कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास) · पुस्तक: भारत और समकालीन विश्व–2 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 105–128 · कुल कालांश: 11 (+1 पुनरावृत्ति) · माध्यम: हिंदी
अधिगम प्रतिफल (इस अध्याय के बाद विद्यार्थी क्या कर पाएगा)
| # | प्रतिफल |
|---|---|
| 1 | बता पाएगा कि छपाई की तकनीक चीन, जापान और कोरिया में जन्मी और यूरोप वहाँ से सीखा। |
| 2 | गुटेन्बर्ग प्रेस की बनावट और कार्य-विधि पूरे वाक्यों में लिख पाएगा। |
| 3 | समझा पाएगा कि ‘मुद्रण क्रांति’ का मतलब सिर्फ़ मशीन नहीं, बल्कि सत्ता से लोगों का बदला हुआ रिश्ता है। |
| 4 | यह तर्क दे पाएगा कि छपाई से कुछ लोग ख़ुश थे और कुछ डरते थे — और दोनों के कारण बता पाएगा। |
| 5 | भारत में छपाई के आने से महिलाओं, ग़रीब जनता और सुधारकों पर पड़े असर को उदाहरण-सहित लिख पाएगा। |
| 6 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट और गांधी के 1922 के कथन को राष्ट्रवाद से जोड़ पाएगा। |
| 7 | यह समझ पाएगा कि इतिहास में कोई भी बदलाव सीधे-सीधे एक कारण से नहीं होता। |
कालांश 1 — छपाई के बिना दुनिया कैसी होती?
उद्देश्य: विद्यार्थी को अपने चारों तरफ़ की छपी हुई चीज़ें दिखाकर अध्याय में प्रवेश कराना।
प्रवेश गतिविधि (7 मिनट) —
- बच्चों से कहिए — “अपने बस्ते में जो कुछ है, उसमें से जो-जो छपा हुआ है, उसे मेज़ पर रखो।”
- किताब, नोटबुक का कवर, पेन पर लिखा नाम, टिफ़िन के डिब्बे का लेबल, बस का टिकट — सब कुछ छपा हुआ है।
- फिर पूछिए — “अगर छपाई नहीं होती, तो इनमें से क्या-क्या न होता?”
मुख्य शिक्षण (20 मिनट) —
- पाठ्यपुस्तक का पहला अनुच्छेद (पृष्ठ 105) पढ़वाइए।
- अध्याय के तीन प्रश्न बोर्ड पर लिखिए — यह इतिहास क्या है? मुद्रित सामग्री कब से चली? आधुनिक दुनिया बनाने में इसकी क्या भूमिका थी?
- फिर दो वाक्य बोर्ड पर लिखिए और उन्हें पूरे अध्याय की धुरी बताइए —
- लूथर: “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है।”
- इरैस्मस: “किताबें भिनभिनाती मक्खियों की तरह हैं।”
समापन (8 मिनट) —
- पूछिए — “आज भी क्या कोई चीज़ ऐसी है जिससे कुछ लोग ख़ुश हैं और कुछ डरते हैं?” (मोबाइल, सोशल मीडिया — बच्चे ख़ुद जोड़ लेंगे।)
गृहकार्य: घर की कोई पाँच छपी हुई चीज़ें लिखकर लाइए — और यह भी कि उनके बिना क्या मुश्किल होती।
कालांश 2 — छपाई कहाँ जन्मी: चीन, जापान, कोरिया
उद्देश्य: यह भ्रम तोड़ना कि छपाई यूरोप की देन है।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- 594 ई. — चीन में स्याही लगे काठ के ब्लॉक पर काग़ज़ रगड़कर छपाई।
- काग़ज़ पतला था, दोनों तरफ़ नहीं छप सकता था — इसलिए ‘एकॉर्डियन’ शैली की किताब बनी।
- चीनी राजतंत्र सबसे बड़ा उत्पादक क्यों था — सिविल सेवा परीक्षा की पूरी कड़ी बोर्ड पर बनाइए।
- जापान — 768–770 ई. में तकनीक पहुँची; 868 ई. में डायमंड सूत्र।
- कोरिया — त्रिपीटका कोरियाना (80,000 वुडब्लॉक) और जिक्जी (धातुई चलअक्षर, 14वीं सदी का अंत)।
बोर्ड-कार्य —
| देश | योगदान |
|---|---|
| चीन | 594 ई. से वुडब्लॉक छपाई; सिविल सेवा परीक्षा की किताबें |
| जापान | 868 ई. का डायमंड सूत्र; एदो की शहरी छपाई |
| कोरिया | त्रिपीटका कोरियाना; धातुई चलअक्षर वाली जिक्जी |
मूल्यांकन प्रश्न —
- चीनी राजतंत्र मुद्रित सामग्री का सबसे बड़ा उत्पादक क्यों था?
- चीनी किताबें ‘एकॉर्डियन’ शैली में क्यों बनाई जाती थीं?
गृहकार्य: जिक्जी और गुटेन्बर्ग की बाइबिल — दोनों के बारे में तीन-तीन वाक्य लिखिए।
कालांश 3 — यूरोप में मुद्रण का आना: मार्को पोलो से गुटेन्बर्ग तक
उद्देश्य: पूरी तकनीकी शृंखला क्रम से बैठाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- क्रम बोर्ड पर बनाइए — ग्यारहवीं सदी काग़ज़ → 1295 मार्को पोलो → तख़्ती की छपाई → 1448 गुटेन्बर्ग प्रेस।
- पांडुलिपि से माँग क्यों नहीं पूरी होती थी — पाँच कारण लिखवाइए (ख़र्चीली, समयसाध्य, श्रमसाध्य, नाज़ुक, सीमित सर्कुलेशन)।
- गुटेन्बर्ग की कहानी सुनाइए — जैतून प्रेस → प्रिंटिंग प्रेस, सुनारी → धातुई अक्षर।
- 1448 यंत्र तैयार; पहली किताब बाइबिल; 180 प्रतियाँ, तीन साल।
कक्षा-प्रयोग (5 मिनट) —
- आलू पर कोई अक्षर काटकर स्याही लगाकर छापिए। फिर पूछिए — “अगर मुझे दूसरा शब्द छापना हो तो?”
- यहीं से ‘मूवेबल टाइप’ का अर्थ अपने आप समझ आ जाएगा।
मूल्यांकन प्रश्न —
- वुडब्लॉक प्रिंट यूरोप में 1295 के बाद क्यों आई? (अभ्यास प्रश्न 1-क)
- गुटेन्बर्ग ने अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल आविष्कार में कैसे किया?
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2-क — ‘गुटेन्बर्ग प्रेस’ पर छोटी टिप्पणी लिखिए।
कालांश 4 — मुद्रण क्रांति और नया पाठक वर्ग
उद्देश्य: ‘क्रांति’ शब्द का अर्थ तकनीक से हटाकर समाज पर ले जाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- मुद्रण क्रांति की परिभाषा शब्दश: लिखवाइए (सूचना-ज्ञान, संस्था-सत्ता, लोकचेतना)।
- नया पाठक वर्ग कैसे बना — पाँच कड़ी वाली शृंखला।
- साक्षरता की दीवार और मुद्रकों का चतुर हल — लोकगीत, सचित्र किताबें, शराबघरों में गाया-सुनाया जाना।
- मुख्य वाक्य लिखवाइए — “अगर पहले की जनता श्रोता थी, तो अब पाठक-जनता अस्तित्व में आ गई थी।”
कक्षा-संवाद —
- पूछिए — “क्या आज भी ऐसा होता है कि कोई पढ़कर सुनाता है और बाक़ी सुनते हैं?” (गाँव में अख़बार, धार्मिक पाठ — बच्चे उदाहरण देंगे।)
मूल्यांकन प्रश्न —
- मुद्रण क्रांति क्या थी?
- मौखिक और मुद्रित संस्कृति के बीच की रेखा धुँधली कैसे पड़ी?
गृहकार्य: 04-रिवीजन नोट्स के भाग 3 और 4 पढ़कर आइए।
कालांश 5 — प्रिंट का डर: लूथर, मेनोकियो और इरैस्मस (सबसे महत्त्वपूर्ण कालांश)
उद्देश्य: यह समझाना कि नयी तकनीक सत्ता को क्यों डराती है।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- पहले लूथर — पिच्चानवे स्थापनाएँ, विटेनबर्ग का दरवाज़ा, प्रोटेस्टेंट धर्मसुधार, 5000 प्रतियाँ।
- फिर मेनोकियो की कहानी पूरी सुनाइए — एक किसान, किताबें, अपनी व्याख्या, इन्क्वीज़ीशन, मौत की सज़ा।
- फिर इरैस्मस का स्रोत-क पढ़वाइए।
- 1558 — प्रतिबंधित किताबों की सूची।
बोर्ड-कार्य — दो ख़ाने बनाइए
| छपाई के पक्ष में | छपाई से डरने वाले |
|---|---|
| मार्टिन लूथर | रोमन कैथलिक चर्च |
| मर्सिए | इरैस्मस |
| ज्ञानोदय के चिंतक | धर्मगुरु और सम्राट |
कक्षा-संवाद (10 मिनट) —
- चर्चा करें (पृष्ठ 113): “छपाई से विरोधी विचारों के प्रसार को किस तरह बल मिलता था?”
मूल्यांकन प्रश्न —
- रोमन कैथलिक चर्च ने प्रतिबंधित किताबों की सूची क्यों रखनी शुरू की? (अभ्यास प्रश्न 1-ग)
- मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में क्यों था? (अभ्यास प्रश्न 1-ख)
गृहकार्य: मेनोकियो की कहानी अपने शब्दों में छह वाक्यों में लिखिए।
कालांश 6 — पढ़ने का जुनून और फ़्रांसीसी क्रांति
उद्देश्य: इतिहास में ‘सीधा कारण’ न होने की समझ देना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- साक्षरता 60–80% तक कैसे पहुँची।
- सस्ती किताबों की तालिका — पंचांग, चैपबुक, चैपमेन, बिब्लियोथीक ब्ल्यू।
- मर्सिए के दोनों कथन बोर्ड पर।
- फ़्रांसीसी क्रांति के तीन तर्क क्रम से।
- और फिर सबसे ज़रूरी — पाठ्यपुस्तक की सावधानी: “लोग-बाग़ हर तरह की सामग्री पढ़ते थे।”
कक्षा-प्रयोग —
- पूछिए — “अगर एक ही किताब दस लोग पढ़ें, तो क्या दसों एक जैसा सोचेंगे?”
- बच्चों के उत्तर से ही पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष निकल आएगा — “मुद्रण ने उनके मानस को सीधे तौर पर भले नहीं रचा हो, पर इसने अलग ढंग से सोचने की संभावनाएँ ज़रूर खोलीं।”
मूल्यांकन प्रश्न —
- मुद्रण संस्कृति ने फ़्रांसीसी क्रांति के लिए ज़मीन कैसे तैयार की — तीन तर्क दीजिए।
- इन तर्कों की एक सीमा भी बताइए।
गृहकार्य: चर्चा करें (पृष्ठ 116) का उत्तर आठ-दस वाक्यों में लिखिए।
कालांश 7 — उन्नीसवीं सदी: बच्चे, महिलाएँ, मज़दूर और नयी मशीनें
उद्देश्य: नए पाठक वर्गों और तकनीकी परिष्कार दोनों को जोड़ना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- बच्चे — अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा; फ़्रांस 1857 का बाल-प्रेस; ग्रिम बंधु और 1812 का संकलन।
- यहाँ रुककर वह गहरी बात कहिए — “छपने से लोककथाएँ दर्ज तो हुईं, पर बदल भी गईं।”
- महिलाएँ — पेनी मैगज़ीन; जेन ऑस्टिन, ब्रॉण्ट बहनें, जॉर्ज इलियट; नयी नारी की तीन पहचान।
- मज़दूर — किराए के पुस्तकालय; बॉक्स 3 (थॉमस वुड और गोर्की) ज़रूर पढ़वाइए।
- तकनीक की तालिका — धातु का प्रेस → 8000 शीट → ऑफ़सेट छह रंग → बिजली के प्रेस।
- बेचने के गुर — धारावाहिक उपन्यास, शिलिंग शृंखला, डस्ट कवर, 1930 की मंदी और पेपरबैक।
अंतर-अध्याय जोड़ —
- अध्याय 3 से — 1929 की महामंदी। अध्याय 4 से — विज्ञापन और उपभोक्ता। यहाँ दोनों एक साथ दिखते हैं।
मूल्यांकन प्रश्न —
- उन्नीसवीं सदी में बच्चे पाठकों की अहम श्रेणी कैसे बने?
- 1930 की मंदी का किताबों के प्रकाशन पर क्या असर हुआ?
गृहकार्य: तकनीकी परिष्कार की तालिका याद करके आइए — अगले दिन मौखिक जाँच होगी।
कालांश 8 — भारत का मुद्रण संसार: पांडुलिपि से प्रेस तक
उद्देश्य: अध्याय के भारतीय हिस्से में प्रवेश।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- पांडुलिपियाँ — ताड़ के पत्ते, हाथ का काग़ज़, चार समस्याएँ।
- बंगाल की पाठशालाओं का उदाहरण — “कई-सारे लोग बिना कोई किताब पढ़े साक्षर बन जाते थे।” यह वाक्य बच्चों को चौंकाता है, इसे ज़रूर रुककर समझाइए।
- छपाई भारत आई — गोवा 16वीं सदी, 1579 तमिल, 1674 तक 50 किताबें, 1713 मलयालम, 32 डच तमिल किताबें।
- हिक्की का बंगाल गजट (1780) और वॉरेन हेस्टिंग्स का मुक़दमा।
- गंगाधर भट्टाचार्य का बंगाल गजट — भारतीयों का पहला प्रयास।
बोर्ड-कार्य — भारत में छपाई का क्रम तालिका में लिखवाइए।
मूल्यांकन प्रश्न —
- भारत में प्रिंटिंग प्रेस पहले-पहल कैसे और किसके साथ आई?
- हिक्की पर मुक़दमा क्यों हुआ?
गृहकार्य: पांडुलिपि और छपी किताब में चार अंतर तालिका बनाकर लिखिए।
कालांश 9 — धार्मिक सुधार और सार्वजनिक बहसें
उद्देश्य: यह दिखाना कि छपाई ने बहस को सार्वजनिक बनाया।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- तीन कड़ी — नए विचारों का प्रसार, बहस की शक्ल तय हुई, जन-समुदाय शामिल हुआ।
- हिंदू सुधार-बहस — संवाद कौमुदी (1821) बनाम समाचार चंद्रिका।
- उलमा की चिंता और देवबंद (1867) के फ़तवे।
- तुलसीदास का रामचरितमानस — पहला मुद्रित संस्करण 1810, कलकत्ता; नवल किशोर प्रेस और श्री वेंकटेश्वर प्रेस।
- अंतिम दो वाक्य लिखवाइए — छपाई ने बाँटा भी और जोड़ा भी।
स्रोत-कार्य (10 मिनट) —
- स्रोत-घ के दोनों उद्धरण पढ़वाइए और पूछिए — “1849 में अख़बार का काम क्या बताया गया, और 1870 में क्या?”
मूल्यांकन प्रश्न —
- छपाई ने धार्मिक बहसों को किस तरह बदला?
- उलमा ने लिथोग्राफ़ी प्रेस का इस्तेमाल क्यों किया?
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3-ग (सुधारक) का उत्तर लिखिए।
कालांश 10 — महिलाएँ, ग़रीब जनता और प्रकाशन के नए रूप
उद्देश्य: अध्याय का सबसे संवेदनशील हिस्सा — इसे भावनात्मक रूप से जोड़कर पढ़ाइए।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- उपन्यास और नयी विधाएँ; राजा रवि वर्मा; कार्टून और कैरिकेचर; चित्र 18 (इंडियन शारिवारी)।
- महिलाएँ — पहले सकारात्मक पक्ष, फिर विरोध का पक्ष।
- राससुन्दरी देबी की कहानी पूरी सुनाइए — रसोई में छिपकर पढ़ना, आमार जीबोन (1876)।
- कैलाशबाशिनी देवी, ताराबाई शिंदे, पंडिता रमाबाई।
- पर संतुलन ज़रूर दिखाइए — स्त्री धर्म विचार जैसी किताबें आज्ञाकारिता भी सिखाती थीं।
- ग़रीब जनता — फुले की गुलामगिरी (1871), अंबेडकर, पेरियार, काशीबाबा (1938), सुदर्शन चक्र, बंगलौर के मज़दूरों के पुस्तकालय।
स्रोत-कार्य —
- स्रोत-ङ (बेगम रोकैया) पढ़वाइए और उनके तर्क का ढाँचा पूछिए।
मूल्यांकन प्रश्न —
- उन्नीसवीं सदी में मुद्रण-संस्कृति का महिलाओं के लिए क्या मतलब था? (अभ्यास प्रश्न 3-क)
- ग़रीब जनता पर मुद्रण संस्कृति का क्या असर हुआ? (अभ्यास प्रश्न 3-ख)
गृहकार्य: राससुन्दरी देबी पर आठ वाक्य लिखिए।
कालांश 11 — प्रिंट और प्रतिबंध: सरकार को डर किससे था
उद्देश्य: अध्याय को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़कर समाप्त करना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- पहले वह चौंकाने वाली बात — पहली सेंसरशिप अंग्रेज़ों पर लगी थी, भारतीयों पर नहीं।
- 1820 का दशक → 1835 बेंटिंक और मेकॉले → 1857 के बाद रवैया बदला → 1878 वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट।
- क़ानून ने क्या अधिकार दिए — चेतावनी, ज़ब्ती, मशीनें छीनना।
- तिलक — 1907 कालापानी, केसरी, 1908 क़ैद।
- बॉक्स 5 की तालिका — 22/18 अख़बार, 1919 रॉलट, अगस्त 1942 में 90 अख़बार।
- स्रोत-च — गांधी 1922 का कथन।
समापन-संवाद (10 मिनट) —
- चर्चा करें (पृष्ठ 128, प्रश्न 4): “मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में क्या मदद की?”
- बोर्ड पर वापस वही दो वाक्य लिखिए जिनसे कालांश 1 में शुरुआत हुई थी — लूथर और इरैस्मस।
- पूछिए — “अब तुम किसके साथ हो?” बच्चे दोनों तरफ़ के तर्क देंगे — यही इस अध्याय की सफलता है।
मूल्यांकन प्रश्न —
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट क्या था? (अभ्यास प्रश्न 2-ग)
- गांधी ने प्रेस की आज़ादी को स्वराज की लड़ाई क्यों कहा? (अभ्यास प्रश्न 1-घ)
गृहकार्य: पूरे अध्याय की तालिका (मास्टर नोट्स भाग 10) याद करके आइए।
कालांश 12 (वैकल्पिक) — पुनरावृत्ति और परीक्षा-अभ्यास
- फ्लैशकार्ड (फ़ाइल 06) से 15 मिनट की तेज़ मौखिक जाँच।
- प्रश्न बैंक (फ़ाइल 05) का नमूना पत्र 1 कक्षा में हल करवाइए।
- तिथियों की तालिका (मास्टर नोट्स भाग 14) की लिखित जाँच।
कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता
| समस्या | क्या कीजिए |
|---|---|
| विदेशी नाम याद नहीं रहते (गुटेन्बर्ग, इरैस्मस, मेनोकियो, मर्सिए) | हर नाम के साथ एक चित्र या एक क्रिया जोड़िए — गुटेन्बर्ग = प्रेस, इरैस्मस = मक्खी, मेनोकियो = सज़ा, मर्सिए = “काँपने का वक़्त”। |
| तिथियाँ आपस में गड्डमड्ड हो जाती हैं | सिर्फ़ छह तिथियाँ अनिवार्य रखिए — 594, 1295, 1448, 1780, 1878, 1942। बाक़ी बाद में। |
| चीन-जापान-कोरिया अलग नहीं कर पाते | तीन शब्द दीजिए — चीन = परीक्षा, जापान = डायमंड सूत्र, कोरिया = धातु के अक्षर। |
| “मुद्रण क्रांति” का अर्थ पकड़ में नहीं आता | तीन शब्द बोर्ड पर लिखिए — सूचना, सत्ता, सोच। कहिए — “तीनों से रिश्ता बदला, इसी को क्रांति कहते हैं।” |
| लंबे उत्तर लिखने में डर लगता है | 05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में। |
| भारत वाला हिस्सा बहुत लंबा लगता है | उसे तीन नामों पर टिकाइए — राममोहन राय (बहस), राससुन्दरी देबी (महिलाएँ), काशीबाबा (मज़दूर)। |
शिक्षण-सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| पाठ्यपुस्तक के चित्र 5, 6, 7, 8 | गुटेन्बर्ग और उसकी प्रेस — कालांश 3 |
| चित्र 9 और 10 | प्रिंट का उत्सव और प्रिंट का डर — कालांश 5 |
| चित्र 11 | फ़्रांसीसी क्रांति का कार्टून — कालांश 6 |
| चित्र 12 और 13 | पेनी मैगज़ीन और विज्ञापन — कालांश 7 |
| चित्र 14, 15, 16 | भारतीय पांडुलिपियाँ — कालांश 8 |
| चित्र 17, 18 | रवि वर्मा और इंडियन शारिवारी — कालांश 10 |
| चित्र 19, 20, 21 | तीन काष्ठचित्र, गतिविधि — कालांश 10 |
| आलू और स्याही | मूवेबल टाइप का कक्षा-प्रयोग — कालांश 3 |
| कोई पुराना अख़बार | बॉक्स 3 (थॉमस वुड) समझाने के लिए — कालांश 7 |
मूल्यांकन-संकेतक
| स्तर | विद्यार्थी क्या कर रहा है |
|---|---|
| प्रारंभिक | तिथियाँ और नाम बता पाता है, पर उन्हें जोड़ नहीं पाता। |
| विकासशील | कारण बता पाता है, उदाहरण देता है, पर दोनों पक्ष नहीं रख पाता। |
| दक्ष | छपाई के पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क देता है, और उदाहरणों से सिद्ध करता है। |
| उन्नत | यह कह पाता है कि छपाई ने बाँटा भी और जोड़ा भी; और आज के मीडिया से तुलना कर पाता है। |
शिक्षक के लिए अंतिम सुझाव
- इस अध्याय को याद करने की सूची मत बनने दीजिए। यह एक बहस है, और बहस पढ़ाई नहीं जाती — करवाई जाती है।
- हर कालांश में कम से कम एक बार पूछिए — “इसमें कौन डर रहा था, और क्यों?”
- मेनोकियो और राससुन्दरी देबी — ये दो कहानियाँ अगर बच्चों के मन में बैठ गईं, तो अध्याय पूरा हो गया समझिए।
- अंत में आज से जोड़िए — “आज छपाई की जगह मोबाइल है। तब चर्च डरता था, आज कौन डरता है?” यह सवाल बच्चों को इतिहास का असली मतलब समझा देता है।