आयाम: जागरूकता (50%) • संवेदनशीलता (20%) • सृजनात्मकता (30%)
भाग अ — जागरूकता (Awareness)
अ-1. केस/परिस्थिति-आधारित प्रश्न
1दो इतिहासकार एक ही काल पर काम कर रहे हैं। पहला केवल सरकारी विभागों के कागज़ात और फाइलें पढ़ता है; दूसरा साहित्य, वास्तुकला और चित्रकला का अध्ययन करता है।
(क) ये दोनों दृष्टिकोण किन-किन इतिहासकारों के हैं?
(ख) दूसरे इतिहासकार का प्रसिद्ध वाक्य क्या है?
(ग) दोनों के निष्कर्षों में क्या-क्या अंतर आ सकता है? दो उदाहरण दीजिए।
रांके बनाम बर्कहार्ट; “इतिहास-लेखन में राजनीति ही सब कुछ नहीं है; इतिहास का सरोकार उतना ही संस्कृति से है जितना राजनीति से”; अंतर — राजा-युद्ध बनाम मानवतावादी संस्कृति; शासक-सूची बनाम कलाकार-लेखक की भूमिका।
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उत्तर-संकेत:
2एक विद्यार्थी कहता है — “पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोप ने यूनान और रोम को फिर से खोज लिया; उससे पहले का सारा काल अंधकार था।”
(क) यह कथन किस विचारधारा से आया है?
(ख) NCERT इस पर क्या तीन आपत्तियाँ उठाती है?
(ग) आप इस विद्यार्थी को क्या सुधार सुझाएँगे?
मानवतावादी कालक्रम-विभाजन (बर्कहार्ट-परंपरा); आपत्तियाँ — पिछली सदियों के विद्वान यूनानी-रोमन से परिचित थे; इटली में पुनर्जागरण के तत्व 12वीं-13वीं सदी में और फ्रांस में 9वीं सदी में मिलते हैं; ‘अंधकार युग’ कहना अनुचित; साथ ही एशिया-अरब का ऋण।
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उत्तर-संकेत:
3एक इतालवी चित्रकार 1500 के आसपास एक चित्र बना रहा है। वह पहले आयुर्विज्ञान कॉलेज की प्रयोगशाला जाता है, फिर रेखागणित की पुस्तक पढ़ता है, और अंत में तेल के माध्यम से रंग भरता है।
(क) इन तीनों कदमों से उसके चित्र में क्या-क्या सुधार आएगा?
(ख) इस समूची शैली को क्या नाम दिया गया और वह कब तक चली?
(ग) उसके चित्र में वस्त्रों के डिज़ाइन पर किसका प्रभाव दिख सकता है और वह प्रभाव कैसे पहुँचा?
शरीर-रचना की सटीकता; परिदृश्य (Perspective) व त्रि-आयामी रूप; अधिक रंगीन-चटख चित्र; यथार्थवाद (Realism), उन्नीसवीं शताब्दी तक; चीनी और फ़ारसी चित्रकला का प्रभाव — जो मंगोलों से मिला।
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उत्तर-संकेत:
41520 के दशक में जर्मनी का एक किसान सुन रहा है कि “ईश्वर ने सभी इनसानों को एक जैसा बनाया है, इसलिए उनसे कर देने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए और उन्हें अपना पादरी चुनने का अधिकार होना चाहिए।”
(क) यह किस सम्प्रदाय का विचार है?
(ख) उन्होंने मोक्ष के विचार को किससे जोड़ा?
(ग) 1525 में लूथर ने क्या रुख अपनाया और इससे उनकी किस सीमा का पता चलता है?
एनाबेपटिस्ट; मोक्ष को हर तरह के सामाजिक-उत्पीड़न के अंत से; लूथर ने जर्मन शासकों से किसान विद्रोह के दमन का आह्वान किया — यानी उन्होंने आमूल परिवर्तनवाद (Radicalism) का समर्थन नहीं किया; धार्मिक सुधार और सामाजिक क्रांति उनके लिए अलग बातें थीं।
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उत्तर-संकेत:
अ-2. दावा-कारण (Assertion–Reason)
निर्देश:
- अदोनों सही, कारण सही व्याख्या
- बदोनों सही, कारण सही व्याख्या नहीं
- सदावा सही, कारण गलत
- ददावा गलत, कारण सही।
5दावा (A): इटली का राजनीतिक विखंडन उसकी सांस्कृतिक समृद्धि में सहायक बना।
कारण (R): कोई एकीकृत सरकार न होने से स्वतंत्र नगर-राज्य उभरे जहाँ धनी व्यापारी शासन में भाग लेते थे और कलाकारों के आश्रयदाता बने।
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उत्तर: (अ)
6दावा (A): पुनर्जागरणकालीन इतालवी लोग अधार्मिक हो गए थे।
कारण (R): मानवतावादी संस्कृति की एक विशेषता मानव जीवन पर धर्म का नियंत्रण कमज़ोर होना थी।
उत्तर देखिए
उत्तर: (द) — दावा गलत: NCERT स्पष्ट कहती है “ये ज़रूरी नहीं कि वे अधार्मिक थे” (ड्यूरर, कोपरनिकस दोनों निष्ठावान ईसाई); कारण सही तथ्य है।
7दावा (A): यूरोपीय विद्वान चौदहवीं शताब्दी में प्लेटो और अरस्तू को पढ़ सके।
कारण (R): अरब अनुवादकों ने अतीत की पांडुलिपियों का संरक्षण और अनुवाद सावधानीपूर्वक किया था।
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उत्तर: (अ)
8दावा (A): मुद्रण-प्रौद्योगिकी यूरोप की मौलिक खोज थी।
कारण (R): गुटेनबर्ग ने 1455 में बाईबल की 150 प्रतियाँ छापीं।
उत्तर देखिए
उत्तर: (द) — दावा गलत: यूरोपीय लोग मुद्रण के लिए चीनियों और मंगोल शासकों के ऋणी रहे; कारण सही तथ्य है।
9दावा (A): कोपरनिकस ने अपनी खोज जीवन-काल में प्रकाशित नहीं कराई।
कारण (R): वे निष्ठावान ईसाई थे और परंपरावादी धर्माधिकारियों की घोर-प्रतिक्रिया से भयभीत थे।
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उत्तर: (अ)
10दावा (A): मानवतावादी संस्कृति ने महिलाओं को भी ‘वैयक्तिकता’ का लाभ दिया।
कारण (R): कसान्द्रा फेदेले और ईसाबेला दि इस्ते जैसी महिलाएँ बौद्धिक रूप से सक्रिय थीं।
उत्तर देखिए
उत्तर: (द) — दावा गलत: वैयक्तिकता और नागरिकता के नए विचारों से महिलाओं को दूर रखा गया; विद्यालय भी केवल लड़कों के लिए थे। कारण सही है, पर वे अपवाद थीं।
अ-3. आँकड़ा/मानचित्र-व्याख्या
11निम्न का ऐतिहासिक अर्थ एक-एक वाक्य में लिखिए
उत्तर देखिए
| तथ्य | संदर्भ |
|---|---|
| 150 प्रतियाँ बनाम 1 प्रति | गुटेनबर्ग की कार्यशाला बनाम एक भिक्षु का लेखन (1455) |
| 25 वर्ष | वेनिस की परिषद् में सदस्यता की न्यूनतम आयु |
| 1416 | दोनातल्लो की सजीव मूर्तियाँ — नयी परंपरा |
| 1417 | पोप का राजनैतिक रूप से शक्तिशाली बनना (दो-पोप दुर्बलता का अंत) |
| 1453 | कुंस्तुनतुनिया की पराजय — यूनानी विद्वानों का इटली की ओर पलायन |
| 1517 | लूथर की ‘नाइन्टी फ़ाईव थिसेज़’ — धर्म-सुधार का आरंभ |
| 1525 | जर्मनी में किसान विद्रोह और उसका दमन |
| 1540 | ‘सोसाइटी ऑफ़ जीसस’ — प्रति-सुधार |
| 1543 | वेसेलियस की ‘ऑन ऐनाटॉमी’ (और कोपरनिकस की मृत्यु) |
| 1662 / 1687 | रॉयल सोसाइटी / न्यूटन की ‘प्रिन्सिपिया मैथेमेटिका’ |
12(मानचित्र-कार्य) इटली के रेखा-मानचित्र पर अंकित कीजिए — पादुआ, वेनिस, जिनेवा, मंतुआ, बोलोनिया, फ़्लोरेंस, रोम, सिसली, सार्डीनिया, कोर्सिका, एड्रियाटिक सागर, टिरिनियन सागर, भूमध्यसागर। फिर बताइए:
(क) कौन-से दो नगर गणराज्य थे?
(ख) कौन-से दो विश्वविद्यालय विधिशास्त्र के प्रारंभिक केंद्र थे?
(ग) इन नगरों की तटीय स्थिति उनके पुनरुत्थान से कैसे जुड़ी है?
13(कालरेखा-विश्लेषण) दोनों तालिकाओं (14वीं-15वीं और 16वीं-17वीं शताब्दियाँ) से पाँच वैज्ञानिक और पाँच सांस्कृतिक/धार्मिक घटनाएँ छाँटकर दो अलग कालरेखाएँ बनाइए। फिर लिखिए — क्या दोनों धाराएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं? दो उदाहरण दीजिए।
वेसेलियस की चीर-फाड़ ↔ कलाकारों का शरीर-रचना अध्ययन; मुद्रण ↔ मातृभाषा में बाईबल व सुधार-आंदोलन।
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संकेत:
अ-4. वर्गीकरण
14निम्न को ‘मानवतावादी लेखक/विचारक’, ‘कलाकार/वास्तुविद्’ और ‘वैज्ञानिक’ में छाँटिए: पेट्रार्क • दोनातल्लो • कोपरनिकस • मैक्यिावेली • ब्रूनेलेशी • वेसेलियस • लोरेन्ज़ो वल्ला • माईकल ऐंजेलो • कैप्लर • पिको देल्ला मिरांदोला • लियोनार्दो दा विन्ची • हार्वे।
विचारक — पेट्रार्क, मैक्यिावेली, वल्ला, पिको; कलाकार/वास्तुविद् — दोनातल्लो, ब्रूनेलेशी, माईकल ऐंजेलो; वैज्ञानिक — कोपरनिकस, वेसेलियस, कैप्लर, हार्वे; लियोनार्दो दोनों श्रेणियों में (यही ‘रेनेसाँ व्यक्ति’ का अर्थ है — इस उत्तर पर विशेष अंक दें)।
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उत्तर-संकेत:
15निम्न को ‘यूरोप की अपनी विरासत’ और ‘बाहर से मिला ज्ञान/तकनीक’ में छाँटिए: मुद्रण • रोमन विधि • कम्पास • शास्त्रीय वास्तुशैली • आग्नेयास्त्र • प्लेटो-अरस्तू के ग्रंथ (अनुवाद) • फलक (Abacus) • चीनी-फ़ारसी चित्रकला का प्रभाव • सिसरो का ‘ह्यूमेनिटास’।
यूरोप की विरासत — रोमन विधि, शास्त्रीय वास्तुशैली, सिसरो का ह्यूमेनिटास; बाहर से — मुद्रण, कम्पास, आग्नेयास्त्र, फलक, चीनी-फ़ारसी चित्रकला, और अरब अनुवादकों के माध्यम से आए प्लेटो-अरस्तू।
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उत्तर-संकेत:
भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)
16(दृष्टिकोण-विविधता) ‘वेनिस की परिषद् की बैठक’ — इस एक दृश्य को चार दृष्टिकोणों से 3–4 वाक्य में लिखिए:
(क) परिषद् का एक संभ्रांत सदस्य; (ख) एक धनी व्यापारी जो कुलीन वंश का नहीं; (ग) एक गरीब नागरिक; (घ) एक शिक्षित महिला (जैसे फेदेले)।
अंत में एक वाक्य — कोन्तारिनी इसे ‘लोकतांत्रिक सरकार’ क्यों कहते हैं, और आप इस शब्द को कितना उपयुक्त मानते हैं?
17(लैंगिक दृष्टि) फेदेले का कथन और कास्तिल्योनी का ‘दि कोर्टियर’ साथ-साथ पढ़िए।
(क) दोनों की स्त्री-संबंधी अपेक्षाओं में मूल अंतर क्या है?
(ख) फेदेले कहती हैं कि शिक्षा महिलाओं को “न पुरस्कार देती है न सम्मान का आश्वासन” — फिर भी वे शिक्षा की वकालत क्यों करती हैं? इसमें आपको क्या भाव दिखता है?
(ग) क्या दोनों लेखकों की सोच में महिलाओं का एक ही (संभ्रांत) वर्ग था? कारण सहित लिखिए।
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(क्रियाकलाप 3)
18(ज्ञान का ऋण और न्याय) NCERT कहती है — “बहुत लंबे समय तक इन ऋणों को स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि… इतिहासकारों ने इसके यूरोप-केंद्रित दृष्टिकोण को सामने रखा।”
(क) यूरोप ने किन-किन क्षेत्रों से ज्ञान लिया? (कम-से-कम पाँच)
(ख) ‘इब्न-सिना
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एविसिना’ जैसी नाम-वर्तनी का इतिहास-बोध पर क्या असर पड़ा?
(ग) किसी समुदाय का योगदान इतिहास से मिट जाने के क्या परिणाम होते हैं? 4–5 वाक्य में लिखिए।
19(आस्था और विज्ञान) कोपरनिकस निष्ठावान ईसाई थे, फिर भी उन्होंने चर्च की मान्यता के विरुद्ध निष्कर्ष निकाला — और भय के कारण उसे जीवन-भर छिपाए रखा।
(क) उनकी स्थिति की मानसिक कठिनाई का वर्णन कीजिए।
(ख) गैलीलियो का बाईबल-संबंधी कथन इस तनाव को कैसे सुलझाता है?
(ग) ‘आस्था और प्रमाण’ के बीच संतुलन का प्रश्न आज किन क्षेत्रों में दिखाई देता है? दो उदाहरण, सम्मानजनक भाषा में।
20(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “पुनर्जागरण एक क्रांतिकारी नयी शुरुआत थी” (मानवतावाद, यथार्थवाद, मुद्रण, वैज्ञानिक क्रांति, व्यक्ति की नयी पहचान)।
विपक्ष: “पुनर्जागरण एक निरंतरता थी, नयी शुरुआत नहीं” (पीटर बर्क; 12वीं-13वीं सदी के तत्व; धर्म का महत्त्वपूर्ण स्थान; एशियाई-अरब ऋण; महिलाओं-निरक्षरों का बहिष्कार)।
प्रत्येक दल पाठ से 4-4 साक्ष्य दे; मध्यस्थ संतुलित निष्कर्ष लिखे।
भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)
21(कल्पनाशील पुनर्रचना) आप 1500 के आसपास फ़्लोरेंस के एक कलाकार की कार्यशाला में शिष्य (apprentice) हैं। अपने एक दिन का वर्णन 150 शब्दों में लिखिए। कम-से-कम पाँच प्रामाणिक विवरण अनिवार्य: आश्रयदाता (व्यापारी/पोप), रेखागणित व परिदृश्य का अभ्यास, शरीर-रचना का अध्ययन, तेल-रंग, रोमन अवशेषों का अवलोकन, गुरु का नाम से प्रसिद्ध होना।
22(संवाद-लेखन) पेट्रार्क और एक मध्यकालीन मठवासी विद्वान के बीच 12–15 पंक्तियों का काल्पनिक संवाद लिखिए, जिसमें बहस का विषय हो — “क्या धार्मिक शिक्षण से बाहर भी कुछ जानने योग्य है?” दोनों पक्ष तर्कसंगत और सम्मानजनक रहें।
23(डिज़ाइन-चुनौती) ‘मुद्रण-क्रांति’ पर एक सूचना-पोस्टर/इन्फ़ोग्राफ़िक बनाइए, जिसमें दिखें — तकनीक कहाँ से आई (चीन/मंगोल), गुटेनबर्ग व 1455, ‘150 प्रतियाँ बनाम 1 प्रति’ की तुलना, और चार परिणाम (छात्र, विचार-प्रसार, एकांत-पठन, आल्प्स-पार प्रसार)। नीचे दो वाक्य — आज की किस तकनीक से इसकी तुलना की जा सकती है?
24(प्रति-तथ्यात्मक) तीन ‘यदि’ परिस्थितियों पर 4–5 वाक्य लिखिए —
(क) “यदि अरब विद्वानों ने यूनानी पांडुलिपियों का संरक्षण-अनुवाद न किया होता…”
(ख) “यदि मुद्रण-तकनीक यूरोप न पहुँचती, तो क्या धर्म-सुधार आंदोलन इतना फैलता?”
(ग) “यदि कोपरनिकस ने अपनी पांडुलिपि जीवन-काल में प्रकाशित करा दी होती…”
25(विचार-संयोजन) NCERT का सूत्र है कि इस काल में ‘निजी’ और ‘सार्वजनिक’ दो अलग क्षेत्र बनने लगे और कलाकार गिल्ड का सदस्य मात्र नहीं, अपने हुनर के लिए जाना जाने लगा।
120 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए: आज ‘व्यक्तिगत पहचान’ और ‘सामूहिक पहचान’ के बीच वही तनाव किन रूपों में दिखता है? भारत के संदर्भ से एक उदाहरण दीजिए।
26(रचनात्मक प्रस्तुति) कक्षा-गतिविधि — ‘पुनर्जागरण का संग्रहालय’ (समूह-कार्य, चार दीर्घाएँ):
दीर्घा 1 — कला व वास्तुकला (दोनातल्लो, लियोनार्दो, माईकल ऐंजेलो, ब्रूनेलेशी के चित्र + यथार्थवाद के चार आधार);
दीर्घा 2 — पुस्तक-कक्ष (गुटेनबर्ग का प्रेस-मॉडल; ‘दि प्रिंस’, ‘यूटोपिया’, ‘दि कोर्टियर’ के आवरण);
दीर्घा 3 — विज्ञान-कक्ष (कोपरनिकस से न्यूटन तक की कालरेखा; वेसेलियस व हार्वे);
दीर्घा 4 — आवाज़ें जो दबा दी गईं (फेदेले, ईसाबेला दि इस्ते; अरब विद्वान; निरक्षर आम जन)।
प्रत्येक दीर्घा के लिए एक व्याख्या-पट्टिका (60 शब्द) लिखवाइए।
भाग ई — मूल्यांकन-रूब्रिक
| स्तर | जागरूकता | संवेदनशीलता | सृजनात्मकता |
|---|---|---|---|
| प्रारंभिक | नाम-तिथियाँ अधूरी; लेखक-कृति का घालमेल (जैसे ‘दि प्रिंस’ और ‘दि कोर्टियर’); वर्गीकरण गड्डमड्ड | एक ही दृष्टिकोण; महिलाओं/अरब विद्वानों/निरक्षरों के पक्ष की उपेक्षा | पुनर्कथन मात्र; प्रामाणिक विवरण अनुपस्थित |
| दक्ष | प्रमुख तथ्य व कालक्रम सही; केस में 2–3 साक्ष्य; कृति-लेखक का सही मिलान | दो दृष्टिकोण; पुनर्जागरण के लाभ और उसकी सीमाएँ दोनों का उल्लेख | 3–4 प्रामाणिक विवरणों सहित मौलिक रचना |
| उन्नत | प्रक्रिया-समझ (व्यापार → विश्वविद्यालय → मानवतावाद → कला/मुद्रण → सुधार → विज्ञान की शृंखला); दावा-कारण में सूक्ष्म विवेक; इतिहास-लेखन की समझ (बर्कहार्ट बनाम बर्क) | बहु-दृष्टिकोण संतुलन; यूरोप-केंद्रित दृष्टिकोण की पहचान; लैंगिक व वर्गीय बहिष्करण की समझ; अतीत-वर्तमान का विवेकपूर्ण सेतु | बहु-आयामी कल्पना; प्रति-तथ्यात्मक तर्क-शृंखला; ऐतिहासिक तर्कसंगति व सही शब्दावली का प्रयोग |
सुझाया भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30%