ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक
भाग अ — जागरूकता (Awareness)
1(केस-अध्ययन) BHU के मंच पर राजा-रईस बैठे थे जिनके दान से विश्वविद्यालय बना — और गाँधी ने उन्हीं से कहा: “अपने को इन अलंकरणों से मुक्त कर लें।”
(क) यह भाषण ‘तथ्य का उद्घाटन’ और ‘मंशा की उद्घोषणा’ — दोनों कैसे था?
(ख) दिसंबर 1916 (लखनऊ) की कौन-सी भेंट इस मंशा को पहला मैदान देती है?
[पाठ-विश्लेषण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) तथ्य — राष्ट्रवाद वकील-डॉक्टर-ज़मींदारों का; मंशा — उसे “सम्पूर्ण भारतीय जनता” का प्रतिनिधि बनाने की प्रथम सार्वजनिक उद्घोषणा; (ख) चंपारन के किसान की भेंट → 1917 का पहला स्थानिक सत्याग्रह।
2(दावा-कारण)
अभिकथन (A): गाँधी ने नमक को सविनय अवज्ञा का केंद्रीय मुद्दा बनाया।
कारण (R): नमक हर घर की अपरिहार्य आवश्यकता थी और उस पर राज्य का अलोकप्रिय एकाधिपत्य था।
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) दोनों सही; R, A की सही व्याख्या
3(दावा-कारण)
अभिकथन (A): पाक्षिक रिपोर्टें बार-बार कहती रहीं कि दांडी यात्रा के प्रति लोगों में कोई उत्साह नहीं है।
कारण (R): वास्तव में यात्रा को कोई जनसमर्थन नहीं मिला था।
उत्तर देखिए
उत्तर: A सही, R ग़लत — 60,000 गिरफ़्तारियाँ, स्टेशनों की भीड़, महिलाओं की बढ़ती संख्या (स्वयं रिपोर्टों में!) समर्थन के प्रमाण; रिपोर्टें वही दिखातीं जो “आला अधिकारी मानना चाहते थे”।
4(आँकड़ा-व्याख्या) 1921 — 396 हड़तालें, 6 लाख श्रमिक, 70 लाख कार्यदिवस; 1930 — ~60,000 गिरफ़्तारियाँ; 1937 — 11 में से 8 प्रांत।
(क) ये तीन आँकड़े मिलकर राष्ट्रवाद के किस रूपांतरण की कहानी कहते हैं?
(ख) प्रत्येक आँकड़े का स्रोत-प्रकार क्या है और उसकी विश्वसनीयता पर क्या टिप्पणी करेंगे?
[आँकड़ा-शृंखला]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) जन-भागीदारी (1921) → जन-बलिदान (1930) → चुनावी वैधता (1937) — आंदोलन से सत्ता-दावेदारी तक; (ख) सरकारी आँकड़े — शत्रु-पक्ष के होने से आंदोलन-पक्ष में अनिच्छुक साक्ष्य = अधिक विश्वसनीय।
5(वर्गीकरण) निम्न को (घटना / स्रोत / व्यक्ति-भूमिका) में छाँटिए और एक-एक पंक्ति में पहचानिए —
चौरी-चौरा • ए बंच ऑफ़ ओल्ड लेटर्स • कमलादेवी चट्टोपाध्याय • पाक्षिक रिपोर्टें • प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस • चंद्रन देवनेसन • हरिजन • सतारा-प्रतिसरकार • लुई फिशर
उत्तर देखिए
उत्तर: घटनाएँ — चौरी-चौरा (फर. 1922), प्रत्यक्ष कार्यवाही (16-8-1946), सतारा-प्रतिसरकार (1943-46) | स्रोत — बंच ऑफ़ ओल्ड लेटर्स (नेहरू-संकलन), पाक्षिक रिपोर्टें (गृह विभाग), हरिजन (गाँधी का अख़बार) | व्यक्ति — कमलादेवी (महिला-भागीदारी की प्रेरक), देवनेसन (‘महात्मा’ वाला कथन), फिशर (अमरीकी जीवनी-लेखक)।
6(स्रोत-मिलान) उद्धरण
उत्तर देखिए
स्रोत:
(क) “हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकती है” (ख) “मैं धन का केंद्रीकरण… सभी के हाथों में करना चाहता हूँ” (ग) “उसे नेता की ज़रूरत नहीं रह जाती” (घ) “मेरे विचार आकस्मिक नहीं हैं। वे मेरा हिस्सा हैं” (ङ) “एकमात्र रास्ता यही है कि उसे राजनीतिक सत्ता में हिस्सा मिले”
विकल्प: दांडी-भाषण • BHU-भाषण • नेहरू का पत्र • यंग इंडिया (चरखा) • अम्बेडकर
उत्तर: (क)-BHU (ख)-यंग इंडिया (ग)-दांडी (घ)-नेहरू-पत्र (ङ)-अम्बेडकर।
7(तुलनात्मक) तीन आंदोलनों की तुलना — असहयोग (1921) / सविनय अवज्ञा (1930) / भारत छोड़ो (1942): (क) केंद्रीय कार्यक्रम, (ख) गाँधी की स्थिति (मुक्त/जेल), (ग) भागीदारी की विशेषता, (घ) समाप्ति/परिणति।
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा ऐच्छिक संबंध-त्याग / नमक-क़ानून भंग / ‘भारत छोड़ो’; मुक्त-नेतृत्व / यात्रा-नेतृत्व फिर जेल / फ़ौरन गिरफ़्तार (नेतृत्वहीन जन-संचालन); अभूतपूर्व प्रथम जन-कार्रवाई / महिलाएँ+60,000 / “सही मायने में जनांदोलन”-प्रतिसरकारें; चौरी-चौरा से वापसी / गाँधी-इर्विन / सालभर में दमन पर 1946-47 की भूमिका।
8(अवधारणा-जाँच) “गाँधी ने अकेले जनता को जगाया” — इस कथन की NCERT-आधार पर जाँच कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा अधूरा — (1) “स्वयं भी इतिहास द्वारा बनाया जाता है”; (2) किसानों ने अपने ढंग से गाँधी गढ़े (अमीन की अफ़वाहें) और अपने हितों से आंदोलन की व्याख्या की; (3) संगठन-तंत्र व 1917-22 के अनुयायी; (4) कमलादेवी जैसे हस्तक्षेप। नेता-जनता का रिश्ता दोतरफ़ा।
9(कालक्रम-तर्क) 1929 (पूर्ण स्वराज) से 1947 (स्वतंत्रता) — 18 वर्ष। इस अवधि को तीन चरणों में बाँटकर हर चरण का ‘इंजन’ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा 1930-34 — सविनय अवज्ञा-गोलमेज़ (जन-दबाव); 1935-42 — संवैधानिक प्रयोग से भारत छोड़ो (चुनाव+युद्ध-राजनीति); 1944-47 — वार्ता-ध्रुवीकरण-विभाजन (तीन धुरियाँ); हर चरण में दबाव का स्वरूप बदला — आंदोलन → चुनाव → वार्ता।
10(स्रोत-स्थिति) एक ही सप्ताह (अप्रैल 1930) के तीन विवरण — केसरी (“राष्ट्र की विजय”), पाक्षिक रिपोर्ट (“कोई विशेष उत्साह नहीं”), टाइम (“मरियल साधु”
उत्तर देखिए
“साधु और राजनेता”)।
(क) तीनों की संस्थागत स्थिति बताइए। (ख) इतिहासकार तीनों से मिलकर ‘यथार्थ’ कैसे बनाता है?
उत्तर-दिशा राष्ट्रवादी प्रेस / औपनिवेशिक निगरानी / विदेशी व्यावसायिक प्रेस; मिलान-विधि — पूर्वाग्रह पहचानो, अनिच्छुक स्वीकारोक्तियाँ पकड़ो (रिपोर्ट में महिलाओं की बढ़त; टाइम का पलटना), भौतिक तथ्यों (गिरफ़्तारियाँ) से जाँचो।
भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)
11(दृष्टिकोण-विविधता) 12 मार्च 1930 की सुबह — तीन डायरियाँ (60-80 शब्द प्रत्येक):
(क) यात्रा में शामिल आश्रमवासी — संकल्प, भय, विश्वास
(ख) रास्ते के गाँव की एक स्त्री — दर्शन, घर की ज़िम्मेदारियाँ, कमलादेवी जैसों की ख़बरें
(ग) ज़िला पुलिस सुपरिंटेंडेंट — रिपोर्ट की भाषा बनाम भीतर की बेचैनी
[बहु-परिप्रेक्ष्य]
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-बिंदु तीनों में NCERT-तथ्य; (ग) में “शांत और निश्चिंत… ताकत बढ़ती जा रही है” वाली रिपोर्ट-पंक्ति और निजी चिंता का द्वंद्व आए तो उत्कृष्ट।
12(असहमति का शिष्टाचार) गाँधी-अम्बेडकर बहस (स्रोत 5-6) में दोनों पक्ष दमित वर्गों का भला चाहते हैं — पर रास्ते टकराते हैं।
(क) दोनों की चिंताओं को एक-एक वाक्य में न्यायपूर्वक लिखिए।
(ख) आज की लोकतांत्रिक बहसों के लिए इस असहमति से क्या सीख मिलती है? (आरक्षण-विमर्श से जोड़े बिना, सिद्धांत-स्तर पर)
[नैतिक तर्क]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) गाँधी — पृथक्करण से कलंक-स्थायित्व व समाज-विभाजन; अम्बेडकर — बिना सत्ता-हिस्सेदारी के सुधार की प्रतीक्षा दमितों को असुरक्षित छोड़ती है; (ख) असहमति = शत्रुता नहीं; दोनों तर्कों की आंतरिक संगति का सम्मान; प्रभावित पक्ष की आवाज़ की केंद्रीयता।
13(हिंसा-अहिंसा का प्रश्न) चौरी-चौरा के बाद गाँधी ने चरम पर पहुँचा आंदोलन वापस ले लिया — बहुत से राष्ट्रवादी क्षुब्ध थे।
(क) गाँधी के तर्क (“निहत्थों की घृणित हत्या…”) में कौन-सा सिद्धांत काम कर रहा है?
(ख) ‘साधन-शुद्धता बनाम लक्ष्य-प्राप्ति’ की इस बहस पर दोनों पक्षों के दो-दो तर्क लिखिए।
[मूल्य-विवेचन]
14(भाषा-संवेदनशीलता) टाइम ने गाँधी के “तकुए जैसे शरीर” और “मकड़ी जैसे पेट” का मज़ाक उड़ाया; विलिंग्डन ने भारतीय जनता को “अव्यावहारिक, रहस्यवादी और अंधविश्वासी” कहा।
(क) दोनों टिप्पणियों में साम्राज्य की कौन-सी दृष्टि झलकती है?
(ख) उसी टाइम ने 1948 में गाँधी की तुलना लिंकन से की — यह बदलाव क्या सिखाता है?
[विमर्श-विश्लेषण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) शरीर-उपहास व ‘अंधविश्वासी जनता’ — उपनिवेश की नस्ली-सभ्यतागत श्रेष्ठता-ग्रंथि; नेता की देह पर हमला = आंदोलन को हलका दिखाना; (ख) घटनाएँ विमर्श को हरा सकती हैं; छवियाँ स्थिर नहीं — शक्ति-सत्य के दबाव में बदलती हैं।
15(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “1947 की स्वतंत्रता गाँधी की जीवन-भर की जीत थी।”
विपक्ष: “15 अगस्त को कलकत्ता का उपवास बताता है कि गाँधी स्वयं इसे अधूरी—या हारी हुई—जीत मानते थे।”
दोनों दल §5 के साक्ष्यों (उपवास, ‘अकल्पनीय कीमत’, अल्पसंख्यक-प्रस्ताव, ‘श्रेष्ठतम क्षण’, 26 जनवरी की आशा) से तर्क बनाएँ; संयुक्त निष्कर्ष में ‘जीत-हार’ से आगे का मूल्यांकन आए।
[संवाद-कौशल]
भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)
16(कल्पनाशील पुनर्रचना) “नमक की मुट्ठी” — 6 अप्रैल 1930 की सुबह दांडी के समुद्र-तट का दृश्य — एक स्थानीय मछुआरे की आँखों से (एक पृष्ठ): भीड़, बूढ़े आदमी का झुकना, मुट्ठी में नमक, उसके अपने जीवन में नमक-क़ानून का अर्थ।
शर्त: पाँच NCERT-तथ्य; मछुआरे की अपनी आर्थिक दृष्टि (ग्राम-उद्योग से वंचना) झलके।
[ऐतिहासिक कल्पना]
17(डिज़ाइन-चुनौती) “चार खिड़कियों वाला संग्रहालय-कक्ष” — गाँधी-प्रदर्शनी का डिज़ाइन: चार दीवारें = चार स्रोत-प्रकार (भाषण/पत्र; आत्मकथा; पुलिस-रिपोर्ट; अख़बार)। हर दीवार पर — एक प्रदर्श, एक उद्धरण, और दर्शक के लिए एक सवाल-पट्टिका (“यह स्रोत क्या छिपा सकता है?”)। कक्ष के केंद्र में क्या रखेंगे और क्यों — यह भी लिखिए।
[डिज़ाइन-चिंतन]
उत्तर देखिए
संकेत केंद्र में चरखा/ख़ाली कुर्सी/दर्पण — ‘गाँधी को हर पीढ़ी अपनी तरह देखती है’ जैसे विचार — खुला उत्तर।
18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि चौरी-चौरा न होता…” — असहयोग 1922 के बाद भी चलता तो — तीन संभावनाएँ (कांग्रेस-संगठन, हिंदू-मुस्लिम एकता की अवधि, गाँधी की जेल-राजनीति) NCERT-तथ्यों से बाँधकर लिखिए। (सावधानी: ‘स्वराज मिल ही जाता’ जैसी सरल छलाँग नहीं — फिशर-उद्धरण व ‘नींव हिलने’ की सीमाएँ याद रखें।)
[परिकल्पना-निर्माण]
19(विचार-संयोजन) BHU-भाषण (1916) और वसना-भाषण (1930) — दोनों में गाँधी ‘विशेषाधिकार-प्राप्तों’ से प्रायश्चित माँगते हैं। 150 शब्दों में टिप्पणी: “चौदह साल के अंतराल पर एक ही संदेश — बदला क्या: श्रोता, मंच या भारत?”
[अंतर-पाठ संश्लेषण]
20(भूमिका-लेखन) “संपादक की मेज़ — 31 जनवरी 1948” — तीन अख़बारों के संपादकीय के पहले अनुच्छेद (60-70 शब्द प्रत्येक): (क) भारतीय राष्ट्रवादी दैनिक, (ख) लंदन का दैनिक, (ग) टाइम-शैली की अमरीकी पत्रिका (लिंकन-तुलना के साथ)। अंत में एक पंक्ति — तीनों में साझा क्या है।
[स्रोत-निर्माण की समझ]
21(संक्षिप्त सृजन) “चरखे का एकालाप” — 100 शब्द: चरखा बोलता है — साबरमती से प्रार्थना-सभाओं तक की अपनी यात्रा; वह क्या-क्या ‘कातता’ रहा (सूत, समय, समानुभूति, स्वावलंबन…)। तीन NCERT-तथ्य अनिवार्य।
[रूपक-लेखन]
भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक
| आयाम | प्रारंभिक (1) | दक्ष (2) | उन्नत (3) |
|---|---|---|---|
| जागरूकता | तिथियाँ-नाम अटकते हैं | कालक्रम व तीन आंदोलनों का ढाँचा सही | स्रोत-स्थिति से साक्ष्य तौलता है; ‘अनिच्छुक साक्ष्य’ जैसी युक्तियाँ प्रयोग करता है |
| संवेदनशीलता | नायक-पूजा/एकांगी खंडन | गाँधी-अम्बेडकर दोनों पक्ष न्यायपूर्वक | असहमति-शिष्टाचार, साधन-लक्ष्य बहस, विमर्श-विश्लेषण में परिपक्व-शालीन भाषा |
| सृजनात्मकता | कल्पना तथ्य-विहीन | तथ्य-सम्मत, ढाँचाबद्ध | स्रोत-चेतना रचना में बुनी (संपादकीय-भेद; ‘क्या छिपा सकता है’) |
भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30% शिक्षक-संकेत: प्रश्न 2, 3, 5, 6, 7 लिखित-योग्य; 11, 12, 15 समूह/मौखिक; 16, 17, 21 पोर्टफोलियो; 🗣️ पृ. 302 का काल्पनिक-संवाद प्रश्न 12 के साथ जोड़कर कराइए। सृजनात्मक उत्तरों में न्यूनतम 4-6 सही NCERT-तथ्य अनिवार्य।