RBSE/CBSE कक्षा XI प्रारूप · अंक-योजना सहित
खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
क.1 बहुविकल्पीय
1जापान में 1603 से 1867 तक शोगुनपद पर कौन-सा परिवार कायम रहा?
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सही उत्तर: (ब) तोकुगावा
2कॉमोडोर मैथ्यू पेरी जापान किस वर्ष पहुँचे?
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सही उत्तर: (स) 1853
3‘फ़ुकोकु क्योहे’ का अर्थ है
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सही उत्तर: (ब) समृद्ध देश, मज़बूत सेना
4जापान की पहली रेल लाइन किनके बीच बिछाई गई?
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सही उत्तर: (ब) तोक्यो और योकोहामा
51886 में जापान की पहली आधुनिक हड़ताल का आयोजन किसने किया?
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सही उत्तर: (स) महिलाओं ने
6‘ज़ायबात्सु’ क्या थे?
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सही उत्तर: (ब) विशिष्ट परिवारों के नियंत्रण वाली बड़ी व्यापारिक संस्थाएँ
7पहला अफ़ीम युद्ध किन वर्षों में हुआ?
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सही उत्तर: (ब) 1839–1842
8चीन की परीक्षा प्रणाली किस वर्ष समाप्त की गई?
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सही उत्तर: (स) 1905
9सन यात-सेन के तीन सिद्धांतों को चीनी में क्या कहते हैं?
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सही उत्तर: (ब) सन मिन चुई
10लाँग मार्च की दूरी और गंतव्य था
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सही उत्तर: (ब) 6000 मील, शांसी
111958 तक चीन में पीपुल्स कम्यून्स कृषक आबादी के कितने प्रतिशत को समेटे हुए थे?
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सही उत्तर: (स) 98%
12‘5 दिसंबर 1978 के पोस्टर’ ने किसे ‘पाँचवीं आधुनिकता’ कहा?
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सही उत्तर: (स) लोकतंत्र
13कोरिया पर जापान का औपनिवेशिक शासन कितने वर्ष चला?
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सही उत्तर: (स) 35
14‘सैमौल आंदोलन’ किस वर्ष और किस उद्देश्य से शुरू हुआ?
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सही उत्तर: (ब) 1970, ग्रामीण जनसंख्या को प्रोत्साहन और कृषि का आधुनिकीकरण
151964 में तोक्यो में क्या-क्या हुआ?
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सही उत्तर: (स) ओलंपिक खेल और शिंकांसेन दोनों
क.2 रिक्त स्थान भरिए
16जापान के 250 भागों का शासन ______ चलाते थे।
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(दैम्यो)
17एदो का नया नामकरण ______ हुआ, जिसका मतलब है ‘पूर्वी राजधानी’।
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(तोक्यो)
18जापानी संसद को ______ कहा जाता है, जो एक जर्मन शब्द है।
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(डायट)
19जापानी भाषा की तीन लिपियाँ हैं — कांजी, हीरागाना और ______।
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(कताकाना)
201890 के दशक में चीनी ‘पोलैंड’ शब्द का क्रिया के रूप में इस्तेमाल करते थे — ______।
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(बोलान वू)
21चीनी परीक्षा में ______ भाग वाला निबंध लिखना होता था।
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(8 / पा-कू वेन)
22कोरिया को ______ समानांतर रेखा से दो हिस्सों में विभाजित किया गया।
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(38वीं)
23अक्तूबर 1972 में पार्क ने ______ संविधान घोषित किया।
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(यूसिन)
क.3 सत्य/असत्य
24मेजी संविधान के तहत सेना और नौकरशाही सरकारी नियंत्रण के अधीन थे।
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(असत्य — वे सीधे सम्राट के निर्देश में थे और सरकारी नियंत्रण के बाहर रहे)
25जापान में महिलाओं ने पहली बार 1946 में मतदान किया।
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(सत्य)
26ताइवान में अमीर और गरीब के बीच का अंतराल बढ़ता गया।
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(असत्य — वह लगातार घटता गया)
27कोमिंटर्न की परंपरागत समझ थी कि क्रांति किसानों के ज़रिये आएगी।
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(असत्य — शहरी मज़दूर वर्गों के ज़रिये; माओ ने किसानों वाला अलग रास्ता चुना)
28NCERT के अनुसार जापान कभी ‘बंद’ ही नहीं था।
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(सत्य — पृ. 158 का किनारा)
खंड ख — अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
1‘फ़ुकोकु क्योहे’ क्या था और क्यों अपनाया गया?
‘समृद्ध देश, मज़बूत सेना’ — मेजी सरकार का नारा। सरकार ने समझ लिया था कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था का विकास और मज़बूत सेना का निर्माण करना होगा, अन्यथा जापान को भी भारत की तरह पराधीनता का सामना करना पड़ सकता था।
2‘सम्राट-व्यवस्था’ से जापानी विद्वानों का क्या अभिप्राय है?
एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सम्राट, नौकरशाही और सेना इकट्ठे सत्ता चलाते थे, और नौकरशाही व सेना सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे।
316वीं शताब्दी के अंतिम भाग के तीन परिवर्तन कौन-से थे?
(क) किसानों से हथियार ले लिए गए और केवल सामुराई तलवार रख सकते थे; (ख) दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए; (ग) मालिकों और करदाताओं के निर्धारण हेतु ज़मीन का सर्वेक्षण और उत्पादकता के आधार पर वर्गीकरण। तीनों का मिलाजुला मकसद राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।
4‘गेंजी की कथा’ का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?
मुरासाकी शिकिबु द्वारा लिखी हेआन राजदरबार की यह काल्पनिक डायरी जापानी साहित्य की प्रमुख कथाकृति है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि इस काल की लेखिकाओं ने जापानी लिपि का इस्तेमाल किया जबकि पुरुष चीनी लिपि का प्रयोग करते थे, और यह उपन्यास दिखाता है कि औरतों को अपने पति चुनने और अपनी ज़िंदगी जीने की कितनी आज़ादी थी।
5‘काले जहाज़’ क्या थे और जापान के ‘खुलने’ के बारे में आज विद्वान क्या कहते हैं?
पेरी के जहाज़ों को जापानी ‘काले जहाज़’ कहते थे क्योंकि उनकी लकड़ी के जोड़ों को कोलतार से सीलबंद किया जाता था। ये जापान के ‘खुलने’ के शक्तिशाली प्रतीक बन गए। पर आज विद्वान तर्क देते हैं कि जापान कभी ‘बंद’ ही नहीं था, क्योंकि उसकी पूर्वी एशिया के व्यापार में भूमिका थी और उसके लोग हॉलैंड तथा चीन निवासियों के ज़रिये बाहरी दुनिया के बारे में जानते थे।
6जापानी भाषा की तीन लिपियों के नाम और उनका महत्त्व बताइए।
कांजी (चीनियों से छठी शताब्दी में ली गई चित्रात्मक लिपि), हीरागाना और कताकाना (दो ध्वन्यात्मक वर्णमालाएँ)। हीरागाना नारी सुलभ समझी जाती थी क्योंकि हेआन काल में बहुत सी लेखिकाएँ इसका इस्तेमाल करती थीं। ध्वन्यात्मक अक्षरमाला की मौजूदगी के चलते ज्ञान कुलीन वर्गों से व्यापक समाज में काफ़ी तेज़ी से फैल सका।
7‘ज़ायबात्सु’ पर टिप्पणी कीजिए।
बड़ी व्यापारिक संस्थाएँ जिन पर विशिष्ट परिवारों का नियंत्रण था। मित्सुबिशी और सुमितोमो जैसी कंपनियों को सब्सिडी और करों में फ़ायदे मिले। इनका प्रभुत्व दूसरे विश्व युद्ध के बाद तक अर्थव्यवस्था पर बना रहा; अमरीकी कब्ज़े के दौरान इनकी पकड़ खत्म करने की कोशिश की गई।
8तानाका शोज़ो कौन थे?
एक किसान के बेटे, जिन्होंने अपनी पढ़ाई खुद की और पहली संसद-डायट के सदस्य चुने गए। उन्होंने 1897 में औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ़ पहला आंदोलन छेड़ा जब 800 गाँववासी जन विरोध में इकट्ठे हुए। उनका मानना था कि औद्योगिक प्रगति के लिए आम लोगों की बलि नहीं दी जानी चाहिए।
9‘मोगा’ और ‘गिनबुरा’ का अर्थ बताइए।
मोगा — ‘आधुनिक लड़की’ के लिए संक्षिप्त शब्द; यह लिंग बराबरी, विश्वजनीन संस्कृति और विकसित अर्थव्यवस्था के विचारों के एक साथ आने का सूचक है। गिनबुरा — गिन्ज़ा + बुराबुरा; बुराबुरा का अर्थ है ‘बिना किसी लक्ष्य के घूमना’।
10जापानी संविधान का अनुच्छेद 9 क्या कहता है?
‘तथाकथित युद्ध न करने के वाक्यांश’ के अनुसार युद्ध का राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल वर्जित है। यह 1945–47 के अमरीकी कब्ज़े के दौरान लागू नए संविधान का हिस्सा है।
11‘त्रिकोणीय व्यापार’ क्या था?
ब्रिटेन, भारत और चीन के बीच उत्पादों का व्यापार। चीनी उत्पादों (चाय, रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन) की माँग से व्यापार में असंतुलन था और भुगतान चाँदी में करना पड़ता था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने विकल्प के रूप में भारत में उगाई गई अफ़ीम चीन में बेचकर चाँदी कमाई, और उसी चाँदी से ब्रिटेन के लिए चीनी वस्तुएँ खरीदीं।
12लियांग किचाउ ने 1903 में भारत के बारे में क्या लिखा?
कि भारत एक ऐसा देश है, जो किसी और देश नहीं, बल्कि एक कंपनी के हाथों बर्बाद हो गया — ईस्ट इंडिया कंपनी के। वे ब्रिटेन की ताबेदारी करने और अपने लोगों के साथ क्रूर होने के लिए हिंदुस्तानियों की आलोचना भी करते थे।
13‘बोलान वू’ का क्या अर्थ है?
1890 के दशक में चीन में ‘पोलैंड’ शब्द को क्रिया के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा — बोलान वू का मतलब था ‘हमें पोलैंड करने के लिए’, यानी उपनिवेश बनकर बँट जाने के लिए। 18वीं सदी में पोलैंड का बँटवारा उपनिवेशीकरण का सर्वाधिक बहुचर्चित उदाहरण था।
14‘नया लोकतंत्र’ क्या था?
1949 में स्थापित पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की सरकार का आधार। सोवियत संघ द्वारा दावा की गई ‘सर्वहारा की तानाशाही’ से भिन्न, नया लोकतंत्र सभी सामाजिक वर्गों का गठबंधन था।
15‘पाँचवीं आधुनिकता’ का दावा क्या था?
5 दिसंबर 1978 को दीवार पर लगे एक पोस्टर ने दावा किया कि लोकतंत्र के बिना अन्य आधुनिकताएँ कुछ भी नहीं बन पाएँगी। पार्टी ने चार सूत्री लक्ष्य (विज्ञान, उद्योग, कृषि, रक्षा) घोषित किए थे; पोस्टर ने पाँचवीं — लोकतंत्र — जोड़ी।
16यूसिन संविधान क्या था?
अक्तूबर 1972 में पार्क चुंग-ही द्वारा घोषित संविधान, जिसने स्थायी अध्यक्षता को संभव बनाया। इसके तहत राष्ट्रपति को कानून के क्षेत्राधिकार और प्रशासन पर पूर्ण अधिकार था तथा किसी भी कानून को ‘आपातकालीन नियम’ के रूप में निरस्त करने का संवैधानिक अधिकार भी।
17‘गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट’ क्या था?
1997 के विदेशी मुद्रा संकट में, जब कोरिया को आई.एम.एफ. से आपात वित्तीय सहायता लेनी पड़ी, तब नागरिकों ने गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट के माध्यम से विदेशी ऋण भुगतान के लिए सक्रिय रूप से योगदान दिया।
खंड ग — लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
1मेजी पुनर्स्थापना से पहले की वे अहम घटनाएँ क्या थीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को संभव किया? (4) (NCERT अभ्यास प्रश्न 1)
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उत्तर-रूपरेखा:
- 16वीं सदी के तीन परिवर्तन — किसानों से हथियार लेना (शान्ति), दैम्यो को राजधानियों में रखना, ज़मीन का सर्वेक्षण (राजस्व का स्थायी आधार)। (1)
- शहरीकरण — 17वीं सदी के मध्य तक एदो दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर; छह शहरों की जनसंख्या 50,000 से अधिक, जबकि उस समय ज़्यादातर यूरोपीय देशों में केवल एक बड़ा शहर था। (1)
- वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था — वित्त और ऋण की प्रणालियाँ; “व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे”; व्यापारी वर्ग ने नाटक और कलाओं को प्रोत्साहन दिया। (1)
- पढ़ने की संस्कृति — लेखकों का केवल लेखन से जीविका चलाना; एदो में नूडल की कटोरी की कीमत पर किताब किराये पर; निशिजिन का रेशम उद्योग और नया उद्यमी वर्ग; प्राचीन जापानी साहित्य के अध्ययन से राष्ट्रीय पहचान की खोज। (1)
2जापान में शिक्षा-व्यवस्था के आधुनिकीकरण का वर्णन कीजिए। (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- 1870 के दशक से नयी विद्यालय-व्यवस्था; लड़के और लड़कियों दोनों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य; 1910 तक तकरीबन ऐसी स्थिति कि कोई वंचित नहीं रहा; फ़ीस बहुत कम। (1½)
- शुरू में पाठ्यचर्या पश्चिमी नमूनों पर, पर 1870 के दशक के आते-आते राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर बल। (1)
- शिक्षा मंत्रालय का पाठ्यचर्या, किताबों के चयन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर नियंत्रण; ‘नैतिक संस्कृति’ का विषय अनिवार्य — माता-पिता के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति वफ़ादारी। (1)
- 1890 की शिक्षासंबंधी राजाज्ञा ने लोगों को पढ़ने और सार्वजनिक हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। तीन लिपियों की ध्वन्यात्मक अक्षरमाला ने ज्ञान को व्यापक समाज तक तेज़ी से पहुँचाया। (½)
3मेजी संविधान की सबसे बड़ी संरचनात्मक कमज़ोरी क्या थी और उसके क्या परिणाम हुए? (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- मेजी संविधान सीमित मताधिकार पर आधारित था और उसने सीमित अधिकारों वाली डायट बनाई। (1)
- सबसे बड़ी कमज़ोरी: “सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के निर्देश में रखा गया। यानि कि संविधान बनने के बावजूद यह दो गुट सरकारी नियंत्रण के बाहर रहे।” 1890 से यह माना जाने लगा कि थलसेना और नौसेना का नियंत्रण स्वतंत्र है; 1899 में आदेश कि केवल सेवारत जनरल और एडमिरल ही मंत्री बन सकते हैं। (1½)
- परिणाम: “लोकतांत्रिक संविधान और आधुनिक सेना — इन दो अलग आदर्शों को महत्व देने के दूरगामी नतीजे हुए।” सेना ने और इलाके जीतने के लिए मज़बूत विदेश नीति का दबाव डाला → चीन और रूस के साथ जंग। (1)
- अधिक जनवाद की लोकप्रिय माँग अक्सर इन आक्रामक नीतियों के विरोध में जाती थी; जापान ने अपने देश में लोकतंत्र के प्रसार को कुचला और उपनिवेशीकृत लोगों के साथ टकराव का रिश्ता कायम किया। (½)
4जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में किस तरह बदलाव आए? (4) (NCERT अभ्यास प्रश्न 2)
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उत्तर-रूपरेखा:
- परिवार: पैतृक परिवार व्यवस्था में कई पीढ़ियाँ मुखिया के नियंत्रण में रहती थीं; समृद्धि के साथ मूल परिवार वाला ‘होमु’ उभरा जहाँ पति-पत्नी साथ रहकर कमाते और घर बसाते थे। (1)
- उपभोग: नए घरेलू उत्पाद (बिजली से चलने वाला चावल-कुकर, भूनक, टोस्टर), नए पारिवारिक मनोरंजन और नए प्रकार के घरों की माँग। 1920 के दशक में 200 येन + 10 साल तक 12 येन माहवार की किश्तों पर सस्ते मकान, जबकि बैंक कर्मचारी की तनख्वाह 40 येन प्रतिमाह थी। (1½)
- शहरी जीवन: बिजली की ट्रामें; 1878 से जनता के लिए बाग़; डिपार्टमेंट स्टोर; तोक्यो का गिन्ज़ा और ‘गिनबुरा’; 1925 में पहला रेडियो-स्टेशन; 1899 से फ़िल्में। (1)
- महिलाएँ और मानक: ‘मोगा’ (आधुनिक लड़की); अभिनेत्री मात्सुई सुमाको का नोरा का किरदार; “इस दौरान सामाजिक और राजनीतिक व्यवहार के पारंपरिक मानकों पर सवाल उठाये गए।” (½)
5पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना छींग राजवंश ने कैसे किया? (4) (NCERT अभ्यास प्रश्न 3)
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उत्तर-रूपरेखा:
- पहला अफ़ीम युद्ध (1839–42) ने सत्ताधारी क्विंग राजवंश को कमज़ोर किया और सुधार तथा बदलाव की माँगों को मज़बूती दी। (1)
- कांग यूवेई और लियांग किचाउ जैसे क्विंग सुधारकों ने व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की ज़रूरत महसूस की और आधुनिक प्रशासकीय व्यवस्था, नयी सेना और शिक्षा व्यवस्था के निर्माण के लिए नीतियाँ बनाईं। (1)
- संवैधानिक सरकार की स्थापना के लिए स्थानीय विधायिकाओं का गठन किया और चीन को उपनिवेशीकरण से बचाने की ज़रूरत महसूस की। (½)
- विद्यार्थियों को जापान, ब्रिटेन और फ्रांस भेजा गया; 1890 के दशक में बड़ी तादाद में चीनी विद्यार्थी जापान गए और जापान से न्याय, अधिकार और क्रांति के यूरोपीय विचारों के जापानी अनुवाद लिए गए। (1)
- 1905 में रूसी-जापानी युद्ध के बाद सदियों पुरानी परीक्षा-प्रणाली समाप्त कर दी गई। (½)
6चीनी परीक्षा प्रणाली की विशेषताएँ और उसकी समाप्ति के कारण बताइए। (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश (1850 तक लगभग 11 लाख) ज़्यादातर इम्तिहान से होता था; 8 भाग वाला निबंध (पा-कू वेन) शास्त्रीय चीनी में; परीक्षा हर 3 साल में 2 बार। (1½)
- पहले स्तर पर केवल 1–2 प्रतिशत लोग 24 साल की उम्र तक पास हो पाते थे और ‘सुंदर प्रतिभा’ बनकर निचले कुलीन वर्ग में प्रवेश पाते थे। (1)
- 526,869 सिविल और 212,330 सैन्य प्रांतीय डिग्रीधारक थे, पर देश में केवल 27,000 राजकीय पद — इसलिए कई डिग्रीधारकों के पास नौकरी नहीं होती थी। (1)
- समाप्ति के कारण: यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में बाधक था क्योंकि इसमें सिर्फ़ साहित्यिक कौशल की माँग होती थी; क्लासिक चीनी सीखने के हुनर की आधुनिक विश्व में कोई प्रासंगिकता नज़र नहीं आती थी — इसलिए 1905 में इसे खत्म कर दिया गया। (½)
7सन यात-सेन के तीन सिद्धांत क्या थे? (4) (NCERT अभ्यास प्रश्न 4)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा:
- सन यात-सेन (1866–1925) निर्विवाद रूप से आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं; गरीब परिवार से; मिशन स्कूलों में शिक्षा जहाँ लोकतंत्र और ईसाई धर्म से परिचय हुआ। उनका कार्यक्रम तीन सिद्धांत (सन मिन चुई) के नाम से मशहूर है। (1)
- राष्ट्रवाद — मांचू वंश, जिसे विदेशी राजवंश के रूप में देखा जाता था, को सत्ता से हटाना, साथ ही अन्य साम्राज्यवादियों को हटाना। (1)
- गणतंत्र — गणतांत्रिक सरकार की स्थापना करना। (1)
- समाजवाद — जो पूँजी का नियमन करे और भूस्वामित्व में बराबरी लाए। (½)
- उन्होंने ‘चार बड़ी ज़रूरतें’ भी रेखांकित कीं — कपड़ा, खाना, घर और परिवहन। (½)
84 मई 1919 के आंदोलन के कारण और महत्त्व बताइए। (4)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा:
- कारण: बीजिंग में युद्धोत्तर शांति सम्मेलन के निर्णय के विरोध में धुआँधार प्रदर्शन। चीन ब्रिटेन के नेतृत्व वाली जीत में विजयी देशों का सहयोगी था, पर उससे हथिया लिए गए इलाके वापस नहीं मिले। (1½)
- महत्त्व: इसने एक पूरी पीढ़ी को परंपरा पर हमला करने के लिए प्रेरित किया और आधुनिक विज्ञान, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद के ज़रिये चीन को बचाने की माँग की। (1)
- सुधारों की वकालत: लेखन में आम की भाषा, पैरों को बाँधने की प्रथा और औरतों की अधीनस्थता का खात्मा, शादी में बराबरी, गरीबी खत्म करने के लिए आर्थिक विकास। (1)
- स्थायी प्रतीक: यह आंदोलन बाद में दो बार लौटा — 1978 में (“जैसे कि 60 साल पहले 4 मई के आंदोलन के समय था”) और 1989 में इसकी 70वीं सालगिरह पर, जब तियानममेन का प्रदर्शन हुआ। (½)
9कुओमीनतांग क्यों असफल हुई? (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- संकीर्ण सामाजिक आधार — कुओमीनतांग का आधार शहरी इलाकों में था; औद्योगिक विकास धीमा और गिने-चुने क्षेत्रों में। शंघाई में 1919 में मज़दूर वर्ग 500,000 था, पर अधिकतर लोग ‘नगण्य शहरी’ (शियाओ शिमिन), व्यापारी और दुकानदार थे। (1½)
- सीमित राजनीतिक दृष्टि — सन यात-सेन के कार्यक्रम का अहम हिस्सा, पूँजी का नियमन और भूमि-अधिकारों में बराबरी, कभी अमल में नहीं आया, क्योंकि पार्टी ने किसानों और बढ़ती सामाजिक असमानता की अनदेखी की। (1½)
- फ़ौजी व्यवस्था — पार्टी ने लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की बजाय फ़ौजी व्यवस्था थोपने का प्रयास किया। (½)
- आर्थिक तबाही — 1937 के जापानी हमले और लंबे युद्ध ने चीन को कमज़ोर किया; 1945–49 के बीच कीमतें 30 प्रतिशत प्रति महीने की रफ़्तार से बढ़ीं। (½)
10माओ त्सेतुंग का रास्ता परंपरागत मार्क्सवादी समझ से किस तरह अलग था? (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- कोमिंटर्न (मार्च 1918, लेनिन और ट्रॉट्स्की) की परंपरागत मार्क्सवादी समझ थी कि क्रांति शहरी इलाकों में मज़दूर वर्गों के ज़रिये आयेगी। (1)
- माओ त्सेतुंग (1893–1976) ने क्रांति के कार्यक्रम को किसानों पर आधारित करते हुए एक अलग रास्ता चुना। (1)
- जियांग्सी (1928–34) में मज़बूत किसान परिषद (सोवियत) का गठन, ज़मीन पर कब्ज़ा और पुनर्वितरण; दूसरे नेताओं से हटकर आज़ाद सरकार और सेना पर ज़ोर। (1)
- महिलाओं के प्रश्न — ग्रामीण महिला संघों को प्रोत्साहन; शादी के नए कानून जिनमें आयोजित शादियों तथा शादी के समझौते खरीदने-बेचने पर रोक और तलाक को आसान बनाया गया। जुनवू सर्वेक्षण (1930) में उन्होंने शोषण के स्तरों का ज़मीनी अध्ययन किया। (1)
11ताइवान के अनुभव पर टिप्पणी कीजिए। (4)
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उत्तर-रूपरेखा:
- 1894–95 में जापान से हार के बाद चीन को ताइवान जापान को सौंपना पड़ा; कायरो घोषणापत्र (1943) और पोट्सडैम उद्घोषणा से संप्रभुता वापस मिली। 1949 में चियांग काई-शेक 30 करोड़ से अधिक अमरीकी डॉलर और बेशकीमती कलाकृतियाँ लेकर वहाँ पहुँचे और चीनी गणतंत्र की स्थापना की। (1)
- दमन — फरवरी 1947 के प्रदर्शनों के बाद कुओमीनतांग ने नेताओं की एक पूरी पीढ़ी की हत्या करवा दी; बोलने और राजनीतिक विरोध की आज़ादी छीन ली; स्थानीय आबादी को सत्ता से बाहर कर दिया। (1)
- विकास — फिर भी भूमि सुधार लागू किया जिससे खेती की उत्पादकता बढ़ी; अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण; 1973 में कुल राष्ट्रीय उत्पाद में एशिया में जापान के बाद दूसरा स्थान; और महत्त्वपूर्ण बात — अमीर और गरीब के बीच का अंतराल लगातार घटता गया। (1½)
- लोकतंत्र — 1975 में चियांग की मृत्यु के बाद धीरे-धीरे शुरू; फ़ौजी कानून हटने और विरोधी दलों को कानूनी इजाज़त मिलने पर (1987) गति पकड़ी। (½)
12कोरिया ने 1997 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना किस प्रकार किया? (4) (NCERT अभ्यास प्रश्न 5)
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उत्तर-रूपरेखा:
- पृष्ठभूमि: कोरिया के बाज़ार को अन्य देशों के लिए खोलने के नव-उदारवादी दबाव में किम प्रशासन ने 1996 में ओ.ई.सी.डी. में शामिल होने का निर्णय लिया और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा मज़बूत करने का प्रयास शुरू किया। (1)
- कारण: व्यापार घाटे में बढ़ोतरी, वित्तीय संस्थानों द्वारा खराब प्रबंधन, और संगठनों द्वारा बेईमान व्यापारिक संचालन के कारण 1997 में विदेशी मुद्रा संकट आया। (1)
- समाधान: इस संकट को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) द्वारा आपात वित्तीय सहायता के ज़रिये संभालने की कोशिश की गई। (1)
- जन-भागीदारी: “इस आर्थिक संकट में पूरे देश ने एक साथ प्रयास किए, नागरिकों ने गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट के माध्यम से विदेशी ऋण भुगतान के लिए सक्रिय रूप से योगदान दिया।” (1)
खंड घ — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)
1“औद्योगिक समाजों ने एक-दूसरे के जैसे बनने की बजाए आधुनिकता के अपने-अपने मार्ग बनाए।” जापान और चीन के उदाहरण से इस कथन की विवेचना कीजिए। (8)
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उत्तर-रूपरेखा:
भूमिका (1) 19वीं सदी की शुरुआत में चीन का पूर्वी एशिया पर प्रभुत्व था और जापान अलग-थलग प्रतीत होता था; कुछ ही दशकों में यह तस्वीर उलट गई। दोनों ने पश्चिमी साम्राज्यवाद के दबदबे वाली दुनिया में आधुनिक बनने की कोशिश की, पर उनके रास्ते बिलकुल अलग रहे।
(क) जापान का मार्ग (2½): जापान अपनी आज़ादी बनाए रखने में सफल रहा और पारंपरिक हुनर और प्रथाओं को नए तरीके से इस्तेमाल कर पाया। मेजी सुधार — 1870 के दशक से अनिवार्य शिक्षा, 1872 में रेल और आधुनिक बैंकिंग, ज़ायबात्सु का विकास। सम्राट को एक साथ सूर्य देवी का वंशज और पश्चिमीकरण का नेता बनाया गया। मेजी स्कूली पद्धति ने यूरोपीय-अमरीकी प्रथाओं के अनुरूप नये विषय शुरू किए, किंतु मुख्य उद्देश्य निष्ठावान नागरिक बनाना था।
(ख) जापान की कीमत (1½): कुलीन वर्ग के नेतृत्व में हुए आधुनिकीकरण ने एक उग्र राष्ट्रवाद को जन्म दिया और एक शोषणकारी सत्ता को बरकरार रखा जिसने विरोध और लोकतंत्र की माँग का गला घोंट दिया। उसने एक औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना की जिससे क्षेत्र में बैर बना रहा और अंदरूनी विकास प्रभावित हुआ।
(ग) चीन का मार्ग (2): “चीन का आधुनिकीकरण का सफ़र बहुत अलग था।” पश्चिमी और जापानी दोनों किस्म के विदेशी साम्राज्यवाद ने नियंत्रण कमज़ोर किया; युद्ध सामंतवाद, लूटमार और गृह-युद्ध ने बहुत जानें लीं; प्राकृतिक त्रासदियों ने बोझ बढ़ाया। 19वीं और 20वीं शताब्दी में परंपराओं को ठुकराया गया; साम्यवादी दल ने परंपरा को खत्म करने की लड़ाई लड़ी क्योंकि उसे लगा कि वह जनसमुदाय को गरीबी में जकड़े हुए है, महिलाओं को अधीन बनाती है और देश को अविकसित रखती है।
(घ) चीन का संतुलित मूल्यांकन (½): “साम्यवादी दल ने लोगों को अधिकार एवं सत्ता देने की बात की परन्तु वास्तव में उसने बहुत ही केंद्रीकृत राज्य की स्थापना की… तथापि इससे शताब्दियों पुरानी असमानताएँ हट गईं, शिक्षा का विस्तार हुआ और जनता के बीच एक जागरूकता पैदा हुई।”
निष्कर्ष (½) एक ने परंपरा को नए ढंग से इस्तेमाल किया, दूसरे ने उसे ठुकराया — और आज दोनों जगह वही प्रश्न लौट आया है कि अपनी धरोहर बरकरार रखते हुए विकास कैसे किया जाए।
2“मेजी जापान में लोकतंत्र इसलिए नहीं हारा कि लोग उसे नहीं चाहते थे।” इस कथन के पक्ष में तर्क दीजिए। (8)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा:
भूमिका (1) जापान में लोकतंत्र की माँग नीचे से उठी थी, और मेजी संविधान भी इसी दबाव का नतीजा था — फिर भी 1930 के दशक तक सैन्यवाद हावी हो गया। इसका कारण जनता की इच्छा नहीं, संस्थागत रचना थी।
(क) लोकतंत्र की माँग मौजूद थी (2½): उएकी एमोरी (1857–1892) जनवादी अधिकारों के आंदोलन के नेता थे, फ्रांसीसी क्रांति के प्राकृतिक अधिकार और जन प्रभुसत्ता के प्रशंसक; उनका कथन — ‘व्यवस्था से ज़्यादा कीमती चीज़ है, आज़ादी’। कुछ लोगों ने महिलाओं के मताधिकार की भी सिफ़ारिश की। “इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।” आगे चलकर 1925 में सभी पुरुषों को मताधिकार मिला और 1918–1931 के बीच जनमत से चुने गए प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिपरिषदें बनाईं।
(ख) संस्थागत दोष (2½): “सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के निर्देश में रखा गया। यानि कि संविधान बनने के बावजूद यह दो गुट सरकारी नियंत्रण के बाहर रहे।” 1890 से थलसेना-नौसेना का नियंत्रण स्वतंत्र माना जाने लगा; 1899 में आदेश कि केवल सेवारत जनरल और एडमिरल ही मंत्री बन सकते हैं — जिससे सेना सरकार गिरा सकती थी। मेजी संविधान सीमित मताधिकार पर आधारित था और डायट के अधिकार सीमित थे।
(ग) डर का इस्तेमाल (1½): सेना को मज़बूत बनाने की मुहिम इस डर से थी कि जापान पश्चिमी शक्तियों की दया पर निर्भर है — और इस डर को सैन्य-विस्तार के खिलाफ़ तथा उच्चतर करों के खिलाफ़ उठनेवाली आवाज़ों को दबाने में इस्तेमाल किया गया। 1918–31 के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रीय एकता मंत्रिपरिषदों के हाथों अपनी सत्ता खो दी।
(घ) परिणाम (½): 1930–40 में युद्ध; असहमति प्रकट करने वालों पर जुल्म और जेल; और अंततः 1945 की हार।
निष्कर्ष“लोकतांत्रिक संविधान और आधुनिक सेना — इन दो अलग आदर्शों को महत्व देने के दूरगामी नतीजे हुए।” समस्या इच्छा की नहीं, ढाँचे की थी।
3त्रिकोणीय व्यापार और अफ़ीम युद्ध में भारत की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (8)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा:
भूमिका (1) आधुनिक चीन की कहानी अफ़ीम युद्ध से तेज़ हुई, और उस युद्ध की जड़ में एक व्यापारिक असंतुलन था जिसे सुलझाने के लिए भारत का इस्तेमाल किया गया।
(क) असंतुलन (1½): चीनी उत्पादों — चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तनों — की माँग ने व्यापार में असंतुलन की भारी समस्या खड़ी कर दी। पश्चिमी उत्पादों को चीन में बाज़ार नहीं मिला, जिसकी वजह से भुगतान चाँदी में करना पड़ता था।
(ख) अफ़ीम का विकल्प (2): ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक विकल्प ढूँढ़ा — अफ़ीम। “यह हिंदुस्तान के कई हिस्सों में बहुत आराम से उगती थी।” चीन में अफ़ीम बेचकर वे चाँदी कमाकर केंटन में उधार पत्रों के बदले कंपनी के प्रतिनिधियों को देने लगे, और उसी चाँदी से कंपनी ब्रिटेन के लिए चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तन खरीदती थी। यह ब्रिटेन, भारत और चीन के बीच उत्पादों का ‘त्रिकोणीय व्यापार’ था।
(ग) युद्ध और परिणाम (1½): ब्रिटेन ने अफ़ीम के फ़ायदेमंद व्यापार को बढ़ाने के लिए सैन्य बलों का इस्तेमाल किया, जिससे पहला अफ़ीम युद्ध (1839–1842) हुआ। इसने सत्ताधारी क्विंग राजवंश को कमज़ोर किया और सुधार तथा बदलाव की मांगों को मज़बूती दी। (कालक्रम चार में दर्ज है कि 1780–90 में भारत से चीन को अफ़ीम के निर्यात में अत्यधिक वृद्धि हुई।)
(घ) भारत की दोहरी स्थिति (1½): भारत इस त्रिकोण में केवल दर्शक नहीं, इंजन था — उसने अफ़ीम दी और सैनिक भी। लियांग किचाउ लिखते हैं कि चीनी देखते थे कि “ब्रितानिया चीन के साथ युद्ध में भारतीय जवानों का इस्तेमाल करता है।” पर भारत स्वयं उपनिवेश था — यानी एक उपनिवेश के संसाधनों और सैनिकों का इस्तेमाल दूसरे देश को कमज़ोर करने के लिए किया गया।
निष्कर्ष (½) यह साम्राज्यवाद की श्रृंखलाबद्ध प्रकृति का उदाहरण है; और इसी अनुभव से लियांग किचाउ ने 1903 में लिखा कि भारत “एक कंपनी के हाथों बर्बाद हो गया” — जो चीनी राष्ट्रवाद के लिए सबसे बड़ी चेतावनी बनी।
4क्या आप मानते हैं कि माओ त्सेतुंग और चीन के साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफलता प्राप्त की? (8) (NCERT अभ्यास प्रश्न 7)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा — इस प्रश्न में दोनों पक्ष अनिवार्य हैं।
भूमिका (1) प्रश्न ‘क्या’ से शुरू होता है, इसलिए उत्तर में उपलब्धियाँ और सीमाएँ दोनों चाहिए; NCERT स्वयं दोनों पक्ष रखती है।
(क) पक्ष में तर्क (3):
- किसानों पर आधारित रास्ता — कोमिंटर्न की परंपरागत समझ के विपरीत माओ ने किसानों को आधार बनाया; जियांग्सी में किसान परिषद, ज़मीन पर कब्ज़ा और पुनर्वितरण; जुनवू सर्वेक्षण (1930) जैसा ज़मीनी अध्ययन।
- महिलाओं के प्रश्न — ग्रामीण महिला संघ; आयोजित शादियों तथा शादी के समझौते खरीदने-बेचने पर रोक; तलाक आसान।
- लाँग मार्च (1934–35) और येनान का कार्यक्रम — युद्ध सामंतवाद का अंत, भूमि सुधार, विदेशी साम्राज्यवाद से लड़ाई — जिससे मज़बूत सामाजिक आधार मिला।
- 1949 के बाद — “शताब्दियों पुरानी असमानताएँ हट गईं, शिक्षा का विस्तार हुआ और जनता के बीच एक जागरूकता पैदा हुई।”
(ख) विपक्ष में तर्क (3):
- लंबी छलाँग (1958) — घरों के पिछवाड़ों में बनाई गई स्टील औद्योगिक लिहाज़ से अनुपयोगी थी; लीऊ शाओछी और तंग शीयाओफींग ने कम्यून प्रथा को बदलने की कोशिश की क्योंकि वह कुशलता से काम नहीं कर रही थी।
- सांस्कृतिक क्रांति (1965–78) — रेड गार्ड्स; विचारधारा पेशेवर ज्ञान से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण; “दोषारोपण और नारेबाज़ी ने तर्कसंगत बहस की जगह ले ली”; पार्टी कमज़ोर हुई और अर्थव्यवस्था तथा शिक्षा व्यवस्था में भारी रुकावट आई।
- केंद्रीकरण — “साम्यवादी दल ने लोगों को अधिकार एवं सत्ता देने की बात की परन्तु वास्तव में उसने बहुत ही केंद्रीकृत राज्य की स्थापना की”; दमनकारी राजनीतिक व्यवस्था ने मुक्ति और समानता के आदर्शों को ऐसी नारेबाज़ी में बदल दिया, जो लोगों को चालाकी से प्रभावित कर अपने काबू में लाने में काम आती थी।
- 1989 का तियानममेन — ‘पाँचवीं आधुनिकता’ की माँग का क्रूर दमन।
(ग) संतुलित निष्कर्ष (1): 1978 के बाद पार्टी ने बाज़ार संबंधी सुधार किए और चीन को आर्थिक दृष्टि से ताकतवर बनाने में कामयाब हुई, जबकि राजनीतिक व्यवस्था अब भी कड़े नियंत्रण में है। आज बढ़ती असमानताएँ और परंपराओं का पुनर्जीवन नये प्रश्न खड़े कर रहे हैं। इसलिए उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ नहीं, बल्कि ‘आंशिक रूप से, और भारी कीमत पर’ है।
5क्या साउथ कोरिया की आर्थिक वृद्धि ने इसके लोकतंत्रीकरण में योगदान दिया? (8) (NCERT अभ्यास प्रश्न 8)
उत्तर देखिए
उत्तर-रूपरेखा:
भूमिका (1) कोरिया में आर्थिक वृद्धि और लोकतंत्र का रिश्ता सीधा नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष और विरोधाभासी रहा — पहले वृद्धि ने लोकतंत्र को दबाया, फिर उसी वृद्धि ने लोकतंत्र की माँग पैदा की।
(क) पहले वृद्धि ने लोकतंत्र को दबाया (2½): मई 1961 में पार्क चुंग-ही का सैन्य तख्तापलट; 1963 में वे राष्ट्रपति बने और राज्य-आधारित, निर्यात-उन्मुख नीति अपनाई। अक्तूबर 1972 में यूसिन संविधान ने स्थायी अध्यक्षता को संभव बनाया; राष्ट्रपति को कानून और प्रशासन पर पूर्ण अधिकार तथा किसी भी कानून को ‘आपातकालीन नियम’ के रूप में निरस्त करने का अधिकार। “राष्ट्रपति को पूर्ण अधिकार प्रणाली के साथ, देश के आर्थिक विकास में प्रगति के लिए लोकतंत्र एक तरह से अस्थायी रूप में निलंबित हो गया।” 1980 में ग्वांगजू में लोकतंत्र आंदोलन का दमन हुआ।
(ख) फिर वृद्धि ने लोकतंत्र की माँग पैदा की (3): चुन प्रशासन ने कोरिया के आर्थिक विकास को 1980 के 1.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 1983 तक 13.2 प्रतिशत कर दिया और मुद्रास्फीति कम की। “आर्थिक विकास ने शहरीकरण, शिक्षा के स्तर में सुधार और मीडिया की प्रगति को जन्म दिया। इसके फलस्वरूप नागरिकों में अपने राजनीतिक अधिकारों की आत्म-जागरूकता बढ़ी, जिससे राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव के लिए संवैधानिक संशोधन की माँग की गई।” मई 1987 में एक विश्वविद्यालय के छात्र की अत्याचारों से हुई मौत के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें न केवल छात्र बल्कि मध्यवर्ग के नागरिक भी शामिल हुए — और चुन प्रशासन को संविधान में संशोधन करने पर मजबूर होना पड़ा।
(ग) अन्य आधार (1): “औद्योगिकीकरण की शुरुआत से ही, लगभग सभी कोरियाई श्रमिक दल पहले से ही साक्षर थे” — यानी शैक्षिक आधार वृद्धि से पहले मौजूद था। 1970 के सैमौल आंदोलन ने ग्रामीण लोगों को “निष्क्रिय और निराशावान जीवन से सक्रिय और आशावान” बनाया।
(घ) परिपक्वता (½): 1992 में किम यंग-सैम के रूप में नागरिक राष्ट्रपति; 1997, 2008 और 2017 में तीन शांतिपूर्ण सत्ता-हस्तांतरण; 2016 का कैंडललाइट विरोध — “देश के लोकतांत्रिक कानून और प्रणालियों की सीमाओं के भीतर” शांतिपूर्ण प्रदर्शन।
निष्कर्ष (½) NCERT का अपना उत्तर — “कोरियाई लोकतंत्र आर्थिक विकास का कर्ज़दार है, लेकिन यह देश के गणतंत्रवाद को प्रोत्साहित करने वाले कोरियाई नागरिकों की राजनीतिक जागरूकता ही है, जिसने आज इस देश को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।” यानी वृद्धि ने परिस्थितियाँ दीं, पर लोकतंत्र नागरिकों ने लिया।
6क्या पड़ोसियों के साथ जापान के युद्ध और उसके पर्यावरण का विनाश तीव्र औद्योगीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ? (8) (NCERT अभ्यास प्रश्न 6)
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उत्तर-रूपरेखा:
भूमिका (½) दोनों — युद्ध और पर्यावरण-विनाश — औद्योगीकरण की नीति से जुड़े थे, पर पूरी तरह उसी से नहीं; संस्थागत और वैचारिक कारण भी थे।
(क) पर्यावरण — हाँ, सीधा संबंध (2½): “उद्योग के तेज़ और अनियंत्रित विकास और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की माँग से पर्यावरण का विनाश हुआ।” तानाका शोज़ो ने 1897 में पहला आंदोलन छेड़ा जब 800 गाँववासी इकट्ठे हुए; आशियो खान से वातारासे नदी में प्रदूषण से 100 वर्ग मील कृषिभूमि बर्बाद और 1000 परिवार प्रभावित हुए। बाद में कैडमियम का ज़हर, 1960 के दशक में मिनामाता में पारे का ज़हर, और 1970 के दशक के उत्तरार्ध में वायु प्रदूषण।
(ख) युद्ध — आंशिक रूप से (3): औद्योगीकरण ने संसाधनों और बाज़ारों की ज़रूरत पैदा की, और उपनिवेशों की वृद्धि इसी से जुड़ी थी। पर NCERT बताती है कि संस्थागत कारण भी थे — सेना और नौकरशाही सरकारी नियंत्रण के बाहर थे; सेना ने और इलाके जीतने के मकसद से मज़बूत विदेश नीति के लिए दबाव डाला; और डर का इस्तेमाल असहमति दबाने के लिए किया गया। वैचारिक कारण भी थे — जापान के विस्तार को “पश्चिमी प्रभुत्व का विरोध करने और एशिया को आज़ाद कराने” के नाम पर उचित ठहराया गया, और 1943 की संगोष्ठी में निशितानी केजी ने ‘विशाल पूर्वी एशिया’ के निर्माण को जापान का ‘फ़र्ज़’ बताया।
(ग) दूसरा पक्ष (1½): जन-प्रतिरोध भी उसी समाज से आया — तानाका शोज़ो, जनवादी अधिकारों का आंदोलन, और “अधिक जनवाद की लोकप्रिय माँग अक्सर सरकार की इन आक्रामक नीतियों के विरोध में जाती थी।” 1960 के दशक के नागरिक समाज आंदोलनों ने मुआवजे और कानून की माँग की, और 1990 तक जापान में विश्व के कुछ कठोरतम पर्यावरण-नियंत्रण अमल में लाए गए।
निष्कर्ष (½) औद्योगीकरण ने दबाव पैदा किया, पर उस दबाव को युद्ध में बदलने का काम संस्थागत ढाँचे और विचारधारा ने किया — और उसी समाज ने आगे चलकर सुधार भी किया।
खंड ङ — स्रोत-आधारित प्रश्न (5 अंक)
स्रोत 1 — ‘काले जहाज़’ का किनारा (पृ. 158)
“जापानी जिन्हें ‘काले जहाज़’ कहते थे… उन्हें ऐसे चित्रों और कार्टूनों में दिखाया गया है जिनमें ‘अजीबोगरीब’ विदेशियों और उनकी आदतों को दर्शाया गया है। ये चित्र जापान के ‘खुलने’ के शक्तिशाली प्रतीक बन गए। (आज विद्वान यह तर्क देते हैं कि जापान कभी ‘बंद’ ही नहीं था चूँकि उसकी पूर्वी एशिया के व्यापार में भूमिका थी और उसके लोग हालैंड और चीन निवासियों के ज़रिये बाहरी दुनिया के बारे में जानते थे।)”
प्रश्न: (क) ‘काले जहाज़’ किसके थे और यह नाम क्यों पड़ा? (1) (ख) कोष्ठक में दी गई बात पाठ्यपुस्तक की मुख्य कहानी को किस तरह चुनौती देती है? (2) (ग) ‘जापान का खुलना’ किसके दृष्टिकोण से लिखा गया वाक्यांश है? (2)
संकेत: (क) कॉमोडोर मैथ्यू पेरी के; लकड़ी के जोड़ों को कोलतार से सीलबंद किया जाता था। (ख) यह बताती है कि ‘बंद जापान’ एक अतिशयोक्ति है — जापान चुनिंदा रूप से (हॉलैंड, चीन) खुला था। (ग) यह पश्चिमी दृष्टिकोण है, जिसमें जापान तब ‘खुला’ माना गया जब वह पश्चिम के लिए खुला। यह अध्याय 6 के ‘खोज’ शब्द जैसा ही है — दोनों में एक पक्ष की उपस्थिति को घटना का प्रारंभ मान लिया गया।
स्रोत 2 — फ़ुकुज़ावा यूकिची (पृ. 162)
“जापान के पास प्राकृतिक दृश्यों के अलावा गर्व करने के लिए कुछ भी नहीं है।” … उनका सिद्धांत था, “स्वर्ग ने इंसान को इंसान के ऊपर नहीं बनाया, न ही इंसान को इंसान के नीचे।”
प्रश्न: (क) फ़ुकुज़ावा का जन्म किस परिवार में हुआ और उन्होंने कौन-सा संस्थान स्थापित किया? (1) (ख) दोनों उद्धरणों में कौन-सा तनाव दिखाई देता है? (2) (ग) उनकी अगली पीढ़ी ने उनके विचारों पर क्या आपत्ति उठाई? (2)
संकेत: (क) गरीब सामुराई परिवार; आज का केओ विश्वविद्यालय। (ख) पहला वाक्य अपनी परंपरा की कड़ी आलोचना है, दूसरा सार्वभौम समानता का दावा — यानी वे राष्ट्रीय आत्म-आलोचना और मानवीय समानता दोनों एक साथ कह रहे हैं। (ग) अगली पीढ़ी (मियाके सेत्सुरे) ने कहा कि राष्ट्रीय गर्व देसी मूल्यों पर निर्मित होना चाहिए और हर राष्ट्र को अपने खास हुनर का विकास करना चाहिए।
स्रोत 3 — बक क्लेटन, शंघाई 1935 (पृ. 169)
“चीनी तमाशबीनों ने हमारे साथ ऐसा बरताव किया जैसे हमने उनका अभीष्ट काम संपन्न किया हो और घर पहुँचने तक रास्ते भर वे किसी विजेता फुटबॉल टीम की तरह हमारा अभिनंदन करते रहे।”
प्रश्न: (क) बक क्लेटन कौन थे और शंघाई में उनकी स्थिति क्या थी? (1) (ख) चीनी तमाशबीनों ने उनका अभिनंदन क्यों किया? (2) (ग) क्रियाकलाप 4 के आधार पर बताइए कि भेदभाव का अहसास लोगों को कैसे एकताबद्ध करता है। (2)
संकेत: (क) एक काले अमरीकन तुरहीवादक, जो जैज़ के साथ शंघाई में विशेषाधिकारप्राप्त प्रवासी की ज़िंदगी जी रहे थे — पर वे काले थे और उन्हें गोरे अमरीकियों ने होटल से मारपीट कर बाहर निकाल दिया था। (ख) क्योंकि यह गोरों पर जीत थी; चीनी उसे अपनी जीत की तरह देख रहे थे। (ग) भेदभाव का साझा अनुभव राष्ट्रीयता, भाषा और नस्ल की सीमाओं के पार साझी पहचान बना देता है — क्लेटन स्वयं लिखते हैं कि “अमरीकी होने के बावजूद खुद नस्ली भेदभाव का शिकार होने के कारण चीनियों के दुख-दर्द के साथ उनकी बहुत सहानुभूति थी।”
स्रोत 4 — पुस्तक का निष्कर्ष (पृ. 183)
“विद्वान ऐसी ही सामग्रियों से अपने ‘तथ्य’ हासिल कर इतिहास रचते हैं। वे इनका आलोचनात्मक अध्ययन करते हैं और इन स्रोतों की अस्पष्टता पर विशेष ध्यान देते हैं। एक ही स्रोत का प्रयोग करनेवाले इतिहासकार भिन्न बल्कि विपरीत राय पेश कर सकते हैं।”
प्रश्न: (क) ‘प्राथमिक स्रोत’ से क्या तात्पर्य है? (1) (ख) एक ही स्रोत से विपरीत राय कैसे निकल सकती है? (2) (ग) इस वर्ष पढ़े गए किसी एक उदाहरण से इस कथन को सिद्ध कीजिए। (2)
संकेत: (क) वे मूल सामग्रियाँ जिनसे इतिहासकार अपने ‘तथ्य’ हासिल करते हैं। (ख) क्योंकि ऐतिहासिक तथ्यों और इतिहासकार के तर्कों के बीच जटिल संबंध होता है; स्रोत प्रायः अस्पष्ट होते हैं और उनकी व्याख्या इतिहासकार के प्रश्नों पर निर्भर करती है। (ग) स्वीकार्य उदाहरण — हिरोशिमा पर दो मत (इसी अध्याय, पृ. 164); रूसो/वड्सवर्थ/इरविंग का एक ही विषय पर भिन्न वर्णन (अध्याय 6); प्रधान सिएटल के पत्र की परतें (अध्याय 6); बर्कहार्ट बनाम पीटर बर्क (अध्याय 5)।
खंड च — मानचित्र-आधारित प्रश्न (3 अंक)
1पूर्वी एशिया के मानचित्र (मानचित्र 1) पर अंकित कीजिए — (क) पीली नदी (ब) यांग्त्सी नदी (स) हॉंशू (द) क्यूशू (ङ) तोक्यो (च) शंघाई (छ) ताइवान (ज) उत्तरी और दक्षिणी कोरिया
2चीन के मानचित्र (मानचित्र 2) पर लाँग मार्च का मुख्य मार्ग दिखाइए और अंकित कीजिए — (क) जियांग्सी (ब) येनान (स) शांसी (द) पीकिंग
3जापान के मानचित्र पर अंकित कीजिए — (क) क्योतो (ब) एदो/तोक्यो (स) योकोहामा (द) नागासाकी (ङ) हिरोशिमा (च) होकाइदो