RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार · कुल 60 प्रश्न
खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
1“लोकतंत्र शासन का एक ______ भर है।”
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सही उत्तर: (ब) स्वरूप
2आज दुनिया के कितने देश लोकतांत्रिक व्यवस्था चलाने का दावा करते हैं?
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सही उत्तर: (ब) सौ
3नागरिक का यह अधिकार और साधन कि वह जाँच सके कि फ़ैसलों में नियमों का पालन हुआ या नहीं, कहलाता है
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सही उत्तर: (ब) पारदर्शिता
4किस एक मामले में लोकतांत्रिक शासन निश्चित रूप से बेहतर है?
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सही उत्तर: (स) वैधता
51950–2000 में सभी लोकतांत्रिक शासनों की विकास दर थी
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सही उत्तर: (स) 3.95
6सभी तानाशाहियों की विकास दर थी
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सही उत्तर: (ब) 4.42
7लोकतंत्र वाले गरीब देशों की विकास दर थी
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सही उत्तर: (ब) 4.28
8दक्षिण अफ्रीका में ऊपर के 20% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का हिस्सा
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सही उत्तर: (स) 64.8
9चार्ट 2 में सबसे कम असमानता वाले दो देश
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सही उत्तर: (ब) डेनमार्क-हंगरी
10“लोकतंत्र बेहतर है” — भारत में कितने प्रतिशत लोग मानते हैं?
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सही उत्तर: (स) 70
11दक्षिण एशिया में लोकतंत्र को तानाशाही पर वरीयता किस देश में नहीं मिली?
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सही उत्तर: (स) पाकिस्तान
12“हमारे वोट का असर पड़ता है” — यह मानने वाले भारत में कितने प्रतिशत हैं?
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सही उत्तर: (स) 67
13लोकतांत्रिक व्यवस्था आधारित होती है
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सही उत्तर: (ब) राजनीतिक समानता पर
14बहुमत को सदा किसका ध्यान रखना होता है?
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सही उत्तर: (ब) अल्पमत का
15लोकतंत्र तभी तक लोकतंत्र रहता है जब तक
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सही उत्तर: (ब) प्रत्येक नागरिक को किसी न किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बनने का मौका मिले
16व्यक्ति की गरिमा और आज़ादी के मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्था है
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सही उत्तर: (ब) किसी भी अन्य शासन प्रणाली से काफ़ी आगे
17“गरिमा और आज़ादी की चाह ही ______ का आधार है।”
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सही उत्तर: (ब) लोकतंत्र
18शिकायतों का बने रहना किसकी गवाही देता है?
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सही उत्तर: (ब) लोकतंत्र की सफलता
19नन्नू ने अपना काम करवाने के लिए किसका उपयोग किया?
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सही उत्तर: (स) सूचना के अधिकार
20नन्नू की अर्ज़ी पर कार्रवाई कितने समय में हुई?
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सही उत्तर: (स) हफ़्ते भर के अंदर
खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
1लोकतंत्र हमारी सभी सामाजिक बुराइयों को मिटा देने वाली ______ नहीं है।
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लोकतंत्र हमारी सभी सामाजिक बुराइयों को मिटा देने वाली जादू की छड़ी नहीं है।
2लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह ______ नहीं जाता।
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लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता।
3लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था ______ शासन व्यवस्था है।
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लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन व्यवस्था है।
4मूल्यांकन के तीन पैमाने हैं — नियमित-निष्पक्ष ______, खुली सार्वजनिक ______, और नागरिकों का ______।
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मूल्यांकन के तीन पैमाने हैं — नियमित-निष्पक्ष चुनाव, खुली सार्वजनिक चर्चा, और नागरिकों का सूचना का अधिकार।
5सिर्फ़ गरीब मुल्कों की तुलना करने पर विकास दर का अंतर ______ हो जाता है।
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सिर्फ़ गरीब मुल्कों की तुलना करने पर विकास दर का अंतर लगभग समाप्त हो जाता है।
6प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का ______ होता है।
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प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का वज़न बराबर होता है।
7बहुमत और अल्पमत की राय कोई ______ चीज़ नहीं होती।
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बहुमत और अल्पमत की राय कोई स्थायी चीज़ नहीं होती।
8जन्म के आधार पर बहुसंख्यक समुदाय का हिस्सा बनने से रोकने पर शासन ______ नहीं रह जाता।
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जन्म के आधार पर बहुसंख्यक समुदाय का हिस्सा बनने से रोकने पर शासन समावेशी नहीं रह जाता।
9महिलाओं के साथ गरिमा और समानता का व्यवहार ______ की ज़रूरी शर्त माना जाने लगा है।
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महिलाओं के साथ गरिमा और समानता का व्यवहार लोकतंत्र की ज़रूरी शर्त माना जाने लगा है।
10असंतोष जताना लोगों के ______ बनने की गवाही देता है।
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असंतोष जताना लोगों के प्रजा से नागरिक बनने की गवाही देता है।
खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न
1लोकतंत्र हर मर्ज की दवा है।
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ग़लत
2गैर-लोकतांत्रिक सरकारें कम भ्रष्ट होती हैं — यह कहने का कोई आधार नहीं है।
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सही
3लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में बहुत सफल रही हैं।
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ग़लत
4बहुमत के शासन का अर्थ धर्म या भाषा के बहुसंख्यक समूह का शासन है।
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ग़लत
5जातिगत भेदभाव के पक्ष में अब कानूनी या नैतिक बल नहीं होता।
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सही
खण्ड घ — अति लघूत्तरीय (2 अंक) — 10 प्रश्न
1“लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है” — इसका क्या अर्थ है?
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अर्थ यह कि लोकतंत्र “कुछ चीज़ों को हासिल करने की स्थितियाँ तो बना सकता है पर नागरिकों को ही उन स्थितियों का लाभ लेकर अपने लक्ष्यों को हासिल करना होता है।” — यानी लोकतंत्र मंच देता है, नतीजे नागरिकों की सक्रियता से आते हैं।
2पारदर्शिता किसे कहते हैं?
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नागरिक का यह हक़ कि वह पता कर सके — “फ़ैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं”; उसे “न सिर्फ़ जानने का अधिकार है बल्कि उसके पास इसके साधन भी उपलब्ध हैं। इसे पारदर्शिता कहते हैं।” यह “अक्सर गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में नहीं होती।”
3वैध शासन व्यवस्था से क्या आशय है?
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वह शासन जो “लोगों की अपनी शासन व्यवस्था” हो। लोकतंत्र “सुस्त हो सकता है, कम कार्य-कुशल हो सकता है, इसमें भ्रष्टाचार हो सकता है” — फिर भी वैधता के मामले में वह “निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर” है।
4“लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता” — क्यों?
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क्योंकि लोकतांत्रिक सरकार ने “पूरी प्रक्रिया को माना है इसलिए इस बात की ज़्यादा संभावना है कि लोग उसके फ़ैसलों को मानेंगे और वे ज़्यादा प्रभावी होंगे।” तेज़ पर अस्वीकार्य फ़ैसले से धीमा पर स्वीकार्य फ़ैसला बेहतर है।
5लोकतांत्रिक सरकार के मूल्यांकन के तीन पैमाने लिखिए।
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नियमित और निष्पक्ष चुनाव; (2) प्रमुख नीतियों और नए कानूनों पर खुली सार्वजनिक चर्चा; (3) सरकार के कामकाज की जानकारी पाने का नागरिकों का सूचना का अधिकार। — record “मिला-जुला” रहा है।
6आर्थिक विकास किन कारकों पर निर्भर करता है?
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“देश की जनसंख्या के आकार, वैश्विक स्थिति, अन्य देशों से सहयोग और देश द्वारा तय की गई आर्थिक प्राथमिकताओं पर।” — इसीलिए संवृद्धि के अकेले आधार पर “लोकतंत्र को खारिज नहीं किया जा सकता।”
7राजनीतिक समानता क्या है?
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लोकतंत्र का आधार — “प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का वज़न बराबर होता है।” राजनीतिक क्षेत्र में सबको बराबरी का दर्जा — भले आर्थिक असमानताएँ बनी रहें।
8सामंजस्य के लिए लोकतंत्र की दो शर्तें लिखिए।
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“बहुमत को सदा ही अल्पमत का ध्यान रखना होता है” — तभी सरकार जन-सामान्य की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है;
“बहुमत के शासन का अर्थ धर्म, नस्ल अथवा भाषायी आधार के बहुसंख्यक समूह का शासन नहीं” — हर नागरिक को किसी न किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बनने का मौका मिले।
9समावेशी शासन कब नहीं रह जाता?
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“अगर किसी को जन्म के आधार पर बहुसंख्यक समुदाय का हिस्सा बनने से रोका जाता है तब लोकतांत्रिक शासन उस व्यक्ति या समूह के लिए समावेशी नहीं रह जाता।”
10“शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है” — कैसे?
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क्योंकि इससे पता चलता है कि “लोग सचेत हो गए हैं और वे सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने लगे हैं” — और यह “लोगों के प्रजा से नागरिक बनने की गवाही” देता है।
खण्ड ङ — लघूत्तरीय (3 अंक) — 8 प्रश्न
1“लोकतंत्र हर मर्ज की दवा नहीं है” — समझाइए।
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किताब चेताती है — “कई बार हम लोकतंत्र को हर मर्ज की दवा मान लेते हैं और उससे हर चीज़ की उम्मीद करने लगते हैं… जब हमारी कुछ उम्मीदें पूरी नहीं होतीं तो हम लोकतंत्र की अवधारणा को ही दोष देने लगते हैं।”
सही रुख़ — पहले यह मानना कि “लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है” — वह स्थितियाँ बनाता है, लक्ष्य नागरिकों को हासिल करने होते हैं; और “लोकतंत्र हमारी सभी सामाजिक बुराइयों को मिटा देने वाली जादू की छड़ी भी नहीं है।”
2क्या लोकतांत्रिक सरकारें कार्यकुशल होती हैं? किताब का तर्क दीजिए।
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आरोप गैर-लोकतांत्रिक सरकारें तेज़ फ़ैसले लेती हैं — उन्हें “विधायिका का सामना नहीं करना होता”, “बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नज़रिए का ख्याल नहीं रखना पड़ता।”
जवाब तेज़ फ़ैसला “ऐसा फ़ैसला भी हो सकता है जिसे लोग स्वीकार न करें”; लोकतांत्रिक सरकार समय ज़्यादा लेती है, पर “इसने पूरी प्रक्रिया को माना है इसलिए… लोग उसके फ़ैसलों को मानेंगे और वे ज़्यादा प्रभावी होंगे।”
★निष्कर्ष — “लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता।” — कार्यकुशलता केवल गति से नहीं, स्वीकार्यता और प्रभाव से मापी जाती है।
3भ्रष्टाचार के मामले में लोकतंत्र का record कैसा है? किताब का संतुलित उत्तर दीजिए।
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! “इन मामलों में भी लोकतांत्रिक सरकारों का रिकॉर्ड प्रभावशाली नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ अक्सर लोगों को उनकी ज़रूरतों के लिए तरसाती हैं और आबादी के एक बड़े हिस्से की माँगों की उपेक्षा करती हैं। भ्रष्टाचार के आम किस्से इस बात की गवाही देते हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था इस बुराई से मुक्त नहीं है।”
पर संतुलन ★ “इसके साथ इस पर भी ध्यान दें कि गैर-लोकतांत्रिक सरकारें कम भ्रष्ट या लोगों की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील हैं — यह कहने का कोई आधार नहीं है।”
यानी — भ्रष्टाचार लोकतंत्र की कमी है, पर तानाशाही का तर्क नहीं — और लोकतंत्र में तो पारदर्शिता के साधन भी हैं जिनसे उसे पकड़ा जा सकता है।
4चार्ट 1 से क्या निष्कर्ष निकलता है?
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1950–2000 में — सभी लोकतांत्रिक शासन 3.95, सभी तानाशाहियाँ 4.42 — यानी “आर्थिक संवृद्धि के मामले में तानाशाहियों का रिकॉर्ड थोड़ा बेहतर।”
★पर असली निष्कर्ष अगली पंक्तियों में — गरीब देशों में तानाशाही 4.34 बनाम लोकतंत्र 4.28 — “जब हम सिर्फ़ गरीब मुल्कों के रिकॉर्ड की तुलना करते हैं तो अंतर लगभग समाप्त हो जाता है।”
और चूँकि आर्थिक विकास “कई कारकों” पर निर्भर है, “अकेले इसी कारण से लोकतंत्र को खारिज नहीं किया जा सकता… लोकतांत्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे हैं।”
5“राजनीतिक समानता के बावजूद आर्थिक असमानता” — चार्ट 2 के प्रमाण से समझाइए।
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लोकतंत्र में “हर व्यक्ति का वज़न बराबर” — पर “हम आर्थिक असमानताओं को भी बढ़ता हुआ पाते हैं।” “मुट्ठी भर धनकुबेर” आय-संपत्ति में अनुपात से ज़्यादा हिस्सा पाते हैं, जबकि सबसे निचले हिस्से को “भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा और इलाज जैसी बुनियादी ज़रूरतें” पूरी करने में मुश्किल आती है।
प्रमाण (चार्ट 2) द.अफ्रीका में ऊपर के 20% के पास 64.8% आय, नीचे के 20% के पास मात्र 2.9%; ब्राज़ील 63.0/2.6; अमरीका जैसे अमीर लोकतंत्र में भी 50.0/4.0। ★डेनमार्क (34.5/9.6) और हंगरी “कहीं ज़्यादा बेहतर” — यानी असमानता घटाई जा सकती है, अपने आप नहीं घटती।
निष्कर्ष — “वास्तविक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज़्यादा सफल नहीं हो पाई हैं।”
6लोकतंत्र सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य कैसे बैठाता है?
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लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ “अनेक तरह के सामाजिक विभाजनों को सँभालती हैं” — जैसे बेल्जियम ने जातीय समूहों में “सफलतापूर्वक सामंजस्य” बैठाया। वे “अपने अंदर की प्रतिद्वंद्विताओं को सँभालने की प्रक्रिया विकसित कर लेती हैं” जिससे “टकरावों के विस्फोटक या हिंसक रूप लेने का अंदेशा कम हो जाता है।”
“कोई भी समाज टकरावों को पूरी तरह और स्थायी रूप से नहीं खत्म कर सकता पर हम इन अंतरों का आदर करना सीख सकते हैं… इस काम के लिए लोकतंत्र सबसे अच्छा है।” — जबकि गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ मतभेदों से “आँखें फेर लेती हैं या उन्हें दबाने की कोशिश करती हैं।”
★पर शर्तें भी हैं — अल्पमत का ध्यान और बहुमत ≠ जन्म-आधारित समूह (श्रीलंका की सीख)।
7गरिमा के मामले में लोकतंत्र आगे कैसे है? स्त्रियों और जाति के उदाहरण दीजिए।
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“व्यक्ति की गरिमा और आज़ादी के मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी भी अन्य शासन प्रणाली से काफ़ी आगे है… गरिमा और आज़ादी की चाह ही लोकतंत्र का आधार है।”
स्त्रियाँ “महिलाओं के लंबे संघर्ष के बाद अब जाकर यह माना जाने लगा है कि महिलाओं के साथ गरिमा और समानता का व्यवहार लोकतंत्र की ज़रूरी शर्त है”; सिद्धांत में स्वीकृति के बाद “अब औरतों के लिए वैधानिक और नैतिक रूप से… संघर्ष करना आसान हो गया है। अलोकतांत्रिक व्यवस्था में यह बात संभव न थी।”
जाति भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने “कमज़ोर और भेदभाव का शिकार हुई जातियों के समान दर्जे और समान अवसर के दावे को बल” दिया; भेदभाव के उदाहरण मिलते हैं “पर इनके पक्ष में कानूनी या नैतिक बल नहीं होता।”
8नन्नू के उदाहरण से लोकतंत्र के कौन-से परिणाम सिद्ध होते हैं?
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पारदर्शिता — नन्नू को “न सिर्फ़ जानने का अधिकार” था बल्कि RTI के रूप में साधन भी — उसने अर्ज़ी की दैनिक प्रगति और अधिकारियों के नाम माँगे;
जवाबदेही — तीन महीने से रुका काम हफ़्ते भर में हुआ, क्योंकि अब कार्रवाई का ब्यौरा दर्ज होने वाला था;
★नागरिक की ताक़त — एक दिहाड़ी मजदूर ने बिना रिश्वत-सिफ़ारिश केवल एक अधिकार से व्यवस्था झुका दी — यही “प्रजा से नागरिक बनना” है; और अधिकारी का “आवेदन वापस ले लें” कहना ख़ुद RTI के असर का प्रमाण है।
खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक) — 7 प्रश्न
1★★लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी, ज़िम्मेवार और वैध सरकार का गठन करता है?
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(00-मास्टर के प्रश्नावली-उत्तर 1 के तीनों भाग — उत्तरदायी: शासक चुनने का अधिकार-नियंत्रण-भागीदारी + तीन पैमाने; ज़िम्मेवार: कायदे-कानून से फ़ैसले + पारदर्शिता + “वक्त बेकार नहीं जाता”; वैध: “लोगों की अपनी शासन व्यवस्था” + दक्षिण एशिया के आँकड़े + “समर्थन पैदा करने की क्षमता भी परिणाम है”)
2★लोकतंत्र की आर्थिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
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(क) संवृद्धि — चार्ट 1: लोकतंत्र 3.95 बनाम तानाशाही 4.42 — “थोड़ा बेहतर” record तानाशाहियों का; पर गरीब देशों में 4.28 बनाम 4.34 — “अंतर लगभग समाप्त।” विकास कई कारकों पर निर्भर; इसलिए “अकेले इसी कारण से लोकतंत्र को खारिज नहीं।”
(ख) असमानता — राजनीतिक बराबरी के बावजूद “आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज़्यादा सफल नहीं”; चार्ट 2 के प्रमाण (द.अफ्रीका 64.8/2.9; अमरीका 50/4); गरीब मतदाता बहुसंख्य होकर भी नीतियों में पीछे; बांग्लादेश की आधी से ज़्यादा आबादी गरीबी में।
(ग) फ़ैसला — “तानाशाही और लोकतांत्रिक शासन वाले देशों के आर्थिक विकास दर में अंतर भले ज़्यादा हो लेकिन… लोकतांत्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे हैं” — वैधता, गरिमा, सामंजस्य, पारदर्शिता।
3★★“लोकतंत्र सामाजिक विभाजनों को सँभालने के लिए सबसे अच्छा है — पर दो शर्तों के साथ” — व्याख्या कीजिए।
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(00-मास्टर का खाता 4 — बेल्जियम का उदाहरण; “आँखें फेरना/दबाना” बनाम “आदर और बातचीत”; फिर दोनों शर्तें पूरे उद्धरणों सहित; अंत में अध्याय 1-3 की कड़ी — श्रीलंका का बहुसंख्यकवाद और “जन्म के आधार पर” वाली चेतावनी = सांप्रदायिकता-जातिवाद का ही निष्कर्ष)
4नागरिकों की गरिमा और आज़ादी के क्षेत्र में लोकतंत्र की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
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(खण्ड ङ, प्रश्न 7 का विस्तार — आधार-वाक्य; स्त्रियों की गरिमा; जातिगत समानता; और निष्कर्ष: “संभवतः इसी एहसास के चलते आम लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति ज़्यादा चौकस हुए हैं” + “जाँच कभी ख़त्म नहीं होती” + “प्रजा से नागरिक”)
5★“औद्योगिक देश ही लोकतंत्र का भार उठा सकते हैं, गरीब देशों को आर्थिक विकास के लिए तानाशाही चाहिए” — इस कथन के विपक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर देखिए
★चार्ट 1 का प्रमाण — गरीब देशों में तानाशाही (4.34) और लोकतंत्र (4.28) की विकास दर का “अंतर लगभग समाप्त हो जाता है” — यानी गरीबी में भी लोकतंत्र विकास कर सकता है;
आर्थिक विकास शासन-प्रणाली से ज़्यादा “कई कारकों” पर निर्भर है — जनसंख्या, वैश्विक स्थिति, सहयोग, प्राथमिकताएँ;
तानाशाही के तेज़ फ़ैसले अस्वीकार्य फ़ैसले भी हो सकते हैं — जबकि लोकतंत्र के फ़ैसले “ज़्यादा प्रभावी” होते हैं;
★गरीब देशों की जनता ख़ुद लोकतंत्र चाहती है — दक्षिण एशिया में (पाकिस्तान छोड़कर) हर जगह लोकतंत्र को वरीयता (भारत 70, बांग्लादेश 69);
और लोकतंत्र के “अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे” — वैधता, गरिमा, टकराव-प्रबंधन, गलती-सुधार — तानाशाही में नहीं मिलते।
निष्कर्ष ★ विकास के नाम पर लोकतंत्र छोड़ना घाटे का सौदा है — विकास दोनों में लगभग बराबर, पर बाक़ी सब कुछ केवल लोकतंत्र में है।
6★★“लोकतंत्र की जाँच-परख कभी ख़त्म नहीं होती” — इस कथन की व्याख्या कीजिए।
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“वह एक जाँच पर खरा उतरे तो अगली जाँच आ जाती है। लोगों को जब लोकतंत्र से थोड़ा लाभ मिल जाता है तो वे और लाभों की माँग करने लगते हैं” — उम्मीदों का बढ़ते जाना ही लोकतंत्र की प्रकृति है;
लोग लोकतंत्र के कामकाज के बारे में पूछने पर “अपनी अन्य अपेक्षाओं का पुलिंदा” खोल देते हैं और “शिकायतों का अंबार” लगा देते हैं;
★★पर यही सफलता है — “शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है। इससे पता चलता है कि लोग सचेत हो गए हैं और वे सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने लगे हैं”;
“लोकतंत्र के कामकाज से लोगों का असंतोष जताना लोकतंत्र की सफलता का ही तो गान है — साथ ही यह लोगों के प्रजा से नागरिक बनने की गवाही भी देता है”;
प्रमाण — “आज अधिकांश लोग मानते हैं कि सरकार की चाल-ढाल पर उनके वोट से असर पड़ता है” (भारत 67, नेपाल 75, द.एशिया 65) — और नन्नू जैसे नागरिक इस भरोसे को व्यवहार में उतारते हैं।
एक वाक्य में ★“प्रजा चुप रहती है — नागरिक सवाल पूछता है। और लोकतंत्र वही व्यवस्था है जो सवाल पूछने का हक़ ही नहीं, साधन भी देती है।”
7लोकतंत्र के परिणामों का समग्र मूल्यांकन कीजिए — वह कहाँ सफल है, कहाँ पीछे?
उत्तर देखिए
(00-मास्टर का तुलन-पत्र पाँचों खातों सहित — हर खाते में उम्मीद, हक़ीक़त और किताब का फ़ैसला; अंत में —)
निष्कर्ष ★★ लोकतंत्र धीमा है पर उसके फ़ैसले टिकते हैं; संवृद्धि में थोड़ा पीछे पर गरीब देशों में बराबर; असमानता घटाने में असफल पर राजनीतिक बराबरी में सफल; विविधता सँभालने और गरिमा देने में सबसे आगे; और वैधता में निर्विवाद विजेता — क्योंकि “लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन व्यवस्था है।” और चूँकि “लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है” — उसका अंतिम परिणाम वही होगा जो उसके नागरिक उससे हासिल करेंगे।