Chapter 11महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन

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★= अति-संभावित परीक्षा-बिंदु | पुस्तक: भाग-3, पृ. 286–315 | काल: 1915–1948

1. प्रस्तावना-सूत्र★

  • राष्ट्र-निर्माण से जुड़े व्यक्ति: गैरीबाल्डी (इटली), जॉर्ज वाशिंगटन (अमेरिका), हो ची मिन्ह (वियतनाम) ↔ गाँधी = भारतीय राष्ट्र के ‘पिता’
  • ★★“कोई व्यक्ति चाहे कितना ही महान क्यों न हो, वह न केवल इतिहास बनाता है बल्कि स्वयं भी इतिहास द्वारा बनाया जाता है।”

2. वापसी और उद्घोषणा (§1)★★

  • जनवरी 1915 — दो दशक विदेश (अधिकांश दक्षिण अफ्रीका: वकील → नेता) के बाद वापसी
  • ★इतिहासकार चंद्रन देवनेसन — “दक्षिण अफ्रीका ने ही गाँधी जी को ‘महात्मा’ बनाया”; वहीं पहली बार सत्याग्रह; धर्म-सौहार्द; उच्च जातियों को भेदभाव पर चेतावनी
  • 1915 का भारत ≠ 1893: कांग्रेस-शाखाएँ; स्वदेशी आंदोलन 1905-07 से मध्य वर्गों में विस्तार; ★‘लाल, बाल और पाल’ — लाला लाजपत राय (पंजाब), बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र), विपिन चंद्र पाल (बंगाल) — दूर-दूर के क्षेत्र = अखिल भारतीय चरित्र
  • उदारवादी (क्रमिक प्रयास): गोखले (गाँधी के मान्य राजनीतिक परामर्शदाता) + जिन्ना (गाँधी की तरह गुजराती, लंदन-प्रशिक्षित वकील)
  • ★गोखले की सलाह — एक वर्ष ब्रिटिश भारत की यात्रा
  • ★★BHU-भाषण (फरवरी 1916): पहली महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक उपस्थिति; निमंत्रण दक्षिण अफ्रीका के कार्य के आधार पर; विशिष्ट वर्ग को आड़े हाथों — “धनी भद्रजन” बनाम “लाखों गरीब”; “हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकती है। न वकील, न डॉक्टर, न ज़मींदार…”
  • ★दोहरा अर्थ — तथ्य (राष्ट्रवाद तब विशिष्ट-वर्गीय था) + मंशा (सम्पूर्ण जनता का प्रतिनिधि बनाने की प्रथम सार्वजनिक उद्घोषणा)
  • दिसंबर 1916, लखनऊ कांग्रेस — चंपारन के किसान ने नील-उत्पादकों के अत्याचार बताए

3. स्थानिक संघर्ष → राष्ट्रीय नेता★★

वर्षस्थलमुद्दा
1917चंपारन (बिहार)काश्तकारी की सुरक्षा + फ़सल-चयन की आज़ादी
1918अहमदाबादकपड़ा मिल-मज़दूर — बेहतर काम-स्थितियाँ
1918खेड़ाफ़सल चौपट → लगान माफ़ी
  • ★तीनों से — “ग़रीबों के लिए गहरी सहानुभूति” वाले राष्ट्रवादी; पर स्थानिक संघर्ष
  • 1919 रॉलेट एक्ट — युद्धकालीन प्रेस-प्रतिबंध व बिना जाँच कारावास (सर सिडनी रॉलेट समिति की संस्तुति पर) जारी → देशव्यापी अभियान; बंद से जीवन ठहरा; ★पंजाब — युद्ध-सेवा के बदले ईनाम की जगह एक्ट; गाँधी पंजाब जाते क़ैद; अप्रैल 1919 — जलियाँवाला बाग (अमृतसर): ब्रिगेडियर का गोली-हुक्म; 400+ मृत
  • ★“रॉलेट सत्याग्रह से ही गाँधी जी एक सच्चे राष्ट्रीय नेता बन गए”

4. असहयोग-खिलाफ़त★★

  • कार्यक्रम — स्कूल-कॉलेज-न्यायालय न जाएँ; कर न चुकाएँ; “अंग्रेज़ी सरकार से (सभी) ऐच्छिक संबंधों का परित्याग”; ★ठीक से पालन → एक वर्ष के भीतर स्वराज
  • खिलाफ़त (1919-1920): नेता — मुहम्मद अली और शौकत अली; माँगें — ऑटोमन पवित्र स्थानों पर तुर्की सुल्तान/ख़लीफ़ा का नियंत्रण; जज़ीरात-उल-अरब (अरब, सीरिया, इराक, फिलिस्तीन) इस्लामी संप्रभुता में; ख़लीफ़ा के पास पर्याप्त क्षेत्र; कमाल अतातुर्क द्वारा ख़लीफ़ा-पद समाप्त; कांग्रेस-समर्थन; गाँधी ने असहयोग से मिलाया — हिंदू-मुसलमान मिलकर औपनिवेशिक शासन का अंत करेंगे
  • ★भागीदारी — “अभूतपूर्व लोकप्रिय कार्रवाई”: विद्यार्थी; वकील; 1921 — 396 हड़तालें, 6 लाख श्रमिक, 70 लाख कार्यदिवस; उत्तरी आंध्र — वन-क़ानूनों की अवहेलना; अवध — कर-बंदी; कुमाऊँ — अधिकारियों का सामान ढोने से इनकार
  • ★★किसानों-श्रमिकों ने “ऊपर से प्राप्त निर्देशों के बजाय अपने हितों से मेल खाते तरीक़ों” से असहयोग किया — कभी स्थानीय राष्ट्रवादी नेतृत्व की अवज्ञा भी
  • लुई फिशर — “असहयोग… युग का ही नाम… शांति की दृष्टि से नकारात्मक, प्रभाव की दृष्टि से बहुत सकारात्मक… स्वशासन के लिए एक प्रशिक्षण”
  • ★“1857 के बाद पहली बार… अंग्रेज़ी राज की नींव हिल गई”
  • ★★चौरी-चौरा (फरवरी 1922, संयुक्त प्रांत): थाने पर आक्रमण-आग; पुलिसकर्मियों की मृत्यु → तत्काल वापसी: “निहत्थे… व्यक्तियों की घृणित हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता”
  • मार्च 1922 — राजद्रोह में गिरफ़्तार; ★जज सी.एन. ब्रूमफील्ड — “लाखों देशवासियों की दृष्टि में महान देशभक्त और नेता… उच्च आदर्शों और पवित्र जीवन वाले व्यक्ति”; 6 वर्ष; रिहाई संभव हो तो “मुझसे ज़्यादा कोई प्रसन्न नहीं होगा”

5. ‘महात्मा’-छवि और जन-राष्ट्रवाद★★

  • 1922 तक राष्ट्रवाद एकदम परिवर्तित — BHU-वायदा पूरा; किसान-श्रमिक-कारीगर; ‘महात्मा’ — वस्त्र-जीवन-भाषा उनकी जैसी
  • ★धोती बनाम पश्चिमी सूट/बंदगला; रोज़ चरखा; ★सूत-कताई ने “मानसिक श्रम और शारीरिक श्रम की दीवार” तोड़ने में मदद दी
  • स्रोत 1 (चरखा): मशीन-सनक पर आपत्ति — ‘श्रम बचाने’ से हज़ारों भूखे; “सभी के लिए समय और श्रम… धन का केंद्रीकरण सभी के हाथों” (यंग इंडिया 13-11-1924); “पहिया अपने आप में मशीनरी का उत्कृष्ट नमूना” (17-3-1927)
  • ★★शाहिद अमीन — पूर्वी उ.प्र. के किसानों की गाँधी-कल्पना (स्थानीय प्रेस + अफ़वाहें); फरवरी 1921 की यात्रा; गोरखपुर-रिपोर्ट — स्टेशनों पर 15-20 हज़ार; भेनी (दान); रुपयों-सिक्कों की बारिश; ‘दर्शन’
  • स्रोत 2 (चामत्कारिक): सिकंदर साहू का कड़ाहा दो भाग; आज़मगढ़ में गेहूँ → तिल; विरोधियों की त्रासदी — चरखा-प्रश्नकर्ता के घर आग; अपशब्द कहने वाले की बकरी को उसके ही कुत्तों ने खाया; शराब-राह में रोड़ों की बारिश
  • ‘गाँधी बाबा/महाराज/महात्मा’ = उद्धारक — ऊँचे करों-दमनकारी अधिकारियों से रक्षा; मान-मर्यादा-स्वायत्तता की वापसी; जाति से व्यापारी, पेशे से वकील — पर सादगी से समानुभूति
  • संगठन: नयी शाखाएँ; रजवाड़ों में ★‘प्रजा मंडल’; मातृभाषा में संदेश; ★प्रांतीय समितियाँ भाषाई क्षेत्रों पर
  • समर्थक — जी.डी. बिड़ला (खुला), अन्य मौन; ★“गरीब किसान और धनी उद्योगपति दोनों — कारण भिन्न और संभवत: परस्पर विरोधी”
  • ★1917-22 के अनुयायी: महादेव देसाई, वल्लभ भाई पटेल, जे.बी. कृपलानी, सुभाष चंद्र बोस, अबुल कलाम आज़ाद, जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, गोविंद वल्लभ पंत, सी. राजगोपालाचारी
  • फरवरी 1924 रिहा → खादी + छुआछूत-उन्मूलन; ★“राजनीतिक जितने थे उतने ही समाज सुधारक”; बाल विवाह-छुआछूत से मुक्ति; हिंदू-मुस्लिम सौहार्द; स्वावलंबन

6. नमक सत्याग्रह★★

6.1 पृष्ठभूमि

  • 1928 — साइमन कमीशन (सभी श्वेत) का विरोध — गाँधी का आशीर्वाद; बारदोली सत्याग्रह को भी
  • ★लाहौर कांग्रेस (दिसंबर 1929): (1) नेहरू अध्यक्ष — युवा पीढ़ी को “नेतृत्व की छड़ी”; (2) ‘पूर्ण स्वराज’ की उद्घोषणा
  • ★26 जनवरी 1930 — ‘स्वतंत्रता दिवस’: ध्वज-गीत; गाँधी-निर्देश — नगाड़े से घोषणा; ध्वज-वंदन; शेष दिन रचनात्मक कार्य — “सूत कताई हो अथवा ‘अछूतों’ की सेवा अथवा हिंदुओं व मुसलमानों का पुनर्मिलन…”; प्रतिज्ञा — स्वतंत्रता “अहरणीय अधिकार”; दमनकारी सरकार को “बदलने अथवा समाप्त करने का भी अधिकार”

6.2 दांडी★★

  • ★नमक-चयन = “कुशल समझदारी”: हर घर में अपरिहार्य; घरेलू निर्माण भी वर्जित — दुकानों से ऊँचे दाम; एकाधिपत्य बहुत अलोकप्रिय → व्यापक असंतोष का संगठन
  • भारतीय समझे, अंग्रेज़ नहीं — इर्विन को पूर्व-सूचना पर महत्त्व नहीं समझा
  • ★12 मार्च 1930 — साबरमती से; तीन हफ़्ते; (6 अप्रैल) मुट्ठी भर नमक — “क़ानून की निगाह में अपराधी”; समानांतर यात्राएँ
  • स्रोत 3: कर कभी-कभी मूल्य का 14 गुना; सरकार बिना-कर नमक नष्ट करती; ★चौतरफा अभिशाप — ग्राम-उद्योग से वंचित; प्रकृति-संपदा का विनाश; राष्ट्रीय खर्च; भूखों से 1000%+ उगाही
  • स्रोत 4 (5 अप्रैल, दांडी): “शांति की सेना”; ★“जब एक पूरा राष्ट्र उठ खड़ा होता है… उसे नेता की ज़रूरत नहीं रह जाती”
  • धाराएँ — वन-क़ानून उल्लंघन; हड़तालें; वकील-विद्यार्थी बहिष्कार; ★~60,000 गिरफ़्तार (गाँधी सहित)
  • ★वसना-भाषण (ऊँची जातियों से): “अछूतों की सेवा… ग़लतियों का प्रायश्चित… हिंदू, मुसलमान, पारसी और सिख एकजुट — ये स्वराज की सीढ़ियाँ हैं”
  • DPS-रिपोर्ट: “श्री गाँधी शांत और निश्चिंत… ताकत बढ़ती जा रही है”; ★टाइम: पहले “तकुए जैसे शरीर”-“मकड़ी जैसे पेट” का मज़ाक, “मरियल साधु”; हफ़्ते में बदली — “साधु” व “राजनेता”; “ईसाई धर्मावलंबियों के ख़िलाफ़ ईसाई तरीकों का हथियार”

6.3 यात्रा के तीन ऐतिहासिक महत्त्व★★

  1. गाँधी दुनिया की नज़र में — यूरोपीय-अमेरिकी प्रेस की व्यापक कवरेज
  2. महिलाओं की बड़ी भागीदारी वाली पहली राष्ट्रवादी गतिविधि — समाजवादी कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने समझाया — आंदोलनों को पुरुषों तक सीमित न रखें; स्वयं नमक/शराब-क़ानून तोड़ सामूहिक गिरफ़्तारी
  3. सबसे महत्त्वपूर्ण — अंग्रेज़ों को अहसास: राज बहुत दिन नहीं टिकेगा; भारतीयों को सत्ता में हिस्सा देना पड़ेगा

6.4 गोलमेज़ और आगे★★

  • RTC-1 (नवंबर 1930): प्रमुख नेता अनुपस्थित → निरर्थक
  • जनवरी 1931 रिहाई → वाइसराय से बैठकें → ★गाँधी-इर्विन समझौता: (1) सविनय अवज्ञा वापस; (2) सारे क़ैदी रिहा; (3) तटीय इलाकों में नमक-उत्पादन की अनुमति; रैडिकल आलोचना — राजनीतिक स्वतंत्रता का आश्वासन नहीं, केवल वार्ताओं का आश्वासन
  • RTC-2 (1931 अंत, लंदन): गाँधी का दावा — कांग्रेस पूरे भारत की प्रतिनिधि; ★★तीन चुनौतियाँ: मुस्लिम लीग (मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हित); राजे-रजवाड़े (उनके भूभाग पर कांग्रेस का अधिकार नहीं); बी.आर. अम्बेडकर (गाँधी-कांग्रेस निचली जातियों के प्रतिनिधि नहीं)
  • स्रोत 5 (गाँधी): पृथक निर्वाचिका से ‘अस्पृश्यों’ की “दासता स्थायी”; कलंक मज़बूत; आवश्यकता — अस्पृश्यता का विनाश
  • स्रोत 6 (अम्बेडकर): धर्म “कोढ़ियों की तरह” देखता है; रोटी के लिए सवर्णों पर आश्रित; इतिहास ने हर संभावना बंद की; ★एकमात्र रास्ता — “राजनीतिक सत्ता में हिस्सा”
  • सम्मेलन बेनतीजा — खाली हाथ वापसी → आंदोलन पुन:; विलिंग्डन का ख़त: “अगर गाँधी न होता तो यह दुनिया वाकई बहुत ख़ूबसूरत होती…”
  • ★1935 एक्ट — सीमित प्रातिनिधिक शासन → 1937 चुनाव (सीमित मताधिकार) — कांग्रेस 11 में से 8 प्रांतों में ‘प्रधानमंत्री’

7. युद्ध से विभाजन तक★★

  • सितंबर 1939 — WW2; गाँधी-नेहरू हिटलर-नात्सियों के कट्टर आलोचक; शर्ती-सहयोग का प्रस्ताव ख़ारिज → अक्टूबर 1939 — कांग्रेसी मंत्रिमंडलों का इस्तीफ़ा; 1940-41 व्यक्तिगत सत्याग्रह
  • मार्च 1940 — लीग का मुस्लिम-बहुल इलाकों की स्वायत्तता-प्रस्ताव; ★“तीन धुरियों का संघर्ष” — कांग्रेस, लीग, ब्रिटिश
  • चर्चिल — “साम्राज्य को टुकड़े-टुकड़े करने के लिए नियुक्त नहीं”; 1942 बसंत — स्टेफ़र्ड क्रिप्स; वार्ता-भंग: कांग्रेस की माँग — वाइसराय की कार्यकारी परिषद में भारतीय रक्षा-सदस्य
  • ★★भारत छोड़ो (अगस्त 1942): गाँधी फ़ौरन गिरफ़्तार; युवाओं की हड़तालें-तोड़फोड़; जयप्रकाश नारायण (समाजवादी) भूमिगत; सतारा-मेदिनीपुर में ‘प्रतिसरकार’; दमन में साल से ज़्यादा; ★“सही मायने में जनांदोलन — लाखों आम हिंदुस्तानी”; युवा कॉलेज छोड़ जेल
  • सतारा 1943 (बॉक्स): ग़ैर-ब्राह्मण आंदोलन-पृष्ठभूमि; सेवा दल-तूफ़ान दल; जन-अदालतें; कुनबी किसान + दलित सहयोग; 1946 के चुनावों तक (कांग्रेस-असहमति के बावजूद)
  • ★कांग्रेस-नेता जेल में → जिन्ना-लीग का विस्तार — पंजाब और सिंध में पहचान
  • जून 1944 — गाँधी रिहा; जिन्ना-वार्ताएँ; 1945 — लेबर सरकार (स्वतंत्रता-पक्षी); वावेल की बैठकें
  • ★1946 की शुरुआत — चुनाव: “सामान्य” सीटें — कांग्रेस; मुस्लिम आरक्षित — लीग — “राजनीतिक ध्रुवीकरण पूरा”
  • 1946 गर्मी — कैबिनेट मिशन: सीमित स्वायत्तता वाली संघीय व्यवस्था — विफल → जिन्ना का ★‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ (16 अगस्त 1946) — कलकत्ता में ख़ूनी संघर्ष → ग्रामीण बंगाल, बिहार, संयुक्त प्रांत, पंजाब; “कुछ स्थानों पर मुसलमान, कुछ अन्य स्थानों पर हिंदू निशाना”
  • फरवरी 1947 — माउंटबेटन; अंतिम वार्ता विफल → स्वतंत्रता + विभाजन; 15 अगस्त सत्ता-हस्तांतरण; ★संविधान सभा के अध्यक्ष ने गाँधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहा — “बहुत देर तक करतल ध्वनि”

8. आख़िरी, बहादुराना दिन★★

  • 15 अगस्त 1947 — गाँधी कलकत्ता में; न कार्यक्रम, न झंडा; 24 घंटे का उपवास; स्वतंत्रता “अकल्पनीय कीमत पर”
  • तेंदुलकर (जीवनी-लेखक): अस्पतालों-शरणार्थी शिविरों के चक्कर; “अतीत को भुला” भाईचारे का आह्वान
  • कांग्रेस — ‘अल्पसंख्यकों के अधिकारों’ पर प्रस्ताव; ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ कभी स्वीकार नहीं; ★भारत — “बहुत सारे धर्मों और बहुत सारी नस्लों का देश… ऐसे ही बनाए रखा जाना चाहिए”; “लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र”
  • ★विद्वानों की दृष्टि में स्वतंत्रता-बाद के महीने = गाँधी का “श्रेष्ठतम क्षण”; बंगाल-शांति → दिल्ली; दंगाग्रस्त पंजाब जाने की इच्छा; सभाओं में क़ुरान-पाठ पर आपत्तियाँ; “पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों के लिए समान रूप से चिंतित”
  • 20 जनवरी — हमला, अविचलित; 26 जनवरी — “बुरी घड़ी बीत चुकी है”; “सभी वर्गों और धर्मों की समानता”; अल्पसंख्यक पर बहुल का वर्चस्व स्थापित नहीं होगा; ★“भौगोलिक-राजनीतिक रूप से बँटे पर हृदय से हम सभी सदैव मित्र एवं भाई रहेंगे”
  • ★★30 जनवरी 1948 की शाम — दैनिक प्रार्थना सभा में युवक ने गोली मारी; हत्यारे ने बाद में आत्मसमर्पण किया — नाथूराम गोडसे
  • शोक — जॉर्ज ऑरवेल व एलबर्ट आइंस्टीन के संदेश; ★टाइम की लिंकन-तुलना: धर्मांध अमरीकी ने लिंकन को मारा (नस्ल-रंग से परे मानव-समता में विश्वास); धर्मांध हिंदू ने गाँधी को (कठिनतम क्षणों में भी दोस्ती-भाईचारे, धर्मों के बीच मैत्री में विश्वास); “दुनिया ने वैसे ही मौन धारण किया…”

9. गाँधी को समझना (§6)★★

स्रोत-प्रकारदेता हैसावधानी
भाषणसार्वजनिक विचारजनता के लिए गढ़े गए
निजी पत्रगुस्सा-पीड़ा, असंतोष-बेचैनी, आशाएँ-हताशाएँ★निजी-सार्वजनिक का फ़र्क़ टूटता है; प्रकाशन-आशंका से भाषा तय; गाँधी ‘हरिजन’ में पत्र छापते थे; नेहरू — ‘ए बंच ऑफ़ ओल्ड लेटर्स’
आत्मकथामानवीय विवरणों से समृद्ध अतीतस्मृति-आधारित; ★“अपनी तस्वीर गढ़ने का एक तरीक़ा”; चुप्पियों को पढ़ो — इच्छित/अनिच्छित विस्मृति
पुलिस-रिपोर्ट (गृह विभाग की पाक्षिक रिपोर्टें)प्रशासनिक नज़र★“आला अधिकारी क्या देखते थे या क्या मानना चाहते थे”; नमक-यात्रा = “नाटक, करतब… हताश कोशिश” की प्रस्तुति
अख़बारगतिविधियाँ + जन-धारणा★प्रकाशकों के पूर्वाग्रह; लंदन बनाम राष्ट्रवादी रिपोर्टें भिन्न; “हर वक्तव्य यथार्थ का सच्चा ब्योरा नहीं”

स्रोत 7 — 1936 का संकट (पत्रों के आइने में)★★

  • पृष्ठभूमि: नेहरू 1928 यूरोप से सोवियत-प्रभावित; समाजवादियों (जयप्रकाश, नरेंद्र देव, रंगा) से निकटता → कांग्रेस में समाजवादी बनाम रूढ़िवादी खाई; 1936 अध्यक्ष के रूप में फ़ासीवाद-विरोध, मज़दूर-किसान माँगों का समर्थन → प्रसाद-पटेल के नेतृत्व में CWC का इस्तीफ़ा-ख़तरा; बम्बई के उद्योगपतियों का आलोचना-बयान; वर्धा में गाँधी की मध्यस्थता — नेहरू के रैडिकल तेवर पर अंकुश + प्रसाद-पक्ष को नेहरू-नेतृत्व की अहमियत
  • तीन पत्र: प्रसाद (वर्धा, 1 जुलाई) — “पत्र और इस्तीफ़े वापस… पर आप अल्पसंख्यक वर्ग के प्रवक्ता की तरह बोल रहे हैं… हमें आपसे संरक्षण नहीं मिल रहा”; नेहरू (इलाहाबाद, 5 जुलाई) — “मैं एक असहनीय मुसीबत बन चुका हूँ… मेरे विचार आकस्मिक नहीं हैं, वे मेरा हिस्सा हैं… हर दृष्टिकोण देश के सामने आना चाहिए”; बापू (सेगाँव, 15 जुलाई) — “साथियों के पास तुम्हारे जैसा साहस-बेबाकी नहीं… वे डरते हैं… ★‘काँटों के ताज के लिए तुम्हारा नाम मैंने ही प्रस्तावित किया था — भले ही सिर छिल जाए इसे उतारना मत’… लाहौर में तिरंगे के चारों ओर नाचने जैसी ख़ुशी…”

स्रोत 8 — पाक्षिक रिपोर्टें (गोपनीय)★

  • मार्च-I: गुजरात — किसान कटाई में व्यस्त, विद्यार्थी परीक्षा-तैयारी; बंगाल — “कोई विशेष उत्साह नहीं” पर महिलाओं की संख्या बढ़ रही; मद्रास — यात्रा “नाटकीय”, कार्यक्रम “अव्यावहारिक” पर हिंदू जनता की “अगाध श्रद्धा”; बम्बई — केसरी: “गाँधी को दंडित करे तो भी राष्ट्र की विजय, चलने दे तो और भी बड़ी विजय”
  • मार्च-II: बंगाल — “गाँधी के साथ क्या किया जाता है” का इंतज़ार; पंजाब — झेलम में संगठित प्रयासों के आसार; संयुक्त प्रांत — भर्ती-प्रचार-तैयारी
  • अप्रैल-I: संयुक्त प्रांत — आगरा से मैनपुरी तक खुलेआम अवहेलना; ★नेहरू 14 अप्रैल को गिरफ़्तार — नैनी जेल, 6 माह; मध्य प्रांत — सेठ गोविंद दास (जबलपुर) का रासायनिक नमक; मद्रास — विशाखापटनम में पुलिस का भारी विरोध; बंगाल — 24 परगना-मिदनापुर केंद्र

10. काल-रेखा★★

1915 वापसी → 1917 चंपारन → 1918 खेड़ा + अहमदाबाद → 1919 रॉलट (मार्च-अप्रैल); जलियाँवाला (अप्रैल) → 1921 असहयोग-खिलाफ़त → 1928 बारदोली → 1929 लाहौर — पूर्ण स्वराज (दिसंबर) → 1930 सविनय अवज्ञा; दांडी (मार्च-अप्रैल) → 1931 गाँधी-इर्विन (मार्च); RTC-2 (दिसंबर) → 1935 एक्ट → 1939 मंत्रिमंडल-त्यागपत्र → 1942 भारत छोड़ो (अगस्त) → 1946 नोआखली-दौरा → (पाठ से: 1947 विभाजन-स्वतंत्रता; 30 जनवरी 1948 शहादत)

11. स्मरण-सूत्र

  1. स्थानिक-त्रयी: “चं-अ-खे” (चंपारन 1917 → अहमदाबाद-खेड़ा 1918)
  2. 1919-चक्र: “रॉलेट → पंजाब → जलियाँवाला → राष्ट्रीय नेता”
  3. दांडी-तीन महत्त्व: “विश्व-महिला-विदाई” (विश्व-नज़र; महिला-भागीदारी; राज की विदाई का अहसास)
  4. गाँधी-इर्विन: “वापसी-रिहाई-नमक”
  5. RTC-2 चुनौतियाँ: “ली-रा-अम्बे” (लीग, राजे, अम्बेडकर)
  6. 1946-चक्र: “चुनाव → मिशन → 16 अगस्त → माउंटबेटन”
  7. स्रोत-चौकड़ी: “भा-प-आ-पु-अ” (भाषण, पत्र, आत्मकथा, पुलिस, अख़बार)

12. अंतिम 10 मिनट (परीक्षा-द्वार पर)

  1. 1915 जनवरी • देवनेसन-कथन • लाल-बाल-पाल • गोखले-सलाह • BHU फरवरी 1916
  2. चंपारन-अहमदाबाद-खेड़ा • रॉलेट • जलियाँवाला 400+ • “सच्चे राष्ट्रीय नेता”
  3. असहयोग — एक वर्ष में स्वराज • खिलाफ़त (अली बंधु, अतातुर्क) • 396 हड़तालें • “अपने हितों से मेल खाते तरीक़े” • चौरी-चौरा फरवरी 1922 • ब्रूमफील्ड-6 वर्ष
  4. धोती-चरखा • श्रम-दीवार • शाहिद अमीन — अफ़वाहें-दर्शन • प्रजा मंडल • भाषाई समितियाँ • 1917-22 के अनुयायी
  5. लाहौर 1929 — नेहरू + पूर्ण स्वराज • 26 जनवरी 1930
  6. 12 मार्च–6 अप्रैल 1930 • नमक = कुशल समझदारी • 14-गुना कर • 60,000 गिरफ़्तार • वसना — “स्वराज की सीढ़ियाँ” • टाइम का पलटा
  7. तीन महत्त्व — कमलादेवी • गाँधी-इर्विन • RTC-2 की तीन चुनौतियाँ • गाँधी बनाम अम्बेडकर
  8. 1935-1937 (8/11) → 1939 इस्तीफ़े → 1942 क्रिप्स + भारत छोड़ो → सतारा → 1946 ध्रुवीकरण-प्रत्यक्ष कार्यवाही → 1947 विभाजन
  9. 15 अगस्त — कलकत्ता-उपवास • “श्रेष्ठतम क्षण” • 30 जनवरी 1948 — गोडसे • ऑरवेल-आइंस्टीन • लिंकन-तुलना
  10. स्रोत — पत्र/भाषण-भेद • “तस्वीर गढ़ना” • पाक्षिक रिपोर्टों का “मानना चाहते थे” • अख़बारों के पूर्वाग्रह • 1936 के तीन पत्र — “काँटों का ताज”