★★★= अति महत्त्वपूर्ण • ★★= महत्त्वपूर्ण • ★= सहायक
1. एक पंक्ति में अध्याय
नौवीं से सोलहवीं सदी के पश्चिमी यूरोप में सामंतवाद — जिसमें समाज पादरी, अभिजात और कृषक नामक तीन वर्गों में बँटा था — कैसे बना, कैसे पर्यावरण, कृषि-प्रौद्योगिकी, मुद्रा और नगरों के परिवर्तनों से कमज़ोर पड़ा, और कैसे चौदहवीं सदी के संकट व कृषक विद्रोहों के बाद उसकी जगह ‘नए शासक’ आए।
2. खंड-प्रस्तावना: बदलती परंपराएँ★★
- नौवीं सदी तक एशिया-यूरोप में विशाल साम्राज्य; मकदूनिया, रोम, अरब, मंगोल — ये चार महाद्वीपीय व पारमहाद्वीपीय थे (मिस्र, असीरिया, चीनी, मौर्य से भिन्न)।
- साम्राज्यों का उदय अचानक नहीं — वे लंबे समय से चले आ रहे बदलावों के परिणाम थे।
- ‘आधुनिक समय’ के तीन कारक (9वीं–17वीं सदी, पश्चिमी यूरोप): ★★★
- धार्मिक विश्वासों की अपेक्षा प्रयोगों पर आधारित वैज्ञानिक ज्ञान;
- लोक सेवाओं, संसद और कानूनी धाराओं के सृजन पर ध्यान — सरकार के संगठन पर गहन विचार;
- उद्योग व कृषि की तकनीक में सुधार।
- पाँचवीं सदी में रोम का विघटन; पश्चिमी यूरोप के नगरीय केंद्र छोटे (एक्स, लंदन, रोम, सियना); शार्लेमेन का साम्राज्य (9वीं सदी का प्रारंभ); वाइकिंग (स्कैंडीनेविया, 8वीं–11वीं शती — समुद्री दस्यु व व्यापारी) और हंगरीवासियों के आक्रमण।
- सामंती व्यवस्था की पहचान: दुर्गों व मेनर-भवन के इर्द-गिर्द कृषि उत्पादन; कृषिदास → लॉर्ड → बड़े लॉर्ड → राजा के सामंत (Vassal); कैथलिक चर्च का समर्थन व अपनी भूमि।
- वेनिस-जिनेवा के उद्यमी (12वीं सदी से); धर्म-युद्ध (Crusades) — सम्पत्ति का लोभ + ‘पवित्र स्थलों’ की मुक्ति; इस्लामी कला-साहित्य और बाइज़ेंटाइन से आई यूनानी कला-विचार → नया नज़रिया; 14वीं सदी से पुनर्जागरण (उत्तरी इटली) — मृत्योपरांत जीवन से अधिक इस जीवन में रुचि।
- खोज-यात्राएँ: उत्तमाशा अंतरीप होकर भारत (मसालों का स्रोत); कोलम्बस 1492 — वेस्टइंडीज़; वास्को डि गामा 1498 — कालीकट।
- सांस्कृतिक संपर्क: हसन-अल-वज़्ज़ान (लियो अफ़्रीकानस) — पोप लियो दशम के लिए अफ़्रीका का भूगोल पहली बार लिखा; विल एडम्स — जापानी शोगुन तोकूगावा ईयास का मित्र-सलाहकार; डोना मेरिना — एज़टेक महिला, कोरटेस की दुभाषिया।
- ! दोहरा रवैया: यूरोपवासी कभी सचेत-जिज्ञासु, कभी दबंग-आक्रामक-क्रूर; कैथलिक चर्च ने दोनों रवैयों को प्रोत्साहन दिया — वह अध्ययन का केंद्र भी था और ग़ैर-ईसाइयों पर हमलों को बढ़ावा भी देता था। ★★★
- गैर-यूरोपीय दृष्टि: यूरोपवासी 17वीं सदी के अंत तक कौतूहल का विषय; जापानियों ने 16वीं सदी के उत्तरार्ध तक बड़े पैमाने पर बंदूकें बनाईं; एज़टेक-शत्रुओं ने यूरोपवासियों का उपयोग किया; यूरोपीय बीमारियों से कुछ क्षेत्रों में 90% जनसंख्या मृत्यु के आगोश में। ★★★
3. विषय-प्रस्तावना और स्रोत★★★
- रोम-पतन के बाद जर्मन मूल के समूहों ने इटली, स्पेन, फ्रांस पर अधिकार किया; संगठित राजनीतिक बल के अभाव में युद्ध → सामाजिक ढाँचे का केंद्र-बिंदु भूमि पर नियंत्रण; विशेषताएँ जर्मन रीति-रिवाजों + शाही रोम की परंपराओं से।
- ईसाई धर्म चौथी सदी से रोमन साम्राज्य का राजकीय धर्म; रोम के पतन के बाद भी बचा; चर्च यूरोप में एक मुख्य भूमिधारक और राजनीतिक शक्ति बन गया।
- तीन वर्ग = ईसाई पादरी, भूमिधारक अभिजात वर्ग और कृषक; इनके बदलते संबंध सदियों तक यूरोप का इतिहास गढ़ते रहे।
- स्रोत-सामग्री: भू-स्वामित्व के विवरण, मूल्य, कानूनी मुकदमे; चर्चों के जन्म-मृत्यु-विवाह अभिलेख → परिवार व जनसंख्या की संरचना; व्यापारिक संस्थाओं की सूचना; गीत व कहानियों से त्योहार-सामुदायिक गतिविधियाँ। इनसे दीर्घकालीन (जनसंख्या-वृद्धि) व अल्पकालीन (कृषक विद्रोह) परिवर्तन समझे जाते हैं।
- मार्क ब्लॉक (1886–1944) ★★★: फ्रांसीसी विद्वान; तर्क — इतिहास राजनीतिक इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध और महान व्यक्तियों की जीवनियों से कुछ अधिक है; भूगोल के महत्त्व पर ज़ोर; कृति ‘सामंती समाज’ — 900–1300 के फ्रांसीसी समाज के सामाजिक संबंध, श्रेणियाँ, भूमि-प्रबंधन, जन-संस्कृति; द्वितीय विश्वयुद्ध में नाज़ियों द्वारा गोली मारकर हत्या।
4. सामंतवाद — परिभाषा और उद्भव★★★
- ‘सामंतवाद’ (Feudalism) = मध्यकालीन यूरोप के आर्थिक, विधिक, राजनीतिक और सामाजिक संबंध।
- व्युत्पत्ति: जर्मन शब्द ‘फ़्यूड’ (Feud) = एक भूमि का टुकड़ा; विकास मध्य फ्रांस, बाद में इंग्लैंड और दक्षिणी इटली में।
- ‘मध्यकालीन युग’ = पाँचवीं से पन्द्रहवीं सदी के मध्य का यूरोपीय इतिहास।
- आर्थिक संदर्भ: लॉर्ड और कृषकों के संबंधों पर आधारित कृषि उत्पादन — कृषक अपने + लॉर्ड के खेतों पर काम; श्रम-सेवा ↔ सैनिक सुरक्षा; लॉर्ड के व्यापक न्यायिक अधिकार।
- ★★★इसलिए सामंतवाद ने जीवन के न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर भी अधिकार कर लिया।
- जड़ें: रोमन साम्राज्य की प्रथाएँ + शार्लमेन (742–814) का काल; पर जीवन के सुनिश्चित तरीके के रूप में उत्पत्ति ग्यारहवीं सदी के उत्तरार्ध में। ★★★
फ्रांस का प्रारंभिक इतिहास★★★
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 481 | क्लोविस फ्रैंक लोगों का राजा बना |
| 486 | उत्तरी गॉल का विजय अभियान |
| 496 | क्लोविस व फ्रैंक धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने |
| 714 | चार्ल्स मारटल राजमहल का मेयर |
| 751 | पेपिन ने शासक को अपदस्थ कर नया वंश बनाया; राज्य दुगुना |
| 768 | शार्लमेन/चार्ल्स महान |
| 800 | पोप लियो III ने शार्लमेन को ‘पवित्र रोमन सम्राट’ का ताज पहनाया |
| 840 से | नार्वे से वाइकिंग हमले |
- गॉल रोमन प्रांत था; जर्मन जनजाति फ्रैंक ने उसे फ्रांस बनाया; छठी सदी से ईसाई राजाओं का राज्य; ग्यारहवीं सदी में नारमंडी के राजकुमार ने इंग्लैंड-स्कॉटलैंड जीता।
5. तीन वर्गों की विचारधारा★★★
- फ्रांसीसी पादरी मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति कार्य के आधार पर तीन वर्गों में से किसी एक का सदस्य होता है।
- एक बिशप: “यहाँ वर्ग क्रम में, कुछ प्रार्थना करते हैं, दूसरे लड़ते हैं और शेष अन्य कार्य करते हैं।”
- आबेस हिल्डेगार्ड (बिंगेन, बारहवीं सदी) ★★★: “कौन चरवाहा अपने समस्त पशुओं… को कोई अंतर किए बिना एक अस्तबल में रखने की सोचेगा? इसलिए मनुष्यों में भी अंतर स्थापित करना आवश्यक है… ईश्वर अपने रेवड़ में अंतर रखता है… उसके द्वारा सबको प्यार मिलता है परंतु उनमें कोई समानता नहीं है।”
- (‘आबे’ शब्द सीरिया के ‘अबा’ = पिता से; ऐबी, एबट या एबेस से संचालित।)
6. दूसरा वर्ग — अभिजात★★★
- पादरी ने स्वयं को प्रथम, अभिजात को दूसरा वर्ग बताया — पर वास्तव में अभिजात की भूमिका महत्त्वपूर्ण थी, भूमि पर उनके नियंत्रण के कारण।
- वैसलेज (Vassalage): जर्मन मूल की प्रथा (फ्रैंक सहित); बड़े भू-स्वामी व अभिजात राजा के अधीन, कृषक भू-स्वामियों के अधीन; अभिजात राजा को स्वामी (Seigneur) मानता; लॉर्ड शब्द का अर्थ ‘रोटी देने वाला’; दास (Vassal) की रक्षा ↔ निष्ठा; चर्च में बाइबल की शपथ; भूमि का प्रतीक — लिखित अधिकार-पत्र, छड़ी (Staff) या मिट्टी का ढेला। ★★★
- अभिजात की विशेष हैसियत ★★★: संपदा पर स्थायी पूर्ण नियंत्रण; सामंती सेना (Feudal levies) बढ़ा सकते थे; अपना न्यायालय; अपनी मुद्रा प्रचलित कर सकते थे; अपनी भूमि पर बसे सभी व्यक्तियों के मालिक; घर = मेनर।
- मेनर की जागीर: छोटी में दर्जन भर, बड़ी में 50–60 परिवार; लोहार-बढ़ई (औज़ार-हथियार), राजमिस्त्री (इमारतें), स्त्रियाँ (कातना-बुनना), बच्चे (मदिरा संपीडक); अरण्यभूमि-वन (शिकार), चरागाह, एक चर्च और सुरक्षा के लिए दुर्ग।
- 13वीं सदी से कुछ दुर्ग बड़े बनाए जाने लगे — नाइट के परिवार का निवास; इंग्लैंड में नॉर्मन विजय से पहले दुर्गों की जानकारी नहीं थी; दुर्ग = राजनीतिक प्रशासन व सैनिक शक्ति के केंद्र।
- ! मेनर कभी आत्मनिर्भर नहीं — नमक, चक्की का पाट, धातु के बर्तन बाहर से; विलासी लॉर्डों को साजो-सामान, वाद्य यंत्र, आभूषण भी बाहर से। ★★★
नाइट (Knights)★★★
- नौवीं सदी से स्थानीय युद्ध; शौकिया कृषक-सैनिक पर्याप्त नहीं, कुशल अश्वसेना चाहिए → नया वर्ग।
- लॉर्ड ने नाइट को फ़ीफ़ (Fief) दिया + रक्षा का वचन; फ़ीफ़ उत्तराधिकार में मिल सकता था; 1000–2000 एकड़ या अधिक; उसमें पनचक्की, मदिरा संपीडक, घर, चर्च और आश्रितों की व्यवस्था; भूमि कृषक जोतते थे।
- बदले में नाइट निश्चित रकम देता और युद्ध में लॉर्ड की तरफ़ से लड़ने का वचन; प्रतिदिन रणकौशल का अभ्यास (बाड़/घेराबंदी, पुतले); अन्य लॉर्डों को भी सेवा दे सकता था पर सर्वप्रथम निष्ठा अपने लॉर्ड को।
- ‘डून दे मयान्स’ (13वीं सदी की फ्रांसीसी कविता): “अगर मेरे प्यारे लॉर्ड को काट दिया जाता है, तो उसकी तकदीर का मैं भागीदार बनूँगा…”
- घुमक्कड़ गायक/चारण (12वीं सदी से): वीरता की अंशत: ऐतिहासिक, अंशत: काल्पनिक कहानियाँ; गायक दीर्घा — मेनर के मुख्य कक्ष के ऊपर संकरा छज्जा।
7. प्रथम वर्ग — पादरी★★★
- कैथलिक चर्च के अपने नियम, राजा द्वारा दी गई भूमियाँ और कर-अधिकार → शक्तिशाली संस्था जो राजा पर निर्भर नहीं।
- अध्यक्ष पोप (रोम); मार्गदर्शन बिशपों व पादरियों द्वारा; प्रत्येक रविवार धर्मोपदेश व सामूहिक प्रार्थना।
- पादरी बनने पर प्रतिबंध ★★★: (1) कृषि-दास, (2) शारीरिक रूप से बाधित, (3) स्त्रियाँ; पादरी विवाह नहीं कर सकते थे।
- बिशप = धर्म के क्षेत्र के अभिजात — लॉर्ड जैसी विस्तृत जागीरें और शानदार महल।
- आय: टीथ (Tithe) = कृषक की उपज का दसवाँ भाग, वर्ष में एक बार; अमीरों का दान (अपने व मृत रिश्तेदारों के कल्याण हेतु)। ★★★
- सामंती नकल ★★★: प्रार्थना में हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर घुटनों के बल झुकना = नाइट की वफ़ादारी-शपथ की नकल; ईश्वर के लिए ‘लॉर्ड’ शब्द का प्रचलन → सामंती संस्कृति चर्च के उपासना कक्षों में।
भिक्षु और मठ★★★
- कुछ अत्यधिक धार्मिक व्यक्ति एकांत ज़िंदगी पसंद करते थे → ऐबी (Abbeys)/मोनैस्ट्री (Monastery), आम आबादी से दूर। *(‘मोनेस्ट्री’ ग्रीक ‘मोनोस’ = अकेला रहने वाला* से।)
- दो प्रसिद्ध मठ: सेंट बेनेडिक्ट — 529, इटली; क्लूनी — 910, बरगंडी।
- भिक्षु का व्रत: सारा जीवन आँबे में; समय प्रार्थना, अध्ययन और कृषि जैसे शारीरिक श्रम में।
- पादरी-कार्य के विपरीत भिक्षु की ज़िंदगी पुरुष व स्त्रियाँ दोनों अपना सकते थे — मोंक (Monk) और नन (Nun); प्राय: एक ही लिंग के आँबे; भिक्षु-भिक्षुणियाँ भी विवाह नहीं कर सकतीं।
- विस्तार: 10–20 के समुदाय → सैकड़ों; बड़ी इमारतें, भू-जागीरें, स्कूल/कॉलेज और अस्पताल; कला में योगदान — आबेस हिल्डेगार्ड प्रतिभाशाली संगीतज्ञ, सामुदायिक गायन की प्रथा के विकास में योगदान।
- फ़्रायर (Friars) — तेरहवीं सदी से: मठों में न रहने का निर्णय; घूम-घूम कर उपदेश, दान से जीविका। ★★
- बेनेडिक्टीन नियम-पुस्तक (73 अध्याय) ★★★: अ.6 — बोलने की आज्ञा कभी-कभी; अ.7 — विनम्रता = आज्ञा पालन; अ.33 — निजी संपत्ति नहीं; अ.47 — आलस्य आत्मा का शत्रु; अ.48 — मठ में जल, चक्की, उद्यान, कार्यशाला — सब सीमा के अंदर।
- आलोचना (14वीं सदी से): लैंग्लैंड का ‘पियर्स प्लाउमैन’ (1360–70) — भिक्षुओं का विलासितापूर्ण जीवन बनाम कृषकों-गड़रियों-मजदूरों का ‘विशुद्ध विश्वास’; चॉसर की ‘कैंटरबरी टेल्स’ — नन, मोंक व फ़्रायर का हास्यास्पद चित्रण।
8. चर्च और समाज★★
- ईसाई बनने पर भी लोगों ने चमत्कार व पुराने रीति-रिवाजों से जुड़े विश्वास नहीं छोड़े।
- क्रिसमस (25 दिसम्बर) — सौर-पंचांग आधारित; एक पुराने पूर्व-रोमन त्योहार का स्थान लिया।
- ईस्टर — शूलारोपण व पुनर्जीवन का प्रतीक; तिथि निश्चित नहीं क्योंकि उसने चन्द्र-पंचांग आधारित बसंत-स्वागत के प्राचीन त्योहार का स्थान लिया।
- गाँव की भूमि का दौरा जारी रहा, पर अब ‘पैरिश’ (Parish — एक पादरी की देखरेख का क्षेत्र) कहा जाने लगा।
- पवित्र दिन/छुट्टियाँ (Holy days/Holidays): कृषक स्वागत करते क्योंकि काम नहीं करना पड़ता; दिन प्रार्थना का था पर अधिकतर समय मौज-मस्ती और दावतों में बीतता। ★★
- तीर्थयात्रा — जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा; शहीदों की समाधियों या बड़े गिरजाघरों की लंबी यात्राएँ। चॉसर का काव्य-अंश (कैंटरबरी)।
9. तीसरा वर्ग — कृषक★★★
- दो प्रकार: स्वतंत्र किसान और सर्फ़ (कृषि-दास) — सर्फ़ अंग्रेज़ी क्रिया ‘टू सर्व’ (To serve) से बना।
स्वतंत्र किसान
- लॉर्ड के काश्तकार; सैनिक सेवा — वर्ष में कम से कम चालीस दिन।
- लॉर्ड की जागीर पर सप्ताह के तीन या अधिक दिन; इस श्रम का उत्पादन = ‘श्रम-अधिशेष’ (Labour rent) — सीधे लॉर्ड को।
- बिना मज़दूरी के अन्य कार्य: गड्ढे खोदना, जलाने की लकड़ियाँ, बाड़ बनाना, सड़कों-इमारतों की मरम्मत।
- स्त्रियाँ व बच्चे: सूत कातना, कपड़ा बुनना, मोमबत्ती बनाना, अंगूरों से मदिरा तैयार करना।
- टैली (Taille) — राजा द्वारा कभी-कभी लगाया जाने वाला प्रत्यक्ष कर; ★★★पादरी और अभिजात वर्ग इस कर से मुक्त थे।
कृषिदास (सर्फ़)★★★
- जिन भूखंडों पर कृषि करते थे वे लॉर्ड के स्वामित्व में → अधिकतर उपज लॉर्ड को।
- लॉर्ड की भूमि पर बिना मज़दूरी कृषि; लॉर्ड की आज्ञा के बिना जागीर नहीं छोड़ सकते।
- लॉर्ड के एकाधिकार: सर्फ़ केवल लॉर्ड की चक्की में आटा, उसके तंदूर में रोटी, उसकी मदिरा संपीडक में आसवन-मदिरा व बीयर।
- विवाह: लॉर्ड तय कर सकता था कि सर्फ़ किससे विवाह करे, या उसकी पसंद को आशीर्वाद दे — पर इसके लिए शुल्क लेता था। ★★★
10. इंग्लैंड में सामंतवाद★★
- विकास ग्यारहवीं सदी से।
- छठी सदी में एंजिल (Angles) व सैक्सन (Saxons) मध्य यूरोप से आकर बसे; ‘एंजिल लैंड’ → इंग्लैंड।
- 1066: नारमैंडी के ड्यूक विलियम ने इंग्लिश चैनल पार कर सैक्सन राजा को हराया।
- विलियम प्रथम ने भूमि नपवाई, नक्शे बनवाए और उसे 180 नॉर्मन अभिजातों में बाँटा → वे राजा के प्रमुख काश्तकार; राजा को कुछ नाइट देने के लिए बाध्य। ★★★
- वे नाइटों को भी भूमि-उपहार देने लगे; ! किंतु नाइटों का अपने निजी युद्धों के लिए उपयोग नहीं कर सकते थे — इंग्लैंड में इस पर प्रतिबंध था (फ्रांस से मुख्य अंतर)। ★★★
- एंग्लो-सैक्सन कृषक विभिन्न स्तरों के भू-स्वामियों के काश्तकार बन गए।
11. परिवर्तन के कारक★★★
(क) पर्यावरण
- 5वीं–10वीं सदी: यूरोप का अधिकांश भाग विस्तृत वनों से घिरा → कृषि-भूमि सीमित; असंतुष्ट कृषक वनों में शरण ले सकते थे।
- तीव्र ठंड का दौर → सर्दियाँ प्रचंड व लंबी; फसलों का उपज-काल छोटा; पैदावार कम।
- ग्यारहवीं सदी से गर्माहट का दौर, औसत तापमान बढ़ा → कृषि की लंबी अवधि, पाले का असर कम; वन-क्षेत्रों में उल्लेखनीय कमी और कृषि भूमि का विस्तार (पर्यावरण इतिहासकारों का मत)। ★★★
(ख) भूमि का उपयोग (पुरानी व्यवस्था)
- लकड़ी का हल केवल सतह खुरच सकता था; भूमि की प्राकृतिक उत्पादकता का पूरा उपयोग नहीं; चार वर्ष में एक बार हाथ से खुदाई; अत्यधिक मानव-श्रम।
- द्वि-क्षेत्रीय फसल-चक्र: एक भाग में शरद ऋतु में सर्दी का गेहूँ, दूसरा परती; अगले वर्ष परती पर राई, दूसरा आधा खाली → उर्वरता का ह्रास, अकाल, दीर्घकालिक कुपोषण।
(ग) लॉर्डों का दबाव और निष्क्रिय प्रतिरोध★★★
- लॉर्ड आय अधिकतम करना चाहते थे; उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं था → कृषकों को मेनर की समस्त भूमि कृषिगत बनाने और निर्धारित से अधिक समय देने पर बाध्य किया।
- कृषक खुलकर विरोध नहीं कर सकते थे इसलिए निष्क्रिय प्रतिरोध — अपने खेतों पर अधिक समय, उत्पाद अपने पास, बेगार से बचना।
- चरागाह व वन-भूमि पर विवाद: लॉर्ड इसे व्यक्तिगत सम्पत्ति मानते थे, कृषक संपूर्ण समुदाय की साझा संपदा। ★★★
(घ) नयी कृषि प्रौद्योगिकी (11वीं सदी तक)★★★
- लोहे की भारी नोक वाले हल और साँचेदार पटरे (Mould boards) → गहरी खुदाई, ऊपरी मृदा पलटना, पौष्टिक तत्त्वों का बेहतर उपयोग।
- जुआ गले (Neck harness) की जगह कंधे पर → पशुओं को अधिक शक्ति।
- घोड़े के खुरों पर लोहे की नाल।
- जल व वायु शक्ति से चलने वाले कारखाने — अन्न पीसना, अंगूर निचोड़ना।
- त्रि-क्षेत्रीय फसल-चक्र ★★★: खेत 1 — शरत् में गेहूँ/राई (मानव); खेत 2 — बसंत में मटर, सेम, मसूर (मानव) + जौ, बाजरा (घोड़े); खेत 3 — परती; हर वर्ष अदल-बदल।
- परिणाम: प्रति इकाई उत्पादन में तेज़ बढ़ोतरी; भोजन की उपलब्धता दुगुनी; अधिक प्रोटीन व पशु-चारा; 13वीं सदी तक औसत जोत 100 → 20–30 एकड़; छोटी जोतों पर अधिक कुशल कृषि, कम श्रम, अन्य गतिविधियों के लिए समय।
(ङ) पूँजी और मुद्रा-अर्थव्यवस्था★★★
- पनचक्की-पवनचक्की में पहल लॉर्डों ने की (कृषकों के पास धन नहीं)।
- कृषकों की पहल: खेती-योग्य भूमि का विस्तार; तीन-चक्रीय व्यवस्था अपनाना; गाँवों में लोहार की दुकानें व भट्ठियाँ — लोहे की नोक वाले हल व घोड़े की नाल सस्ती दरों पर।
- ग्यारहवीं सदी से: व्यक्तिगत संबंध (सामंतवाद का आधार) कमज़ोर पड़ने लगे क्योंकि आर्थिक लेन-देन मुद्रा पर आधारित होने लगा — लॉर्डों को नक़दी लगान सुविधाजनक; कृषक फ़सल व्यापारियों को मुद्रा में बेचने लगे।
- इंग्लैंड में 1270–1320 के बीच कृषि मूल्य दुगुने हो गए। ★★
12. चौथा वर्ग — नगर और नगरवासी★★★
- जनसंख्या: 1000 में 420 लाख → 1200 में 620 लाख → 1300 में 730 लाख।
- बेहतर आहार = लंबी जीवन-अवधि; 13वीं सदी तक औसत यूरोपीय 8वीं सदी की तुलना में दस वर्ष अधिक जीता।
- ! स्त्रियों व बालिकाओं की जीवन-अवधि छोटी थी क्योंकि पुरुष बेहतर भोजन करते थे। ★★★
- रोम-पतन के बाद नगर उजाड़; 11वीं सदी से कृषि-विस्तार के साथ नगर फिर बढ़ने लगे।
- प्रक्रिया: अतिरिक्त खाद्यान्न वाले कृषकों को बिक्री-केंद्र चाहिए → मियादी हाट-मेले → छोटे विपणन केंद्र → नगर-लक्षण: नगर चौक, चर्च, सड़कें, दुकानें, शासन-कार्यालय; अन्यत्र नगर बड़े दुर्गों, बिशपों की जागीरों और बड़े चर्चों के चारों ओर।
- ‘नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है’ ★★★: भागे हुए कृषिदास नगरों में छिपते; एक वर्ष व एक दिन तक छिपे रहने पर स्वाधीन नागरिक बन जाते।
- नगरवासी: अधिकतर स्वतंत्र कृषक या भगोड़े कृषिदास (अकुशल श्रमिक); दुकानदार व व्यापारी बहुतायत में; बाद में साहूकार और वकील; बड़े नगरों की जनसंख्या लगभग तीस हज़ार → उन्होंने समाज में एक चौथा वर्ग बना लिया।
- श्रेणी (Guild) ★★★: आर्थिक संस्था का आधार; प्रत्येक शिल्प/उद्योग एक श्रेणी; उत्पाद की गुणवत्ता, मूल्य और बिक्री पर नियंत्रण; ‘श्रेणी सभागार’ प्रत्येक नगर का आवश्यक अंग; पहरेदार गश्त, संगीतकार प्रीतिभोजों-जुलूसों में, सरायवाले यात्रियों की देखभाल।
- व्यापार: स्कैंडिनेविया के व्यापारी वस्त्र के बदले फ़र और शिकारी बाज़; अंग्रेज़ व्यापारी राँगा (Tin); 12वीं सदी तक फ्रांस में वाणिज्य-शिल्प; दस्तकारों का एक स्थान पर बसना; व्यापारी अभिजात्यता के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगे।
कथीड्रल-नगर★★★
- चर्चों को दान = अमीर व्यापारियों का धन खर्च करने का तरीका; 12वीं सदी से फ्रांस में कथीड्रल बनने लगे।
- वे मठों की संपत्ति थे पर विभिन्न समूहों ने श्रम, वस्तुओं और धन से सहयोग दिया; पत्थर के बने, पूरा होने में अनेक वर्ष; निर्माण-काल में आसपास बसावट, पूरा होने पर तीर्थ-स्थल → चारों तरफ छोटे नगर विकसित।
- वास्तु-उद्देश्य: पादरी की आवाज़ साफ़ सुनाई दे; भिक्षुओं का गायन मधुर लगे; घंटियाँ दूर तक सुनाई दें।
- अभिरंजित काँच (Stained glass): दिन में सूरज की रोशनी से भीतर वालों को चमकदार; रात में मोमबत्तियों की रोशनी से बाहर वालों को दृश्यमान; चित्र बाईबल की कथाएँ — जिन्हें अनपढ़ व्यक्ति भी ‘पढ़’ सकते थे। ★★★
- एबट सुगेर (1081–1151) का विवरण (सेंट डेनिस): भीड़-संकीर्णता के कारण चर्च को विस्तृत बनाने का निर्णय; रंजित-सफ़ायर काँच की खिड़कियाँ; उनकी रक्षा हेतु सरकारी प्रधान शिल्पकार व स्वर्णकार की नियुक्ति।
13. चौदहवीं सदी का संकट — तीन कारक★★★
- पर्यावरण: 13वीं सदी के अंत तक तेज़ ग्रीष्म का स्थान तीव्र ठंडी ग्रीष्म ने लिया; पैदावार-मौसम छोटे; ऊँची भूमि पर फसल कठिन; तूफ़ान व सागरीय बाढ़ से फार्म नष्ट → करों से कम आमदनी; गहन जुताई से भूमि कमज़ोर (तीन-क्षेत्रीय चक्र के बावजूद), भू-संरक्षण का अभाव; चरागाहों की कमी → पशु घटे; जनसंख्या-वृद्धि से संसाधन कम → 1315–17 का भयंकर अकाल; 1320 के दशक में अनगिनत पशु-मौतें।
- मुद्रा-संकट: ऑस्ट्रिया और सर्बिया की चाँदी खानों के उत्पादन में कमी → धातु-मुद्रा की कमी, व्यापार प्रभावित; सरकार को चाँदी की शुद्धता घटाकर सस्ती धातुओं का मिश्रण करना पड़ा।
- ब्लैक डेथ ★★★: वाणिज्य-विस्तार से दूर देशों के पोत यूरोपीय तटों पर; पोतों के साथ चूहे → ब्यूबोनिक प्लेग; पश्चिमी यूरोप 1347–1350 के मध्य बुरी तरह प्रभावित; आबादी का ~20% (कुछ स्थानों पर 40% तक) मृत; नगर सबसे अधिक प्रभावित (व्यापार-केंद्र); बंद समुदायों (मठ-आश्रम) में कोई नहीं बचता; शिशु, युवा और बुजुर्ग सर्वाधिक प्रभावित; 1360 और 1370 में छोटी लहरें; जनसंख्या 1300 में 730 लाख → 1400 में 450 लाख।
- बोकाचियो (1313–75, इतालवी लेखक): “कितने बहादुर पुरुषों और महिलाओं ने अपने कुटुंबियों के साथ नाश्ता कर उसी रात्रि में अपने पूर्वजों के साथ रात्रि भोजन किया होगा।”
- आर्थिक परिणाम ★★★: मज़दूरों की भारी कमी; कृषि और उत्पादन के बीच गंभीर असंतुलन; खरीदारों की कमी से कृषि-उत्पादों के मूल्य गिरे; इंग्लैंड में मज़दूरी की दरों में 250% तक वृद्धि; बचा श्रमिक-बल पुरानी दरों से दुगुने की माँग कर सकता था।
14. सामाजिक असंतोष और कृषक विद्रोह★★★
- लॉर्डों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित (मज़दूरी बढ़ी, कृषि-मूल्य गिरे) → निराशा में उन्होंने हाल के धन-अनुबंध तोड़े और पुरानी मज़दूरी-सेवाएँ फिर लागू कीं।
- कृषकों, विशेषकर पढ़े-लिखे और समृद्ध कृषकों द्वारा हिंसक विरोध:
| वर्ष | स्थान |
|---|---|
| 1323 | फ्लैंडर्स |
| 1358 | फ्रांस |
| 1381 | इंग्लैंड |
- ★★★महत्त्वपूर्ण सूक्ष्म बिंदु: ये विद्रोह सर्वाधिक हिंसक तरीकों से उन स्थानों पर हुए जहाँ आर्थिक विस्तार के कारण समृद्धि हुई थी — संकेत यह कि कृषक पिछली सदियों में हुए लाभों को बचाने का प्रयास कर रहे थे।
- तीव्र दमन के बावजूद विद्रोहों की तीव्रता ने सुनिश्चित कर दिया कि पुराने सामंती रिश्ते पुन: नहीं लादे जा सकते; धन अर्थव्यवस्था (Money economy) इतनी विकसित थी कि उसे पलटा नहीं जा सकता था।
- निष्कर्ष: लॉर्ड विद्रोहों का दमन करने में सफल रहे, पर कृषकों ने सुनिश्चित कर लिया कि दासता के पुराने दिन फिर नहीं लौटेंगे। ★★★
तालिका: ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी★★★
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1066 | नॉर्मन विजय (एंग्लो-सैक्सनी लोगों को हराकर) |
| 1100 के बाद | फ्रांस में कथीड्रलों का निर्माण |
| 1315–17 | यूरोप में महान अकाल |
| 1347–50 | ब्यूबोनिक प्लेग (ब्लैक डेथ) |
| 1338–1461 | इंग्लैंड-फ्रांस “सौ-वर्षीय युद्ध” |
| 1381 | कृषकों के विद्रोह |
15. राजनीतिक परिवर्तन — ‘नए शासक’★★★
- पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में यूरोपीय शासकों ने सैनिक व वित्तीय शक्ति बढ़ाई; इतिहासकार इन्हें ‘नए शासक’ (The New Monarchs) कहते हैं।
- उदाहरण: फ्रांस में लुई ग्यारहवें, आस्ट्रिया में मैक्समिलन, इंग्लैंड में हेनरी सप्तम, स्पेन में ईसाबेला और फरडीनेंड — निरंकुश शासक; संगठित स्थायी सेना, स्थायी नौकरशाही, राष्ट्रीय कर प्रणाली।
- स्पेन और पुर्तगाल ने समुद्र पार विस्तार की नयी संभावनाएँ शुरू कीं।
| काल | क्षेत्र |
|---|---|
| 1461–1559 | फ्रांस में नए शासक |
| 1474–1556 | स्पेन में नए शासक |
| 1485–1547 | इंग्लैंड में नए शासक |
- सफलता का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण: बारहवीं-तेरहवीं सदी का सामाजिक परिवर्तन — जागीरदारी (Vassalage) और सामंतशाही (Lordship) के विलयन तथा आर्थिक विकास की धीमी गति ने शासकों को नियंत्रण बढ़ाने का पहला मौका दिया।
- शासकों ने सामंतों से सेना के लिए कर लेना बंद किया और बंदूकों-बड़ी तोपों से सुसज्जित प्रशिक्षित सेना बनाई जो पूर्णत: उनके अधीन थी; अभिजात वर्ग का विरोध राजाओं की गोली के शक्ति-प्रदर्शन के समक्ष टुकड़े-टुकड़े हो गया। ★★★
- कर-विरोध: राजसत्ता के विरुद्ध विरोधों का समान मुद्दा कराधान; इंग्लैंड में विद्रोहों का दमन 1497, 1536, 1547, 1549, 1553; फ्रांस में लुई XI (1461–83) का ड्यूकों-राजकुमारों से लंबा संघर्ष; 16वीं सदी के फ्रांस के ‘धर्म-युद्ध’ कुछ हद तक शाही सुविधाओं और क्षेत्रीय स्वतंत्रता के बीच संघर्ष थे।
- अभिजात का चतुर रूपांतरण ★★★: नई व्यवस्था के विरोधी रहने के बजाय जल्दी ही राजभक्तों में बदल गए → शाही निरंकुशता को सामंतवाद का परिष्कृत रूप माना जाता है; लॉर्डों को प्रशासनिक सेवाओं में स्थायी स्थान।
- नयी व्यवस्था कैसे भिन्न थी: शासक अब पिरामिड के शिखर पर नहीं, बल्कि व्यापक दरबारी समाज और आश्रयदाता-अनुयायी तंत्र का केंद्र-बिंदु; सभी राजतंत्रों को सत्ता वाले व्यक्तियों का सहयोग चाहिए था; धन सहयोग सुनिश्चित करने का साधन बना → व्यापारियों और साहूकारों के लिए दरबार में प्रवेश का माध्यम; वे राजाओं को धन उधार देते जो सैनिकों के वेतन में लगता → राज्य-व्यवस्था में गैर-सामंती तत्त्वों के लिए स्थान। ★★★
फ्रांस बनाम इंग्लैंड★★★
| आयाम | फ्रांस | इंग्लैंड |
|---|---|---|
| प्रतिनिधि संस्था | एस्टेट्स जनरल — तीन सदन (पादरी, अभिजात, अन्य) | पार्लियामेंट — हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स (लॉर्ड व पादरी) + हाउस ऑफ़ कामन्स (नगर व ग्रामीण क्षेत्र) |
| उद्भव | परामर्शदात्री सभा | नॉर्मन विजय से पहले की एंग्लो-सैक्सन महान परिषद — कर लगाने से पहले सलाह अनिवार्य |
| निर्णायक घटना | 1614 का अधिवेशन (बालक शासक लुई XIII) → फिर 1789 तक नहीं बुलाई गई | चार्ल्स प्रथम (1629–40) ने ग्यारह वर्ष बिना पार्लियामेंट शासन किया |
| परिणाम | राजा तीन वर्गों से शक्ति बाँटना नहीं चाहते थे | पार्लियामेंट का एक भाग विरोध में; राजा को प्राणदंड, गणतंत्र; फिर राजतंत्र की पुनर्स्थापना इस शर्त पर कि पार्लियामेंट नियमित बुलाई जाएगी |
| आज | गणतंत्रीय सरकार | राजतंत्र |
कारण: सत्रहवीं सदी के बाद दोनों राष्ट्रों के इतिहासों ने अलग-अलग दिशाएँ अपनाईं।
16. रटने योग्य तिथियाँ★★★
481 क्लोविस → 496 फ्रैंकों का ईसाई बनना → 529 सेंट बेनेडिक्ट का मठ → 714/751/768 मारटल-पेपिन-शार्लमेन → 800 शार्लमेन ‘पवित्र रोमन सम्राट’ → 840 से वाइकिंग हमले → 910 क्लूनी मठ → 1066 नॉर्मन विजय → 1100 के बाद कथीड्रल-निर्माण → 1270–1320 इंग्लैंड में कृषि मूल्य दुगुने → 1315–17 महान अकाल → 1323/1358/1381 कृषक विद्रोह (फ्लैंडर्स/फ्रांस/इंग्लैंड) → 1338–1461 सौ-वर्षीय युद्ध → 1347–50 ब्लैक डेथ → 1360–70 पियर्स प्लाउमैन; प्लेग की छोटी लहरें → 1442 पुर्तगाली दास-व्यापार → 1461–1559 / 1474–1556 / 1485–1547 नए शासक (फ्रांस/स्पेन/इंग्लैंड) → 1492 कोलम्बस → 1498 वास्को डि गामा → 1517 लूथर → 1543 कोपरनिकस → 1614 एस्टेट्स जनरल → 1629–40 चार्ल्स प्रथम → 1789 एस्टेट्स जनरल की पुनः बैठक
17. आँकड़े-कोश★★★
| आँकड़ा | संदर्भ |
|---|---|
| 420 / 620 / 730 लाख | यूरोप की जनसंख्या — 1000 / 1200 / 1300 |
| 450 लाख | 1400 में जनसंख्या (ब्लैक डेथ के बाद) |
| 20% (कहीं 40%) | ब्लैक डेथ से मृत आबादी |
| 250% | प्लेग के बाद इंग्लैंड में मज़दूरी-वृद्धि |
| 10 वर्ष | 13वीं सदी में जीवन-अवधि की वृद्धि (8वीं सदी की तुलना में) |
| दसवाँ भाग | टीथ (चर्च का कर) |
| 40 दिन | स्वतंत्र किसान की वार्षिक सैनिक सेवा |
| 3+ दिन/सप्ताह | लॉर्ड की जागीर पर श्रम |
| 1000–2000 एकड़ | फ़ीफ़ का आकार |
| 12 / 50–60 परिवार | छोटी / बड़ी मेनर जागीर |
| 100 → 20–30 एकड़ | 13वीं सदी तक कृषक की औसत जोत |
| 180 | विलियम प्रथम द्वारा भूमि पाने वाले नॉर्मन अभिजात |
| 73 | बेनेडिक्टीन नियम-पुस्तक के अध्याय |
| ~30,000 | बड़े नगरों की जनसंख्या |
| 11 वर्ष | चार्ल्स प्रथम का बिना पार्लियामेंट शासन |
18. स्मरण-सूत्र
- तीन वर्ग: “प्रार्थना–युद्ध–श्रम” (पादरी–अभिजात–कृषक)।
- तीन क्षेत्रीय फसल-चक्र: “गेहूँ – मटर – परती”।
- संकट के तीन कारक: “अ-चा-प्ले” — अकाल/पर्यावरण, चाँदी की कमी, प्लेग।
- तीन विद्रोह: “फ्ला-फ्रा-इं” — 1323 फ्लैंडर्स, 1358 फ्रांस, 1381 इंग्लैंड।
- दो कर: टीथ = चर्च को उपज का 1/10 • टैली = राजा का प्रत्यक्ष कर (पादरी-अभिजात मुक्त)।
- दो मठ: बेनेडिक्ट 529 इटली • क्लूनी 910 बरगंडी।
- दो सभाएँ: एस्टेट्स जनरल (फ्रांस, 3 सदन) • पार्लियामेंट (इंग्लैंड, लॉर्ड्स + कामन्स)।
19. NCERT अभ्यास — उत्तर-संकेत
- प्रारंभिक सामंती समाज के दो लक्षण: (i) भूमि पर नियंत्रण केंद्र-बिंदु — लॉर्ड-कृषक संबंध; कृषक अपने व लॉर्ड के खेतों पर काम करते, श्रम-सेवा देते और बदले में सैनिक सुरक्षा पाते; (ii) वैसलेज की शृंखला — राजा → अभिजात → नाइट → कृषक; शपथ, अधिकार-पत्र/छड़ी/मिट्टी के ढेले का प्रतीक; लॉर्ड के न्यायिक अधिकार, अपनी सेना और अपनी मुद्रा।
- जनसंख्या-परिवर्तन का प्रभाव: वृद्धि-काल (420→730 लाख) — कृषि-विस्तार, नगरों-व्यापार का उदय, चौथा वर्ग, गिल्ड, कथीड्रल-नगर, लंबी जीवन-अवधि; ह्रास-काल (730→450 लाख) — मज़दूरों की कमी, मज़दूरी 250% तक बढ़ी, कृषि-मूल्य गिरे, लॉर्डों की आय घटी, सामंती श्रम-सेवाएँ लौटाने के प्रयास → कृषक विद्रोह → सामंती रिश्तों की वापसी असंभव।
- नाइट क्यों बने और पतन कब: नौवीं सदी से स्थानीय युद्ध; शौकिया कृषक-सैनिक अपर्याप्त, कुशल अश्वसेना की ज़रूरत → नया वर्ग; फ़ीफ़, प्रशिक्षण, निष्ठा। पतन: पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में ‘नए शासक’ द्वारा बंदूकों-तोपों से सुसज्जित स्थायी प्रशिक्षित सेनाएँ बनाने से घुड़सवार नाइट की सैन्य उपयोगिता समाप्त — “अभिजात वर्ग का विरोध राजाओं की गोली के शक्ति-प्रदर्शन के समक्ष टुकड़े-टुकड़े हो गया”; साथ ही मुद्रा-अर्थव्यवस्था ने सामंती व्यक्तिगत संबंध कमज़ोर किए।
- मठों का कार्य: प्रार्थना, अध्ययन और कृषि जैसा शारीरिक श्रम; पुरुष (मोंक) व स्त्री (नन) दोनों के लिए खुला; बड़े मठों में स्कूल/कॉलेज और अस्पताल; कला-संगीत में योगदान (हिल्डेगार्ड — सामुदायिक गायन); पांडुलिपियों की नकल व ज्ञान-संरक्षण; फ़्रायर घूम-घूम कर उपदेश; बेनेडिक्टीन नियम (73 अध्याय) से अनुशासित जीवन।
- शिल्पकार के एक दिन की कल्पना (निबंध-संकेत): नगर-चौक व चर्च के पास कार्यशाला; श्रेणी (Guild) के नियम — गुणवत्ता, मूल्य, बिक्री; श्रेणी सभागार की बैठक; कच्चा माल हाट-मेले से; ग्राहक — कृषक, नाइट, चर्च; पहरेदार, सरायवाले, संगीतकार; कथीड्रल-निर्माण में सहयोग; कर लॉर्ड को; ‘नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है’ का अहसास।
- फ्रांस का सर्फ़ बनाम रोम का दास (तुलना):
- समानताएँ: दोनों स्वामी की भूमि/संपत्ति से बँधे; उपज/श्रम स्वामी को; गतिशीलता पर नियंत्रण; स्वामी का व्यापक अधिकार।
- भेद: रोमन दास कानूनी रूप से ‘संपत्ति’ था और खरीदा-बेचा जा सकता था, जबकि सर्फ़ भूमि से बँधा था — उसका अपना घर, जोत और परिवार था; सर्फ़ की उपज का एक भाग उसका अपना; लॉर्ड के एकाधिकार (चक्की, तंदूर, मदिरा-संपीडक) व विवाह-शुल्क — पर विवाह और परिवार मान्य; रोमन दासता में निरीक्षण-आधारित सामूहिक श्रम (जंजीरों वाले दल), सामंती व्यवस्था में प्रथागत दायित्व; अंतत: ब्लैक डेथ के बाद सर्फ़ की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ी और नगर में एक वर्ष एक दिन छिपकर वह स्वतंत्र नागरिक बन सकता था — रोमन दास के लिए ऐसा मार्ग नहीं था।