RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार · कुल 60 प्रश्न
खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
1दुनिया के कितने देशों में संघीय शासन व्यवस्था है?
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सही उत्तर: (ब) 25
2इन देशों में दुनिया की कितनी जनसंख्या रहती है?
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सही उत्तर: (स) 40 प्रतिशत
3बेल्जियम एकात्मक से संघीय व्यवस्था में कब बदला?
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सही उत्तर: (स) 1993
4निम्न में से कौन-सा देश “साथ आकर बने संघ” का उदाहरण है?
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सही उत्तर: (द) संयुक्त राज्य अमरीका
5प्रतिरक्षा किस सूची का विषय है?
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सही उत्तर: (अ) संघ सूची
6पुलिस किस सूची का विषय है?
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सही उत्तर: (ब) राज्य सूची
7शिक्षा किस सूची में आती है?
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सही उत्तर: (स) समवर्ती सूची
8अवशिष्ट (“बाकी बचे”) विषय किसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं?
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सही उत्तर: (ब) केंद्र सरकार
9समवर्ती सूची में केंद्र और राज्य के क़ानूनों में टकराव हो तो कौन-सा मान्य होता है?
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सही उत्तर: (ब) केंद्र का
10असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम को विशेष शक्तियाँ किस अनुच्छेद के तहत मिली हैं?
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सही उत्तर: (ब) अनुच्छेद 371
11इनमें से कौन केंद्र शासित प्रदेश है?
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सही उत्तर: (स) चंडीगढ़
12राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट कब लागू की गई?
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सही उत्तर: (ब) 1 नवंबर 1956
13संविधान के अनुसार सरकारी कामकाज में अंग्रेज़ी का प्रयोग कब बंद हो जाना चाहिए था?
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सही उत्तर: (स) 1965
14भारत की राष्ट्रभाषा कौन-सी है?
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सही उत्तर: (द) किसी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया
15संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएँ हैं?
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सही उत्तर: (स) 22
162011 की जनगणना के अनुसार हिंदी कितने प्रतिशत लोगों की मातृभाषा है?
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सही उत्तर: (स) लगभग 44 प्रतिशत
17विकेंद्रीकरण वाला संविधान संशोधन कब हुआ?
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सही उत्तर: (स) 1992
18स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए कितने पद आरक्षित हैं?
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सही उत्तर: (ब) कम से कम एक तिहाई
19नगरनिगम के राजनीतिक प्रधान को क्या कहते हैं?
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सही उत्तर: (स) मेयर
20स्थानीय निकायों के लिए भारत में कितने लोगों का चुनाव होता है?
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सही उत्तर: (स) 36 लाख
खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
1संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता ______ और उसकी विभिन्न ______ के बीच बँट जाती है।
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संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केंद्रीय प्राधिकार और उसकी विभिन्न आनुषंगिक इकाइयों के बीच बँट जाती है।
2______ व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं।
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एकात्मक व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं।
3भारतीय संविधान ने भारत को ______ घोषित किया।
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भारतीय संविधान ने भारत को राज्यों का संघ घोषित किया।
4समवर्ती सूची में ______ जैसे विषय हैं।
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समवर्ती सूची में शिक्षा, वन, मज़दूर-संघ, विवाह, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे विषय हैं।
5संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में ______ बहुमत और कम से कम ______ राज्यों की मंज़ूरी चाहिए।
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संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों की मंज़ूरी चाहिए।
6जनसंख्या के हिसाब से ______ रूस से भी बड़ा है और ______ लगभग जर्मनी के बराबर।
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जनसंख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश रूस से भी बड़ा है और महाराष्ट्र लगभग जर्मनी के बराबर।
7______ के दशक के बाद देश के अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ और केंद्र में ______ सरकार का दौर शुरू हुआ।
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1990 के दशक के बाद देश के अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ और केंद्र में गठबंधन सरकार का दौर शुरू हुआ।
8हर राज्य में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए ______ नामक स्वतंत्र संस्था बनाई गई है।
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हर राज्य में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग नामक स्वतंत्र संस्था बनाई गई है।
9ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को ______ कहा जाता है और सदस्यों को ______।
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ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को प्रधान या सरपंच कहा जाता है और सदस्यों को पंच।
10ब्राज़ील के शहर ______ में करीब ______ लोग अपने शहर का बजट बनाने में भागीदारी करते हैं।
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ब्राज़ील के शहर पोर्तो एलेग्रे में करीब 13 लाख लोग अपने शहर का बजट बनाने में भागीदारी करते हैं।
खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न
1संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार राज्य सरकार को आदेश दे सकती है।
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ग़लत
2श्रीलंका में संघीय शासन व्यवस्था है।
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ग़लत (वहाँ “व्यावहारिक रूप से अभी भी एकात्मक” व्यवस्था है)
3भाषा के आधार पर राज्यों के गठन से भारत की एकता मज़बूत हुई।
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सही
41992 से पहले पंचायतें बिल्कुल नहीं थीं।
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ग़लत (थीं, पर उनके पास “न तो अपना कोई अधिकार था न संसाधन”)
5भारत में सभी राज्यों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
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ग़लत (अनुच्छेद 371 के तहत कुछ को विशेष शक्तियाँ हैं)
खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न
1संघवाद क्या है?
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“संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केंद्रीय प्राधिकार और उसकी विभिन्न आनुषंगिक इकाइयों के बीच बँट जाती है।” इसमें आमतौर पर दो स्तर की सरकारें होती हैं — एक पूरे देश के लिए और दूसरी राज्यों के स्तर पर — और “दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना काम करती हैं।”
2एकात्मक शासन व्यवस्था क्या है?
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वह व्यवस्था जिसमें “शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं।” इसमें “केंद्रीय सरकार प्रांतीय या स्थानीय सरकारों को आदेश दे सकती है।” उदाहरण — श्रीलंका।
3अधिकार-क्षेत्र से क्या आशय है?
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“ऐसा दायरा जिस पर किसी का वैधानिक अधिकार हो। यह दायरा भौगोलिक सीमा के अंतर्गत परिभाषित होता है अथवा इसके अंतर्गत कुछ विषयों को भी रखा जा सकता है।”
4समवर्ती सूची क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
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वह सूची जिसमें ऐसे विषय हैं “जो केंद्र के साथ राज्य सरकारों की साझी दिलचस्पी में आते हैं” — इन पर “क़ानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों और केंद्र सरकार, दोनों को ही है।” उदाहरण — शिक्षा और वन (अन्य — मज़दूर-संघ, विवाह, गोद लेना, उत्तराधिकार)।
! पर “जब दोनों के क़ानूनों में टकराव हो तो केंद्र सरकार द्वारा बनाया क़ानून ही मान्य होता है।”
5अवशिष्ट विषय क्या हैं?
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वे विषय जो किसी भी सूची में नहीं आते — जैसे कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर, “क्योंकि ये संविधान बनने के बाद आए।” ★“हमारे संविधान के अनुसार ‘बाकी बचे’ विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में चले जाते हैं।”
6गठबंधन सरकार क्या होती है?
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“एक से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियों द्वारा साथ मिलकर बनाई गई सरकार को गठबंधन सरकार कहते हैं। आम तौर पर गठबंधन में शामिल दल एक राजनीतिक गठजोड़ करते हैं और एक साझा कार्यक्रम स्वीकार करते हैं।”
7विकेंद्रीकरण किसे कहते हैं?
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“जब केंद्र और राज्य सरकार से शक्तियां लेकर स्थानीय सरकारों को दी जाती हैं तो इसे सत्ता का विकेंद्रीकरण कहते हैं।” इसके पीछे सोच यह है कि “अनेक मुद्दों और समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही बढ़िया ढंग से हो सकता है।”
8ग्राम सभा क्या है?
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गाँव के सभी मतदाताओं की सभा। “पंचायतों का काम ग्राम-सभा की देखरेख में चलता है।” इसे “ग्राम-पंचायत का बजट पास करने और इसके कामकाज की समीक्षा के लिए साल में कम से कम दो या तीन बार बैठक” करनी होती है।
9ज़िला परिषद में कौन-कौन सदस्य होते हैं?
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अधिकांश सदस्यों का चुनाव होता है; साथ ही “उस ज़िले से लोक सभा और विधान सभा के लिए चुने गए सांसद और विधायक तथा ज़िला स्तर की संस्थाओं के कुछ अधिकारी भी सदस्य के रूप में होते हैं।” ज़िला परिषद का प्रमुख इस परिषद का राजनीतिक प्रधान होता है।
10भारत की भाषा-नीति की दो मुख्य बातें बताइए।
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“हमारे संविधान में किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया।” हिंदी को राजभाषा माना गया, और 22 भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा मिला।
अंग्रेज़ी का प्रयोग 1965 में बंद होना था, पर ग़ैर-हिंदी भाषी राज्यों की माँग पर केंद्र ने “हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी को राजकीय कामों में प्रयोग की अनुमति देकर इस विवाद को सुलझाया।”
खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न
1संघीय व्यवस्था की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
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“यहाँ सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है।”
“अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं पर कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार-क्षेत्र होता है।”
“विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार-क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं इसलिए संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और प्राधिकार की गारंटी और सुरक्षा देता है।”
(अन्य — मौलिक प्रावधान अकेले नहीं बदले जा सकते; अदालतों को व्याख्या का अधिकार; वित्तीय स्वायत्तता; और दोहरे उद्देश्य — “देश की एकता की सुरक्षा… तथा क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान।”)
2संघ बनने के दो तरीक़ों में अंतर बताइए।
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(क) “साथ आकर संघ बनाना” — “दो या अधिक स्वतंत्र राष्ट्रों को साथ लाकर एक बड़ी इकाई गठित” करना; इसमें राष्ट्र “अपनी संप्रभुता को साथ करते हैं, अपनी अलग-अलग पहचान को भी बनाए रखते हैं”। उदाहरण — अमरीका, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया। यहाँ “प्रांतों को समान अधिकार होता है और वे केंद्र के बरक्स ज़्यादा ताकतवर होते हैं।”
(ख) “बड़े देश द्वारा राज्यों का गठन” — बड़ा देश “अपनी आंतरिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों का गठन” करता है और फिर सत्ता बाँटता है। उदाहरण — भारत, बेल्जियम, स्पेन। यहाँ “राज्यों के बरक्स केंद्र सरकार ज़्यादा ताकतवर हुआ करती है”, और “विशेष स्थिति में किसी-किसी प्रांत को विशेष अधिकार भी दिए जाते हैं।”
3भारतीय संविधान में विधायी अधिकारों का बँटवारा किस तरह किया गया है?
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तीन सूचियों में —
संघ सूची — प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, बैंकिंग, संचार और मुद्रा जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय; “पूरे देश के लिए इन मामलों में एक तरह की नीतियों की ज़रूरत है”, इसलिए क़ानून बनाने का अधिकार सिर्फ़ केंद्र को।
राज्य सूची — पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई जैसे प्रांतीय और स्थानीय महत्व के विषय; क़ानून सिर्फ़ राज्य सरकार बना सकती है।
समवर्ती सूची — शिक्षा, वन, मज़दूर-संघ, विवाह, गोद लेना और उत्तराधिकार; क़ानून दोनों बना सकते हैं, पर टकराव पर केंद्र का क़ानून मान्य।
★और अवशिष्ट विषय — जो किसी सूची में नहीं, वे केंद्र सरकार के पास जाते हैं।
4“भारतीय संघ के सारे राज्यों को बराबर अधिकार नहीं हैं” — समझाइए।
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असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम “अपनी विशिष्ट सामाजिक तथा ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण” अनुच्छेद 371 के तहत विशेष शक्तियों का लाभ उठाते हैं — ये शक्तियाँ “उनकी संस्कृति और सरकारी सेवाओं में अधिमान्य रोज़गार के भूमि अधिकारों के संरक्षण” के लिए उपयोगी हैं।
दूसरी ओर चंडीगढ़, लक्षद्वीप और दिल्ली जैसे छोटे इलाक़े केंद्र शासित प्रदेश हैं; “इन क्षेत्रों को राज्यों वाले अधिकार नहीं हैं। इन इलाक़ों का शासन चलाने का विशेष अधिकार केंद्र सरकार को प्राप्त है।”
यह इसलिए है क्योंकि भारत “सबको साथ लेकर” चलने वाली श्रेणी का संघ है, और “ऐसी व्यवस्थाओं में साथी इकाइयों को बराबर अधिकार नहीं मिलते।”
5भाषा के आधार पर राज्यों के गठन से भारत को क्या लाभ हुआ?
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जब यह बात उठी तो “कई राष्ट्रीय नेताओं को डर था कि इससे देश टूट जाएगा”, और केंद्र ने पुनर्गठन कुछ समय के लिए टाल भी दिया।
★पर “हमारा अनुभव बताता है कि भाषावार राज्य बनाने से देश ज़्यादा एकीकृत और मज़बूत हुआ। इससे प्रशासन भी पहले की अपेक्षा कहीं ज़्यादा सुविधाजनक हो गया है।”
इतिहासकार रामचंद्र गुहा के शब्दों में — “भारत की एकता को कमज़ोर करने की जगह भाषा के आधार पर गठित राज्यों ने इसकी एकता को मज़बूत करने में मदद की है।” एक व्यक्ति “कन्नड़ और भारतीय” जैसी दो-दो पहचानों के साथ आसानी से जीता है; और “भाषावार राज्यों के गठन ने भारत को एक भयावह स्थिति से बचा लिया।”
6भारत की भाषा-नीति ने हमें श्रीलंका जैसी स्थिति से कैसे बचाया?
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श्रीलंका में 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाकर तमिल को दरकिनार कर दिया गया, और उसका अंत गृहयुद्ध में हुआ।
भारत में इसके उलट — “हमारे संविधान में किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया”; 22 भाषाओं को अनुसूचित दर्जा मिला; केंद्र की परीक्षा किसी भी अनुसूचित भाषा में दी जा सकती है; और राज्यों की अपनी राजभाषाएँ हैं।
जब 1965 में अंग्रेज़ी बंद होनी थी और “तमिलनाडु में तो इस माँग ने उग्र रूप भी ले लिया था”, तब केंद्र सरकार ने “हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी को राजकीय कामों में प्रयोग की अनुमति देकर इस विवाद को सुलझाया।”
★किताब का निष्कर्ष — “बढ़ावा देने का मतलब यह नहीं कि केंद्र सरकार उन राज्यों पर भी हिंदी को थोप सकती है जहाँ लोग कोई और भाषा बोलते हैं। भारतीय नेताओं ने इस मामले में जो लचीला रुख अपनाया उसी से हम श्रीलंका जैसी स्थिति में पहुँचने से बच गए।”
71992 के संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधान बताइए।
उत्तर देखिए
“अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।”
“निर्वाचित स्वशासी निकायों के सदस्य तथा पदाधिकारियों के पदों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं।”
★“कम से कम एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।”
“हर राज्य में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग नामक स्वतंत्र संस्था का गठन किया गया है।”
“राज्य सरकारों को अपने राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा इन स्थानीय स्वशासी निकायों को देना पड़ता है”, यद्यपि “सत्ता में भागीदारी की प्रकृति हर राज्य में अलग-अलग है।”
8ब्राज़ील के पोर्तो एलेग्रे के प्रयोग का वर्णन कीजिए।
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वहाँ “नगर-परिषद के समांतर एक संगठन खड़ा किया गया और अपने शहर के बारे में वास्तविक फ़ैसले करने का अधिकार स्थानीय निवासियों को दिया गया।”
शहर के करीब 13 लाख लोग अपने शहर का बजट तैयार करने में भागीदारी करते हैं। शहर उप-क्षेत्रों में बँटा है; हर उप-क्षेत्र की बैठक “ग्राम सभा की तरह” होती है और उसमें इलाक़े के सभी नागरिक भाग ले सकते हैं। प्रस्ताव नगरपालिका के सामने पेश किए जाते हैं, “जो अंतिम फ़ैसला लेती है।” हर साल करीब 20,000 लोग इस प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं।
★नतीजा — “यह सुनिश्चित हो गया है कि बजट को सिर्फ़ अमीर लोगों की बस्तियों में ही खर्च नहीं किया जाएगा। अब सभी गरीब बस्तियों तक बसें जाती हैं और पुनर्वास का इंतज़ाम किए बगैर भवन-निर्माता झुग्गी वालों को उजाड़ नहीं सकते।” भारत में भी केरल के कुछ इलाक़ों में ऐसे प्रयोग हुए हैं।
खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 7 प्रश्न
1★★संघीय व्यवस्था की सात विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
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“यहाँ सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है।”
“अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं पर कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार-क्षेत्र होता है।”
“विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार-क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं इसलिए संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और प्राधिकार की गारंटी और सुरक्षा देता है।”
“संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलाव दोनों स्तर की सरकारों की सहमति से ही हो सकते हैं।”
“अदालतों को संविधान और विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार है।” विवाद की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय निर्णायक भूमिका निभाता है।
“वित्तीय स्वायत्तता निश्चित करने के लिए विभिन्न स्तर की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत निर्धारित हैं।”
★“संघीय शासन व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य हैं: देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना तथा इसके साथ ही क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान करना।”
★और दो बातें जो लिखी नहीं जा सकतीं पर सबसे ज़रूरी हैं — “आपसी भरोसा और साथ रहने पर सहमति।”
2★संघीय और एकात्मक शासन व्यवस्था में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
| आधार | एकात्मक व्यवस्था | संघीय व्यवस्था |
|---|---|---|
| सरकार के स्तर | “शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं” | दो या अधिक स्तर; दोनों “अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना काम करती हैं” |
| आदेश देने का अधिकार | “केंद्रीय सरकार प्रांतीय या स्थानीय सरकारों को आदेश दे सकती है” | “केंद्रीय सरकार राज्य सरकार को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती” |
| शक्तियों का स्रोत | सारी शक्तियाँ केंद्र के पास; नीचे की इकाइयों को वही देता है | “राज्य सरकारों के पास अपनी शक्तियाँ होती हैं” |
| जवाबदेही | नीचे की सरकार ऊपर वाली के प्रति जवाबदेह | “इसके लिए वह केंद्रीय सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होती… दोनों ही सरकारें अपने-अपने स्तर पर लोगों को जवाबदेह होती हैं” |
| संविधान | केंद्र अकेले बदल सकता है | “मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती” |
| अदालत की भूमिका | सीमित | “सर्वोच्च न्यायालय निर्णायक भूमिका निभाता है” |
| उदाहरण | श्रीलंका (“व्यावहारिक रूप से अभी भी एकात्मक”) | भारत, बेल्जियम (1993 से), अमरीका |
★एक वाक्य में — “एकात्मक में नीचे वाली सरकार ऊपर वाली को जवाब देती है; संघीय में दोनों सीधे जनता को जवाब देती हैं।”
3★★“भारत में संघीय व्यवस्था की सफलता का श्रेय केवल संविधान को नहीं जाता” — इस कथन की व्याख्या कीजिए।
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किताब का अपना वाक्य है — “संघीय व्यवस्था के कारगर कामकाज के लिए संवैधानिक प्रावधान ज़रूरी हैं पर इतना ही पर्याप्त नहीं है… भारत में संघीय व्यवस्था की सफलता का मुख्य श्रेय यहाँ की लोकतांत्रिक राजनीति के चरित्र को देना होगा।”
इसे तीन उदाहरणों से समझा जा सकता है
भाषायी राज्य —
1950 के दशक में सीमाएँ बदलकर राज्य बनाए गए, यद्यपि “कई राष्ट्रीय नेताओं को डर था कि इससे देश टूट जाएगा।” पर नतीजा उल्टा निकला — “भाषावार राज्य बनाने से देश ज़्यादा एकीकृत और मज़बूत हुआ।” यह किसी संविधान संशोधन से नहीं, राजनीतिक समझदारी से हुआ।
भाषा-नीति —
1965 में अंग्रेज़ी बंद होनी थी, पर ग़ैर-हिंदी भाषी राज्यों की माँग पर केंद्र ने “हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी को… अनुमति देकर इस विवाद को सुलझाया।” ★“भारतीय नेताओं ने इस मामले में जो लचीला रुख अपनाया उसी से हम श्रीलंका जैसी स्थिति में पहुँचने से बच गए।”
केंद्र-राज्य संबंध —
पहले “एक ही पार्टी का केंद्र और अधिकांश राज्यों में शासन” था, इसलिए “राज्य सरकारों ने स्वायत्त संघीय इकाई के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं किया”; और अलग दल होने पर केंद्र “संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को भंग कर देती थी।” पर 1990 के बाद क्षेत्रीय दलों के उदय और गठबंधन सरकारों से “सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी”, और सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फ़ैसले से “राज्य सरकार को मनमाने ढंग से भंग करना केंद्र सरकार के लिए मुश्किल हो गया।”
निष्कर्ष ★ संविधान 1950 से ही संघीय था, पर संघवाद व्यवहार में 1990 के बाद मज़बूत हुआ — और उसे लाने वाला कोई संशोधन नहीं, चुनावी नतीजे और राजनीतिक संस्कृति थी।
4भारत में विकेंद्रीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी और 1992 में क्या बदलाव आए?
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क्यों ज़रूरी
“भारत जैसे विशाल देश में सिर्फ़ दो स्तर की शासन व्यवस्था से ही बढ़िया शासन नहीं चल सकता।” “भारत के प्रांत यूरोप के स्वतंत्र देशों से भी बड़े हैं” — उत्तर प्रदेश रूस से बड़ा और महाराष्ट्र लगभग जर्मनी के बराबर; और राज्य ख़ुद भी “अंदरूनी तौर पर विविधताओं से भरे” हैं।
“अनेक मुद्दों और समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही बढ़िया ढंग से हो सकता है”, क्योंकि “लोगों को अपने इलाक़े की समस्याओं की बेहतर समझ होती है” और यह भी पता होता है कि “पैसा कहाँ खर्च किया जाए।”
★“स्थानीय सरकारों की स्थापना स्व-शासन के लोकतांत्रिक सिद्धांत को वास्तविक बनाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है।”
! 1992 से पहले की हालत — पंचायतें और नगरपालिकाएँ थीं, पर “राज्य सरकारों के सीधे नियंत्रण में”; “नियमित ढंग से चुनाव भी नहीं कराए जाते थे”; “इनके पास न तो अपना कोई अधिकार था न संसाधन”; इसलिए “विकेंद्रीकरण नाम मात्र का हुआ था।”
1992 के पाँच बदलाव ★ (1) चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता; (2) अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण; (3) कम से कम एक तिहाई पद महिलाओं के लिए; (4) राज्य चुनाव आयोग का गठन; (5) राज्यों को राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा देना पड़ता है।
5★भारत में स्थानीय शासन के ढाँचे का वर्णन कीजिए।
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गाँव में — पंचायती राज
ग्राम पंचायत — “एक तरह की परिषद है जिसमें कई सदस्य और एक अध्यक्ष होता है।” सदस्य वार्डों से चुने जाते हैं और पंच कहलाते हैं; अध्यक्ष प्रधान या सरपंच कहलाता है। इनका चुनाव “गाँव अथवा वार्ड में रहने वाले सभी वयस्क लोग मतदान के ज़रिए” करते हैं।
★ग्राम सभा — गाँव के सभी मतदाता इसके सदस्य होते हैं; “पंचायतों का काम ग्राम-सभा की देखरेख में चलता है”; इसे “बजट पास करने और कामकाज की समीक्षा के लिए साल में कम से कम दो या तीन बार बैठक” करनी होती है।
पंचायत समिति — “कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर” बनती है; इसे मंडल या प्रखंड स्तरीय पंचायत भी कहते हैं; सदस्यों का चुनाव “उस इलाक़े के सभी पंचायत सदस्य” करते हैं।
ज़िला परिषद — ज़िले की सभी पंचायत समितियों को मिलाकर; अधिकांश सदस्यों का चुनाव होता है, और उस ज़िले के सांसद, विधायक तथा कुछ अधिकारी भी सदस्य होते हैं; ज़िला परिषद का प्रमुख इसका राजनीतिक प्रधान होता है।
शहरों मेंनगरपालिका, और बड़े शहरों में नगरनिगम; दोनों का कामकाज निर्वाचित प्रतिनिधि करते हैं। नगरपालिका प्रमुख नगरपालिका का राजनीतिक प्रधान होता है, और नगरनिगम के ऐसे पदाधिकारी को मेयर कहते हैं।
6★★भारत में विकेंद्रीकरण की उपलब्धियों और कमियों की समीक्षा कीजिए।
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उपलब्धियाँ
★“स्थानीय सरकारों की यह नयी व्यवस्था दुनिया में लोकतंत्र का अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग है।”
“नगरपालिकाओं और ग्राम-पंचायतों के लिए करीब 36 लाख लोगों का चुनाव होता है। यह संख्या ही अपने आप में दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से ज़्यादा है।”
“स्थानीय सरकारों को संवैधानिक दर्जा दिए जाने से हमारे यहाँ लोकतंत्र की जड़ें और मज़बूत हुई हैं।”
★“इसने महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ ही हमारे लोकतंत्र में उनकी आवाज़ को मज़बूत किया है” — क्योंकि कम से कम एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
अब चुनाव नियमित रूप से होते हैं और “लोग बड़े उत्साह से इनमें हिस्सा भी लेते हैं।”
! कमियाँ —
“ग्राम सभाओं की बैठकें नियमित रूप से नहीं होतीं” — यानी जिस संस्था को पंचायत की निगरानी करनी है, वही निष्क्रिय है।
★“अधिकांश राज्य सरकारों ने स्थानीय सरकारों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए हैं”, और “सत्ता में भागीदारी की प्रकृति हर राज्य में अलग-अलग है।”
“इस प्रकार हम स्वशासन की आदर्श स्थिति से काफ़ी दूर हैं।”
निष्कर्ष ★ ढाँचा बन गया और भागीदारी भी बढ़ी, पर अधिकार और संसाधन अब भी अधूरे हैं — इसलिए विकेंद्रीकरण शुरू तो हुआ, पूरा नहीं हुआ।
7भारत की संघीय व्यवस्था बेल्जियम से किन बातों में मिलती है और किनमें अलग है?
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समानताएँ
दोनों “बड़े देश द्वारा राज्यों के गठन” वाली श्रेणी के संघ हैं — यानी दोनों में पहले से मौजूद देश के भीतर सत्ता बाँटी गई (बेल्जियम में 1993 में)।
दोनों में सत्ता का बँटवारा संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है और क्षेत्रीय/राज्य सरकारें केंद्र के अधीन नहीं हैं।
दोनों में तीसरे स्तर की सरकार मौजूद है।
दोनों ने विविधता को दबाने के बजाय स्वीकार करके देश को जोड़े रखा।
अंतर
★बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार “सामुदायिक सरकार” है, जिसे भाषा के आधार पर चुना जाता है — “चाहे वे जहाँ भी रहते हों।” भारत में तीसरा स्तर स्थानीय शासन (पंचायत और नगरपालिका) है, जो भाषा नहीं, इलाक़े के आधार पर बनता है।
बेल्जियम में केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहती है और कुछ क़ानूनों के लिए दोनों भाषायी समूहों का बहुमत ज़रूरी है — भारत में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं।
भारत में अवशिष्ट अधिकार केंद्र के पास हैं और कुछ राज्यों को अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है — यह भारत की अपनी विशेषता है।