Chapter 4राजनीतिक दल

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RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार · कुल 60 प्रश्न


खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

1राजनीतिक दल का मुख्य उद्देश्य होता है

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सही उत्तर: (ब) चुनाव लड़ना और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करना

2राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्सों में शामिल नहीं है

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सही उत्तर: (द) न्यायाधीश

3भारत में उम्मीदवारों का चुनाव कौन करता है?

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सही उत्तर: (ब) दलों के नेता

4चुनाव आयोग में पंजीकृत दलों की संख्या (किताब के अनुसार)

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सही उत्तर: (स) 750 से ज़्यादा

5एकदलीय व्यवस्था का उदाहरण है

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सही उत्तर: (स) चीन

6दो दलीय व्यवस्था का उदाहरण है

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सही उत्तर: (ब) अमरीका और ब्रिटेन

72004 के संसदीय चुनाव में भारत के तीन प्रमुख गठबंधनों में शामिल नहीं था

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सही उत्तर: (द) संयुक्त मोर्चा

8राज्यीय दल की मान्यता के लिए विधानसभा चुनाव में चाहिए

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सही उत्तर: (ब) 6% वोट + 2 सीटें

9राष्ट्रीय दल की मान्यता के लिए लोकसभा में कम से कम कितनी सीटें चाहिए?

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सही उत्तर: (स) 4

102023 की अधिसूचना के अनुसार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों की संख्या

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सही उत्तर: (स) छः

11बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक

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सही उत्तर: (अ) कांशीराम

12भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धांत

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सही उत्तर: (स) समग्र मानवतावाद

13इंडियन नेशनल काँग्रेस का गठन हुआ

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सही उत्तर: (ब) 1885

14सीपीआई-एम की स्थापना हुई

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सही उत्तर: (स) 1964

15आम आदमी पार्टी का गठन हुआ

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सही उत्तर: (स) 26 नवंबर 2012

16नेशनल पीपुल्स पार्टी के संस्थापक

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सही उत्तर: (ब) पी.ए. संगमा

17भारतीय जनसंघ का गठन किसने किया था?

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सही उत्तर: (ब) श्यामा प्रसाद मुखर्जी

18सीपीआई-एम ने पश्चिम बंगाल में लगातार कितने वर्षों तक शासन किया?

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सही उत्तर: (स) 34

19दल-बदल करने वाले सांसद या विधायक को

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सही उत्तर: (ब) अपनी सीट गँवानी होगी

20“खराब राजनीति का समाधान है —”

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सही उत्तर: (ब) ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति

खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1अधिकतर आम नागरिकों के लिए लोकतंत्र का मतलब ______ ही है।

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अधिकतर आम नागरिकों के लिए लोकतंत्र का मतलब राजनीतिक दल ही है।

2चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता सँभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को ______ कहते हैं।

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चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता सँभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को राजनीतिक दल कहते हैं।

3राजनीतिक दल ______ की एक अनिवार्य शर्त हैं।

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राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं।

4चुनाव हारने वाले दल ______ की भूमिका निभाते हैं।

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चुनाव हारने वाले दल विपक्ष (विरोधी पक्ष) की भूमिका निभाते हैं।

5मान्यता प्राप्त दलों को आयोग ______ देता है।

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मान्यता प्राप्त दलों को आयोग अलग चुनाव चिह्न देता है।

6एनपीपी ______ की पहली पार्टी है जिसे राष्ट्रीय दर्जा मिला।

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एनपीपी पूर्वोत्तर भारत की पहली पार्टी है जिसे राष्ट्रीय दर्जा मिला।

7बसपा की प्रेरणा ______ और ______ के विचार हैं।

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बसपा की प्रेरणा साहू महाराज, महात्मा फुले, पेरियार और बाबा साहेब आंबेडकर के विचार हैं।

81996 के बाद से लगभग प्रत्येक ______ को गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।

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1996 के बाद से लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।

9उम्मीदवारों को संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा ______ से देना अनिवार्य है।

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उम्मीदवारों को संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा शपथपत्र से देना अनिवार्य है।

10लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की ______ से तय होती है।

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लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है।

खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न

1एकदलीय व्यवस्था एक अच्छा लोकतांत्रिक विकल्प है।

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ग़लत

2भारत में राजनीतिक दलों की सदस्यता का अनुपात कई विकसित देशों से ज़्यादा है।

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सही

3क्षेत्रीय दलों के उभार से भारत में संघवाद और लोकतंत्र कमज़ोर हुए हैं।

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ग़लत (मज़बूत हुए)

4दल-बदल कानून से पार्टी में विरोध का स्वर उठाना आसान हो गया है।

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ग़लत (और मुश्किल)

5शपथपत्र की सूचनाओं की जाँच की कोई व्यवस्था नहीं है।

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सही

खण्ड घ — अति लघूत्तरीय (2 अंक) — 10 प्रश्न

1राजनीतिक दल की परिभाषा दीजिए।

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“लोगों का एक ऐसा संगठित समूह जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है” और “समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर… नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।”

2राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्से कौन-से हैं?

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नेता · सक्रिय सदस्य · अनुयायी या समर्थक।

3शासक दल किसे कहते हैं?

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“जिस दल का शासन हो यानी जिसकी सरकार बनी हो।”

4दल-बदल का क्या अर्थ है?

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“विधायिका के लिए किसी दल-विशेष से निर्वाचित होने वाले प्रतिनिधि का उस दल को छोड़कर किसी अन्य दल में चले जाना।” नए कानून के अनुसार ऐसे सांसद/विधायक को अपनी सीट गँवानी होगी।

5शपथपत्र क्या है?

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“किसी अधिकारी को सौंपा गया एक दस्तावेज़। इसमें कोई व्यक्ति अपने बारे में निजी सूचनाएँ देता है और उनके सही होने के बारे में शपथ उठाता है।” उम्मीदवारों के लिए संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना अनिवार्य है।

6मान्यता प्राप्त दल किसे कहते हैं?

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जिन्हें आयोग “अलग चुनाव चिह्न” जैसी विशेष सुविधाएँ देता है — “जिसका प्रयोग पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार ही कर सकता है।”

7राष्ट्रीय दल की मान्यता की शर्तें लिखिए।

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“लोकसभा-चुनाव में पड़े कुल वोट का अथवा चार राज्यों के विधान सभाई चुनाव में पड़े कुल वोटों का 6 प्रतिशत हासिल करे और लोकसभा के चुनाव में कम से कम चार सीटों पर जीत दर्ज करे।”

8गठबंधन या मोर्चा किसे कहते हैं?

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“जब किसी बहुदलीय व्यवस्था में अनेक पार्टियाँ चुनाव लड़ने और सत्ता में आने के लिए आपस में हाथ मिला लेती हैं।” उदाहरण — 2004 के राजग, संप्रग और वाम मोर्चा।

9विपक्षी दल की भूमिका क्या है?

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“सरकार की गलत नीतियों और असफलताओं की आलोचना करने के साथ-साथ वे अपनी अलग राय भी रखते हैं” और “सरकार के खिलाफ़ आम जनता को भी गोलबंद करते हैं।”

10वंशवाद की चुनौती क्या है?

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“अनेक दलों में शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं। यह दल के अन्य सदस्यों के साथ अन्याय है… इससे अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं।”

खण्ड ङ — लघूत्तरीय (3 अंक) — 8 प्रश्न

1दलों के बिना लोकतंत्र की क्या स्थिति होगी?

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1

“सारे उम्मीदवार स्वतंत्र या निर्दलीय होंगे। तब, इनमें से कोई भी बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से चुनावी वायदे करने की स्थिति में नहीं होगा।”

2

“सरकार बन जाएगी पर उसकी उपयोगिता संदिग्ध होगी।”

3

★“निर्वाचित प्रतिनिधि सिर्फ़ अपने निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए कामों के लिए जवाबदेह होंगे। लेकिन, देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा।”

प्रमाण — गैर-दलीय पंचायत चुनाव, जहाँ “पूरा गाँव कई खेमों में बँट जाता है और हर खेमा… अपने उम्मीदवारों का ‘पैनल’ उतारता है। राजनीतिक दल भी ठीक यही काम करते हैं।”

2तीन प्रकार की दलीय व्यवस्थाओं की तुलना कीजिए।

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एकदलीय — “सिर्फ़ एक ही दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति” (चीन); ! “हम एकदलीय व्यवस्था को अच्छा विकल्प नहीं मान सकते क्योंकि यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है।”

दो दलीय — “सत्ता आमतौर पर दो मुख्य दलों के बीच ही बदलती रहती है” (अमरीका, ब्रिटेन)।

बहुदलीय — दो से ज़्यादा दलों के लिए “अपने दम पर या दूसरों से गठबंधन करके सत्ता में आने का ठीक-ठाक अवसर” (भारत); यह “घालमेल वाली” लग सकती है पर “विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल जाता है।”

3“दलीय व्यवस्था का चुनाव करना किसी मुल्क के हाथ में नहीं है” — समझाइए।

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किताब कहती है — “यह एक लंबे दौर के कामकाज के बाद खुद विकसित होती है और इसमें समाज की प्रकृति, इसके राजनीतिक विभाजन, राजनीति का इतिहास और इसकी चुनाव प्रणाली — सभी चीज़ें अपनी भूमिका निभाती हैं। इसे बहुत जल्दी बदला नहीं जा सकता।”

भारत का उदाहरण — “अगर भारत में बहुदलीय व्यवस्था है तो उसका कारण यह है कि दो-तीन पार्टियाँ इतने बड़े मुल्क की सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम हैं।”

★निष्कर्ष — “हर मुल्क और हर स्थिति में कोई एक ही आदर्श प्रणाली चले यह संभव नहीं है।”

4राजनीतिक दलों में जन-भागीदारी की स्थिति क्या है?

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1

! भरोसा — “दक्षिण एशिया की जनता राजनीतिक दलों पर बहुत भरोसा नहीं करती… पूरी दुनिया में राजनीतिक दल ही एक ऐसी संस्था है जिस पर लोग सबसे कम भरोसा करते हैं।”

2

★भागीदारी — “खुद को किसी राजनीतिक दल का सदस्य बताने वाले भारतीयों का अनुपात कनाडा, जापान, स्पेन और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों से भी ज़्यादा है।”

3

प्रवृत्ति — “पिछले तीन दशकों के दौरान… सदस्यता का अनुपात धीरे-धीरे बढ़ता गया है। खुद को किसी दल का करीबी बताने वालों का अनुपात भी बढ़ा है।”

5मान्यता प्राप्त राज्यीय और राष्ट्रीय दल बनने की शर्तें लिखिए।

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हर पार्टी को निर्वाचन आयोग में पंजीकरण कराना पड़ता है; आयोग बड़े दलों को अलग चुनाव चिह्न जैसी सुविधाएँ देता है — ये ‘मान्यता प्राप्त’ दल कहलाते हैं।

राज्यीय दल — विधानसभा चुनाव के कुल मतों का 6 फ़ीसदी + कम से कम 2 सीटें।

राष्ट्रीय दल — लोकसभा के कुल वोट का अथवा चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के कुल वोटों का 6 प्रतिशत + लोकसभा की कम से कम 4 सीटें।

“2023 में जारी… अधिसूचना के अनुसार देश में छः मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं।”

6क्षेत्रीय दलों के उभार ने भारतीय लोकतंत्र को कैसे प्रभावित किया?

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1

“पिछले तीन दशकों में क्षेत्रीय दलों की संख्या और ताकत में वृद्धि हुई है। इससे भारतीय संसद विविधताओं से और भी ज़्यादा संपन्न हुई है।”

2

“2014 तक, किसी एक राष्ट्रीय दल का लोकसभा में बहुमत नहीं रहा। परिणामस्वरूप राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने को मजबूर हुए हैं।”

3

★“1996 के बाद से लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को एक या दूसरी राष्ट्रीय स्तर की गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। इससे हमारे देश में संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं।”

7हो चुके तीन सुधारों को उनकी सीमाओं सहित लिखिए।

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1

दल-बदल कानून — दल बदलने वाले को सीट गँवानी होगी; दल-बदल घटा ! पर “पार्टी में विरोध का कोई स्वर उठाना और भी मुश्किल हो गया है।”

2

शपथपत्र — उच्चतम न्यायालय के आदेश से संपत्ति और आपराधिक मामलों का ब्यौरा अनिवार्य ! पर “सूचनाएँ सही हैं या नहीं, यह जाँच करने की कोई व्यवस्था नहीं।”

3

चुनाव आयोग का आदेश — सांगठनिक चुनाव और आयकर रिटर्न ज़रूरी ! पर “कई बार ऐसा सिर्फ़ खानापूरी करने के लिए होता है।”

8“दलों को ज़रूरत से ज़्यादा नियमों से जकड़ना नुकसानदेह भी हो सकता है” — क्यों?

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किताब कहती है — “हर राजनीतिक समस्या के लिए महज कानूनी समाधान की बात करते हुए हमें सावधान रहना चाहिए… इससे सभी दल कानून को दरकिनार करने का तरीका ढूँढ़ने लगेंगे। इसके अलावा राजनीतिक दल खुद ऐसा कानून पास करने पर सहमत नहीं होंगे जिसे वे पसंद नहीं करते।”

★इसीलिए क़ानून के अलावा दो और तरीके ज़रूरी हैं — जनता का दबाव और खुद भागीदारी — क्योंकि “लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है।”

खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक) — 7 प्रश्न

1★★लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की सात भूमिकाओं का वर्णन कीजिए।

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1

चुनाव लड़ना — “अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है”; अमरीका में उम्मीदवार सदस्य-समर्थक चुनते हैं, भारत में दलों के नेता।

2

नीतियाँ और कार्यक्रम — “दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं”; “पार्टियाँ तरह-तरह के विचारों को कुछ बुनियादी राय तक समेट लाती हैं।”

3

कानून-निर्माण में निर्णायक भूमिका — विधायिका के “अधिकतर सदस्य किसी न किसी दल के होते हैं। इस कारण वे अपने दल के नेता के निर्देश पर फ़ैसला करते हैं।”

4

सरकार बनाना और चलाना — “पार्टियाँ नेता चुनती हैं, उनको प्रशिक्षित करती हैं और फिर उन्हें मंत्री बनाती हैं।”

5

★विपक्ष की भूमिका — हारे दल “सरकार की गलत नीतियों और असफलताओं की आलोचना” करते हैं और “सरकार के खिलाफ़ आम जनता को भी गोलबंद करते हैं।”

6

जनमत-निर्माण — “लाखों कार्यकर्ता देश-भर में बिखरे होते हैं”; “दलों द्वारा रखी जाने वाली राय के इर्द-गिर्द ही समाज के लोगों की राय बनती जाती है।”

7

सरकारी मशीनरी और कल्याण कार्यक्रमों तक पहुँच — “साधारण नागरिक के लिए… राजनीतिक कार्यकर्ता से जान-पहचान बनाना… आसान होता है”; और ★“दलों को भी लोगों की माँगों और ज़रूरतों पर ध्यान देना होता है वरना अगले चुनाव में लोग उन्हें धूल चटा सकते हैं।”

2★★राजनीतिक दलों के सामने की चार चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

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1

आंतरिक लोकतंत्र का न होना — “सारी दुनिया में यह प्रवृत्ति बन गई है कि सारी ताकत एक या कुछेक नेताओं के हाथ में सिमट जाती है।” दलों के पास “न सदस्यों की खुली सूची… न नियमित सांगठनिक बैठकें… इनके आंतरिक चुनाव भी नहीं होते।” नतीजा — “जो उनसे असहमत होते हैं उनका पार्टी में टिके रह पाना मुश्किल… नेता से निष्ठा ही ज़्यादा महत्वपूर्ण बन जाती है।”

2

वंशवाद — पारदर्शिता न होने से नेता “अपने ही परिवार के लोगों को आगे बढ़ाते हैं। अनेक दलों में शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं”; इससे “अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं”; और यह प्रवृत्ति “कमोबेश पूरी दुनिया में” है।

3

! पैसा और अपराधी तत्वों की घुसपैठ — “पार्टियों की सारी चिंता चुनाव जीतने की होती है अतः… कोई भी जायज़-नाजायज़ तरीका अपनाने से वे परहेज नहीं करतीं”; “ज़्यादा धन देने वाली कंपनियाँ और अमीर लोग उस पार्टी की नीतियों और फ़ैसलों को भी प्रभावित करते हैं”; कई बार दल “चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का समर्थन” करते हैं।

4

विकल्पहीनता — “हाल के वर्षों में दलों के बीच वैचारिक अंतर कम होता गया है” (जैसे ब्रिटेन की लेबर और कंजरवेटिव पार्टी); भारत में भी “सभी बड़ी पार्टियों के बीच आर्थिक मसलों पर बड़ा कम अंतर”; और “वही थोड़े से नेता हर दल में आते-जाते रहते हैं।”

3राजनीतिक दलों को सुधारने के उपायों की चर्चा कीजिए।

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हो चुके तीन सुधार (सीमाओं सहित) दल-बदल कानून · शपथपत्र · आयोग का आदेश (खण्ड ङ, प्रश्न 7 की तरह)।

तीन सुझाव (1) आंतरिक कामकाज का कानून — “सभी दल अपने सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें, विवाद की स्थिति में एक स्वतंत्र प्राधिकारी को पंच बनाएँ और सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव कराएँ”; (2) ★“दल महिलाओं को एक खास न्यूनतम अनुपात में (करीब एक तिहाई) ज़रूर टिकट दें… प्रमुख पदों पर भी औरतों के लिए आरक्षण”; (3) “चुनाव का खर्च सरकार उठाए” — पेट्रोल-कागज-फोन के रूप में या मतों के अनुपात में नकद।

! चेतावनी — “दलों को ज़रूरत से ज़्यादा नियमों से जकड़ना नुकसानदेह भी हो सकता है।”

दो और तरीके ★★जनता का दबाव (चिट्ठियाँ, प्रचार, आंदोलन; “आम नागरिक, दबाव समूह, आंदोलन और मीडिया”) और खुद शामिल होना — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”

4★“राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं” — सिद्ध कीजिए।

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1

दलों के बिना “कोई भी बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से चुनावी वायदे करने की स्थिति में नहीं होगा” और “देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा” — यानी जवाबदेही ही समाप्त हो जाएगी।

2

गैर-दलीय पंचायत चुनावों का अनुभव — गाँव खेमों में बँटकर ‘पैनल’ उतारता है — दिखाता है कि दल न हों तो उनके जैसे समूह अपने आप बन जाते हैं।

3

“जब समाज बड़े और जटिल हो जाते हैं तब उन्हें विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को समेटने… के लिए किसी माध्यम या एजेंसी की ज़रूरत होती है” — प्रतिनिधियों को “समर्थन, अंकुश, नीतियाँ, उपकरण” दल ही देते हैं।

4

इतिहास का प्रमाण — “करीब 100 साल पहले दुनिया के बस कुछ ही देशों में… दल थे। आज गिनती के ही देश ऐसे हैं जहाँ राजनीतिक दल नहीं हैं” — “चाहे वह देश बड़ा हो या छोटा, नया हो या पुराना, विकसित हो या विकासशील।”

5

और दल सात कार्य करते हैं जो कोई और संस्था नहीं कर सकती — चुनाव से लेकर विपक्ष और जनमत तक।

★इसीलिए — “इस तरह हम कह सकते हैं कि राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं।”

5भारत के किन्हीं तीन राष्ट्रीय दलों का परिचय (किताब के अनुसार) दीजिए।

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(कोई तीन — यहाँ नमूने के तौर पर)

इंडियन नेशनल काँग्रेस1885 में गठित, “दुनिया के सबसे पुराने दलों में से एक।” जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में “भारत को एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का प्रयास”; 1971 तक लगातार और 1980–89 शासन; रुझान “मध्यमार्गी (न वामपंथी न दक्षिणपंथी)”; 2004–2014 संप्रग सरकार का नेतृत्व; 2019 में 19.5% वोट, 52 सीटें।

भारतीय जनता पार्टी पुराने भारतीय जनसंघ (श्यामा प्रसाद मुखर्जी, 1951) को पुनर्जीवित कर 1980 में बनी; प्रेरणा — “भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्य; दीनदयाल उपाध्याय के विचार — समग्र मानवतावाद एवं अंत्योदय”; “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (या हिंदुत्व)” प्रमुख तत्व; समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण पर रोक के पक्ष में; 1998 में राजग के नेता के रूप में सत्ता; 2019 में 303 सीटें — सबसे बड़ा दल।

बहुजन समाज पार्टी1984 में स्व. कांशीराम के नेतृत्व में; “बहुजन समाज” (दलित, आदिवासी, पिछड़ी जातियाँ, धार्मिक अल्पसंख्यक) के लिए “राजनीतिक सत्ता पाने का प्रयास”; प्रेरणा — साहू महाराज, फुले, पेरियार, आंबेडकर; मुख्य आधार उत्तर प्रदेश, जहाँ चार बार सरकार; 2019 में 3.63% वोट, 10 सीटें।

6★भारत की बहुदलीय व्यवस्था के गुण और दोष लिखिए।

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दोष की ओर से “अक्सर बहुदलीय व्यवस्था बहुत घालमेल वाली लगती है और देश को राजनीतिक अस्थिरता की तरफ़ ले जाती है।”

गुण की ओर से “पर इसके साथ ही इस प्रणाली में विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल जाता है।”

भारत के लिए यही उपयुक्त क्यों “दो-तीन पार्टियाँ इतने बड़े मुल्क की सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम हैं” — यह अध्याय 1–2 के विविधता वाले तर्क की ही अगली कड़ी है।

और व्यवहार का प्रमाण क्षेत्रीय दलों के उभार और 1996 के बाद के गठबंधनों से “संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं”; संसद “विविधताओं से और भी ज़्यादा संपन्न” हुई।

निष्कर्ष ★ “हर मुल्क और हर स्थिति में कोई एक ही आदर्श प्रणाली चले यह संभव नहीं है” — भारत के लिए बहुदलीय व्यवस्था उसकी विविधता का स्वाभाविक परिणाम है।

7★★“लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है” — इस कथन की व्याख्या कीजिए।

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1

क़ानूनी सुधारों की सीमा — दल-बदल कानून से विरोध दबा, शपथपत्र की जाँच नहीं, आयोग के आदेश पर खानापूरी — यानी “हर राजनीतिक समस्या के लिए महज कानूनी समाधान” काफ़ी नहीं।

2

इसलिए पहला रास्ता — जनता का दबाव: “यह काम चिट्ठियाँ लिखने, प्रचार करने और आंदोलनों के जरिये किया जा सकता है… अगर दलों को लगे कि सुधार न करने से उनका जनाधार गिरने लगेगा… तो इसे लेकर वे गंभीर होने लगेंगे।”

3

और दूसरा — ★खुद भागीदारी: “सुधार की इच्छा रखने वालों का खुद राजनीतिक दलों में शामिल होना… अगर आम नागरिक खुद राजनीति में हिस्सा न लें और बाहर से ही बातें करते रहें तो सुधार मुश्किल है।”

4

उदाहरण — किताब का ही मोहम्मद यूनुस का प्रसंग: नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने शिकायत करने के बजाय ‘नागरिक शक्ति’ नाम से नया दल बनाकर राजनीति में उतरने का फ़ैसला किया।

निष्कर्ष ★★ “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।” — राजनीति से भागना समाधान नहीं, बेहतर राजनीति में हिस्सा लेना समाधान है।