परीक्षा से एक रात पहले सिर्फ़ यही फ़ाइल पढ़िए। इसमें वही है जो पूछा जाता है।
पूरा अध्याय एक पैराग्राफ़ में
कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में बदलकर अधिक मात्रा में वस्तुएँ बनाना विनिर्माण कहलाता है, और किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है। उद्योगों को पाँच आधारों पर बाँटा जाता है — कच्चा माल, भूमिका, पूँजी, स्वामित्व और भार। कृषि आधारित उद्योगों में वस्त्र (देश का अकेला पूर्ण आत्मनिर्भर उद्योग, पहला 1854 मुंबई), पटसन (हुगली तट, पहला 1855 रिशरा) और चीनी (विश्व में दूसरा, गुड़-खांडसारी में पहला) प्रमुख हैं। खनिज आधारित में लोहा-इस्पात (आधारभूत उद्योग, अनुपात 4:2:1, छोटानागपुर में संकेंद्रित), एल्यूमिनियम (4–6 टन बॉक्साइट से 1 टन धातु), रसायन (GDP का 3%), उर्वरक (पोटाश पूर्णत: आयात), सीमेंट (पहला 1904 चेन्नई), मोटरगाड़ी और इलैक्ट्रोनिक (बेंगलुरु इलैक्ट्रॉनिक राजधानी) आते हैं। परंतु यही उद्योग वायु, जल, भूमि और ध्वनि — चारों का प्रदूषण करते हैं; एक लिटर औद्योगिक अपशिष्ट आठ गुना स्वच्छ जल दूषित कर देता है। इसीलिए अध्याय अंत में कहता है — “सतत् पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की ज़रूरत है।”
अध्याय की आत्मा — यह वाक्य हर बड़े उत्तर में आना चाहिए★
“उद्योग देश को अमीर बनाते हैं — पर उसी हवा, पानी और मिट्टी को ग़रीब कर देते हैं जिस पर देश खड़ा है।”
इसलिए हर 5 अंक के उत्तर में दोनों पक्ष लिखिए।
तालिका 1 — उद्योगों का वर्गीकरण (सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली)★
| आधार | वर्ग | उदाहरण |
|---|---|---|
| कच्चे माल का स्रोत | कृषि आधारित | सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी, वनस्पति तेल |
| खनिज आधारित | लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार, पेट्रोरसायन | |
| प्रमुख भूमिका | आधारभूत | लोहा-इस्पात, ताँबा प्रगलन, एल्यूमिनियम प्रगलन |
| उपभोक्ता | चीनी, दंतमंजन, काग़ज़, पंखे, सिलाई मशीन | |
| पूँजी निवेश | लघु उद्योग | अधिकतम निवेश एक करोड़ रुपये तक |
| स्वामित्व | सार्वजनिक | BHEL, SAIL |
| निजी | टिस्को, बजाज ऑटो, डाबर | |
| संयुक्त | ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) | |
| सहकारी | महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, केरल के नारियल उद्योग | |
| माल का भार | भारी | लोहा-इस्पात |
| हल्के | विद्युतीय उद्योग |
स्वामित्व याद रखने का सूत्र — “सा-नि-सं-स” : सार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारी।
तालिका 2 — तीन कृषि आधारित उद्योग★
| सूती वस्त्र | पटसन | चीनी | |
|---|---|---|---|
| विश्व में स्थान | कताई विश्व स्तर की | उत्पादन में प्रथम; निर्यात में बांग्लादेश के बाद दूसरा | चीनी में दूसरा; गुड़-खांडसारी में प्रथम |
| पहला उद्योग | 1854 — मुंबई | 1855 — रिशरा (कोलकाता के निकट) | — |
| कहाँ | महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु (कताई) | हुगली नदी तट — 98 किमी. लंबी × 3 किमी. चौड़ी सँकरी मेखला | 60% मिलें उ.प्र. + बिहार में; अब महाराष्ट्र में बढ़ रहीं |
| ख़ास बात | देश का अकेला उद्योग जो कच्चे माल से तैयार वस्त्र तक आत्मनिर्भर | 1947 में मिलें भारत में, तीन-चौथाई जूट क्षेत्र बांग्लादेश में | मौसमी उद्योग → सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त |
सूती वस्त्र — याद रखने योग्य बातें
- चित्र 6.1 की श्रृंखला — रेशा → सूत → कपड़ा → वस्त्र (गारमेंट)
- स्थानीयकरण के कारक — कपास की उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम, नमीयुक्त जलवायु
- जीविका देता है — कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिज़ाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को (आठ)
- ! कमज़ोरी — “कताई उत्पादन विश्व स्तर का है लेकिन बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला है क्योंकि यह देश में उत्पादित उच्च स्तरीय धागे का अधिक प्रयोग नहीं कर पाता।”
- औपनिवेशिक काल में हानि हुई क्योंकि इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये
पटसन उद्योग हुगली तट पर क्यों — छह कारण (लगभग हर साल आता है)★
- पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता
- सस्ता जल परिवहन
- सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल
- कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल
- सस्ता श्रमिक — पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा, बिहार व उत्तर प्रदेश से
- कोलकाता का बैंकिंग, बीमा और निर्यात के लिए पत्तन
सूत्र — “कच्चा माल · पानी · परिवहन · पानी · मज़दूर · कोलकाता”
चीनी उद्योग दक्षिण की ओर क्यों खिसका — तीन कारण
- गन्ने में अधिक सूक्रोस
- अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु
- सहकारी समितियाँ सफल रहीं
तालिका 3 — खनिज आधारित उद्योग★
| उद्योग | मुख्य बातें |
|---|---|
| लोहा-इस्पात | आधारभूत उद्योग — “अन्य सभी भारी, हल्के व मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर”। भारी उद्योग — कच्चा व तैयार दोनों माल भारी। ★अनुपात 4:2:1 (लौह-अयस्क : कोकिंग कोल : चूना पत्थर) + मैंगनीज़ कठोरता के लिए। छोटानागपुर पठार में संकेंद्रित |
| एल्यूमिनियम प्रगलन | दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग। गुण — हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला, मिश्रण से कठोर। ★4–6 टन बॉक्साइट → 2 टन एल्यूमिना → 1 टन एल्यूमिनियम। बिजली 18,600 कि.वाट प्रति टन |
| रसायन | GDP में 3%; एशिया में तीसरा, विश्व में 12वाँ। अकार्बनिक — सलफ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश, कास्टिक सोडा। कार्बनिक (पेट्रोरसायन) — कृत्रिम वस्त्र, रबर, प्लास्टिक, दवाइयाँ। ★“रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है” |
| उर्वरक | तीन प्रकार — नाइट्रोजनी (यूरिया), फ़ास्फ़ेटिक (DAP), मिश्रित। ! पोटाश पूर्णत: आयात क्योंकि भारत में भंडार ही नहीं। 50% उत्पादन — गुजरात, तमिलनाडु, उ.प्र., पंजाब, केरल। ★अन्य में राजस्थान |
| सीमेंट | कच्चा माल — चूना पत्थर, सिलिका, जिप्सम + कोयला और विद्युत। पहला उद्योग 1904, चेन्नई। गुजरात में इकाइयाँ — खाड़ी के देशों का बाज़ार |
| मोटरगाड़ी | उदारीकरण के पश्चात् माँग बढ़ी। दिल्ली, गुड़गाँव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर, बेंगलूरु |
| सूचना प्रौद्योगिकी व इलैक्ट्रोनिक | ★बेंगलुरु — भारत की इलैक्ट्रॉनिक राजधानी। सर्वाधिक संकेंद्रण — बेंगलुरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे। सफलता का कारण — हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर का निरंतर विकास |
इस्पात निर्माण प्रक्रिया — पाँच चरण (चित्र 6.2)
| चरण | क्या |
|---|---|
| 1 | कच्चे माल का कारख़ानों तक परिवहन |
| 2 | झोंकदार भट्ठी — लौह-अयस्क गलाया जाता है; चूना पत्थर सहायक खनिज; धातु का मैल हटता है; कोक ईंधन |
| 3 | ढलवाँ लोहा — तरल पदार्थ साँचों में |
| 4 | इस्पात बनाना — पुन: गलाकर ऑक्सीकरण से अशुद्धता हटाकर, मैंगनीज़, निकल, क्रोमियम मिलाकर |
| 5 | धातु को आकार देना — रोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई, गढ़ाई |
छोटानागपुर में संकेंद्रण के चार कारण
- लौह अयस्क की कम लागत
- उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता
- सस्ते श्रमिक
- स्थानीय बाज़ार में माँग की विशाल संभाव्यता
तालिका 4 — चार प्रकार का औद्योगिक प्रदूषण★
| प्रकार | कारण | कौन-से उद्योग | असर |
|---|---|---|---|
| वायु | सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड; निलंबित कण — धूलि, स्प्रे, कुहासा, धुआँ | रसायन व काग़ज़ उद्योग, ईंटों के भट्टे, तेल शोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन | मानव स्वास्थ्य, पशु, पौधे, इमारतें, पूरा पर्यावरण; ★भोपाल गैस त्रासदी |
| जल | कार्बनिक-अकार्बनिक अपशिष्ट नदी में; रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण, सीसा-पारा, कीटनाशक, उर्वरक, प्लास्टिक, रबर | काग़ज़, लुगदी, रसायन, वस्त्र, रंगाई, तेल शोधन, चमड़ा, इलैक्ट्रोप्लेटिंग | मुख्य अपशिष्ट — फ्लाई एश, फ़ोस्फ़ो-जिप्सम, लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag) |
| भूमि | काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण, कूड़ा-कर्कट | सभी | मृदा अनुपजाऊ; वर्षा जल के साथ रिसकर भूमिगत जल भी प्रदूषित |
| ध्वनि | औद्योगिक व निर्माण कार्य, कारख़ानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारख़ाने, गैस यांत्रिकी, विद्युत ड्रिल | सभी | खिन्नता, उत्तेजना, श्रवण असक्षमता, हृदय गति, रक्त चाप |
दो अतिरिक्त बातें —
- तापीय प्रदूषण — “जब कारख़ानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है”
- परमाणु अपशिष्ट — “परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अपशिष्ट व परमाणु शस्त्र उत्पादक कारख़ानों से कैंसर, जन्मजात विकार तथा अकाल प्रसव”
- “प्रदूषण करने वाले उद्योगों में ताप विद्युतगृह भी सम्मिलित हैं।”
तालिका 5 — प्रदूषण की रोकथाम★
जल के लिए तीन सुझाव
| क्रम | सुझाव |
|---|---|
| (क) | जल का न्यूनतम उपयोग तथा दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुन: उपयोग |
| (ख) | वर्षा जल संग्रहण |
| (ग) | गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों का प्रवाहित करने से पहले शोधन |
शोधन के तीन चरण
| चरण | क्या |
|---|---|
| (अ) प्राथमिक | यांत्रिक साधनों द्वारा — छँटाई, छोटे टुकड़े करना, ढकना, तलछट जमाव |
| (ब) द्वितीयक | जैविक प्रक्रियाओं द्वारा |
| (स) तृतीयक | जैविक, रासायनिक व भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा — अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण से पुन: प्रयोग योग्य |
वायु के लिए
ऊँची चिमनियाँ · एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण · स्क्रबर उपकरण · गैसीय प्रदूषकों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के उपकरण · कोयले की जगह तेल व गैस
ध्वनि के लिए
मशीनों-उपकरणों का कम उपयोग · जेनरेटरों में साइलेंसर · ऊर्जा सक्षम व कम शोर वाली मशीनरी · ध्वनि अवशोषित उपकरण · कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण
★और यह आँकड़ा मत भूलिए — “कारख़ानों द्वारा निष्कासित एक लिटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुना स्वच्छ जल दूषित होता है।”
तालिका 6 — अनिवार्य आँकड़े
| आँकड़ा | किसका |
|---|---|
| 1854 — मुंबई | पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग |
| 1855 — रिशरा | पहला पटसन उद्योग |
| 1904 — चेन्नई | पहला सीमेंट उद्योग |
| 98 किमी. × 3 किमी. | हुगली की पटसन मेखला |
| लगभग 80 | पटसन उद्योग (2010-11) |
| तीन-चौथाई | जूट क्षेत्र जो 1947 में बांग्लादेश गया |
| 60 प्रतिशत | चीनी मिलें — उ.प्र. + बिहार |
| 4 : 2 : 1 | लौह-अयस्क : कोकिंग कोल : चूना पत्थर |
| 4–6 → 2 → 1 टन | बॉक्साइट → एल्यूमिना → एल्यूमिनियम |
| 18,600 कि.वाट/टन | एल्यूमिनियम प्रगलन के लिए बिजली |
| 3 प्रतिशत | GDP में रसायन उद्योग |
| तीसरा / 12वाँ | रसायन — एशिया / विश्व |
| 50 प्रतिशत | उर्वरक — गुजरात, तमिलनाडु, उ.प्र., पंजाब, केरल |
| एक करोड़ | लघु उद्योग की निवेश सीमा |
| आठ गुना | एक लिटर अपशिष्ट कितना जल दूषित करता है |
| ISO 14001 | NTPC का EMS प्रमाण पत्र |
राजस्थान इस अध्याय में★
| # | कहाँ | क्या |
|---|---|---|
| 1 | मानचित्र पृ. 61 | बीकानेर और जयपुर — ऊनी वस्त्र |
| 2 | उर्वरक (पृ. 65) | राजस्थान अन्य महत्त्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में |
| 3 | मानचित्र पृ. 67 | जयपुर — सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क |
| 4 | सीमेंट (जोड़कर) | सीमेंट का कच्चा माल चूना पत्थर, और उसमें राजस्थान भारत में प्रथम (22%) — इसलिए यहाँ सीमेंट उद्योग विकसित |
चौथा बिंदु किताब में सीधे नहीं है — यह अध्याय 5 और 6 को जोड़कर बनता है, और परीक्षा में अलग से चमकता है।
मानचित्र में क्या-क्या आता है
| श्रेणी | स्थान |
|---|---|
| लोहा-इस्पात संयंत्र | जमशेदपुर · भिलाई · राउरकेला · दुर्गापुर · बोकारो · बर्नपुर · विशाखापट्टनम · विजयनगर · भद्रावती · सेलम |
| सूती वस्त्र | मुंबई · अहमदाबाद · कानपुर · कोयंबटूर · मदुरै · इंदौर · सोलापुर |
| ऊनी वस्त्र | लुधियाना · अमृतसर · ★बीकानेर · ★जयपुर · ग्वालियर · कानपुर · श्रीनगर |
| रेशम वस्त्र | मैसूरु · बेंगलूरु · श्रीनगर · अनंतनाग · बारामूला · मुर्शिदाबाद |
| पटसन | हुगली तट — कोलकाता, हावड़ा, रिशरा |
| सॉफ़्टवेयर पार्क | बेंगलूरु · हैदराबाद · नोएडा · पुणे · चेन्नई · ★जयपुर · गुवाहाटी · भुवनेश्वर |
पाँच सूत्र जो सब कुछ बाँध देते हैं
| सूत्र | क्या |
|---|---|
| सा-नि-सं-स | स्वामित्व के चार वर्ग — सार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारी |
| 4-2-1 | लौह-अयस्क : कोकिंग कोल : चूना पत्थर |
| 54-55-04 | 1854 सूती (मुंबई) · 1855 पटसन (रिशरा) · 1904 सीमेंट (चेन्नई) |
| वा-ज-भू-ध्व | प्रदूषण के चार प्रकार — वायु, जल, भूमि, ध्वनि |
| एक = आठ | एक लिटर अपशिष्ट = आठ गुना स्वच्छ जल दूषित |
अंतिम पंक्ति — जो उत्तर के अंत में लिखने लायक़ है
“सतत् पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की ज़रूरत है।”
यानी उद्योग बंद नहीं करने हैं — समझदारी से चलाने हैं।