इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | उत्तर की लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर लिखिए, भूमिका मत बाँधिए |
| 2 अंक | लगभग 30 से 40 शब्द, या 2 बिंदु | पहले एक वाक्य में उत्तर, फिर एक वाक्य में कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | लगभग 60 से 80 शब्द, या 3 बिंदु | तीन अलग-अलग बातें लिखिए; हर बात पूरे वाक्य में |
| 4 अंक | लगभग 100 से 120 शब्द, या 4 से 5 बिंदु | एक वाक्य की भूमिका, फिर चार बिंदु, फिर एक वाक्य का निष्कर्ष |
| स्रोत-आधारित | जो पूछा है बस वही | उत्तर गद्यांश में ही छिपा होता है; उसी की भाषा इस्तेमाल कीजिए |
इस अध्याय के लिए एक विशेष सलाह। यह अर्थव्यवस्था का अध्याय है, इसलिए इसमें आँकड़े बहुत हैं। जिस उत्तर में आप एक भी सही आँकड़ा लिख देते हैं, वह उत्तर तुरंत मज़बूत हो जाता है। हर बड़े उत्तर में कम से कम एक आँकड़ा ज़रूर लिखिए।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1‘सिल्क मार्ग’ नाम किस वस्तु के व्यापार के कारण पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस मार्ग से पश्चिम को भेजे जाने वाले चीनी रेशम (सिल्क) के कारण यह नाम पड़ा।
2सिल्क मार्ग कब तक अस्तित्व में रहे?
उत्तर देखिए
उत्तर: ये मार्ग ईसा पूर्व के समय में सामने आ चुके थे और लगभग पंद्रहवीं शताब्दी तक अस्तित्व में रहे।
3मालदीव की कौड़ियाँ किस काम आती थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कौड़ियों को पैसे या मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और ये चीन तथा पूर्वी अफ़्रीका तक पहुँचती थीं।
4भारत में उपजा कौन-सा धर्म सिल्क मार्ग से कई दिशाओं में फैला?
उत्तर देखिए
उत्तर: पूर्वी भारत में उपजा बौद्ध धर्म।
5आलू, मक्का, टमाटर और मिर्च जैसी फ़सलें यूरोप और एशिया में कब पहुँचीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ये फ़सलें तब पहुँचीं जब क्रिस्टोफ़र कोलंबस ग़लती से अमेरिका पहुँच गया; लगभग पाँच सौ साल पहले तक ये हमारे पूर्वजों के पास नहीं थीं।
6आयरिश आलू अकाल कब पड़ा और उसमें कितने लोग मारे गए?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह अकाल 1845 से 1849 के बीच पड़ा और इसमें लगभग 10,00,000 लोग भुखमरी के कारण मारे गए।
7स्पेनिश विजेताओं का सबसे शक्तिशाली हथियार क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: चेचक जैसे कीटाणु, जो स्पेनिश सैनिकों और अफ़सरों के साथ अमेरिका पहुँचे थे।
8‘असंतुष्ट’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जो स्थापित विश्वासों और तरीक़ों को नहीं मानता, उसे असंतुष्ट कहते हैं।
9अठारहवीं सदी तक दुनिया के सबसे धनी देश कौन-से माने जाते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: चीन और भारत।
10अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय के तीन प्रवाह कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: व्यापार का प्रवाह, श्रम का प्रवाह और पूँजी का प्रवाह।
11‘कॉर्न लॉ’ क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे ब्रिटिश क़ानून जिनके सहारे सरकार ने मक्का के आयात पर पाबंदी लगा दी थी।
12उन्नीसवीं सदी में यूरोप के कितने लोग अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जाकर बसे?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग पाँच करोड़ लोग।
13पूरी दुनिया में लगभग कितने लोग बेहतर भविष्य की चाह में दूर देशों में जाकर काम करने लगे थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग पंद्रह करोड़ लोग।
14पंजाब में नहरों की सिंचाई वाले इलाक़ों में बसाई गई बस्तियों को क्या कहा जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: केनाल कॉलोनी या नहर बस्ती।
151820 से 1914 के बीच विश्व व्यापार में कितनी वृद्धि हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 25 से 40 गुना वृद्धि हुई, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक उत्पादों का था।
16किस तकनीक के आने से मांस का व्यापार संभव हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: पानी के जहाज़ों में रेफ़्रिजरेशन की तकनीक स्थापित होने से।
17अफ़्रीका को बाँटने के लिए यूरोप के ताक़तवर देशों की बैठक कब और कहाँ हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1885 में बर्लिन में।
18संयुक्त राज्य अमेरिका औपनिवेशिक ताक़त कब बना?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1890 के दशक के आख़िरी वर्षों में, स्पेन के क़ब्ज़े में रह चुके कुछ उपनिवेशों पर क़ब्ज़ा करके।
19सर हेनरी मॉर्टन स्टैनली कौन थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे एक पत्रकार और खोजी थे, जिन्हें न्यूयॉर्क हैरल्ड ने अफ़्रीका गए मिशनरी लिविंग्स्टन की खोज के लिए भेजा था।
20रिंडरपेस्ट क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह मवेशियों में प्लेग की तरह तेज़ी से फैलने वाली एक विनाशकारी पशु बीमारी है।
21रिंडरपेस्ट अफ़्रीका में कब और कैसे पहुँची?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह 1880 के दशक के आख़िरी सालों में, एरिट्रिया पर हमला कर रहे इतालवी सैनिकों के लिए एशियाई देशों से लाए गए जानवरों के ज़रिये पहुँची।
22रिंडरपेस्ट ने कितने प्रतिशत मवेशियों को मार डाला?
उत्तर देखिए
उत्तर: अपने रास्ते में आने वाले 90 प्रतिशत मवेशियों को।
23अनुबंधित (गिरमिटिया) श्रमिकों के अनुबंध में मुख्य शर्त क्या होती थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: यदि मज़दूर अपने मालिक के बागानों में पाँच साल काम कर लें तो वे स्वदेश लौट सकते हैं।
24भारत के ज़्यादातर अनुबंधित श्रमिक किन इलाक़ों से जाते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: मौजूदा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य भारत और तमिलनाडु के सूखे इलाक़ों से।
25तमिल आप्रवासी मुख्यत: कहाँ जाकर काम करते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: सीलोन और मलाया।
26‘होसे’ क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: त्रिनिदाद में मुहर्रम के सालाना जुलूस को दिया गया विशाल उत्सवी मेले का रूप, जिसका नाम इमाम हुसैन के नाम पर पड़ा।
27रास्ताफ़ारियानवाद को ख्याति के शिखर पर कौन ले गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: जमैका के रैगे गायक बॉब मार्ले।
28भारत में अनुबंध प्रथा कब समाप्त की गई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1921 में।
29वी. एस. नायपॉल कौन हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार हैं और भारत से गए अनुबंधित मज़दूरों के वंशज हैं।
301800 और 1870 में भारत के निर्यात में सूती कपड़े का हिस्सा कितना था?
उत्तर देखिए
उत्तर: सन् 1800 के आसपास 30 प्रतिशत, जो 1870 तक घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया।
31‘व्यापार अधिशेष’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसका अर्थ है कि आपसी व्यापार में एक देश को हमेशा फ़ायदा रहे; भारत के साथ ब्रिटेन हमेशा व्यापार अधिशेष की अवस्था में रहता था।
32‘होम चार्जेज’ में क्या शामिल था?
उत्तर देखिए
उत्तर: ब्रितानी अफ़सरों और व्यापारियों द्वारा घर भेजी गई निजी रकम, भारतीय बाहरी क़र्ज़ों पर ब्याज और ब्रितानी अफ़सरों की पेंशन।
33पहले विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्र और केंद्रीय शक्तियाँ कौन-कौन थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: मित्र राष्ट्र थे ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस; केंद्रीय शक्तियाँ थीं जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और ऑटोमन तुर्की।
34पहले विश्वयुद्ध में कितने लोग मारे गए और कितने घायल हुए?
उत्तर देखिए
उत्तर: 90 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए और 2 करोड़ घायल हुए।
351921 में ब्रिटेन में बेरोज़गारी की स्थिति क्या थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1921 में हर पाँच में से एक ब्रिटिश मज़दूर के पास काम नहीं था।
36बृहत उत्पादन के विख्यात प्रणेता कौन थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: कार निर्माता हेनरी फ़ोर्ड।
37हेनरी फ़ोर्ड को असेंबली लाइन का विचार कहाँ से मिला?
उत्तर देखिए
उत्तर: शिकागो के एक बूचड़ख़ाने की असेंबली लाइन से।
38बृहत उत्पादन पद्धति से बनी पहली कार कौन-सी थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: टी-मॉडल कार।
39फ़ोर्ड ने मज़दूरों का वेतन कब और कितना बढ़ाया?
उत्तर देखिए
उत्तर: जनवरी 1914 से वेतन दोगुना यानी 5 डॉलर प्रतिदिन कर दिया।
40‘हायर-परचेज़’ व्यवस्था क्या थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसमें लोग सामान क़र्ज़ पर ख़रीदते थे और उसकी क़ीमत साप्ताहिक या मासिक किस्तों में चुकाई जाती थी।
411919 और 1929 में अमेरिका में कितनी कारों का उत्पादन होता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1919 में 20 लाख कारें, जो 1929 में बढ़कर 50 लाख कार प्रतिवर्ष से भी ऊपर जा पहुँचीं।
42महामंदी कब शुरू हुई और कब तक चली?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसकी शुरुआत 1929 से हुई और यह संकट तीस के दशक के मध्य तक बना रहा।
431933 तक अमेरिका में कितने बैंक बंद हो चुके थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: 4,000 से ज़्यादा बैंक।
441929 से 1932 के बीच अमेरिका में कितनी कंपनियाँ चौपट हुईं?
उत्तर देखिए
उत्तर: तक़रीबन 1,10,000 कंपनियाँ।
451928 से 1934 के बीच भारत में गेहूँ की क़ीमत कितनी गिरी?
उत्तर देखिए
उत्तर: 50 प्रतिशत।
46कच्चे पटसन की क़ीमतों में कितनी गिरावट आई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा।
47महामंदी के चरम के समय भारत में कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1931 में, जब मंदी अपने चरम पर थी, महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया।
48दूसरे विश्वयुद्ध में कितने लोग मारे गए?
उत्तर देखिए
उत्तर: क़रीब 6 करोड़ लोग, जो 1939 की वैश्विक जनसंख्या का लगभग 3 प्रतिशत था।
49ब्रेटन वुड्स सम्मेलन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: जुलाई 1944 में, अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर।
50ब्रेटन वुड्स सम्मेलन का औपचारिक नाम क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन।
51ब्रेटन वुड्स की ‘जुड़वाँ संतान’ किन्हें कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ़.) को।
52विश्व बैंक और आई.एम.एफ़. ने कब काम करना शुरू किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1947 में।
53‘वीटो’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: निषेधाधिकार; इस अधिकार के सहारे एक ही सदस्य की असहमति किसी भी प्रस्ताव को ख़ारिज करने का आधार बन जाती है।
541950 से 1970 के बीच विश्व व्यापार की विकास दर कितनी थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: सालाना 8 प्रतिशत से भी ज़्यादा।
55‘आयात शुल्क’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: किसी दूसरे देश से आने वाली चीज़ों पर सीमा, बंदरगाह या हवाई अड्डे पर वसूला जाने वाला शुल्क।
56बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं और पहली ऐसी कंपनियाँ कब बनीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: एक साथ बहुत सारे देशों में व्यवसाय करने वाली कंपनी को बहुराष्ट्रीय कंपनी कहते हैं; शुरुआती बहुराष्ट्रीय कंपनियों की स्थापना 1920 के दशक में की गई थी।
57जी-77 क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह उन विकासशील देशों का समूह है जिन्होंने नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO) की माँग करते हुए संगठन बनाया।
58स्थिर और परिवर्तनशील विनिमय दर में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: स्थिर विनिमय दर में उतार-चढ़ावों को नियंत्रित करने के लिए सरकारों को हस्तक्षेप करना पड़ता है, जबकि परिवर्तनशील विनिमय दर मुद्राओं की माँग-आपूर्ति के आधार पर सरकारी हस्तक्षेप के बिना घटती-बढ़ती रहती है।
59चीन विश्व अर्थव्यवस्था से अलग-थलग कब से था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1949 की क्रांति के बाद से।
60महामंदी के समय भारत किस धातु का निर्यात करने लगा और किस अर्थशास्त्री ने उस पर टिप्पणी की?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत सोने का निर्यात करने लगा; प्रसिद्ध अर्थशास्त्री कीन्स का मानना था कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिली।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान-प्रदान के दो उदाहरण दीजिए — एक एशिया से और एक अमेरिका से।
उत्तर देखिए
उत्तर: एशिया का उदाहरण यह है कि सिल्क मार्ग के ज़रिये चीनी रेशम और पॉटरी तथा भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े और मसाले दुनिया के दूसरे भागों में पहुँचते थे, और उसी रास्ते से बौद्ध धर्म भी कई दिशाओं में फैला। अमेरिका का उदाहरण यह है कि कोलंबस के वहाँ पहुँचने के बाद आलू, मक्का, टमाटर, मिर्च, सोया, मूँगफली और शकरकंद जैसी फ़सलें यूरोप और एशिया में पहुँचीं।
2सिल्क मार्ग किन-किन क्षेत्रों को जोड़ते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: ये मार्ग ज़मीन या समुद्र से होकर गुज़रते थे और न केवल एशिया के विशाल क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ते थे बल्कि एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका से भी जोड़ते थे। इन्हीं रास्तों से चीनी पॉटरी तथा भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े व मसाले पश्चिम जाते थे और वापसी में सोने-चाँदी जैसी क़ीमती धातुएँ यूरोप से एशिया पहुँचती थीं।
3आलू की फ़सल ने आयरलैंड में क्या तबाही मचाई?
उत्तर देखिए
उत्तर: आयरलैंड के ग़रीब काश्तकार आलू पर इस हद तक निर्भर हो चुके थे कि जब 1840 के दशक के मध्य में किसी बीमारी के कारण आलू की फ़सल ख़राब हो गई तो लाखों लोग भुखमरी के कारण मौत के मुँह में चले गए। 1845 से 1849 के बीच पड़े इस अकाल में लगभग 10,00,000 लोग मारे गए और इससे दोगुने लोग काम की तलाश में घर-बार छोड़कर चले गए।
4‘एल डोराडो’ क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: सत्रहवीं सदी के आते-आते पूरे यूरोप में दक्षिणी अमेरिका की धन-संपदा के बारे में तरह-तरह के क़िस्से बनने लगे थे। इन्हीं किंवदंतियों की बदौलत वहाँ के लोग एल डोराडो को सोने का शहर मानने लगे और उसकी खोज में बहुत सारे खोजी अभियान शुरू किए गए।
5सोलहवीं सदी में दुनिया के ‘सिकुड़ने’ का क्या मतलब है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसका मतलब यह है कि दुनिया आकार में छोटी नहीं हुई, बल्कि दूरियाँ छोटी हो गईं। जब यूरोपीय जहाज़ियों ने एशिया तक का समुद्री रास्ता ढूँढ़ लिया और वे अमेरिका तक जा पहुँचे तो जो जगहें पहले एक-दूसरे के लिए अनजान थीं वे आपस में जुड़ गईं, और वहाँ का सामान, लोग, विचार तथा बीमारियाँ एक-दूसरे तक पहुँचने लगीं।
6उन्नीसवीं सदी में यूरोप से लोग अमेरिका क्यों भागने लगे?
उत्तर देखिए
उत्तर: उन्नीसवीं सदी तक यूरोप में ग़रीबी और भूख का ही साम्राज्य था, शहरों में बेहिसाब भीड़ थी और बीमारियों का बोलबाला था। इसके अलावा धार्मिक टकराव आम थे और धार्मिक असंतुष्टों को कड़ा दंड दिया जाता था, इसलिए हज़ारों लोग यूरोप से भागकर अमेरिका जाने लगे।
7विश्व व्यापार का केंद्र यूरोप की ओर कैसे खिसक गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि पंद्रहवीं सदी से चीन ने दूसरे देशों के साथ अपने संबंध कम करना शुरू कर दिए और वह दुनिया से अलग-थलग पड़ने लगा। चीन की घटती भूमिका और अमेरिका के बढ़ते महत्त्व के चलते विश्व व्यापार का केंद्र पश्चिम की ओर खिसकने लगा और अब यूरोप ही विश्व व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र बन गया।
8श्रम के प्रवाह पर व्यापार और पूँजी के मुक़ाबले ज़्यादा बंदिशें क्यों लगाई जाती थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पाठ्यपुस्तक बताती है कि वस्तुओं या पूँजी की आवाजाही के मुक़ाबले श्रमिकों की आवाजाही पर प्राय: ज़्यादा शर्तें और बंदिशें लगाई जाती थीं। इसका कारण यह था कि सामान और पैसा तो देश के भीतर आकर वहाँ की अर्थव्यवस्था को फ़ायदा पहुँचाते थे, जबकि बाहर से आने वाले मज़दूरों को स्थानीय लोगों की नौकरियों और मज़दूरी के लिए ख़तरा माना जाता था।
9कॉर्न लॉ क्यों बनाया गया था?
उत्तर देखिए
उत्तर: अठारहवीं सदी के आख़िरी दशकों में ब्रिटेन की आबादी तेज़ी से बढ़ रही थी, इसलिए भोजन की माँग बढ़ी और कृषि उत्पाद महँगे होने लगे। बड़े भूस्वामियों के दबाव में सरकार ने मक्का के आयात पर पाबंदी लगा दी और इन्हीं क़ानूनों को कॉर्न लॉ कहा जाता था।
10कॉर्न लॉ हटने के बाद ब्रिटिश किसानों का क्या हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: कॉर्न लॉ के निरस्त होने के बाद बहुत कम क़ीमत पर खाद्य पदार्थों का आयात होने लगा और आयातित माल की लागत ब्रिटेन में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों से भी कम थी। इसलिए ब्रिटिश किसानों की हालत बिगड़ने लगी, विशाल भूभागों पर खेती बंद हो गई, हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए और वे गाँवों से उजड़ कर शहरों या दूसरे देशों में जाने लगे।
111890 तक विश्व की कृषि व्यवस्था कैसे बदल चुकी थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1890 तक एक वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था सामने आ चुकी थी, जिसमें भोजन किसी आसपास के गाँव या क़स्बे से नहीं बल्कि हज़ारों मील दूर से आने लगा था। अब अपने खेतों पर ख़ुद काम करने वाले किसान ही खाद्य पदार्थ पैदा नहीं कर रहे थे, बल्कि यह काम ऐसे औद्योगिक मज़दूर करने लगे थे जो हाल ही में वहाँ आए थे और ऐसे खेतों में काम कर रहे थे जहाँ महज़ एक पीढ़ी पहले जंगल रहे होंगे।
12पंजाब की ‘नहर बस्ती’ क्या थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: ब्रिटिश भारतीय सरकार ने पंजाब की अर्द्ध-रेगिस्तानी परती ज़मीनों को उपजाऊ बनाने के लिए नहरों का जाल बिछा दिया ताकि निर्यात के लिए गेहूँ और कपास की खेती की जा सके। नयी नहरों की सिंचाई वाले इलाक़ों में पंजाब के अन्य स्थानों के लोगों को लाकर बसाया गया और उनकी बस्तियों को केनाल कॉलोनी यानी नहर बस्ती कहा जाता था।
13रेफ़्रिजरेशन की तकनीक से पहले मांस का व्यापार क्यों नहीं होता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1870 के दशक तक अमेरिका से यूरोप को मांस का निर्यात नहीं किया जाता था और केवल जिंदा जानवर ही भेजे जाते थे जिन्हें यूरोप ले जाकर काटा जाता था। जिंदा जानवर बहुत ज़्यादा जगह घेरते थे, बहुत सारे लंबे सफ़र में मर जाते थे या बीमार पड़ जाते थे और बहुतों का वज़न गिर जाता था, इसलिए मांस खाना एक महँगा सौदा था।
14अफ़्रीका के कुछ देशों की सीमाएँ सीधी लकीर जैसी क्यों हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अफ़्रीका पर क़ब्ज़े की कोशिश में लगी प्रतिद्वंद्वी यूरोपीय ताक़तों ने अपने-अपने इलाक़े बाँटने के लिए प्राय: लकीरें खींचने का ही सहारा लिया था। 1885 में यूरोप के ताक़तवर देशों की बर्लिन में एक बैठक हुई जिसमें अफ़्रीका के नक़्शे पर इसी तरह लकीरें खींचकर उसको आपस में बाँट लिया गया था।
15भौगोलिक अन्वेषणों का साम्राज्यवाद से क्या संबंध था?
उत्तर देखिए
उत्तर: सर हेनरी मॉर्टन स्टैनली जैसे अन्वेषकों ने अफ़्रीका जाकर स्थानीय क़बीलों के साथ लड़ाइयाँ लड़ीं, वहाँ के भूदृश्य की पड़ताल की और विभिन्न इलाक़ों के नक़्शे बनाए, जिनसे बाद में अफ़्रीका को जीतने में मदद मिली। इसीलिए पाठ्यपुस्तक कहती है कि ऐसे भौगोलिक अन्वेषण केवल वैज्ञानिक जानकारियाँ इकट्ठा करने की सामान्य इच्छा से प्रेरित नहीं होते थे, उनका साम्राज्यवादी योजनाओं से सीधा संबंध होता था।
16अफ़्रीका के लोग यूरोपीयों के यहाँ वेतन पर काम क्यों नहीं करना चाहते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्राचीन काल से ही अफ़्रीका में ज़मीन की कोई कमी नहीं रही जबकि वहाँ की आबादी बहुत कम थी, और सदियों तक अफ़्रीकियों की ज़िंदगी ज़मीन और पालतू पशुओं के सहारे ही चलती रही थी। वहाँ पैसे या वेतन पर काम करने का चलन ही नहीं था, इसलिए जिनके पास ज़मीन और पशु दोनों थे उन्हें वेतन के लिए काम करने की कोई ज़रूरत समझ में नहीं आती थी।
17गिरमिटिया मज़दूरों की भर्ती में एजेंट क्या-क्या धोखाधड़ी करते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: एजेंट भावी आप्रवासियों को फुसलाने के लिए झूठी जानकारियाँ देते थे और उन्हें यह नहीं बताया जाता था कि कहाँ जाना है, यात्रा के साधन क्या होंगे, क्या काम करना होगा और वहाँ के हालात कैसे होंगे। बहुत सारे आप्रवासियों को तो यह भी नहीं बताया जाता था कि उन्हें लंबी समुद्री यात्रा पर जाना है, और अगर कोई मज़दूर राजी नहीं होता था तो एजेंट उसका अपहरण तक कर लेते थे।
18अनुबंध व्यवस्था को ‘नयी दास प्रथा’ क्यों कहा गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: बागानों में पहुँचने के बाद मज़दूरों को पता चलता था कि वे जैसी उम्मीद कर रहे थे वहाँ वैसे हालात नहीं हैं; वहाँ की जीवन एवं कार्य स्थितियाँ कठोर थीं और मज़दूरों के पास क़ानूनी अधिकार कहने भर को भी नहीं थे। बहुत सारे मज़दूर भाग कर जंगलों में चले जाते थे और पकड़े जाने पर उन्हें भारी सज़ा दी जाती थी, इसीलिए इस व्यवस्था को नयी दास प्रथा कहा गया।
19‘चटनी म्यूज़िक’ क्या है और यह किस बात का उदाहरण है?
उत्तर देखिए
उत्तर: त्रिनिदाद और गुयाना का यह मशहूर संगीत भारतीय आप्रवासियों के वहाँ पहुँचने के बाद सामने आई रचनात्मक अभिव्यक्तियों का उदाहरण है। यह उस सांस्कृतिक समागम का प्रमाण है जिसमें अलग-अलग स्थानों की चीज़ें आपस में घुल-मिल जाती थीं, उनकी मूल पहचान गुम हो जाती थी और बिलकुल नया रूप सामने आता था।
20शिकारीपुरी श्रॉफ़ और नट्टूकोट्टई चेट्टियार कौन थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: ये भारतीय बैंकर और व्यापारी समुदाय थे जो मध्य एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यातोन्मुखी खेती के लिए क़र्ज़े देते थे। इसके लिए वे या तो अपनी जेब से पैसा लगाते थे या यूरोपीय बैंकों से क़र्ज़ लेते थे, और उनके पास दूर-दूर तक पैसे पहुँचाने की एक व्यवस्थित पद्धति होती थी।
21हैदराबादी सिंधी व्यापारियों ने विदेशों में क्या किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: हैदराबादी सिंधी व्यापारी यूरोपीय उपनिवेशों से भी आगे तक जा निकले और 1860 के दशक से उन्होंने दुनिया भर के बंदरगाहों पर अपने बड़े-बड़े एम्पोरियम खोल दिए। इन दुकानों में सैलानियों को आकर्षक स्थानीय और विदेशी चीज़ें मिलती थीं और यह एक फलता-फूलता कारोबार था क्योंकि सुरक्षित तथा आरामदेह जलपोतों के आ जाने से सैलानियों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही थी।
22अफ़ीम का त्रिकोणीय व्यापार क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: ब्रिटेन की सरकार भारत में अफ़ीम की खेती करवाती थी और उसे चीन को निर्यात कर देती थी। अफ़ीम के निर्यात से जो पैसा मिलता था उसके बदले चीन से ही चाय और दूसरे पदार्थों का आयात किया जाता था।
23‘बहुपक्षीय बंदोबस्त’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: बहुपक्षीय बंदोबस्त वह व्यवस्था है जिसमें एक देश के मुक़ाबले दूसरे देश को होने वाले घाटे की भरपाई किसी तीसरे देश के साथ व्यापार में मुनाफ़ा कमा कर की जाती है। ब्रिटेन भारत से मिलने वाले व्यापार अधिशेष के सहारे दूसरे देशों के साथ होने वाले अपने व्यापारिक घाटे की भरपाई कर लेता था।
24पहला विश्वयुद्ध ‘पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध’ क्यों कहलाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस युद्ध में दुनिया के सबसे अगुआ औद्योगिक राष्ट्र एक-दूसरे से जूझ रहे थे और शत्रुओं को नेस्तनाबूद करने के लिए उनके पास बेहिसाब आधुनिक औद्योगिक शक्ति इकट्ठा हो चुकी थी। इसमें मशीनगनों, टैंकों, हवाई जहाज़ों और रासायनिक हथियारों का भयानक पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, और ये सभी चीज़ें आधुनिक विशाल उद्योगों की देन थीं।
25पहले विश्वयुद्ध ने अमेरिका की स्थिति कैसे बदल दी?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस युद्ध के लिए ब्रिटेन को अमेरिकी बैंकों और अमेरिकी जनता से भारी क़र्ज़ा लेना पड़ा, जिसके कारण इस युद्ध ने अमेरिका को क़र्ज़दार की बजाय कर्ज़दाता देश बना दिया। युद्ध के बाद दूसरे देशों में अमेरिका व उसके नागरिकों की संपत्तियों की क़ीमत अमेरिका में दूसरे देशों की संपदाओं से कहीं ज़्यादा हो चुकी थी।
26युद्ध के दौरान यूरोप में औरतों की स्थिति में क्या बदलाव आया?
उत्तर देखिए
उत्तर: युद्ध की ज़रूरतों के मद्देनज़र पूरे के पूरे समाजों को बदल दिया गया। मर्द मोर्चे पर जाने लगे तो उन कामों को सँभालने के लिए घर की औरतों को बाहर आना पड़ा जिन्हें अब तक केवल मर्दों का ही काम माना जाता था।
27असेंबली लाइन पर मज़दूर का जीवन कैसा था?
उत्तर देखिए
उत्तर: असेंबली लाइन पर मज़दूरों को एक ही काम मशीनी ढंग से बार-बार करते रहना होता था और काम की रफ़्तार इस बात से तय होती थी कि कन्वेयर बेल्ट किस रफ़्तार से चलती है। कन्वेयर बेल्ट के साथ खड़े होने के बाद कोई मज़दूर अपने काम में ढील करने या कुछ पल के लिए भी अवकाश लेने का जोखिम नहीं उठा सकता था, और तो और, इस व्यवस्था में मज़दूर अपने साथियों से बातचीत भी नहीं कर सकते थे।
28फ़ोर्ड ने वेतन क्यों बढ़ाया और उसका उन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: असेंबली लाइन की थकान के कारण बहुत सारे मज़दूरों ने काम छोड़ दिया था, इसलिए फ़ोर्ड ने हताश होकर जनवरी 1914 से वेतन दोगुना यानी 5 डॉलर प्रतिदिन कर दिया और साथ ही अपने कारख़ानों में ट्रेड यूनियन गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी। तनख़्वाह बढ़ाने से उनके मुनाफ़े में जो कमी आई थी उसकी भरपाई करने के लिए वे अपनी असेंबली लाइन की रफ़्तार बार-बार बढ़ाने लगे, जिससे मज़दूरों पर काम का बोझ लगातार बढ़ता रहा।
29महामंदी का सबसे बुरा असर कृषि क्षेत्र पर क्यों पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: महामंदी का समय और असर सब देशों में एक जैसा नहीं था, लेकिन आमतौर पर कृषि क्षेत्रों और समुदायों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि औद्योगिक उत्पादों की तुलना में खेतिहर उत्पादों की क़ीमतों में ज़्यादा भारी और ज़्यादा समय तक कमी बनी रही।
30बंगाल के जूट उत्पादकों पर महामंदी का क्या असर पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर: बंगाल के जूट उत्पादक कच्चा पटसन उगाते थे जिससे कारख़ानों में टाट की बोरियाँ बनाई जाती थीं, और जब टाट का निर्यात बंद हो गया तो कच्चे पटसन की क़ीमतों में 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा गिरावट आ गई। जिन काश्तकारों ने बेहतर आमदनी की उम्मीद में क़र्ज़ें ले लिए थे उनकी हालत भी उपज का सही मोल न मिलने के कारण ख़राब थी और वे दिनोंदिन और क़र्ज़ में डूबते जा रहे थे।
31महामंदी शहरी भारत के लिए इतनी दुखदाई क्यों नहीं रही?
उत्तर देखिए
उत्तर: क़ीमतें गिरते जाने के बावजूद शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों की हालत ठीक रही जिनकी आय निश्चित थी, जैसे शहर में रहने वाले ज़मींदार जिन्हें अपनी ज़मीन पर बँधा-बँधाया भाड़ा मिलता था, या मध्यवर्गीय वेतनभोगी कर्मचारी। इसके अलावा राष्ट्रवादी खेमे के दबाव में उद्योगों की रक्षा के लिए सीमा शुल्क बढ़ा दिए गए थे जिससे औद्योगिक क्षेत्र में भी निवेश में तेज़ी आई।
32दूसरा विश्वयुद्ध पहले के युद्धों से किस मामले में अलग था?
उत्तर देखिए
उत्तर: अब तक के युद्धों में मोर्चे पर मरने वालों की संख्या ज़्यादा होती थी, पर इस युद्ध में ऐसे लोग ज़्यादा मरे जो किसी मोर्चे पर लड़ नहीं रहे थे। यूरोप और एशिया के विशाल भूभाग तबाह हुए और कई शहर हवाई बमबारी या लगातार गोलाबारी के कारण मिट्टी में मिल गए।
33ब्रेटन वुड्स समझौते का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जुलाई 1944 में अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में जिस फ़्रेमवर्क पर सहमति बनी, उसे ब्रेटन वुड्स समझौता कहा जाता है। इसका उद्देश्य था कि औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं पूर्ण रोज़गार बनाए रखा जाए, और इसी समझौते से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक की स्थापना हुई।
34आई.एम.एफ़. और विश्व बैंक के काम में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ़.) की स्थापना सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने के लिए की गई थी। विश्व बैंक यानी अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक का गठन युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतज़ाम करने के वास्ते किया गया था।
35जी-77 देशों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ज़्यादातर विकासशील देशों को पचास और साठ के दशक में पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तेज़ प्रगति से कोई लाभ नहीं हुआ था। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO) के लिए आवाज़ उठाई और समूह 77 यानी जी-77 के रूप में संगठित हो गए।
36बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों में अपने संयंत्र क्यों लगाने लगीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसके पीछे आंशिक रूप से इस बात का हाथ था कि ज़्यादातर सरकारें बाहर से आने वाली चीज़ों पर भारी आयात शुल्क वसूल करती थीं। इसके कारण बड़ी कंपनियों को अपने संयंत्र उन्हीं देशों में लगाने पड़ते थे जहाँ वे अपने उत्पाद बेचना चाहती थीं और उन्हें ‘घरेलू उत्पादकों’ के रूप में काम करना पड़ता था।
37स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था क्यों विफल हो गई?
उत्तर देखिए
उत्तर: साठ के दशक से ही विदेशों में अपनी गतिविधियों की भारी लागत ने अमेरिका की वित्तीय और प्रतिस्पर्धी क्षमता को कमज़ोर कर दिया था और अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रधान मुद्रा के रूप में पहले जितना सम्मानित नहीं रह गया था। सोने की तुलना में डॉलर की क़ीमत गिरने लगी थी, इसलिए अंतत: स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था विफल हो गई और प्रवाहमयी या अस्थिर विनिमय दर की व्यवस्था शुरू की गई।
38हमारे ज़्यादातर टेलीविज़न, मोबाइल फ़ोन और खिलौने चीन में क्यों बनते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: चीन जैसे देशों में वेतन तुलनात्मक रूप से कम थे, इसलिए विश्व बाज़ारों पर अपना प्रभुत्व क़ायम करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने वहाँ जमकर निवेश करना शुरू कर दिया। यह चीनी अर्थव्यवस्था की अल्प लागत अर्थव्यवस्था और ख़ास तौर से वहाँ के कम वेतनों का नतीजा है।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1आधुनिक युग से पहले भी दुनिया आपस में जुड़ी हुई थी — तीन प्रमाण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- 3,000 ईसा पूर्व में समुद्री तटों पर होने वाले व्यापार के माध्यम से सिंधु घाटी की सभ्यता उस इलाक़े से जुड़ी हुई थी जिसे आज हम पश्चिमी एशिया के नाम से जानते हैं।
- हज़ार साल से भी ज़्यादा समय से मालदीव के समुद्र में पाई जाने वाली कौड़ियाँ चीन और पूर्वी अफ़्रीका तक पहुँचती रही हैं, और इन्हें पैसे या मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
- बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं के दूर-दूर तक पहुँचने का इतिहास सातवीं सदी तक ढूँढा जा सकता है और तेरहवीं सदी के बाद तो इनके प्रसार को साफ़ देखा जा सकता है।
2सिल्क मार्ग केवल व्यापार का नहीं, संस्कृति का भी मार्ग था — समझाइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पाठ्यपुस्तक कहती है कि व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलती थीं। इसके तीन प्रमाण हैं —
- शुरुआती काल के ईसाई मिशनरी निश्चय ही इसी मार्ग से एशिया में आते होंगे।
- कुछ सदी बाद मुस्लिम धर्मोपदेशक भी इसी रास्ते से दुनिया में फैले।
- इससे भी बहुत पहले पूर्वी भारत में उपजा बौद्ध धर्म सिल्क मार्ग की विविध शाखाओं से ही कई दिशाओं में फैल चुका था।
3भोजन की यात्रा के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- माना जाता है कि नूडल्स चीन से पश्चिम में पहुँचे और वहीं से स्पैघेत्ती का जन्म हुआ; एक और संभावना यह है कि पास्ता अरब यात्रियों के साथ पाँचवीं सदी में सिसली पहुँचा।
- आलू, सोया, मूँगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च और शकरकंद लगभग पाँच सौ साल पहले हमारे पूर्वजों के पास नहीं थे; ये तब आए जब कोलंबस अमेरिका पहुँचा।
- साधारण से आलू का इस्तेमाल शुरू करने पर यूरोप के ग़रीबों की ज़िंदगी आमूल रूप से बदल गई, उनका भोजन बेहतर हो गया और उनकी औसत उम्र बढ़ने लगी।
4यूरोपीय लोग अमेरिका को इतनी आसानी से कैसे जीत पाए?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- यूरोपीय सेनाएँ केवल अपनी सैनिक ताक़त के दम पर नहीं जीतती थीं; स्पेनिश विजेताओं के सबसे शक्तिशाली हथियारों में परंपरागत क़िस्म का सैनिक हथियार तो कोई था ही नहीं।
- उनका असली हथियार चेचक जैसे कीटाणु थे, और लाखों साल से दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण अमेरिका के लोगों के शरीर में इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी।
- एक बार संक्रमण शुरू होने के बाद यह बीमारी पूरे महाद्वीप में फैल गई और उसने पूरे के पूरे समुदायों को ख़त्म कर डाला, जिससे घुसपैठियों की जीत का रास्ता आसान होता चला गया।
5तीनों प्रवाहों की व्याख्या करते हुए भारत से एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- व्यापार का प्रवाह मुख्य रूप से वस्तुओं, जैसे कपड़ा या गेहूँ, के व्यापार तक ही सीमित था। भारत का उदाहरण यह है कि उन्नीसवीं सदी में भारत से ब्रिटेन को कच्चा कपास और चीन को अफ़ीम भेजी जाती थी।
- श्रम के प्रवाह में लोग काम या रोज़गार की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। भारत का उदाहरण यह है कि लाखों गिरमिटिया मज़दूर त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम, मॉरिशस और फ़िजी भेजे गए।
- पूँजी का प्रवाह वह है जिसे अल्प या दीर्घ अवधि के लिए दूर-दराज़ के इलाक़ों में निवेश कर दिया जाता है। भारत का उदाहरण यह है कि ब्रिटेन ने भारत में रेलवे बिछाने और पंजाब में नहरें बनाने के लिए पूँजी लगाई।
6उन्नीसवीं सदी में यूरोप का पेट भरने के लिए बाक़ी दुनिया में क्या-क्या करना पड़ा?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, दुनिया के हर हिस्से में ब्रिटेन का पेट भरने के लिए ज़मीनों को साफ़ करके खेती की जाने लगी।
- खेतिहर इलाक़ों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए रेलवे बिछाई गई, ज़्यादा माल ढुलाई के लिए नयी गोदियाँ बनाई गईं और पुरानी गोदियों को फैलाया गया।
- नयी ज़मीनों पर खेती करने के लिए दूसरे इलाक़ों के लोगों को लाकर बसाया गया, नए घर बनाए गए और नयी बस्तियाँ बसाई गईं; इन सारे कामों के लिए लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों से पूँजी आई और मज़दूरों की कमी वाले इलाक़ों में लोगों को ले जाकर बसाया गया।
7तकनीक ने खाद्य उपलब्धता को कैसे बदला — दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पहला उदाहरण रेलवे और तेज़ जलपोतों का है। औपनिवेशीकरण के कारण यातायात के साधनों में भारी सुधार हुए — तेज़ चलने वाली रेलगाड़ियाँ बनीं, बोगियों का भार कम किया गया और जलपोतों का आकार बढ़ा, जिससे कोई भी उत्पाद खेतों से दूर-दूर के बाज़ारों में कम लागत पर पहुँचाया जा सकने लगा।
- दूसरा उदाहरण रेफ़्रिजरेशन का है। पानी के जहाज़ों में रेफ़्रिजरेशन की तकनीक स्थापित होने से जल्दी ख़राब होने वाली चीज़ों को भी लंबी यात्राओं पर ले जाया जा सकता था, इसलिए जानवरों की बजाय उनका मांस ही यूरोप भेजा जाने लगा।
- इससे समुद्री यात्रा का ख़र्च कम हुआ, मांस के दाम गिरे और यूरोप के ग़रीबों को पहले की तरह केवल आलू और ब्रेड नहीं, बल्कि मांसाहार, मक्खन और अंडे भी मिलने लगे।
8अफ़्रीका में मज़दूर पाने के लिए यूरोपीयों ने कौन-कौन से हथकंडे अपनाए?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- उन पर भारी भरकम कर लाद दिए गए जिनका भुगतान केवल तभी किया जा सकता था जब करदाता बागानों या खदानों में काम करता हो।
- काश्तकारों को उनकी ज़मीन से हटाने के लिए उत्तराधिकार क़ानून बदल दिए गए और यह व्यवस्था कर दी गई कि अब परिवार के केवल एक ही सदस्य को पैतृक संपत्ति मिलेगी, ताकि परिवार के बाक़ी लोगों को श्रम बाज़ार में ढकेला जा सके।
- खानकर्मियों को बाड़ों में बंद कर दिया गया और उनके खुलेआम घूमने-फिरने पर पाबंदी लगा दी गई।
9भारतीय अनुबंधित श्रमिक अपना घर छोड़ने पर मजबूर क्यों हुए?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- उन्नीसवीं सदी के मध्य में उनके इलाक़ों में कुटीर उद्योग ख़त्म हो रहे थे और ज़मीन का भाड़ा बढ़ गया था।
- खानों और बागानों के लिए ज़मीनों को साफ़ किया जा रहा था, जिससे ग़रीबों के जीवन पर गहरा असर पड़ा।
- वे बँटाई पर ज़मीन तो ले लेते थे लेकिन उसका भाड़ा नहीं चुका पाते थे, जिससे उन पर क़र्ज़ा चढ़ने लगा और काम की तलाश में उन्हें अपने घर-बार छोड़ने पड़े।
10गिरमिटिया मज़दूरों ने विदेश में अपनी संस्कृति कैसे बनाई?
उत्तर देखिए
उत्तर: मज़दूरों ने ज़िंदगी बसर करने के अपने तरीक़े ढूँढ़ निकाले और बहुतों ने अपनी पुरानी तथा नयी संस्कृतियों का सम्मिश्रण करते हुए आत्माभिव्यक्ति के नए रूप खोज लिए। इसके तीन उदाहरण हैं —
- त्रिनिदाद में मुहर्रम के सालाना जुलूस को एक विशाल उत्सवी मेले का रूप दे दिया गया जिसे ‘होसे’ नाम दिया गया, और उसमें सभी धर्मों व नस्लों के मज़दूर हिस्सा लेते थे।
- रास्ताफ़ारियानवाद नामक विद्रोही धर्म में, जिसे जमैका के रैगे गायक बॉब मार्ले ने ख्याति के शिखर पर पहुँचाया, भारतीय आप्रवासियों और कैरीबियाई द्वीपसमूह के बीच के संबंधों की झलक देखी जा सकती है।
- त्रिनिदाद और गुयाना में मशहूर ‘चटनी म्यूज़िक’ भी भारतीय आप्रवासियों के वहाँ पहुँचने के बाद सामने आई रचनात्मक अभिव्यक्तियों का उदाहरण है।
11उन्नीसवीं सदी में भारतीय कपड़ा उद्योग का पतन कैसे हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- औद्योगीकरण के बाद ब्रिटेन में कपास का उत्पादन बढ़ने लगा, इसलिए वहाँ के उद्योगपतियों ने सरकार पर दबाव डाला कि वह कपास के आयात पर रोक लगाए और स्थानीय उद्योगों की रक्षा करे।
- फलस्वरूप ब्रिटेन में आयातित कपड़ों पर सीमा शुल्क थोप दिए गए और वहाँ महीन भारतीय कपास का आयात कम होने लगा।
- ब्रिटिश बाज़ारों से बेदख़ल हो जाने के बाद भारतीय कपड़ों को दूसरे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भी भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। इसीलिए भारत के निर्यात में सूती कपड़े का हिस्सा 1800 के 30 प्रतिशत से घटकर 1815 में 15 प्रतिशत और 1870 तक केवल 3 प्रतिशत रह गया।
12‘व्यापार अधिशेष’ और ‘होम चार्जेज’ को समझाइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ब्रिटेन से जो माल भारत भेजा जाता था उसकी क़ीमत भारत से भेजे जाने वाले माल की क़ीमत से बहुत ज़्यादा होती थी, इसलिए भारत के साथ ब्रिटेन हमेशा ‘व्यापार अधिशेष’ की अवस्था में रहता था। इसका मतलब है कि आपसी व्यापार में हमेशा ब्रिटेन को ही फ़ायदा रहता था।
- ब्रिटेन इस मुनाफ़े के सहारे दूसरे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक घाटे की भरपाई कर लेता था, जिसे बहुपक्षीय बंदोबस्त कहा जाता है।
- ब्रिटेन के व्यापार से जो अधिशेष हासिल होता था उसी से तथाकथित ‘होम चार्जेज’ यानी देसी ख़र्चों का निबटारा होता था, जिसमें ब्रितानी अफ़सरों और व्यापारियों द्वारा अपने घर में भेजी गई निजी रकम, भारतीय बाहरी क़र्ज़ों पर ब्याज और ब्रितानी अफ़सरों की पेंशन शामिल थी।
13पहले विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था क्यों नहीं सँभल पाई?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- युद्ध से पहले ब्रिटेन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, इसलिए युद्ध के बाद सबसे लंबा संकट उसे ही झेलना पड़ा।
- जिस समय ब्रिटेन युद्ध से जूझ रहा था उसी समय भारत और जापान में उद्योग विकसित होने लगे थे, इसलिए युद्ध के बाद भारतीय बाज़ार में पहले वाली वर्चस्वशाली स्थिति प्राप्त करना उसके लिए बहुत मुश्किल हो गया।
- युद्ध के ख़र्चे की भरपाई के लिए ब्रिटेन ने अमेरिका से जम कर क़र्ज़ें लिए थे, इसलिए युद्ध ख़त्म होने तक वह भारी विदेशी क़र्ज़ों में दब चुका था, और 1921 में हर पाँच में से एक ब्रिटिश मज़दूर के पास काम नहीं था।
14बृहत उत्पादन ने अमेरिकी जीवन को कैसे बदला?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- बृहत उत्पादन पद्धति ने इंजीनियरिंग आधारित चीज़ों की लागत और क़ीमत में कमी ला दी, इसलिए बेहतर वेतन के चलते अब बहुत सारे मज़दूर भी कार जैसी टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ ख़रीद सकते थे।
- 1919 में अमेरिका में 20 लाख कारों का उत्पादन होता था जो 1929 में बढ़कर 50 लाख कार प्रतिवर्ष से भी ऊपर जा पहुँचा; इसके साथ ही लोग फ़्रिज, वॉशिंग मशीन, रेडियो और ग्रामोफ़ोन प्लेयर्स भी ख़रीदने लगे।
- ये सब चीज़ें ‘हायर-परचेज़’ व्यवस्था के तहत क़र्ज़ पर ख़रीदी जाती थीं और उनकी क़ीमत साप्ताहिक या मासिक किस्तों में चुकाई जाती थी; यहाँ तक कि घरों का निर्माण या ख़रीदारी भी क़र्ज़ पर ही की जा रही थी।
15महामंदी के दौरान अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था कैसे धराशायी हो गई?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- क़ीमतों में कमी और मंदी की आशंका को देखते हुए अमेरिकी बैंकों ने घरेलू क़र्ज़ें देना बंद कर दिया और जो क़र्ज़ें दिए जा चुके थे उनकी वसूली तेज़ कर दी गई।
- आमदनी में गिरावट आने पर बहुत सारे परिवार क़र्ज़ें चुकाने में नाकामयाब हो गए जिसके चलते उनके मकान, कार और सारी ज़रूरी चीज़ें कुर्क कर ली गईं।
- निवेश से अपेक्षित लाभ न पा सकने, क़र्ज़ें वसूल न कर पाने और जमाकर्ताओं की जमा पूँजी न लौटा पाने के कारण हज़ारों बैंक दिवालिया हो गए; 1933 तक 4,000 से ज़्यादा बैंक बंद हो चुके थे और 1929 से 1932 के बीच तक़रीबन 1,10,000 कंपनियाँ चौपट हो चुकी थीं।
16युद्धोत्तर बंदोबस्त के दो अहम सबक़ कौन-से थे?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पहला सबक़ यह था कि बृहत उत्पादन पर आधारित किसी औद्योगिक समाज को व्यापक उपभोग के बिना क़ायम नहीं रखा जा सकता, और व्यापक उपभोग के लिए आमदनी का काफ़ी ज़्यादा और स्थिर होना आवश्यक है।
- स्थिर आय के लिए पूर्ण रोज़गार ज़रूरी था, लेकिन बाज़ार पूर्ण रोज़गार की गारंटी नहीं दे सकता; इसलिए क़ीमत, उपज और रोज़गार में आने वाले उतार-चढ़ावों को नियंत्रित करने के लिए सरकार का दख़ल ज़रूरी था।
- दूसरा सबक़ बाहरी दुनिया के साथ आर्थिक संबंधों के बारे में था — पूर्ण रोज़गार का लक्ष्य केवल तभी हासिल किया जा सकता है जब सरकार के पास वस्तुओं, पूँजी और श्रम की आवाजाही को नियंत्रित करने की ताक़त उपलब्ध हो।
17अनौपनिवेशीकरण के बाद भी नवस्वाधीन देश आर्थिक रूप से स्वतंत्र क्यों नहीं हो पाए?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ये सभी देश ग़रीबी या संसाधनों की कमी से जूझ रहे थे और उनकी अर्थव्यवस्थाएँ तथा समाज लंबे समय तक चले औपनिवेशिक शासन के कारण अस्त-व्यस्त हो चुके थे।
- आई.एम.एफ़. और विश्व बैंक का गठन औद्योगिक देशों की ज़रूरतों के लिए हुआ था, इसलिए ये संस्थान भूतपूर्व उपनिवेशों में ग़रीबी और विकास की कमी से निपटने में दक्ष नहीं थे। विडंबना यह थी कि नवस्वाधीन राष्ट्रों को भी ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की मदद लेनी पड़ी जिन पर भूतपूर्व औपनिवेशिक शक्तियों का ही वर्चस्व था।
- जो देश ब्रिटेन और फ़्रांस के उपनिवेश रह चुके थे वहाँ के महत्त्वपूर्ण संसाधनों, जैसे खनिज संपदा और ज़मीन पर अभी भी ब्रिटिश और फ़्रांसीसी कंपनियों का ही नियंत्रण था और वे इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं थीं।
18जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतानों की प्रतिक्रिया क्यों कहा जा सकता है?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- विश्व बैंक और आई.एम.एफ़. को ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतान कहा जाता है, और इन संस्थानों की निर्णय प्रक्रिया पर पश्चिमी औद्योगिक देशों का नियंत्रण रहता है; अमेरिका तो इनके किसी भी फ़ैसले को वीटो कर सकता है।
- इन संस्थानों से विकासशील देशों को कोई ख़ास लाभ नहीं हुआ और उन्हें पचास तथा साठ के दशक में पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तेज़ प्रगति से भी कोई फ़ायदा नहीं मिला।
- इसीलिए उन्होंने जी-77 के रूप में संगठित होकर एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की माँग की, जिसमें उन्हें अपने संसाधनों पर सही नियंत्रण मिले, विकास के लिए अधिक सहायता मिले, कच्चे माल के सही दाम मिलें और अपने तैयार मालों को विकसित देशों के बाज़ारों में बेचने के लिए बेहतर पहुँच मिले।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (4 अंक)
1कॉर्न लॉ के समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार के फ़ैसले के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: अठारहवीं सदी के आख़िरी दशकों में ब्रिटेन की आबादी तेज़ी से बढ़ने पर कृषि उत्पाद महँगे हो गए थे और बड़े भूस्वामियों के दबाव में सरकार ने मक्का के आयात पर पाबंदी लगा दी थी, जिसे कॉर्न लॉ कहा जाता था। खाद्य पदार्थों की ऊँची क़ीमतों से परेशान उद्योगपतियों और शहरी बाशिंदों ने सरकार को इसे फ़ौरन समाप्त करने पर मजबूर कर दिया। इसके निम्नलिखित प्रभाव पड़े —
- कॉर्न लॉ के निरस्त हो जाने के बाद बहुत कम क़ीमत पर खाद्य पदार्थों का आयात किया जाने लगा और आयातित खाद्य पदार्थों की लागत ब्रिटेन में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों से भी कम थी।
- फलस्वरूप ब्रिटिश किसानों की हालत बिगड़ने लगी क्योंकि वे आयातित माल की क़ीमत का मुक़ाबला नहीं कर सकते थे। विशाल भूभागों पर खेती बंद हो गई और हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए।
- गाँवों से उजड़ कर वे या तो शहरों में या दूसरे देशों में जाने लगे। उन्नीसवीं सदी में यूरोप के लगभग पाँच करोड़ लोग अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जाकर बस गए।
- दूसरी तरफ़ ब्रिटेन में उपभोग का स्तर बढ़ गया और खाद्य पदार्थों का और भी ज़्यादा मात्रा में आयात होने लगा। इसलिए पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, दुनिया के हर हिस्से में ब्रिटेन का पेट भरने के लिए ज़मीनों को साफ़ करके खेती की जाने लगी।
- इसके लिए रेलवे बिछाई गई, नयी गोदियाँ बनाई गईं, नयी बस्तियाँ बसाई गईं, लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों से पूँजी आई और मज़दूरों की कमी वाले इलाक़ों में लोगों को ले जाकर बसाया गया।
निष्कर्षइस प्रकार एक देश के एक क़ानून ने पूरी दुनिया की खेती, यातायात और आबादी की बसावट बदल दी। 1890 तक एक वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था सामने आ चुकी थी।
2अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट के आने के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: उन्नीसवीं सदी के आख़िर में यूरोपीय ताक़तें अफ़्रीका के विशाल भूक्षेत्र और खनिज भंडारों को देखकर वहाँ बागानी खेती और खदानों का दोहन करना चाहती थीं, लेकिन वहाँ के लोग तनख़्वाह पर काम नहीं करना चाहते थे क्योंकि उनके पास ज़मीन और पालतू पशुओं की कोई कमी नहीं थी। ऐसे समय में रिंडरपेस्ट नामक पशु बीमारी ने स्थिति पूरी तरह बदल दी।
- यह बीमारी सबसे पहले 1880 के दशक के आख़िरी सालों में दिखाई दी। पूर्वी अफ़्रीका में एरिट्रिया पर हमला कर रहे इतालवी सैनिकों का पेट भरने के लिए एशियाई देशों से जानवर लाए जाते थे, और यह बीमारी ब्रिटिश अधिपत्य वाले एशियाई देशों से आए उन्हीं जानवरों के ज़रिये वहाँ पहुँची।
- अफ़्रीका के पूर्वी हिस्से से महाद्वीप में दाख़िल होने वाली यह बीमारी ‘जंगल की आग’ की तरह पश्चिमी अफ़्रीका की तरफ़ बढ़ने लगी। 1892 में यह अटलांटिक तट तक जा पहुँची और पाँच साल बाद केप तक भी पहुँच गई।
- रिंडरपेस्ट ने अपने रास्ते में आने वाले 90 प्रतिशत मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया। पशुओं के ख़त्म हो जाने से अफ़्रीकियों के रोज़ी-रोटी के साधन ही ख़त्म हो गए।
- अपनी सत्ता को और मज़बूत करने तथा अफ़्रीकियों को श्रम बाज़ार में ढकेलने के लिए वहाँ के बागान मालिकों, खान मालिकों और औपनिवेशिक सरकारों ने बचे-खुचे पशु भी अपने क़ब्ज़े में ले लिए।
- बचे-खुचे पशु संसाधनों पर क़ब्ज़े से यूरोपीय उपनिवेशकारों को पूरे अफ़्रीका को जीतने व ग़ुलाम बना लेने का बेहतरीन मौक़ा हाथ लग गया।
निष्कर्षइस तरह एक पशु-बीमारी ने वह काम कर दिया जो यूरोपीय सेनाएँ और कठोर क़ानून मिलकर भी नहीं कर पा रहे थे — उसने स्वतंत्र अफ़्रीकी पशुपालकों को मज़दूर बना दिया।
3विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पहला विश्वयुद्ध मानव सभ्यता के इतिहास का पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था, जिसमें मशीनगनों, टैंकों, हवाई जहाज़ों और रासायनिक हथियारों का भयानक पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इस युद्ध में 90 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए और 2 करोड़ घायल हुए। इसके निम्नलिखित प्रभाव पड़े —
- मृतकों और घायलों में से ज़्यादातर कामकाजी उम्र के लोग थे, इसलिए इस महाविनाश के कारण यूरोप में कामकाज के लायक़ लोगों की संख्या बहुत कम रह गई।
- परिवार के सदस्य घट जाने से युद्ध के बाद परिवारों की आय भी गिर गई।
- मर्द मोर्चे पर जाने लगे तो उन कामों को सँभालने के लिए घर की औरतों को बाहर आना पड़ा जिन्हें अब तक केवल मर्दों का ही काम माना जाता था। इस तरह समाज में औरतों की भूमिका बदल गई।
- युद्ध की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उद्योगों का पुनर्गठन किया गया और पूरे के पूरे समाजों को बदल दिया गया।
- युद्ध के बाद जब यह उछाह शांत होने लगा तो उत्पादन गिरने लगा और बेरोज़गारी बढ़ने लगी; 1921 में हर पाँच में से एक ब्रिटिश मज़दूर के पास काम नहीं था।
निष्कर्षइस प्रकार युद्ध ने केवल जानें ही नहीं लीं, उसने यूरोप की काम करने की क्षमता, परिवारों की आय और समाज में स्त्री-पुरुष की भूमिकाओं, तीनों को स्थायी रूप से बदल दिया।
4भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बीसवीं सदी की शुरुआत तक वैश्विक अर्थव्यवस्था इतनी एकीकृत हो चुकी थी कि दुनिया के एक हिस्से में पैदा होने वाले संकट की कँपकँपाहट बाक़ी हिस्सों तक भी पहुँच जाती थी। औपनिवेशिक भारत कृषि वस्तुओं का निर्यातक और तैयार मालों का आयातक बन चुका था, इसलिए महामंदी ने भारतीय व्यापार को फ़ौरन प्रभावित किया।
- 1928 से 1934 के बीच देश के आयात-निर्यात घट कर लगभग आधे रह गए। जब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतें गिरने लगीं तो यहाँ भी क़ीमतें नीचे आ गईं; इसी दौरान भारत में गेहूँ की क़ीमत 50 प्रतिशत गिर गई।
- शहरी निवासियों के मुक़ाबले किसानों और काश्तकारों को ज़्यादा नुक़सान हुआ। यद्यपि कृषि उत्पादों की क़ीमत तेज़ी से नीचे गिरी लेकिन सरकार ने लगान वसूली में छूट देने से साफ़ इनकार कर दिया।
- सबसे बुरी मार उन काश्तकारों पर पड़ी जो विश्व बाज़ार के लिए उपज पैदा करते थे। बंगाल के जूट उत्पादकों का उदाहरण सबसे स्पष्ट है — टाट का निर्यात बंद होने पर कच्चे पटसन की क़ीमतों में 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा गिरावट आ गई।
- पूरे देश में काश्तकार पहले से भी ज़्यादा क़र्ज़ में डूब गए। उनकी बचत ख़त्म हो चुकी थी, ज़मीन सूदख़ोरों के पास गिरवी पड़ी थी और घर के गहने-ज़ेवर बिक चुके थे। मंदी के इन्हीं सालों में भारत सोने का निर्यात करने लगा, जिससे ब्रिटेन की आर्थिक दशा तो सुधरी लेकिन भारतीय किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ।
- दूसरी ओर यह मंदी शहरी भारत के लिए इतनी दुखदाई नहीं रही। निश्चित आय वाले लोगों, जैसे शहरी ज़मींदारों और मध्यवर्गीय वेतनभोगी कर्मचारियों की हालत ठीक रही, और राष्ट्रवादी दबाव में सीमा शुल्क बढ़ाए जाने से औद्योगिक निवेश में तेज़ी आई।
निष्कर्ष1931 में मंदी अपने चरम पर थी और ग्रामीण भारत असंतोष व उथल-पुथल के दौर से गुज़र रहा था। उसी समय महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया — यानी विश्व अर्थव्यवस्था के संकट ने सीधे भारत की राजनीति को प्रभावित किया।
5बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित करने के फ़ैसले के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: एक साथ बहुत सारे देशों में व्यवसाय करने वाली कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनी कहा जाता है। इनकी स्थापना 1920 के दशक में शुरू हुई थी और पचास तथा साठ के दशक में इनका विश्वव्यापी प्रसार हुआ। सत्तर के दशक के आख़िरी सालों से ये कंपनियाँ एशिया के ऐसे देशों में उत्पादन केंद्रित करने लगीं जहाँ वेतन कम थे। इसके निम्नलिखित प्रभाव पड़े —
- औद्योगिक विश्व बेरोज़गारी की समस्या में फँसने लगा। सत्तर के दशक के मध्य से वहाँ बेरोज़गारी बढ़ने लगी और नब्बे के दशक के प्रारंभिक वर्षों तक काफ़ी बेरोज़गारी बनी रही।
- चीन 1949 की क्रांति के बाद विश्व अर्थव्यवस्था से अलग-थलग था, लेकिन नयी आर्थिक नीतियों और सोवियत खेमे के बिखराव के बाद वह तथा बहुत सारे अन्य देश दोबारा विश्व अर्थव्यवस्था का अंग बन गए।
- चीन जैसे देशों में वेतन तुलनात्मक रूप से कम थे, इसलिए विश्व बाज़ारों पर प्रभुत्व क़ायम करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने वहाँ जमकर निवेश करना शुरू कर दिया।
- इसी कारण आज हमारे ज़्यादातर टेलीविज़न, मोबाइल फ़ोन और खिलौने चीन में बने होते हैं। यह चीनी अर्थव्यवस्था की अल्प लागत और वहाँ के कम वेतनों का नतीजा है।
- उद्योगों को कम वेतन वाले देशों में ले जाने से वैश्विक व्यापार और पूँजी प्रवाहों पर भी असर पड़ा।
निष्कर्षपिछले दो दशक में भारत, चीन और ब्राज़ील आदि देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आए भारी बदलावों के कारण दुनिया का आर्थिक भूगोल पूरी तरह बदल चुका है।
6महामंदी के कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: आर्थिक महामंदी की शुरुआत 1929 से हुई और यह संकट तीस के दशक के मध्य तक बना रहा। इस दौरान दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों के उत्पादन, रोज़गार, आय और व्यापार में भयानक गिरावट दर्ज की गई। इसके प्रमुख कारण ये थे —
- युद्धोत्तर विश्व अर्थव्यवस्था पहले से ही बहुत कमज़ोर थी।
- कृषि क्षेत्र में अति उत्पादन की समस्या बनी हुई थी। क़ीमतें गिरीं और किसानों की आय घटने लगी तो आमदनी बढ़ाने के लिए किसान और ज़्यादा उत्पादन करने लगे ताकि कम क़ीमत पर ही सही, ज़्यादा माल बेचकर वे अपना आय स्तर बनाए रख सकें। फलस्वरूप बाज़ार में कृषि उत्पादों की आमद और बढ़ गई, क़ीमतें और नीचे चली गईं और ख़रीदारों के अभाव में उपज पड़ी-पड़ी सड़ने लगी।
- 1920 के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से क़र्ज़ें लेकर अपनी निवेश संबंधी ज़रूरतों को पूरा किया था। संकट का संकेत मिलते ही अमेरिकी उद्यमियों के होश उड़ गए। 1928 के पहले छह माह तक विदेशों में अमेरिका का क़र्ज़ा एक अरब डॉलर था, जो साल भर के भीतर घटकर केवल चौथाई रह गया। जो देश अमेरिकी क़र्ज़ों पर सबसे ज़्यादा निर्भर थे उनके सामने गहरा संकट आ खड़ा हुआ।
- अमेरिकी पूँजी के लौट जाने से यूरोप में कई बड़े बैंक धराशायी हो गए और कई देशों की मुद्रा की क़ीमत बुरी तरह गिर गई; इस झटके से ब्रिटिश पाउंड भी नहीं बच पाया।
- अमेरिकी सरकार इस महामंदी से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आयातित पदार्थों पर दो गुना सीमा शुल्क वसूल करने लगी। इस फ़ैसले ने तो विश्व व्यापार की कमर ही तोड़ दी।
निष्कर्षइस तरह कृषि की अति उत्पादन की समस्या, अमेरिकी क़र्ज़ों का अचानक खिंच जाना और ऊँचे सीमा शुल्क — तीनों मिलकर एक ऐसा संकट बन गए जिसका दुनिया ने पहले कभी अनुभव नहीं किया था।
7भारत से गिरमिटिया मज़दूरों को विदेश ले जाने की व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: उन्नीसवीं सदी में भारत और चीन के लाखों मज़दूरों को बागानों, खदानों और सड़क व रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए दूर-दूर के देशों में ले जाया जाता था। भारतीय अनुबंधित श्रमिकों को ख़ास तरह के अनुबंध के तहत ले जाया जाता था जिसमें शर्त होती थी कि यदि वे अपने मालिक के बागानों में पाँच साल काम कर लेंगे तो स्वदेश लौट सकते हैं।
- वे कहाँ से जाते थे — भारत के ज़्यादातर अनुबंधित श्रमिक मौजूदा पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य भारत और तमिलनाडु के सूखे इलाक़ों से जाते थे।
- वे क्यों जाते थे — इन इलाक़ों में कुटीर उद्योग ख़त्म हो रहे थे, ज़मीन का भाड़ा बढ़ गया था और खानों व बागानों के लिए ज़मीनों को साफ़ किया जा रहा था। वे बँटाई पर ज़मीन तो ले लेते थे लेकिन भाड़ा नहीं चुका पाते थे, इसलिए उन पर क़र्ज़ा चढ़ने लगा।
- वे कहाँ जाते थे — उन्हें मुख्य रूप से कैरीबियाई द्वीप समूह (त्रिनिदाद, गुयाना और सूरीनाम), मॉरिशस और फ़िजी ले जाया जाता था। तमिल आप्रवासी सीलोन और मलाया जाकर काम करते थे, और बहुत सारे श्रमिकों को असम के चाय बागानों में भी ले जाया जाता था।
- भर्ती में धोखाधड़ी — मज़दूरों की भर्ती मालिकों के एजेंट करते थे जिन्हें कमीशन मिलता था। एजेंट भावी आप्रवासियों को फुसलाने के लिए झूठी जानकारियाँ देते थे और बहुतों को यह भी नहीं बताया जाता था कि उन्हें लंबी समुद्री यात्रा पर जाना है। अगर कोई मज़दूर राजी नहीं होता था तो एजेंट उसका अपहरण तक कर लेते थे।
- वहाँ के हालात — बागानों में पहुँचने के बाद मज़दूरों को पता चलता था कि वे जैसी उम्मीद कर रहे थे वैसे हालात नहीं हैं। जीवन एवं कार्य स्थितियाँ कठोर थीं और उनके पास क़ानूनी अधिकार कहने भर को भी नहीं थे। इसीलिए इस व्यवस्था को ‘नयी दास प्रथा’ कहा गया।
निष्कर्षबीसवीं सदी के शुरुआती सालों से भारतीय राष्ट्रवादी नेता इस अपमानजनक और क्रूर व्यवस्था का विरोध करने लगे और इसी दबाव के कारण 1921 में इसे ख़त्म कर दिया गया।
8उन्नीसवीं सदी में भारतीय व्यापार का स्वरूप कैसे बदला?
उत्तर देखिए
उत्तर: उन्नीसवीं सदी में भारत के व्यापार का पूरा ढाँचा उलट गया। पहले भारत तैयार माल भेजता था, बाद में वह केवल कच्चा माल भेजने वाला देश बन गया।
- पहले भारत में पैदा होने वाली महीन कपास से बने कपड़े का यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता था।
- औद्योगीकरण के बाद ब्रिटेन के उद्योगपतियों ने सरकार पर दबाव डाला कि वह कपास के आयात पर रोक लगाए, इसलिए ब्रिटेन में आयातित कपड़ों पर सीमा शुल्क थोप दिए गए और भारतीय कपड़ों को दूसरे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भी भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
- इसका असर आँकड़ों में साफ़ दिखता है। सन् 1800 के आसपास भारत के निर्यात में सूती कपड़े का हिस्सा 30 प्रतिशत था, जो 1815 में घट कर 15 प्रतिशत रह गया और 1870 तक केवल 3 प्रतिशत रह गया।
- दूसरी ओर कच्चे माल का निर्यात बढ़ता गया। 1812 से 1871 के बीच कच्चे कपास का निर्यात 5 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुँच गया। नील का भी कई दशक तक बड़े पैमाने पर निर्यात होता रहा और 1820 के दशक से चीन को बड़ी मात्रा में अफ़ीम का निर्यात भी किया जाने लगा।
- भारत के साथ ब्रिटेन हमेशा ‘व्यापार अधिशेष’ की अवस्था में रहता था, यानी आपसी व्यापार में हमेशा ब्रिटेन को ही फ़ायदा रहता था। ब्रिटेन इस मुनाफ़े के सहारे दूसरे देशों के साथ होने वाले अपने व्यापारिक घाटे की भरपाई कर लेता था, और इसी अधिशेष से ‘होम चार्जेज’ यानी ब्रितानी अफ़सरों की निजी रकम, भारतीय क़र्ज़ों का ब्याज और उनकी पेंशन चुकाई जाती थी।
निष्कर्षइस तरह भारत ब्रिटेन के घाटे की भरपाई करते हुए उन्नीसवीं सदी की विश्व अर्थव्यवस्था का रूप तय करने में एक अहम भूमिका अदा कर रहा था, लेकिन इसका कोई लाभ भारत को नहीं मिल रहा था।
9हेनरी फ़ोर्ड की असेंबली लाइन और बृहत उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1920 के दशक की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी ख़ासियत बृहत उत्पादन (Mass Production) का चलन थी और कार निर्माता हेनरी फ़ोर्ड इसके विख्यात प्रणेता थे।
- उन्होंने शिकागो के एक बूचड़ख़ाने की असेंबली लाइन की तर्ज़ पर डेट्रॉयट के अपने कार कारख़ाने में आधुनिक असेंबली लाइन स्थापित की। वहाँ मरे हुए जानवरों को एक कन्वेयर बेल्ट पर रख दिया जाता था और दूसरे सिरे पर खड़े मांस विक्रेता अपने हिस्से का मांस उठा कर निकलते जाते थे।
- असेंबली लाइन पर मज़दूरों को एक ही काम मशीनी ढंग से बार-बार करते रहना होता था और काम की रफ़्तार कन्वेयर बेल्ट की रफ़्तार से तय होती थी। कोई मज़दूर काम में ढील करने या कुछ पल के लिए भी अवकाश लेने का जोखिम नहीं उठा सकता था और मज़दूर आपस में बातचीत भी नहीं कर सकते थे।
- इसका नतीजा यह हुआ कि फ़ोर्ड के कारख़ाने से हर तीन मिनट में एक कार तैयार होकर निकलने लगी, जो पहले की पद्धतियों के मुक़ाबले कई गुना ज़्यादा रफ़्तार थी। टी-मॉडल नामक कार बृहत उत्पादन पद्धति से बनी पहली कार थी।
- थकान के कारण बहुत सारे मज़दूरों ने काम छोड़ दिया, इसलिए फ़ोर्ड ने जनवरी 1914 से वेतन दोगुना यानी 5 डॉलर प्रतिदिन कर दिया और साथ ही अपने कारख़ानों में ट्रेड यूनियन गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी। मुनाफ़े की भरपाई के लिए वे असेंबली लाइन की रफ़्तार बार-बार बढ़ाने लगे।
- बृहत उत्पादन ने चीज़ों की लागत और क़ीमत कम कर दी, इसलिए मज़दूर भी कार जैसी टिकाऊ वस्तुएँ ख़रीदने लगे। 1919 में अमेरिका में 20 लाख कारों का उत्पादन होता था, जो 1929 में बढ़कर 50 लाख कार प्रतिवर्ष से भी ऊपर जा पहुँचा।
निष्कर्षअसेंबली लाइन ने उत्पादन को सस्ता और तेज़ तो बना दिया, लेकिन उसने मज़दूर को मशीन का एक पुर्ज़ा भी बना दिया।
10ब्रेटन वुड्स व्यवस्था की स्थापना, कार्य और अंत का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: दो महायुद्धों के आर्थिक अनुभवों से सीख लेते हुए युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह रखा गया कि औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं पूर्ण रोज़गार बनाए रखा जाए।
- स्थापना — जुलाई 1944 में अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में इस फ़्रेमवर्क पर सहमति बनी।
- संस्थाएँ — सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ़.) की स्थापना की गई, और युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतज़ाम करने के वास्ते अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक यानी विश्व बैंक का गठन किया गया। इन्हें ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतान भी कहा जाता है और इन्होंने 1947 में औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया।
- नियंत्रण — इन संस्थानों की निर्णय प्रक्रिया पर पश्चिमी औद्योगिक देशों का नियंत्रण रहता है और अमेरिका इनके किसी भी फ़ैसले को वीटो कर सकता है।
- कामकाज — यह व्यवस्था निश्चित विनिमय दरों पर आधारित थी, जिसमें राष्ट्रीय मुद्राएँ डॉलर से और डॉलर सोने से बँधा हुआ था। इस व्यवस्था ने पश्चिमी औद्योगिक राष्ट्रों और जापान के लिए व्यापार तथा आय में वृद्धि के एक अप्रतिम युग का सूत्रपात किया — 1950 से 1970 के बीच विश्व व्यापार की विकास दर सालाना 8 प्रतिशत से भी ज़्यादा रही, वैश्विक आय लगभग 5 प्रतिशत की दर से बढ़ी और बेरोज़गारी औसतन 5 प्रतिशत से भी कम रही।
- अंत — साठ के दशक से विदेशों में अपनी गतिविधियों की भारी लागत ने अमेरिका की वित्तीय और प्रतिस्पर्धी क्षमता को कमज़ोर कर दिया, सोने की तुलना में डॉलर की क़ीमत गिरने लगी और अंतत: स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था विफल हो गई। उसकी जगह प्रवाहमयी या अस्थिर विनिमय दर की व्यवस्था शुरू की गई।
निष्कर्षब्रेटन वुड्स व्यवस्था के टूटने के बाद ही आज के वैश्वीकरण की शुरुआत हुई, जिसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कम वेतन वाले देशों में उत्पादन करने लगीं।
भाग ङ — स्रोत-आधारित प्रश्न (4 अंक)
स्रोत 1
“यूरोपीय सेनाएँ केवल अपनी सैनिक ताक़त के दम पर नहीं जीतती थीं। स्पेनिश विजेताओं के सबसे शक्तिशाली हथियारों में परंपरागत क़िस्म का सैनिक हथियार तो कोई था ही नहीं। यह हथियार तो चेचक जैसे कीटाणु थे जो स्पेनिश सैनिकों और अफ़सरों के साथ वहाँ जा पहुँचे थे। लाखों साल से दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण अमेरिका के लोगों के शरीर में यूरोप से आने वाली इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी।”
प्रश्न: (क) स्पेनिश विजेताओं का सबसे शक्तिशाली हथियार क्या था? (1) (ख) अमेरिका के लोग इस हथियार से क्यों नहीं बच पाए? (1) (ग) यह हथियार बंदूक़ से भी ज़्यादा ख़तरनाक क्यों साबित हुआ? (2)
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) स्पेनिश विजेताओं का सबसे शक्तिशाली हथियार चेचक जैसे कीटाणु थे, जो उनके सैनिकों और अफ़सरों के साथ अमेरिका पहुँचे थे। (ख) लाखों साल से दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण अमेरिका के लोगों के शरीर में यूरोप से आने वाली इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी। (ग) बंदूक़ों को तो ख़रीद कर या छीन कर हमलावरों के ख़िलाफ़ भी इस्तेमाल किया जा सकता था, पर चेचक जैसी बीमारियों के मामले में ऐसा नहीं किया जा सकता था, क्योंकि हमलावरों के पास उससे बचाव का तरीक़ा भी था और उनके शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता भी विकसित हो चुकी थी। एक बार संक्रमण शुरू होने के बाद यह बीमारी पूरे महाद्वीप में फैल गई और उसने पूरे के पूरे समुदायों को ख़त्म कर डाला, जिससे घुसपैठियों की जीत का रास्ता आसान होता चला गया।
स्रोत 2 — एक गिरमिटिया मज़दूर की आपबीती
”…तमाम कोशिशों के बावजूद मैं उन कामों को ठीक से नहीं कर पाया जो मुझे सौंपे गए थे। … कुछ ही दिनों के भीतर मेरे हाथ सब जगह से छिल गए और मैं हफ़्ते भर तक काम पर नहीं जा पाया जिसके लिए मुझे सज़ा दी गई और 14 दिन जेल में काटने पड़े। … नए आप्रवासियों को काम बहुत भारी पड़ता था और वे दिन भर में अपना काम पूरा नहीं कर पाते थे। … अगर काम संतोषजनक ढंग से पूरा न हुआ तो तनख़्वाह भी काट ली जाती थी। इसीलिए बहुत सारे लोगों को उनका पूरा वेतन नहीं मिल पाता है और उन्हें तरह-तरह से सज़ा दी जाती है।” — राम नारायण तिवारी, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, आप्रवासन शाखा, 1916
प्रश्न: (क) राम नारायण तिवारी कौन थे? (1) (ख) उन्हें जेल क्यों जाना पड़ा? (1) (ग) इस स्रोत के आधार पर बताइए कि अनुबंध व्यवस्था को ‘नयी दास प्रथा’ क्यों कहा गया? (2)
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) राम नारायण तिवारी भारत से गए एक गिरमिटिया मज़दूर थे, जिन्होंने बीसवीं सदी की शुरुआत में डेमेरारा में दस साल काम किया था। (ख) काम करते हुए उनके हाथ सब जगह से छिल गए और वे हफ़्ते भर तक काम पर नहीं जा पाए, जिसके लिए उन्हें सज़ा दी गई और 14 दिन जेल में काटने पड़े। (ग) इस स्रोत से पता चलता है कि नयी जगह की जीवन एवं कार्य स्थितियाँ कठोर थीं और मज़दूरों के पास क़ानूनी अधिकार कहने भर को भी नहीं थे। काम पूरा न होने पर तनख़्वाह काट ली जाती थी, बीमार पड़ने पर भी सज़ा दी जाती थी और जेल भेज दिया जाता था। मज़दूर अपनी मर्ज़ी से न काम छोड़ सकते थे न लौट सकते थे, इसीलिए इस व्यवस्था को ‘नयी दास प्रथा’ का नाम दिया गया।
स्रोत 3 — बंगाल के कवि की पंक्तियाँ
चलो भाइयों, नक़द की उम्मीद में और ज़्यादा पटसन तुम उगाओ लागत और क़र्ज़ें में पिसकर नाउम्मीदी पाओ सारी पूँजी लगा-फँसाकर फ़सल खड़ी कर जाओ …घर पर बैठे बनिये देंगे पाँच रुपये मन भाव
प्रश्न: (क) यह कविता किस काल की स्थिति का वर्णन करती है? (1) (ख) पटसन उगाने वालों की क़ीमतों में कितनी गिरावट आई थी? (1) (ग) इस कविता के आधार पर बताइए कि महामंदी ने भारतीय किसान को कैसे तोड़ दिया। (2)
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) यह कविता 1929 से शुरू हुई महामंदी के काल की स्थिति का वर्णन करती है, जब भारत में कृषि उत्पादों की क़ीमतें भारी गिरावट में थीं। (ख) बंगाल के जूट उत्पादक कच्चा पटसन उगाते थे और जब टाट का निर्यात बंद हो गया तो कच्चे पटसन की क़ीमतों में 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा गिरावट आ गई। (ग) कविता बताती है कि किसान बेहतर आमदनी की उम्मीद में और ज़्यादा फ़सल उगाता था, पर लागत और क़र्ज़ में पिसकर उसे केवल नाउम्मीदी ही मिलती थी। इस बीच घर बैठे बनिये मामूली दाम पर उसकी फ़सल ख़रीद लेते थे, यानी मुनाफ़ा बिचौलिये का होता था और नुक़सान किसान का। पूरे देश में काश्तकार पहले से भी ज़्यादा क़र्ज़ में डूब गए, उनकी बचत ख़त्म हो गई, ज़मीन सूदख़ोरों के पास गिरवी पड़ गई और घर के गहने-ज़ेवर बिक गए।
स्रोत 4 — बॉक्स 1, ‘जैविक’ युद्ध?
“न्यू इंग्लैंड स्थित मैसाचुसेट्स बे कॉलोनी के पहले गवर्नर जॉन विनथॉर्प ने मई 1634 में लिखा था कि छोटी चेचक उपनिवेशकारों के लिए ईश्वर का वरदान है: ’…देशी जनता … छोटी चेचक के कारण लगभग पूरी ख़त्म हो चुकी थी। इस तरह परमेश्वर ने हमारी मिल्कीयत पर हमें मालिकाना दे दिया।’”
प्रश्न: (क) यह उद्धरण किसका है और कब का है? (1) (ख) ‘देशी जनता’ से किसका आशय है? (1) (ग) इस उद्धरण से उपनिवेशवाद के बारे में क्या पता चलता है? (2)
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) यह उद्धरण न्यू इंग्लैंड स्थित मैसाचुसेट्स बे कॉलोनी के पहले गवर्नर जॉन विनथॉर्प का है और मई 1634 का है। (ख) ‘देशी जनता’ से आशय अमेरिका के मूल निवासियों यानी अमेरिकन इंडियनों से है, जो चेचक के कारण लगभग पूरी तरह ख़त्म हो चुके थे। (ग) इससे पता चलता है कि उपनिवेशकार मूल निवासियों की मौत को अपनी विजय का धार्मिक औचित्य मानते थे। वे यह मानते थे कि यह ईश्वर की इच्छा है कि उनकी ज़मीन पर उपनिवेशकारों का मालिकाना हो। यह उपनिवेशवाद के उस क्रूर पहलू को दिखाता है जिसमें एक पूरे समुदाय के विनाश को ‘वरदान’ कहा गया।
भाग च — मानचित्र और चित्र-आधारित अभ्यास
ध्यान दीजिए — इस अध्याय से बोर्ड परीक्षा में सामान्यत: मानचित्र पर स्थान अंकित करने वाला प्रश्न नहीं पूछा जाता। मानचित्र के प्रश्न अध्याय 2 (भारत में राष्ट्रवाद) से आते हैं। फिर भी इस अध्याय को समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन-सा स्थान कहाँ है।
अपने एटलस में ये स्थान ढूँढ़िए और उन्हें अपनी कॉपी में एक तालिका बनाकर लिखिए —
| स्थान | इस अध्याय में क्यों आया |
|---|---|
| सिंधु घाटी और पश्चिमी एशिया | 3,000 ईसा पूर्व में समुद्री व्यापार से जुड़े हुए थे |
| मालदीव | यहाँ की कौड़ियाँ चीन और पूर्वी अफ़्रीका तक जाती थीं |
| सिसली (इटली) | पास्ता अरब यात्रियों के साथ यहाँ पहुँचा |
| आयरलैंड | 1845–1849 का भयानक आलू अकाल |
| पेरू और मैक्सिको | यहाँ की खानों से निकली चाँदी ने यूरोप की संपदा बढ़ाई |
| एरिट्रिया (पूर्वी अफ़्रीका) | यहीं से रिंडरपेस्ट अफ़्रीका में दाख़िल हुई |
| केप (दक्षिण अफ़्रीका) | 1897 तक रिंडरपेस्ट यहाँ तक पहुँच गई |
| त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम | कैरीबियाई द्वीप समूह, जहाँ भारतीय गिरमिटिया मज़दूर भेजे गए |
| मॉरिशस और फ़िजी | यहाँ भी भारतीय अनुबंधित श्रमिक भेजे गए |
| सीलोन और मलाया | तमिल आप्रवासी यहाँ जाकर काम करते थे |
| असम | यहाँ के चाय बागानों में भी अनुबंधित श्रमिक ले जाए जाते थे |
| पंजाब | नहर बस्तियाँ (केनाल कॉलोनी) यहीं बसाई गईं |
| बर्लिन (जर्मनी) | 1885 की वह बैठक जिसमें अफ़्रीका बाँटा गया |
| डेट्रॉयट और शिकागो (अमेरिका) | फ़ोर्ड का कारख़ाना और वह बूचड़ख़ाना जिससे असेंबली लाइन का विचार आया |
| ब्रेटन वुड्स, न्यू हैम्पशर (अमेरिका) | जुलाई 1944 का ऐतिहासिक सम्मेलन |
चित्रों पर आधारित अभ्यास (पाठ्यपुस्तक के चित्र देखकर उत्तर दीजिए) —
1चित्र 5 (गुलामों की ख़रीद-फ़रोख़्त, न्यू ऑर्लियंस, 1851) देखकर बताइए कि ग़ुलामों को अच्छे कपड़े पहना कर बाज़ार में क्यों लाया जाता था।
उत्तर देखिए
अच्छी क़ीमत पाने के लिए।
2चित्र 10 (औपनिवेशिक अफ़्रीका का मानचित्र) देखकर बताइए कि किन-किन देशों के उपनिवेश वहाँ दिखाई देते हैं।
उत्तर देखिए
बेल्जियम, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, पुर्तगाल और स्पेन।
3चित्र 15 (शिनाख़्त के लिए गिरमिटिया मज़दूरों के चित्र) देखकर बताइए कि इससे मज़दूरों की स्थिति के बारे में क्या पता चलता है।
उत्तर देखिए
मालिकों के लिए इन मज़दूरों के नाम नहीं बल्कि उनकी संख्या का ही महत्त्व होता था।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
1सिल्क मार्ग का नाम कैसे पड़ा? (1)
2आयरिश आलू अकाल में लगभग कितने लोग मारे गए? (1)
3रिंडरपेस्ट ने कितने प्रतिशत मवेशियों को मारा? (1)
4ब्रेटन वुड्स सम्मेलन कब और कहाँ हुआ? (1)
5सिल्क मार्ग केवल व्यापार का नहीं, संस्कृति का भी मार्ग था — समझाइए। (3)
6भारतीय अनुबंधित श्रमिक अपना घर छोड़ने पर मजबूर क्यों हुए? (3)
7भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी के प्रभाव की व्याख्या कीजिए। (4)
8स्रोत 2 (गिरमिटिया मज़दूर की आपबीती) पर आधारित प्रश्न। (4)
9आधुनिक युग से पहले भी दुनिया जुड़ी थी — कोई तीन प्रमाण दीजिए। (2)
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
1‘कॉर्न लॉ’ क्या था? (1)
2बृहत उत्पादन के विख्यात प्रणेता कौन थे? (1)
3‘व्यापार अधिशेष’ का अर्थ बताइए। (1)
4जी-77 क्या है? (1)
5तीनों प्रवाहों की व्याख्या करते हुए भारत से एक-एक उदाहरण दीजिए। (3)
6अफ़्रीका में मज़दूर पाने के लिए यूरोपीयों ने कौन-से हथकंडे अपनाए? (3)
7अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट के आने के प्रभावों की व्याख्या कीजिए। (4)
8स्रोत 1 (चेचक वाला गद्यांश) पर आधारित प्रश्न। (4)
9रेफ़्रिजरेशन से पहले मांस का व्यापार क्यों नहीं होता था? (2)
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
1भारत में अनुबंध प्रथा कब समाप्त की गई? (1)
2महामंदी कब से कब तक चली? (1)
3‘वीटो’ का क्या अर्थ है? (1)
4‘होसे’ क्या है? (1)
5उन्नीसवीं सदी में भारतीय कपड़ा उद्योग का पतन कैसे हुआ? (3)
6युद्धोत्तर बंदोबस्त के दो अहम सबक़ कौन-से थे? (3)
7महामंदी के कारणों की व्याख्या कीजिए। (4)
8स्रोत 3 (बंगाल के कवि की पंक्तियाँ) पर आधारित प्रश्न। (4)
9हमारे ज़्यादातर टेलीविज़न और मोबाइल फ़ोन चीन में क्यों बनते हैं? (2)