बोर्ड: RBSE (राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) · कक्षा 10 · सामाजिक विज्ञान
इस अध्याय की दो ख़ास बातें ध्यान रखिए।
पहली — यहाँ हर प्रश्न का पूरा उत्तर लिखकर दिया गया है। पहले पढ़िए, फिर कॉपी में लिखकर अभ्यास कीजिए।
दूसरी — बोर्ड के मानचित्र वाले प्रश्न इसी अध्याय से आते हैं। इसलिए भाग ‘च’ सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। वहाँ पूरे अंक पाना सबसे आसान है, बशर्ते आपने रोज़ थोड़ा अभ्यास किया हो।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | कितना लिखें | उत्तर का ढाँचा |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक या दो वाक्य | सीधा उत्तर, कोई भूमिका नहीं |
| 2 अंक | 30–40 शब्द | दो बिंदु, पूरे वाक्यों में |
| 3 अंक | 50–60 शब्द | तीन बिंदु, हर बिंदु एक वाक्य में |
| 4 अंक | 80–100 शब्द | एक भूमिका-वाक्य + चार बिंदु + एक समापन-वाक्य |
इस अध्याय के लिए तीन विशेष सुझाव। पहला — तारीख़ और जगह का नाम ज़रूर लिखिए, क्योंकि यह अध्याय तारीख़ों और स्थानों से भरा है। दूसरा — जब भी “किस समूह ने क्यों हिस्सा लिया” जैसा प्रश्न आए, हर समूह के लिए ‘स्वराज का अर्थ’ अलग से लिखिए — यही पूरे अंक दिलाता है। तीसरा — आँकड़े लिखिए (जैसे 120–130 लाख, 102 करोड़ से 57 करोड़, 78 वॉलंटियर, 240 किलोमीटर) — इनसे उत्तर तुरंत मज़बूत दिखता है।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
क.1 बहुविकल्पीय प्रश्न
1महात्मा गांधी भारत कब लौटे?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) जनवरी 1915
21917 में गांधीजी ने बिहार के किस इलाक़े में बागान व्यवस्था के ख़िलाफ़ सत्याग्रह किया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) चंपारण
3जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड कब हुआ?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) 13 अप्रैल 1919
4रॉलट एक्ट के तहत सरकार राजनीतिक क़ैदियों को कितने समय तक बिना मुक़दमा चलाए जेल में रख सकती थी?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) दो साल
5असहयोग कार्यक्रम को स्वीकृति किस अधिवेशन में मिली?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) नागपुर, दिसंबर 1920
6‘हिंद स्वराज’ पुस्तक किसने और कब लिखी?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) महात्मा गांधी ने, 1909
7अवध में किसानों का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) बाबा रामचंद्र
8आंध्र प्रदेश की गूडेम पहाड़ियों में विद्रोह का नेता कौन था?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) अल्लूरी सीताराम राजू
9असहयोग आंदोलन किस घटना के बाद वापस लिया गया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) चौरी-चौरा
10स्वराज पार्टी का गठन किन्होंने किया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू
11साइमन कमीशन के बारे में सबसे बड़ी शिकायत क्या थी?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) उसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था
12‘पूर्ण स्वराज’ की माँग किस अधिवेशन में औपचारिक रूप से मानी गई?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) लाहौर, दिसंबर 1929
13नमक यात्रा में गांधीजी के साथ कितने विश्वस्त वॉलंटियर थे और यात्रा कितनी लंबी थी?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) 78 वॉलंटियर, 240 किलोमीटर
14गांधीजी ने दांडी में नमक क़ानून कब तोड़ा?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) 6 अप्रैल 1930
15पूना पैक्ट कब और किनके बीच हुआ?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) सितंबर 1932, गांधीजी और डॉ. अंबेडकर
16‘वन्दे मातरम्’ गीत किसने लिखा?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
17भारत माता की विख्यात छवि किसने और कब चित्रित की?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) अबनीन्द्रनाथ टैगोर ने, 1905
181921 के स्वराज झंडे के बीच में कौन-सा प्रतीक था?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) चरखा
19‘करो या मरो’ का नारा किस आंदोलन से जुड़ा है?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) भारत छोड़ो आंदोलन
20मद्रास में जस्टिस पार्टी ने परिषद् चुनावों का बहिष्कार क्यों नहीं किया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) उसका मानना था कि काउंसिल में प्रवेश से ग़ैर-ब्राह्मणों को वे अधिकार मिल सकते हैं जो सामान्यतः केवल ब्राह्मणों को मिलते थे
क.2 रिक्त स्थान भरिए
211921 की जनगणना के मुताबिक़ दुर्भिक्ष और महामारी के कारण ______ लाख लोग मारे गए।
उत्तर देखिए
(120–130)
22गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह ______ है, शारीरिक बल नहीं।
उत्तर देखिए
(शुद्ध आत्मबल)
23______ के तहत बाग़ान मज़दूरों को बिना इजाज़त बाग़ान से बाहर जाने की छूट नहीं थी।
उत्तर देखिए
(1859 के इनलैंड इमिग्रेशन एक्ट)
241921 से 1922 के बीच विदेशी कपड़ों की क़ीमत ______ करोड़ से घटकर ______ करोड़ रह गई।
उत्तर देखिए
(102 · 57)
25गांधीजी ने वायसराय इरविन को ______ जनवरी 1930 को ______ माँगों वाला ख़त लिखा।
उत्तर देखिए
(31 · 11)
261930 में डॉ. अंबेडकर ने दलितों को ______ में संगठित किया।
उत्तर देखिए
(दमित वर्ग एसोसिएशन)
27मद्रास में ______ ने तमिल लोक कथाओं का चार खंडों में संकलन प्रकाशित किया।
उत्तर देखिए
(नटेसा शास्त्री)
28भारत छोड़ो प्रस्ताव ______ जुलाई 1942 को ______ में पारित हुआ।
उत्तर देखिए
(14 · वर्धा)
क.3 सत्य/असत्य
29गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह दुर्बलों का हथियार है।
उत्तर देखिए
(असत्य — उन्होंने साफ़ कहा कि इस शक्ति को केवल ताक़तवर ही इस्तेमाल कर सकते हैं)
30असहयोग आंदोलन में सभी प्रांतों ने परिषद् चुनावों का बहिष्कार किया।
उत्तर देखिए
(असत्य — मद्रास की जस्टिस पार्टी ने बहिष्कार नहीं किया)
31अल्लूरी सीताराम राजू पूरी तरह अहिंसा में विश्वास रखते थे।
उत्तर देखिए
(असत्य — वे खादी और शराब-निषेध का प्रचार करते थे, पर मानते थे कि भारत केवल बलप्रयोग से आज़ाद हो सकता है)
32सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया।
उत्तर देखिए
(सत्य)
33पूना पैक्ट से दलितों को अलग निर्वाचन क्षेत्र मिल गए।
उत्तर देखिए
(असत्य — उन्हें आरक्षित सीटें मिलीं, पर मतदान सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में ही होता था)
क.4 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (1 अंक)
34‘बेगार’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बेगार का अर्थ है बिना किसी पारिश्रमिक के काम करवाना।
35‘गिरमिटिया मज़दूर’ किन्हें कहा जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: औपनिवेशिक शासन के दौरान जिन लोगों को एक अनुबंध (एग्रीमेंट) के तहत काम करने के लिए फ़िजी, गयाना और वेस्टइंडीज़ जैसी जगहों पर ले जाया गया, उन्हें गिरमिटिया मज़दूर कहा जाता था। अंग्रेज़ी में इन्हें Indentured Labour कहते हैं।
36‘पिकेटिंग’ क्या होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पिकेटिंग प्रदर्शन या विरोध का एक ऐसा स्वरूप है जिसमें लोग किसी दुकान, फ़ैक्ट्री या दफ़्तर के भीतर जाने का रास्ता रोक लेते हैं।
37‘जबरन भर्ती’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जबरन भर्ती वह प्रक्रिया थी जिसमें अंग्रेज़ भारत के लोगों को ज़बरदस्ती सेना में भर्ती कर लेते थे।
38जनरल डायर ने जलियाँवाला बाग़ में गोली चलाने का क्या कारण बताया था?
उत्तर देखिए
उत्तर: उसने बताया कि वह सत्याग्रहियों के ज़हन में दहशत और विस्मय का भाव पैदा करके ‘एक नैतिक प्रभाव’ उत्पन्न करना चाहता था।
39‘नाई-धोबी बंद’ क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: अवध के किसान आंदोलन में पंचायतों द्वारा लिया गया वह फ़ैसला था जिसके तहत ज़मींदारों को नाई-धोबी की सुविधाओं से वंचित कर दिया गया, ताकि उनका सामाजिक बहिष्कार किया जा सके।
40गांधीजी ने ‘अछूतों’ को क्या नाम दिया?
उत्तर देखिए
उत्तर: गांधीजी ने ‘अछूतों’ को हरिजन यानी ईश्वर की संतान बताया।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है? (अभ्यास प्रश्न 2)
उत्तर देखिए
उत्तर: सत्याग्रह के विचार में सत्य की शक्ति पर आग्रह और सत्य की खोज पर ज़ोर दिया जाता था। इसका अर्थ यह था कि अगर आपका उद्देश्य सच्चा है और आपका संघर्ष अन्याय के ख़िलाफ़ है, तो उत्पीड़क से मुक़ाबला करने के लिए आपको किसी शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है। प्रतिशोध या आक्रामकता का सहारा लिए बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।
2गांधीजी ने सत्याग्रह को ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ मानने से इनकार क्यों किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: गांधीजी का कहना था कि निष्क्रिय प्रतिरोध दुर्बलों का हथियार माना जाता है, जबकि सत्याग्रह की शक्ति को केवल ताक़तवर लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं। उनके अनुसार इसके लिए सघन सक्रियता चाहिए और दक्षिण अफ़्रीका का आंदोलन निष्क्रिय नहीं बल्कि सक्रिय आंदोलन था।
3भारत लौटने के बाद गांधीजी ने कौन-से तीन शुरुआती सत्याग्रह किए?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1917 में उन्होंने बिहार के चंपारण इलाक़े में दमनकारी बागान व्यवस्था के ख़िलाफ़ किसानों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया। इसी वर्ष उन्होंने गुजरात के खेड़ा ज़िले के किसानों की मदद के लिए सत्याग्रह किया, क्योंकि फ़सल ख़राब होने और प्लेग के कारण वे लगान चुकाने की हालत में नहीं थे। 1918 में वे अहमदाबाद में सूती कपड़ा कारख़ानों के मज़दूरों के बीच सत्याग्रह चलाने पहुँचे।
4‘हिंद स्वराज’ में गांधीजी ने असहयोग के बारे में क्या कहा था?
उत्तर देखिए
उत्तर: अपनी प्रसिद्ध पुस्तक हिंद स्वराज (1909) में गांधीजी ने कहा था कि भारत में ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से ही स्थापित हुआ था और यह शासन इसी सहयोग के कारण चल पा रहा है। उनके अनुसार अगर भारत के लोग अपना सहयोग वापस ले लें तो साल भर के भीतर ब्रिटिश शासन ढह जाएगा और स्वराज की स्थापना हो जाएगी।
5असहयोग आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: गांधीजी का सुझाव था कि सबसे पहले लोगों को सरकार द्वारा दी गई पदवियाँ लौटा देनी चाहिए और सरकारी नौकरियों, सेना, पुलिस, अदालतों, विधायी परिषदों, स्कूलों तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए। इसके बाद अगर सरकार दमन का रास्ता अपनाती है तो व्यापक सविनय अवज्ञा अभियान भी शुरू किया जाए।
6बारदोली सत्याग्रह पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1928 में वल्लभ भाई पटेल ने गुजरात के बारदोली तालुका में किसान आंदोलन का नेतृत्व किया, जो भू-राजस्व बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ था। यह आंदोलन वल्लभ भाई पटेल के सक्षम नेतृत्व के तहत सफल रहा और इस संघर्ष का प्रचार व्यापक रूप से हुआ, जिससे इसे भारत के कई हिस्सों में अत्यधिक सहानुभूति प्राप्त हुई।
71921 के स्वराज झंडे का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1921 तक गांधीजी ने स्वराज का झंडा तैयार कर लिया था, जो सफ़ेद, हरे और लाल रंग का तिरंगा था। इसके मध्य में गांधीवादी प्रतीक चरखे को जगह दी गई थी, जो स्वावलंबन का प्रतीक था। जुलूसों में यह झंडा थामे चलना शासन के प्रति अवज्ञा का संकेत था।
8स्वदेशी आंदोलन के झंडे में क्या-क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: बंगाल में स्वदेशी आंदोलन के दौरान एक तिरंगा झंडा (हरा, पीला, लाल) तैयार किया गया था। इसमें ब्रिटिश भारत के आठ प्रांतों का प्रतिनिधित्व करते कमल के आठ फूल और हिंदुओं व मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता एक अर्धचंद्र दर्शाया गया था।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया? (अभ्यास प्रश्न 1-ख)
उत्तर देखिए
उत्तर: पहले विश्वयुद्ध ने एक नयी आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी थी, जिससे लोगों में व्यापक असंतोष फैला।
पहला, रक्षा व्यय में भारी इज़ाफ़ा हुआ और इसकी भरपाई के लिए युद्ध के नाम पर क़र्ज़ लिए गए तथा करों में वृद्धि की गई; सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया और आयकर शुरू किया गया।
दूसरा, 1913 से 1918 के बीच क़ीमतें दोगुनी हो चुकी थीं, जिसके कारण आम लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गईं। साथ ही गाँवों में सिपाहियों को जबरन भर्ती किया गया, जिससे ग्रामीण इलाक़ों में व्यापक ग़ुस्सा था।
तीसरा, 1918–19 और 1920–21 में फ़सल ख़राब हो गई और उसी समय फ़्लू की महामारी फैल गई। 1921 की जनगणना के मुताबिक़ दुर्भिक्ष और महामारी के कारण 120–130 लाख लोग मारे गए। लोगों को उम्मीद थी कि युद्ध के बाद उनकी मुसीबतें कम हो जाएँगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
2भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे? (अभ्यास प्रश्न 1-ग)
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में तीन मुख्य कारणों से थे।
पहला कारण यह था कि भारतीय सदस्यों के भारी विरोध के बावजूद इस क़ानून को इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने बहुत जल्दबाज़ी में पारित कर दिया था।
दूसरा कारण यह था कि इस क़ानून के ज़रिए सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने का अधिकार मिल गया था।
तीसरा कारण यह था कि सरकार राजनीतिक क़ैदियों को दो साल तक बिना मुक़दमा चलाए जेल में बंद रख सकती थी। इसीलिए महात्मा गांधी ऐसे अन्यायपूर्ण क़ानूनों के ख़िलाफ़ अहिंसक ढंग से नागरिक अवज्ञा चाहते थे।
3गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फ़ैसला क्यों लिया? (अभ्यास प्रश्न 1-घ)
उत्तर देखिए
उत्तर: फ़रवरी 1922 में गोरखपुर स्थित चौरी-चौरा में बाज़ार से गुज़र रहा एक शांतिपूर्ण जुलूस पुलिस के साथ हिंसक टकराव में बदल गया। इस घटना के बारे में सुनते ही महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन रोकने का आह्वान किया। उनको लगता था कि आंदोलन हिंसक होता जा रहा है और सत्याग्रहियों को व्यापक प्रशिक्षण की ज़रूरत है। गांधीजी का पूरा आंदोलन अहिंसा पर टिका था, इसलिए हिंसा होते ही उन्होंने उसे रोकना ज़रूरी समझा।
4गांधीजी ने ख़िलाफ़त का मुद्दा क्यों उठाया?
उत्तर देखिए
उत्तर: भले ही रॉलट सत्याग्रह एक बहुत बड़ा आंदोलन था, लेकिन वह मुख्य रूप से शहरों और क़स्बों तक ही सीमित था। महात्मा गांधी पूरे भारत में और भी ज़्यादा जनाधार वाला आंदोलन खड़ा करना चाहते थे, लेकिन उनका मानना था कि हिंदू-मुसलमानों को एक-दूसरे के नज़दीक लाए बिना ऐसा कोई आंदोलन नहीं चलाया जा सकता। उन्हें लगता था कि ख़िलाफ़त का मुद्दा उठाकर वे दोनों समुदायों को नज़दीक ला सकते हैं। पहले विश्वयुद्ध में ऑटोमन तुर्की की हार हो चुकी थी और अफ़वाहें थीं कि ख़लीफ़ा पर एक सख़्त शांति संधि थोपी जाएगी, इसलिए मार्च 1919 में बंबई में ख़िलाफ़त समिति का गठन हुआ।
5शहरों में असहयोग आंदोलन धीमा क्यों पड़ गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: शहरों में असहयोग आंदोलन के धीमा पड़ने के तीन मुख्य कारण थे।
पहला, खादी का कपड़ा मिलों में भारी पैमाने पर बनने वाले कपड़ों के मुक़ाबले प्रायः महँगा होता था और ग़रीब उसे नहीं ख़रीद सकते थे, इसलिए वे मिलों के कपड़े का लंबे समय तक बहिष्कार नहीं कर सकते थे।
दूसरा, ब्रिटिश संस्थानों के बहिष्कार से समस्या पैदा हो गई, क्योंकि आंदोलन की कामयाबी के लिए वैकल्पिक भारतीय संस्थानों की स्थापना ज़रूरी थी, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत धीमी थी।
तीसरा, फलस्वरूप विद्यार्थी और शिक्षक सरकारी स्कूलों में लौटने लगे और वकील दोबारा सरकारी अदालतों में दिखाई देने लगे।
6अवध के किसान आंदोलन की मुख्य माँगें क्या थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अवध में संन्यासी बाबा रामचंद्र किसानों का नेतृत्व कर रहे थे और उनका आंदोलन तालुक़दारों तथा ज़मींदारों के ख़िलाफ़ था, जो किसानों से भारी-भरकम लगान और तरह-तरह के कर वसूल कर रहे थे। किसानों को बेगार करनी पड़ती थी, उनके पट्टे निश्चित नहीं होते थे और उन्हें बार-बार पट्टे की ज़मीन से हटा दिया जाता था ताकि ज़मीन पर उनका कोई अधिकार स्थापित न हो सके। इसलिए किसानों की माँग थी कि लगान कम किया जाए, बेगार ख़त्म हो और दमनकारी ज़मींदारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए।
7अल्लूरी सीताराम राजू के आंदोलन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: आंध्र प्रदेश की गूडेम पहाड़ियों में 1920 के दशक की शुरुआत में एक उग्र गुरिल्ला आंदोलन फैल गया। इसका कारण यह था कि अंग्रेज़ी सरकार ने बड़े-बड़े जंगलों में लोगों के दाख़िल होने पर पाबंदी लगा दी थी, जिससे लोग न तो मवेशी चरा सकते थे और न ही जलावन की लकड़ी और फल बीन सकते थे; और जब सरकार ने उन्हें सड़कों के निर्माण के लिए बेगार करने पर मजबूर किया तो लोगों ने बग़ावत कर दी। राजू महात्मा गांधी की महानता के गुण गाते थे और उन्होंने लोगों को खादी पहनने तथा शराब छोड़ने के लिए प्रेरित किया, लेकिन साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि भारत अहिंसा के बल पर नहीं बल्कि केवल बलप्रयोग के ज़रिए ही आज़ाद हो सकता है। 1924 में राजू को फाँसी दे दी गई और वे अपने लोगों के बीच लोकनायक बन गए।
8असम के बाग़ान मज़दूरों के लिए स्वराज का क्या अर्थ था?
उत्तर देखिए
उत्तर: असम के बाग़ानी मज़दूरों के लिए आज़ादी का मतलब यह था कि वे उन चारदीवारियों से जब चाहे आ-जा सकते थे जिनमें उनको बंद करके रखा गया था, और वे अपने गाँवों से संपर्क रख पाएँगे। इसका कारण यह था कि 1859 के इनलैंड इमिग्रेशन एक्ट के तहत बाग़ानों में काम करने वाले मज़दूरों को बिना इजाज़त बाग़ान से बाहर जाने की छूट नहीं थी। जब उन्होंने असहयोग आंदोलन के बारे में सुना तो हज़ारों मज़दूर बाग़ान छोड़कर अपने घर चल दिए, यह सोचकर कि अब गांधी राज आ रहा है और हरेक को गाँव में ज़मीन मिल जाएगी। लेकिन रेलवे और स्टीमरों की हड़ताल के कारण वे रास्ते में ही फँस गए और पुलिस ने उन्हें पकड़कर बुरी तरह पीटा।
9साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: ब्रिटेन की नयी टोरी सरकार ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में एक वैधानिक आयोग का गठन किया, जिसे भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करना था और उसके बारे में सुझाव देने थे। सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, सारे अंग्रेज़ थे। इसीलिए 1928 में जब साइमन कमीशन भारत पहुँचा तो उसका स्वागत ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारों से किया गया और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग समेत सभी पार्टियों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इसी प्रदर्शन के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने लाला लाजपत राय पर हमला किया और गहरे ज़ख़्मों के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।
10गांधीजी ने नमक को ही आंदोलन का प्रतीक क्यों चुना?
उत्तर देखिए
उत्तर: देश को एकजुट करने के लिए महात्मा गांधी को नमक एक शक्तिशाली प्रतीक दिखाई दिया। इसका पहला कारण यह था कि नमक का अमीर-ग़रीब, सभी इस्तेमाल करते थे। दूसरा कारण यह था कि यह भोजन का एक अभिन्न हिस्सा था। इसीलिए नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी इजारेदारी को महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन का सबसे दमनकारी पहलू बताया था। नमक ऐसी चीज़ थी जिसके ज़रिए समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ा जा सकता था।
11सविनय अवज्ञा आंदोलन असहयोग आंदोलन से किस तरह अलग था?
उत्तर देखिए
उत्तर: दोनों आंदोलनों में मुख्य अंतर यह था कि असहयोग आंदोलन में लोगों से केवल यह कहा गया था कि वे अंग्रेज़ों का सहयोग न करें, जबकि सविनय अवज्ञा आंदोलन में लोगों को औपनिवेशिक क़ानूनों का उल्लंघन करने के लिए आह्वान किया गया। दूसरा अंतर यह था कि असहयोग में मुख्य कार्यक्रम बहिष्कार का था, जबकि सविनय अवज्ञा में लोगों ने नमक क़ानून तोड़ा, लगान और चौकीदारी कर चुकाने से इनकार किया तथा वन क़ानूनों का उल्लंघन किया। तीसरा अंतर यह था कि असहयोग में ख़िलाफ़त के कारण मुस्लिम भागीदारी व्यापक थी, जबकि सविनय अवज्ञा में वह काफ़ी कम रही और इसमें महिलाओं ने बहुत बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया।
12सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भूमिका बताइए और उसकी सीमा भी लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सिविल नाफ़रमानी आंदोलन में औरतों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। गांधीजी के नमक सत्याग्रह के दौरान हज़ारों औरतें उनकी बात सुनने के लिए घर से बाहर आ जाती थीं। उन्होंने जुलूसों में हिस्सा लिया, नमक बनाया, विदेशी कपड़ों व शराब की दुकानों की पिकेटिंग की और बहुत सारी महिलाएँ जेल भी गईं। शहरी इलाक़ों में ज़्यादातर ऊँची जातियों की महिलाएँ सक्रिय थीं जबकि ग्रामीण इलाक़ों में संपन्न किसान परिवारों की महिलाएँ आंदोलन में हिस्सा ले रही थीं। लेकिन इसकी एक बड़ी सीमा यह थी कि सार्वजनिक भूमिका में इस इज़ाफ़े का मतलब यह नहीं था कि औरतों की स्थिति में कोई भारी बदलाव आने वाला था, और कांग्रेस लंबे समय तक किसी भी महत्त्वपूर्ण पद पर औरतों को जगह देने से हिचकिचाती रही।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (4 अंक)
1उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी? (अभ्यास प्रश्न 1-क)
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत जैसे उपनिवेशों में आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर पर जुड़ी हुई थी, और इसके कई कारण थे।
पहला, औपनिवेशिक शासकों के ख़िलाफ़ संघर्ष के दौरान लोग आपसी एकता को पहचानने लगे। जब सब पर एक ही शासन का दबाव था, तो सबको यह महसूस होने लगा कि उनकी समस्या साझा है।
दूसरा, उत्पीड़न और दमन के साझा भाव ने विभिन्न समूहों को एक-दूसरे से बाँध दिया था। जलियाँवाला बाग़ जैसी घटनाओं ने पूरे देश में एक जैसा ग़ुस्सा पैदा किया।
तीसरा, महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इन समूहों को इकट्ठा करके एक विशाल आंदोलन खड़ा किया, जिसमें किसान, मज़दूर, व्यापारी, विद्यार्थी और महिलाएँ सब शामिल थे।
लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर वर्ग और समूह पर उपनिवेशवाद का असर एक जैसा नहीं था, उनके अनुभव भी अलग थे और स्वतंत्रता के मायने भी भिन्न थे। इसलिए इस एकता में टकराव के बिंदु भी निहित थे।
2असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों ने किन-किन कारणों से हिस्सा लिया?
उत्तर देखिए
उत्तर: असहयोग-ख़िलाफ़त आंदोलन जनवरी 1921 में शुरू हुआ और इसमें विभिन्न सामाजिक समूहों ने हिस्सा लिया, लेकिन हरेक की अपनी-अपनी आकांक्षाएँ थीं।
शहरी मध्यवर्ग ने आंदोलन की शुरुआत की। हज़ारों विद्यार्थियों ने स्कूल-कॉलेज छोड़ दिए, हेडमास्टरों और शिक्षकों ने इस्तीफ़े सौंप दिए तथा वकीलों ने मुक़दमे लड़ना बंद कर दिया।
व्यापारी और उद्योगपति भी जुड़े, क्योंकि विदेशी कपड़ों का बहिष्कार होने से भारतीय कपड़ा मिलों और हथकरघों का उत्पादन बढ़ने लगा; 1921 से 1922 के बीच विदेशी कपड़ों का आयात आधा रह गया और उसकी क़ीमत 102 करोड़ से घटकर 57 करोड़ रह गई।
अवध के किसान तालुक़दारों और ज़मींदारों के ख़िलाफ़ जुड़े, क्योंकि उनसे भारी लगान वसूला जाता था, उनसे बेगार करवाई जाती थी और उनके पट्टे निश्चित नहीं होते थे।
आदिवासी किसानों ने आंदोलन का अपना अर्थ निकाला। गूडेम पहाड़ियों में वे इसलिए जुड़े क्योंकि सरकार ने जंगलों में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी और उनसे बेगार करवाई जा रही थी।
बाग़ान मज़दूरों के लिए स्वराज का मतलब था कि वे उन चारदीवारियों से जब चाहे आ-जा सकें और अपने गाँवों से संपर्क रख सकें।
इस प्रकार सभी ने स्वराज के आह्वान को स्वीकार तो किया, लेकिन उनके लिए उसके अर्थ अलग-अलग थे।
3सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न वर्गों और समूहों ने क्यों हिस्सा लिया? (चर्चा प्रश्न 1 का विस्तार)
उत्तर देखिए
उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लेने वाले हर समूह का अपना कारण था।
संपन्न किसानों — जैसे गुजरात के पटीदार और उत्तर प्रदेश के जाट — ने इसलिए हिस्सा लिया क्योंकि व्यापार में मंदी और गिरती क़ीमतों से उनकी नक़द आय ख़त्म होने लगी थी और सरकारी लगान चुकाना नामुमकिन हो गया था। उनके लिए स्वराज की लड़ाई भारी लगान के ख़िलाफ़ लड़ाई थी।
ग़रीब किसान केवल लगान में कमी नहीं चाहते थे, बल्कि वे चाहते थे कि ज़मींदारों को जो भाड़ा चुकाना था उसे माफ़ कर दिया जाए। इसीलिए उन्होंने कई रेडिकल आंदोलनों में हिस्सा लिया।
व्यवसायी वर्ग ने ऐसी औपनिवेशिक नीतियों का विरोध किया जिनसे उनकी व्यावसायिक गतिविधियों में रुकावट आती थी। वे विदेशी वस्तुओं के आयात से सुरक्षा चाहते थे और स्वराज को एक ऐसे युग के रूप में देखते थे जहाँ कारोबार पर औपनिवेशिक पाबंदियाँ नहीं होंगी।
औद्योगिक मज़दूरों ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार जैसे गांधीवादी विचारों को कम वेतन व ख़राब कार्यस्थितियों के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई से जोड़ लिया था।
औरतों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया, क्योंकि गांधीजी के आह्वान के बाद उन्हें राष्ट्र की सेवा करना अपना पवित्र दायित्व दिखाई देने लगा था।
4सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएँ क्या थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सभी सामाजिक समूह स्वराज की अमूर्त अवधारणा से प्रभावित नहीं थे, इसलिए इस आंदोलन की कुछ स्पष्ट सीमाएँ थीं।
पहली सीमा दलितों की सीमित भागीदारी थी। कांग्रेस ने लंबे समय तक दलितों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि वह रूढ़िवादी सवर्ण हिंदू सनातनपंथियों से डरी हुई थी। बहुत सारे दलित नेता अपने समुदाय की समस्याओं का अलग राजनीतिक हल चाहते थे और उनका मानना था कि उनकी सामाजिक अपंगता केवल राजनीतिक सशक्तीकरण से ही दूर हो सकती है।
दूसरी सीमा मुस्लिम संगठनों की दूरी थी। असहयोग-ख़िलाफ़त आंदोलन के शांत पड़ जाने के बाद मुसलमानों का एक बड़ा तबक़ा कांग्रेस से कटा हुआ महसूस करने लगा था और उन्हें भय था कि हिंदू बहुसंख्या के वर्चस्व की स्थिति में अल्पसंख्यकों की संस्कृति और पहचान खो जाएगी।
तीसरी सीमा ग़रीब किसानों का अनिश्चित संबंध था, क्योंकि अमीर किसानों और ज़मींदारों की नाराज़गी के भय से कांग्रेस ‘भाड़ा विरोधी’ आंदोलनों को समर्थन देने में हिचकिचाती थी।
चौथी सीमा औद्योगिक मज़दूरों की कम भागीदारी थी, क्योंकि जैसे-जैसे उद्योगपति कांग्रेस के नज़दीक आ रहे थे, मज़दूर कांग्रेस से छिटकने लगे थे।
5दलितों के प्रश्न पर गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के मतभेद और उसके समाधान का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: दलितों के प्रश्न पर दोनों नेताओं का उद्देश्य एक था, पर रास्ता अलग था।
गांधीजी का रास्ता सामाजिक सुधार का था। उन्होंने ऐलान किया कि अस्पृश्यता को ख़त्म किए बिना सौ साल तक भी स्वराज की स्थापना नहीं की जा सकती। उन्होंने ‘अछूतों’ को हरिजन यानी ईश्वर की संतान बताया और उन्हें मंदिरों, सार्वजनिक तालाबों, सड़कों तथा कुओं पर समान अधिकार दिलाने के लिए सत्याग्रह किया। मैला ढोनेवालों के काम को प्रतिष्ठा दिलाने के लिए वे ख़ुद शौचालय साफ़ करने लगे और उन्होंने ऊँची जातियों से हृदय परिवर्तन का आह्वान किया।
अंबेडकर का रास्ता राजनीतिक सशक्तीकरण का था। उन्होंने 1930 में दलितों को दमित वर्ग एसोसिएशन में संगठित किया। दलित नेता शिक्षा संस्थानों में आरक्षण और अलग निर्वाचन क्षेत्र चाहते थे, ताकि वहाँ से विधायी परिषदों के लिए केवल दलितों को ही चुनकर भेजा जा सके, क्योंकि उनका मानना था कि सामाजिक अपंगता केवल राजनीतिक सशक्तीकरण से ही दूर हो सकती है।
टकराव और समाधान दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सवाल पर दोनों में काफ़ी विवाद हुआ। जब ब्रिटिश सरकार ने अंबेडकर की माँग मान ली तो गांधीजी आमरण अनशन पर बैठ गए, क्योंकि उनका मत था कि इससे समाज में दलितों के एकीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी। आख़िरकार अंबेडकर ने गांधीजी की राय मान ली और सितंबर 1932 में पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए, जिससे दमित वर्गों को प्रांतीय एवं केंद्रीय विधायी परिषदों में आरक्षित सीटें मिल गईं, हालाँकि उनके लिए मतदान सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में ही होता था।
6भारत में सामूहिक अपनेपन का भाव किन सांस्कृतिक साधनों से पैदा हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: सामूहिक अपनेपन की भावना आंशिक रूप से संयुक्त संघर्षों के चलते पैदा हुई थी, लेकिन इनके अलावा बहुत सारी सांस्कृतिक प्रक्रियाएँ भी थीं जिनके ज़रिए राष्ट्रवाद लोगों की कल्पना और दिलोदिमाग़ पर छा गया।
पहला साधन भारत माता की छवि थी। इस छवि के निर्माण का आरंभ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने किया, जिन्होंने 1870 के दशक में ‘वन्दे मातरम्’ गीत लिखा और बाद में उसे अपने उपन्यास आनन्दमठ में शामिल किया। स्वदेशी आंदोलन की प्रेरणा से अबनीन्द्रनाथ टैगोर ने 1905 में भारत माता की विख्यात छवि चित्रित की, जिसमें उन्हें एक शांत, गंभीर और दैवी संन्यासिनी के रूप में दिखाया गया।
दूसरा साधन लोक कथाओं का पुनरुद्धार था। उन्नीसवीं सदी के आख़िर में राष्ट्रवादी भाटों व चारणों की लोक कथाओं को दर्ज करने लगे और गाँव-गाँव घूमकर लोक गीत इकट्ठा करने लगे। बंगाल में रबीन्द्रनाथ टैगोर और मद्रास में नटेसा शास्त्री ने इस दिशा में महत्त्वपूर्ण काम किया।
तीसरा साधन झंडे थे। स्वदेशी आंदोलन का तिरंगा (हरा, पीला, लाल) आठ प्रांतों के आठ कमल और हिंदू-मुस्लिम एकता के अर्धचंद्र से युक्त था, जबकि 1921 के स्वराज झंडे (सफ़ेद, हरा, लाल) के बीच में स्वावलंबन का प्रतीक चरखा था।
चौथा साधन इतिहास की पुनर्व्याख्या थी, जिसमें भारतीयों ने अपने गौरवमयी प्राचीन युग के बारे में लिखना शुरू किया। लेकिन इसकी समस्या यह थी कि जिस अतीत का गौरवगान किया जा रहा था वह हिंदुओं का अतीत था, इसलिए अन्य समुदायों के लोग अलग-थलग महसूस करने लगे थे।
7भारत छोड़ो आंदोलन का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: क्रिप्स मिशन की असफलता एवं द्वितीय विश्व युद्ध के प्रभावों ने भारत में व्यापक असंतोष को जन्म दिया, जिसके फलस्वरूप गांधीजी ने एक आंदोलन शुरू किया जिसमें उन्होंने अंग्रेज़ों के पूरी तरह से भारत छोड़ने पर ज़ोर दिया।
14 जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस कार्य समिति ने ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित किया, जिसमें सत्ता का तत्काल हस्तांतरण एवं भारत छोड़ने की माँग की गई। 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और पूरे देश में व्यापक पैमाने पर एक अहिंसक जन संघर्ष का आह्वान किया गया। इसी अवसर पर गांधीजी ने प्रसिद्ध ‘करो या मरो’ भाषण दिया।
इस आह्वान ने देश के अधिकतर हिस्सों में राज्य व्यवस्था को ठप्प कर दिया और लोग स्वतः ही आंदोलन में कूद पड़े। लोगों ने हड़तालें कीं तथा राष्ट्रीय गीतों एवं नारों के साथ प्रदर्शन किए और जुलूस निकाले।
यह वास्तव में एक जन आंदोलन था जिसमें छात्र, मज़दूर और किसान जैसे हज़ारों साधारण लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें जयप्रकाश नारायण, अरुणा आसफ़ अली एवं राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं के साथ-साथ बंगाल से मातांगिनी हाजरा, असम से कनकलता बरुआ और उड़ीसा से रमा देवी जैसी महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की। अंग्रेज़ों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के बावजूद इसे दबाने में एक वर्ष से अधिक समय लग गया।
8इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 4)
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत माता और जर्मेनिया, दोनों ही अपने-अपने राष्ट्र के नारी रूपक हैं, यानी दोनों में राष्ट्र जैसे अमूर्त विचार को एक नारी छवि के रूप में ठोस बनाया गया है।
समानताएँ दोनों ही असल जीवन की कोई ख़ास महिला नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के विचार का प्रतीक हैं। दोनों की छवियों को व्यापक रूप से फैलाया गया — जर्मेनिया के चित्र फ़्रैंकफ़र्ट संसद में टाँगे गए और भारत माता की छवि बड़े पैमाने पर तसवीरों में उतारी गई। दोनों की छवियों में प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है।
अंतर जर्मेनिया के पास तलवार, बलूत पत्तियों का मुकुट और टूटी हुई बेड़ियाँ हैं, जो क्रमशः मुक़ाबले की तैयारी, बहादुरी और आज़ादी के प्रतीक हैं — यानी वह लड़ने वाली छवि है। इसके विपरीत अबनीन्द्रनाथ टैगोर की भारत माता को संन्यासिनी के रूप में दर्शाया गया है, जो शांत, गंभीर, दैवी और अध्यात्मिक गुणों से युक्त है और जिसके हाथ में माला है।
एक और अंतर यह है कि भारत माता की छवि एक जैसी नहीं रही। आगे चलकर अलग-अलग कलाकारों ने उसे अलग रूप दिए — चित्र 14 में भारत माता के हाथों में त्रिशूल है और वह हाथी व शेर के बीच खड़ी है, जो शक्ति और सत्ता के प्रतीक हैं। यानी यह छवि जर्मेनिया की तरह अधिक शक्तिशाली रूप में भी सामने आई।
भाग ङ — स्रोत-आधारित प्रश्न (4 अंक)
स्रोत 1 — सत्याग्रह पर महात्मा गांधी के विचार (स्रोत-क)
“कहा जाता है कि ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ दुर्बलों का हथियार है। लेकिन इस लेख में जिस शक्ति की बात की गई है उसे केवल ताक़तवर ही इस्तेमाल कर सकते हैं। …सत्याग्रह शारीरिक बल नहीं है। सत्याग्रही अपने शत्रु को कष्ट नहीं पहुँचाता; वह अपने शत्रु का विनाश नहीं चाहता। …सत्याग्रह तो शुद्ध आत्मबल है। …अहिंसा सर्वोच्च धर्म है।”
(क) गांधीजी ने ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ शब्द को क्यों अस्वीकार किया? (2) (ख) सत्याग्रही अपने शत्रु के साथ कैसा व्यवहार करता है? (1) (ग) गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह का आधार क्या है? (1)
मॉडल उत्तर: (क) क्योंकि ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ को दुर्बलों का हथियार माना जाता है, जबकि गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह की शक्ति को केवल ताक़तवर लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं और इसके लिए सघन सक्रियता चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ़्रीका का आंदोलन निष्क्रिय नहीं बल्कि सक्रिय आंदोलन था। (ख) सत्याग्रही अपने शत्रु को कष्ट नहीं पहुँचाता और न ही वह अपने शत्रु का विनाश चाहता है; सत्याग्रह के प्रयोग में दुर्भावना के लिए कोई स्थान नहीं होता। (ग) गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह शुद्ध आत्मबल है और सत्य ही आत्मा का आधार होता है।
स्रोत 2 — जवाहरलाल नेहरू, रायबरेली (स्रोत-ख)
“उनका आचरण ख़तरे के सामने होते हुए भी बहादुर, शांत और निश्चिंत लोगों जैसा था… एक पल के लिए मेरा भी ख़ून खौल उठा था, अहिंसा तो न जाने कहाँ छूट गई थी — लेकिन सिर्फ़ एक पल के लिए… मैंने पूरी विनम्रता के साथ अहिंसा पर उनसे बात की — यह सबक़ उनसे ज़्यादा मुझे सीखना था — उन्होंने मेरी बात समझी और शांति से चले गए।”
(क) यह घटना कब और कहाँ हुई थी? (1) (ख) नेहरू का ‘ख़ून खौल उठा’ — इसका क्या कारण था? (1) (ग) “यह सबक़ उनसे ज़्यादा मुझे सीखना था” — इस वाक्य का क्या अर्थ है? (2)
मॉडल उत्तर: (क) 6 जनवरी 1921 को संयुक्त प्रांत में रायबरेली के पास, जब पुलिस ने किसानों पर गोली चलाई थी। (ख) नेहरू घटनास्थल का दौरा करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे उन्हें ग़ुस्सा आ गया। (ग) इसका अर्थ यह है कि नेहरू स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि उस क्षण अहिंसा में किसान उनसे आगे थे। किसान ख़तरे के सामने भी शांत और निश्चिंत थे, जबकि नेहरू का ख़ून खौल उठा था। इसलिए वे कहते हैं कि अहिंसा का सबक़ उन्हें किसानों से सीखने की ज़रूरत थी, न कि किसानों को उनसे।
स्रोत 3 — स्वतंत्रता दिवस की शपथ, 26 जनवरी 1930 (स्रोत-ग)
“हमारा विश्वास है कि किसी भी समाज की तरह भारतीय जनता का भी यह एक अहरणीय अधिकार है कि उन्हें आज़ादी मिले… यदि कोई भी सरकार अपनी जनता को इन अधिकारों से वंचित रखती है और दबाती है तो जनता को भी सरकार को बदलने या उसे समूल समाप्त करने का अधिकार है। …इसलिए हमारा विश्वास है कि भारत को अनिवार्य रूप से ब्रिटेन के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करके पूर्ण स्वराज प्राप्त करना चाहिए।”
(क) यह शपथ किस अधिवेशन के फ़ैसले के बाद ली गई? (1) (ख) ‘अहरणीय अधिकार’ का क्या अर्थ है? (1) (ग) इस शपथ में सरकार बदलने के अधिकार का तर्क किस आधार पर दिया गया है? (2)
मॉडल उत्तर: (क) दिसंबर 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुए कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के बाद, जहाँ ‘पूर्ण स्वराज’ की माँग औपचारिक रूप से मान ली गई थी और तय हुआ था कि 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। (ख) अहरणीय (inalienable) अधिकार वह अधिकार है जिसे किसी से छीना नहीं जा सकता। (ग) तर्क यह दिया गया है कि आज़ादी, अपनी मेहनत का फल और जीवन की सभी आवश्यकताएँ पाना जनता का अहरणीय अधिकार है। यदि कोई सरकार जनता को इन अधिकारों से वंचित रखती है और उसे दबाती है, तो जनता को उस सरकार को बदलने या समाप्त करने का अधिकार मिल जाता है। शपथ में कहा गया कि ब्रितानी सरकार ने न केवल भारतीय जनता को स्वतंत्रता से वंचित किया बल्कि उसका शोषण भी किया है, इसलिए पूर्ण स्वराज ज़रूरी है।
स्रोत 4 — सिलेसिया के बुनकर नहीं, बल्कि यहाँ: बागानों में स्वराज
“असम के बागानी मज़दूरों के लिए आज़ादी का मतलब यह था कि वे उन चारदीवारियों से जब चाहे आ-जा सकते हैं जिनमें उनको बंद करके रखा गया था। उनके लिए आज़ादी का मतलब था कि वे अपने गाँवों से संपर्क रख पाएँगे।”
(क) बाग़ान मज़दूरों पर कौन-सा क़ानून लागू था और उसमें क्या प्रावधान था? (2) (ख) असहयोग आंदोलन की ख़बर सुनकर मज़दूरों ने क्या किया? (1) (ग) उनका क्या हश्र हुआ? (1)
मॉडल उत्तर: (क) उन पर 1859 का इनलैंड इमिग्रेशन एक्ट लागू था, जिसके तहत बाग़ानों में काम करने वाले मज़दूरों को बिना इजाज़त बाग़ान से बाहर जाने की छूट नहीं होती थी और यह इजाज़त उन्हें विरले ही कभी मिलती थी। (ख) हज़ारों मज़दूर अपने अधिकारियों की अवहेलना करने लगे, उन्होंने बाग़ान छोड़ दिए और अपने घर की ओर चल दिए, क्योंकि उन्हें लगता था कि अब गांधी राज आ रहा है और हरेक को गाँव में ज़मीन मिल जाएगी। (ग) वे अपनी मंज़िल पर नहीं पहुँच पाए। रेलवे और स्टीमरों की हड़ताल के कारण वे रास्ते में ही फँस गए, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और उनकी बुरी तरह पिटाई हुई।
भाग च — मानचित्र कार्य (सबसे महत्त्वपूर्ण)
यह भाग सबसे ज़्यादा ध्यान से पढ़िए। बोर्ड परीक्षा में भारत के रेखा-मानचित्र पर स्थान पहचानकर अंकित करने को कहा जाता है, और यह अध्याय ही उसका मुख्य स्रोत है। रोज़ पाँच मिनट अभ्यास कीजिए — यहाँ पूरे अंक मिलना सबसे आसान है।
च.1 निर्धारित स्थानों की पूरी सूची
(क) महात्मा गांधी के प्रमुख सत्याग्रह — ये सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं
| क्रम | स्थान | राज्य | क्या हुआ |
|---|---|---|---|
| 1 | चंपारण | बिहार | 1917 — दमनकारी बागान व्यवस्था के ख़िलाफ़ किसानों का सत्याग्रह |
| 2 | खेड़ा | गुजरात | 1917 — फ़सल ख़राबी और प्लेग के कारण लगान में ढील के लिए किसान सत्याग्रह |
| 3 | अहमदाबाद | गुजरात | 1918 — सूती कपड़ा मिल मज़दूरों का सत्याग्रह |
(ख) कांग्रेस के अधिवेशन
| क्रम | स्थान | कब | क्या हुआ |
|---|---|---|---|
| 4 | कलकत्ता | सितंबर 1920 | असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित |
| 5 | नागपुर | दिसंबर 1920 | असहयोग कार्यक्रम को स्वीकृति |
| 6 | लाहौर | दिसंबर 1929 | ‘पूर्ण स्वराज’ की माँग स्वीकार; नेहरू अध्यक्ष |
| 7 | मद्रास | 1927 | कांग्रेस अधिवेशन |
(ग) आंदोलनों से जुड़े प्रमुख स्थान
| क्रम | स्थान | राज्य | क्या हुआ |
|---|---|---|---|
| 8 | अमृतसर | पंजाब | 13 अप्रैल 1919 — जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड |
| 9 | चौरी-चौरा | उत्तर प्रदेश (गोरखपुर) | फ़रवरी 1922 — हिंसक टकराव; असहयोग आंदोलन वापस लिया गया |
| 10 | दांडी | गुजरात | 6 अप्रैल 1930 — नमक क़ानून तोड़ा गया |
| 11 | साबरमती | गुजरात | नमक यात्रा का प्रारंभ-स्थल (गांधीजी का आश्रम) |
| 12 | बारदोली | गुजरात | 1928 — वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में किसान आंदोलन |
| 13 | अवध | उत्तर प्रदेश | बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसान आंदोलन; अवध किसान सभा |
| 14 | गूडेम पहाड़ियाँ | आंध्र प्रदेश | अल्लूरी सीताराम राजू का आदिवासी विद्रोह |
| 15 | शोलापुर | महाराष्ट्र | 1930 — गांधीजी की गिरफ़्तारी के बाद मज़दूरों का उग्र प्रदर्शन |
| 16 | बंबई | महाराष्ट्र | मार्च 1919 ख़िलाफ़त समिति; 8 अगस्त 1942 भारत छोड़ो प्रस्ताव का समर्थन |
| 17 | वर्धा | महाराष्ट्र | 14 जुलाई 1942 — ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित |
| 18 | असम | असम | बाग़ान मज़दूरों का आंदोलन |
च.2 मानचित्र अभ्यास कैसे करें — पाँच आसान क़दम
पहला क़दम — गुजरात से शुरू कीजिए। इस अध्याय के चार महत्त्वपूर्ण स्थान अकेले गुजरात में हैं — खेड़ा, अहमदाबाद, साबरमती, दांडी और बारदोली। अगर आपने गुजरात ठीक से पहचान लिया, तो पाँच अंक पक्के।
दूसरा क़दम — साबरमती से दांडी तक की रेखा खींचिए। यह 240 किलोमीटर की नमक यात्रा है और इसे मानचित्र पर तीर से दिखाना बहुत अच्छा लगता है।
तीसरा क़दम — उत्तर की तीन जगहें याद कीजिए। अमृतसर (पंजाब), लाहौर (पंजाब, अब पाकिस्तान में), और चौरी-चौरा तथा अवध (उत्तर प्रदेश)।
चौथा क़दम — पूरब और दक्षिण। कलकत्ता (पूरब), नागपुर और बंबई तथा वर्धा (मध्य/पश्चिम), मद्रास (दक्षिण), गूडेम पहाड़ियाँ (आंध्र प्रदेश)।
पाँचवाँ क़दम — रोज़ एक बार खाली नक़्शे पर बनाइए। केवल पढ़ने से मानचित्र नहीं आता; हाथ से बनाने पर ही याद रहता है।
च.3 अभ्यास प्रश्न
1भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को अंकित कीजिए —
(क) वह स्थान जहाँ 1917 में गांधीजी ने बागान व्यवस्था के ख़िलाफ़ सत्याग्रह किया (चंपारण)
(ख) वह स्थान जहाँ 13 अप्रैल 1919 को हत्याकांड हुआ (अमृतसर)
(ग) वह स्थान जहाँ गांधीजी ने नमक क़ानून तोड़ा (दांडी)
2भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को अंकित कीजिए —
(क) वह स्थान जहाँ दिसंबर 1920 में असहयोग कार्यक्रम स्वीकृत हुआ (नागपुर)
(ख) वह स्थान जहाँ फ़रवरी 1922 में हिंसक घटना हुई (चौरी-चौरा)
(ग) वह स्थान जहाँ दिसंबर 1929 में ‘पूर्ण स्वराज’ की माँग मानी गई (लाहौर)
3भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को अंकित कीजिए —
(क) 1928 के किसान आंदोलन का स्थान (बारदोली)
(ख) 1918 के मिल मज़दूर सत्याग्रह का स्थान (अहमदाबाद)
(ग) वह स्थान जहाँ 14 जुलाई 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ (वर्धा)
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना 1 (कुल 12 अंक · 35 मिनट)
1महात्मा गांधी भारत कब लौटे? (1)
2‘बेगार’ का क्या अर्थ है? (1)
3सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है? (2)
4भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे? (3)
5सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न वर्गों ने क्यों हिस्सा लिया? (4)
6मानचित्र पर अंकित कीजिए — चंपारण, अमृतसर, दांडी (1×3 = अतिरिक्त)
नमूना 2 (कुल 12 अंक · 35 मिनट)
1‘हिंद स्वराज’ किसने और कब लिखी? (1)
2जनरल डायर ने गोली चलाने का क्या कारण बताया? (1)
31921 के स्वराज झंडे का वर्णन कीजिए। (2)
4गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया? (3)
5दलितों के प्रश्न पर गांधीजी और अंबेडकर के मतभेद तथा उसके समाधान का वर्णन कीजिए। (4)
6मानचित्र पर अंकित कीजिए — नागपुर, चौरी-चौरा, बारदोली (1×3 = अतिरिक्त)
नमूना 3 (कुल 12 अंक · 35 मिनट)
1‘पिकेटिंग’ क्या होती है? (1)
2अवध में किसानों का नेतृत्व किसने किया? (1)
3गांधीजी ने नमक को ही प्रतीक क्यों चुना? (2)
4शहरों में असहयोग आंदोलन धीमा क्यों पड़ गया? (3)
5भारत में सामूहिक अपनेपन का भाव किन सांस्कृतिक साधनों से पैदा हुआ? (4)
6मानचित्र पर अंकित कीजिए — खेड़ा, अहमदाबाद, कलकत्ता (1×3 = अतिरिक्त)