Chapter 5बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ

Lesson plan14 min

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कुल सुझाए गए कालांश: 7 (40 मिनट प्रत्येक) + 1 पुनरावृत्ति/मूल्यांकन कालांश आधार: 00-Master-Teaching-Notes.md • NCERT पृ. 106–122

समग्र अधिगम उद्देश्य

पाठ के अंत तक विद्यार्थी —

  1. ‘रेनेसाँ/पुनर्जागरण’ शब्द के उद्भव, बर्कहार्ट के योगदान और उस पर हुई आलोचना को समझा सकेंगे।
  2. इतालवी नगर-राज्यों के पुनरुत्थान के कारण और उनकी विशिष्टताएँ बता सकेंगे।
  3. मानवतावाद की परिभाषा, विषय-सूची और उसके प्रमुख प्रवर्तकों का वर्णन कर सकेंगे।
  4. कला, यथार्थवाद और वास्तुकला में हुए परिवर्तनों को विज्ञान से जोड़ सकेंगे।
  5. मुद्रण-क्रांति के सामाजिक-बौद्धिक परिणाम बता सकेंगे और उसके एशियाई ऋण को स्वीकार कर सकेंगे।
  6. महिलाओं की स्थिति और आकांक्षाओं का संतुलित मूल्यांकन कर सकेंगे।
  7. धर्म-सुधार (Reformation), प्रति-सुधार और वैज्ञानिक क्रांति के क्रम को समझा सकेंगे।
  8. ‘क्या यूरोप में पुनर्जागरण हुआ था?’ — इस प्रश्न पर तर्कसंगत मत बना सकेंगे।

कालांश 1 — नयी नगरीय संस्कृति और ‘रेनेसाँ’ शब्द (पृ. 106–107)

घटकविवरण
उद्देश्यअध्याय की पृष्ठभूमि; इतिहास-लेखन में बर्कहार्ट का योगदान
प्रस्तावना (5 मि.)प्रश्न: “‘पुनर्जागरण’ यानी पुनर्जन्म — किसका पुनर्जन्म, और यह नाम किसने दिया?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) 14वीं–17वीं सदी: नगरों की संख्या बढ़ी; ‘नगरीय-संस्कृति’; नगरवासी स्वयं को अधिक ‘सभ्य’ मानने लगे (ख) फ़्लोरेंस, वेनिस, रोम — कला व विद्या के केंद्र; राजाओं-चर्च से स्वायत्तता; अमीर-अभिजात आश्रयदाता (ग) मुद्रण के आविष्कार से छपी पुस्तकें दूर-दराज़ तक; इतिहास की समझ — ‘आधुनिक विश्व’ बनाम यूनान-रोम की ‘प्राचीन दुनिया’ (घ) धर्म-चयन का विचार; पृथ्वी-केंद्र मान्यता का खंडन; भूमध्यसागर/यूरोप-केंद्र की धारणा पलटी (ङ) स्रोत — दस्तावेज़, मुद्रित पुस्तकें, चित्र, मूर्तियाँ, भवन, वस्त्र; अभिलेखागार-चित्रशालाएँ-संग्रहालय (च) रांके — इतिहास = राज्य व राजनीति, सरकारी कागज़ात; बर्कहार्ट का असंतोष — “इतिहास का सरोकार उतना ही संस्कृति से है जितना राजनीति से”; 1860 की पुस्तक; ‘मानवतावादी संस्कृति’; ‘आधुनिक’ व्यक्ति बनाम चर्च-नियंत्रित ‘मध्यकालीन मानव’
गतिविधि (7 मि.)दो-स्तंभ तालिका: ‘रांके का इतिहास’ बनाम ‘बर्कहार्ट का इतिहास’ (विषय, स्रोत, उद्देश्य)
मूल्यांकन (3 मि.)1. ‘रेनेसाँ’ का शाब्दिक अर्थ? 2. बर्कहार्ट के गुरु कौन? 3. उनकी 1860 की पुस्तक का नाम?

कालांश 2 — इटली के नगरों का पुनरुत्थान (पृ. 107–109)

घटकविवरण
उद्देश्यराजनीतिक विखंडन का लाभ; नगर-राज्यों का चरित्र
प्रस्तावना (5 मि.)मानचित्र 1 दिखाकर: “एक कमज़ोर, बिखरा देश सांस्कृतिक शिखर पर कैसे पहुँचा?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) रोम-पतन के बाद केन्द्रों का विनाश; कोई एकीकृत सरकार नहीं; पोप यूरोपीय राजनीति में कमज़ोर (ख) पश्चिमी यूरोप — सामंती संबंध + लातिनी चर्च; पूर्वी यूरोप — बाइज़ेंटाइन; पश्चिम में इस्लाम की साझी सभ्यता; इटली कमज़ोर व बँटा — पर इन्हीं परिवर्तनों ने पुनरुत्थान में सहायता दी (ग) बाइज़ेंटाइन-इस्लामी व्यापार से तटवर्ती बंदरगाह पुनर्जीवित; 12वीं सदी से मंगोलों का रेशम-मार्ग व्यापार → पश्चिमी यूरोप को बढ़ावा; इटली के नगरों की मुख्य भूमिका (घ) स्वतंत्र नगर-राज्यों का समूह; फ़्लोरेंस व वेनिस गणराज्य; दरबारी-नगर; सर्वाधिक जीवंत — वेनिस और जिनेवा (ङ) धर्माधिकारी व सामंत वर्ग राजनैतिक रूप से शक्तिशाली नहीं; धनी व्यापारी-महाजन शासन में भागीदार → नागरिकता की भावना (च) कोन्तारिनी का बॉक्स — 25 वर्ष से ऊपर के संभ्रांत पुरुषों की परिषद्; सामान्य जनता क्यों बाहर; कुलीन वंश बनाम धन-संपन्नता की बहस (छ) तालिका: चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दियाँ (1300 पादुआ → 1512 सिस्टीन चैपल)
गतिविधि (7 मि.)क्रियाकलाप 1 — वेनिस का वर्णन; कथीड्रल-नगर (अध्याय 4) से तुलना
मूल्यांकन (3 मि.)1. दो सबसे जीवंत नगर? 2. इटली के नगर-राज्यों की विशिष्टता? 3. 1454 में क्या हुआ?

कालांश 3 — विश्वविद्यालय, मानवतावाद और इतिहास-दृष्टि (पृ. 109–111)

घटकविवरण
उद्देश्यमानवतावाद की उत्पत्ति व विषय-सूची; कालक्रम-विभाजन की आलोचना
प्रस्तावना (5 मि.)“व्यापार के लिए वकील चाहिए थे — इससे एक नयी संस्कृति कैसे जन्मी?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) पादुआ-बोलोनिया — 11वीं सदी से विधिशास्त्र के केंद्र; वकील-नोटरी की ज़रूरत; कानून रोमन संस्कृति के संदर्भ में पढ़ा जाने लगा (ख) पेट्रार्क (1304–1378) — पुराकाल एक विशिष्ट सभ्यता; प्राचीन लेखकों का अध्ययन; “बहुत कुछ जानना बाकी है और यह सब हम केवल धार्मिक शिक्षण से नहीं सीखते” (ग) ‘मानवतावाद’ — 19वीं सदी के इतिहासकारों का दिया नाम; विषय — व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास, नीतिदर्शन; ‘ह्यूमेनिटास’ — सिसरो (106–43 ई.पू.) ने ‘संस्कृति’ के अर्थ में; धार्मिक नहीं, चर्चा-वाद-विवाद का कौशल (घ) पिको देल्ला मिरांदोला का बॉक्स — “शरीर के लिए कसरत, दिमाग के लिए शब्दों का दंगल” (ङ) फ़्लोरेंस — 13वीं सदी तक साधारण, 15वीं में सब बदला; दाँते (1265–1321) व जोटो (1267–1337); ‘रेनेसाँ व्यक्ति’ की अवधारणा (च) इतिहास का मानवतावादी दृष्टिकोण — ‘अंधकारयुग’, ‘मध्यकाल’, ‘आधुनिक’; कालक्रम-तालिका (5–14 मध्य युग; 15 से आधुनिक) (छ) ! आधुनिक आपत्ति — किसी काल को ‘अंधकार युग’ कहना अनुचित
गतिविधि (7 मि.)कालक्रम-तालिका बोर्ड पर बनवाकर पूछें — “इस विभाजन में किसका पक्ष छिपा है?”
मूल्यांकन (3 मि.)1. मानवतावाद के पाँच विषय? 2. ‘ह्यूमेनिटास’ किसने प्रयोग किया? 3. ‘रेनेसाँ व्यक्ति’ कौन?

कालांश 4 — अरबों का योगदान; कलाकार और यथार्थवाद (पृ. 111–113)

घटकविवरण
उद्देश्यज्ञान-संचरण में अरब भूमिका; कला-विज्ञान का मेल
प्रस्तावना (5 मि.)“प्लेटो और अरस्तू यूरोप तक किसके रास्ते पहुँचे?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) मध्यकाल में चर्च-मठों के विद्वान यूनानी-रोमन कृतियों से परिचित पर प्रचार-प्रसार नहीं किया (ख) 14वीं सदी में प्लेटो-अरस्तू के अनुवाद; यूरोप अरब अनुवादकों का ऋणी; अरबी में ‘अफ़लातून’ व ‘एरिस्टोटिल’ (ग) दोतरफा अनुवाद; विषय — प्राकृतिक विज्ञान, गणित, खगोल, औषध, रसायन; टॉलेमी का ‘अलमजेस्ट’ और उपपद ‘अल’ (घ) इब्न-सिना (एविसिना, 980–1037), अल-राज़ी (रेजेस), इब्न रूश्द (अवेरोज़, 1126–98) — दार्शनिक ज्ञान व धार्मिक विश्वास के तनाव सुलझाने की पद्धति ईसाई चिंतकों ने अपनाई; ! यूरोपीय वर्तनी से भ्रम कि “वे यूरोपीय थे!” (ङ) विद्यालय लड़कों के लिए ही थे (च) कला: ड्यूरर का बॉक्स — “कला प्रकृति में रची-बसी”; गणित द्वारा कला; रोमन अवशेषों की खोज; दोनातल्लो (1416) की सजीव मूर्तियाँ (छ) वेसेलियस (1514–64) — पादुआ; पहली बार मानव-शरीर की चीर-फाड़; आधुनिक शरीर-क्रिया विज्ञान का प्रारंभ (ज) लियोनार्दो दा विन्ची (1452–1519) — वनस्पति विज्ञान से गणित तक; मोना लीसा, द लास्ट सपर; उड़न-मशीन; ‘परीक्षण का अनुयायी’ (झ) यथार्थवाद: रेखागणित से परिदृश्य; प्रकाश-अध्ययन से त्रि-आयामी रूप; तेल-माध्यम; चीनी-फ़ारसी चित्रकला का प्रभाव (मंगोलों से); परंपरा 19वीं सदी तक
गतिविधि (7 मि.)क्रियाकलाप 2 — कलाकृतियों के वैज्ञानिक तत्वों का वर्णन
मूल्यांकन (3 मि.)1. ‘अल’ उपपद क्या दर्शाता है? 2. वेसेलियस का योगदान? 3. यथार्थवाद के तीन आधार?

कालांश 5 — वास्तुकला और प्रथम मुद्रित पुस्तकें (पृ. 113–114)

घटकविवरण
उद्देश्यशास्त्रीय शैली का पुनरुद्धार; मुद्रण-क्रांति के परिणाम
प्रस्तावना (5 मि.)“एक भिक्षु जितने समय में बाईबल की एक प्रति लिखता था, उतने में 150 प्रतियाँ — इसका क्या असर हुआ होगा?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) 15वीं सदी में रोम का पुनर्जीवन; 1417 से पोप शक्तिशाली (1378 की दो-पोप दुर्बलता का अंत); पुरातत्त्वविदों द्वारा उत्खनन; ‘शास्त्रीय’ शैली का पुनरुद्धार (ख) पोप-व्यापारी-अभिजात द्वारा वास्तुविदों की नियुक्ति; भवनों की लेपचित्र-मूर्ति सज्जा (ग) माईकल ऐंजेलो (1475–1564) — सिस्टीन चैपल की छत, ‘दि पाइटा’, सेंट पीटर का गुम्बद; ब्रुनेलेशी (1337–1446) — फ़्लोरेंस का ड्यूमो; मूर्तिकार के रूप में शुरुआत (घ) ★अब कलाकार की पहचान उसके नाम से — न कि संघ/गिल्ड के नाम से (अध्याय 4 से तुलना) (ङ) अल्बर्टी का बॉक्स — वास्तुविद् की परिभाषा (च) मुद्रण: साहित्य विदेशों तक पहुँचा; यूरोप चीनियों व मंगोल शासकों का ऋणी; साथ में आग्नेयास्त्र, कम्पास, फलक (Abacus) (छ) गूटेनबर्ग (1400–58), 1455 में बाईबल की 150 प्रतियाँ (ज) परिणाम: क्लासिकी ग्रंथों का मुद्रण; छात्र नोट पर निर्भर नहीं; विचारों का तेज़ प्रसार; एकांत पठन → पढ़ने की आदत; 15वीं सदी के अंत से आल्प्स के पार प्रसार
गतिविधि (7 मि.)तुलना-तालिका: ‘हस्तलिखित पांडुलिपि’ बनाम ‘मुद्रित पुस्तक’ (लागत, गति, पहुँच, पठन-शैली)
मूल्यांकन (3 मि.)1. ड्यूमो किसने बनाया? 2. गूटेनबर्ग ने कब क्या छापा? 3. मुद्रण-तकनीक किनसे मिली?

कालांश 6 — मनुष्य की नयी संकल्पना और महिलाओं की आकांक्षाएँ (पृ. 114–116)

घटकविवरण
उद्देश्यमानवतावादी मूल्य; लैंगिक यथार्थ का संतुलित चित्र
प्रस्तावना (5 मि.)“‘व्यक्ति’ की नयी अवधारणा में स्त्रियाँ कहाँ थीं?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) मानव जीवन पर धर्म का नियंत्रण कमज़ोर; भौतिक संपत्ति-शक्ति-गौरव का आकर्षण; पर वे अधार्मिक नहीं थे (ख) बरबारो (1390–1454) — संपत्ति-अधिग्रहण एक विशेष गुण; वल्ला (1406–57) — ‘ऑनप्लेज़र’ में भोग-विलास पर ईसाई निषेधाज्ञा की आलोचना (ग) अच्छे व्यवहार, वेशभूषा, दक्षता में रुचि; मानवतावाद = व्यक्ति सत्ता-दौलत की होड़ छोड़कर अन्य माध्यमों से जीवन को रूप दे सकता है; मनुष्य का स्वभाव बहुमुखी — तीन वर्गों की मान्यता के विरुद्ध (घ) मैक्यिावेली का बॉक्स — ‘दि प्रिंस’ (1513), 15वाँ अध्याय; गुण-दोषों की जोड़ियाँ; “सभी मनुष्य बुरे हैं”; मनुष्य अपने समस्त कार्यों में अपना स्वार्थ देखता है (ङ) महिलाएँ: वैयक्तिकता-नागरिकता के विचारों से दूर रखा गया; लड़कों को ही शिक्षा; दहेज़ पारिवारिक कारोबार में, पर राय का अधिकार नहीं; कारोबारी मैत्री हेतु विवाह; दहेज़ न होने पर मठ में नन (च) व्यापारी परिवारों में भिन्न स्थिति — दुकान-सहायता, पति की अनुपस्थिति में कारोबार, विधवा की सार्वजनिक भूमिका (छ) कसान्द्रा फेदेले (1465–1558) — “शिक्षा न पुरस्कार देती है न सम्मान का आश्वासन, तथापि प्रत्येक महिला को शिक्षा की इच्छा रखनी चाहिए”; पादुआ में भाषण; गणतंत्र की आलोचना; ईसाबेला दि इस्ते (1474–1539) — मंतुआ पर शासन (ज) कास्तिल्योनी का ‘दि कोर्टियर’ (1528) — स्त्री को ‘स्त्रियोचित’ होना चाहिए
गतिविधि (7 मि.)क्रियाकलाप 3 — फेदेले बनाम कास्तिल्योनी की तुलना; ‘महिलाओं का निर्दिष्ट वर्ग’ पर चर्चा
मूल्यांकन (3 मि.)1. वल्ला की पुस्तक व तर्क? 2. फेदेले का प्रसिद्ध कथन? 3. मैक्यिावेली का मनुष्य-दर्शन?

कालांश 7 — धर्म-सुधार, वैज्ञानिक क्रांति और ‘क्या पुनर्जागरण हुआ?’ (पृ. 117–121)

घटकविवरण
उद्देश्यसुधार-आंदोलन का क्रम; वैज्ञानिक क्रांति; अवधारणा की समीक्षा
प्रस्तावना (5 मि.)“एक भिक्षु ने कहा — ईश्वर तक पहुँचने के लिए पादरी की ज़रूरत नहीं। इसका क्या परिणाम हुआ?”
मुख्य शिक्षण (25 मि.)(क) उत्तरी यूरोप का मानवतावाद — इटली के विपरीत, ईसाई चर्च के सदस्यों को आकर्षित; अनावश्यक कर्मकांडों का त्याग; मानव = मुक्त विवेकपूर्ण कर्ता; दूरवर्ती ईश्वर; खुशी इसी विश्व में (ख) मोर (1478–1535) व इरेस्मस (1466–1536) — चर्च लालची संस्था; ‘पाप-स्वीकारोक्ति’ (Indulgences); स्थानीय भाषाओं में बाईबल से सच्चाई ज्ञात; किसानों-राजाओं का असंतोष; ‘कॉन्स्टैनटाइन के अनुदान’ की जालसाजी का पर्दाफाश (ग) लूथर (1483–1546), 1517 — पादरी की आवश्यकता नहीं, केवल विश्वास; प्रोटैस्टेंट सुधारवाद; ज्विंगली (1484–1531), कैल्विन (1509–64); शहरों में लोकप्रिय, ग्रामीण में कैथलिक प्रभाव (घ) एनाबेपटिस्ट — मोक्ष + सामाजिक-उत्पीड़न का अंत; कर न लेना, अपना पादरी चुनने का अधिकार → सामंतवाद से उत्पीड़ित किसानों को आकर्षित (ङ) टिंडेल का बॉक्स — मातृभाषा में धर्मग्रंथ का महत्त्व (च) लूथर ने आमूल परिवर्तनवाद का समर्थन नहीं किया; 1525 में किसान विद्रोह का दमन; फ्रांस में प्रोटैस्टेंट — अत्याचारी शासक को अपदस्थ करने का अधिकार; इंग्लैंड — राजा/रानी चर्च के प्रमुख (छ) प्रति-सुधार — सादा जीवन व निर्धन-सेवा; लोयोला, 1540, सोसाइटी ऑफ़ जीसस; जेसुइट (ज) तालिका: 16वीं-17वीं शताब्दियाँ (1516 यूटोपिया → 1687 प्रिन्सिपिया) (झ) कोपरनिकसीय क्रांति — पुरानी मान्यता (पापों से भरी स्थिर पृथ्वी, ब्रह्मांड का केंद्र); कोपरनिकस (1473–1543); भय व मृत्यु-शैया पर रिटिकस को पांडुलिपि; कैप्लर — दीर्घवृत्ताकार कक्षाएँ; गैलीलियो — ‘दि मोशन’; न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण (ञ) ब्रह्मांड का अध्ययन — गैलीलियो का कथन; ज्ञान = अवलोकन व प्रयोग; ‘वैज्ञानिक क्रांति’; दूरस्थ ईश्वर; पेरिस अकादमी (1670) व रॉयल सोसाइटी (1662) (ट) समीक्षा: पीटर बर्क — बर्कहार्ट अतिशयोक्तिपूर्ण; ‘अंधकार युग’ का खंडन; एशिया व अरब का ऋण; यूरोप-केंद्रित दृष्टिकोण; दो स्थायी परिवर्तन — निजी/सार्वजनिक क्षेत्र और भाषा-आधारित पहचान
गतिविधि (7 मि.)क्रियाकलाप 4 — प्रोटैस्टेंट आलोचना के मुद्दे सूचीबद्ध करना
मूल्यांकन (3 मि.)1. Indulgences क्या? 2. कोपरनिकस ने पांडुलिपि किसे दी? 3. पीटर बर्क की आपत्ति?

कालांश 8 (पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन)

  • कालरेखा-क्विज़: 1300 → 1687 की 20 प्रविष्टियाँ (दोनों तालिकाओं से)।
  • अभ्यास प्रश्न 1–6 पर निर्देशित लेखन (04/05 फ़ाइलों से)।
  • मानचित्र-कार्य: पादुआ, वेनिस, जिनेवा, मंतुआ, बोलोनिया, फ़्लोरेंस, रोम, सिसली, सार्डीनिया, कोर्सिका, एड्रियाटिक व टिरिनियन सागर।

शिक्षण-सामग्री

  • NCERT (पृ. 106–122); मानचित्र 1; फ़्लोरेंस का 1470 का रेखाचित्र; ड्यूमो, दि पाइटा, ड्यूरर के ‘प्रार्थना रत हस्त’ के चित्र।
  • 02-Presentation.pptx; 06-Flashcards.md।
  • स्रोत-पर्चियाँ: कोन्तारिनी, पिको देल्ला मिरांदोला, ड्यूरर, अल्बर्टी, मैक्यिावेली, फेदेले, कास्तिल्योनी, टिंडेल।

सामान्य भ्रांतियाँ

  1. “पुनर्जागरण में लोग अधार्मिक हो गए” — NCERT स्पष्ट कहती है: “ये ज़रूरी नहीं कि वे अधार्मिक थे”; ड्यूरर व कोपरनिकस दोनों निष्ठावान ईसाई थे।
  2. “मध्यकाल पूर्णत: ‘अंधकार युग’ था” — यह मानवतावादियों का दिया नाम है; आधुनिक इतिहासकार इसे अनुचित मानते हैं।
  3. “पुनर्जागरण केवल यूनान-रोम का पुनर्जन्म था” — अरब, भारत, ईरान, मध्य एशिया और चीन का ऋण भी उतना ही; मुद्रण-कम्पास-आग्नेयास्त्र-फलक चीन-मंगोलों से।
  4. “मानवतावाद ने सबको समान बनाया” — महिलाओं को वैयक्तिकता व नागरिकता के विचारों से दूर रखा गया; विद्यालय भी केवल लड़कों के लिए थे।
  5. “लूथर क्रांतिकारी थे” — उन्होंने आमूल परिवर्तनवाद का समर्थन नहीं किया और 1525 के किसान विद्रोह के दमन का आह्वान किया।
  6. “कोपरनिकस ने अपना सिद्धांत गर्व से प्रकाशित किया” — वे भयभीत थे; पांडुलिपि मृत्यु-शैया पर रिटिकस को सौंपी।
  7. “वेनिस पूर्ण लोकतंत्र था” — कोन्तारिनी स्वयं बताते हैं कि सामान्य जनता और गरीब बाहर थे; परिषद् में केवल संभ्रांत वर्ग के 25+ वर्ष के पुरुष।
  8. “इटली एकीकृत देश था” — वह कमज़ोर और अनेक टुकड़ों में बँटा था; यही विखंडन नगर-राज्यों की स्वायत्तता का कारण बना।