आधुनिक बनने के कई रास्ते थे — और हर रास्ते पर लोकतंत्र और विकास के बीच एक सौदेबाज़ी हुई, जिसका हिसाब आज तक चुकाया जा रहा है।
NCERT का सूत्र-वाक्य: “औद्योगिक समाजों ने एक-दूसरे के जैसे बनने की बजाए आधुनिकता के अपने-अपने मार्ग बनाए।”
भाग क — दो देश, उलटी क़िस्मत (पृ. 153)
| चीन | जापान |
|---|---|
| 19वीं सदी की शुरुआत में पूर्वी एशिया पर प्रभुत्व; छींग राजवंश की सत्ता अक्षुण्ण जान पड़ती थी | नन्हा-सा द्वीप-देश, अलग-थलग प्रतीत होता था |
| अशांति की गिरफ़्त में; औपनिवेशिक चुनौती का सामना नहीं कर पाया | आधुनिक राष्ट्र-राज्य + औद्योगिक अर्थतंत्र |
| सुधार में असफल; गृहयुद्ध | ताइवान (1895) और कोरिया (1910) को मिलाकर औपनिवेशिक साम्राज्य |
| — | चीन को 1894 में और रूस को 1905 में हराया |
जापान की सफलता के तीन कारण (NCERT): जापानी संस्थाओं और समाज में परंपरा की सुदृढ़ता · सीखने की शक्ति · राष्ट्रवाद की ताकत
चेतावनी वाला वाक्य: जापान के विस्तार को “पश्चिमी प्रभुत्व का विरोध करने और एशिया को आज़ाद कराने की माँग के आधार पर उचित ठहराया गया।”
भाग ख — इतिहास-लेखन
- चीन-जापान में इतिहास शासकों के लिए मार्गदर्शक; अतीत वे मानक देता है जिनसे शासकों का आकलन हो
- सिमा छियन (145–90 ई.पू.) — प्राचीन चीन का महानतम इतिहासकार
- 1869 — मेजी सरकार ने अभिलेख इकट्ठा करने के लिए ब्यूरो बनाया; उद्देश्य मेजी विजेताओं के नज़रिये से लेखन
- मार्को पोलो (1254–1324) चीन में 1274–1290 · मैत्थियो रिक्की (1552–1610) चीन में · लुई फ़्रॉय (1532–1597) जापान में
- जोज़फ नीडहम — चीनी सभ्यता में विज्ञान का इतिहास · जॉर्ज सैन्सम — जापानी इतिहास व संस्कृति
- नाइतो कोनान (1866–1934) — शिनारॉन (चीन पर, 1914); 1907 में क्योतो विश्वविद्यालय में प्राच्य अध्ययन विभाग; “चीनी राष्ट्रवाद की शक्ति का सही आकलन नहीं कर पाए”
भाग ग — भूगोल
| चीन | जापान |
|---|---|
| विशालकाय महाद्वीपीय देश | द्वीप शृंखला |
| तीन नदियाँ: पीली (हुआंग हे), यांग्त्सी/छांग जिआंग — दुनिया की तीसरी सबसे लंबी, पर्ल | चार बड़े द्वीप: हॉंशू, क्यूशू, शिकोकू, होकाइदो; ओकिनावा सबसे दक्षिण (बहामास वाले अक्षांश पर) |
| हान प्रमुख जातीय समूह; भाषा चीनी (पुतोंगहुआ); उइघुर, हुई, मांचू, तिब्बती | अधिकतर जापानी; आयनू अल्पसंख्यक; कोरियाई श्रमिक (उपनिवेश-काल में लाए गए) |
| चार पाकप्रणालियाँ — केंटोनी (डिम सम = ‘दिल को छूना’), उत्तरी (गेहूँ), शेचुआँ, पूर्वी | पशुपालन की परंपरा नहीं; चावल बुनियादी फसल, मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत |
शेचुआँ का तीखापन: प्राचीन काल में बौद्ध भिक्षुओं के मसाले + 15वीं सदी में पुर्तगालियों द्वारा लाई मिर्च
भाग घ — तोकुगावा जापान (1603–1867)
सत्ता: सम्राट (क्योतो, प्रतीकात्मक) → शोगुन (असली) → दैम्यो (250 भाग) → सामुराई
16वीं सदी के अंत के तीन परिवर्तन:
- किसानों से हथियार ले लिए गए; केवल सामुराई तलवार रख सकते थे → शान्ति
- दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश → स्वायत्तता
- ज़मीन का सर्वेक्षण और उत्पादकता के आधार पर वर्गीकरण → राजस्व के लिए स्थायी आधार
शहरी क्रांति:
- 17वीं सदी के मध्य तक एदो दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर
- छह शहर 50,000+ (तुलना: यूरोप में प्रायः एक ही बड़ा शहर)
- वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था; वित्त और ऋण की प्रणालियाँ
- “व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे”
- “एदो में लोग नूडल की कटोरी की कीमत पर किताब किराये पर ले सकते थे”
निशिजिन (क्योतो): 16वीं सदी में 31 परिवारों का बुनकर संघ → 17वीं सदी के आखिर तक 70,000 लोग → 1713 में केवल देशी धागे के आदेश → नया क्षेत्रीय उद्यमी वर्ग जिसने तोकुगावा व्यवस्था को चुनौती दी → 1859 में विदेशी व्यापार शुरू, रेशम मुनाफ़े का प्रमुख स्रोत
गेंजी की कथा: मुरासाकी शिकिबु; हेआन राजदरबार; लेखिकाओं ने जापानी लिपि, पुरुषों ने चीनी लिपि; औरतों को पति चुनने की आज़ादी का चित्रण
भाग ङ — मेजी पुनर्स्थापना
1853 — कॉमोडोर मैथ्यू पेरी (1794–1858) अमरीका से भेजे गए
↓ (अमरीका के तीन कारण: चीन का रास्ता · प्रशांत में ईंधन · तब केवल हॉलैंड व्यापार करता था)
1854 — जापान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए
↓
1867–68 — मेजी पुनर्स्थापना; शोगुन हटाया गया
↓
एदो → तोक्यो ('पूर्वी राजधानी')
‘काले जहाज़’ और NCERT का संशोधन: “आज विद्वान यह तर्क देते हैं कि जापान कभी ‘बंद’ ही नहीं था चूँकि उसकी पूर्वी एशिया के व्यापार में भूमिका थी और उसके लोग हालैंड और चीन निवासियों के ज़रिये बाहरी दुनिया के बारे में जानते थे।”
नारा: फ़ुकोकु क्योहे — ‘समृद्ध देश, मज़बूत सेना’ डर: “अन्यथा उन्हें भी भारत की तरह पराधीनता का सामना करना पड़ सकता है” लक्ष्य: “प्रजा को नागरिक की श्रेणी में बदलने की ज़रूरत”
सम्राट-व्यवस्था: सम्राट = सूर्य देवी का वंशज और पश्चिमीकरण का नेता; जन्मदिन राष्ट्रीय छुट्टी; पश्चिमी सैनिक कपड़े; 1890 की शिक्षासंबंधी राजाज्ञा
भाग च — मेजी सुधार
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| शिक्षा | 1870 के दशक से अनिवार्य (लड़के और लड़कियाँ); 1910 तक कोई वंचित नहीं; फ़ीस बहुत कम; शिक्षा मंत्रालय का पाठ्यचर्या, किताबों और शिक्षक-प्रशिक्षण पर नियंत्रण; ‘नैतिक संस्कृति’ अनिवार्य |
| लिपि | कांजी (चीन से छठी शताब्दी में) + हीरागाना (‘नारी सुलभ’) + कताकाना; “ज्ञान कुलीन वर्गों से व्यापक समाज में तेज़ी से फैल सका”; 1880 के दशक का सुझाव — “दोनों में से कुछ भी नहीं किया गया” |
| प्रशासन | नयी इकाइयाँ — राजस्व + स्कूल + स्वास्थ्य + सेना के भर्ती केंद्र; 20 वर्ष से ऊपर सैन्य सेवा अनिवार्य; सख़्त सेंसर |
| दोष | “सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के निर्देश में रखा गया… यह दो गुट सरकारी नियंत्रण के बाहर रहे”; 1899 — केवल सेवारत जनरल/एडमिरल मंत्री बन सकते हैं |
परिणाम: “लोकतांत्रिक संविधान और आधुनिक सेना — इन दो अलग आदर्शों को महत्व देने के दूरगामी नतीजे हुए” → चीन और रूस से युद्ध; अपने देश में लोकतंत्र के प्रसार को कुचला
भाग छ — अर्थव्यवस्था और समाज (आँकड़े)
| तथ्य | आँकड़ा |
|---|---|
| पहली रेल लाइन | 1870–72, तोक्यो–योकोहामा |
| आधुनिक बैंकिंग | 1872 |
| कंपनियाँ | मित्सुबिशी, सुमितोमो; ज़ायबात्सु — विशिष्ट परिवारों के नियंत्रण वाली बड़ी संस्थाएँ |
| जनसंख्या | 1872: 3.5 करोड़ → 1920: 5.5 करोड़ |
| शहरी जनसंख्या | 1925: 21% → 1935: 32% (2.25 करोड़) |
| औद्योगिक मज़दूर | 1870: 7,00,000 → 1913: 40 लाख |
| महिलाएँ | आधुनिक कारखानों में आधे से ज़्यादा; 1886 की पहली आधुनिक हड़ताल महिलाओं द्वारा; 1930 के दशक में ही पुरुष अधिक हुए |
| 100+ मज़दूर वाले कारखाने | 1909: 1000 → 1920: 2000+ → 1930 का दशक: 4000 |
| फिर भी 1940 | 5,50,000 कारखानों में 5 से कम मज़दूर → परिवार-केंद्रित विचारधारा; सम्राट = परिवार का कुलपति |
तानाका शोज़ो (1841–1913): किसान का बेटा; स्व-शिक्षित; पहली डायट के सदस्य; 1897 में पहला प्रदूषण-विरोधी आंदोलन (800 गाँववासी); आशियो खान → वातारासे नदी; 100 वर्ग मील कृषिभूमि, 1000 परिवार; 1904 तक फ़सल सामान्य सिद्धांत: “औद्योगिक प्रगति के लिए आम लोगों की बलि नहीं दी जानी चाहिए”
भाग ज — तीन पीढ़ियों की बहस
| विचारक | तर्क |
|---|---|
| फ़ुकुज़ावा यूकिची (1835–1901) | जापान को ‘अपने में से एशिया को निकाल फेंकना’ चाहिए; ज्ञान के लिए प्रोत्साहन (1872–76); “जापान के पास प्राकृतिक दृश्यों के अलावा गर्व करने के लिए कुछ भी नहीं है”; “स्वर्ग ने इंसान को इंसान के ऊपर नहीं बनाया, न ही इंसान को इंसान के नीचे”; केओ विश्वविद्यालय; मेरोकुशा संस्था |
| मियाके सेत्सुरे (1860–1945) | हर राष्ट्र को अपने खास हुनर का विकास करना चाहिए; “अपने को अपने देश के लिए समर्पित करना अपने को विश्व को समर्पित करना है” |
| उएकी एमोरी (1857–1892) | जनवादी अधिकारों के आंदोलन के नेता; फ्रांसीसी क्रांति के प्राकृतिक अधिकार व जन प्रभुसत्ता के प्रशंसक; ‘व्यवस्था से ज़्यादा कीमती चीज़ है, आज़ादी’; कुछ ने महिलाओं के मताधिकार की भी सिफ़ारिश की |
“इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।” — मेजी संविधान आंदोलन का नतीजा था, उपहार नहीं।
भाग झ — रोज़मर्रा की ज़िंदगी और युद्ध
- होमु — मूल परिवार वाला ‘नया घर’ (जापानी अंग्रेज़ी शब्द)
- आवास: 200 येन शुरू में + 12 येन माहवार × 10 साल, जबकि बैंक कर्मचारी की तनख्वाह 40 येन प्रतिमाह
- मोगा = ‘आधुनिक लड़की’; गिनबुरा = गिन्ज़ा + बुराबुरा (‘बिना किसी लक्ष्य के घूमना’)
- 1878 जनता के लिए बाग़ · 1899 फ़िल्में · 1925 पहला रेडियो-स्टेशन
- मात्सुई सुमाको — इब्सन के एक गुड़िया का घर में नोरा का किरदार → राष्ट्रीय तारिका
1943 — ‘आधुनिकता पर विजय’ संगोष्ठी:
- मोरोइ साबुरो — संगीत को आत्मा की कला के रूप में पुनर्वास; पश्चिमी संगीत को नकारे बिना
- निशितानी केजी — ‘आधुनिक’ = पुनर्जागरण + प्रोटेस्टेंट सुधार + प्राकृतिक विज्ञानों का विकास; जापान की ‘नैतिक ऊर्जा’ (शब्द रांके से); ‘विशाल पूर्वी एशिया’ का निर्माण; विज्ञान और धर्म को जोड़ने वाली नयी सोच
- क्रियाकलाप 2: क्या आप निशितानी की परिभाषा से सहमत हैं?
भाग ञ — हार के बाद जापान
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1945 | हिरोशिमा-नागासाकी; हार। NCERT दो मत रखती है — जल्दी युद्ध खत्म करने का तर्क बनाम “पूरी तरह से अनावश्यक” |
| 1945–47 | अमरीकी कब्ज़ा; विसैन्यीकरण; नया संविधान; अनुच्छेद 9 — युद्ध राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में वर्जित; कृषि सुधार; ज़ायबात्सु तोड़ने की कोशिश |
| 1946 | पहला चुनाव — पहली बार महिलाओं ने मतदान किया |
| 1956 | संयुक्त राष्ट्र का सदस्य |
| 1964 | तोक्यो ओलंपिक + शिंकांसेन (बुलेट ट्रेन) — 200 मील/घंटा (अब 300) |
| 1960 का दशक | कैडमियम, मिनामाता में पारा; 1970 का दशक — वायु प्रदूषण |
| 1990 तक | विश्व के कुछ कठोरतम पर्यावरण-नियंत्रण |
‘चमत्कार’ की व्याख्या: “यह चमत्कार से कहीं अधिक था और इसकी जड़ें जापान के लंबे इतिहास में निहित थीं।” + अमरीकी समर्थन + कोरिया और वियतनाम की जंगों से मदद
भाग ट — चीन: तीन नज़रिये
| समूह | प्रतिनिधि | परंपरा के प्रति रुख |
|---|---|---|
| आरंभिक सुधारक | कांग योवेई (1858–1927), लियांग किचाउ (1873–1929) | पारंपरिक विचारों का नये और अलग तरीके से इस्तेमाल |
| गणतांत्रिक क्रांतिकारी | सन यात-सेन | जापान और पश्चिम के विचारों से प्रभावित |
| कम्युनिस्ट पार्टी | माओ | युगों-युगों की असमानताओं को खत्म करना; विदेशियों को खदेड़ना |
त्रिकोणीय व्यापार (सबसे महत्त्वपूर्ण)
चीन → ब्रिटेन : चाय, रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन (भारी माँग)
ब्रिटेन → चीन : कुछ नहीं बिकता → भुगतान चाँदी में → भारी असंतुलन
↓
ईस्ट इंडिया कंपनी का विकल्प : अफ़ीम (भारत में आराम से उगती थी)
↓
भारत → चीन : अफ़ीम → चाँदी → केंटन में उधार पत्रों के बदले कंपनी को
↓
उसी चाँदी से ब्रिटेन के लिए चाय, रेशम, चीनी मिट्टी की खरीद
पहला अफ़ीम युद्ध 1839–42 → क्विंग राजवंश कमज़ोर; सुधार की माँगें मज़बूत
उपनिवेशों का सबक़
- पोलैंड — 1890 के दशक में क्रिया बन गया: बोलान वू = ‘हमें पोलैंड करने के लिए’
- भारत — लियांग किचाउ, 1903: “भारत एक ऐसा देश है, जो किसी और देश नहीं, बल्कि एक कंपनी के हाथों बर्बाद हो गया — ईस्ट इंडिया कंपनी के।” वे हिंदुस्तानियों की आलोचना भी करते थे; चीनी देखते थे कि ब्रिटेन चीन के विरुद्ध भारतीय जवानों का इस्तेमाल करता है
परीक्षा प्रणाली (1905 में समाप्त)
| तथ्य | आँकड़ा |
|---|---|
| अभिजात वर्ग में प्रवेश | 1850 तक लगभग 11 लाख |
| प्रारूप | 8 भाग वाला निबंध (पा-कू वेन), शास्त्रीय चीनी में |
| आवृत्ति | हर 3 साल में 2 बार |
| सफलता | केवल 1–2% लोग 24 साल तक पहला स्तर पास करते थे |
| डिग्रीधारक | 526,869 सिविल + 212,330 सैन्य प्रांतीय |
| पद | केवल 27,000 राजकीय पद |
| दोष | केवल साहित्यिक कौशल की माँग → विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बाधक |
समाप्ति का संदर्भ: 1905 का रूसी-जापानी युद्ध — “जो चीन की ज़मीन पर और चीनी इलाके पर प्रभुत्व के लिए लड़ा गया था”
चीनी विद्यार्थी जापान गए (1890 का दशक) → चीन ने जापान से न्याय, अधिकार और क्रांति के यूरोपीय विचारों के जापानी अनुवाद लिए → “यह एक तरह से पारंपरिक संबंधों का उलट जाना था”
भाग ठ — गणतंत्र से 1949 तक
सन यात-सेन (1866–1925) — आधुनिक चीन के संस्थापक; गरीब परिवार; मिशन स्कूल; डाक्टरी
तीन सिद्धांत (सन मिन चुई):
- राष्ट्रवाद — मांचू वंश (विदेशी राजवंश) और अन्य साम्राज्यवादियों को हटाना
- गणतंत्र — गणतांत्रिक सरकार की स्थापना
- समाजवाद — पूँजी का नियमन और भूस्वामित्व में बराबरी
चार बड़ी ज़रूरतें: कपड़ा, खाना, घर और परिवहन
4 मई 1919: बीजिंग में युद्धोत्तर शांति सम्मेलन के विरोध में प्रदर्शन (चीन विजयी पक्ष में था पर इलाके वापस नहीं मिले) → परंपरा पर हमला; आधुनिक विज्ञान, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद से चीन को बचाने की माँग; सुधार — आम की भाषा, पैर बाँधने की प्रथा का अंत, औरतों की अधीनस्थता का खात्मा, शादी में बराबरी
चियांग काइशेक (1887–1975): वारलॉर्ड्स पर नियंत्रण; राष्ट्र का सैन्यकरण; महिलाओं के लिए चार सद्गुण — सतीत्व, रूप-रंग, वाणी और काम; कपड़ों की किनारियों की लंबाई भी प्रस्तावित की
कुओमीनतांग की असफलता के कारण: संकीर्ण सामाजिक आधार + सीमित राजनीतिक दृष्टि; पूँजी का नियमन और भूमि-अधिकारों में बराबरी कभी लागू नहीं हुई; किसानों की अनदेखी; फ़ौजी व्यवस्था थोपने का प्रयास
अन्य आँकड़े: शंघाई 1919 — मज़दूर 500,000, पर अधिकतर ‘नगण्य शहरी’ (शियाओ शिमिन) · पीकिंग विश्वविद्यालय 1902 · लाइफ़ वीकली (शाओ तोआफ़ेन) — 1926 में 2000 → 1933 में 200,000 प्रतियाँ; गांधी और कमाल अतातुर्क से परिचय
बढ़ती कीमतों की कहानी (चित्र): बैल 1937 → सुअर 1939 → आटे की बोरी 1941 → मुर्गी 1943 → अंडे 1945 → कोयले का टुकड़ा 1947 → पन्ना 1949
भाग ड — साम्यवादी दल का उदय
- CCP की स्थापना 1921, रूसी क्रांति के कुछ बाद
- कोमिंटर्न (तृतीय अंतर्राष्ट्रीय) — मार्च 1918, लेनिन और ट्रॉट्स्की; परंपरागत समझ — क्रांति शहरी मज़दूरों से आएगी; 1943 में समाप्त
- माओ त्सेतुंग (1893–1976) ने किसानों पर आधारित अलग रास्ता चुना
- जियांग्सी 1928–34 — किसान परिषद (सोवियत); भूमि पर कब्ज़ा और पुनर्वितरण; आज़ाद सरकार और सेना; ग्रामीण महिला संघ; शादी के नए कानून — आयोजित शादियों व शादी के समझौते खरीदने-बेचने पर रोक, तलाक आसान
- जुनवू सर्वेक्षण 1930 — नमक, सोयाबीन, लोहार, वेश्याएँ, धार्मिक संगठन; लड़के 100–200 यूआन में बिकते थे; लड़कियों की बिक्री के उदाहरण नहीं (ज़रूरत मज़दूरों की थी)
- लाँग मार्च 1934–35 — शांसी तक 6000 मील; नया अड्डा येनान; कार्यक्रम — युद्ध सामंतवाद का अंत, भूमि सुधार, विदेशी साम्राज्यवाद से लड़ाई
ग्रामीण चीन के दो संकट: (1) पर्यावरण — बंजर ज़मीन, वनों का नाश, बाढ़ · (2) सामाजिक-आर्थिक — विनाशकारी ज़मीन-प्रथा, ऋण, आदिम प्रौद्योगिकी, निम्न स्तरीय संचार 1945–49: कीमतें 30 प्रतिशत प्रति महीने की रफ़्तार से बढ़ीं
भाग ढ — 1949 से आज तक
| काल | विवरण |
|---|---|
| 1949–65 नया जनवाद | ‘सर्वहारा की तानाशाही’ से भिन्न — सभी सामाजिक वर्गों का गठबंधन; अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में; 1953 तक चला |
| 1958 लंबी छलाँग | घर के पिछवाड़े में इस्पात की भट्टियाँ; पीपुल्स कम्यून्स — 1958 तक 26,000, कृषक आबादी का 98% |
| ‘समाजवादी व्यक्ति’ | पाँच प्रिय चीज़ें — पितृभूमि, जनता, काम, विज्ञान और जन सम्पत्ति; महिला फ़ेडरेशन 760 लाख, छात्र फ़ेडरेशन 32.9 लाख |
| असहमति | लीऊ शाओछी (1896–1969) और तंग शीयाओफींग (1904–97) ने कम्यून प्रथा बदलने की कोशिश की; पिछवाड़े का स्टील औद्योगिक लिहाज़ से अनुपयोगी था |
| 1965–78 सांस्कृतिक क्रांति | रेड गार्ड्स (छात्र और सेना); विचारधारा > पेशेवर ज्ञान; “दोषारोपण और नारेबाज़ी ने तर्कसंगत बहस की जगह ले ली”; अर्थव्यवस्था और शिक्षा में भारी रुकावट |
| 1978 के सुधार | तंग शीयाओफींग; समाजवादी बाज़ार अर्थव्यवस्था; चार सूत्री लक्ष्य — विज्ञान, उद्योग, कृषि, रक्षा |
| 5 दिसंबर 1978 | ‘पाँचवीं आधुनिकता’ का पोस्टर — लोकतंत्र के बिना अन्य आधुनिकताएँ कुछ भी नहीं बन पाएँगी |
| 1989 | 4 मई आंदोलन की 70वीं सालगिरह; तियानममेन चौक का दमन |
| आज | मज़बूत राजनीतिक नियंत्रण + आर्थिक खुलापन; आलोचक — बढ़ती असमानताएँ; कन्फ़्यूशियसवाद की वापसी |
4 मई की तीन वापसियाँ: 1919 → 1978 → 1989
भाग ण — ताइवान
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| 1895 | जापान के साथ लड़ाई में चीन ने ताइवान जापान को सौंपा |
| 1943 / 1949 | कायरो घोषणापत्र / पोट्सडैम उद्घोषणा से संप्रभुता वापस |
| 1947 फरवरी | प्रदर्शनों के बाद कुओमीनतांग ने नेताओं की एक पूरी पीढ़ी की हत्या करवा दी |
| 1949 | चियांग काई-शेक 30 करोड़+ अमरीकी डॉलर और कलाकृतियाँ लेकर ताइवान भागे |
| दमन | बोलने और राजनीतिक विरोध की आज़ादी छीनी; स्थानीय आबादी सत्ता से बाहर |
| फिर भी | भूमि सुधार लागू → खेती की उत्पादकता बढ़ी |
| 1973 | कुल राष्ट्रीय उत्पाद में एशिया में जापान के बाद दूसरा स्थान |
| समानता | अमीर और गरीब के बीच का अंतराल लगातार घटता गया |
| लोकतंत्र | 1975 चियांग की मृत्यु के बाद धीरे-धीरे; फ़ौजी कानून हटने और विरोधी दलों को कानूनी इजाज़त मिलने पर गति पकड़ी (1987) |
| स्थिति | अधिकांश देशों के केवल व्यापार मिशन; ताइवान को चीन का हिस्सा माना जाता है; अर्धस्वायत्त क्षेत्र का संभावित हल |
भाग त — कोरिया
1392–1910 जोसोन वंश
↓
1910 — जापान का जबरन कब्ज़ा; 500+ वर्ष पुराने राजवंश का अंत
↓
अगस्त 1945 — 35 साल बाद औपनिवेशिक शासन समाप्त; 38वीं समानांतर रेखा से विभाजन
↓
1948 — उत्तर और दक्षिण में अलग सरकारें; सिन्गमैन री राष्ट्रपति
↓
जून 1950 – जुलाई 1953 — कोरियाई युद्ध (शीत युद्ध का छद्म युद्ध); युद्धविराम समझौता
↓
अप्रैल 1960 — 'अप्रैल क्रांति'; री का इस्तीफ़ा
↓
मई 1961 — पार्क चुंग-ही का सैन्य तख्तापलट
↓
अक्तूबर 1963 — पार्क राष्ट्रपति; निर्यात-उन्मुख नीति; पाँच वर्षीय योजनाएँ
↓
1970 — नया गाँव (सैमौल) आंदोलन
↓
अक्तूबर 1972 — यूसिन संविधान; "लोकतंत्र अस्थायी रूप में निलंबित"
↓
अक्तूबर 1979 — पार्क की हत्या | दिसंबर 1979 — चुन डू-ह्वान का तख्तापलट
↓
मई 1980 — ग्वांगजू; मार्शल कानून; दमन
↓
मई 1987 — छात्र की मौत → छात्र + मध्यवर्ग → संविधान संशोधन → प्रत्यक्ष चुनाव
↓
1992 किम यंग-सैम (नागरिक) → 1996 OECD → 1997 विदेशी मुद्रा संकट + IMF + गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट
↓
1997 किम डे-जुंग → 2008 ली माइंग-बाक → 2012 पार्क खन-हे → 2016–17 कैंडललाइट + महाभियोग → मई 2017 मून जे-इन
आर्थिक नीति का क्रम: आई.एस.आई. → निर्यात-उन्मुख (वस्त्र जैसे श्रम-घनिष्ठ हलके उत्पाद) → भारी और रासायनिक उद्योग (इस्पात, अलौह धातु, मशीनरी, जहाज़ निर्माण, इलैक्ट्रॉनिक्स)
सफलता के कारण: मज़बूत नेता + प्रशिक्षित अफ़सर + आक्रामक उद्योगपति + सक्षम श्रम बल · “लगभग सभी कोरियाई श्रमिक दल पहले से ही साक्षर थे” · खुली आर्थिक नीति · विदेशी निवेश + उच्च घरेलू बचत दर · विदेशों से श्रमिकों का प्रेषण
वृद्धि दर: 1980 में 1.7% → 1983 तक 13.2%
कारण-चक्र (परीक्षा में सबसे उपयोगी): आर्थिक विकास → शहरीकरण + शिक्षा + मीडिया → नागरिकों में राजनीतिक अधिकारों की आत्म-जागरूकता → प्रत्यक्ष चुनाव की माँग → 1987 का संविधान संशोधन
NCERT का निष्कर्ष: “कोरियाई लोकतंत्र आर्थिक विकास का कर्ज़दार है, लेकिन यह देश के गणतंत्रवाद को प्रोत्साहित करने वाले कोरियाई नागरिकों की राजनीतिक जागरूकता ही है, जिसने आज इस देश को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।”
भाग थ — आधुनिकता के दो मार्ग
| जापान — उपलब्धि | जापान — कीमत |
|---|---|
| आज़ादी बनाए रखी | कुलीन नेतृत्व वाले आधुनिकीकरण ने उग्र राष्ट्रवाद को जन्म दिया |
| पारंपरिक हुनर और प्रथाओं को नए तरीके से इस्तेमाल किया | शोषणकारी सत्ता; लोकतंत्र की माँग का गला घोंटा |
| — | औपनिवेशिक साम्राज्य → क्षेत्र में बैर; अंदरूनी विकास प्रभावित |
परंपरा का सूत्र: “केवल परंपराओं को पुनर्जीवित करने या ज़बरदस्ती उन्हें पकड़े रखने का सवाल नहीं था बल्कि उन्हें नए और अलग रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करने की बात थी।”
चीन: विदेशी साम्राज्यवाद ने नियंत्रण कमज़ोर किया; युद्ध सामंतवाद, लूटमार, गृह-युद्ध; परंपराओं को ठुकराया गया संतुलित निर्णय: “साम्यवादी दल ने लोगों को अधिकार एवं सत्ता देने की बात की परन्तु वास्तव में उसने बहुत ही केंद्रीकृत राज्य की स्थापना की… तथापि इससे शताब्दियों पुरानी असमानताएँ हट गईं, शिक्षा का विस्तार हुआ और जनता के बीच एक जागरूकता पैदा हुई।”
भाग द — पुस्तक का निष्कर्ष (पृ. 182–184)
चार कालखंड: i. 60 लाख वर्ष पूर्व – 400 ई.पू. · ii. 400 ई.पू. – 1300 ई. · iii. 800 – 1700 ई. · iv. 1700 – 2000 ई.
विश्व इतिहास लिखने के तीन तरीके:
- लोगों के बीच संपर्क पर ध्यान — संस्कृतियों और सभ्यताओं के परस्पर संबंध
- आर्थिक विनिमय के क्षेत्रों की पहचान, जो संस्कृति और सत्ता के कुछ रूपों को बनाए रखते हैं
- ऐतिहासिक अनुभवों में अंतर स्पष्ट कर उनकी विशिष्टताओं को उभारना
सबसे महत्त्वपूर्ण वाक्य: “एक ही स्रोत का प्रयोग करनेवाले इतिहासकार भिन्न बल्कि विपरीत राय पेश कर सकते हैं।”
पुस्तक का अंतिम वाक्य: मार्क ब्लॉक ने द हिस्टोरियन्स क्राफ्ट की शुरुआत एक बच्चे के प्रश्न से की — ‘डैडी, मुझे बताइए, इतिहास का फ़ायदा क्या है?’
अंतिम स्मरण-सूत्र
मेजी के चार ‘18’: 1853 पेरी · 1868 पुनर्स्थापना · 1872 रेल+बैंक+शिक्षा · 1889 संविधान
जापान की तीन जीतें: 1894–95 चीन · 1904–05 रूस · 1910 कोरिया
चीन के चार ‘19’: 1911 गणतंत्र · 1919 चार मई · 1921 CCP · 1949 गणराज्य
‘1987’ दो जगह: ताइवान — फ़ौजी कानून हटा · कोरिया — प्रत्यक्ष चुनाव का अधिकार
तीन पीढ़ियाँ (जापान): फ़ु-मि-उ → फ़ुकुज़ावा (पश्चिम बनो) · मियाके (अपना हुनर) · उएकी (आज़ादी)
सन मिन चुई: रा-ग-स → राष्ट्रवाद · गणतंत्र · समाजवाद
पाँचवीं आधुनिकता: चार सरकारी (विज्ञान, उद्योग, कृषि, रक्षा) + एक जनता की (लोकतंत्र)