अध्याय 2भारत में राष्ट्रवाद

परख प्रश्न17 मिनट

PARAKH की तीन कसौटियाँ: जागरूकता 50% · संवेदनशीलता 20% · सृजनात्मकता 30%

ये प्रश्न सामान्य प्रश्नों से अलग हैं। सामान्य प्रश्न पूछते हैं “क्या हुआ था?”; ये प्रश्न पूछते हैं “आपको इससे क्या समझ आया?” इसलिए इनके उत्तर रटे नहीं जा सकते — इन्हें सोचकर लिखना पड़ता है।

हर प्रश्न के साथ ‘उत्तर की दिशा’ दी गई है, ताकि विद्यार्थी को पता चले कि किस तरफ़ सोचना है।


भाग क — जागरूकता (50%)

1नीचे दिए गए तीन तथ्य पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 4 अंक

उत्तर देखिए

(i) नमक यात्रा 24 दिन चली।

(ii) गांधीजी की टोली ने हर रोज़ लगभग 10 मील का सफ़र तय किया।

(iii) पाठ्यपुस्तक कहती है कि यह यात्रा 240 किलोमीटर की थी।

(क) (i) और (ii) के आधार पर कुल दूरी की गणना कीजिए। (1) (ख) आपकी गणना और (iii) में दिए गए आँकड़े में क्या अंतर है? (2) (ग) इससे आपको स्रोत पढ़ने के बारे में क्या सीख मिलती है? (1)

उत्तर की दिशा (क) 24 × 10 = 240 मील। (ख) 240 मील लगभग 386 किलोमीटर होते हैं, जबकि पाठ्यपुस्तक 240 किलोमीटर कहती है; यानी ‘मील’ की जगह ‘किलोमीटर’ छप गया है। (ग) उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि किसी भी पाठ को उसकी अपनी बातों से जाँचा जा सकता है — जब एक ही पृष्ठ पर दिए गए दो तथ्य आपस में मेल न खाएँ, तो पाठक को रुककर सोचना चाहिए।

शिक्षक हेतु विद्यार्थियों को स्पष्ट कर दीजिए कि बोर्ड-उत्तर में NCERT का ही आँकड़ा लिखें। यह अभ्यास सोचने के लिए है, उत्तर बदलने के लिए नहीं।


2नीचे दी गई तालिका पूरी कीजिए। 4 अंक

समूहउनके लिए ‘स्वराज’ का अर्थ
अवध के किसान
असम के बाग़ान मज़दूर
व्यवसायी वर्ग
गुजरात के पटीदार और उत्तर प्रदेश के जाट
उत्तर देखिए
समूहउनके लिए ‘स्वराज’ का अर्थ
अवध के किसान?
असम के बाग़ान मज़दूर?
व्यवसायी वर्ग?
गुजरात के पटीदार और उत्तर प्रदेश के जाट?

उत्तर: अवध के किसान — लगान कम हो, बेगार ख़त्म हो और दमनकारी ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार हो। बाग़ान मज़दूर — वे चारदीवारियों से जब चाहे आ-जा सकें और अपने गाँवों से संपर्क रख पाएँ। व्यवसायी — ऐसा युग जहाँ कारोबार पर औपनिवेशिक पाबंदियाँ न हों और व्यापार-उद्योग निर्बाध फल-फूल सकें। संपन्न किसान — भारी लगान के ख़िलाफ़ लड़ाई।


3निम्नलिखित घटनाओं को सही क्रम में लगाइए और प्रत्येक के आगे वर्ष लिखिए। 4 अंक

उत्तर देखिए

लाहौर अधिवेशन · जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड · चौरी-चौरा · दांडी में नमक क़ानून का उल्लंघन · भारत छोड़ो प्रस्ताव · पूना पैक्ट

उत्तर: जलियाँवाला बाग़ (1919) → चौरी-चौरा (1922) → लाहौर अधिवेशन (1929) → दांडी में नमक क़ानून का उल्लंघन (1930) → पूना पैक्ट (1932) → भारत छोड़ो प्रस्ताव (1942)


4असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में तीन अंतर लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशापहला अंतर — असहयोग में लोगों से कहा गया कि वे अंग्रेज़ों का सहयोग न करें, जबकि सविनय अवज्ञा में उन्हें औपनिवेशिक क़ानूनों का उल्लंघन करने के लिए कहा गया। दूसरा अंतर — असहयोग में ख़िलाफ़त के कारण मुस्लिम भागीदारी व्यापक थी, जबकि सविनय अवज्ञा में वह काफ़ी कम रही। तीसरा अंतर — सविनय अवज्ञा में महिलाओं ने बहुत बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया।


5शहरों में असहयोग आंदोलन क्यों धीमा पड़ गया? तीन कारण लिखिए और बताइए कि इनमें से आपको कौन-सा सबसे महत्त्वपूर्ण लगता है और क्यों। 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा तीन कारण — (1) खादी मिलों के कपड़े से महँगी थी और ग़रीब उसे नहीं ख़रीद सकते थे; (2) ब्रिटिश संस्थानों के बहिष्कार के बाद वैकल्पिक भारतीय संस्थानों की स्थापना बहुत धीमी थी; (3) फलस्वरूप विद्यार्थी, शिक्षक और वकील वापस लौटने लगे। उन्नत उत्तर दूसरे कारण को सबसे महत्त्वपूर्ण बताएगा और तर्क देगा कि बहिष्कार तभी टिक सकता है जब उसका विकल्प तैयार हो — केवल ‘ना’ कहना पर्याप्त नहीं होता।


6नीचे दो किसान समूहों का वर्णन दिया गया है। दोनों में क्या अंतर था और कांग्रेस दोनों के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों करती थी? 4 अंक

उत्तर देखिए

समूह अ ये ज़मीन के मालिक थे और सरकारी लगान चुकाते थे।

समूह ब ये ज़मींदारों से पट्टे पर ज़मीन लेकर खेती करते थे और उन्हें भाड़ा चुकाना पड़ता था।

उत्तर की दिशासमूह अ संपन्न किसान थे (गुजरात के पटीदार, उत्तर प्रदेश के जाट), जो सरकारी लगान के ख़िलाफ़ थे। समूह ब ग़रीब किसान थे, जो चाहते थे कि ज़मींदारों को दिया जाने वाला भाड़ा माफ़ हो। उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि कांग्रेस समूह अ का साथ दे सकती थी क्योंकि उसकी लड़ाई सरकार से थी, पर समूह ब का साथ देने में हिचकिचाती थी क्योंकि उसकी लड़ाई ज़मींदारों से थी — और ज़मींदार भी कांग्रेस के साथ थे। इसी कारण ग़रीब किसानों और कांग्रेस के बीच संबंध अनिश्चित बने रहे।


7अल्लूरी सीताराम राजू के बारे में दो बातें एक साथ सच थीं। दोनों बताइए और समझाइए कि यह कैसे संभव था। 3 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशापहली बात — वे महात्मा गांधी की महानता के गुण गाते थे, कहते थे कि वे असहयोग आंदोलन से प्रेरित हैं, और उन्होंने लोगों को खादी पहनने तथा शराब छोड़ने के लिए प्रेरित किया। दूसरी बात — उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत अहिंसा के बल पर नहीं बल्कि केवल बलप्रयोग के ज़रिए ही आज़ाद हो सकता है। उन्नत उत्तर यह समझाएगा कि लोगों ने गांधीजी के संदेश का वही हिस्सा अपनाया जो उनकी अपनी परिस्थिति में ठीक बैठता था — यह इस बात का सबसे साफ़ उदाहरण है कि “सभी ने स्वराज के आह्वान को स्वीकार तो किया लेकिन उनके लिए उसके अर्थ अलग-अलग थे।”


8जनरल डायर ने कहा कि वह ‘एक नैतिक प्रभाव’ उत्पन्न करना चाहता था। जलियाँवाला बाग़ के बाद सरकार ने और क्या-क्या किया, और उन सब कार्रवाइयों में क्या समानता थी? 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा सरकार ने सत्याग्रहियों को ज़मीन पर नाक रगड़ने, सड़क पर घिसट कर चलने और सारे साहिबों को सलाम मारने के लिए मजबूर किया; लोगों को कोड़े मारे गए; और गुजराँवाला जैसे गाँवों पर बम बरसाए गए। उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि इन सब कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल मारना नहीं, बल्कि लोगों को अपमानित और आतंकित करना था — पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है, “सरकार लोगों को अपमानित और आतंकित करना चाहती थी।” यानी दमन का एक उद्देश्य शरीर को नहीं, आत्म-सम्मान को तोड़ना था।


9गांधीजी ने नमक को ही आंदोलन का प्रतीक क्यों चुना? दो कारण दीजिए और बताइए कि यह चुनाव क्यों बुद्धिमानी भरा था। 3 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा दो कारण — नमक का अमीर-ग़रीब सभी इस्तेमाल करते थे और यह भोजन का एक अभिन्न हिस्सा था। उन्नत उत्तर यह जोड़ेगा कि गांधीजी समाज के सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ना चाहते थे, और नमक ऐसी अकेली चीज़ थी जिसका सवाल किसान, मज़दूर, व्यापारी और शहरी मध्यवर्ग — सबको एक जैसा छूता था। इसीलिए उन्होंने नमक कर और सरकारी इजारेदारी को ब्रिटिश शासन का सबसे दमनकारी पहलू बताया।


10भारत माता (चित्र 12) और जर्मेनिया (अध्याय 1) की तुलना तालिका में कीजिए। 4 अंक

उत्तर देखिए
आधारभारत माताजर्मेनिया
किसने बनाई और कब??
मुख्य भाव??
प्रमुख प्रतीक??

उत्तर: भारत माता — अबनीन्द्रनाथ टैगोर, 1905; भाव शांत, गंभीर, दैवी और अध्यात्मिक; प्रतीक माला (संन्यासी गुण), तथा शिक्षा, भोजन और कपड़े देते हाथ। जर्मेनिया — फ़िलिप वेट, 1848; भाव बहादुरी और मुक़ाबले की तैयारी; प्रतीक बलूत पत्तियों का मुकुट, तलवार और टूटी हुई बेड़ियाँ। उन्नत उत्तर यह भी जोड़ेगा कि भारत माता की छवि एक जैसी नहीं रही — चित्र 14 में उनके हाथों में त्रिशूल है और वे हाथी व शेर के बीच खड़ी हैं।

भाग ख — संवेदनशीलता (20%)

11जवाहरलाल नेहरू ने रायबरेली की घटना के बाद लिखा — “यह सबक़ उनसे ज़्यादा मुझे सीखना था।”
(क) वे किस सबक़ की बात कर रहे हैं? (1)
(ख) उन्होंने अपने बारे में क्या स्वीकार किया? (1)
(ग) एक नेता का अपनी कमज़ोरी स्वीकार करना क्यों महत्त्वपूर्ण है? 60–80 शब्दों में लिखिए। (2) 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा (क) अहिंसा के सबक़ की। (ख) कि एक पल के लिए उनका ख़ून खौल उठा था और अहिंसा न जाने कहाँ छूट गई थी, जबकि किसान “बहादुर, शांत और निश्चिंत लोगों जैसा” आचरण कर रहे थे। (ग) उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि नेहरू ने किसानों को नीचे नहीं, अपने से ऊपर रखा — और यह स्वीकार करना कि सीखने वाला नेता है और सिखाने वाले आम लोग हैं, नेतृत्व का एक दुर्लभ और ईमानदार रूप है।


12असम के बाग़ान मज़दूरों की कहानी पढ़िए और उत्तर दीजिए।
(क) उनके लिए आज़ादी का क्या मतलब था? (1)
(ख) उन्होंने बाग़ान छोड़ते समय क्या सोचा था, और वास्तव में क्या हुआ? (2)
(ग) इस कहानी से आपको क्या महसूस होता है? 50–60 शब्दों में लिखिए। (1) 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा (क) कि वे चारदीवारियों से जब चाहे आ-जा सकें और अपने गाँवों से संपर्क रख पाएँ। (ख) उन्हें लगता था कि अब गांधी राज आ रहा है और हरेक को गाँव में ज़मीन मिल जाएगी; लेकिन रेलवे और स्टीमरों की हड़ताल के कारण वे रास्ते में फँस गए, पुलिस ने पकड़ लिया और बुरी तरह पीटा। (ग) उत्तर में यह भाव आना चाहिए कि उम्मीद और सच्चाई के बीच कितनी बड़ी दूरी थी, और यह कि जिनके पास सबसे कम था, उन्होंने सबसे ज़्यादा जोखिम उठाया।


13दलितों के प्रश्न पर गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के रास्ते अलग थे।
(क) गांधीजी का रास्ता क्या था? (1)
(ख) दलित नेता क्या चाहते थे और क्यों? (2)
(ग) दोनों में से किसी एक को ‘सही’ और दूसरे को ‘ग़लत’ कहना उचित क्यों नहीं होगा? (1) 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा (क) गांधीजी का रास्ता सामाजिक सुधार और हृदय परिवर्तन का था — उन्होंने अस्पृश्यता को स्वराज की शर्त बताया, ‘अछूतों’ को हरिजन कहा, मंदिरों-तालाबों-कुओं पर समान अधिकार के लिए सत्याग्रह किया, और स्वयं शौचालय साफ़ करने लगे। (ख) दलित नेता शिक्षा संस्थानों में आरक्षण और अलग निर्वाचन क्षेत्र चाहते थे, क्योंकि उनका मानना था कि सामाजिक अपंगता केवल राजनीतिक सशक्तीकरण से ही दूर हो सकती है। (ग) उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि दोनों का उद्देश्य एक था — दलितों की स्थिति सुधारना — पर तरीक़े अलग थे, और इतिहास में दो अलग रास्ते एक साथ ईमानदार हो सकते हैं।

शिक्षक हेतु सावधानी इस प्रश्न को दो रास्तों की बहस के रूप में पढ़ाइए, दो व्यक्तियों की लड़ाई के रूप में नहीं।


14पाठ्यपुस्तक कहती है कि महिलाओं की सार्वजनिक भूमिका बढ़ने का यह मतलब नहीं था कि “औरतों की स्थिति में कोई भारी बदलाव आने वाला था।”
(क) महिलाओं ने आंदोलन में क्या-क्या किया? (2)
(ख) फिर भी कांग्रेस में उनकी स्थिति क्या रही? (1)
(ग) इससे आप क्या समझते हैं? 50–60 शब्दों में लिखिए। (1) 4 अंक

उत्तर देखिए

उत्तर की दिशा (क) उन्होंने जुलूसों में हिस्सा लिया, नमक बनाया, विदेशी कपड़ों व शराब की दुकानों की पिकेटिंग की, और बहुत सारी जेल भी गईं। (ख) कांग्रेस लंबे समय तक किसी भी महत्त्वपूर्ण पद पर औरतों को जगह देने से हिचकिचाती रही और उसे उनकी प्रतीकात्मक उपस्थिति में ही दिलचस्पी थी। (ग) उन्नत उत्तर यह पहचानेगा कि किसी आंदोलन में शामिल होना और उस आंदोलन में बराबरी पाना दो अलग बातें हैं — यही बात अध्याय 1 में फ़्रैंकफ़र्ट संसद की महिलाओं के साथ भी हुई थी।

भाग ग — सृजनात्मकता (30%)

15आप 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम में मौजूद एक विद्यार्थी हैं और आपने नमक यात्रा को शुरू होते देखा। उस दिन अपनी डायरी में 100 शब्द लिखिए। 6 अंक

उत्तर देखिए

लिखने के निर्देश:

  • कम-से-कम तीन ऐतिहासिक तथ्य आने चाहिए (तारीख़, 78 वॉलंटियर, साबरमती से दांडी, नमक क़ानून)
  • एक बात जो आपको समझ आई और एक बात जो समझ नहीं आई — दोनों लिखिए
  • भाषा एक किशोर की हो, इतिहासकार की नहीं

मूल्यांकन: प्रारंभिक — तथ्य हैं पर डायरी का रूप नहीं। दक्ष — तीन तथ्य सही ढंग से आए हैं। उन्नत — लेखक यह भी सोचता है कि मुट्ठी भर नमक से इतना बड़ा साम्राज्य कैसे हिल सकता है, और यही प्रश्न डायरी को जीवंत बना देता है।


16चार लोग, चार अर्थ। 6 अंक

उत्तर देखिए

कल्पना कीजिए कि 1930 में चार लोग एक साथ बैठे हैं — अवध का एक किसान, असम का एक बाग़ान मज़दूर, अहमदाबाद का एक कपड़ा-व्यापारी, और एक शहरी विद्यार्थी। चारों से पूछा जाता है — “आपके लिए स्वराज का क्या मतलब है?”

चारों के उत्तर 40–50 शब्दों में लिखिए।

मूल्यांकन: उन्नत उत्तर वह है जिसमें चारों उत्तर बिलकुल अलग हों और हर उत्तर में उस व्यक्ति की अपनी ज़िंदगी की समस्या दिखे — किसान के लिए लगान और बेगार, मज़दूर के लिए चारदीवारी से बाहर जाने की आज़ादी, व्यापारी के लिए बिना पाबंदी का व्यापार, विद्यार्थी के लिए अपने देश का अपना शासन। एक जैसे उत्तर ‘प्रारंभिक’ माने जाएँगे।


17अख़बार का पहला पन्ना। 7 अंक

उत्तर देखिए

आप 14 अप्रैल 1919 के एक भारतीय अख़बार के संपादक हैं। जलियाँवाला बाग़ की घटना के अगले दिन का पहला पन्ना तैयार कीजिए —

(क) एक मुख्य शीर्षक (10 शब्दों से कम) (1) (ख) एक समाचार-रिपोर्ट (80–100 शब्द) — केवल तथ्य (3) (ग) एक संपादकीय (60–80 शब्द) — जिसमें राय हो (2) (घ) एक वाक्य में बताइए कि (ख) और (ग) की भाषा में क्या फ़र्क़ है (1)

(यह पाठ्यपुस्तक का अभ्यास प्रश्न 3-क ही है, पर विस्तार के साथ।)

मूल्यांकन: उन्नत उत्तर वह है जिसमें रिपोर्ट में कोई राय न हो और संपादकीय में कोई नया तथ्य न हो — यही तथ्य और राय के बीच की असली रेखा है।


18अपने राष्ट्र का प्रतीक चुनिए। 6 अंक

उत्तर देखिए

इस अध्याय में आपने पढ़ा कि 1921 के स्वराज झंडे के बीच में चरखा था, जो स्वावलंबन का प्रतीक था।

(क) अगर आपको आज एक झंडा बनाना हो जो आपके विद्यालय या आपके गाँव का प्रतिनिधित्व करे, तो आप उसमें तीन प्रतीक क्या रखेंगे? (3) (ख) हर प्रतीक का अर्थ एक वाक्य में लिखिए। (2) (ग) आपने चरखे जैसा कोई प्रतीक क्यों नहीं चुना — या क्यों चुना? (1)

मूल्यांकन: उन्नत उत्तर वह है जिसमें प्रतीक अपने आसपास की असली चीज़ों से लिए गए हों और हर प्रतीक का अर्थ स्पष्ट रूप से बताया गया हो।


19(समूह प्रोजेक्ट) 10 अंक

शीर्षक:“मेरे इलाक़े की आज़ादी की कहानी”

इस अध्याय में आपने चंपारण, अवध, बारदोली, दांडी और चौरी-चौरा के बारे में पढ़ा। लेकिन राष्ट्रीय आंदोलन केवल इन जगहों पर नहीं हुआ था — लगभग हर ज़िले में कुछ न कुछ हुआ था।

कार्य के चरण

  1. अपने गाँव, क़स्बे या ज़िले के बारे में पता कीजिए कि 1920 से 1947 के बीच वहाँ क्या हुआ था। स्रोत हो सकते हैं — कोई बुज़ुर्ग व्यक्ति, स्थानीय पुस्तकालय, कोई पुरानी किताब, या कोई स्मारक/शिलालेख। (3 अंक)
  2. जो जानकारी मिले, उसे 150 शब्दों में लिखिए। (3 अंक)
  3. बताइए कि आपने यह किससे और कैसे जाना — नाम, स्रोत और तारीख़ सहित। (2 अंक)
  4. अंत में एक पैराग्राफ़ लिखिए — “अगर यह कहानी किसी ने दर्ज न की होती, तो क्या होता?” (2 अंक)

शिक्षक के लिए निर्देश अगर किसी विद्यार्थी को अपने इलाक़े के बारे में कुछ न मिले, तो यह भी एक निष्कर्ष है — उसे लिखने दीजिए कि “मुझे कुछ नहीं मिला” और फिर पूछिए कि ऐसा क्यों हुआ होगा। यह उत्तर भी उतना ही मूल्यवान है, क्योंकि यह दिखाता है कि इतिहास केवल वही बचता है जिसे कोई लिखता है।

अंक-विभाजन

भागप्रश्नकुल अंकभार
क — जागरूकता1–1037~50%
ख — संवेदनशीलता11–1416~20%
ग — सृजनात्मकता15–1935~30%

मूल्यांकन रूब्रिक

कसौटीप्रारंभिकदक्षउन्नत
तथ्यकुछ नाम और तारीख़ें याद हैंसही तथ्य सही जगह लिखता हैतथ्यों और आँकड़ों को जोड़कर निष्कर्ष निकालता है
समझघटना बता देता हैकारण भी बता देता हैकारणों में से सबसे महत्त्वपूर्ण चुनकर तर्क देता है
‘अलग-अलग अर्थ’ की समझसबको एक जैसा मानता हैकुछ समूहों का अंतर पहचानता हैहर समूह की अपनी परिस्थिति से उसका ‘स्वराज’ जोड़ पाता है
संवेदनशीलता‘अच्छा-बुरा’ कहकर छोड़ देता हैदोनों पक्ष समझता हैताक़त के असंतुलन को पहचानता है और सरल निर्णय से बचता है
सृजनात्मकताकल्पना है पर तथ्य नहींकल्पना तथ्यों पर टिकी हैकल्पना से कोई नयी दृष्टि निकलती है
भाषाबहुत छोटे-अधूरे वाक्यपूरे वाक्य, सही क्रमस्पष्ट, सुगठित और अपनी भाषा