोटे उत्पादकों को ऑर्डर
लुधियाना के एक घर में बड़ी कंपनी के लिए फुटबाल बनते हैं · वस्त्र और जूते-चप्पल के छोटे उत्पादक बड़ी विदेशी कंपनी का माल बनाते हैं, जो उसी के ब्राण्ड नाम से बिकता है

फोर्ड मोटर्स भारत में (पृ. 59)

किताब के बॉक्स की बातें क्रम में लगाइए।

▲ पहले

  1. 1चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश; महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से विशाल संयंत्र
  2. 2फोर्ड मोटर्स: अमेरिकी कंपनी, विश्व के 26 देशों में फैली, विश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता
  3. 3वर्ष 2017 तक: भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें बिक रही थीं, और 1,81,000 कारें भारत से दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात हुईं
  4. 41995: फोर्ड मोटर्स भारत आई

▼ बाद में

सही क्रम

  1. फोर्ड मोटर्स: अमेरिकी कंपनी, विश्व के 26 देशों में फैली, विश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता
  2. 1995: फोर्ड मोटर्स भारत आई
  3. चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश; महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से विशाल संयंत्र
  4. वर्ष 2017 तक: भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें बिक रही थीं, और 1,81,000 कारें भारत से दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात हुईं
बंदरगाह पर तार की जाली के पीछे कतारों में खड़ी बहुत-सी नई कारें; पीछे ऊँची क्रेनें।

बंदरगाह: बंदरगाह पर कतारों में खड़ी नई कारें।

Photograph by KiranSravan, 12 March 2010; Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0.

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 59)

1क्या आप मानते हैं कि फोर्ड मोटर्स एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है? क्यों?

जवाब देखिए
  • हाँ। यह अमेरिकी कंपनी विश्व के 26 देशों में फैली है और भारत में भी इसका संयंत्र है, यानी यह एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।

2विदेशी निवेश क्या है? फोर्ड मोटर्स ने भारत में कितना निवेश किया था?

जवाब देखिए
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश विदेशी निवेश कहलाता है। फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश किया था।

3भारत में संयंत्र लगाकर फोर्ड जैसी कंपनियाँ भारत के विशाल बाज़ार और कम उत्पादन लागत, दोनों का लाभ उठाती हैं। इस कथन की व्याख्या कीजिए।

जवाब देखिए
  • बाज़ार: भारत में ख़रीदार बहुत हैं; वर्ष 2017 तक फोर्ड भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें बेच रही थी।
  • कम लागत: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वहाँ उत्पादन करती हैं जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम और दूसरे संसाधन मिलें, और पुर्ज़े देने वाले स्थानीय विनिर्माता पास हों। इसीलिए फोर्ड ने भारत में बनी 1,81,000 कारें दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात कीं।
  • यानी भारत उसका बाज़ार भी है और सस्ता उत्पादन केन्द्र भी।

4कंपनी अपने वैश्विक कारोबार के लिए भारत को कार-पुर्ज़ों के विनिर्माण केन्द्र के रूप में क्यों विकसित करना चाहती है? इन बातों पर सोचिए: (अ) श्रम और अन्य संसाधनों पर लागत, (ब) पुर्ज़े देने वाले स्थानीय विनिर्माता, (स) भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता।

जवाब देखिए
  • (अ) श्रम और दूसरे संसाधन कम लागत पर मिलें तो पुर्ज़े सस्ते बनते हैं।
  • (ब) कल-पुर्ज़े देने वाले कई स्थानीय विनिर्माता पहले से मौजूद हों तो आपूर्ति पास और सस्ती मिलती है; सब कुछ ख़ुद नहीं बनाना पड़ता।
  • (स) भारत और चीन में ग्राहक बहुत बड़ी संख्या में हैं; उनके पास उत्पादन हो तो माल जल्दी और कम ढुलाई में पहुँचता है।
  • तीनों मिलकर लागत घटाते हैं और लाभ बढ़ाते हैं।

5भारत में फोर्ड मोटर्स द्वारा कारों के निर्माण से उत्पादन किस प्रकार परस्पर संबंधित होगा?

जवाब देखिए
  • फोर्ड का भारतीय संयंत्र महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से बना, और स्थानीय विनिर्माता इसे पुर्ज़े देते हैं। यहाँ बनी कारें दूसरे विकासशील देशों को और कार-पुर्ज़े विश्व भर में फोर्ड के कारखानों को जाते हैं। इस तरह भारत का उत्पादन दूसरे देशों के उत्पादन और बाज़ारों से जुड़ जाता है (पृ. 59, 61)।

6बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, अन्य कंपनियों से किस प्रकार अलग हैं?

जवाब देखिए
  • साधारण कंपनी प्रायः एक देश में उत्पादन करती है; बहुराष्ट्रीय कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व रखती है।
  • इनके पास अपार संपदा होती है; कई शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के पूरे बजट से भी अधिक है।
  • ये दूर के उत्पादकों के लिए मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय कर सकती हैं।

7लगभग सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अमेरिका, जापान या यूरोप की हैं, जैसे नोकिया, कोका-कोला, पेप्सी, होन्डा, नाइकी। क्या आप अनुमान कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है?

एक संभावित जवाब देखिए
  • यह अनुमान का प्रश्न है। अध्याय के आधार पर: दूसरे देशों में कारखाने लगाने, स्थानीय कंपनियाँ खरीदने और नवीनतम प्रौद्योगिकी लाने के लिए अपार धन चाहिए, जो विकसित देशों की बड़ी कंपनियों के पास है। ये देश पहले विकसित हुए, इसलिए इनकी कंपनियाँ पहले बड़ी हुईं। विश्व व्यापार संगठन भी विकसित देशों की पहल पर बना, जो मुक्त व्यापार और निवेश के नियम बनाता है।

जाँच पड़ाव

  1. 1बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता क्या है?

  2. 2कारगिल ने किस भारतीय कंपनी को खरीदा?

  3. 3फोर्ड मोटर्स भारत में किस वर्ष आई?

3विदेश व्यापार

इस पड़ाव का सवालपृ. 59–61

जब दूसरे देश का सस्ता माल हमारे बाज़ार में आता है, तो किसे लाभ होता है और किसे नुकसान?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 2 में कंपनियों ने दूसरे देशों में निवेश किया। देशों को जोड़ने का दूसरा, पुराना रास्ता है विदेश व्यापार।

लंबे समय से विदेश व्यापार ही देशों को जोड़ने का मुख्य रास्ता रहा है। ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी व्यापारिक कंपनियाँ व्यापार के लिए ही भारत आई थीं।

विदेश व्यापार से उत्पादक को अपने देश के बाहर के बाज़ार मिलते हैं, और ख़रीदारों को अपने देश में बनी वस्तुओं से आगे के विकल्प।

किताब का उदाहरण: भारत में चीन के खिलौने (पृ. 60)

  1. चीनी विनिर्माताउन्होंने देखा कि भारत में खिलौने अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं, और भारत को खिलौने निर्यात करने लगे।
  2. भारत का बाज़ारख़रीदारों के सामने अब भारतीय और चीनी, दोनों तरह के खिलौने। चीनी खिलौने सस्ते हैं और उनके डिज़ाइन नये हैं।
  3. एक वर्ष मेंखिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली।

किसे लाभ, किसे नुकसान?

चीनी खिलौनों के भारत आने का असर: हर कार्ड को सही खाने में रखिए।

सही खाने

लाभ
भारत के ख़रीदार: कम कीमत पर अधिक विकल्प · चीन के खिलौना निर्माता: नया बड़ा बाज़ार · वह उत्पादक जिसे अपने देश से बाहर का बाज़ार मिला
नुकसान
भारत के खिलौना निर्माता: उनके खिलौनों की बिक्री घटी

बाज़ार कैसे जुड़ते हैं (पृ. 61)

व्यापार खुलने से वस्तुएँ एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार में जाती हैं, बाज़ार में विकल्प बढ़ते हैं, और दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। हज़ारों मील दूर बैठे दो देशों के उत्पादक भी एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं।

"इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।"

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 61)

1अतीत में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम क्या था? अब यह अलग कैसे है?

जवाब देखिए
  • अतीत में मुख्य माध्यम विदेश व्यापार था; ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियाँ व्यापार के लिए ही भारत आईं। अब व्यापार के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कई देशों में फैला उत्पादन और विदेशी निवेश भी देशों को जोड़ते हैं, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में है।

2विदेश व्यापार और विदेशी निवेश में अंतर स्पष्ट कीजिए।

जवाब देखिए
विदेश व्यापारविदेशी निवेश
क्यादेशों के बीच वस्तुओं की खरीद-बिक्रीबहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देश में भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों में लगाया गया पैसा
किसलिएउत्पादक को दूसरे देशों के बाज़ार, ख़रीदार को अधिक विकल्पइस आशा से कि परिसंपत्तियाँ लाभ कमाएँगी

3हाल के वर्षों में चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है। यह आयात (क) चीन की इस्पात कंपनियों, (ख) भारत की इस्पात कंपनियों और (ग) चीन में इस्पात खरीदने वाले दूसरे उद्योगों को कैसे प्रभावित करेगा?

जवाब देखिए
  • (क) चीन की इस्पात कंपनियों को अपने ही बाज़ार में भारतीय इस्पात से प्रतिस्पर्धा करनी होगी; उन्हें कीमत घटानी या गुणवत्ता सुधारनी पड़ेगी, वरना बिक्री घटेगी।
  • (ख) भारत की इस्पात कंपनियों को चीन का बड़ा बाज़ार मिलेगा और उनकी बिक्री बढ़ेगी।
  • (ग) चीन के उद्योगों के पास इस्पात खरीदने के अधिक विकल्प होंगे, और वे सस्ता इस्पात चुनकर अपनी लागत घटा सकेंगे।
  • चीनी खिलौनों वाला उदाहरण उलटी दिशा में यही दिखाता है।

4चीन के बाज़ारों में भारत से इस्पात का आयात किस प्रकार दोनों देशों के इस्पात-बाज़ार के एकीकरण में सहायता करेगा?

जवाब देखिए
  • भारतीय इस्पात चीन के बाज़ार में बिकेगा, तो वहाँ ख़रीदार दोनों देशों के इस्पात में से चुनेंगे, दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे, और दोनों बाज़ारों में इस्पात का मूल्य एक समान होने लगेगा। इस तरह दोनों देशों के इस्पात बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ जाएँगे।

जाँच पड़ाव

  1. 1विदेश व्यापार से उत्पादकों को क्या मिलता है?

  2. 2किताब के अनुसार एक वर्ष में खिलौने की कितनी दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली?

  3. 3व्यापार खुलने पर दो देशों के बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य कैसा होने लगता है?

4वैश्वीकरण क्या है

इस पड़ाव का सवालपृ. 61–62

वैश्वीकरण आख़िर है क्या, और देशों के बीच क्या-क्या आता-जाता है?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 1–3 में उत्पादन, निवेश और व्यापार, तीनों देशों को जोड़ते दिखे। अब इन्हें एक नाम दीजिए।

बीते दो-तीन दशकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसी जगहें खोज रही हैं जहाँ उत्पादन सस्ता हो। विदेशी निवेश बढ़ा है, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में है।

जैसे भारत में फोर्ड मोटर्स का संयंत्र सिर्फ़ भारत के लिए कारें नहीं बनाता; वह दूसरे विकासशील देशों को कारें और विश्व भर में अपने कारखानों के लिए कार-पुर्ज़े भी निर्यात करता है।

किताब की परिभाषा

"विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।"

इस प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ मुख्य भूमिका निभा रही हैं।

देशों के बीच क्या आता-जाता है

वस्तुएँ और सेवाएँ
विदेश व्यापार से, जैसे चीन के खिलौने या भारत के कॉल सेंटरों की सेवा।
निवेश
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारखाने, कार्यालय और खरीदी गई कंपनियाँ।
प्रौद्योगिकी
साझेदारी में बहुराष्ट्रीय कंपनी नवीनतम प्रौद्योगिकी साथ लाती है।
लोग
लोग बेहतर आय, रोज़गार और शिक्षा के लिए दूसरे देश जाते हैं, पर अनेक प्रतिबंधों के कारण लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा।

सही या ग़लत?

  1. वैश्वीकरण में देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान बढ़ा है।

  2. वैश्वीकरण में देशों के बीच निवेश का आना-जाना बढ़ा है।

  3. वैश्वीकरण में लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ा है।

  4. वैश्वीकरण में देशों के बीच प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान भी होता है।

  5. वैश्वीकरण में मुख्य भूमिका किसानों की है।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 62)

1वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की क्या भूमिका है?

जवाब देखिए
  • मुख्य भूमिका। ये उत्पादन के लिए सस्ती जगहें खोजकर कई देशों में उत्पादन फैलाती हैं, विदेशी निवेश करती हैं, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इनके नियंत्रण में है। इनसे दूर-दूर के देशों का उत्पादन और बाज़ार जुड़ते हैं।

2वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं, जिनके द्वारा देशों को परस्पर संबंधित किया जा सकता है?

जवाब देखिए
  • विदेश व्यापार (वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान), विदेशी निवेश (बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दूसरे देशों में उत्पादन), प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान, और लोगों का आवागमन (बेहतर आय, रोज़गार और शिक्षा के लिए; हालाँकि प्रतिबंधों के कारण यह ज़्यादा नहीं बढ़ा)।

3सही विकल्प चुनिए:

  • देशों को जोड़ने से वैश्वीकरण का परिणाम होगा:

जवाब देखिए
  • (ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा। जुड़े हुए बाज़ारों में दूर के देशों के उत्पादक भी आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं।

जाँच पड़ाव

  1. 1वैश्वीकरण क्या है?

  2. 2वैश्वीकरण में किसका आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा?

  3. 3वैश्वीकरण में मुख्य भूमिका कौन निभा रहा है?

5संभव बनाने वाले कारक

इस पड़ाव का सवालपृ. 62–63

कई देशों में फैला उत्पादन चलाना पहले इतना आसान क्यों नहीं था? किस चीज़ ने इसे संभव बनाया?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 4 में वैश्वीकरण का मतलब समझा। अब देखिए कि इसे तेज़ किसने किया।

किताब तीन कारक गिनाती है जिन्होंने वैश्वीकरण को आगे बढ़ाया। इनमें मुख्य कारक है प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति।

प्रौद्योगिकी

परिवहन, सूचना और संचार

यह पड़ाव

उदारीकरण

व्यापार और निवेश पर से अवरोध हटाना

पड़ाव 6

अन्तर्राष्ट्रीय संगठन

जैसे विश्व व्यापार संगठन

पड़ाव 7

परिवहन प्रौद्योगिकी

बीते पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई है। लंबी दूरियों तक वस्तुएँ कम लागत पर और जल्दी पहुँचने लगी हैं।

वस्तुएँ कंटेनरों में बंद करके जहाज़ों, रेलों, वायुयानों और ट्रकों पर बिना क्षति के लादी जाती हैं। इससे ढुलाई की लागत में भारी बचत हुई है और माल बाज़ार तक जल्दी पहुँचता है। वायु यातायात की लागत भी घटी है।

माल ढोने के दो ढंग

एक बैलगाड़ी पास के खेत से थोड़ा माल ढोती है। कंटेनरों में रखा माल जहाज़ों, रेलों, वायुयानों और ट्रकों पर बिना क्षति के लादा जा सकता है, और कम ढुलाई-लागत में दूर के बाज़ारों तक पहुँच जाता है।

कच्चे रास्ते पर दो सफ़ेद बैलों वाली गाड़ी; गाड़ी पर हरी पत्तियों का ढेर और उसके ऊपर खड़ा एक आदमी।

बैलगाड़ी: बैलगाड़ी पर खेत से सूखने के लिए ले जाई जा रही तंबाकू की पत्तियाँ (कर्नाटक, 2016)।

Photograph by VU3SBF, 7 August 2016; Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0.

बंदरगाह पर खड़ा एक बड़ा जहाज़, जिस पर रंग-बिरंगे कंटेनर लदे हैं; उसके पास लाल रंग की ऊँची क्रेनें।

कंटेनर जहाज़: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (नवी मुंबई) पर कंटेनरों से लदा जहाज़।

Photograph by Jaxer (English Wikipedia); Wikimedia Commons, CC BY 3.0.

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (पृ. 63)

दूरसंचार सुविधाओं (टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स) से विश्व भर में एक-दूसरे से संपर्क करना, सूचनाएँ तुरंत पाना और दूर के क्षेत्रों से संवाद करना आसान हुआ है। संचार उपग्रहों ने ये सुविधाएँ सुगम बनाई हैं।

जीवन के लगभग हर क्षेत्र में कंप्यूटर पहुँच गए हैं, और इंटरनेट, ई-मेल और वॉयस-मेल ने जुड़ना और आसान किया है।

किताब का उदाहरण: लंदन की पत्रिका, दिल्ली में तैयार (पृ. 63)

लंदन के पाठकों के लिए एक समाचार पत्रिका का डिज़ाइन और छपाई दिल्ली में होती है। काम के चरण सही क्रम में लगाइए।

▲ पहला चरण

  1. 1छपाई के बाद पत्रिकाएँ वायुमार्ग से लंदन भेजी जाती हैं
  2. 2पत्रिका का पाठ इंटरनेट से दिल्ली कार्यालय पहुँचता है
  3. 3डिज़ाइन और छपाई का भुगतान इंटरनेट (ई-बैंकिंग) से लंदन के एक बैंक से दिल्ली के एक बैंक को तुरंत हो जाता है
  4. 4डिज़ाइन कंप्यूटर पर तैयार होता है
  5. 5दिल्ली के डिज़ाइनर दूरसंचार सुविधाओं से लंदन कार्यालय से डिज़ाइन के निर्देश लेते हैं

▼ आख़िरी चरण

सही क्रम

  1. पत्रिका का पाठ इंटरनेट से दिल्ली कार्यालय पहुँचता है
  2. दिल्ली के डिज़ाइनर दूरसंचार सुविधाओं से लंदन कार्यालय से डिज़ाइन के निर्देश लेते हैं
  3. डिज़ाइन कंप्यूटर पर तैयार होता है
  4. छपाई के बाद पत्रिकाएँ वायुमार्ग से लंदन भेजी जाती हैं
  5. डिज़ाइन और छपाई का भुगतान इंटरनेट (ई-बैंकिंग) से लंदन के एक बैंक से दिल्ली के एक बैंक को तुरंत हो जाता है

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 63)

1लंदन की पत्रिका वाले उदाहरण में वे शब्द रेखांकित कीजिए जो बताते हैं कि उत्पादन में प्रौद्योगिकी का प्रयोग कहाँ हुआ।

जवाब देखिए
  • इंटरनेट (पाठ भेजना), दूरसंचार सुविधाएँ (डिज़ाइन के निर्देश), कंप्यूटर (डिज़ाइन तैयार करना), वायुमार्ग (पत्रिकाएँ भेजना), और इंटरनेट (ई-बैंकिंग) से भुगतान।

2सूचना प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण से कैसे जुड़ी हुई है? क्या सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के बिना वैश्वीकरण संभव होता?

जवाब देखिए
  • सूचना प्रौद्योगिकी से विश्व भर में संपर्क करना, सूचनाएँ तुरंत पाना और दूर के क्षेत्रों से संवाद करना आसान हुआ। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कई देशों में फैले उत्पादन को चला पाती हैं, और सेवाएँ भी दूर के देशों को दी जा सकती हैं, जैसे लंदन के पाठकों की पत्रिका की डिज़ाइनिंग और छपाई दिल्ली में (पृ. 63)।
  • इसके बिना वैश्वीकरण, ख़ासकर सेवाओं का, इस गति और पैमाने पर संभव नहीं होता; इसीलिए किताब प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति को वैश्वीकरण का मुख्य कारक कहती है।

जाँच पड़ाव

  1. 1माल को कंटेनरों में ढोने से क्या फ़ायदा हुआ?

  2. 2लंदन की पत्रिका के उदाहरण में डिज़ाइन और छपाई कहाँ होती है?

  3. 3किताब के अनुसार वैश्वीकरण को तेज़ करने वाला मुख्य कारक कौन-सा है?

6उदारीकरण

इस पड़ाव का सवालपृ. 64

सरकार विदेशी माल को रोकती क्यों है, और 1991 के आसपास भारत ने यह रोक क्यों हटाई?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 5 में प्रौद्योगिकी ने दूरियाँ घटाईं। पर देशों के बीच सरकार की लगाई रोकें भी होती हैं। अब उन्हें देखिए।

आयात पर कर व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है। इसे अवरोधक इसलिए कहते हैं क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है। सरकार इससे विदेश व्यापार बढ़ा या घटा सकती है, और तय कर सकती है कि कौन-सी वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयात हों।

आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा कोटा कहलाती है।

  1. स्वतंत्रता के बाद: अवरोध लगाएदेश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना था। 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग अभी उभर ही रहे थे, और आयात से प्रतिस्पर्धा उन्हें पनपने नहीं देती। इसलिए केवल ज़रूरी चीज़ों, जैसे मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम, के आयात की अनुमति थी।
  2. करीब सन् 1991 से: अवरोध हटाएसरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है; प्रतिस्पर्धा से उत्पादकों का प्रदर्शन सुधरेगा। प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इसका समर्थन किया। विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर से अवरोध काफ़ी हद तक हटा दिए गए।

किताब याद दिलाती है कि सभी विकसित देशों ने भी विकास के शुरुआती चरणों में घरेलू उत्पादकों को संरक्षण दिया था।

किताब की परिभाषा

"सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।"

उदारीकरण से व्यवसायी मुक्त रूप से तय कर सकते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें। सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है, इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।

रोक है या रोक हटाना?

हर कार्ड को सही खाने में रखिए।

सही खाने

व्यापार अवरोधक
आयात पर कर · एक वर्ष में केवल सीमित संख्या में खिलौनों के आयात की अनुमति · केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों का आयात
उदारीकरण
व्यवसायी ख़ुद तय करें कि क्या आयात या निर्यात करें · विदेशी कंपनियाँ देश में अपने कार्यालय और कारखाने लगा सकें · करीब सन् 1991 से विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर से अवरोध हटाना

चार शब्द, चार मतलब

हर कार्ड दबाकर पलटिए।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 64)

1विदेश व्यापार के उदारीकरण से आप क्या समझते हैं?

जवाब देखिए
  • सरकार द्वारा विदेश व्यापार पर लगे अवरोध या प्रतिबंध, जैसे आयात पर कर और कोटा, हटाना। इससे व्यवसायी मुक्त रूप से तय कर सकते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें, और सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है।

2चीन के खिलौनों के उदाहरण से समझाइए कि व्यापार अवरोधक के रूप में कोटा का प्रयोग कैसे किया जा सकता है। क्या इसका प्रयोग किया जाना चाहिए?

एक संभावित जवाब देखिए
  • कैसे: सरकार तय कर सकती है कि एक वर्ष में चीन से केवल एक सीमित संख्या में खिलौने आयात हों। तब बाकी माँग भारतीय खिलौना-निर्माताओं से पूरी होगी और उन्हें सस्ते चीनी खिलौनों से पूरी मार नहीं पड़ेगी।
  • पक्ष में: भारतीय निर्माताओं और उनके श्रमिकों को संरक्षण मिलता है; किताब भी कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग कर सकती है (पृ. 70)।
  • विपक्ष में: ख़रीदारों को सस्ते और नये डिज़ाइन वाले खिलौनों का विकल्प कम मिलेगा, और प्रतिस्पर्धा न हो तो भारतीय निर्माताओं पर गुणवत्ता सुधारने का दबाव भी कम रहेगा। अपना मत कारण के साथ लिखिए।

जाँच पड़ाव

  1. 1कोटा क्या है?

  2. 2भारत ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर से अवरोध करीब किस वर्ष से हटाए?

  3. 3स्वतंत्रता के बाद अवरोध क्यों लगाए गए थे?

7विश्व व्यापार संगठन

इस पड़ाव का सवालपृ. 65–66

जो संगठन सबसे व्यापार की रोकें हटाने को कहता है, क्या उसके नियम सब पर बराबर लागू होते हैं?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 6 में भारत ने अपने अवरोध हटाए, और प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने इसका समर्थन किया। अब उनमें से एक को देखिए।

कुछ बहुत प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं, देशों के बीच मुक्त व्यापार होना चाहिए और विश्व के सभी देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी चाहिए। ऐसा ही एक संगठन है:

"विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू. टी. ओ.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।"

किसकी पहल पर
विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ।
क्या करता है
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम तय करता है और देखता है कि उनका पालन हो।
सदस्य
किताब के अनुसार विश्व के लगभग 160 देश।
व्यवहार में
विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे, जबकि नियमों ने विकासशील देशों को अवरोधक हटाने के लिए विवश किया।

किताब का उदाहरण: कृषि व्यापार पर बहस (पृ. 65)

भारत
अधिकांश रोज़गार और जी.डी.पी. का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि से आता है।
अमेरिका
जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा केवल एक प्रतिशत, और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत।

फिर भी क्या होता है

  1. सरकार की भारी सहायताइन थोड़े से अमेरिकी किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए सरकार से बहुत अधिक धन राशि मिलती है।
  2. सस्ती उपजइसलिए वे अपनी उपज बहुत कम कीमत पर बेच पाते हैं।
  3. दूसरे देशों के बाज़ारअधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में कम कीमत पर बिकती है।
  4. वहाँ के किसानउन देशों के किसानों पर बुरा असर पड़ता है।

विकासशील देश पूछते हैं: हमने नियमों के अनुसार अवरोधक घटाए; आपने नियमों को नज़रअंदाज़ करके अपने किसानों को भारी धन देना जारी रखा। हमसे सहायता बंद करने को कहा और ख़ुद वही कर रहे हैं। क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?

सफ़ेद कपास से भरे खेत में चलती हरे रंग की बड़ी कटाई मशीन।

अमेरिका, 2020: अमेरिका (टेक्सास) में मशीन से कपास की कटाई, अगस्त 2020।

U.S. Department of Agriculture, August 2020; Wikimedia Commons, public domain.

संगठन का अपना परिचय

WTO explainedचलाइए5:38
World Trade Organization: विश्व व्यापार संगठन का परिचय वीडियो; अंग्रेज़ी में

वीडियो देखते समय किताब का सवाल याद रखिए: नियम सब पर बराबर लागू हों, तभी व्यापार न्यायसंगत है।

सही या ग़लत?

  1. विश्व व्यापार संगठन विकासशील देशों की पहल पर शुरू हुआ।

  2. विश्व व्यापार संगठन का ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।

  3. किताब के अनुसार विश्व के लगभग 160 देश इसके सदस्य हैं।

  4. विकसित देशों ने भी अपने सारे व्यापार अवरोधक हटा दिए।

  5. अमेरिका के कुल रोज़गार में कृषि का हिस्सा केवल 0.5 प्रतिशत है।

  6. सरकारी सहायता से सस्ती बिकी अमेरिकी उपज से दूसरे देशों के किसानों को लाभ होता है।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 66)

1रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: विश्व व्यापार संगठन …… देशों की पहल पर शुरू हुआ था। विश्व व्यापार संगठन का ध्येय …… है। विश्व व्यापार संगठन सभी देशों के लिए …… से संबंधित नियम बनाता है और देखता है कि …… व्यवहार में, देशों के बीच व्यापार …… नहीं है। विकासशील देश, जैसे, भारत …… है जबकि अधिकांश स्थितियों में विकसित देशों ने अपने उत्पादकों को संरक्षण देना जारी रखा है।

जवाब देखिए
  • क्रम से: (1) विकसित; (2) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना; (3) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार; (4) इन नियमों का पालन हो; (5) न्यायसंगत (मुक्त); (6) व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए विवश हुआ।

2आपके विचार से विभिन्न देशों के बीच अधिकाधिक न्यायसंगत व्यापार के लिए क्या किया जा सकता है?

एक संभावित जवाब देखिए
  • विश्व व्यापार संगठन के नियम विकसित और विकासशील, सब देशों पर बराबर लागू हों; विकसित देश भी अपने अवरोधक घटाएँ और अपने उत्पादकों को ऐसी भारी सहायता न दें जिससे उनकी सस्ती उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाए; विकासशील देश मिलकर न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते करें; और जनता के अभियान ऐसे निर्णयों पर दबाव बनाएँ।

3ऊपर के उदाहरण में अमेरिकी सरकार किसानों को उत्पादन के लिए भारी धन राशि देती है। कभी-कभी सरकार कुछ विशेष वस्तुओं, जैसे पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं, के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सहायता देती है। यह न्यायसंगत है या नहीं, चर्चा कीजिए।

एक संभावित जवाब देखिए
  • न्यायसंगत मानने का तर्क: पर्यावरण की रक्षा से सबका भला होता है, और नई अच्छी वस्तुओं के उत्पादकों को शुरुआत में सहारा चाहिए।
  • अन्यायपूर्ण मानने का तर्क: अगर सहायता इतनी बड़ी हो कि वे वस्तुएँ दूसरे देशों में बहुत सस्ते में बिककर वहाँ के उत्पादकों को नुकसान पहुँचाएँ, तो यह अमेरिकी कृषि सहायता जैसा ही अनुचित असर होगा।
  • संतुलित मत: सहायता तब न्यायसंगत है जब उसका उद्देश्य सचमुच पर्यावरण हो और वह दूसरे देशों के उत्पादकों के विरुद्ध छिपा अवरोधक न बने।

जाँच पड़ाव

  1. 1विश्व व्यापार संगठन का ध्येय क्या है?

  2. 2अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा कितना है?

  3. 3विकासशील देश कौन-सा सवाल उठाते हैं?

8भारत पर प्रभाव

इस पड़ाव का सवालपृ. 66–67

भारत में वैश्वीकरण से किसे लाभ मिला?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 4–7 में देखा कि वैश्वीकरण क्या है और कैसे तेज़ हुआ। अब भारत के लोगों पर उसका असर देखिए।

वैश्वीकरण और उत्पादकों (स्थानीय और विदेशी दोनों) के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को लाभ हुआ है। उनके पास पहले से अधिक विकल्प हैं, कई उत्पाद उत्कृष्ट गुणवत्ता के और सस्ते हैं, और वे पहले से ऊँचे जीवन स्तर का आनंद ले रहे हैं।

पर किताब साथ ही कहती है:

"उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।"

उत्पादकों में किसे लाभ मिला

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
बीते 20 वर्षों में इन्होंने भारत में अपना निवेश बढ़ाया है, यानी भारत में निवेश करना इनके लिए लाभप्रद रहा है। इनकी रुचि शहरी इलाकों के उद्योगों में रही: सेलफोन, मोटर गाड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ठंडे पेय पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ, और बैंकिंग जैसी सेवाएँ। इनके अधिकतर ख़रीदार संपन्न वर्ग के हैं।
स्थानीय आपूर्तिकर्ता
इन उद्योगों में नये रोज़गार बने, और इन्हें कच्चा माल आदि देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं।
शीर्ष भारतीय कंपनियाँ
इन्होंने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन-मानक ऊँचे किए। कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग करके लाभ कमाया।
भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
कुछ बड़ी भारतीय कंपनियाँ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बनकर उभरीं: टाटा मोटर्स (मोटरगाड़ियाँ), इंफोसिस (आई.टी.), रैनबैक्सी (दवाइयाँ), एशियन पेंट्स (पेंट), सुंदरम फास्टनर्स (नट और बोल्ट)।
सेवा कंपनियाँ
ख़ासकर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए नये अवसर बने।

लाभ मिला या दबाव पड़ा?

पड़ाव 8 और 9 के लोगों और कंपनियों को सही खाने में रखिए।

सही खाने

लाभ मिला
शहरों के धनी उपभोक्ता · शीर्ष भारतीय कंपनियाँ · बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ
दबाव पड़ा
होसुर में संधारित्र बनाने वाला छोटा उत्पादक · खिलौने, टायर और खाद्य तेल बनाने वाली छोटी इकाइयाँ · वस्त्र निर्यात उद्योग के अस्थायी श्रमिक

विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार के कदम (पृ. 67)

बाईं ओर एक कदम दबाइए, फिर दाईं ओर उसका मतलब।

सही जोड़ियाँ

विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़)
ऐसे औद्योगिक क्षेत्र, जिनमें बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएँ होनी चाहिए
कर से छूट
सेज़ में उत्पादन इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं
श्रम कानूनों में लचीलापन
काम का दबाव अधिक हो, तब श्रमिकों को छोटी अवधि के लिए रखना; इससे श्रम लागत घटती है

फिर भी विदेशी कंपनियाँ और अधिक लचीलापन माँग रही हैं।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 67)

1प्रतिस्पर्धा से भारत के लोगों को कैसे लाभ हुआ है?

जवाब देखिए
  • उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत मिली, और उनका जीवन स्तर ऊँचा हुआ। शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर अपने मानक ऊँचे किए। बहुराष्ट्रीय कंपनियों वाले उद्योगों में नये रोज़गार बने और स्थानीय आपूर्तिकर्ता समृद्ध हुए।

2क्या और भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरना चाहिए? इससे देश की जनता को क्या लाभ होगा?

एक संभावित जवाब देखिए
  • एक तर्क: हाँ, क्योंकि बहुराष्ट्रीय बनने वाली कंपनियाँ (जैसे टाटा मोटर्स, इंफोसिस) नवीनतम प्रौद्योगिकी और ऊँचे मानक अपनाती हैं, भारतीय वस्तुएँ और सेवाएँ विश्व के बाज़ारों तक पहुँचाती हैं, और इनके बढ़ने से देश में भी काम के अवसर बन सकते हैं।
  • पर जनता को सच्चा लाभ तभी होगा जब इस बढ़त का हिस्सा श्रमिकों और छोटे उत्पादकों तक भी पहुँचे, यानी वैश्वीकरण न्यायसंगत हो।

3सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास क्यों करती हैं?

जवाब देखिए
  • विदेशी निवेश से नये उद्योग लगते हैं, नये रोज़गार बनते हैं, और उन्हें कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध होती हैं। साझेदारी में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अतिरिक्त निवेश के लिए धन और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी भी लाती हैं। इसीलिए सरकारें विशेष आर्थिक क्षेत्र, कर से छूट और श्रम कानूनों में लचीलापन जैसे कदम उठाती हैं।

4अध्याय 1 में हमने देखा कि एक का विकास दूसरे के लिए कैसे विध्वंसक हो सकता है। भारत के कुछ लोगों ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज़) की स्थापना का विरोध किया है। पता कीजिए, ये लोग कौन हैं और ये इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

एक संभावित जवाब देखिए
  • यह आपको अपने आसपास से पता करना है। प्रश्न ख़ुद अध्याय 1 की बात याद दिलाता है: एक का विकास दूसरे के लिए विध्वंसक हो सकता है। इसलिए सोचिए कि किसी सेज़ से किसे लाभ होता है और किसे नुकसान।
  • इस अध्याय से एक संकेत: विदेशी निवेश के लिए श्रम कानूनों में लचीलापन दिया गया है, जिससे श्रमिकों का रोज़गार सुनिश्चित नहीं रहता।
  • अपने ज़िले या राज्य में कोई सेज़ हो तो अख़बार, शिक्षक या बड़ों से पता कीजिए कि वहाँ किसने विरोध किया और क्यों।

जाँच पड़ाव

  1. 1उपभोक्ताओं में वैश्वीकरण से ख़ास लाभ किसे हुआ?

  2. 2इनमें से भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी कौन-सी है?

  3. 3सेज़ में उत्पादन इकाई लगाने वाली कंपनियों को कितने समय तक कोई कर नहीं देना पड़ता?

9छोटे उत्पादक और श्रमिक

इस पड़ाव का सवालपृ. 68–70

बढ़ी प्रतिस्पर्धा का छोटे उत्पादकों और श्रमिकों पर क्या असर पड़ा?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 8 में लाभ पाने वाले दिखे। अब दूसरी तरफ़ के दो लोगों की कहानी पढ़िए: रवि और सुशीला।

रवि की कहानी (पृ. 68)

रवि तमिलनाडु के औद्योगिक शहर होसुर में संधारित्र बनाता है। संधारित्र ट्यूबलाइट, टेलीविज़न समेत अनेक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगते हैं।

रवि के साथ क्या-क्या हुआ? कार्डों को सही क्रम में लगाइए।

▲ पहले

  1. 1सन् 2001: विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार सरकार ने संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटाए
  2. 2अब: उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम, और केवल सात श्रमिक
  3. 3सन् 1992: रवि ने बैंक से ऋण लेकर संधारित्र बनाने की कंपनी शुरू की
  4. 4टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं; कुछ ने आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदे
  5. 5तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ा; कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे

▼ अब

सही क्रम

  1. सन् 1992: रवि ने बैंक से ऋण लेकर संधारित्र बनाने की कंपनी शुरू की
  2. तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ा; कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे
  3. सन् 2001: विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार सरकार ने संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटाए
  4. टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं; कुछ ने आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदे
  5. अब: उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम, और केवल सात श्रमिक

हैदराबाद और चेन्नई में इसी व्यवसाय वाले उसके कई दोस्तों ने अपनी इकाइयाँ बंद कर दीं।

और किन पर मार पड़ी

बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल के छोटे उत्पादक। कई इकाइयाँ बंद हुईं और अनेक श्रमिक बेरोज़गार हुए। भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) लघु और मध्यम उद्योगों में काम करते हैं।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकतर नियोक्ता श्रमिकों को रोज़गार देने में लचीलापन पसंद करते हैं।

"इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।"

वस्त्र निर्यात की कड़ी (पृ. 69)

  1. विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँअमेरिका और यूरोप की वस्त्र उद्योग की बड़ी कंपनियाँ भारतीय निर्यातकों को ऑर्डर देती हैं और लाभ बढ़ाने के लिए सबसे सस्ता माल खोजती हैं।
  2. भारतीय निर्यातकबड़े ऑर्डर पाने के लिए लागत घटाने की कड़ी कोशिश करते हैं। कच्चे माल की लागत नहीं घट सकती, इसलिए श्रम-लागत घटाते हैं।
  3. श्रमिकस्थायी के बजाय अस्थायी रोज़गार, बहुत लंबे घंटे, माँग ज़्यादा होने पर रात में भी काम, और काफ़ी कम मज़दूरी।

प्रतिस्पर्धा से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक लाभ कमाने में मदद मिली, पर श्रमिकों को लाभ में न्यायसंगत हिस्सा नहीं मिला।

सुशीला की कहानी (पृ. 69)

35 वर्ष की सुशीला ने दिल्ली के एक वस्त्र निर्यातक उद्योग में कई वर्ष काम किया। 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में फैक्ट्री बंद हो गई। छह माह खोजने के बाद उसे घर से 30 कि.मी. दूर काम मिला।

पहले: स्थायी श्रमिक

  • स्वास्थ्य बीमा
  • भविष्य निधि
  • अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी

अब: अस्थायी श्रमिक

  • कई वर्ष काम करने के बाद भी अस्थायी
  • पहले से आधे से भी कम कमाई
  • सप्ताह के सातों दिन काम
  • एक दिन काम नहीं, तो उस दिन की मज़दूरी नहीं

सुशीला का एक दिन

घर से निकलीसुबह 7.30घर लौटीशाम 10घर से बाहरआधी रातआधी रात

सुबह 7.30 से शाम 10 बजे तक, यानी साढ़े चौदह घंटे घर से बाहर, सप्ताह के सातों दिन।

आज अधिकतर श्रमिक असंगठित क्षेत्र में हैं, और संगठित क्षेत्र में भी काम की परिस्थितियाँ धीरे-धीरे असंगठित क्षेत्र जैसी होती जा रही हैं। सुशीला जैसे श्रमिकों को अब वह संरक्षण और लाभ नहीं मिलते जो पहले मिलते थे।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 68)

1रवि की लघु उत्पादन इकाई बढ़ती प्रतिस्पर्धा से किस प्रकार प्रभावित हुई?

जवाब देखिए
  • सन् 2001 में संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटे। उसके ग्राहक, टेलीविज़न कंपनियाँ, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं, और उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदने लगीं। रवि का उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम रह गया और अब उसके पास केवल सात श्रमिक हैं। उसके कई दोस्तों की इकाइयाँ बंद हो गईं।

2दूसरे देशों के उत्पादकों की तुलना में उत्पादन लागत अधिक होने के कारण क्या रवि जैसे उत्पादकों को उत्पादन रोक देना चाहिए? आप क्या सोचते हैं?

एक संभावित जवाब देखिए
  • एक तर्कपूर्ण उत्तर: नहीं। लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) काम करते हैं; इकाइयाँ बंद होंगी तो बहुत लोग बेरोज़गार होंगे।
  • किताब कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद कर सकती है जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ। बेहतर सुविधाएँ, नई प्रौद्योगिकी और समय पर सस्ता ऋण मिले, तो रवि जैसे उत्पादक अपनी लागत घटाकर टिक सकते हैं।

3अध्ययनों के अनुसार भारत के लघु उत्पादकों को बाज़ार में बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए तीन चीज़ें चाहिए: (अ) बेहतर सड़कें, बिजली, पानी, कच्चा माल, विपणन और सूचना तंत्र; (ब) प्रौद्योगिकी में सुधार एवं आधुनिकीकरण; (स) उचित ब्याज दर पर साख की समय पर उपलब्धता। ये तीन चीज़ें कैसे मदद करेंगी? क्या बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन क्षेत्रों में निवेश करना चाहेंगी? क्या इन सुविधाओं को देने में सरकार की भूमिका है? सरकार कौन-सा उपाय अपना सकती है?

एक संभावित जवाब देखिए
  • कैसे मदद: (अ) अच्छी सड़कें, बिजली, पानी और कच्चा माल मिलने से उत्पादन और ढुलाई की लागत घटेगी, और विपणन और सूचना तंत्र से माल सही बाज़ार तक पहुँचेगा। (ब) नई प्रौद्योगिकी से गुणवत्ता सुधरेगी और प्रति इकाई लागत घटेगी। (स) उचित ब्याज पर समय से ऋण मिले तो मशीनें और कच्चा माल ख़रीदना आसान होगा।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: शायद नहीं। वे वहाँ निवेश करती हैं जहाँ उन्हें लाभ हो, जैसे शहरी इलाकों के सेलफोन, मोटर गाड़ी, ठंडे पेय और बैंकिंग जैसे क्षेत्र, जिनके ख़रीदार संपन्न हैं।
  • सरकार की भूमिका: हाँ। सड़कें, बिजली, पानी जैसी सुविधाएँ सबके लिए होती हैं, और किताब कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे जब तक वे सक्षम न हो जाएँ।
  • एक उपाय: छोटे उद्योगों वाले शहरों में ऐसे औद्योगिक क्षेत्र बनें जहाँ छोटे उत्पादकों को बिजली, पानी और सड़क मिलें; बैंक उन्हें उचित ब्याज पर समय से ऋण दें; और नई मशीनों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाए।

आओ–इन पर विचार करें (पृ. 70)

1वस्त्र उद्योग के श्रमिकों, भारतीय निर्यातकों और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा ने किस प्रकार प्रभावित किया है?

जवाब देखिए
  • विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: सबसे सस्ता माल पाकर अधिक लाभ कमा रही हैं।
  • भारतीय निर्यातक: बड़े ऑर्डर पाने के लिए लागत घटाने की कड़ी कोशिश करते हैं; कच्चे माल की लागत नहीं घटती, इसलिए श्रम-लागत घटाते हैं।
  • श्रमिक: स्थायी के बजाय अस्थायी रोज़गार, बहुत लंबे कार्य-घंटे, रात में काम, कम मज़दूरी, और लाभ में न्यायसंगत हिस्सा नहीं।

3भारत में बहस है कि क्या कंपनियों को रोज़गार नीतियों में लचीलापन अपनाना चाहिए। इस अध्याय के आधार पर नियोक्ताओं और श्रमिकों के पक्ष संक्षेप में लिखिए।

जवाब देखिए
  • नियोक्ताओं का पक्ष: प्रतिस्पर्धा बहुत है और विदेशी ख़रीदार सबसे सस्ता माल चाहते हैं; कच्चे माल की लागत नहीं घटती, इसलिए श्रम लागत घटानी पड़ती है। काम का दबाव हो तभी श्रमिक रखने से लागत कम रहती है, और विदेशी निवेश आकर्षित होता है।
  • श्रमिकों का पक्ष: लचीलेपन का मतलब है कि रोज़गार सुनिश्चित नहीं रहता। सुशीला जैसे श्रमिकों से स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी छिन गई; कमाई आधी से भी कम हुई और काम के घंटे लंबे हो गए।

जाँच पड़ाव

  1. 1रवि किस शहर में संधारित्र बनाता है?

  2. 2भारत में लघु और मध्यम उद्योगों में कितने श्रमिक काम करते हैं?

  3. 3सुशीला अब किस तरह की श्रमिक है?

10न्यायसंगत वैश्वीकरण

इस पड़ाव का सवालपृ. 70–71

वैश्वीकरण का लाभ सब तक कैसे पहुँचे, और इसमें कौन क्या कर सकता है?

पिछली बात से कड़ी पड़ाव 8 और 9 में दिखा कि लाभ बराबर नहीं बँटा। अब आगे का रास्ता देखिए।

"शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।"

लक्ष्य

"न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।"

सरकार क्या कर सकती है

सरकार की नीतियाँ केवल धनी और प्रभावशाली लोगों के नहीं, देश के सभी लोगों के हितों की रक्षा करें। जैसे, सरकार:

  • श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए और श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाए;
  • छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ;
  • ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग करे;
  • विश्व व्यापार संगठन से न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते करे।

विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा।

जनता भी

बीते कुछ वर्षों में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है। यानी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में जनता भी बड़ी भूमिका निभा सकती है।

पार्क में ढोल बजाते और झंडा-बैनर लिए चलते प्रदर्शनकारी।

हांगकांग, 2005: हांगकांग, 14 दिसंबर 2005: विश्व व्यापार संगठन की बैठक के समय विक्टोरिया पार्क में प्रदर्शन।

Photograph by K.C. Tang, 14 December 2005; Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0.

न्यायसंगत वैश्वीकरण की ओर है या नहीं?

हर कदम को सही खाने में रखिए।

सही खाने

उस ओर
सरकार श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए · छोटे उत्पादकों की तब तक मदद, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हों · विकासशील देश मिलकर विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते करें
उलटी ओर
सरकार की नीतियाँ केवल धनी और प्रभावशाली लोगों के हित देखें · निर्यातक लागत घटाने का सारा बोझ श्रमिकों की मज़दूरी पर डालें · विकसित देश अपने अवरोधक बनाए रखें और विकासशील देशों से हटवाएँ

आओ–इस पर विचार करें (पृ. 70)

2वैश्वीकरण से मिले लाभों में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा मिल सके, इसके लिए (क) सरकार, (ख) निर्यातक फैक्ट्रियों के नियोक्ता, (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और (घ) श्रमिक क्या कर सकते हैं?

एक संभावित जवाब देखिए
  • (क) सरकार: श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए और श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाए।
  • (ख) निर्यातक फैक्ट्रियों के नियोक्ता: लागत घटाने का सारा बोझ मज़दूरी पर न डालें; जहाँ हो सके स्थायी रोज़गार, उचित मज़दूरी और अतिरिक्त समय के काम का पूरा भुगतान दें।
  • (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: निर्यातकों को ऐसी कीमत दें जिसमें उचित मज़दूरी संभव हो, और देखें कि उनका माल बनाने वाली फैक्ट्रियाँ श्रम कानूनों का पालन करें।
  • (घ) श्रमिक: अपने अधिकार जानें और संगठित होकर आवाज़ उठाएँ; किताब बताती है कि जनसंगठन बड़े निर्णयों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

जाँच पड़ाव

  1. 1न्यायसंगत वैश्वीकरण क्या सुनिश्चित करेगा?

  2. 2सरकार छोटे उत्पादकों की कब तक मदद करे?

  3. 3विश्व व्यापार संगठन के महत्त्वपूर्ण निर्णयों को किसने प्रभावित किया है?

सार

अध्याय का सार: वैश्वीकरण विभिन्न देशों के बीच तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है। यह अधिक विदेशी निवेश और विदेश व्यापार से संभव हो रहा है, और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसमें मुख्य भूमिका निभा रही हैं। प्रौद्योगिकी, ख़ासकर सूचना प्रौद्योगिकी, और व्यापार और निवेश के उदारीकरण ने इसे तेज़ किया। लाभ धनी उपभोक्ताओं और कुशल, शिक्षित, धनी उत्पादकों को मिला; बढ़ती प्रतिस्पर्धा से अनेक छोटे उत्पादक और श्रमिक प्रभावित हुए। आगे का रास्ता न्यायसंगत वैश्वीकरण है।

बहुराष्ट्रीय कंपनी

एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व; उत्पादन के लिए सस्ती जगहों की खोज।

वैश्वीकरण

विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से देशों का तीव्र एकीकरण।

कारक

प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति, उदारीकरण, और विश्व व्यापार संगठन।

असर

लाभ सब तक बराबर नहीं पहुँचा; इसलिए न्यायसंगत वैश्वीकरण।

झटपट दोहराइए

हर कार्ड पर सवाल है। पहले जवाब सोचिए, फिर पलटिए।

सही या ग़लत?

  1. वैश्वीकरण में लोगों का आवागमन सबसे तेज़ी से बढ़ा है।

  2. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ज़्यादातर नये कारखाने लगाकर निवेश करती हैं।

  3. आयात पर कर और कोटा, दोनों व्यापार अवरोधक हैं।

  4. उदारीकरण में सरकार सारा नियंत्रण छोड़ देती है।

  5. सभी विकसित देशों ने विकास के शुरुआती चरणों में अपने उत्पादकों को संरक्षण दिया था।

  6. सेज़ में कंपनियों को कभी कर नहीं देना पड़ता।

  7. श्रम कानूनों में लचीलेपन से श्रमिकों का रोज़गार और पक्का हुआ।

  8. कुछ बड़ी भारतीय कंपनियाँ ख़ुद बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गई हैं।

जोड़ी मिलाइए

बाईं ओर का एक कार्ड दबाइए, फिर दाईं ओर उसकी जोड़ी।

सही जोड़ियाँ

कारगिल
परख फूड्स को खरीदा
फोर्ड मोटर्स
महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से चेन्नई के निकट संयंत्र
कोटा
आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा
विश्व व्यापार संगठन
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना
रवि
होसुर में संधारित्र
सुशीला
अस्थायी श्रमिक, सातों दिन काम

अअभ्यास

पृ. 72–73 · प्रश्न 12 और 13 में सही विकल्प दबाइए; कारण वहीं खुल जाएगा। बाकी उत्तर पहले ख़ुद सोचिए, फिर खोलकर मिलाइए।

प्रश्नावली

1वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

जवाब देखिए
  • वैश्वीकरण का मतलब है अलग-अलग देशों का आपस में तेज़ी से जुड़ना और एक होते जाना। यह जुड़ाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कई देशों में फैले उत्पादन, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से होता है; बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसमें मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इससे देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ता है; लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा। उदाहरण: भारत के बाज़ारों में चीन के खिलौने, और भारत में बनी फोर्ड की कारों का दूसरे देशों को निर्यात (पृ. 59–62)।

2भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

जवाब देखिए
  • लगाने के कारण: स्वतंत्रता के बाद सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगाए, ताकि देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिले। 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे, और आयात से प्रतिस्पर्धा उन्हें बढ़ने नहीं देती। इसलिए केवल ज़रूरी चीज़ों, जैसे मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम, के आयात की अनुमति थी।
  • हटाने के कारण: करीब सन् 1991 के प्रारंभ से सरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है। माना गया कि प्रतिस्पर्धा से उत्पादकों का प्रदर्शन सुधरेगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी। प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इस निर्णय का समर्थन किया (पृ. 64)।

3श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?

जवाब देखिए
  • लचीलेपन से कंपनियाँ श्रमिकों को नियमित आधार पर रखने के बजाय, जब काम का दबाव अधिक हो, तब छोटी अवधि के लिए रख सकती हैं। इससे श्रम लागत घटती है। कच्चे माल की लागत घटाई नहीं जा सकती, तो श्रम लागत घटाकर ही निर्यातक विदेशी खरीदारों के बड़े ऑर्डर पाने की प्रतिस्पर्धा में टिकते हैं। इसी कारण सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए यह छूट दी है, और विदेशी कंपनियाँ और अधिक लचीलापन माँग रही हैं। श्रमिक के लिए इसका मतलब है कि उसका रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है (पृ. 67, 69)।

4दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार उत्पादन या उत्पादन पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?

जवाब देखिए
  • वे ऐसी जगहें चुनती हैं जो बाज़ार के पास हों, जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले, उत्पादन के दूसरे कारक उपलब्ध हों और सरकारी नीतियाँ उनके हितों का ध्यान रखें। फिर इन तरीकों से (पृ. 56–59):
  • अपने कार्यालय और कारखाने लगाकर।
  • स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी (संयुक्त उत्पादन) से: बहुराष्ट्रीय कंपनी अतिरिक्त निवेश के लिए धन और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी देती है। जैसे फोर्ड मोटर्स ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से चेन्नई के निकट संयंत्र लगाया।
  • स्थानीय कंपनियों को खरीदकर, फिर उत्पादन फैलाकर। यह सबसे आम रास्ता है; जैसे कारगिल ने परख फूड्स को खरीदा।
  • छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर: वस्त्र, जूते-चप्पल, खेल के सामान जैसे उद्योगों में वे छोटे उत्पादकों से माल बनवाकर अपने ब्राण्ड नाम से बेचती हैं, और मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करती हैं।

5विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए?

एक संभावित जवाब देखिए
  • विकसित देश क्यों चाहते हैं: उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसी जगहें खोजती हैं जहाँ उत्पादन सस्ता हो और बड़े बाज़ार हों। अवरोध हटें तो वे विकासशील देशों में आसानी से निवेश कर सकती हैं, स्थानीय कंपनियाँ खरीद सकती हैं और अपना माल वहाँ बेच सकती हैं। विश्व व्यापार संगठन भी विकसित देशों की पहल पर बना।
  • विकासशील देशों की माँग: हाँ, उन्हें माँग करनी चाहिए। व्यवहार में विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे हैं। जैसे, अमेरिका अपने किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए भारी धन राशि देता है, जिससे उनकी सस्ती अधिशेष उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाती है। इसलिए विकासशील देश माँग कर सकते हैं कि नियम सब पर बराबर लागू हों, और समान हितों वाले विकासशील देश मिलकर विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए लड़ें (पृ. 65, 70)।

6'वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है'। इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

जवाब देखिए
  • जिन्हें लाभ हुआ: शहरों के धनी उपभोक्ता (अधिक विकल्प, अच्छी गुणवत्ता, कम कीमत, ऊँचा जीवन स्तर); बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उन्हें कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ; शीर्ष भारतीय कंपनियाँ, जिनमें से कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं; सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली सेवा कंपनियाँ।
  • जिन पर मार पड़ी: छोटे उत्पादक, जैसे होसुर के रवि, जिनका उत्पादन सस्ते आयात के बाद आधे से भी कम रह गया और जिनके पास अब केवल सात श्रमिक हैं; बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल की कई छोटी इकाइयाँ बंद हुईं। श्रमिक, जैसे सुशीला, स्थायी से अस्थायी हो गए, उनकी कमाई घटी और संरक्षण छिन गया।
  • इसलिए किताब कहती है कि शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने नये अवसरों का सबसे अच्छा उपयोग किया, जबकि अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला (पृ. 66–70)।

7व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाता है?

जवाब देखिए
  • उदारीकरण में सरकार व्यापार और निवेश पर लगे अवरोध हटाती है। इससे वस्तुओं का आयात-निर्यात आसान होता है, और विदेशी कंपनियाँ देश में अपने कार्यालय और कारखाने लगा सकती हैं। व्यवसायी ख़ुद तय करते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें। इससे विदेश व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ते हैं, और यही दोनों देशों को जोड़ते हैं। उलटा उदाहरण: अगर सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगाए, तो वे भारत में सस्ते नहीं रहेंगे और उनका आयात घट जाएगा। किताब के सार के अनुसार व्यापार और निवेश के उदारीकरण ने अवरोधक हटाकर वैश्वीकरण को सुगम बनाया है (पृ. 64, 71)।

8विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

एक संभावित जवाब देखिए
  • व्यापार खुलने से वस्तुएँ एक देश के बाज़ार से दूसरे देश के बाज़ार में जाती हैं। उत्पादक को अपने देश से बाहर के बाज़ार मिलते हैं, ख़रीदारों के विकल्प बढ़ते हैं, दोनों देशों के उत्पादक एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं, और दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। यही बाज़ारों का एकीकरण है।
  • दूसरा उदाहरण (खिलौनों के बजाय इस्पात): किताब बताती है कि हाल के वर्षों में चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है। इससे भारत की इस्पात कंपनियों को चीन का बाज़ार मिलता है; चीन में इस्पात ख़रीदने वाले उद्योगों के पास चीनी और भारतीय इस्पात में से चुनने का विकल्प होता है; चीन की इस्पात कंपनियों को भारतीय इस्पात से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है; और दोनों देशों में इस्पात का मूल्य एक जैसा होने लगता है (पृ. 59–61)। आप अपना कोई और उदाहरण भी ले सकते हैं।

9वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए।

एक संभावित जवाब देखिए
  • यह आपकी अपनी कल्पना का प्रश्न है; उत्तर में अध्याय के कारण जोड़िए। एक संभव उत्तर: जिन कारकों ने वैश्वीकरण को आगे बढ़ाया (प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति, व्यापार और निवेश का उदारीकरण, और विश्व व्यापार संगठन के नियम), वे चलते रहे तो बीस वर्ष बाद देश और अधिक जुड़े होंगे। वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ेगा; सूचना प्रौद्योगिकी से और ज़्यादा सेवाएँ दूर देशों से दी जाएँगी; बाज़ारों में विकल्प बढ़ेंगे और उत्पादकों में प्रतिस्पर्धा तेज़ होगी।
  • पर यह दुनिया सबके लिए अच्छी होगी या नहीं, यह इस पर निर्भर करेगा कि वैश्वीकरण कितना न्यायसंगत बनता है: सरकारें सबके हितों की रक्षा करें, श्रम कानूनों का पालन हो, छोटे उत्पादकों को मदद मिले, और जनता न्यायसंगत नियमों के लिए आवाज़ उठाए (पृ. 62–64, 70)।

10मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं: एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब देंगे?

एक संभावित जवाब देखिए
  • दोनों की बात आधी सही है, क्योंकि वैश्वीकरण का असर सब पर एक समान नहीं पड़ा।
  • सहायता की बात: उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, अच्छी गुणवत्ता और कम कीमतें मिलीं; बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश से नये रोज़गार बने और स्थानीय आपूर्तिकर्ता समृद्ध हुए; शीर्ष भारतीय कंपनियाँ आगे बढ़ीं और कुछ बहुराष्ट्रीय बनीं; आई.टी. सेवाओं के लिए नये अवसर बने।
  • क्षति की बात: बढ़ी प्रतिस्पर्धा से रवि जैसे अनेक छोटे उत्पादकों पर मार पड़ी और कई इकाइयाँ बंद हुईं, श्रमिक बेरोज़गार हुए, और सुशीला जैसे श्रमिकों का रोज़गार अस्थायी और असुरक्षित हो गया।
  • मेरा जवाब: वैश्वीकरण को रोकने या आँख मूँदकर अपनाने के बजाय उसे न्यायसंगत बनाइए: सरकार सबके हितों की रक्षा करे, श्रम कानूनों का पालन कराए, छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे जब तक वे प्रतिस्पर्धा में सक्षम न हों, ज़रूरत पर व्यापार अवरोधक लगाए, और विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए लड़े (पृ. 66–71)।

11रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

  • दो दशक पहले की तुलना में भारतीय खरीददारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह …… की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाज़ारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ …… बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाज़ारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही है क्योंकि …… । जबकि बाज़ार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प इसलिए बढ़ते …… और …… के प्रभाव का अर्थ है उत्पादकों के बीच अधिकतम …… ।

जवाब देखिए
  • क्रम से: (1) वैश्वीकरण; (2) विदेश व्यापार; (3) भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है; (4) और (5) विदेश व्यापार और विदेशी निवेश, किसी भी क्रम में; (6) प्रतिस्पर्धा (पृ. 59–61, 66)।

12निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए:

  • क

    बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर खरीदती हैं।

  • ख

    आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन के लिए किया जाता है।

  • ग

    विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ

  • घ

    आई. टी. ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है।

  • ङ

    अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है।

जवाब देखिए
  • (क) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से ये चीज़ें बनवाकर अपने ब्राण्ड नाम से बेचती हैं (पृ. 58)।
  • (ख) व्यापार अवरोधक। आयात पर कर और कोटा, दोनों व्यापार अवरोधक हैं (पृ. 64)।
  • (ग) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी। ये भारतीय कंपनियाँ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं (पृ. 67)।
  • (घ) कॉल सेंटर। सूचना प्रौद्योगिकी से ग्राहक सेवा दूर देश से दी जा सकती है (पृ. 56, 67)।
  • (ङ) मोटर गाड़ियों। जैसे फोर्ड मोटर्स ने भारत में कारें बनाने के लिए निवेश किया (पृ. 59, 66)।

13सही विकल्प का चयन कीजिए:

  • अ

    वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है:

  • आ

    विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है:

  • इ

    वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है:

जवाब देखिए
  • (अ) (ख) वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का। लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा (पृ. 62)।
  • (आ) (ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना (पृ. 58)।
  • (इ) (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं। लाभ सभी को नहीं मिला; विकासशील देशों के श्रमिकों का रोज़गार तो असुरक्षित हुआ; लाभ मुख्यतः धनी उपभोक्ताओं और कुशल, शिक्षित, धनी उत्पादकों को मिला (पृ. 69–71)।

परियोजना

अतिरिक्त परियोजना/कार्यकलाप · पृ. 73

ये दोनों काम आपको अपने आसपास से करने हैं; इनके नतीजे हर जगह अलग होंगे। नीचे हर काम के साथ किताब के ही उदाहरणों से एक नमूना है।

1. ब्रांड की जाँच

रोज़ इस्तेमाल होने वाले कुछ ब्रांडेड उत्पाद लीजिए (साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ आदि)। जाँच कीजिए कि इनमें से कौन-कौन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बनाए हैं।

कैसे करें

  1. हर उत्पाद के पैकेट या लेबल पर बनाने वाली कंपनी का नाम और पता ढूँढिए।
  2. फिर पता कीजिए कि वह कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन करती है या नहीं: बड़ों से पूछिए, अख़बार या कंपनी की वेबसाइट देखिए। यही बहुराष्ट्रीय कंपनी की पहचान है।
  3. याद रखिए: भारतीय कंपनी भी बहुराष्ट्रीय हो सकती है, जैसे टाटा मोटर्स।

नमूना: तालिका ऐसे भरिए

उत्पादकंपनीबहुराष्ट्रीय?कैसे पता चला
कारफोर्ड मोटर्सहाँअमेरिकी कंपनी, 26 देशों में उत्पादन (किताब, पृ. 59)
मोटरगाड़ीटाटा मोटर्सहाँभारतीय कंपनी जो बहुराष्ट्रीय बनी (किताब, पृ. 67)

अब अपने घर की चीज़ों से ऐसी ही पंक्तियाँ भरिए।

2. एक उद्योग का अध्ययन

अपनी पसंद का कोई भारतीय उद्योग या सेवा लीजिए। लोगों से बातचीत, अख़बार और पत्रिकाओं की कतरनों, किताबों, दूरदर्शन और इंटरनेट से इन पहलुओं पर जानकारी और फोटो जुटाइए: (क) उद्योग के अलग-अलग उत्पादक या कंपनियाँ; (ख) क्या उत्पाद दूसरे देशों को निर्यात होता है; (ग) क्या उत्पादकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हैं; (घ) उद्योग में प्रतिस्पर्धा; (ङ) काम की परिस्थितियाँ; (च) बीते पंद्रह वर्षों में कोई बड़ा बदलाव; (छ) उद्योग में काम करने वालों की समस्याएँ।

कैसे करें

  1. अपने इलाके का कोई उद्योग चुनिए जिसके लोगों से आप मिल सकें, जैसे कपड़ा, जूते-चप्पल, खिलौने या कोई सेवा।
  2. सातों पहलुओं के लिए पहले सवाल लिख लीजिए, फिर दो-तीन लोगों से बात कीजिए: एक मालिक या व्यापारी, और एक-दो श्रमिक।
  3. हर पहलू के आगे दो-तीन पंक्तियाँ लिखिए, और जहाँ से जानकारी मिली, उसका नाम भी।

नमूना: किताब का वस्त्र निर्यात उद्योग (पृ. 69)

पहलूकिताब से
(क) उत्पादकभारतीय निर्यातकों की फैक्ट्रियाँ, जैसे दिल्ली की वह फैक्ट्री जहाँ सुशीला काम करती थी
(ख) निर्यातहाँ, अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियों के ऑर्डर पर
(ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँख़रीदार के रूप में: वे ऑर्डर देती हैं और सबसे सस्ता माल खोजती हैं
(घ) प्रतिस्पर्धाबड़े ऑर्डर के लिए निर्यातकों में कड़ी होड़, इसलिए लागत घटाने का दबाव
(ङ) काम की परिस्थितियाँअस्थायी रोज़गार, बहुत लंबे घंटे, माँग ज़्यादा हो तो रात में भी काम
(च) बड़ा बदलावसुशीला की पुरानी फैक्ट्री 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में बंद हुई; स्थायी काम की जगह अस्थायी काम
(छ) समस्याएँकम मज़दूरी; स्वास्थ्य बीमा और भविष्य निधि नहीं; रोज़गार सुनिश्चित नहीं

आपके चुने उद्योग की तस्वीर इससे अलग भी हो सकती है; जो मिले, वही लिखिए।