कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास) · बोर्ड: RBSE कुल कालांश: 11 + 1 मानचित्र-अभ्यास कालांश + 1 मूल्यांकन कालांश
इस अध्याय की दो विशेषताएँ पहले ध्यान में रखिए।
पहली — यह बोर्ड के मानचित्र वाले प्रश्नों का मुख्य स्रोत है, इसलिए मानचित्र को अंत तक मत टालिए। हर कालांश में जो नयी जगह आए, उसे उसी दिन नक़्शे पर दिखा दीजिए।
दूसरी — यह अध्याय बच्चों को अपेक्षाकृत अपना लगता है, क्योंकि यह उनके अपने देश की कहानी है। इस लगाव का फ़ायदा उठाइए — यहाँ कहानी सुनाने का तरीक़ा सबसे अच्छा काम करता है।
अधिगम प्रतिफल
इस अध्याय के अंत तक विद्यार्थी —
- बता सकेगा कि पहले विश्वयुद्ध ने भारत में असंतोष कैसे पैदा किया।
- सत्याग्रह का अर्थ अपने शब्दों में समझा सकेगा और बता सकेगा कि गांधीजी इसे कमज़ोरी नहीं, ताक़त क्यों मानते थे।
- रॉलट एक्ट, जलियाँवाला बाग़, असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो को सही क्रम और सही तारीख़ों के साथ बता सकेगा।
- यह समझा सकेगा कि हर समूह के लिए ‘स्वराज’ का अर्थ अलग-अलग था, और कम-से-कम चार समूहों के उदाहरण दे सकेगा।
- भारत के मानचित्र पर कम-से-कम दस स्थान सही ढंग से अंकित कर सकेगा।
- भारत माता और जर्मेनिया की तुलना कर सकेगा।
- 3 और 4 अंक के उत्तर सही ढाँचे में लिख सकेगा।
कालांश 1 — युद्ध, महामारी और एक नया नेता
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–8 | शुरुआत का प्रश्न: बोर्ड पर लिखिए — “120–130 लाख”। पूछिए, “यह संख्या किसकी हो सकती है?” अनुमान लगवाइए, फिर बताइए कि 1921 की जनगणना के अनुसार दुर्भिक्ष और महामारी से मरने वालों की संख्या है। इस एक संख्या से पूरी कक्षा जुड़ जाती है। |
| 8–22 | युद्ध के छह असर की तालिका बोर्ड पर बनवाइए — कर बढ़े, क़ीमतें दोगुनी, जबरन भर्ती, फ़सल ख़राब, फ़्लू की महामारी। ‘जबरन भर्ती’ शब्द अलग से समझाइए। |
| 22–32 | बताइए कि लोगों को उम्मीद थी कि युद्ध के बाद मुसीबतें कम होंगी, पर ऐसा नहीं हुआ — और इसी समय एक नया नेता सामने आया। |
| 32–40 | गांधीजी का परिचय — जनवरी 1915 में दक्षिण अफ़्रीका से लौटे, जहाँ उन्होंने नस्लभेदी सरकार से लोहा लिया था। इस पद्धति का नाम बताइए — सत्याग्रह। |
जाँच के तीन प्रश्न:
- 1युद्ध में क़ीमतों का क्या हुआ?
- 2120–130 लाख किसकी संख्या है?
- 3गांधीजी कब और कहाँ से लौटे?
कालांश 2 — सत्याग्रह और पहले तीन आंदोलन
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–20 | सत्याग्रह की पूरी परिभाषा धीरे-धीरे पढ़वाइए और बोर्ड पर बिंदुवार लिखवाइए। फिर स्रोत-क से गांधीजी का यह वाक्य पढ़वाइए — “सत्याग्रह तो शुद्ध आत्मबल है।” |
| 20–28 | सबसे ज़रूरी बात पर ज़ोर दीजिए — गांधीजी ने कहा कि ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ दुर्बलों का हथियार माना जाता है, पर इस शक्ति को केवल ताक़तवर ही इस्तेमाल कर सकते हैं। पूछिए — “क्या अहिंसा कमज़ोरी है?” और चर्चा कराइए। |
| 28–37 | पहले तीन सत्याग्रह — ‘च-ख-अ’ का सूत्र दीजिए। तीनों को नक़्शे पर दिखाइए — चंपारण (बिहार), खेड़ा और अहमदाबाद (गुजरात)। यहीं से मानचित्र-अभ्यास शुरू हो जाता है। |
| 37–40 | जाँच: (1) सत्याग्रह का आधार क्या है? (2) चंपारण किस राज्य में है? (3) खेड़ा में समस्या क्या थी? |
कालांश 3 — रॉलट एक्ट और जलियाँवाला बाग़
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–15 | रॉलट एक्ट के तीन विरोध-कारण बोर्ड पर लिखवाइए। ‘दो साल तक बिना मुक़दमा चलाए जेल’ वाली बात पर रुकिए और पूछिए — “क्या यह सही है?” |
| 15–32 | जलियाँवाला बाग़ की पूरी घटना कहानी की तरह सुनाइए, क्रम से — वैसाखी मेला, चारों तरफ़ बंद मैदान, मार्शल लॉ की जानकारी न होना, डायर का रास्ते बंद करना, गोलियाँ। फिर डायर का अपना कथन बताइए — कि वह ‘एक नैतिक प्रभाव’ उत्पन्न करना चाहता था। |
| 32–37 | दमन के तरीक़े बताइए — नाक रगड़वाना, घिसटकर चलवाना, कोड़े, गाँवों पर बम। चित्र 3 दिखाइए। पूछिए — “गोली के अलावा भी दमन होता है — कैसे?” |
| 37–40 | जाँच: (1) रॉलट एक्ट के तहत कितने समय जेल में रखा जा सकता था? (2) घटना की तारीख़? (3) डायर ने क्या कारण बताया? |
शिक्षक के लिए एक सूचना: पाठ्यपुस्तक जानबूझकर मृतकों की संख्या नहीं देती, केवल “सैकड़ों लोग मारे गए” कहती है। अगर कोई विद्यार्थी संख्या पूछे तो बताइए कि आँकड़ों पर आज भी मतभेद है — विवरण 07 फ़ाइल के भाग 2 में है।
कालांश 4 — ख़िलाफ़त और असहयोग की शुरुआत
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–16 | ख़िलाफ़त का मुद्दा समझाइए। मुख्य बात यह है कि गांधीजी हिंदू-मुसलमानों को जोड़ना चाहते थे, क्योंकि रॉलट सत्याग्रह मुख्यतः शहरों तक सीमित रह गया था। मोहम्मद अली और शौकत अली के नाम बोर्ड पर लिखिए। |
| 16–28 | ‘असहयोग ही क्यों?’ — यहाँ सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि आप हिंद स्वराज का तर्क प्रश्न के रूप में रखें: “अगर सारे क्लर्क दफ़्तर न जाएँ, सारे वकील अदालत न जाएँ, सारे विद्यार्थी स्कूल न जाएँ — तो सरकार कैसे चलेगी?” बच्चे ख़ुद उत्तर निकाल लेंगे। |
| 28–36 | चरणबद्ध कार्यक्रम लिखवाइए (पदवियाँ लौटाना → बहिष्कार → सविनय अवज्ञा)। फिर दो अधिवेशन — कलकत्ता सितंबर 1920 और नागपुर दिसंबर 1920 — नक़्शे पर दिखाइए। |
| 36–40 | जाँच: (1) ख़िलाफ़त समिति कब और कहाँ बनी? (2) हिंद स्वराज कब लिखी गई? (3) असहयोग कार्यक्रम कहाँ स्वीकृत हुआ? |
कालांश 5 — शहरों में आंदोलन
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–15 | बहिष्कार का असर — विद्यार्थी, शिक्षक, वकील। फिर मद्रास की जस्टिस पार्टी वाला अपवाद बताइए और पूछिए — “वे बहिष्कार में क्यों नहीं शामिल हुए?” यह प्रश्न बच्चों को यह सिखाता है कि हर समूह की अपनी वजह होती है। |
| 15–26 | आर्थिक असर — विदेशी कपड़ों का आयात आधा; 102 करोड़ से 57 करोड़। यह आँकड़ा बोर्ड पर बड़े अक्षरों में लिखिए और कहिए कि “यह आँकड़ा उत्तर में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।” |
| 26–36 | आंदोलन धीमा क्यों पड़ा — तीन कारण लिखवाइए। ‘खादी महँगी थी’ वाली बात पर चर्चा कराइए — “जो चीज़ ग़रीब ख़रीद ही न सके, उसका बहिष्कार-आंदोलन कैसे चलेगा?” |
| 36–40 | जाँच: (1) कौन-सी पार्टी ने बहिष्कार नहीं किया और क्यों? (2) आयात कितना घटा? (3) आंदोलन धीमा पड़ने का एक कारण? |
कालांश 6 — गाँवों में आंदोलन: अवध
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–18 | बाबा रामचंद्र की कहानी सुनाइए — संन्यासी थे और पहले फिजी में गिरमिटिया मज़दूर रह चुके थे। ‘गिरमिटिया’ और ‘बेगार’ शब्द बोर्ड पर लिखकर समझाइए। फिर किसानों की तीन समस्याएँ और तीन माँगें लिखवाइए। |
| 18–26 | ‘नाई-धोबी बंद’ वाली बात ज़रूर बताइए — बच्चों को यह बहुत रोचक लगती है। पूछिए — “बिना हिंसा किए भी किसी पर दबाव कैसे डाला जा सकता है?” |
| 26–34 | अवध किसान सभा — जून 1920 में नेहरू का दौरा, अक्तूबर में गठन, महीने भर में 300 से ज़्यादा शाखाएँ। फिर 1921 की हिंसा और यह बात कि लोग महात्मा का नाम लेकर अपनी कार्रवाइयाँ सही ठहरा रहे थे, जबकि गांधीजी ने ऐसा कहा नहीं था। |
| 34–40 | स्रोत-ख (नेहरू का बयान) ज़ोर से पढ़वाइए। अंतिम पंक्ति पर रुकिए — “यह सबक़ उनसे ज़्यादा मुझे सीखना था।” पूछिए — “नेहरू क्या स्वीकार कर रहे हैं?” |
कालांश 7 — आदिवासी, बाग़ान और चौरी-चौरा
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–18 | अल्लूरी सीताराम राजू की कहानी। वन क़ानूनों से शुरू कीजिए — मवेशी नहीं चरा सकते, लकड़ी नहीं बीन सकते, ऊपर से बेगार। फिर राजू के दावे बताइए। सबसे ज़रूरी बात: वे गांधीजी के प्रशंसक थे पर अहिंसा के विरोधी। पूछिए — “क्या दोनों बातें एक साथ हो सकती हैं?” |
| 18–28 | असम के बाग़ान मज़दूर — 1859 का इनलैंड इमिग्रेशन एक्ट, चारदीवारी, और यह भावना कि “अब गांधी राज आ रहा है, हरेक को ज़मीन मिल जाएगी।” फिर उनका दुखद अंत बताइए। |
| 28–35 | यही वह जगह है जहाँ अध्याय का मुख्य विचार पक्का कीजिए। बोर्ड पर लिखिए — “सभी ने स्वराज के आह्वान को स्वीकार तो किया लेकिन उनके लिए उसके अर्थ अलग-अलग थे।” फिर एक तालिका बनवाइए: किसान → लगान; बाग़ान मज़दूर → आने-जाने की आज़ादी; व्यापारी → बिना रोक व्यापार। |
| 35–40 | चौरी-चौरा (फ़रवरी 1922) — घटना और गांधीजी का निर्णय। नक़्शे पर दिखाइए। |
कालांश 8 — सविनय अवज्ञा की ओर
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–14 | कांग्रेस की दो धाराएँ — स्वराज पार्टी (सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू) बनाम नेहरू-बोस। एक वाक्य में अंतर लिखवाइए। |
| 14–24 | दो नए कारक — महामंदी (1926 से क़ीमतें गिरीं) और साइमन कमीशन (एक भी भारतीय सदस्य नहीं)। ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ का नारा बोर्ड पर लिखिए और लाला लाजपत राय की मृत्यु बताइए। |
| 24–34 | लाहौर अधिवेशन, दिसंबर 1929 — ‘पूर्ण स्वराज’, नेहरू अध्यक्ष, 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस। स्रोत-ग की शपथ पढ़वाइए और उसकी सबसे ताक़तवर पंक्ति रेखांकित कराइए — “जनता को भी सरकार को बदलने या उसे समूल समाप्त करने का अधिकार है।” |
| 34–40 | जाँच: (1) स्वराज पार्टी किसने बनाई? (2) साइमन कमीशन का विरोध क्यों? (3) पूर्ण स्वराज की माँग कहाँ मानी गई? |
कालांश 9 — नमक यात्रा और सविनय अवज्ञा
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–15 | नमक ही क्यों? — दो कारण लिखवाइए (सभी इस्तेमाल करते हैं; भोजन का अभिन्न हिस्सा)। फिर 11 माँगों वाला ख़त और 11 मार्च का अल्टीमेटम। |
| 15–27 | नमक यात्रा — 12 मार्च से 6 अप्रैल, 78 वॉलंटियर, 24 दिन, रोज़ 10 मील। नक़्शे पर साबरमती से दांडी तक तीर खींचवाइए। (शिक्षक हेतु: दूरी वाली त्रुटि की जानकारी 07 फ़ाइल में है; कक्षा में इसे गणित के अभ्यास की तरह उठाया जा सकता है।) |
| 27–35 | आंदोलन कैसे फैला — नमक क़ानून, विदेशी कपड़े, पिकेटिंग, लगान और चौकीदारी कर से इनकार, वन क़ानूनों का उल्लंघन। फिर दमन — एक लाख गिरफ़्तारियाँ, शोलापुर। |
| 35–40 | गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) और दूसरा गोलमेज़ सम्मेलन (दिसंबर 1931)। दो आंदोलनों का फ़र्क़ बोर्ड पर लिखिए — “साथ मत दो” बनाम “क़ानून तोड़ो”। |
कालांश 10 — किसने क्यों हिस्सा लिया, और सीमाएँ
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–22 | सबसे महत्त्वपूर्ण तालिका बनवाइए — पाँच समूह (संपन्न किसान, ग़रीब किसान, व्यवसायी, मज़दूर, औरतें), और हर एक के सामने “क्यों जुड़े” तथा “स्वराज का क्या अर्थ”। यह तालिका 4 अंक के प्रश्न का सीधा उत्तर है। |
| 22–28 | संपन्न और ग़रीब किसान का बारीक अंतर ज़रूर समझाइए — एक सरकारी लगान के ख़िलाफ़ था, दूसरा ज़मींदार के भाड़े के ख़िलाफ़। इसीलिए कांग्रेस पहले का साथ दे सकी, दूसरे का नहीं। |
| 28–36 | महिलाओं की भागीदारी — क्या-क्या किया, और सीमा भी ज़रूर बताइए (“कांग्रेस को उनकी प्रतीकात्मक उपस्थिति में ही दिलचस्पी थी”)। |
| 36–40 | दलितों का प्रश्न शुरू कीजिए — गांधीजी का रास्ता और दलित नेताओं का रास्ता। |
कालांश 11 — पूना पैक्ट, सांस्कृतिक साधन और भारत छोड़ो
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 | पुनरावृत्ति। |
| 5–15 | गांधीजी और अंबेडकर — दोनों का उद्देश्य एक, रास्ता अलग। आमरण अनशन और सितंबर 1932 का पूना पैक्ट। सावधानी: इसे दो नेताओं की लड़ाई के रूप में नहीं, दो रास्तों की बहस के रूप में पढ़ाइए। |
| 15–22 | मुस्लिम संगठनों का प्रश्न — 1927 की कोशिश, जिन्ना की शर्त, और 1928 में जयकर द्वारा संभावनाओं का समाप्त होना। यहाँ भी तथ्य बताइए, राय नहीं। |
| 22–33 | सामूहिक अपनेपन का भाव — भारत माता (बंकिम चंद्र, अबनीन्द्रनाथ टैगोर), लोक कथाएँ (रबीन्द्रनाथ टैगोर, नटेसा शास्त्री), दो झंडे, इतिहास की पुनर्व्याख्या। चित्र 12 और 14 साथ-साथ दिखाइए और अंतर पूछिए। फिर अध्याय 1 की जर्मेनिया से तुलना कराइए। |
| 33–40 | भारत छोड़ो आंदोलन — 14 जुलाई 1942 वर्धा, 8 अगस्त 1942 बंबई, ‘करो या मरो’, और तीन महिला नेताओं के नाम। अंत में अध्याय का अंतिम वाक्य बोर्ड पर लिखिए — “जो राष्ट्र उभर रहा था वह औपनिवेशिक शासन से मुक्ति की चाह रखने वाली बहुत सारी आवाज़ों का पुंज था।” |
कालांश 12 — मानचित्र अभ्यास (केवल मानचित्र के लिए)
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–10 | खाली मानचित्र बाँटिए। पहले केवल राज्य पहचनवाइए — गुजरात, बिहार, पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बंगाल, असम। |
| 10–25 | गुजरात से शुरू कीजिए, क्योंकि वहाँ पाँच स्थान हैं — खेड़ा, अहमदाबाद, साबरमती, दांडी, बारदोली। फिर साबरमती से दांडी तक तीर खिंचवाइए। |
| 25–35 | बाक़ी स्थान भरवाइए — चंपारण, अमृतसर, लाहौर, चौरी-चौरा, अवध, कलकत्ता, नागपुर, मद्रास, वर्धा, शोलापुर, गूडेम पहाड़ियाँ। |
| 35–40 | 05-प्रश्न बैंक के भाग च.3 से तीनों अभ्यास प्रश्न करवाइए। |
मानचित्र पढ़ाने का सुनहरा नियम: बच्चा नक़्शा देखकर नहीं, बनाकर सीखता है। इसलिए हर बच्चे के हाथ में पेंसिल और खाली नक़्शा होना चाहिए।
कालांश 13 — मूल्यांकन
| मिनट | गतिविधि |
|---|---|
| 0–10 | फ्लैशकार्ड की तेज़ मौखिक जाँच — 06 फ़ाइल से 30 कार्ड। |
| 10–35 | 05-प्रश्न बैंक के भाग ‘छ’ से कोई एक नमूना परीक्षा-पत्र (12 अंक)। |
| 35–40 | उत्तर-पुस्तिकाएँ आपस में बदलवाकर बोर्ड पर मॉडल उत्तर लिखते हुए जाँच कराइए, ताकि बच्चों को पता चले कि पूरे अंक वाला उत्तर कैसा दिखता है। |
कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता
| समस्या | उपाय |
|---|---|
| तारीख़ें गड्डमड्ड हो जाती हैं | केवल चार पक्की करवाइए — 1919 (जलियाँवाला बाग़), 1921 (असहयोग), 1930 (नमक यात्रा), 1942 (भारत छोड़ो)। बाक़ी इन्हीं के आगे-पीछे बैठ जाती हैं। |
| आंदोलन आपस में मिल जाते हैं | दो शब्दों में फ़र्क़ पक्का करवाइए — असहयोग = “साथ मत दो”, सविनय अवज्ञा = “क़ानून तोड़ो”। |
| मानचित्र नहीं आता | पहले केवल गुजरात करवाइए — अकेले वहीं पाँच स्थान हैं। बाक़ी बाद में। |
| नाम याद नहीं रहते | हर नाम को जगह से जोड़िए — बाबा रामचंद्र → अवध; राजू → गूडेम; पटेल → बारदोली; अंबेडकर → पूना पैक्ट। |
| लंबा उत्तर नहीं लिख पाते | 05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में। तीनों चरण ज़रूरी हैं। |
| शब्द समझ नहीं आते | 00-मास्टर फ़ाइल का भाग 10 (शब्दावली) अलग से छपवाकर हर बच्चे को दीजिए। |
शिक्षण-सामग्री
- पाठ्यपुस्तक के चित्र 1 से 14 (विशेषकर चित्र 3, 5, 7, 9, 12, 14)
- 02-Presentation.pptx
- भारत का खाली मानचित्र — हर बच्चे के लिए, कम-से-कम तीन प्रतियाँ
- शब्द-दीवार के लिए चार्ट पेपर
मूल्यांकन-संकेतक
| क्या जाँचना है | कैसे जाँचें | कब |
|---|---|---|
| शब्दों का अर्थ | शब्दावली से मौखिक प्रश्न | हर कालांश के अंत में |
| तथ्य और तारीख़ें | फ्लैशकार्ड | हर तीसरे कालांश में |
| मानचित्र | खाली नक़्शे पर अंकन | कालांश 2, 7 और 12 में |
| कारण-परिणाम | “असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?” जैसे प्रश्न | कालांश 7 के बाद |
| तुलनात्मक सोच | “किस समूह के लिए स्वराज का क्या अर्थ था?” | कालांश 10 में |
| उत्तर लिखने का ढंग | 4 अंक का लिखित उत्तर | कालांश 13 में |