Chapter 2राजा, किसान और नगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2

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यह पन्ना उनके लिए है जो घर पर बारहवीं के बच्चे के साथ बैठते हैं। इतिहास आपको याद हो, यह ज़रूरी नहीं: हर सवाल के आगे लिखा है कि जवाब में क्या आना चाहिए।

बारहवीं के बच्चे से सवाल-जवाब करके परखने से ज़्यादा काम आता है उससे समझवाना। उससे कहिए, “मुझे यह अध्याय समझाओ, मैंने नहीं पढ़ा।” समझाते समय बच्चे को ख़ुद पता चल जाता है कि कौन-सी बात पक्की है और कौन-सी कच्ची।

किताब की अपनी पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ संख्या के साथ दी हैं। पृष्ठ संख्याएँ NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय (कक्षा 12, पुस्तक 1) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।


1. इस अध्याय में क्या है

यह अध्याय लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. तक के राजाओं, किसानों और नगरों की बात करता है। हर हिस्से के पीछे एक ही सवाल चलता है: इतिहासकार यह सब जानते कैसे हैं? जवाब अभिलेखों, ग्रंथों, सिक्कों और चित्रों से आता है। किताब पहले ही पन्ने पर कह देती है कि “इन स्रोतों से विकास की पूरी कहानी नहीं मिल पाती है” (पृष्ठ 28)। अध्याय पूरा होने तक बच्चे को यह बताना आना चाहिए कि राज्य और साम्राज्य कैसे बने, गाँव और नगर कैसे बदले, और इतिहासकार अपने स्रोतों पर कितना भरोसा कर सकते हैं।

किताब यह बात आठ क़दमों में समझाती है:

सवालकिताब क्या बताती हैपृष्ठ
इतिहासकार यह सब जानते कैसे हैं?अभिलेखों, ग्रंथों, सिक्कों और चित्रों जैसे स्रोतों से। ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स प्रिंसेप ने 1830 के दशक में ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ निकाला। ज़्यादातर अभिलेखों और सिक्कों पर पियदस्सी लिखा था; कुछ पर असोक नाम भी।28–29
महाजनपद क्या थे?छठी शताब्दी ई.पू. के सोलह राज्य, जिनका उल्लेख बौद्ध और जैन ग्रंथों में है। ज़्यादातर पर राजा का शासन था; गण और संघ में लोगों का समूह शासन करता था। मगध (आधुनिक बिहार) छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में सबसे शक्तिशाली बना।29–31
मौर्य साम्राज्य कैसा था?चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. में नींव रखी। पाँच राजनीतिक केंद्र थे: राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र। असोक ने धम्म का प्रचार किया। साम्राज्य मात्र डेढ़ सौ साल चला।32–35
राजा अपनी ऊँची स्थिति कैसे दिखाते थे?दक्षिण के सरदार भेंट लेते थे; कुषाण शासकों ने देवी-देवताओं से जुड़कर ऊँची स्थिति पानी चाही; चौथी शताब्दी ई. में गुप्त सहित कई बड़े साम्राज्य सामंतों पर निर्भर थे; कवि प्रशस्तियाँ लिखते थे।35–37
गाँव की खेती कैसे बदली?करों की बढ़ती माँग के बीच किसानों ने उपज बढ़ाने के तरीके खोजे: लोहे के फाल वाला हल, धान की रोपाई और सिंचाई। लाभ सबको समान नहीं मिला।38–39
भूमिदान क्या था?ईसवी की आरंभिक शताब्दियों से राजा धार्मिक संस्थाओं या ब्राह्मणों को भूमि दान देने लगे, ज़्यादातर ताम्र पत्रों पर लिखे हुए। इसे लेकर इतिहासकारों में दो मत हैं।40–41
नगर, व्यापार और सिक्केछठी शताब्दी ई.पू. से नए नगर बने, जिनमें शिल्पकार और व्यापारी थे। व्यापार के मार्ग दूर तक फैले, और सिक्कों से विनिमय कुछ हद तक आसान हुआ।41–45
अभिलेख कैसे पढ़े गए, और उनकी सीमाएँ क्या हैं?ब्राह्मी का अर्थ 1838 ई. में निकला। अभिलेख पढ़ने में तकनीकी कठिनाइयाँ हैं, बहुत से अभिलेख बचे नहीं, और वे उन्हीं के विचार बताते हैं जो उन्हें बनवाते थे।46–49

2. बच्चे से समझिए: दस सवाल

एक दिन में दो-तीन सवाल काफ़ी हैं। बच्चा अपने शब्दों में बताए, तो भी ठीक है; बस नीचे लिखी बातें उसके जवाब में आ जाएँ।

सवालजवाब में यह आना चाहिएपृष्ठ
प्रिंसेप ने क्या पढ़ा, और पियदस्सी कौन है?जेम्स प्रिंसेप ने 1830 के दशक में ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियाँ पढ़ीं। पियदस्सी असोक की एक उपाधि है, जो उन्हें ज़्यादातर अभिलेखों और सिक्कों पर मिली; कुछ पर असोक नाम भी था।28, 47
गण या संघ वाला राज्य राजा वाले राज्य से कैसे अलग था?वहाँ कई लोगों का समूह शासन करता था, और समूह का हर व्यक्ति राजा कहलाता था। वज्जि संघ ऐसा ही एक राज्य था।29
मगध सबसे शक्तिशाली क्यों बना?आधुनिक इतिहासकार: अच्छी उपज, झारखंड की लोहे की खदानें, जंगलों के हाथी, गंगा का सस्ता आवागमन। आरंभिक जैन और बौद्ध लेखक: बिंबिसार, अजातसत्तु, महापद्मनंद जैसे महत्वाकांक्षी शासक और उनके मंत्री।31
मौर्य साम्राज्य के पाँच राजनीतिक केंद्र कौन-से थे, और असोक ने किसका प्रचार किया?पाटलिपुत्र (राजधानी), तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि। असोक ने धम्म का प्रचार किया: बड़ों का आदर, संन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता, सेवकों और दासों से उदार व्यवहार, दूसरों के धर्मों और परंपराओं का आदर।32–34
सरदार और राजा में क्या फ़र्क़ है?सरदार अपने अधीन लोगों से भेंट लेता है और समर्थकों में बाँट देता है; राजा कर वसूलते हैं। सरदारी में सामान्यतया स्थायी सेना या अधिकारी नहीं होते।35
शासक के नाम और चित्र वाले सबसे पहले सिक्के किसने जारी किए, और सोने के सिक्के बड़े पैमाने पर किसने?सबसे पहले हिंद-यूनानी शासकों ने, जिन्होंने द्वितीय शताब्दी ई.पू. में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया था। सोने के सिक्के बड़े पैमाने पर कुषाणों ने, प्रथम शताब्दी ई. में।44
करों की माँग बढ़ी, तो किसानों ने क्या किया?उपज बढ़ाने के तरीके खोजे: लोहे के फाल वाला हल, धान की रोपाई, कुओं-तालाबों-नहरों से सिंचाई।38–39
गाँवों में कौन-कौन से वर्ग थे?बौद्ध कथाओं में भूमिहीन खेतिहर श्रमिक, छोटे किसान और बड़े ज़मींदार; तमिल संगम साहित्य में वेल्लालर (बड़े ज़मींदार), उल्वर (हलवाहा) और अणिमई (दास)।39
भूमिदान को लेकर इतिहासकार क्या सोचते हैं?दो मत: कुछ के अनुसार यह शासकों की रणनीति थी, ताकि खेती नए क्षेत्रों में फैले; कुछ के अनुसार यह कमज़ोर होते राजनीतिक प्रभुत्व का संकेत था।40–41
अभिलेखों से हम सब कुछ क्यों नहीं जान सकते?अक्षर हलके या नष्ट हो सकते हैं और कुछ शब्दों के अर्थ स्थान या समय से जुड़े होते हैं; बहुत से अभिलेख बचे नहीं; खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ और रोज़ के सुख-दुख प्रायः दर्ज नहीं; अभिलेख उन्हीं के विचार बताते हैं जो उन्हें बनवाते थे।48–49

3. छह बातें जिनमें बच्चे अक्सर उलझते हैं

बच्चा लिख देता हैसही बातपृष्ठ
सबसे पुराने अभिलेख संस्कृत में हैं।प्राचीनतम अभिलेख प्राकृत भाषाओं में हैं, जो जनसामान्य की भाषाएँ थीं। विद्वानों ने कई बार इन्हें संस्कृत मान लिया था।29, 46
गण या संघ में एक ही राजा होता था।वहाँ लोगों का समूह शासन करता था, और समूह का हर व्यक्ति राजा कहलाता था।29
सरदार भी राजा की तरह कर वसूलता था।सरदार भेंट लेता था और उसे अपने समर्थकों में बाँटता था; कर राजा वसूलते थे।35
असोक के अभिलेख हर जगह एक जैसे संदेश के साथ मिले, इसलिए मौर्य साम्राज्य में शासन भी हर जगह एक जैसा था।साम्राज्य के क्षेत्र बड़े विविध थे। संभव है कि सबसे प्रबल नियंत्रण राजधानी और प्रांतीय केंद्रों के आसपास रहा हो।32–33
शासक के नाम और चित्र वाले सबसे पहले सिक्के कुषाणों के थे।ऐसे सबसे पहले सिक्के हिंद-यूनानी शासकों ने जारी किए। कुषाणों ने बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए।44
लोहे के फाल वाला हल पूरे उपमहाद्वीप में फैल गया।वह कुछ ही हिस्सों में पहुँचा। पंजाब और राजस्थान में उसका प्रयोग बीसवीं सदी में शुरू हुआ, और पूर्वोत्तर तथा मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के किसान कुदाल का उपयोग करते रहे।38–39

4. किताब के शब्द, आसान भाषा में

किताब का शब्दआसान मतलबपृष्ठ
अभिलेखपत्थर, धातु या मिट्टी के बर्तन जैसी कठोर सतह पर खुदा लेख29
अभिलेखशास्त्रअभिलेखों का अध्ययन28
पुरालिपिलिखने की शैली; जिस अभिलेख पर तिथि नहीं है, उसका काल इसी से तय किया जाता है29
प्राकृतजनसामान्य की भाषाएँ; सबसे पुराने अभिलेख इन्हीं में हैं29
महाजनपदछठी शताब्दी ई.पू. के सोलह बड़े राज्य, जिनका उल्लेख बौद्ध और जैन ग्रंथों में है29
गण और संघऐसे राज्य जहाँ कई लोगों का समूह शासन करता था29
धर्मशास्त्रब्राह्मणों के संस्कृत ग्रंथ, जिनमें शासक सहित सबके लिए नियम तय किए गए30
धम्मअसोक के सरल सिद्धांत: बड़ों का आदर, संन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता, सेवकों और दासों से उदार व्यवहार, दूसरों के धर्म का आदर32, 34
धम्म महामात्तधम्म के प्रचार के लिए असोक द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी34
सरदारशक्तिशाली व्यक्ति, जो अपने अधीन लोगों से भेंट लेकर समर्थकों में बाँटता है35
सामंतऐसे लोग जिन पर चौथी शताब्दी ई. के कई बड़े साम्राज्य निर्भर थे; वे स्थानीय संसाधनों से अपना निर्वाह करते, शासकों का आदर करते और उन्हें सैनिक सहायता देते थे36
प्रशस्तिकवि द्वारा अपने राजा या स्वामी की प्रशंसा में लिखी रचना36–37
अग्रहारब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि, जिस पर भूमिकर नहीं लगता था41
श्रेणीउत्पादकों और व्यापारियों का संघ43
आहत सिक्केचाँदी और ताँबे के सबसे पहले सिक्के, जिन पर प्रतीकों को आहत करके, यानी ठोककर, बनाया जाता था44–45
मुद्राशास्त्रसिक्कों का अध्ययन: उन पर बने चित्र, लिपि, उनकी धातु और जिन संदर्भों में वे मिले45

5. लिखे हुए जवाब कैसे जाँचें

किताब के 12 प्रश्न पृष्ठ 51–52 पर हैं। प्रश्न 1 से 5 छोटे उत्तर (लगभग 100 से 150 शब्द) माँगते हैं, प्रश्न 6 से 9 लघु निबंध (लगभग 500 शब्द), प्रश्न 10 मानचित्र का काम है, और प्रश्न 11 तथा 12 परियोजनाएँ हैं, जिनमें से कोई एक करनी है। आपको पूरा जवाब नहीं जाँचना; बस देखिए कि ये हिस्से हैं या नहीं।

प्रश्न 1: नगरों में शिल्प के प्रमाण, और हड़प्पा से फ़र्क़

  • मुख्य बात: दो तरह के प्रमाण। पुरावशेष: चमकदार कलई वाले उत्कृष्ट कटोरे और थालियाँ (उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र), और सोने, चाँदी, कांस्य, ताँबे, हाथी दाँत और शीशे की चीज़ें। लिखे हुए प्रमाण: द्वितीय शताब्दी ई.पू. से दानात्मक अभिलेख, जिनमें दाता का व्यवसाय लिखा होता है, और श्रेणी का उल्लेख।
  • हड़प्पा से फ़र्क़: हड़प्पा के शहरों में शिल्प का पता पुरावशेषों से ही चलता है (कच्चा माल, औज़ार, अधूरी वस्तुएँ, कूड़ा, जैसे चन्हुदड़ो में मनके बनाने के प्रमाण), और हड़प्पा लिपि अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है (अध्याय 1)। यहाँ पुरावशेषों के साथ अभिलेख भी हैं।
  • यह भी आए तो और अच्छा: इन नगरों में आज भी लोग रहते हैं, इसलिए हड़प्पा की तरह व्यापक खुदाई संभव नहीं।

प्रश्न 2: महाजनपदों की ख़ास बातें

  • शासन: ज़्यादातर पर राजा, गण और संघ में लोगों का समूह।
  • राजधानी: हर महाजनपद की एक, प्रायः किलेबंद।
  • नियम: ब्राह्मणों के धर्मशास्त्र में अपेक्षा थी कि शासक क्षत्रिय हों।
  • आय: किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से कर और भेंट; पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करके धन इकट्ठा करना भी वैध माना जाता था।
  • सेना: कुछ राज्यों ने स्थायी सेनाएँ और नौकरशाही बना लीं; बाकी सहायक-सेना पर निर्भर रहे।

प्रश्न 3: सामान्य लोगों का जीवन इतिहासकार कैसे जोड़ते हैं

  • मुख्य बात: पशुपालक, शिकारी, मछुआरे जैसे लोग अपने जीवन के विवरण नहीं रखते थे, इसलिए इतिहासकार कई तरह के स्रोत जोड़ते हैं।
  • स्रोत: कथाएँ (जातक, पंचतंत्र, गंदतिन्दु जातक), अभिलेख (सुदर्शन झील, भूमिदान), ग्रंथ (मनुस्मृति, हर्षचरित, संगम साहित्य), और खेती तथा नगरों के पुरावशेष।
  • सावधानी का एक वाक्य हो तो और अच्छा: अभिलेख बड़े अवसर दर्ज करते हैं और बनवाने वालों का ही दृष्टिकोण बताते हैं।

प्रश्न 4: सरदार को दी वस्तुएँ और दंगुन गाँव की वस्तुएँ

  • स्रोत 3: पहाड़ों के लोग सरदार के लिए हाथी दाँत, सुगंधित लकड़ी, मधु, चंदन, मिर्च जैसी चीज़ें और बाघों के बच्चे, हाथी, बंदर, मोर जैसे जानवर लाए।
  • स्रोत 8: दंगुन गाँव को अधिकारियों को घास, जानवरों की खाल, कोयला, खनिज-पदार्थ, फूल और दूध देने से छूट मिली।
  • समानता: दोनों सूचियाँ जंगल, पेड़ और पशुओं से मिलने वाली स्थानीय चीज़ों की हैं।
  • असमानता: स्रोत 3 में लोग नाचते-गाते उपहार लाते हैं; स्रोत 8 में प्रभावती गुप्त के आदेश से दंगुन गाँव को ऐसी चीज़ें देने के दायित्व से मुक्त किया गया।
  • एक बात: प्रश्न 4 में स्रोत 3 के सरदार को “पांड्य सरदार” लिखा है, पर सिलप्पादिकारम् और दूसरे तमिल स्रोतों में वह सेनगुत्तुवन चेर राजा है। बच्चा चेर लिखे तो उसे ग़लत मत समझिए।

प्रश्न 5: अभिलेखशास्त्रियों की समस्याएँ

  • प्रश्न सूची माँगता है, इसलिए चार-पाँच बिंदु काफ़ी हैं।
  • हलके खुदे अक्षर पढ़ना कठिन; अभिलेख नष्ट हो सकते हैं।
  • शब्दों के अर्थ कभी स्थान या समय से जुड़े होते हैं, इसलिए विद्वान पढ़ने की अलग-अलग विधियों पर चर्चा करते हैं।
  • कई हज़ार अभिलेख मिले, पर सबके अर्थ नहीं निकले, सब प्रकाशित या अनूदित नहीं हुए, और अनेक अभिलेख रहे होंगे जो सुरक्षित नहीं बचे।
  • खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ प्रायः दर्ज नहीं; अभिलेख बनवाने वालों का ही दृष्टिकोण बताते हैं।

प्रश्न 6: मौर्य प्रशासन, और असोक के अभिलेखों में उसके प्रमाण

  • प्रशासन: पाँच राजनीतिक केंद्र (पाटलिपुत्र, तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि, सुवर्णगिरि); केंद्र सोच-समझकर चुने गए (तक्षशिला और उज्जयिनी व्यापार मार्ग पर, सुवर्णगिरि सोने की खदान के लिए); नियंत्रण एकसमान नहीं; सेना की देखरेख के लिए एक समिति और छह उपसमितियाँ; धम्म और धम्म महामात्त।
  • अभिलेखों में प्रमाण: पाँचों केंद्रों का उल्लेख; एक जैसे संदेश पश्चिमोत्तर से आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और उत्तराखंड तक; धम्म; पतिवेदक (स्रोत 10); कलिंग पर विजय (स्रोत 11)।
  • यह फ़र्क़ भी आए तो अच्छा: सेना की समितियों का ब्योरा मेगस्थनीज़ से आता है, असोक के अभिलेखों से नहीं।

प्रश्न 7: डी.सी. सरकार का वक्तव्य

  • कथन के पक्ष में: अभिलेखों में राजाओं की उपाधियाँ और युद्ध, प्रशासन, धम्म, सिंचाई, भूमिदान, नगरों के शिल्पकार, स्त्रियों का दान, भाषा और लिपि, सब झलकते हैं।
  • सीमाएँ: पढ़ने की कठिनाई, अधूरा भंडार, खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ और रोज़ के सुख-दुख का न मिलना, और बनवाने वालों का ही दृष्टिकोण।
  • निष्कर्ष: बहुत से पक्षों की झलक है, पर यह कहना कि कोई पक्ष छूटा ही नहीं, ज़्यादा है, क्योंकि किताब के अनुसार राजनीतिक और आर्थिक इतिहास का पूर्ण ज्ञान मात्र अभिलेखशास्त्र से नहीं मिलता।

प्रश्न 8: उत्तर-मौर्य काल में राजत्व के विचार

  • पृष्ठभूमि: मौर्य साम्राज्य मात्र डेढ़ सौ साल चला।
  • दक्षिण के सरदार: भेंट लेते थे, राजा कर।
  • सातवाहन और शक: लंबी दूरी के व्यापार से राजस्व जुटाया, और ऊँचे दर्जे का दावा किया।
  • कुषाण: देवी-देवताओं से जुड़े; ‘देवपुत्र’ उपाधि; मथुरा के पास माट में विशालकाय मूर्तियाँ।
  • सामंत: चौथी शताब्दी ई. में गुप्त सहित कई साम्राज्य उन पर निर्भर थे।
  • प्रशस्ति: हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति समुद्रगुप्त के लिए।
  • भूमिदान: ईसवी की आरंभिक शताब्दियों से।

प्रश्न 9: खेती में बदलाव कितना हुआ

  • क्या बदला: हल, धान की रोपाई, सिंचाई, और वजह थी करों की बढ़ती माँग।
  • कितना बदला, यह दिखे: लोहे के फाल वाला हल कुछ ही हिस्सों में पहुँचा; पूर्वोत्तर और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कुदाल चलती रही। प्रश्न “किस हद तक” पूछता है, इसलिए यह सीमा ज़रूर आए।
  • समाज पर असर: लाभ सबको बराबर नहीं मिला; भूमिहीन श्रमिक, छोटे किसान और बड़े ज़मींदार जैसे भेद दिखे।

प्रश्न 10: मानचित्र 1 और 2

  • मानचित्र 1 से महाजनपदों के नाम, मानचित्र 2 से असोक के अभिलेखों के प्राप्ति स्थान और केंद्र; दोनों मिलाकर सूची बनी हो।
  • किताब के संकेत: मगध साम्राज्य का केंद्र था, क्योंकि राजधानी पाटलिपुत्र वहीं थी; तक्षशिला और उज्जयिनी प्रांतीय केंद्र थे।
  • दूसरे भाग का जवाब हाँ है, जैसे कौशाम्बी मानचित्र 1 पर नगर है और मानचित्र 2 पर वहाँ असोक का स्तंभ अभिलेख दिखाया गया है।

प्रश्न 11: अखबार की कतरनें और अभिलेख

  • यह बच्चे की अपनी खोज है, इसलिए नतीजे उसकी कतरनों पर निर्भर करेंगे।
  • देखिए कि एक महीने की कतरनें इकट्ठी हों, और जवाब में किताब की माँगी हुई बातें हों: परियोजनाओं के लिए ज़रूरी संसाधनों के बारे में खबरों में क्या लिखा है, संसाधन कैसे जुटाए जाते हैं, परियोजना का उद्देश्य क्या है, वक्तव्य कौन जारी करता है, और उन्हें क्यों और कैसे फैलाया जाता है।
  • तुलना अध्याय के अभिलेखों से हो, जैसे सुदर्शन झील (स्रोत 5) और असोक के संदेश, और समानताएँ तथा असमानताएँ दोनों लिखी हों।

प्रश्न 12: नोट-सिक्के और अध्याय के सिक्के

  • यह भी बच्चे की अपनी खोज है।
  • देखिए कि पाँच नोट या सिक्कों के दोनों ओर का वर्णन हो, और रिपोर्ट में उन पर बने चित्र, लिपियाँ और भाषाएँ, माप, आकार और दूसरी समानताएँ-असमानताएँ हों। अध्याय के सिक्कों से तुलना में सामग्री, तकनीक, प्रतीक, उनका महत्त्व और सिक्कों का संभावित काम आए।
  • तुलना अध्याय के सिक्कों से हो: आहत सिक्के (चाँदी और ताँबे), हिंद-यूनानी सिक्कों पर शासक का नाम और चित्र, कुषाणों और गुप्तों के सोने के सिक्के, यौधेयों के ताँबे के सिक्के।

सभी 12 प्रश्नों के पूरे उत्तर रिवीजन नोट्स के “अपने को जाँचिए” वाले हिस्से में हैं। बच्चे का जवाब उनसे शब्द-शब्द न मिले, तो भी ठीक है, अगर ज़रूरी बातें आ गई हों।

6. घर पर दस मिनट की बातचीत

बारहवीं के बच्चे से पूछताछ कम, बातचीत ज़्यादा कीजिए। खाने के समय या कहीं आते-जाते इनमें से कोई एक बात छेड़िए।

जेब या पर्स से कोई नोट और सिक्का निकालिए। बच्चे से पूछिए कि उन पर किसका चित्र या कौन-सा प्रतीक है, कौन-सी लिपियाँ और भाषाएँ लिखी हैं, और वे किस चीज़ के बने हैं। पृष्ठ 44 पर किताब बताती है कि शासक की प्रतिमा और नाम वाले सबसे पहले सिक्के हिंद-यूनानी शासकों ने जारी किए, और कुषाणों ने प्रथम शताब्दी ई. में सोने के सिक्के बड़े पैमाने पर जारी किए। बच्चा आज के नोट-सिक्कों और अध्याय के सिक्कों में एक जैसी और अलग बातें बता दे, तो बात पकड़ में आ गई।

या अपने इलाके का कोई पुल, तालाब, स्कूल या नहर देखिए जो सरकार ने बनवाई हो। बच्चे से पूछिए कि उस पर किसका नाम लिखा है, और काम की जानकारी लोगों तक कैसे पहुँचती है। पृष्ठ 38–39 पर किताब सुदर्शन झील का अभिलेख बताती है। बताया जाता है कि रुद्रदमन ने अपने खर्च से झील की मरम्मत करवाई थी और प्रजा से कर भी नहीं लिया था। किताब यह भी बताती है कि सिंचाई के साधन बनवाने वाले राजा या प्रभावशाली लोग अपने इन कामों का उल्लेख अभिलेखों में करवाते थे। आज का हाल और तब का हाल कितना मिलता है, इसका कोई एक जवाब नहीं।

या खेती की बात कीजिए। बच्चे से पूछिए कि अपने गाँव या आसपास खेत किससे जोते जाते हैं, सिंचाई कैसे होती है, और धान की रोपाई होती है या नहीं। पृष्ठ 38–39 पर किताब बताती है कि छठी शताब्दी ई.पू. से गंगा और कावेरी की घाटियों में हल फैला, गंगा की घाटी में धान की रोपाई होने लगी, और पंजाब और राजस्थान में लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग बीसवीं सदी में शुरू हुआ। बच्चा अपने इलाके की बात इससे मिला सके, तो अच्छा।

7. क्या अभिलेख मिल जाने से राज्य का फैलाव पक्का हो जाता है: एक सवाल जिसका एक जवाब नहीं

पृष्ठ 33 पर किताब असोक के अभिलेखों का मानचित्र दिखाती है और किनारे पर पूछती है: “क्या यह भी संभव है कि जो क्षेत्र शासकों के अधीन नहीं थे वहाँ भी उन्होंने अभिलेख उत्कीर्ण करवाए होंगे?”

इस सवाल का कोई एक सही जवाब नहीं है, और आपको भी नहीं देना है। बच्चा हाँ कहे या ना, उससे पूछिए कि अभिलेख मिलने भर से क्या पक्का होता है और क्या नहीं। जवाब में यह आए कि किताब के अनुसार साम्राज्य की सीमा के अंदर भी नियंत्रण एकसमान नहीं था, और संभव है कि सबसे प्रबल प्रशासनिक नियंत्रण राजधानी और उसके आसपास के प्रांतीय केंद्रों पर रहा हो (पृष्ठ 33, 35)। यानी अभिलेख का मिलना और पूरे नियंत्रण का होना, दो अलग बातें हो सकती हैं।

इस बातचीत से अध्याय की बड़ी बात अपने-आप निकलती है: इतिहासकार सारे स्रोतों को मिलाकर पढ़ते हैं, क्योंकि किताब पहले ही पन्ने पर कह चुकी है कि “इन स्रोतों से विकास की पूरी कहानी नहीं मिल पाती है” (पृष्ठ 28)।

अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों

ये चार सवाल पूछ लीजिए। चारों ठीक हों, तो अध्याय की मुख्य बातें आ गई हैं।

सवालजवाब
इतिहासकार यह सब जानते कैसे हैं?अभिलेखों, ग्रंथों, सिक्कों और चित्रों जैसे स्रोतों से। इनसे विकास की पूरी कहानी नहीं मिलती।
मौर्य साम्राज्य के पाँच राजनीतिक केंद्र कौन-से थे?पाटलिपुत्र (राजधानी), तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि।
सरदार और राजा में क्या फ़र्क़ है?सरदार अपने अधीन लोगों से भेंट लेता है और समर्थकों में बाँटता है; राजा कर वसूलते हैं।
क्या अभिलेखों से पूरा इतिहास पता चल जाता है?नहीं। अभिलेख पढ़ने में कठिनाई है, बहुत से बचे नहीं, खेती और रोज़ के सुख-दुख प्रायः दर्ज नहीं, और वे उन्हीं के विचार बताते हैं जो उन्हें बनवाते थे।

बच्चे के लिए इसी अध्याय के और पन्ने

  • रिवीजन नोट्स: पूरा अध्याय छोटे में, किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर के साथ।
  • प्रश्न बैंक: परीक्षा जैसे प्रश्न, उत्तर के साथ। बच्चा पहले ख़ुद लिखे, फिर मिलाए।
  • फ़्लैशकार्ड: बाईं ओर सवाल, दाईं ओर जवाब। जवाब ढककर बोलिए, फिर मिलाइए; रोज़ पाँच मिनट दोहराने के लिए।
  • परख प्रश्न: सोचकर जवाब देने वाले प्रश्न, किताब के स्रोतों और उदाहरणों पर, हर प्रश्न का उत्तर साथ में।
  • इंटरैक्टिव अध्याय: पूरा अध्याय स्क्रीन पर, हिस्सा-दर-हिस्सा।