Chapter 5भारत, अर्थात इंडिया

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 5, पृ. 75–84

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कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 5 — भारत, अर्थात इंडिया

कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) · पृष्ठ — 75 से 84

हमारे देश के दो नाम हैं। क्या आपने कभी सोचा — ऐसा क्यों?

‘भारत’ कहाँ से आया? ‘इंडिया’ कहाँ से आया? और कौन-सा असली है? इस अध्याय का उत्तर चौंकाने वाला है — दोनों असली हैं, और दोनों बहुत पुराने हैं

अध्याय का आरंभ — श्री अरविंद

भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता स्थापित हो गई थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच इस महान मानवता की जीवनधारा का अभिन्न अंग बन गई।

पृ. 75

अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न

पृ. 75

  • भारत को हम कैसे परिभाषित कर सकते हैं?
  • भारत के कुछ प्राचीन नाम क्या थे?

उद्धरण में “हिमालय और दो समुद्रों के बीच” है — यह वाक्य अध्याय में दो बार और लौटेगा।

1 | भारत को परिभाषित करना | उपमहाद्वीप; प्राकृतिक सीमाएँ

आज का भारत, और पहले का भारत

पृ. 77

  • आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है — परिभाषित सीमाएँ, राज्य, ज्ञात जनसंख्या।
  • हालाँकि यह 500, 2000 या 5000 वर्ष पूर्व बहुत अलग था।
  • विश्व के इस भाग को हम प्राय: ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ कहते हैं।
  • इसके भिन्न-भिन्न नाम रहे हैं और इसकी सीमाएँ भी बदलती रही हैं।

निवासी = वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं।

चित्र 5.2 — प्राकृतिक सीमाएँ

दिशासीमा
उत्तरहिमालय · हिंदुकुश
पश्चिमअरब सागर
पूर्वबंगाल की खाड़ी
दक्षिणहिंद महासागर

नाम हमें कहाँ से मिलते हैं

पृ. 77

  • भारत को उसके निवासियों और विदेशों से आए आगंतुकों — दोनों ने नाम दिए।
  • ये नाम मिलते हैं — प्राचीन पुस्तकों में, यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों में, और शिलालेखों में।

यह अध्याय 4 के स्रोत-आरेख से सीधा जुड़ता है — वही तीन श्रेणियाँ, यहाँ काम पर।

2 | भारतीयों ने भारत नाम कैसे दिया | भरत; भारतवर्ष; जम्बूद्वीप

ऋग्वेद और ‘सप्त सैंधव’★

पृ. 77

  • ऋग्वेद भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है (वह कितना पुराना है — अध्याय 7 में)।
  • उसमें उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम ‘सप्त सैंधव’ है।
  • अर्थ — ‘सात नदियों की भूमि’।
  • ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है — आशय सिंधु नदी, या सामान्यत: एक नदी से।

ध्यान दीजिए — यह केवल उत्तर-पश्चिम का नाम था, पूरे भारत का नहीं।

अध्याय की सबसे चतुर बात

‘सिंधु’ दोनों नामों की जड़ में है

भीतर से — सिंधु → सैंधव → सप्त सैंधव · बाहर से — सिंधु → हिंदु → इंडिया

भरत — एक जन-समूह, न कि एक राजा★

पृ. 78

  • ‘भरत’ वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ था।
  • वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है।
  • बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए ‘भरत’ नाम उल्लिखित हुआ।
  • भारतवर्ष से आशय ‘भरत’ के देश से है।

यह वाक्य सबसे अधिक गलत लिखा जाता है — ऋग्वेद में भरत लोग हैं, राजा नहीं।

जम्बूद्वीप — जामुन का द्वीप★

पृ. 78

  • ‘जम्बूद्वीप’ से आशय ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से है।
  • यह भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पेड़ है।
  • इसे ‘जम्बुल वृक्ष’, ‘मालाबार प्लम’ या ‘जामुन वृक्ष’ भी कहते हैं।
  • आगे जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।

महाभारत में दोनों शब्द आते हैं — भारतवर्ष और जम्बूद्वीप।

महाभारत के क्षेत्र — चारों कोने

महाभारत मेंआज
कश्मीरलगभग आज का कश्मीर
कुरूक्षेत्रआज हरियाणा का भाग
वंगबंगाल का भाग
प्राग्ज्योतिषकुछ-कुछ असम का भाग
कच्छआज का कच्छ
केरललगभग आज का केरल

अशोक का शिलालेख — सबसे ठोस प्रमाण★

पृ. 78

  • अशोक की तिथि लगभग 250 सा.सं.पू. मानी जा सकती है।
  • उन्होंने बहुत से शिलालेख छोड़े हैं।
  • उनमें से एक में उन्होंने ‘जम्बूद्वीप’ नाम का प्रयोग संपूर्ण भारत के लिए किया।
  • उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे।

ग्रंथों की तिथि अनिश्चित है, शिलालेख की नहीं — यही अध्याय 4 का सबक, यहाँ काम पर।

विष्णु पुराण — भारत की परिभाषा

उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् · वर्षं तद् भारतं नाम… वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।

पृ. 80

भारत और भारतम्

पृ. 80

  • यह नाम ‘भारत’ आज भी प्रयोग में है।
  • उत्तर भारत में इसे सामान्यतया ‘भारत’ लिखते हैं।
  • दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’ लिखते हैं।

‘हिमाच्छादित पर्वत’ = हिमालय — यह शब्द अध्याय 4 में भी आया था।

3 | उत्तर और दक्षिण, एक ही परिभाषा | अध्याय का शिखर

2000 वर्ष पुरानी तमिल कविता

केप कुमारी से महान पर्वत तक

और पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक — पृ. 80

तीन स्रोत, एक ही चतुर्भुज

स्रोतभाषा/कालसीमाएँ
श्री अरविंदआधुनिकहिमालय और दो समुद्रों के बीच
विष्णु पुराणसंस्कृतसमुद्र के उत्तर, हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण
तमिल कविता2000 वर्ष पूर्वकेप कुमारी से महान पर्वत तक; दोनों ओर महासागर

इससे पुस्तक क्या निष्कर्ष निकालती है

पृ. 80

  • भारत के लिए देश के विभिन्न भागों ने एक समान परिभाषा को अपनाया है।
  • एक संस्कृत ग्रंथ और एक तमिल कविता — दोनों एक ही सीमाएँ बताते हैं।
  • “इस तरह प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”

और यही श्री अरविंद के उद्धरण की “एकता” है, जो पहले पन्ने पर रखी गई थी।

4 | विदेशियों ने इंडिया नाम कैसे रखा | फारसी; यूनानी; चीनी

फारसियों से शुरुआत

पृ. 81

  • विदेशियों में सर्वप्रथम प्राचीन ईरान (फारस) के निवासियों ने ‘भारत’ का उल्लेख किया।
  • छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सैन्य अभियान आरंभ किया।
  • उन्होंने सिंधु नदी के क्षेत्र, जिसे ‘सिंधु’ कहा जाता था, पर नियंत्रण किया।
  • फारसियों ने भारत को ‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’ कहा — ‘सिंधु’ का रूपांतरण।

पुस्तक की अपनी चेतावनीध्यान

‘हिंदू’ एक भौगोलिक शब्द है

प्राचीन फारसी में इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया — पृ. 81

यूनानी — और वह गायब ‘ह’★

पृ. 81

  • इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर प्राचीन यूनानियों ने इसे ‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’ कहा।
  • उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द के पहले अक्षर ‘ह’ को हटा दिया।
  • कारण — वह अक्षर यूनानी भाषा में था ही नहीं।

सिंधु → हिंदु → इंडोई / इंडिके — और यहीं से आगे ‘इंडिया’ बना।

चीनी नाम

पृ. 81, 83

  • चीनी ग्रंथों में इंडिया का उल्लेख ‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’ से हुआ — यह भी मूलत: ‘सिंधु’ से।
  • सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू
  • एक अन्य चीनी शब्द ‘तियन्जू’ भी ‘सिंधु’ से लिया गया…
  • …परंतु उसे ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ के रूप में भी समझा जा सकता है।

यह बताता है कि चीनियों का बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति कितना सम्मान था।

जुआनज़ैंग की यात्रा

पृ. 83

  • जुआनज़ैंग (पूर्व में ह्वेनसांग उच्चारित) ने 7वीं सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की।
  • उन्होंने कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले, बौद्ध ग्रंथ एकत्रित किए।
  • 17 वर्ष बाद चीन वापस लौट गए।
  • वहाँ उन्होंने संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया।

हिंदुस्तान — दो तथ्य जो उलटे पूछे जाते हैंध्यान

पृ. 83

  • ‘हिंदुस्तान’ शब्द आज से 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम प्रयोग किया गया था।
  • और वह एक फारसी शिलालेख में था।
  • बाद में, भारत पर आक्रमण करने वालों ने उपमहाद्वीप के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया।

अभ्यास-प्रश्न इसे ‘2000 वर्ष’ और ‘यूनानी शिलालेख’ कहकर उलटता है — दोनों पकड़िए।

5 | भारत, अर्थात इंडिया | संविधान; सार

संविधान की पहली पंक्ति

भारत, अर्थात् इंडिया

…राज्यों का संघ होगा — चित्र 5.5, पृ. 82

संविधान क्या कहता है

पृ. 81

  • भारतीय संविधान सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था।
  • उसकी शुरुआत में ही ‘इंडिया, दैट इज़ भारत’ वाक्यांश है।
  • हिंदी अनुवाद में भी वही ‘भारत अर्थात इंडिया’ उल्लिखित है।
  • संविधान = किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख।
  • भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ (इसका अध्ययन कक्षा 7 में)।

दो नाम, दो रास्ते

भारत — भीतर से

  • मूल: भरत (ऋग्वेद का वैदिक जन-समूह)
  • भरत → भारतवर्ष → भारत
  • आधार: लोग
  • दिया: भारतीयों ने

इंडिया — बाहर से

  • मूल: सिंधु (एक नदी)
  • सिंधु → हिंदु → इंडोई → इंडिया
  • आधार: भूगोल
  • दिया: विदेशियों ने

पृ. 77–83

अध्याय एक स्लाइड में

पृ. 84

  • भारत एक प्राचीन भूमि है, जिसे इसके इतिहास के क्रम में कई नाम दिए गए हैं।
  • प्राचीन भारतीयों के नामों में ‘जम्बूद्वीप’ तथा ‘भारत’ हैं; बाद में ‘भारत’ अधिक प्रचलित हुआ।
  • विदेशी आगंतुकों और आक्रमणकारियों ने सिंधु आधारित नाम अपनाए — जिनसे ‘हिंदू’, ‘इंडोई’ और अंतत: इंडिया बने।

और आज भी दोनों साथ हैं — “भारत, अर्थात् इंडिया।”