Chapter 3यायावर साम्राज्य

PARAKH questions10 min

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आयाम: जागरूकता (50%) • संवेदनशीलता (20%) • सृजनात्मकता (30%)

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

अ-1. केस/परिस्थिति-आधारित प्रश्न

1एक इतिहासकार को दो विवरण मिलते हैं। पहला — एक चश्मदीद गवाह का, जिसके अनुसार बुखारा के किले की रक्षा के लिए 400 सैनिक तैनात थे। दूसरा — एक इल-खानी इतिवृत्त, जिसके अनुसार उसी आक्रमण में 30,000 सैनिक मारे गए।
(क) दोनों में कौन-सा विवरण अधिक विश्वसनीय है और क्यों?
(ख) इल-खानी इतिवृत्तकार ने संख्या क्यों बढ़ाई होगी? दो कारण दीजिए।
(ग) इससे मध्यकालीन आँकड़ों को पढ़ने का कौन-सा नियम बनता है?
चश्मदीद — प्रत्यक्ष साक्ष्य; इल-खानी लेखन तोलूयिद-संरक्षित, ‘अब समय बदल गया’ दिखाकर वर्तमान शासक को श्रेष्ठ बताना, आतंक-प्रचार की परंपरा; नियम — मध्यकालीन संख्याएँ अलंकार हो सकती हैं, उन्हें प्रवृत्ति-सूचक मानें, गणना नहीं।

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उत्तर-संकेत:

2मान लीजिए आप 1250 के दशक में काराकोरम के दरबार में मंगोल अधिकारी हैं। एक व्यापारी-दल पश्चिम से आया है।
(क) उन्हें यात्रा के लिए आप क्या जारी करेंगे और उसके दो नाम क्या हैं?
(ख) उनसे कौन-सा कर लिया जाएगा और उसका राजनीतिक अर्थ क्या है?
(ग) संदेश राजधानी तक कैसे पहुँचेगा और उसकी व्यवस्था का खर्च कौन उठाता है?
पैज़ा (फ़ारसी)/गेरेगे (मंगोल); बाज कर = खान की सत्ता की स्वीकृति; यम पद्धति की चौकियाँ-घोड़े-संदेशवाहक, खर्च कुबकुर (पशुओं का दसवाँ हिस्सा) से।

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उत्तर-संकेत:

3निशापुर (1220) के घेरे के दौरान एक मंगोल राजकुमार मारा गया, जिसके बाद चंगेज़ खान ने पूर्ण विध्वंस का आदेश दिया। दूसरी ओर, 1219–21 में ओट्रार, बुखारा, समरकंद, बल्ख़ आदि ने समर्पण कर दिया।
(क) दोनों प्रकार के नगरों के साथ मंगोल व्यवहार में क्या अंतर था?
(ख) यह अंतर मंगोल रणनीति का कौन-सा पक्ष उजागर करता है?
(ग) जुवैनी का बुखारा-भाषण इस रणनीति में कैसे फिट बैठता है?
समर्पण = अपेक्षाकृत सुरक्षा; प्रतिरोध = विध्वंस; रणनीति — नियोजित आतंक से आगे के नगरों को बिना युद्ध झुकाना; ‘मैं ईश्वर का दंड हूँ’ भाषण उसी मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा।

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उत्तर-संकेत:

अ-2. दावा-कारण (Assertion–Reason)

निर्देश:

  1. अदोनों सही, कारण सही व्याख्या
  2. बदोनों सही, कारण सही व्याख्या नहीं
  3. सदावा सही, कारण गलत
  4. ददावा गलत, कारण सही।

4दावा (A): मंगोलिया के स्टेपी-क्षेत्र में कोई नगर नहीं उभर पाए।
कारण (R): पशुपालन और शिकार-संग्रह की अर्थव्यवस्था घनी आबादी का भरण-पोषण करने में समर्थ नहीं थी।

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उत्तर: (अ)

5दावा (A): चंगेज़ खान ने मंगोल सेना को दशमलव पद्धति में पुनर्गठित किया।
कारण (R): वह विभिन्न जनजातीय समूहों की पुरानी पहचान को योजनाबद्ध रूप से मिटाना चाहता था।

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उत्तर: (अ)

6दावा (A): चंगेज़ खान ने उत्तरी भारत पर विजय प्राप्त की।
कारण (R): उसकी सेनाओं ने जलालुद्दीन का पीछा सिंध प्रदेश तक किया था।

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उत्तर: (द) — दावा गलत (वह सिंधु तट से लौट गया); कारण सही तथ्य है।

7दावा (A): 1260 के दशक के बाद मंगोलों का पश्चिम की ओर विस्तार रुक गया।
कारण (R): मंगोल सेनाएँ यूरोप की उन्नत सेनाओं का मुकाबला करने में असमर्थ थीं।

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उत्तर: (स) — दावा सही; कारण गलत — वास्तविक कारण उत्तराधिकार-राजनीति और तोलूयिद वंश की चीन में बढ़ती रुचि (मिस्र के विरुद्ध अपर्याप्त सेना भेजी गई)।

8दावा (A): ‘यास’ का अर्थ चार शताब्दियों में बदल गया।
कारण (R): प्रारंभ में यसाक का अर्थ प्रशासनिक आदेश था, बाद में वह चंगेज़ खान की विधि-संहिता और वैधता का प्रतीक बन गया।

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उत्तर: (अ) (प्रमाण: हफ़ीज़-ए-तानीश ने अब्दुल्लाह खान की नमाज़ को भी ‘यास के अनुसार’ कहा।)

अ-3. आँकड़ा/मानचित्र-व्याख्या

9निम्न संख्याओं का ऐतिहासिक अर्थ एक-एक वाक्य में लिखिए

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संख्यासंदर्भ
1206तेमुजिन का ‘चंगेज़ खान’ घोषित होना (कुरिलताई)
10,000तुमन — सेना की सबसे बड़ी इकाई
दसवाँ हिस्साकुबकुर कर (यम-व्यवस्था हेतु)
400 बनाम 30,000बुखारा किले पर चश्मदीद बनाम इल-खानी इतिवृत्त — अतिशयोक्ति का प्रमाण
1236–42बातू के यूरोप-अभियान
1258बग़दाद; अब्बासी ख़िलाफ़त का अंत; इल-खानी राज्य
1279समस्त चीन पर विजय
1526बाबर द्वारा भारत में मुगल साम्राज्य की नींव
1921मंगोलिया का गणराज्य

10(मानचित्र-कार्य) एशिया के रेखा-मानचित्र पर अंकित कीजिए — मंगोलिया, ओनोन नदी, अल्ताई पर्वत, गोबी मरुस्थल, कराकोरम, पेकिंग, बुखारा, समरकंद, निशापुर, हिरात, बग़दाद, मास्को, दिल्ली सल्तनत। फिर चार खानतों (गोल्डन होर्ड, चघताई, इल-खान, महान खान) को अलग-अलग रंगों से दिखाइए और बताइए कि रेशम मार्ग किन-किन से होकर गुज़रता था।

अ-4. वर्गीकरण

11निम्न को ‘पुरानी स्टेपी-परंपरा’ और ‘चंगेज़ खान का नवाचार’ में छाँटिए: कुल-कबीला आधारित सैन्य इकाई • तुमन • अल्पकालिक परिसंघ • यम (हरकारा पद्धति) • चरागाह हेतु संघर्ष • नोयान की नियुक्ति • लूटपाट से पशुधन • किरिलताई में सामूहिक निर्णय • जनजातीय पहचान का विनाश।
पुरानी परंपरा — कुल-कबीला इकाई, अल्पकालिक परिसंघ, चरागाह-संघर्ष, लूटपाट, (किरिलताई भी पुरानी परंपरा से आई पर चंगेज़ ने उसे साम्राज्य-संस्था बनाया); नवाचार — तुमन/दशमलव पद्धति, यम, नोयान, जनजातीय पहचान का विनाश।

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उत्तर-संकेत:

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

12(दृष्टिकोण-विविधता) ‘चंगेज़ खान’ विषय पर चार दृष्टिकोणों से 3–4 वाक्य लिखिए:
(क) बुखारा का एक व्यापारी (1220);
(ख) एक मंगोल चरवाहा जिसका बेटा तुमन में भर्ती हुआ;
(ग) काराकोरम में कार्यरत एक ईरानी सचिव;
(घ) आज का एक मंगोलियाई विद्यार्थी।
फिर एक वाक्य में लिखिए — NCERT का वह सूत्र क्या कहता है जो इन भिन्नताओं को समझाता है?
“एक प्रभावशाली दृष्टिकोण अन्य को पूरी तरह से मिटा देता है।”

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संकेत:

13(भाषा और पूर्वाग्रह) ‘बर्बर’ शब्द की व्युत्पत्ति (यूनानी बारबरोस) और उससे जुड़ी रूढ़ छवियाँ पढ़िए। अब लिखिए —
(क) किसी समुदाय के लिए ऐसे शब्द का प्रयोग उस समुदाय के इतिहास-लेखन को कैसे प्रभावित करता है?
(ख) आज हमारे आसपास ऐसे कौन-से शब्द चलन में हैं जो किसी समूह को ‘पिछड़ा’ या ‘असभ्य’ ठहराते हैं? (कम-से-कम दो उदाहरण, सम्मानजनक भाषा में)
(ग) एक इतिहासकार को ऐसे शब्दों के साथ क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

14(विस्थापन और युद्ध का मानवीय पक्ष) मंगोल विजयों के बाद ‘सैकड़ों-हज़ारों लोग मारे गए और इससे कहीं अधिक दास बना लिए गए’; कनात की मरम्मत रुकने से खुरासान के कुछ हिस्से कभी नहीं उबरे।
(क) युद्ध का प्रभाव केवल मृतकों की संख्या से क्यों नहीं मापा जा सकता? तीन अन्य आयाम बताइए।
(ख) ‘पारिस्थितिक विनाश’ को आज के किसी उदाहरण से जोड़िए।

15(धार्मिक बहुलता) रूब्रुक के विवरण के अनुसार काराकोरम के उत्सवों में नेस्तोरियन, मुसलमान, बौद्ध और ताओ पुजारी — सभी को आमंत्रित किया जाता था; मंगोल शासकों ने ‘सार्वजनिक नीतियों पर अपने वैयक्तिक मत कभी नहीं थोपे’।
(क) इसे NCERT ‘उस समय के लिए असामान्य बात’ क्यों कहती है?
(ख) इस नीति और आधुनिक भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता-सिद्धांत में क्या समानता और क्या अंतर है?

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(5–6 वाक्य)

16(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “मंगोल मुख्यत: विध्वंसक शक्ति थे” (निशापुर-आदेश, विनाश के आँकड़े, कनात, दासता)।
विपक्ष: “मंगोल सभ्यताओं के सेतु-निर्माता थे” (पैक्स मंगोलिका, रेशम मार्ग, पैज़ा, नागरिक प्रशासक, कुबलई-गज़न की कृषक-नीति, बहुधार्मिक शासन)।
प्रत्येक दल पाठ से 4-4 साक्ष्य दे; अंत में मध्यस्थ कालक्रम-आधारित निष्कर्ष लिखे (आरंभिक विजय-काल बनाम स्थिरता-काल)।

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

17(कल्पनाशील पुनर्रचना) आप 1254 में काराकोरम पहुँचे रूब्रुक निवासी विलियम के सहयात्री हैं। अपनी यात्रा-डायरी का एक पृष्ठ लिखिए (150 शब्द) — जिसमें कम-से-कम पाँच प्रामाणिक विवरण हों: पैज़ा/गेरेगे, यम की चौकियाँ, दरबार में विभिन्न धर्मों के पुजारी, फ्रांसीसी महिला पकेट या जौहरी बूशेर, कराकोरम तक बढ़ा रेशम मार्ग।

18(डिज़ाइन-चुनौती) मंगोल यम (हरकारा) पद्धति का एक ‘सूचना-पोस्टर’ बनाइए — जिसमें दिखाया जाए: चौकियों की शृंखला, घोड़े-संदेशवाहक, कुबकुर कर से वित्त-व्यवस्था, और इससे महान खान को क्या लाभ मिलता था। नीचे तीन वाक्य लिखिए — आज की किस व्यवस्था से इसकी तुलना की जा सकती है?

19(प्रति-तथ्यात्मक) तीन ‘यदि’ परिस्थितियों पर 4–5 वाक्य लिखिए —
(क) “यदि चंगेज़ खान ने पुरानी कुल-कबीला सैन्य व्यवस्था न बदली होती…”
(ख) “यदि 1227 में चंगेज़ खान की मृत्यु न हुई होती और वह सिंधु पार कर भारत आ जाता…”
(ग) “यदि मंगोलों ने विजित राज्यों से नागरिक प्रशासक भर्ती न किए होते…”

20(विचार-संयोजन) “यास ने मंगोलों को — जो संख्या में अल्पसंख्यक थे — अपनी पहचान बचाने का आत्मविश्वास दिया।” इस विचार को लेकर 120 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए: कोई भी अल्पसंख्यक शासक-वर्ग अपनी विशिष्टता बनाए रखने के लिए किन उपायों का सहारा लेता है? इतिहास से एक और उदाहरण जोड़िए।

21(रचनात्मक प्रस्तुति) कक्षा-गतिविधि — ‘मंगोल साम्राज्य का समाचार-पत्र’ (चार पृष्ठ, समूह-कार्य):
पृष्ठ 1 — मुख्य समाचार (1206 कुरिलताई);
पृष्ठ 2 — युद्ध-रिपोर्ट (ख्वारज़म अभियान, दोनों पक्षों के बयान सहित);
पृष्ठ 3 — व्यापार-पन्ना (रेशम मार्ग, पैज़ा, बाज कर, वस्तुओं की सूची);
पृष्ठ 4 — संपादकीय (चंगेज़ खान: विजेता या विध्वंसक?) + पाठकों के पत्र (एक बुखारा-निवासी, एक मंगोल सैनिक)।

भाग ई — मूल्यांकन-रूब्रिक

स्तरजागरूकतासंवेदनशीलतासृजनात्मकता
प्रारंभिकतिथियाँ-नाम अधूरे; संस्थाओं (तुमन, उलुस, यम) का घालमेल; आँकड़े बिना संदर्भएक ही दृष्टिकोण; विजित/श्रमिक/स्त्री पक्ष की उपेक्षापुनर्कथन मात्र; प्रामाणिक विवरण अनुपस्थित
दक्षप्रमुख तथ्य व कालक्रम सही; केस में 2–3 साक्ष्य; वर्गीकरण अधिकांशतः ठीकदो दृष्टिकोण; विनाश और निर्माण दोनों पक्षों का उल्लेख3–4 प्रामाणिक विवरणों सहित मौलिक रचना
उन्नतप्रक्रिया-समझ (क्यों-कैसे); दावा-कारण में सूक्ष्म विवेक; स्रोत-पूर्वाग्रह की पहचान (इल-खानी अतिशयोक्ति, नगरीय लेखक)बहु-दृष्टिकोण संतुलन; भाषा-पूर्वाग्रह (‘बर्बर’) की समझ; अतीत-वर्तमान का विवेकपूर्ण सेतुबहु-आयामी कल्पना; प्रति-तथ्यात्मक तर्क-शृंखला; ऐतिहासिक तर्कसंगति व स्रोत-चेतना

सुझाया भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30%