यह फ़ाइल PARAKH (राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र) के ढाँचे पर आधारित है। इसमें रटने वाले प्रश्न नहीं, सोचने वाले प्रश्न हैं।
| क्षेत्र | भार | इसमें क्या देखा जाता है |
|---|---|---|
| जागरूकता | 50% | विद्यार्थी तथ्यों को समझकर नयी परिस्थिति में लागू कर पाता है या नहीं |
| संवेदनशीलता | 20% | विद्यार्थी दूसरों की स्थिति को महसूस कर पाता है या नहीं |
| सृजनात्मकता | 30% | विद्यार्थी अपनी ओर से कुछ नया बना या सोच पाता है या नहीं |
शिक्षक के लिए: इन प्रश्नों का कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं होता। उत्तर की जाँच रूब्रिक से कीजिए, कुंजी से नहीं। नीचे हर प्रश्न के साथ ‘अच्छे उत्तर में क्या दिखना चाहिए’ लिखा गया है।
भाग क — जागरूकता (50%)
1पाठ्यपुस्तक के चित्र 1 (‘डॉन ऑफ़ द सेंचुरी’, 1900) में प्रगति की देवी के पीछे रेलवे, कैमरा, मशीनें, प्रिंटिंग प्रेस और कारख़ाना दिखाए गए हैं। 4 अंक
(क) इस तसवीर में कौन-सी बातें नहीं दिखाई गईं, जो उसी समय हो रही थीं? कोई तीन लिखिए। (3)
(ख) निर्माता ने उन्हें क्यों नहीं दिखाया होगा? (1)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- कोई भी तीन बातें, जैसे — भारत के बुनकरों की बरबादी, ब्रिटेन में 10 प्रतिशत निहायत ग़रीब शहरी आबादी, स्पिनिंग जेनी पर मज़दूरों के हमले, गली-मोहल्लों की छोटी वर्कशॉप्स में काम करते लाखों लोग, या गुमाश्तों द्वारा बुनकरों को दी जाने वाली सज़ाएँ।
- (ख) का उत्तर यह समझ दिखाए कि तसवीर एक संगीत की किताब की जिल्द थी, यानी वह बेचने के लिए बनी थी, और लोगों को गर्व और उम्मीद बेचने के लिए केवल चमकदार पक्ष दिखाया गया।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि इतिहास में हमेशा यह पूछना चाहिए कि तसवीर किसने बनवाई और किसके लिए बनवाई।
2नीचे दो कथन दिए गए हैं 4 अंक
कथन A: “उन्नीसवीं सदी के अमेरिका में उद्योगपति मशीनों का इस्तेमाल करना ज़्यादा पसंद करते थे।”
कथन B: “उन्नीसवीं सदी के ब्रिटेन में उद्योगपति हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देते थे।”
दोनों देशों में यह फ़र्क़ क्यों था? क्या इससे यह सिद्ध होता है कि मशीन हमेशा बेहतर होती है? तर्क सहित लिखिए।
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- अमेरिका में मज़दूरों की कमी थी, इसलिए वहाँ उद्योगपति कम से कम मज़दूरों से काम चलाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल करते थे।
- ब्रिटेन में मानव श्रम की कोई कमी नहीं थी; ग़रीब किसान और बेकार लोग बड़ी संख्या में शहरों को जाते थे और श्रमिकों की बहुतायत से वेतन गिर जाते थे।
- इससे यह सिद्ध होता है कि मशीन अपनाने का फ़ैसला केवल तकनीक का नहीं, बल्कि उस देश की परिस्थिति का होता है — जहाँ मज़दूर सस्ता हो वहाँ महँगी मशीन का कोई फ़ायदा नहीं।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि मशीन तभी ‘बेहतर’ होती है जब वह किसी वास्तविक समस्या का हल हो, और यही कारण था कि भाप के इंजन को सालों तक कोई ख़रीदार नहीं मिला।
3नीचे एक तालिका दी गई है 4 अंक
| वर्ष | भारत के निर्यात में सूती माल | भारतीय आयात में सूती कपड़ा |
|---|---|---|
| अठारहवीं सदी का आख़िर | बहुत ऊँचा | न के बराबर |
| 1811–12 | 33 प्रतिशत | — |
| 1850–51 | 3 प्रतिशत | 31 प्रतिशत (1850) |
| 1870 | — | 50 प्रतिशत से ऊपर |
इन आँकड़ों को एक साथ देखकर बताइए कि भारत की अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव आया और यह बदलाव अपने आप हुआ या करवाया गया।
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- भारत जो पहले कपड़ा बेचने वाला देश था, वह कपड़ा ख़रीदने वाला देश बन गया — निर्यात 33 से 3 प्रतिशत पर आ गया और आयात न के बराबर से 50 प्रतिशत से ऊपर चला गया।
- यह बदलाव अपने आप नहीं हुआ, बल्कि करवाया गया — इंग्लैंड के उद्योगपतियों ने सरकार पर दबाव डालकर आयातित कपड़ों पर आयात शुल्क लगवाया और ईस्ट इंडिया कंपनी पर दबाव डालकर ब्रिटिश कपड़े भारतीय बाज़ारों में बिकवाए।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि यह ‘मुक्त प्रतिस्पर्धा’ नहीं थी — एक तरफ़ ब्रिटेन ने अपना बाज़ार बंद किया और दूसरी तरफ़ भारत का बाज़ार खोल दिया।
4एक विद्यार्थी कहता है — “कारख़ाने आ जाने के बाद हाथ से काम करने वाले तो अपने आप ख़त्म हो जाने चाहिए थे।” 4 अंक
पाठ्यपुस्तक के आँकड़ों के आधार पर बताइए कि क्या भारत में ऐसा हुआ, और यदि नहीं तो क्यों।
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- भारत में ऐसा नहीं हुआ। 1911 में पंजीकृत फ़ैक्ट्रियों में कुल औद्योगिक श्रम शक्ति का केवल 5 प्रतिशत और 1931 में 10 प्रतिशत काम करता था; बाक़ी मज़दूर गली-मोहल्लों की छोटी वर्कशॉप और घरेलू इकाइयों में थे।
- 1900 से 1940 के बीच हथकरघों पर बने कपड़े का उत्पादन तीन गुना हो चुका था।
- इसके तीन कारण थे — फ़्लाई शटल जैसी सस्ती तकनीक, महीन कपड़े की स्थिर माँग, और यह कि मिलें विशेष प्रकार की बुनाई (बुने हुए बॉर्डर वाली साड़ियाँ, मद्रास की लुंगियाँ) की नक़ल नहीं कर सकती थीं।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि इसका मतलब बुनकर की ज़िंदगी अच्छी होना नहीं था — उन्हें दिन-रात काम करना पड़ता था और पूरा परिवार काम में लगा रहता था।
5नीचे एक स्थिति दी गई है 4 अंक
किसी गाँव में एक कारीगर है जिससे चार व्यापारी माल ख़रीदना चाहते हैं। अब मान लीजिए तीन व्यापारियों को हटा दिया जाता है, और बचा हुआ एक व्यापारी उसे पहले ही पैसा दे देता है इस शर्त पर कि वह किसी और को माल नहीं बेचेगा।
(क) दोनों स्थितियों में कारीगर की सौदेबाज़ी की ताक़त की तुलना कीजिए। (2)
(ख) यह स्थिति इस अध्याय की किस घटना से मेल खाती है? (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- (क) चार ख़रीदार होने पर कारीगर मोल-भाव कर सकता था और सबसे ऊँची बोली लगाने वाले को माल बेच सकता था। एक ही ख़रीदार बचने और पेशगी ले लेने के बाद उसकी सौदेबाज़ी की ताक़त पूरी तरह ख़त्म हो गई।
- (ख) यह ठीक वही स्थिति है जो ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक सत्ता स्थापित होने के बाद भारतीय बुनकरों की हुई। पहले फ़्रांसीसी, डच, पुर्तगाली और स्थानीय व्यापारी होड़ में रहते थे; बाद में कंपनी ने एकाधिकार का दावा किया, गुमाश्ता नियुक्त किए और पेशगी देकर बुनकरों को अन्य ख़रीदारों से कारोबार करने पर पाबंदी लगा दी।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि क़र्ज़ ही वह ज़ंजीर थी जिसने बुनकर को बाँध दिया — उसे कम क़ीमत मिलती थी पर वह कंपनी से बँधा हुआ था।
6पाठ्यपुस्तक कहती है कि उन्नीसवीं सदी की शुरुआत तक पूरे इंग्लैंड में भाप के सिर्फ़ 321 इंजन थे, और जेम्स वॉट के इंजन को सालों तक कोई ख़रीदार नहीं मिला। 4 अंक
यह तथ्य ‘औद्योगिक क्रांति’ शब्द पर क्या सवाल खड़ा करता है?
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- ‘क्रांति’ शब्द से लगता है कि बदलाव अचानक और तेज़ी से हुआ, लेकिन यह आँकड़ा दिखाता है कि सबसे शक्तिशाली तकनीक को अपनाने में भी उद्योगपति बहुत हिचकिचा रहे थे।
- इसके कारण भी बताने चाहिए — नयी तकनीक महँगी थी, मशीनें अकसर ख़राब हो जाती थीं, मरम्मत पर काफ़ी ख़र्चा आता था और वे उतनी अच्छी नहीं थीं जितना दावा किया जाता था।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी जोड़ेगा कि इसीलिए इतिहासकार मानते हैं कि उन्नीसवीं सदी के मध्य का औसत मज़दूर मशीनों पर काम करने वाला नहीं बल्कि परंपरागत कारीगर ही होता था, और NCERT ने अध्याय का नाम ‘औद्योगिक क्रांति’ नहीं बल्कि ‘औद्योगीकरण का युग’ रखा है।
7पहले विश्व युद्ध ने भारतीय उद्योगों को फ़ायदा पहुँचाया। 4 अंक
(क) यह फ़ायदा किन कारणों से हुआ? कोई तीन कारण लिखिए। (3)
(ख) क्या यह फ़ायदा भारत की अपनी मेहनत का नतीजा था? अपनी राय दीजिए। (1)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- (क) कोई तीन कारण — ब्रिटिश कारख़ाने युद्ध संबंधी उत्पादन में व्यस्त थे इसलिए मैनचेस्टर का आयात कम हो गया; भारतीय बाज़ारों को रातोंरात एक विशाल देशी बाज़ार मिल गया; भारतीय कारख़ानों में फ़ौज के लिए जूट की बोरियाँ, वर्दी, टेंट, जूते और जीन बनने लगे; नए कारख़ाने लगे और पुराने कई पालियों में चलने लगे।
- (ख) की राय जो भी हो, उसमें यह समझ दिखनी चाहिए कि यह मौक़ा एक बाहरी घटना से मिला था, न कि किसी नीति से — यानी भारतीय उद्योग तब बढ़ा जब औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा अपने आप हट गई।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि इससे यह सिद्ध होता है कि भारतीय उद्योग की असली रुकावट क्षमता की कमी नहीं, औपनिवेशिक नीति थी।
8नीचे मैनचेस्टर के दो लेबल का विवरण दिया गया है 4 अंक
एक लेबल पर देवी लक्ष्मी और सरस्वती की तसवीर है। दूसरे लेबल पर महाराजा रणजीत सिंह का चित्र है।
(क) निर्माता ने ये तसवीरें क्यों लगाईं? (2)
(ख) आज के विज्ञापनों में इसी तरीक़े का कोई उदाहरण दीजिए। (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- (क) देवी-देवताओं की तसवीर के बहाने निर्माता यह दिखाने की कोशिश करते थे कि ईश्वर भी चाहता है कि लोग उस चीज़ को ख़रीदें, और इनसे विदेशों में बनी चीज़ भी भारतीयों को जानी-पहचानी सी लगती थी। महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की तसवीर का संदेश यह होता था कि अगर आप इस शाही व्यक्ति का सम्मान करते हैं तो इस उत्पाद का भी सम्मान कीजिए।
- (ख) आज का कोई भी उदाहरण, जैसे — दुकानों के कैलेंडर पर लक्ष्मी-गणेश, विज्ञापनों में क्रिकेट खिलाड़ी या फ़िल्मी सितारे, या त्योहारों के समय देवी-देवताओं वाले विज्ञापन।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि तरीक़ा वही है — भरोसे को उधार लेना; बस चेहरे बदल गए हैं।
भाग ख — संवेदनशीलता (20%)
9स्रोत-क (बिल थोर्न) दोबारा पढ़िए 4 अंक
“कई दिन हम 20 मील और कई बार उससे कम पैदल चलते थे… तीसरे दिन हमारे पैसे ख़त्म हो गए… दो रातें हमने बाहर ही सोते हुए गुज़ारीं…”
(क) यह पढ़कर आपको कैसा लगा? दो-तीन वाक्यों में लिखिए। (2)
(ख) आपके अनुसार उस समय के मज़दूर के लिए सबसे बड़ी असुरक्षा क्या थी? (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- विद्यार्थी की अपनी ईमानदार प्रतिक्रिया — कोई भी भाव स्वीकार्य है, बशर्ते वह स्रोत से जुड़ा हो।
- असुरक्षा की पहचान — नौकरी का कोई भरोसा नहीं था, रहने की जगह नहीं थी, मौसम बदलते ही काम चला जाता था, और नौकरी मिलना पूरी तरह जान-पहचान पर निर्भर था।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि सबसे बड़ी असुरक्षा यह थी कि मज़दूर के पास कोई ऐसा साधन नहीं था जिससे वह अपनी हालत बदल सके — न बचत, न शिक्षा, न संगठन।
10पाठ्यपुस्तक कहती है कि माल समय पर तैयार न होने पर गुमाश्ता बुनकरों को सज़ा देते थे — उन्हें अकसर पीटा जाता था और कोड़े बरसाए जाते थे। 4 अंक
(क) एक बुनकर के मन में उस समय क्या चल रहा होगा? (2)
(ख) उसने विरोध के जो तरीक़े चुने, उनमें से आपको कौन-सा सबसे साहसी लगता है और क्यों? (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- बुनकर की भावना — अपमान, लाचारी, ग़ुस्सा; और यह अहसास कि जिस हुनर पर उसे गर्व था उसी ने उसे बंधन में डाल दिया।
- तीनों तरीक़ों में से कोई एक चुनाव, कारण सहित — गाँव छोड़कर चले जाना, गाँव के व्यापारियों के साथ मिलकर बग़ावत करना, या क़र्ज़ा लौटाने से इनकार करके करघे बंद कर देना।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी कहेगा कि करघा बंद करके खेतों में मज़दूरी करना सबसे कठिन फ़ैसला था, क्योंकि इसमें बुनकर को अपनी पीढ़ियों पुरानी पहचान छोड़नी पड़ी।
11स्रोत-च में भाई भोसले अपने पिता के बारे में कहते हैं 4 अंक
“उस ज़माने में दस घंटे की शिफ़्ट होती थी। शाम पाँच बजे से सुबह तीन बजे तक काम के सबसे भयानक घंटे। मेरे पिताजी ने 35 साल नौकरी की। उन्हें दमा जैसी बीमारी हो गई और वे काम करने से लाचार हो गए… इसके बाद मेरे पिताजी वापस गाँव चले गए।”
(क) 35 साल की नौकरी के बाद उन्हें क्या मिला? (2)
(ख) इससे उस दौर की मज़दूर-व्यवस्था के बारे में क्या पता चलता है? (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- (क) उन्हें बीमारी मिली और काम छूट गया; कोई पेंशन, कोई मुआवज़ा या कोई सुरक्षा नहीं मिली, और उन्हें वापस गाँव लौटना पड़ा।
- (ख) इससे पता चलता है कि मज़दूर की पूरी ज़िंदगी मिल को दे देने के बाद भी उसके पास कुछ नहीं बचता था; काम की स्थितियाँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थीं और बुढ़ापे या बीमारी में कोई व्यवस्था नहीं थी।
- उच्च स्तर का उत्तर आज से तुलना करेगा — आज मज़दूर के पास कुछ क़ानूनी अधिकार, बीमा और पेंशन की व्यवस्था है, जो उस समय नहीं थी।
12पाठ्यपुस्तक बुनकरों के बारे में लिखती है — “उनकी ज़िंदगी बहुत कठोर थी। उन्हें दिन-रात काम करना पड़ता था। अकसर पूरा परिवार — बच्चे, बूढ़े, औरतें — उत्पादन के किसी न किसी काम में हाथ बढ़ाता था।” 4 अंक
इस वाक्य में ‘बच्चे’ शब्द पर रुककर सोचिए। इसका क्या अर्थ है और आज इस बारे में क्या बदला है?
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- इसका अर्थ यह है कि बच्चों को पढ़ने या खेलने के बजाय काम करना पड़ता था, क्योंकि परिवार की आमदनी अकेले बड़ों से नहीं चलती थी।
- आज के बदलाव — शिक्षा का अधिकार, बाल श्रम पर रोक के क़ानून, मध्याह्न भोजन जैसी योजनाएँ।
- उच्च स्तर का उत्तर यह भी स्वीकार करेगा कि बदलाव पूरा नहीं हुआ है और आज भी बहुत सारे बच्चे काम करते हैं, इसलिए यह इतिहास केवल अतीत की बात नहीं है।
भाग ग — सृजनात्मकता (30%)
13कल्पना कीजिए कि आपको ब्रिटेन तथा भारत में कपास के इतिहास के बारे में विश्वकोश (Encyclopaedia) के लिए लेख लिखने को कहा गया है। इस अध्याय में दी गई जानकारियों के आधार पर अपना लेख लिखिए। 5 अंक
(यह पाठ्यपुस्तक का ‘चर्चा करें’ प्रश्न 3 है।)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह ढाँचा दिखना चाहिए
- शीर्षक और एक परिचय पंक्ति।
- ब्रिटेन का हिस्सा — कपास नए युग का पहला प्रतीक; 1760 में 25 लाख पौंड से 1787 में 220 लाख पौंड आयात; रिचर्ड आर्कराइट की मिल; 1840 के दशक तक सबसे बड़ा उद्योग; फिर लोहा-स्टील का आगे निकलना।
- भारत का हिस्सा — मशीन युग से पहले महीन भारतीय कपास का दबदबा; निर्यात 33 प्रतिशत से 3 प्रतिशत; आयात 31 से 50 प्रतिशत से ऊपर; अमेरिकी गृहयुद्ध के बाद कच्चे कपास की क़ीमत बढ़ना; 1854 में बंबई की पहली मिल।
- एक निष्कर्ष पंक्ति जो दोनों देशों की उलटी कहानी को जोड़े।
- सर्वोत्तम लेख में कम से कम चार आँकड़े और तीन नाम होंगे, और भाषा तथ्यात्मक होगी, कहानी जैसी नहीं।
14कल्पना कीजिए कि आप एक सौदागर हैं और एक ऐसे सेल्समैन को चिट्ठी लिख रहे हैं जो आपको नयी मशीन ख़रीदने के लिए राज़ी करने की कोशिश कर रहा है। अपने पत्र में बताइए कि मशीन के बारे में आपने क्या सुना है और आप नयी प्रौद्योगिकी में पैसा क्यों नहीं लगाना चाहते। 5 अंक
(यह पाठ्यपुस्तक की गतिविधि है, पृष्ठ 85।)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- पत्र का सही प्रारूप — संबोधन, विषय, विवरण और अंत।
- कम से कम चार कारण अध्याय से — मज़दूर सस्ते और भरपूर हैं इसलिए मशीन की ज़रूरत नहीं; नयी तकनीक बहुत महँगी है; मशीनें अकसर ख़राब हो जाती हैं और मरम्मत पर काफ़ी ख़र्चा आता है; वे उतनी अच्छी नहीं हैं जितना दावा किया जाता है; मेरे उद्योग में काम मौसमी है; और मेरे ग्राहक बारीक डिज़ाइन वाली चीज़ें माँगते हैं जो मशीन नहीं बना सकती।
- सर्वोत्तम पत्र में सौदागर का व्यावहारिक स्वर होगा — वह मशीन के विरुद्ध नहीं है, बस उसे फ़ायदा दिखाई नहीं देता।
15कल्पना कीजिए कि आप 1830 के दशक में इंग्लैंड के एक अख़बार के संवाददाता हैं और आपको स्पिनिंग जेनी पर हुए हमले की रिपोर्ट लिखनी है। 5 अंक
अपनी रिपोर्ट में दोनों पक्षों की बात लिखिए — मशीन लगाने वाले मालिक की और मशीन तोड़ने वाली औरतों की।
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- एक शीर्षक और घटना का विवरण।
- औरतों का पक्ष — उनका काम स्पिनिंग जेनी के कारण छिन गया था; एक ही पहिया घुमाने वाला एक मज़दूर बहुत सारी तकलियाँ घुमा देता था, इसलिए शारीरिक श्रम की माँग घट गई।
- मालिक का पक्ष — मशीन से उत्पादन तेज़ होता है और लागत घटती है।
- सर्वोत्तम रिपोर्ट किसी एक पक्ष का साथ नहीं लेगी, बल्कि यह सवाल छोड़ेगी कि तकनीक से पैदा हुई बेरोज़गारी का हल क्या हो।
- यदि विद्यार्थी स्रोत-ख का कोई अंश उद्धृत कर दे तो उसे अतिरिक्त अंक दीजिए।
16अपने घर या मोहल्ले में पाँच ऐसी चीज़ें ढूँढ़िए जो आज भी हाथ से बनती हैं। हर चीज़ के आगे लिखिए कि मशीन उसकी नक़ल क्यों नहीं कर सकती। 5 अंक
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- पाँच वास्तविक चीज़ों की सूची — जैसे कढ़ाई वाला कपड़ा, मिट्टी के बर्तन, बंधेज, लकड़ी का काम, गहने, अचार-पापड़।
- हर चीज़ के लिए कोई ठोस कारण — जैसे हर टुकड़ा अलग होता है, डिज़ाइन बहुत बारीक है, या उसमें कारीगर की अपनी पहचान होती है।
- पाठ्यपुस्तक से जोड़ — मिल विशेष प्रकार की बुनाई की नक़ल नहीं कर सकते थे; बुने हुए बॉर्डर वाली साड़ियों या मद्रास की प्रसिद्ध लुंगियों की जगह ले लेना उनके लिए आसान नहीं था।
- सर्वोत्तम उत्तर यह भी पूछेगा कि उन चीज़ों को बनाने वाले को उनकी सही क़ीमत मिलती है या नहीं।
17एक तुलनात्मक चार्ट बनाइए जिसका शीर्षक हो — “एक ही समय, दो अलग कहानियाँ: ब्रिटेन और भारत, 1750 से 1947”। 5 अंक
चार्ट में कम से कम छह पंक्तियाँ हों और हर पंक्ति में दोनों देशों की स्थिति लिखी हो।
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में ये पंक्तियाँ आ सकती हैं
| बिंदु | ब्रिटेन | भारत |
|---|---|---|
| कपास | आयात 1760 में 25 लाख से 1787 में 220 लाख पौंड | निर्यात में सूती माल 33% से घटकर 3% |
| कारख़ाने | 1730 के दशक में पहले कारख़ाने | 1854 में बंबई की पहली मिल |
| मज़दूर | बहुत थे, इसलिए मशीन कम अपनाई गई | बहुत थे, पर उनका रोज़गार मशीन ने छीना |
| भर्ती | यारी-दोस्ती और जान-पहचान से | जॉबर के ज़रिए |
| मोड़ का समय | 1840 का दशक — रेलवे और लोहा-स्टील | पहला विश्व युद्ध |
| हाथ का काम | परंपरागत उद्योग बने रहे | हथकरघा उत्पादन 1900–1940 में तीन गुना |
- सर्वोत्तम चार्ट में अंत में एक निष्कर्ष पंक्ति होगी जो बताए कि दोनों कहानियाँ जुड़ी हुई थीं — ब्रिटेन का उदय और भारत का पतन एक ही प्रक्रिया के दो हिस्से थे।
18आपको एक भारतीय मिल के कपड़े के लिए 1930 के दशक का एक लेबल डिज़ाइन करना है। 5 अंक
(क) आप उस पर क्या-क्या बनाएँगे और क्यों? (3)
(ख) उस पर क्या नारा लिखेंगे? (2)
उत्तर देखिए
अच्छे उत्तर में यह दिखना चाहिए
- लेबल का विवरण — कोई भारतीय प्रतीक, चरखा, देवी की छवि, या भारतीय दृश्य, और उसका कारण।
- पाठ्यपुस्तक से जोड़ — चित्र 28 में एक देवी अहमदाबाद के मिल में बना कपड़ा दान कर रही हैं और लोगों से भारत में बने कपड़े के इस्तेमाल का आह्वान कर रही हैं।
- नारे में स्वदेशी का संदेश — जैसे “भारत में बना, भारत के लिए” — और यह समझ कि भारतीय विज्ञापन स्वदेशी के राष्ट्रवादी संदेश के वाहक बन गए थे।
- सर्वोत्तम उत्तर यह भी बताएगा कि लेबल किन लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है — पढ़े-लिखे लोगों को या उन्हें भी जो पढ़ नहीं सकते।
अंक-विभाजन
| भाग | प्रश्न | कुल अंक | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| क — जागरूकता | 1 से 8 | 32 | 50% |
| ख — संवेदनशीलता | 9 से 12 | 16 | 20% (भारित) |
| ग — सृजनात्मकता | 13 से 18 | 30 | 30% |
| कुल | 18 प्रश्न | 78 | — |
मूल्यांकन रूब्रिक
| स्तर | जागरूकता | संवेदनशीलता | सृजनात्मकता |
|---|---|---|---|
| प्रारंभिक | अध्याय के तथ्य दोहरा पाता है, पर नयी स्थिति में लागू नहीं कर पाता | घटना का वर्णन करता है, पर उसमें कोई भाव नहीं दिखाता | दिए गए ढाँचे को भरता है, अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ता |
| दक्ष | तथ्यों को नयी स्थिति पर सही ढंग से लागू करता है और आँकड़े भी लिखता है | मज़दूर या बुनकर की स्थिति को अपने शब्दों में महसूस करके लिखता है | अपनी ओर से उदाहरण और विवरण जोड़ता है, जो अध्याय से मेल खाते हैं |
| उन्नत | ब्रिटेन और भारत की उलटी कहानियों को जोड़ पाता है और अध्याय 2 या 3 से संबंध बना पाता है | दोनों पक्षों की स्थिति समझता है और यह भी पूछता है कि ‘क़ीमत कौन चुका रहा है’ | कुछ ऐसा बनाता है जो अध्याय में नहीं था, पर अध्याय के तर्क से पूरी तरह मेल खाता है |
शिक्षक के लिए तीन सुझाव
- प्रश्न 16 (घर की हाथ से बनी चीज़ें) घर पर करवाइए और अगले दिन कक्षा में सबकी सूचियाँ जोड़कर एक बड़ी सूची बनाइए। इससे बच्चों को दिखता है कि पाठ्यपुस्तक की बात उनके अपने घर में सच है।
- प्रश्न 17 (तुलनात्मक चार्ट) समूह में करवाइए। दो समूह बनाइए — एक ब्रिटेन का पक्ष लिखे, दूसरा भारत का — और फिर दोनों को बोर्ड पर आमने-सामने रखिए। यह पूरे अध्याय का सबसे अच्छा पुनरावर्तन है।
- भाग ख के उत्तरों को कभी ‘ग़लत’ मत कहिए। अगर बच्चे ने ईमानदारी से अपनी भावना लिखी है तो पूरे अंक दीजिए, भले ही वह आपकी अपेक्षा से अलग हो।