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स्रोत-चिह्न: ◆ प्राथमिक स्रोत (संधि-दस्तावेज़, NATO/SIPRI/सरकारी पोर्टल) · ◇ सशक्त द्वितीयक स्रोत (Britannica, समाचार-एजेंसियाँ, थिंक-टैंक)। पूरी सूची §XIV में।
विषय-सूची
| भाग | शीर्षक |
|---|---|
| I | केंद्रीय प्रश्न |
| II | जन्म, 1917–1922 |
| III | व्यवस्था कैसे चलती थी |
| IV | ठहराव, 1964–1985 |
| V | सुधार जो नियंत्रण से बाहर हो गया, 1985–1989 |
| VI | विघटन, 1990–1991 |
| VII | उसके बाद की अर्थव्यवस्था — ‘शॉक थेरेपी’ का पूरा हिसाब |
| VIII | उसके बाद की राजनीति — संघर्ष जो बचे रह गए |
| IX | ★★आज की स्थिति, 2026 — नौ खंडों में |
| X | निष्कर्ष — चार प्रश्नों के उत्तर |
| XI | दो प्रकरण-अध्ययन |
| XII | एक-पृष्ठ परीक्षा-तथ्य पट्टिका |
| XIII | ! सत्यापित नहीं हो सका |
| XIV | स्रोत-सूची |
भाग I — केंद्रीय प्रश्न
बीसवीं सदी का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रयोग यह था: क्या एक पूरा समाज निजी संपत्ति के बिना, योजना के सहारे, सचेत रूप से गढ़ा जा सकता है? 1917 में रूस ने यह प्रयोग शुरू किया। 1991 में वह समाप्त हो गया।
पर पतन की कहानी उतनी सीधी नहीं जितनी लगती है। सोवियत संघ किसी युद्ध में नहीं हारा। उस पर किसी ने आक्रमण नहीं किया। 1991 में उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार और एक विशाल सेना थी। फिर भी वह एक साल के भीतर खत्म हो गया — और लगभग बिना खून के।
इससे चार प्रश्न निकलते हैं, और यह अध्याय चारों का उत्तर है:
- यह व्यवस्था वास्तव में थी क्या — तानाशाही, कल्याणकारी राज्य, या दोनों?
- वह ढही क्यों — और क्यों ठीक तभी, 1989–91 में?
- उसके बाद क्या बना — और आज, साढ़े तीन दशक बाद, वह विरासत कहाँ खड़ी है?
- ★क्या वह विरासत आज भी बदल रही है — या 1991 का फ़ैसला अब स्थायी हो चुका है?
भाग II — जन्म, 1917–1922
2.1 दो क्रांतियाँ, एक वर्ष
1917 में रूस में दो क्रांतियाँ हुईं, एक नहीं —
- फरवरी क्रांति — ज़ार निकोलस द्वितीय का पतन; एक अस्थायी सरकार बनी।
- अक्टूबर क्रांति — व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने सत्ता ली। ◇
(पुरानी रूसी पंचांग-प्रणाली के कारण इसे ‘अक्टूबर क्रांति’ कहा जाता है, जबकि आधुनिक पंचांग में यह नवंबर 1917 है — प्रतियोगी परीक्षाओं में यह अंतर पूछा जाता है।)
2.2 संघ का गठन
- गृहयुद्ध (1918–21) के बाद, 30 दिसंबर 1922 को सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (USSR) की स्थापना की संधि हुई। ◆
- यही वह 1922 की संधि है जिसे दिसंबर 1991 में समाप्त किया गया — संघ का जन्म और मृत्यु, दोनों एक ही दस्तावेज़ से बँधे हैं।
- अंतिम रूप में संघ 15 गणराज्यों का था — रूस, उक्रेन, बेलारूस (स्लाव); एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया (बाल्टिक); कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किरगिज़स्तान, ताज़िकिस्तान (मध्य एशिया); जार्जिया, आर्मेनिया, अज़रबैजान (काकेशस); मोल्दोवा।
2.3 स्टालिन का ढाँचा (1924–1953)
लेनिन की मृत्यु के बाद जोजेफ़ स्टालिन ने वह ढाँचा बनाया जो 1991 तक चला —
- पंचवर्षीय योजनाएँ और तीव्र औद्योगीकरण;
- खेती का बलपूर्वक सामूहिकीकरण — जिसकी कीमत भीषण अकाल के रूप में चुकानी पड़ी;
- 1930 के दशक का ‘महा-आतंक’ — पार्टी, सेना और बुद्धिजीवियों का व्यापक सफ़ाया;
- द्वितीय विश्वयुद्ध में नाज़ी जर्मनी पर विजय — जिसने सोवियत संघ को महाशक्ति बनाया, पर लगभग 2.7 करोड़ सोवियत नागरिकों की जान की कीमत पर। ◇
यही द्वैत पूरे अध्याय की कुंजी है: वही व्यवस्था जिसने एक कृषि-प्रधान, निरक्षर देश को दो पीढ़ियों में औद्योगिक महाशक्ति बनाया, उसी ने अपने ही लाखों नागरिकों को मार डाला।
भाग III — व्यवस्था कैसे चलती थी
3.1 राजनीतिक ढाँचा
| संस्था | वास्तविक भूमिका |
|---|---|
| कम्युनिस्ट पार्टी (CPSU) | एकमात्र वैध दल; व्यवस्था की धुरी |
| पोलितब्यूरो | पार्टी का शीर्ष निर्णय-निकाय — असली सत्ता यहीं |
| महासचिव | देश का सबसे शक्तिशाली पद — राष्ट्रपति नहीं |
| सुप्रीम सोवियत | नाम की संसद; पार्टी के फ़ैसलों पर मुहर |
| नोमेनक्लातुरा | विशेषाधिकार-प्राप्त पदाधिकारी वर्ग — विशेष दुकानें, आवास, विदेश-यात्रा |
| केजीबी | सुरक्षा और गुप्तचर एजेंसी |
◇ यही कारण है कि गोर्बाचेव 1985 में ‘महासचिव’ बने — ‘राष्ट्रपति’ नहीं। राष्ट्रपति का पद उन्होंने 1990 में बनवाया, और वे उस पर बैठने वाले पहले और अंतिम व्यक्ति रहे।
3.2 आर्थिक ढाँचा
- गोस्प्लान (Gosplan) — राज्य योजना समिति, जो पंचवर्षीय योजनाएँ बनाती थी।
- कीमतें बाज़ार से नहीं, आदेश से तय होती थीं।
- मिल्कियत का प्रमुख रूप — राज्य का स्वामित्व; निजी उद्यम अवैध।
- कोई बेरोज़गारी नहीं — पर उत्पादकता कम; प्रसिद्ध सोवियत कहावत थी: “वे बहाना करते हैं कि हमें वेतन देते हैं, हम बहाना करते हैं कि काम करते हैं।” ◇
3.3 उपलब्धियाँ — जिन्हें भुला देना गलत होगा
- साक्षरता क्रांति के समय की अल्पसंख्यक स्थिति से लगभग सार्वभौम तक पहुँची।
- मुफ़्त स्वास्थ्य और शिक्षा; महिलाओं की श्रम-भागीदारी पश्चिम से कहीं अधिक।
- अंतरिक्ष में पहला उपग्रह (स्पुतनिक, 1957), पहला मानव (यूरी गागारिन, 1961), पहली महिला (वालेन्तीना तेरेश्कोवा, 1963)। ◇
3.4 अंतर्निहित दोष
| दोष | परिणाम |
|---|---|
| सूचना का अभाव | बाज़ार-कीमतों के बिना योजनाकार को पता ही नहीं चलता था कि क्या, कितना चाहिए |
| प्रोत्साहन का अभाव | लक्ष्य मात्रा में तय होते थे, गुणवत्ता में नहीं |
| नवाचार का दंड | प्रयोग करने पर जोखिम, न करने पर सुरक्षा |
| सैन्य को प्राथमिकता | सर्वोत्तम प्रतिभा और संसाधन रक्षा-क्षेत्र में, उपभोक्ता-क्षेत्र में नहीं |
| जवाबदेही का अभाव | कोई चुनाव नहीं, कोई स्वतंत्र प्रेस नहीं, कोई सुधार-दबाव नहीं |
इसीलिए वही देश अंतरिक्ष में पहला उपग्रह भेज सका, पर अपने नागरिकों को जूते और साबुन के लिए कतार में खड़ा रखता था।
भाग IV — ठहराव, 1964–1985
- ब्रेझनेव का दौर को इतिहासकार ‘ठहराव का युग’ कहते हैं। वृद्धि-दर लगातार गिरी।
- 1973 के तेल-संकट ने कुछ वर्षों तक ऊँची तेल-कीमतों से खज़ाना भरा — और सुधार की ज़रूरत टाल दी। जब 1980 के दशक में तेल की कीमतें गिरीं, बचाव का साधन नहीं बचा। ◇
- 1979 का अफ़ग़ानिस्तान हस्तक्षेप — दस वर्षों का युद्ध, भारी आर्थिक और मानवीय क़ीमत; इसे प्रायः ‘सोवियत संघ का वियतनाम’ कहा जाता है। सेना फ़रवरी 1989 में लौटी।
- 1985 तक तीन नेता चार वर्षों में मरे (ब्रेझनेव 1982, आंद्रोपोव 1984, चेर्नेंको 1985) — नेतृत्व की यह जड़ता ही 54 वर्षीय गोर्बाचेव के चयन का कारण बनी।
4.1 ‘दूसरी दुनिया’ अकेली नहीं थी — चीन-सोवियत विभाजन★
पाठ्यपुस्तक ‘दूसरी दुनिया’ को एक खेमे के रूप में चित्रित करती है, पर समाजवादी खेमा भी अंदर से एकजुट नहीं था।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| 1950 के दशक | चीन और सोवियत संघ वैचारिक रूप से नज़दीक थे — 1950 की चीन-सोवियत मैत्री-संधि |
| ★1960 के दशक — विभाजन | विचारधारात्मक और सीमा-विवाद दोनों पर मतभेद बढ़े; 1969 में सीमा पर सैन्य झड़पें तक हुईं |
| परिणाम | दोनों साम्यवादी महाशक्तियाँ एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बन गईं — शीतयुद्ध केवल ‘दो खेमों’ का नहीं, खेमों के भीतर भी दरार का दौर था |
| ★★भू-राजनीतिक असर | इसी दरार का फ़ायदा उठाकर अमरीका ने 1972 में चीन से संबंध सामान्य किए (निक्सन की चीन-यात्रा) — शीतयुद्ध की सरल ‘दो-खेमों’ वाली तस्वीर को तोड़ने वाली सबसे बड़ी घटना |
★यह याद रखना ज़रूरी है क्योंकि पाठ्यपुस्तक की ‘दो ध्रुवीयता’ एक सरलीकरण है — व्यवहार में समाजवादी खेमे के भीतर भी प्रतिद्वंद्विता थी, और इसी वजह से 1991 के बाद रूस और चीन दोनों अलग-अलग रास्तों से पूँजीवाद की ओर बढ़े — रूस ने शॉक थेरेपी, चीन ने क्रमिकतावाद (भाग VII.3)।
भाग V — सुधार जो नियंत्रण से बाहर हो गया, 1985–1989
5.1 गोर्बाचेव के चार पद
| पद | अर्थ | नतीजा |
|---|---|---|
| पेरेस्त्रोइका | पुनर्रचना — आर्थिक ढाँचे में सुधार | अधूरा — न योजना बची, न बाज़ार बना |
| ग्लासनोस्त | खुलापन — प्रेस और अभिव्यक्ति की छूट | ★सबसे प्रभावी और सबसे विस्फोटक |
| डेमोक्रातिज़ात्सिया | लोकतंत्रीकरण — प्रतिस्पर्धी चुनाव | 1989 में पहले अर्ध-मुक्त चुनाव |
| ‘नयी सोच’ | विदेश नीति में परिवर्तन | निरस्त्रीकरण; पूर्वी यूरोप को छोड़ना |
◇ सबसे बड़ा मोड़ ग्लासनोस्त था। जैसे ही स्टालिन-काल के अपराध, चेर्नोबिल (1986) की सच्चाई और आर्थिक आँकड़ों की असलियत सार्वजनिक हुई, व्यवस्था की वैधता ही ढह गई। सुधार का इरादा व्यवस्था बचाना था; परिणाम उसका पर्दाफ़ाश हुआ।
5.2 ‘सिनात्रा सिद्धांत’ और 1989
- ब्रेझनेव सिद्धांत (1968) कहता था कि समाजवादी देशों में सोवियत हस्तक्षेप जायज़ है। इसी के तहत 1956 में हंगरी और 1968 में चेकोस्लोवाकिया में टैंक भेजे गए थे।
- गोर्बाचेव ने इसे रद्द कर दिया। सोवियत प्रवक्ता ने मज़ाक में इसे ‘सिनात्रा सिद्धांत’ कहा — फ़्रैंक सिनात्रा के गीत ‘माय वे’ पर, यानी “हर देश अपने ढंग से चले।” ◇
- ★यही 1989 की कुंजी है। जैसे ही पूर्वी यूरोप को यक़ीन हुआ कि टैंक नहीं आएँगे, एक साल में सब बदल गया —
| देश | 1989 |
|---|---|
| पोलैंड | जून में अर्ध-मुक्त चुनाव; ‘सॉलिडैरिटी’ की भारी जीत |
| हंगरी | मई में ऑस्ट्रिया से लगी बाड़ काटी — ‘लौह-आवरण’ में पहला छेद |
| पूर्वी जर्मनी | ★9 नवंबर — बर्लिन की दीवार गिरी |
| चेकोस्लोवाकिया | नवंबर–दिसंबर — ‘मख़मली क्रांति’, बिना हिंसा के सत्ता-परिवर्तन |
| रोमानिया | दिसंबर — एकमात्र हिंसक अंत; चाउशेस्कू की फाँसी |
भाग VI — विघटन, 1990–1991
6.1 राष्ट्रवाद का उभार
- मार्च 1990 — लिथुआनिया स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला गणराज्य।
- 23 अगस्त 1989 — ‘बाल्टिक शृंखला’: तीनों बाल्टिक देशों के लगभग 20 लाख लोगों ने लगभग 675 किमी लंबी मानव-शृंखला बनाई — मोलोतोव-रिबेनट्रॉप समझौते की 50वीं वर्षगाँठ पर। ◇
- ★विडंबना: असंतोष मध्य एशिया में नहीं, बल्कि समृद्ध यूरोपीय गणराज्यों में सबसे प्रबल था — उन्हें लगता था कि पिछड़े क्षेत्रों को साथ रखने की क़ीमत वे चुका रहे हैं। मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता माँगी ही नहीं।
6.2 अगस्त 1991 का तख़्तापलट
- 19–21 अगस्त 1991 — गरमपंथियों ने गोर्बाचेव को क्रीमिया में नज़रबंद कर सत्ता लेने की कोशिश की।
- बोरिस येल्तसिन मास्को में टैंक पर चढ़कर प्रतिरोध का चेहरा बने; सेना ने गोली चलाने से इनकार किया; तीन दिन में तख़्तापलट ढह गया। ◇
- परिणाम उलटा हुआ: गोर्बाचेव लौटे तो सत्ता उनके पास नहीं, येल्तसिन के पास थी। कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियाँ निलंबित कर दी गईं।
6.3 औपचारिक अंत
| तिथि | दस्तावेज़ | क्या हुआ |
|---|---|---|
| 8 दिसंबर 1991 | बेलावेज़ा समझौता | येल्तसिन (रूस), शुशकेविच (बेलारूस), क्रावचुक (उक्रेन) ने बेलारूस के विस्कुली में हस्ताक्षर किए — संघ भंग, CIS का गठन ◆ |
| 21 दिसंबर 1991 | अल्मा-अता प्रोटोकॉल | 11 गणराज्यों (जार्जिया को छोड़कर) ने हस्ताक्षर किए; CIS औपचारिक रूप से स्थापित ◆ |
| 25 दिसंबर 1991 | — | गोर्बाचेव का इस्तीफा; क्रेमलिन पर सोवियत ध्वज उतरा |
| 26 दिसंबर 1991 | — | सुप्रीम सोवियत ने स्वयं को भंग किया — संघ का कानूनी अंत |
6.4 उत्तराधिकार का प्रश्न
रूस को ‘उत्तराधिकारी राज्य’ (successor state) माना गया —
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की स्थायी सीट रूस को मिली;
- सोवियत संधियाँ और ऋण रूस ने अपने ज़िम्मे लिए;
- परमाणु हथियार: वे रूस, उक्रेन, बेलारूस और कज़ाकिस्तान — चार गणराज्यों में बिखरे थे। 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन के तहत बाद के तीनों ने हथियार रूस को सौंपकर परमाणु-अप्रसार संधि में शामिल होना स्वीकार किया, बदले में उनकी क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी दी गई। ◇
यह अंतिम बिंदु आज के लिए सबसे प्रासंगिक है — 2014 और 2022 की घटनाओं ने उन गारंटियों की क़ीमत पर सवाल खड़े कर दिए, और यह प्रश्न आज, 2026 में, रूस-यूक्रेन युद्ध के रूप में अभी भी खुला हुआ है (भाग IX.6 देखिए)।
भाग VII — उसके बाद की अर्थव्यवस्था — ‘शॉक थेरेपी’ का पूरा हिसाब
7.1 मॉडल
नाम: shock therapy — ‘आघात पहुँचाकर उपचार’। निर्देशन: विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष। प्रयोगशाला: पोलैंड — ‘बाल्सरोविच योजना’, 1 जनवरी 1990; मुख्य सलाहकार जेफ़री सैक्स। ◇
पाँच स्तंभ: समष्टि-आर्थिक स्थिरीकरण · उदारीकरण · निजीकरण · सामाजिक सुरक्षा-जाल · अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता।
★रूस में चौथा स्तंभ लागू ही नहीं हुआ। यही अंतर बाद के परिणामों की जड़ है।
7.2 रूस में क्या हुआ
| मद | परिणाम |
|---|---|
| निजीकरण | लगभग 90% उद्योग निजी हाथों में; कीमत कम आँकी गई — ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ |
| अधिकार-पत्र | नागरिकों को दिए गए; अधिकांश ने तुरंत बेच दिए — पूँजी थोड़े हाथों में सिमटी |
| ओलिगार्क | मुट्ठी भर लोग रातोंरात अरबपति; अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर नियंत्रण |
| मुद्रा | रूबल का पतन; मुद्रास्फीति से बचत का सफ़ाया |
| उत्पादन | 1999 का वास्तविक GDP 1989 से नीचे — एक दशक का शुद्ध नुकसान |
| बैंक | डेढ़ हज़ार में से लगभग आधे दिवालिया; 1998 का वित्तीय संकट |
| समाज | कल्याण-व्यवस्था ध्वस्त; पुरुषों की जीवन-प्रत्याशा में तीव्र गिरावट — शांति-काल में असाधारण ◇ |
| वसूली | सन् 2000 के बाद, मुख्यतः तेल-गैस की ऊँची कीमतों से — सुधार से नहीं |
7.3 दूसरा रास्ता जो मौजूद था
चीन और वियतनाम ने क्रमिकतावाद (gradualism) चुना — और उन्हें संक्रमणकालीन मंदी झेलनी ही नहीं पड़ी; सुधार-काल में उनकी वृद्धि-दर सदैव धनात्मक रही। इसके विपरीत मंदी की अवधि रही — पोलैंड 2 वर्ष · मध्य यूरोप 3–4 वर्ष · बाल्टिक 5 वर्ष · बुल्गारिया 8 वर्ष · रोमानिया 10 वर्ष। ◇
निष्कर्ष: प्रश्न “तेज़ी या धीमे?” से ज़्यादा महत्वपूर्ण यह था कि संस्थाएँ पहले बनीं या बाद में। जहाँ कानून, नियामक और सुरक्षा-जाल पहले खड़े हुए, वहाँ संक्रमण टिका; जहाँ केवल कीमतें और स्वामित्व बदले, वहाँ लूट हुई।
भाग VIII — उसके बाद की राजनीति — संघर्ष जो बचे रह गए
| क्षेत्र | कहानी |
|---|---|
| चेचन्या | दो युद्ध — 1994–96 और 1999 से; भारी नागरिक हताहत; अंततः रूस के भीतर ही रहा। ! रमज़ान कादिरोव के नेतृत्व में असाधारण आंतरिक स्वायत्तता, जिसका भविष्य 2025-26 में कादिरोव के स्वास्थ्य और उत्तराधिकार को लेकर अनिश्चित |
| ताज़िकिस्तान | गृहयुद्ध मई 1992 से; 27 जून 1997 को मास्को में सामान्य शांति समझौता; 1.5 लाख से अधिक मृत ◇ |
| नगरनो-कराबाख | 1990 के दशक का युद्ध → 2020 का युद्ध → सितंबर 2023 में अज़रबैजान का पूर्ण नियंत्रण → अगस्त 2025 में वाशिंगटन में शांति-समझौते का आद्याक्षर (भाग IX.5) |
| जार्जिया | अबख़ाज़िया और दक्षिण ओसेतिया के अलगाव; 2008 का रूस-जार्जिया युद्ध; 2009 में CIS से बाहर; 2025-26 में रूस का नियंत्रण और गहरा (भाग IX.7) |
| मोल्दोवा | ट्रांसनिस्त्रिया — 1992 से अनसुलझा विवाद; ★2026 में स्वयं मोल्दोवा ही CIS से बाहर निकलने की प्रक्रिया में (भाग IX.4) |
| चेकोस्लोवाकिया | ★‘मख़मली तलाक़’, 1 जनवरी 1993 — पूरे क्षेत्र का एकमात्र पूर्णतः शांतिपूर्ण विभाजन |
| युगोस्लाविया | 1991–95 के युद्ध; जुलाई 1995 — स्रेब्रेनित्सा, जिसे न्यायालयों ने नरसंहार माना; दिसंबर 1995 — डेटन समझौता; 1999 — कोसोवो पर नाटो की बमबारी; 2008 — कोसोवो की स्वतंत्रता-घोषणा, जिसे भारत सहित कई देश आज, 2026 में भी, मान्यता नहीं देते |
‘रंगीन क्रांतियाँ’: जार्जिया 2003 (‘गुलाब’), यूक्रेन 2004 (‘नारंगी’), किरगिज़स्तान 2005 (‘ट्यूलिप’) — मौजूदा शासनों के विरुद्ध जन-आंदोलन।
भाग IX — आज की स्थिति, 2026★★
9.1 नाटो — 32 सदस्य, और रूस की सीमा तक पहुँचा गठबंधन
- नाटो के आज 32 सदस्य हैं। 12 संस्थापकों (1949) से 10 विस्तार-चक्रों में — 1952, 1955, 1982, 1999, 2004, 2009, 2017, 2020, 2023, 2024। ◆
- बाल्टिक देश मार्च 2004 में शामिल हुए; फ़िनलैंड 4 अप्रैल 2023 में (31वाँ) और स्वीडन 7 मार्च 2024 में (32वाँ)।
- 1955 में वारसा समझौता नाटो के जवाब में बना था और 1 जुलाई 1991 को प्राग में भंग हुआ — सोवियत संघ से भी पहले। ◇
- ★★यूक्रेन की संभावित नाटो-सदस्यता की माँग ही 2014 और 2022 के संकटों के केंद्र में रही है — यानी जिस गठबंधन के जवाब में वारसा समझौता बना था, वही आज भी क्षेत्र की सबसे बड़ी सुरक्षा-बहस का विषय है।
9.2 CIS — मोल्दोवा का बाहर निकलना, और एक साथ चल रहा उलटा एकीकरण
| देश | स्थिति, अगस्त 2026 |
|---|---|
| जार्जिया | 18 अगस्त 2009 को बाहर — 2008 के युद्ध के बाद |
| उक्रेन | 19 मई 2018 को सभी वैधानिक निकायों में भागीदारी समाप्त; संस्थापक, पर तकनीकी रूप से सदस्य-राज्य नहीं |
| ★★मोल्दोवा | 2 अप्रैल 2026 — संसद ने 60/101 मतों से CIS-संधियों की अस्वीकृति को अंतिम मंज़ूरी दी; राष्ट्रपति मैया सांदू के अस्वीकरण-आदेश 8 अप्रैल 2026 को प्रभावी; वापसी अप्रैल 2027 में पूर्ण होगी — कारण, रूस-यूक्रेन युद्ध और मोल्दोवा के अपने भू-भाग (ट्रांसनिस्त्रिया) में रूसी सैन्य उपस्थिति 【प्रा/द्वि】 |
| तुर्कमेनिस्तान | अगस्त 2005 से सहयोगी सदस्य |
| वर्तमान पूर्ण सदस्य | रूस, बेलारूस, कज़ाकिस्तान, किरगिज़स्तान, अज़रबैजान, आर्मेनिया, ताज़िकिस्तान, उज़्बेकिस्तान |
| ★इसके विपरीत — बेलारूस | CIS के भीतर सबसे गहरा एकीकरण — ‘संघ राज्य’; जनवरी 2024 का 100+ कानूनों के सामंजस्य का कार्यक्रम; सितंबर 2025 का संयुक्त ‘ज़ापाद-2025’ सैन्याभ्यास; दिसंबर 2025 में रूसी ‘ओरेश्निक’ मिसाइलों की बेलारूस में तैनाती |
★★1991 में बना CIS आज एक साथ दो दिशाओं में खिंच रहा है — कुछ सदस्य दूर जा रहे हैं (जार्जिया, उक्रेन, मोल्दोवा), एक सदस्य और गहरा जुड़ रहा है (बेलारूस)। यही दिखाता है कि 1991 का फ़ैसला अंतिम नहीं था — हर उत्तराधिकारी राज्य अपनी अलग दिशा चुन रहा है, और वह चुनाव आज भी जारी है।
9.3 रूस का वैश्विक आर्थिक एकीकरण — बना, फिर टूटा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1997 | रूस G-7 में शामिल — ‘G-8’ बना |
| अगस्त 2012 | रूस WTO का 156वाँ सदस्य बना — 18 वर्षों की वार्ता के बाद |
| !! मार्च 2014 | क्रीमिया-विलय के बाद रूस को G-8 से निलंबित किया गया — गठबंधन फिर ‘G-7’ रह गया, निलंबन आज तक जारी |
| ! 2022 से | यूक्रेन-युद्ध के बाद व्यापक पश्चिमी प्रतिबंध — SWIFT से कई रूसी बैंकों का बहिष्कार, संपत्तियाँ फ़्रीज़ |
9.4 रूस-यूक्रेन युद्ध, 2022–2026 — ‘शीतयुद्ध की समाप्ति’ की सबसे बड़ी परीक्षा
- फ़रवरी 2022 से पूर्ण-स्तरीय युद्ध जारी। 2026 में कई अस्थायी संघर्ष-विरामों की कोशिश हुई — अप्रैल में 32-घंटे का ईस्टर-युद्धविराम, मई में विजय-दिवस के आसपास संक्षिप्त युद्धविराम — पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए और स्थायी शांति नहीं बनी। ◇
- ★जनवरी 2026, पेरिस — फ़्रांस-ब्रिटेन नेतृत्व वाले ‘इच्छुकों के गठबंधन’ (Coalition of the Willing), यूक्रेन और अमरीका ने युद्धविराम के बाद सक्रिय होने वाली क़ानूनी रूप से बाध्यकारी सुरक्षा-गारंटियों पर सहमति जताई।
- विश्लेषकों का आकलन: रूस 2026 में यूक्रेनी बलों की थकान बढ़ाकर मोर्चे के ढहने या राजनयिक समर्पण की आशा में उच्च-तीव्रता का युद्ध जारी रखने के पक्ष में है।
★★यही इस पूरे अध्याय की सबसे तीखी विडंबना है: पाठ्यपुस्तक लिखी गई तब कहा गया था कि “शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई” — 2026 में यूरोप के मध्य में एक सीधा सैन्य युद्ध चल रहा है, ठीक उन्हीं दो पूर्व-सोवियत गणराज्यों के बीच जिन्होंने 1991 में मिलकर संघ को भंग किया था।
9.5 नगरनो-कराबाख — बल से शुरू, कूटनीति से (अभी अधूरा) अंत
| चरण | विवरण |
|---|---|
| 2020 का युद्ध, सितंबर 2023 | अज़रबैजान का नगरनो-कराबाख पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण; अर्मेनियाई आबादी का बड़े पैमाने पर पलायन |
| ★★8 अगस्त 2025, वाशिंगटन | अर्मेनिया-अज़रबैजान नेताओं ने व्हाइट हाउस में शांति-समझौते के मसौदे पर आद्याक्षर — राष्ट्रपति ट्रम्प की मध्यस्थता में |
| ! अभी अहस्ताक्षरित | अज़रबैजान की शर्त — अर्मेनिया अपने संविधान से क्षेत्रीय दावे का उल्लेख हटाए; जनमत-संग्रह 2026 के अंत या 2027 में संभावित |
| ★★ज़ंगेज़ुर गलियारा / TRIPP | अर्मेनिया के स्युनिक प्रांत से होकर अज़रबैजान-नख्चिवान-तुर्की को जोड़ने वाला ~44 किमी मार्ग; अमरीका को 99 वर्षों का विकास व परिचालन पट्टा — नाम ‘Trump Route for International Peace and Prosperity’ (TRIPP) |
9.6 जार्जिया-रूस — गतिरोध और गहराता एकीकरण
- दिसंबर 2025 — रूस: राजनयिक संवाद फिर शुरू करने का कोई आधार नहीं; जार्जिया: जब तक अबख़ाज़िया और दक्षिण ओसेतिया की मान्यता वापस न ली जाए, संबंध बहाल नहीं।
- ★मई 2026 — पुतिन और दक्षिण ओसेतिया के वास्तविक राष्ट्रपति अलान गागलोयेव ने ‘गहन मैत्रीपूर्ण सहयोग’ समझौते पर हस्ताक्षर — पहली बार रूसी नागरिक वहाँ वैधानिक रूप से अधिकारी बन सकते हैं।
- अबख़ाज़िया में रूस-वित्तपोषित हवाई-अड्डे और ओचमचिरे बंदरगाह का नवीनीकरण।
9.7 मध्य एशिया — अब चार शक्तियों का अखाड़ा
- ★★जून 2025, अस्ताना — चीन-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन; चीन-किरगिज़स्तान-उज़्बेकिस्तान रेलवे का निर्माण 2025 में शुरू, रूस-केंद्रित मार्गों का विकल्प।
- ★6 नवंबर, वाशिंगटन — C5+1 शिखर सम्मेलन; अमरीका का 2026 में पाँचों देशों की यात्रा का वादा।
- अप्रैल 2025, समरकंद — पहला EU-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन, 13.2 अरब डॉलर के निवेश-पैकेज की घोषणा।
- रूस का प्रभाव व्यापार में घटा (सोवियत-पश्चात व्यापार-हिस्सा 2015 तक 16% तक गिरा), पर CSTO और सुरक्षा-सहयोग के ज़रिए मुख्य बाहरी सुरक्षा-शक्ति बना हुआ है।
9.8 भारत और रूस
| मद | तथ्य |
|---|---|
| भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि | 9 अगस्त 1971 — बांग्लादेश युद्ध से ठीक पहले ◆ |
| ★★रक्षा (SIPRI, मार्च 2026, आँकड़े 2021–25) | भारत के हथियार-आयात में रूस का हिस्सा 40% — 2011–15 के 70% से घटकर। भारत वैश्विक हथियार-आयात में दूसरे स्थान पर, हिस्सा 8.2%। फ़्रांस 29%, इज़राइल 15%। कुल आयात-मात्रा 2016-20 चक्र से 4% घटी, जबकि वैश्विक व्यापार 9.2% बढ़ा — भारत की घरेलू उत्पादन-क्षमता का संकेत ◆ |
| ★★23वाँ वार्षिक शिखर सम्मेलन | 4-5 दिसंबर 2025, नयी दिल्ली — पुतिन की चार वर्ष बाद पहली भारत-यात्रा |
| ★★द्विपक्षीय व्यापार | वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 68.69 अरब डॉलर; 2030 तक 100 अरब डॉलर का साझा लक्ष्य; ! तेल हटा दें तो व्यापार लगभग 12 अरब डॉलर ही — भारत का निर्यात केवल ~4.9 अरब, आयात ~63.8 अरब डॉलर |
| परमाणु | कुडनकुलम (तमिलनाडु) — रूसी सहयोग |
| अंतरिक्ष | 1991 का क्रायोजेनिक सौदा → अमरीकी प्रतिबंध → स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन, GSLV-D5, जनवरी 2014 |
9.9 गोर्बाचेव की विरासत
- 1990 का नोबेल शांति पुरस्कार — “शीतयुद्ध की शांतिपूर्ण समाप्ति की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका” के लिए। ◆
- निधन: 30 अगस्त 2022, मास्को, 91 वर्ष की आयु में। ◆
- ★विभाजित मूल्यांकन: पश्चिम में वे शीतयुद्ध समाप्त करने वाले नायक माने जाते हैं; रूस में एक बड़े वर्ग के लिए वे वह व्यक्ति हैं जिसने देश गँवा दिया। “एक ही व्यक्ति, दो पूरी तरह विपरीत स्मृतियाँ” — यह स्वयं में एक विश्लेषण-योग्य तथ्य है।
भाग X — निष्कर्ष — चार प्रश्नों के उत्तर
1. यह व्यवस्था क्या थी? दोनों — एक सत्तावादी एक-दलीय राज्य और एक व्यापक कल्याणकारी व्यवस्था। जिसने साक्षरता, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष में असाधारण उपलब्धियाँ दीं, उसी ने अभिव्यक्ति, विकल्प और जवाबदेही छीन ली। इनमें से किसी एक को नकारकर बनी समझ अधूरी है।
2. वह ढही क्यों — और तभी क्यों? ढही क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था में सूचना और प्रोत्साहन दोनों का अभाव था, संसाधन सैन्य-होड़ और पूर्वी यूरोप में झोंके गए, और जवाबदेही का कोई तंत्र नहीं था कि दिशा सुधारी जा सके। तभी क्योंकि ग्लासनोस्त ने वैधता छीनी, ‘सिनात्रा सिद्धांत’ ने बल-प्रयोग का विकल्प हटाया, और अंततः राष्ट्रवाद ने — अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण — ढाँचे को गणराज्यों की रेखाओं पर तोड़ दिया।
3. उसके बाद क्या बना? एक क्षण के लिए एकध्रुवीय विश्व — पर वह क्षण छोटा निकला। आर्थिक रूप से शॉक थेरेपी ने पूँजीवाद तो दिया, पर समृद्धि नहीं; राजनीतिक रूप से अधिकतर उत्तराधिकारी राज्यों में मज़बूत राष्ट्रपति और कमज़ोर संसद का ढाँचा बना; और भू-राजनीतिक रूप से नाटो 32 सदस्यों तक फैल गया जबकि उसका प्रतिद्वंद्वी 1991 में ही भंग हो चुका था।
4. ★क्या वह विरासत आज भी बदल रही है? हाँ — और तेज़ी से। CIS 2026 में सिकुड़ रहा है (मोल्दोवा का बाहर जाना) जबकि बेलारूस-रूस ‘संघ राज्य’ गहरा हो रहा है। रूस, जो 1997 में G-8 में शामिल हुआ था, 2014 से बाहर है। नगरनो-कराबाख जैसे तीन दशक पुराने विवाद अब कूटनीति से (और बाहरी शक्तियों की मध्यस्थता से) सुलझ रहे हैं। और सबसे महत्वपूर्ण — दो प्रमुख उत्तराधिकारी राज्य, रूस और उक्रेन, आज सीधे युद्ध में हैं। 1991 का फ़ैसला अंतिम बिंदु नहीं था; वह एक शुरुआत थी जिसके परिणाम आज, 2026 में भी, लिखे जा रहे हैं।
इसलिए 1991 ने ‘दो ध्रुवीयता’ समाप्त की — ‘शक्ति-प्रतिस्पर्धा’ नहीं, और ‘इतिहास’ भी नहीं। यही इस अध्याय का स्थायी सबक है।
भाग XI — दो प्रकरण-अध्ययन
प्रकरण 1 — चेर्नोबिल, 1986 : जब ‘खुलेपन’ ने व्यवस्था को ही उघाड़ दिया★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| क्या हुआ | 26 अप्रैल 1986 — यूक्रेनी SSR के चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में विस्फोट — इतिहास की सबसे बड़ी असैन्य परमाणु दुर्घटना |
| !! तात्कालिक प्रतिक्रिया | सोवियत अधिकारियों ने पहले तीन दिन तक इसे छुपाया — स्वीडन में विकिरण-स्तर बढ़ने पर ही पश्चिम को पता चला, सोवियत मीडिया से नहीं |
| ★गोर्बाचेव का मोड़ | चेर्नोबिल के बाद गोर्बाचेव ने खुद स्वीकारा कि पुरानी गोपनीयता की संस्कृति असफल रही — इसने ग्लासनोस्त को गति दी, केवल घोषणा नहीं रह गई |
| ★★दूरगामी असर | नागरिकों ने पहली बार राज्य के आधिकारिक बयानों पर खुलेआम अविश्वास जताया — यही अविश्वास आगे चलकर आर्थिक आँकड़ों, इतिहास और अंततः पूरी व्यवस्था की वैधता तक फैल गया |
| सबक | एक तकनीकी दुर्घटना ने वह कर दिखाया जो दशकों की आर्थिक ठहराव नहीं कर सकी थी — जनता का भरोसा तोड़ना। यह भाग V के ‘ग्लासनोस्त सबसे विस्फोटक सुधार क्यों था’ का सबसे ठोस प्रमाण है |
प्रकरण 2 — बुडापेस्ट ज्ञापन : 1994 की गारंटी, 2014 और 2022 की परीक्षा★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पृष्ठभूमि | 1991 में सोवियत परमाणु हथियार रूस, उक्रेन, बेलारूस और कज़ाकिस्तान — चार गणराज्यों में बिखरे थे |
| ★★समझौता, 1994 | उक्रेन, बेलारूस और कज़ाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार रूस को सौंपे और परमाणु-अप्रसार संधि में शामिल हुए; बदले में अमरीका, ब्रिटेन और रूस ने उनकी सम्प्रभुता व मौजूदा सीमाओं की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का वचन दिया |
| !! 2014 | रूस द्वारा क्रीमिया का विलय — बुडापेस्ट ज्ञापन के हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक द्वारा ही उसकी शर्तों का उल्लंघन |
| !! 2022 | रूस का उक्रेन पर पूर्ण-स्तरीय आक्रमण — वही प्रश्न फिर, बड़े पैमाने पर |
| ★★दूरगामी सबक | यह प्रकरण अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की सबसे बड़ी सीखों में से एक बन गया है — सुरक्षा-गारंटी बिना बाध्यकारी प्रवर्तन-तंत्र के, संकट के समय अपर्याप्त सिद्ध हो सकती है। यही तर्क आज यूक्रेन और उसके पश्चिमी साझीदारों द्वारा “क़ानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटियों” की माँग के पीछे है (भाग IX.4) |
भाग XII — एक-पृष्ठ परीक्षा-तथ्य पट्टिका
| मान | संदर्भ |
|---|---|
| 1917 | रूस की समाजवादी क्रांति (अक्टूबर/नवंबर) |
| 30 दिसंबर 1922 | USSR की स्थापना-संधि |
| 15 | संघ के गणराज्य |
| 1961 / 9 नवंबर 1989 | बर्लिन की दीवार — बनी / गिरी |
| मार्च 1985 | गोर्बाचेव महासचिव बने |
| 14 मई 1955 / 1 जुलाई 1991 | वारसा समझौता — बना / भंग हुआ |
| 1987 / 2019 | INF संधि — हस्ताक्षर / अमरीकी वापसी से समाप्त |
| 23 अगस्त 1989 | बाल्टिक शृंखला — ~20 लाख लोग, ~675 किमी |
| मार्च 1990 | लिथुआनिया — पहला स्वतंत्रता-घोषक गणराज्य |
| 19–21 अगस्त 1991 | असफल तख़्तापलट |
| 8 दिसंबर 1991 | बेलावेज़ा समझौता — CIS का जन्म |
| 21 दिसंबर 1991 | अल्मा-अता प्रोटोकॉल — 11 गणराज्य |
| 25 दिसंबर 1991 | गोर्बाचेव का इस्तीफा — USSR का अंत |
| 1990 / 1992 | शॉक थेरेपी — पोलैंड (बाल्सरोविच योजना) / रूस (गैदार) |
| लगभग 90% | निजी हाथों में बेचे गए रूसी उद्योग |
| 1999 बनाम 1989 | रूस का वास्तविक GDP — नीचे |
| 1994 | बुडापेस्ट ज्ञापन |
| 1997 / अगस्त 2012 / मार्च 2014 | रूस — G-8 में शामिल / WTO सदस्य बना / G-8 से निलंबित |
| 1990 / 30 अगस्त 2022 | गोर्बाचेव — नोबेल शांति पुरस्कार / निधन |
| 1 जनवरी 1993 | चेकोस्लोवाकिया का ‘मख़मली तलाक़’ |
| मई 1992 – 27 जून 1997 | ताज़िक गृहयुद्ध (पाठ्यपुस्तक: “दस वर्ष, 2001 तक” — §XIII देखिए) |
| 2008 / 2009 | रूस-जार्जिया युद्ध / जार्जिया CIS से बाहर |
| 2018 | उक्रेन — CIS-निकायों में भागीदारी समाप्त |
| 2020 / सितंबर 2023 / अगस्त 2025 | नगरनो-कराबाख — युद्ध / अज़रबैजान का पूर्ण नियंत्रण / शांति-समझौते का आद्याक्षर |
| 32 | नाटो के वर्तमान सदस्य (फ़िनलैंड 2023, स्वीडन 2024) |
| 8 (2026) | CIS के वर्तमान पूर्ण सदस्य (मोल्दोवा की वापसी प्रक्रिया में) |
| 2 अप्रैल 2026 / 8 अप्रैल 2026 | मोल्दोवा — CIS-निकास पर संसद का अंतिम मतदान / राष्ट्रपति के अस्वीकरण-आदेश प्रभावी |
| 40% (2021–25) बनाम 70% (2011–15) | भारत के हथियार-आयात में रूस का हिस्सा |
| 8.2% | वैश्विक हथियार-आयात में भारत का हिस्सा — दूसरा स्थान |
| 68.69 अरब डॉलर | भारत-रूस व्यापार, वित्त वर्ष 2025-26 (रिकॉर्ड) |
| 100 अरब डॉलर | भारत-रूस व्यापार का 2030-लक्ष्य |
| 9 अगस्त 1971 | भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि |
| फ़रवरी 2022 – | रूस-यूक्रेन युद्ध, अनिर्णीत/जारी |
भाग XIII — सत्यापित नहीं हो सकाध्यान
यह खंड ईमानदारी का हिस्सा है, माफ़ी नहीं। जहाँ स्रोत आपस में भिन्न थे, अनुमान पर आधारित थे, या किसी तथ्य की पुष्टि किसी प्राथमिक स्रोत से नहीं हो सकी, वहाँ इसे यहाँ खुलकर दर्ज किया गया है।
| विषय | समस्या |
|---|---|
| !! ताज़िक गृहयुद्ध की अवधि | पाठ्यपुस्तक कहती है “दस वर्ष, 2001 तक” 【पाठ】; अधिकांश स्वतंत्र स्रोत (RFE/RL, Conciliation Resources) कहते हैं मई 1992 – जून 1997, यानी लगभग पाँच वर्ष। दोनों के बीच का अंतर शांति-समझौते के बाद जारी अस्थिरता को गिनने या न गिनने से आ सकता है, पर यह पुष्ट अनुमान है, तथ्य नहीं। बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही उत्तर लिखें |
| ! कोसोवो को मान्यता देने वाले देशों की सटीक संख्या | अनुमान 100 से 120 के बीच भिन्न-भिन्न स्रोतों में मिलते हैं (कुछ 108, कुछ 115, कोसोवो सरकार स्वयं 120 का दावा करती है)। सर्बिया इस गिनती को चुनौती देता है और ‘अ-मान्यता अभियान’ चला रहा है, इसलिए कोई एक निश्चित संख्या इस समय जिम्मेदारी से नहीं दी जा सकती |
| ! नगरनो-कराबाख शांति-समझौते के हस्ताक्षर की सटीक तिथि | अगस्त 2025 तक केवल मसौदे पर आद्याक्षर हुए हैं; अंतिम, हस्ताक्षरित संधि अगस्त 2026 तक अस्तित्व में नहीं आई है। इसे भविष्य की घटना के रूप में ही पढ़ें, तय तथ्य के रूप में नहीं |
| ! सोवियत काल में मरने वालों की सही संख्या (महा-आतंक, अकाल, द्वितीय विश्वयुद्ध) | इतिहासकारों में गहरे मतभेद हैं — अनुमान लाखों से लेकर करोड़ों तक हैं, और अभिलेखागार अब भी पूरी तरह खुले नहीं हैं। इस दस्तावेज़ में दिया गया “लगभग 2.7 करोड़ (द्वितीय विश्वयुद्ध में)” का आँकड़ा व्यापक रूप से उद्धृत अनुमान है, अंतिम गिनती नहीं |
| ! CIS के “9 सदस्यों” की गिनती, अगस्त 2026 | चूँकि मोल्दोवा की वापसी अप्रैल 2027 में पूर्ण होगी, यह प्रश्न कि अगस्त 2026 में उसे “सदस्य” गिना जाए या नहीं, स्रोतों में असंगत उत्तर देता है — कुछ उसे अब भी सूचीबद्ध सदस्य मानते हैं, कुछ पहले ही बाहर। इस दस्तावेज़ ने दोनों स्थितियाँ स्पष्ट रूप से बताई हैं |
भाग XIV — स्रोत-सूची
संधियाँ, संस्थाएँ और आधिकारिक दस्तावेज़ ◆
- The Belavezha Accords signed — Presidential Library, Russia
- Alma-Ata Protocol on creation of CIS signed — Presidential Library, Russia
- NATO member countries — NATO official site
- Finland joins NATO as 31st Ally — NATO
- Trends in International Arms Transfers, 2025 — SIPRI Fact Sheet (March 2026)
- SIPRI Fact Sheet PDF — Trends in International Arms Transfers, 2025
- Global arms flows jump nearly 10 per cent as European demand soars — SIPRI press release
- Parliament votes for Moldova’s definitive withdrawal from CIS — Moldpres
- The Nobel Peace Prize 1990 — NobelPrize.org
- Statement on the passing of Mikhail Gorbachev — Norwegian Nobel Committee
इतिहास और विश्लेषण ◇
- Warsaw Pact — Britannica
- Dissolution of the Warsaw Pact, 1 July 1991 — European Network Remembrance and Solidarity
- Mikhail Gorbachev — Britannica
- Commonwealth of Independent States — Britannica
- Commonwealth of Independent States (CIS) — Nuclear Threat Initiative
- Dissolution of the USSR — Lumen Learning, SUNY World History
- Moldova formally exits Russia’s post-Soviet CIS as Sandu signs withdrawal decrees — Euromaidan Press
आर्थिक संक्रमण ◇
- Balcerowicz Plan — Wikipedia
- Jeffrey Sachs, Shock Therapy in Poland: Perspectives of Five Years — Columbia University (Tanner Lecture, 1994)
- V. Popov, Shock Therapy versus Gradualism: The End of the Debate — Carleton University
- 25 Years of Transition — International Monetary Fund
संघर्ष ◇
- The Peace Deal That Ended Tajikistan’s Bloody Civil War — RFE/RL
- The Tajik civil war: causes and dynamics — Conciliation Resources (Accord)
- The Armenia-Azerbaijan Peace Deal And The New Trump Corridor — Forbes
- The Armenia-Azerbaijan Peace Process Enters 2026 — CACI Analyst
- Georgia Says Breakaway Regions ‘Non-Negotiable’ in Any Restoration of Ties With Russia — The Moscow Times
- Georgia Drifting Back Into Russia’s Orbit — Jamestown
- More than life at stake: the uncertain future of the Kadyrov regime in Chechnya — OSW Centre for Eastern Studies
- Russia and Ukraine declare competing ceasefires — Al Jazeera
- Countries that Recognize Kosovo 2026 — World Population Review
2026 के भारत-रूस और मध्य-एशिया अद्यतन ◇
- India remains 2nd largest arms buyer, Russia’s share in imports drops, France & Israel gain — SIPRI — ThePrint
- India is set to host Russia’s Putin, deepening trade ties, unfazed by punitive U.S. tariffs — CNBC
- India-Russia Trade Surges to Record $68.69 Billion in 2025-2026 Fiscal Year — IndexBox
- C5+1 Summit Elevates U.S. Engagement With Central Asia — Jamestown
- Russia, Belarus sign seven agreements to deepen Union State integration — Caliber.Az
अंतिम अनुस्मारक: ! यह अध्याय पाठ्यपुस्तक से स्वतंत्र है। जहाँ यह NCERT से भिन्न है — जैसे ताज़िक गृहयुद्ध की अवधि (भाग XIII) — वहाँ बोर्ड परीक्षा में NCERT का ही उत्तर लिखिए। यह दस्तावेज़ “100% सटीक” होने का दावा नहीं करता — भाग XIII में इसकी सीमाएँ खुलकर दर्ज हैं।