Chapter 1विकास

Beyond the textbook12 min

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यह फ़ाइल किसके लिए है — शिक्षक के लिए। यहाँ वे बातें हैं जो पाठ्यपुस्तक में नहीं हैं, या जो पाठ्यपुस्तक में हैं पर अब पुरानी पड़ चुकी हैं।

! परीक्षा में उत्तर पाठ्यपुस्तक के अनुसार ही लिखवाइए। यह फ़ाइल कक्षा को जीवित बनाने के लिए है। जहाँ नया आँकड़ा है, वहाँ बच्चों से कहिए: “किताब में जो लिखा है वही लिखना; पर आज असल में क्या है, वह भी जान लो।” हर तथ्य नीचे स्रोत-कड़ी के साथ जाँचा हुआ है।


भाग 1 — इस अध्याय के आँकड़े सबसे तेज़ी से पुराने पड़ते हैं

यह अध्याय पूरा आँकड़ों पर टिका है — HDI क्रमांक, प्रतिव्यक्ति आय, शिशु मृत्यु दर। और ये सब हर साल बदलते हैं। इसलिए पढ़ाते समय वर्ष ज़रूर बोलिए — “यह 2021-22 की रिपोर्ट का आँकड़ा है” — ताकि बच्चा समझे कि आँकड़ा हमेशा किसी तारीख़ का होता है।

★यही इस अध्याय का सबसे बड़ा कौशल है — “आँकड़ा देखते ही पूछो: किसका है, किस साल का है, और किसने बनाया है?” यही PARAKH के प्रश्नों में भी काम आता है।

1.1 भारत का HDI क्रमांक अब130 है,132 नहीं★

पाठ्यपुस्तकआज
रिपोर्टमानव विकास रिपोर्ट 2021-22मानव विकास रिपोर्ट 2025
भारत का क्रमांक132130
कुल देशतालिका की टिप्पणी में 189193
HDI मान—0.676 (2022) → 0.685 (2023)
श्रेणी—‘मध्यम मानव विकास’ — और ‘उच्च मानव विकास’ (0.700) की दहलीज़ के क़रीब

रिपोर्ट 2025 का शीर्षक भी बताने लायक़ है — “A Matter of Choice: People and Possibilities in the Age of AI” (चुनाव का सवाल: AI के युग में लोग और संभावनाएँ)।

कक्षा में यह जोड़िए — “तुम्हारी किताब कहती है भारत का क्रमांक 132 है। आज वह 130 है, और कुल देश भी 189 नहीं, 193 हो गए हैं। तो क्या भारत सुधरा है? — हाँ, थोड़ा। पर देखो, HDI का मान 0.676 से बढ़कर 0.685 हुआ है, यानी सुधार धीमा है। और हम ‘मध्यम मानव विकास’ श्रेणी में ही हैं।” परीक्षा में: किताब वाला 132 ही लिखवाइए। स्रोत — UNDP India — India ranks 130 out of 193 countries, United Nations in India, Drishti IAS — Human Development Report 2025

1.2 प्रतिव्यक्ति आय — किताब का $6,700 और आज का आँकड़ा

पाठ्यपुस्तक कहती है कि 2019 में भारत की प्रतिव्यक्ति आय US $6,700 थी और वह मध्य आय वर्ग में है।

  • आज भारत की सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति लगभग US $9,047 (2023) है।
  • और यह 1990 के US $2,167 से चार गुना से अधिक बढ़ चुकी है।
  • रुपयों में — प्रति व्यक्ति निवल राष्ट्रीय आय लगभग ₹2,05,324 (2024-25)।

कक्षा में पूछिए — “1990 में 2,167 डॉलर, आज 9,047 डॉलर — यानी चार गुना से ज़्यादा। तो क्या हम चार गुना ज़्यादा विकसित हो गए?” उत्तर की दिशा — “आय चार गुना हुई, पर HDI क्रमांक अब भी 193 में से 130 है। यही तो इस अध्याय की पूरी बात है — आय बढ़ना और विकास होना, दो अलग चीज़ें हैं।” स्रोत — UNDP India, Income in India — Wikipedia, StatisticsTimes — India GDP per capita

भाग 2 — राजस्थान: वह राज्य जिसका नाम इस अध्याय में नहीं है★

पाठ्यपुस्तक तुलना के लिए हरियाणा, केरल और बिहार को चुनती है। राजस्थान का नाम एक बार भी नहीं आता। पर इस अध्याय के सारे मापदण्ड राजस्थान पर उतने ही लागू होते हैं — और बच्चे को अपने राज्य में यह अध्याय दिखाना ही इसे जीवित करता है।

2.1 राजस्थान की प्रतिव्यक्ति आय

बातआँकड़ा
राजस्थान की प्रतिव्यक्ति आय (वर्तमान क़ीमतों पर)लगभग ₹1.79 लाख (आर्थिक समीक्षा 2023-24)
राष्ट्रीय औसतलगभग ₹2 लाख के आसपास
वृद्धि दरराजस्थान की प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर रही है

कक्षा में यह तुलना बनवाइए — बोर्ड पर किताब की तालिका 1.3 के साथ एक चौथी पंक्ति जोड़िए: “राजस्थान”। फिर पूछिए — “हमारा राज्य हरियाणा से पीछे है या आगे? और बिहार से?” ★यह गतिविधि इसलिए ज़रूरी है क्योंकि बच्चा तब तक विकास को नहीं समझता जब तक वह अपने राज्य को उस तालिका में न देख ले। स्रोत — Wikipedia — Economy of Rajasthan, Rising Rajasthan — Factfile, PRS India — Rajasthan Budget Analysis

2.2 और स्वास्थ्य के मापदण्ड पर राजस्थान

पाठ्यपुस्तक जिस शिशु मृत्यु दर को सबसे महत्त्वपूर्ण मापदण्ड बताती है, उसी के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के आँकड़े देखने चाहिए। NFHS-5 के अनुसार राजस्थान में पाँच वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर (U5MR) लगभग 38 प्रति 1,000 जीवित जन्म है, और महिलाओं के स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य तथा शिक्षा के कई सूचकों में राज्य ने सुधार दिखाया है।

! ध्यान दीजिए — पाठ्यपुस्तक की तालिका 1.4 शिशु मृत्यु दर (एक वर्ष से पहले) की बात करती है, जबकि यह आँकड़ा पाँच वर्ष से पहले का है। दोनों अलग हैं। “जब भी दो आँकड़े मिलाओ, पहले देखो कि दोनों एक ही चीज़ नाप रहे हैं या नहीं।” — यह चेतावनी बच्चों को ज़रूर दीजिए; यही सांख्यिकी पढ़ने का पहला नियम है। स्रोत — NFHS-5 Rajasthan Report (DHS Program), NFHS-5 India Report

भाग 3 — तीन जगहें जहाँ पाठ्यपुस्तक जान-बूझकर अधूरी है

3.1 तालिका 1.1 आधी ख़ाली क्यों छोड़ी गई है

पाठ्यपुस्तक आठ श्रेणियाँ देती है पर केवल तीन भरती है। यह छपाई की भूल नहीं — यह जान-बूझकर है।

किताब ख़ुद कहती है — “आप देखेंगे कि कुछ स्तम्भ अधूरे भरे हुए हैं। इस तालिका को पूरा करने की कोशिश कीजिए। आप चाहें तो किन्हीं और श्रेणी के व्यक्तियों को जोड़ सकते हैं।” ★इसलिए इस तालिका के ‘सही उत्तर’ मत बताइए — भरवाइए। और बच्चों से नई श्रेणियाँ भी जुड़वाइए: “दिहाड़ी मज़दूर · रिक्शा चालक · दुकान का नौकर · दिव्यांग व्यक्ति · बुज़ुर्ग विधवा · स्कूल छोड़ चुकी लड़की।” — इनमें से हर एक का विकास अलग दिखता है।

3.2 “मध्य पूर्व के देश शामिल नहीं हैं” — यह अपवाद बहुत बड़ा है

पाठ्यपुस्तक एक वाक्य में कहती है कि “समृद्ध देशों, जिनमें मध्य पूर्व के देश और कुछ अन्य छोटे देश शामिल नहीं हैं, को आमतौर पर विकसित देश कहा जाता है” — और आगे बढ़ जाती है।

कक्षा में यह प्रश्न रखिए — “कुछ मध्य पूर्व के देशों की प्रतिव्यक्ति आय भारत से कई गुना ज़्यादा है। फिर उन्हें ‘विकसित’ क्यों नहीं कहा जाता?” उत्तर की दिशा — क्योंकि वहाँ आय मुख्यत: तेल से आती है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता उस स्तर की नहीं होती। यही अध्याय की मूल बात को सिद्ध करता है — पैसा आ जाने से विकास नहीं हो जाता। ★यह अपवाद पूरे अध्याय का सबसे अच्छा ‘दो मिनट का सवाल’ है।

3.3 तालिका 1.7 का सबसे चुभने वाला वाक्य

“संयुक्त राज्य अमरीका जैसे कुछ देश हैं जिनके पास भण्डार तो कम है लेकिन वे इसे सैन्य और आर्थिक शक्ति द्वारा पाना चाहते हैं।”

किताब यह कहकर रुक जाती है। पर यही वाक्य बताता है कि धारणीयता सिर्फ़ पर्यावरण का सवाल नहीं, शक्ति और न्याय का भी सवाल है।

पूछिए — “अमरीका के पास केवल 10.5 वर्ष का तेल बचा है और मध्य-पूर्व के पास 70 वर्ष का। तो क्या होगा?” — बच्चों के उत्तर सुनिए। यह इतिहास और राजनीति विज्ञान से जोड़ने का सबसे अच्छा मौक़ा है।

भाग 4 — पाँच सवाल जो बच्चे पूछते हैं

सवालसीधा उत्तर
“अगर आय से विकास नहीं मापते तो फिर आय की बात क्यों करते हैं?”क्योंकि आय के बिना न स्कूल बनते हैं न अस्पताल। किताब भी कहती है कि अधिक आय का अर्थ है मानवीय आवश्यकताओं की सभी वस्तुओं का अधिक होना। बात यह है कि आय ज़रूरी है, पर अकेली काफ़ी नहीं।
“देश ‘ख’ वाला उदाहरण असली है या बनाया हुआ?”बनाया हुआ — किताब ख़ुद कहती है “सरलता के लिए, हम मानते हैं कि प्रत्येक देश में 5 निवासी हैं”। पर वह असली दुनिया की सच्चाई दिखाता है: दुनिया में सचमुच कुछ लोगों के पास बहुत ज़्यादा और बहुतों के पास बहुत कम है।
“केरल की आय कम है तो वहाँ स्कूल-अस्पताल के पैसे कहाँ से आते हैं?”यह बहुत अच्छा सवाल है। उत्तर — पैसे की मात्रा से ज़्यादा यह मायने रखता है कि पैसा कहाँ ख़र्च होता है। केरल ने लंबे समय तक शिक्षा और स्वास्थ्य पर ख़र्च किया, इसलिए वहाँ सार्वजनिक सुविधाएँ मज़बूत हैं।
“हरियाणा में शिशु मृत्यु दर ज़्यादा क्यों है जबकि वह अमीर है?”क्योंकि “यह आवश्यक नहीं कि जेब में रखा रुपया वे सब वस्तुएँ और सेवाएँ ख़रीद सके”। अस्पताल, टीकाकरण, साफ़ पानी और शिक्षित माताएँ — ये सामूहिक रूप से ही मिलते हैं, अकेले पैसे से नहीं।
“धारणीयता की बात तो ठीक है, पर हम बच्चे क्या कर सकते हैं?”पानी बचाना, बिजली बंद करना, प्लास्टिक कम करना, साइकिल से जाना — छोटी बातें हैं, पर किताब का पूरा तर्क यही है कि “हम सब का भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है।”

भाग 5 — कक्षा में तुरंत उपयोग करने योग्य छह पंक्तियाँ

  1. “विकास का कोई एक जवाब नहीं है — इसीलिए किताब का आख़िरी वाक्य है ‘विकास पर बहस जारी है।’”
  2. “समृद्ध किसान को सस्ते मज़दूर चाहिए, मज़दूर को बेहतर मज़दूरी। दोनों का विकास एक-दूसरे के ख़िलाफ़ है।”
  3. “दो देशों की औसत आय बराबर हो सकती है और फिर भी एक में सब ठीक हों और दूसरे में चार लोग भूखे। औसत झूठ नहीं बोलता, पर पूरी बात भी नहीं बताता।”
  4. “हरियाणा के पास ज़्यादा पैसा है, केरल के पास ज़्यादा ज़िंदगी।”
  5. “तुम इसलिए पढ़ पा रहे हो क्योंकि बहुत से और बच्चे भी पढ़ना चाहते थे।”
  6. “हमने यह दुनिया अपने पूर्वजों से पाई नहीं है — अपने बच्चों से उधार ली है।”

भाग 6 — एक गतिविधि जो पूरे अध्याय को समेट देती है

पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 17 पर अतिरिक्त परियोजना देती है — “अपने क्षेत्र के विकास के विषय में चर्चा के लिए तीन भिन्न वक्ताओं को आमंत्रित कीजिए… प्रत्येक समूह एक दीवार-चार्ट बनाए जिसमें कारण सहित उन विचारों का उल्लेख करे, जिनसे आप सहमत अथवा असहमत हैं।”

यदि बाहर से वक्ता बुलाना संभव न हो, तो यह कीजिए —

चरणक्या करना है
1कक्षा को तीन समूहों में बाँटिए और हर समूह को एक भूमिका दीजिए — (क) एक किसान · (ख) एक कारख़ाने का मालिक · (ग) एक मज़दूर
2हर समूह लिखे — “मेरे लिए विकास का मतलब क्या है?” और “मुझे किस चीज़ से नुक़सान होगा?”
3तीनों को आमने-सामने बैठाकर बहस कराइए
4अंत में बोर्ड पर लिखिए — कौन-सी बात पर तीनों सहमत थे? (अक्सर: अच्छा स्कूल, अस्पताल और साफ़ पानी)
5और यही निष्कर्ष निकलवाइए — “जिन चीज़ों पर सब सहमत हैं, वही सार्वजनिक सुविधाएँ हैं। इसीलिए वे सरकार का काम हैं।”

यह गतिविधि इसलिए काम करती है क्योंकि यह अध्याय के दो सबसे बड़े विचार — ‘भिन्न लक्ष्य’ और ‘सार्वजनिक सुविधाएँ’ — एक साथ सिखा देती है।


शिक्षक के लिए अंतिम टिप्पणी। यह पूरी अर्थशास्त्र की पुस्तक का सबसे कठिन अध्याय है — इसलिए नहीं कि इसमें जानकारी ज़्यादा है, बल्कि इसलिए कि इसमें कोई सीधा उत्तर नहीं है। बच्चे रटने के आदी होते हैं, और यह अध्याय रटने नहीं देता। इसे बचाने का एक ही तरीक़ा है: हर बात को बच्चे के अपने गाँव, अपने राज्य और अपने घर से जोड़िए। जिस दिन कोई बच्चा कहे — “सर, हमारे गाँव में स्कूल तो है, पर मास्टर नहीं आते — तो क्या यह विकास है?” — उस दिन यह अध्याय पढ़ा दिया गया।