यह प्रश्न रटने से हल नहीं होते — इनमें बच्चे को पहचानना, तय करना, तुलना करना और तर्क देना पड़ता है। NCF-2023 और PARAKH के प्रारूप पर आधारित।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — “किसका काम है?”
नीचे चार स्थितियाँ हैं — (अ) एक राज्य सरकार अपने राज्य में नयी पुलिस चौकियाँ खोलना चाहती है। (ब) भारत सरकार एक नया करेंसी नोट जारी करना चाहती है। (स) एक राज्य सरकार अपने स्कूलों के लिए नयी पाठ्यपुस्तकें लागू करना चाहती है। (द) सरकार अंतरिक्ष में एक नया उपग्रह भेजने के लिए क़ानून बनाना चाहती है।
1हर स्थिति में बताइए कि कौन-सी सूची है और फ़ैसला कौन करेगा। 4 अंक
उत्तर देखिए
| स्थिति | सूची | फ़ैसला कौन करेगा |
|---|---|---|
| (अ) पुलिस चौकी | राज्य सूची | राज्य सरकार अकेले |
| (ब) करेंसी नोट | संघ सूची (मुद्रा) | केंद्र सरकार अकेले |
| (स) पाठ्यपुस्तकें | समवर्ती सूची (शिक्षा) | राज्य सरकार भी बना सकती है — केंद्र से अनुमति लेना ज़रूरी नहीं; ! पर सीधे टकराव में केंद्र का क़ानून मान्य |
| (द) अंतरिक्ष | किसी सूची में नहीं → अवशिष्ट | केंद्र सरकार, क्योंकि “बाकी बचे विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में चले जाते हैं” |
2(स) वाली स्थिति में अगर केंद्र सरकार को पुस्तकों की विषयवस्तु पसंद न आए तो क्या वह राज्य को रोक सकती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
सीधे रोक नहीं सकती। शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए राज्य को अपना क़ानून बनाने और पाठ्यपुस्तकें लागू करने का पूरा अधिकार है — अनुमति की ज़रूरत नहीं।
! हाँ, अगर दोनों के क़ानूनों में सीधा टकराव हो जाए, तो “केंद्र सरकार द्वारा बनाया क़ानून ही मान्य होता है।” पर पसंद-नापसंद रोकने का आधार नहीं होती।
3★मान लीजिए किसी राज्य के मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय नीति से असहमत हैं। क्या प्रधानमंत्री उन्हें आदेश दे सकते हैं? कारण सहित। 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं। संघीय व्यवस्था में “केंद्रीय सरकार राज्य सरकार को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती। राज्य सरकारों के पास अपनी शक्तियाँ होती हैं और इसके लिए वह केंद्रीय सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होती हैं।”
प्रधानमंत्री बैठक बुला सकते हैं, सलाह-मशविरा और समन्वय कर सकते हैं, और अगर विषय संघ सूची का हो तो केंद्र का क़ानून लागू होगा — पर राज्य सूची के विषय पर आदेश नहीं दे सकते।
★यह ठीक वही उत्तर है जो किताब के नक्सली वाले सवाल (पृष्ठ 18) का है — क्योंकि पुलिस और क़ानून-व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं।
केस 2 — दो देश, दो भाषा-नीतियाँ
देश A — आज़ादी के आठ साल बाद वहाँ क़ानून बना कि बहुसंख्यक समुदाय की भाषा ही एकमात्र राजभाषा होगी; विश्वविद्यालयों और नौकरियों में उसी भाषा वालों को प्राथमिकता मिलेगी। देश B — वहाँ किसी भाषा को राष्ट्रभाषा नहीं बनाया गया; 22 भाषाओं को संवैधानिक दर्जा मिला; और जब एक भाषा हटाने का समय आया तो विरोध देखकर उसे जारी रखा गया।
1दोनों देश कौन-से हैं और कौन-सी घटनाओं की ओर संकेत है? 2 अंक
उत्तर देखिए
देश A = श्रीलंका — 1956 में “तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित” किया गया और “विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता” दी गई।
देश B = भारत — 1965 में अंग्रेज़ी बंद होनी थी, पर ग़ैर-हिंदी भाषी राज्यों की माँग पर “केंद्र सरकार ने हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी को राजकीय कामों में प्रयोग की अनुमति देकर इस विवाद को सुलझाया।”
2दोनों नीतियों के नतीजों की तुलना कीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
| देश A (श्रीलंका) | देश B (भारत) | |
|---|---|---|
| नीति | भाषा थोपी | भाषा को बढ़ावा, पर थोपा नहीं |
| अल्पसंख्यकों की माँग | नकारी गई | मानी गई |
| नतीजा | ! नाराज़गी → अलगाव → गृहयुद्ध | ★विवाद सुलझा, देश जुड़ा रहा |
★किताब का वाक्य — “भारतीय नेताओं ने इस मामले में जो लचीला रुख अपनाया उसी से हम श्रीलंका जैसी स्थिति में पहुँचने से बच गए।”
3★इससे संघवाद के बारे में क्या सबक़ निकलता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
कि संघवाद सिर्फ़ संविधान में लिखा होने से नहीं चलता। दोनों देशों में संविधान था; फ़र्क़ इस बात का था कि नेताओं ने अल्पसंख्यकों की भावनाओं का आदर किया या नहीं।
इसीलिए किताब कहती है — “संवैधानिक प्रावधान ज़रूरी हैं पर इतना ही पर्याप्त नहीं है… मुख्य श्रेय यहाँ की लोकतांत्रिक राजनीति के चरित्र को देना होगा।”
★और यह भी कि संघवाद का मक़सद दोहरा है — “देश की एकता की सुरक्षा… तथा क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान।” भारत ने दोनों साधे, श्रीलंका ने पहला ही खो दिया।
केस 3 — “पंचायत है, पर ताक़त नहीं”
एक गाँव में ग्राम पंचायत है और सरपंच भी चुना हुआ है। पर — • गाँव के अधिकांश लोगों को ग्राम सभा की पिछली बैठक कब हुई थी, यह याद नहीं; • पंचायत के पास अपना पैसा बहुत कम है, हर काम के लिए ऊपर से मंज़ूरी लेनी पड़ती है; • सरपंच कहती है कि “फ़ैसले हमारे नहीं होते, हम सिर्फ़ काग़ज़ पर दस्तख़त करते हैं।”
1यह स्थिति किताब की किस बात से मेल खाती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
किताब की दो कमियों से —
“ग्राम सभाओं की बैठकें नियमित रूप से नहीं होतीं”;
★“अधिकांश राज्य सरकारों ने स्थानीय सरकारों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए हैं। इस प्रकार हम स्वशासन की आदर्श स्थिति से काफ़ी दूर हैं।”
2★1992 में तो पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिल गया था। फिर यह हालत क्यों है? 3 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि 1992 ने ढाँचा दिया, पर ताक़त पूरी तरह नहीं दी। संशोधन ने चुनाव, आरक्षण, राज्य चुनाव आयोग तो अनिवार्य कर दिए, पर पैसे और अधिकारों के बारे में उसने केवल इतना कहा कि “राज्य सरकारों को अपने राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा… देना पड़ता है” — और ★“सत्ता में भागीदारी की प्रकृति हर राज्य में अलग-अलग है।”
यानी कितनी ताक़त देनी है, यह राज्य सरकार तय करती है — और अधिकांश ने कम दी।
★यह ठीक वही बात है जो तुमने अर्थशास्त्र के अध्याय 5 में सीखी थी — “अधिकार क़ानून की किताब में लिखा होना काफ़ी नहीं है।”
3इस गाँव में स्थिति सुधारने के तीन उपाय बताइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
★ग्राम सभा की बैठकें नियमित कराई जाएँ — किताब के अनुसार “साल में कम से कम दो या तीन बार”; और ग्राम-पंचायत का बजट ग्राम सभा से ही पास हो।
राज्य सरकार पंचायत को अधिक अधिकार और अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा दे, ताकि छोटे फ़ैसलों के लिए ऊपर न देखना पड़े।
लोग ख़ुद भागीदारी करें — जैसे पोर्तो एलेग्रे में “शहर के करीब 13 लाख लोग अपने शहर का बजट तैयार करने में भागीदारी करते हैं”; भारत में केरल के कुछ इलाक़ों में ऐसे प्रयोग हुए हैं।
केस 4 — “आधा या एक तिहाई?”
संविधान कहता है कि पंचायतों में कम से कम एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। पर राजस्थान ने अपने पंचायत क़ानून में इसे 50 प्रतिशत कर दिया। केंद्र सरकार ने इसे न रोका, न रोक सकती थी।
1राजस्थान ऐसा क्यों कर सका? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि पंचायती राज और स्थानीय शासन राज्य के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं, और संविधान ने “कम से कम एक तिहाई” कहा है — यानी वह न्यूनतम शर्त है, अधिकतम सीमा नहीं। राज्य उससे आगे जा सकता है।
2★इस एक उदाहरण से संघवाद की कौन-सी विशेषताएँ सिद्ध होती हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
“राज्य सरकारों के पास अपनी शक्तियाँ होती हैं और इसके लिए वह केंद्रीय सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होती हैं”;
“अलग-अलग स्तर की सरकारों का कानून बनाने… का अपना-अपना अधिकार-क्षेत्र होता है”;
★और सबसे बड़ी बात — संघवाद का दोहरा उद्देश्य: “क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान”, यानी हर राज्य अपनी परिस्थिति के अनुसार आगे बढ़ सकता है।
★एक वाक्य में — “राज्य केंद्र से नीचे नहीं है; वह अपने क्षेत्र में केंद्र से आगे भी जा सकता है।”
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1“भाषा के आधार पर राज्य बनाने से देश टूट जाता है।” — इस कथन की जाँच कीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
यह कथन तथ्यों से ग़लत साबित होता है — यद्यपि एक समय यही डर था।
उस समय“जब एक भाषा के आधार पर राज्यों के गठन की बात उठी तो कई राष्ट्रीय नेताओं को डर था कि इससे देश टूट जाएगा। केंद्र सरकार ने इसी के चलते राज्यों का पुनर्गठन कुछ समय के लिए टाल दिया था।”
पर हुआ उल्टा ★“हमारा अनुभव बताता है कि भाषावार राज्य बनाने से देश ज़्यादा एकीकृत और मज़बूत हुआ। इससे प्रशासन भी… कहीं ज़्यादा सुविधाजनक हो गया है।”
और इतिहासकार रामचंद्र गुहा के शब्दों में“भारत की एकता को कमज़ोर करने की जगह भाषा के आधार पर गठित राज्यों ने इसकी एकता को मज़बूत करने में मदद की है”; एक व्यक्ति “कन्नड़ और भारतीय” जैसी दो-दो पहचानों के साथ आसानी से जीता है; और “भाषावार राज्यों के गठन ने भारत को एक भयावह स्थिति से बचा लिया… एक भाषा : 14–15 राष्ट्र।”
2“भारत में संघवाद 1950 से है, इसलिए उसमें कोई बदलाव नहीं आया।” — क्या आप सहमत हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं। संविधान 1950 से ही संघीय था, पर व्यवहार में संघवाद बहुत बाद में मज़बूत हुआ।
पहले“काफ़ी समय तक हमारे यहाँ एक ही पार्टी का केंद्र और अधिकांश राज्यों में शासन रहा… राज्य सरकारों ने स्वायत्त संघीय इकाई के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं किया।” और अलग दल होने पर “केंद्र सरकार अक्सर संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को भंग कर देती थी। यह संघवाद की भावना के प्रतिकूल काम था।”
1990 के बाद ★क्षेत्रीय दलों का उदय और गठबंधन सरकारें आईं, और “इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी”; साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फ़ैसले से “राज्य सरकार को मनमाने ढंग से भंग करना केंद्र सरकार के लिए मुश्किल हो गया।”
★निष्कर्ष — “नियम वही थे; खिलाड़ी बदल गए।” और किताब का दावा यही है कि श्रेय “लोकतांत्रिक राजनीति के चरित्र” को जाता है।
3“भारत का संघवाद सफल रहा है।” — पक्ष और विपक्ष में दो-दो तर्क दीजिए और निष्कर्ष लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
पक्ष में
भाषायी राज्यों के गठन से देश “ज़्यादा एकीकृत और मज़बूत हुआ”, और प्रशासन भी सुविधाजनक हुआ;
लचीली भाषा-नीति ने विवाद सुलझाए — “उसी से हम श्रीलंका जैसी स्थिति में पहुँचने से बच गए”; और 1990 के बाद राज्यों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति बनी।
विपक्ष में
लंबे समय तक केंद्र ने “संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को भंग” किया — यानी संघवाद काग़ज़ पर था, व्यवहार में नहीं;
★तीसरे स्तर पर आज भी “अधिकांश राज्य सरकारों ने स्थानीय सरकारों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए हैं” और “ग्राम सभाओं की बैठकें नियमित रूप से नहीं होतीं” — इसलिए “हम स्वशासन की आदर्श स्थिति से काफ़ी दूर हैं।”
निष्कर्ष ★ भारत का संघवाद केंद्र और राज्य के बीच सफल रहा है, पर राज्य और स्थानीय सरकार के बीच अधूरा है। यानी सत्ता ऊपर से नीचे तो आई, पर सबसे नीचे तक नहीं पहुँची।
4★“भारत में केंद्र सरकार राज्यों से ज़्यादा ताक़तवर है, इसलिए यह सच्चा संघ नहीं है।” — इस पर अपनी राय दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
यह कथन आंशिक रूप से सही है, पर निष्कर्ष ग़लत है।
सही हिस्सा भारत “बड़े देश द्वारा राज्यों के गठन” वाली श्रेणी का संघ है, और ऐसी व्यवस्थाओं में “राज्यों के बरक्स केंद्र सरकार ज़्यादा ताकतवर हुआ करती है।” इसका प्रमाण — अवशिष्ट अधिकार केंद्र के पास, समवर्ती सूची में टकराव पर केंद्र का क़ानून मान्य, और केंद्र शासित प्रदेशों पर केंद्र का विशेष अधिकार।
ग़लत निष्कर्ष क्यों क्योंकि संघ होने की कसौटी “कौन ज़्यादा ताक़तवर है” नहीं, बल्कि यह है कि अधिकार संविधान में स्पष्ट बँटे हैं या नहीं और राज्य अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हैं या नहीं। भारत में तीन सूचियाँ संविधान में दर्ज हैं, राज्य केंद्र के प्रति जवाबदेह नहीं, संविधान अकेले संसद नहीं बदल सकती, और विवाद अदालत तय करती है।
★इसीलिए किताब कहती है — भारत “राज्यों का संघ” है और उसका गठन “संघीय शासन व्यवस्था के सिद्धांत पर हुआ है।”
भाग ग — वर्गीकरण और तुलना
1नीचे के देशों को सही श्रेणी में रखिए और एक-एक कारण भी दीजिए। 4 अंक
| देश | श्रेणी | कारण |
|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमरीका | ||
| भारत | ||
| ऑस्ट्रेलिया | ||
| बेल्जियम |
उत्तर देखिए
| देश | श्रेणी | कारण |
|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमरीका | “साथ आकर संघ बनाना” | पहले अलग-अलग स्वतंत्र इकाइयाँ थीं, फिर साथ आईं — इसलिए प्रांत ज़्यादा ताक़तवर |
| भारत | “बड़े देश द्वारा राज्यों का गठन” | पहले एक देश था, फिर आंतरिक विविधता के आधार पर राज्य बने — इसलिए केंद्र ज़्यादा ताक़तवर |
| ऑस्ट्रेलिया | “साथ आकर” | स्वतंत्र इकाइयों ने अपनी संप्रभुता को साथ किया |
| बेल्जियम | “बड़े देश द्वारा” | 1993 में मौजूद देश के भीतर सत्ता बाँटी गई |
2नीचे की व्यवस्थाओं को क्षैतिज या उर्ध्वाधर में बाँटिए। 3 अंक
| व्यवस्था | कौन-सी |
|---|---|
| सर्वोच्च न्यायालय संसद के बनाए क़ानून की समीक्षा करता है | |
| केंद्र और राज्य के बीच तीन सूचियों से अधिकारों का बँटवारा | |
| राज्य सरकार ज़िला परिषद को अपने राजस्व का हिस्सा देती है | |
| मंत्रिपरिषद संसद के प्रति जवाबदेह है |
उत्तर देखिए
| व्यवस्था | कौन-सी |
|---|---|
| सर्वोच्च न्यायालय संसद के बनाए क़ानून की समीक्षा करता है | क्षैतिज |
| केंद्र और राज्य के बीच तीन सूचियों से अधिकारों का बँटवारा | उर्ध्वाधर |
| राज्य सरकार ज़िला परिषद को अपने राजस्व का हिस्सा देती है | उर्ध्वाधर |
| मंत्रिपरिषद संसद के प्रति जवाबदेह है | क्षैतिज |
★सूत्र — “आड़ी = अंग · खड़ी = स्तर।”
3भारत और श्रीलंका की तुलना कीजिए — तीन आधारों पर। 3 अंक
उत्तर देखिए
| आधार | भारत | श्रीलंका |
|---|---|---|
| शासन का स्वरूप | संघीय — “राज्यों का संघ” | एकात्मक — “व्यावहारिक रूप से अभी भी एकात्मक शासन व्यवस्था” |
| सत्ता का बँटवारा | संविधान में तीन सूचियों से स्पष्ट | “केंद्रीय सरकार के पास ही सारे अधिकार हैं” |
| भाषा-नीति | किसी को राष्ट्रभाषा नहीं; 22 अनुसूचित भाषाएँ; लचीलापन | 1956 में सिंहली एकमात्र राजभाषा; अल्पसंख्यकों की माँगें नकारी गईं |
| नतीजा | ★देश जुड़ा रहा | ! गृहयुद्ध |
भाग घ — परियोजना और गतिविधि
1★★“मेरी स्थानीय सरकार” (किताब की अपनी, पृष्ठ 26 — अनिवार्य)
गाँव में अपने पंच, सरपंच, पंचायत समिति के सदस्य और ज़िला परिषद के अध्यक्ष के नाम पता कीजिए; और यह भी कि ग्रामसभा की पिछली बैठक कब हुई थी और उसमें कितने लोगों ने भागीदारी की थी।
शहर में अपने काउंसलर और नगरनिगम या नगरपालिका प्रमुख का नाम; और बजट तथा ख़र्च के मुख्य मद।
2★“सुनो — रेडियो” (किताब की गतिविधि, पृष्ठ 17)
एक हफ़्ते तक एक राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय समाचार बुलेटिन रोज़ सुनिए। सरकारी नीतियों और फ़ैसलों से जुड़ी ख़बरों की सूची बनाकर तीन श्रेणियों में बाँटिए —
• सिर्फ़ केंद्र सरकार से जुड़ी ख़बरें
• आपके या किसी अन्य राज्य सरकार से जुड़ी ख़बरें
• ★केंद्र और राज्य के संबंध की ख़बरें
फिर बताइए — किस श्रेणी में सबसे ज़्यादा ख़बरें निकलीं, और उससे क्या पता चलता है?
3★दो नक्शों की परियोजना
किताब के “सन् 1947 का भारत” (पृष्ठ 18) और आज के नक्शे (पृष्ठ 19) की तुलना कीजिए और तीन सूचियाँ बनाइए —
(क) नाम बदल गए (संकेत — राजपूताना → ?); (ख) नए बने राज्य; (ग) ★बड़े राज्यों को काटकर बने राज्य।
4भाषा-सर्वेक्षण
कक्षा में सर्वेक्षण कीजिए — कौन-कौन सी मातृभाषाएँ हैं और किसकी कितनी। फिर बार चार्ट बनाइए (किताब की अपनी गतिविधि, पृष्ठ 22)।
★और चर्चा कीजिए — “किताब कहती है कि राजस्थानी को हिंदी के अंदर जोड़ लिया जाता है। क्या यह ठीक है? यह फ़ैसला कौन करे?”
! (इसे “कौन-सी भाषा बड़ी” की बहस मत बनने दीजिए — सवाल यह है कि भाषाओं को गिनने और मान्यता देने का फ़ैसला कैसे होता है।)
5★★“हमारा बजट” — ब्राज़ील मॉडल का प्रयोग
कक्षा या विद्यालय के किसी छोटे बजट पर पोर्तो एलेग्रे जैसी प्रक्रिया चलाइए — हर समूह तीन ख़र्च सुझाए, फिर बहस, फिर वोट, फिर फ़ैसला।
अंत में पूछिए — “जब तुमने ख़ुद तय किया, तो क्या फ़र्क़ महसूस हुआ?” ★यही विकेंद्रीकरण का पूरा तर्क है।
6ग्राम सभा या वार्ड बैठक देखना
अगर संभव हो तो कुछ विद्यार्थी असली बैठक देखने जाएँ और कक्षा को बताएँ — कितने लोग आए, क्या चर्चा हुई, कोई फ़ैसला हुआ या नहीं।
मूल्यांकन रूब्रिक (शिक्षक के लिए)
| स्तर | पहचान |
|---|---|
| उत्कृष्ट | सही सूची/श्रेणी पहचानता है, किताब से उद्धरण देता है, कारण बताता है और भारत-श्रीलंका या 1992 के पहले-बाद जैसी तुलना जोड़ता है |
| अच्छा | पहचान सही है और उदाहरण भी, पर “क्यों” अधूरा रहता है |
| सुधार चाहिए | सूचियाँ रट ली हैं, पर नई स्थिति में लागू नहीं कर पाता; क्षैतिज-उर्ध्वाधर उलट देता है |
| बहुत कमज़ोर | ! मान लेता है कि “राज्य सरकार केंद्र के नीचे है” — यही इस अध्याय की सबसे बड़ी चूक है |
★और सबसे असली मूल्यांकन कोई प्रश्नपत्र नहीं है — अध्याय के अंत में पूछिए: “तुम्हारे सरपंच या पार्षद का नाम क्या है? और ग्रामसभा की पिछली बैठक कब हुई थी?” जितने बच्चे उत्तर दे पाएँ, उतना ही यह अध्याय सफल हुआ।