इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | उत्तर की लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर लिखिए, भूमिका मत बाँधिए |
| 2 अंक | लगभग 30 से 40 शब्द, या 2 बिंदु | पहले एक वाक्य में उत्तर, फिर एक वाक्य में कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | लगभग 60 से 80 शब्द, या 3 बिंदु | तीन अलग-अलग बातें लिखिए; हर बात पूरे वाक्य में |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द, या 5 बिंदु | एक वाक्य की भूमिका, फिर पाँच बिंदु, फिर एक वाक्य का निष्कर्ष |
| मानचित्र | केवल सही जगह पर सही चिह्न | नाम साफ़ लिखिए और चिह्न बनाइए |
इस अध्याय के लिए तीन विशेष सलाह — 1. इसमें नाम बहुत हैं। हर बड़े उत्तर में कम से कम एक जगह का नाम, एक वर्ष और एक आँकड़ा ज़रूर लिखिए। 2. जहाँ ‘समुदायों का योगदान’ पूछा जाए, वहाँ कम से कम चार उदाहरण दीजिए — और उनमें राजस्थान के दो ज़रूर हों। 3. मानचित्र-कार्य में इस अध्याय से राष्ट्रीय उद्यान और बाघ रिज़र्व पूछे जाते हैं। भाग च ज़रूर कीजिए।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1अध्याय की शुरुआत किस लोकगीत से होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लेपचा लोकसंगीत से।
2वन पारिस्थितिकी तंत्र में क्या भूमिका निभाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वन प्राथमिक उत्पादक हैं, जिन पर दूसरे सभी जीव निर्भर करते हैं।
3हमारे तीन जीवन साध्य संसाधन कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जल, वायु और मृदा।
4जैव विविधता के संदर्भ में भारत का क्या स्थान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है।
5विश्व की सारी जैव उपजातियों की कितनी संख्या भारत में पाई जाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 8 प्रतिशत, यानी लगभग 16 लाख उपजातियाँ।
6भारत में अभी कितनी उपजातियाँ खोजी जानी बाक़ी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ज्ञात उपजातियों से दो या तीन गुना।
7संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ने का क्या कारण बताया गया है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना।
8संरक्षण से कौन-सी विविधता बनी रहती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पारिस्थितिकी विविधता।
9संरक्षण किस प्रकार की विविधता को संरक्षित करता है जो बेहतर जनन के लिए आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जीन (genetic) विविधता को।
10जलीय जैव विविधता किस पर निर्भर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मोटे तौर पर मछली पालन बनाए रखने पर।
11राष्ट्रीय वन्यजीवन सुरक्षा कार्यक्रम की माँग किन दशकों में उठी?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1960 और 1970 के दशकों के दौरान।
12भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम कब लागू हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1972 में।
131972 के अधिनियम के तहत क्या प्रकाशित किया गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: सारे भारत में रक्षित जातियों की सूची।
141972 के अधिनियम के चार मुख्य ज़ोर कौन-से थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: संकटग्रस्त जातियों का बचाव, शिकार प्रतिबंधन, वन्यजीव आवासों का क़ानूनी रक्षण, और जंगली जीवों के व्यापार पर रोक।
15अधिनियम के बाद सरकारों ने क्या स्थापित किए?
उत्तर देखिए
उत्तर: राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव पशुविहार (sanctuary)।
16हंगुल (hangul) किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: कश्मीरी हिरण को।
17किन तीन प्रकार के मगरमच्छों के लिए परियोजनाएँ बनाई गईं?
उत्तर देखिए
उत्तर: स्वच्छ जल मगरमच्छ, लवणीय जल मगरमच्छ और घड़ियाल।
18किन प्राणियों के शिकार और व्यापार पर संपूर्ण अथवा आंशिक प्रतिबंध लगाया गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारतीय हाथी, काला हिरण, चिंकारा, भारतीय गोडावन (bustard) और हिम तेंदुआ।
1920वीं शताब्दी के आरंभ में भारत में बाघों की अनुमानित संख्या कितनी थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 55,000।
201973 में बाघों की संख्या कितनी रह गई थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: मात्र 1,827।
21प्रोजेक्ट टाईगर की शुरुआत कब हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1973 में।
22दुनिया के कितने बाघों को भारत और नेपाल आवास उपलब्ध करवाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: दुनिया के दो-तिहाई बाघों को।
23बाघों की हड्डियों का किस काम में प्रयोग होता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: एशियाई देशों में परंपरागत औषधियों में।
24कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: उत्तराखण्ड में।
25सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पश्चिम बंगाल में।
26बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मध्य प्रदेश में।
27सरिस्का वन्य जीव पशुविहार किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान में।
28मानस बाघ रिज़र्व किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: असम में।
29पेरियार बाघ रिज़र्व किस राज्य में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: केरल में।
30काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में है और वहाँ क्या दिखाया गया है?
उत्तर देखिए
उत्तर: असम में; चित्र 2.2 में वहाँ गैंडा और हिरन दिखाए गए हैं।
31वन्य जीव अधिनियम 1980 और 1986 के तहत किन जीवों को संरक्षित सूची में जोड़ा गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: सैकड़ों तितलियों, पतंगों, भृंगों और एक ड्रैगनफ्लाई को।
32पौधों की कितनी जातियाँ और कब पहली बार संरक्षित सूची में रखी गईं?
उत्तर देखिए
उत्तर: 6 जातियाँ, 1991 में।
33आजकल संरक्षण परियोजनाएँ किस पर केंद्रित होती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जैव विविधताओं पर, न कि इसके विभिन्न घटकों पर।
34भारत में वन कितने प्रकार के हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: तीन — आरक्षित वन, रक्षित वन और अवर्गीकृत वन।
35आरक्षित वन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे वन जिन्हें वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान माना जाता है।
36देश का कितना वन क्षेत्र आरक्षित वन घोषित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: आधे से अधिक।
37रक्षित वन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे वन जिन्हें और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए सुरक्षा दी जाती है।
38देश के कुल वन क्षेत्र का कितना हिस्सा रक्षित है?
उत्तर देखिए
उत्तर: एक-तिहाई हिस्सा।
39अवर्गीकृत वन किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अन्य सभी प्रकार के वन और बंजरभूमि जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में होते हैं।
40स्थायी वन क्षेत्र में कौन-कौन से वन आते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: आरक्षित और रक्षित वन।
41स्थायी वन क्षेत्रों का रख-रखाव किसलिए किया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इमारती लकड़ी, अन्य वन पदार्थों और उनके बचाव के लिए।
42किस राज्य में स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है और कितना?
उत्तर देखिए
उत्तर: मध्य प्रदेश में; कुल वन क्षेत्र का 75 प्रतिशत।
43किन राज्यों में कुल वनों में आरक्षित वनों का बड़ा अनुपात है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में।
44किन राज्यों में कुल वनों में रक्षित वनों का बड़ा अनुपात है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में।
45किन क्षेत्रों में अधिकतर वन अवर्गीकृत हैं और किसके प्रबंधन में हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पूर्वोत्तर के सभी राज्यों और गुजरात में; ये स्थानीय समुदायों के प्रबंधन में हैं।
46‘Gharial on the brink’ लेख किसने लिखा?
उत्तर देखिए
उत्तर: रोमुलस व्हिटेकर और जानकी लेनिन ने।
47यमुना से जुड़ी अख़बारी कतरन किस समस्या की ओर इशारा करती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ठहरे हुए गंदे पानी में विषैले तत्त्वों के कारण पक्षियों की मौत की ओर।
48सरिस्का में गाँववाले किस बात के लिए संघर्षरत हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बंद करवाने के लिए।
49भैरोंदेव डाकव सोंचुरी किस ज़िले में है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान के अलवर ज़िले में।
50भैरोंदेव डाकव सोंचुरी कितने गाँवों ने और कितनी भूमि पर घोषित की?
उत्तर देखिए
उत्तर: 5 गाँवों के लोगों ने 1,200 हेक्टेयर वन भूमि पर।
51भैरोंदेव डाकव सोंचुरी के नियम क्या करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से वहाँ के वन्य जीवन को बचाते हैं।
52पवित्र पेड़ों के झुरमट किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे वन-भाग जिन्हें जनजातीय विश्वासों ने मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है; इन्हें देवी-देवताओं के वन भी कहते हैं।
53मुंडा और संथाल जनजातियाँ किन पेड़ों की पूजा करती हैं और कहाँ?
उत्तर देखिए
उत्तर: महुआ और कदंब के पेड़ों की; छोटानागपुर क्षेत्र में।
54ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ कब और किन पेड़ों की पूजा करती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: शादी के दौरान इमली और आम के पेड़ की।
55हममें से बहुत से व्यक्ति किन दो पेड़ों को पवित्र मानते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पीपल और वटवृक्ष को।
56बिश्नोई गाँवों के आसपास कौन-से जानवर देखे जा सकते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोरों के झुंड।
57चिपको आंदोलन कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: हिमालय में।
58चिपको आंदोलन ने क्या दिखाया?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह कई क्षेत्रों में वन कटाई रोकने में कामयाब रहा और इसने यह भी दिखाया कि स्थानीय पौधों की जातियों को प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण अभियान सफल बनाया जा सकता है।
59बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय कहाँ चले?
उत्तर देखिए
उत्तर: टिहरी में।
60बीज बचाओ आंदोलन ने क्या सिद्ध किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन संभव है।
61संयुक्त वन प्रबंधन की औपचारिक शुरुआत कब हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1988 में।
62संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव किस राज्य ने पास किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: ओडिशा ने।
63संयुक्त वन प्रबंधन में संस्थाएँ किस स्तर पर बनाई जाती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: गाँव के स्तर पर, जिनमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य करते हैं।
64संयुक्त वन प्रबंधन में समुदाय को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे गैर-इमारती वन उत्पादों के हक़दार होते हैं तथा सफल संरक्षण से प्राप्त इमारती लकड़ी के लाभ में भी भागीदार होते हैं।
65अध्याय के निष्कर्ष के अनुसार कौन-सी विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए?
उत्तर देखिए
उत्तर: वे जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।
66पेड़ों पर प्रसिद्ध उद्धरण किसका है और कब का?
उत्तर देखिए
उत्तर: गौतम बुद्ध का, 487 ई.पू. का।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1जैव विविधता क्या है? (अभ्यास प्रश्न 3-i का पहला भाग)
उत्तर देखिए
उत्तर: जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले पौधों, प्राणियों और सूक्ष्मजीवों की विविधता। पाठ्यपुस्तक के अनुसार वन्य जीवन और कृषि फसल उपजातियों में अत्यधिक जैव विविधताएँ पाई जाती हैं, जो आकार और कार्य में विभिन्न हैं परंतु अंतर्निर्भरताओं के जटिल जाल द्वारा एक तंत्र में गुँथी हुई हैं।
2वन पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका क्यों निभाते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि वन प्राथमिक उत्पादक हैं, यानी वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। दूसरे सभी जीव सीधे या घुमाकर इन्हीं पर निर्भर करते हैं, इसलिए वन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की पहली कड़ी हैं।
3भारत की जैव विविधता के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, जहाँ विश्व की सारी जैव उपजातियों की 8 प्रतिशत संख्या यानी लगभग 16 लाख उपजातियाँ पाई जाती हैं। और ये अभी खोजी जाने वाली उपजातियों से दो या तीन गुना हैं, यानी अभी बहुत कुछ खोजा जाना बाक़ी है।
4वनों और वन्य जीवन का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: संरक्षण से पारिस्थितिकी विविधता बनी रहती है तथा हमारे जीवन साध्य संसाधन — जल, वायु और मृदा — बने रहते हैं। यह विभिन्न जातियों में बेहतर जनन के लिए वनस्पति और पशुओं में जीन (genetic) विविधता को भी संरक्षित करती है; उदाहरण के तौर पर हम कृषि में अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं और जलीय जैव विविधता मछली पालन बनाए रखने पर निर्भर है।
5भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम 1972 के मुख्य प्रावधान बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इस अधिनियम में वन्य-जीवों के आवास रक्षण के अनेक प्रावधान थे और सारे भारत में रक्षित जातियों की सूची भी प्रकाशित की गई। इस कार्यक्रम के तहत बची हुई संकटग्रस्त जातियों के बचाव, शिकार प्रतिबंधन, वन्यजीव आवासों के क़ानूनी रक्षण तथा जंगली जीवों के व्यापार पर रोक लगाने पर प्रबल ज़ोर दिया गया।
6केंद्रीय सरकार ने किन प्राणियों के लिए विशेष परियोजनाएँ घोषित कीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: इन प्राणियों में बाघ, एक सींग वाला गैंडा, कश्मीरी हिरण अथवा हंगुल, तीन प्रकार के मगरमच्छ — स्वच्छ जल मगरमच्छ, लवणीय जल मगरमच्छ और घड़ियाल — एशियाई शेर और अन्य प्राणी शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंभीर ख़तरे में पड़े कुछ विशेष वन प्राणियों को रक्षण प्रदान करना था।
7किन प्राणियों के शिकार और व्यापार पर प्रतिबंध लगाया गया?
उत्तर देखिए
उत्तर: कुछ समय पहले भारतीय हाथी, काला हिरण, चिंकारा, भारतीय गोडावन (bustard) और हिम तेंदुओं आदि के शिकार और व्यापार पर संपूर्ण अथवा आंशिक प्रतिबंध लगाया गया। इस प्रकार इन्हें क़ानूनी रक्षण दिया गया।
8बाघों की संख्या में कितनी गिरावट आई?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1973 में अधिकारियों ने पाया कि देश में 20वीं शताब्दी के आरंभ में बाघों की संख्या अनुमानित 55,000 से घटकर मात्र 1,827 रह गई थी। यानी लगभग 70 वर्षों में बाघों की संख्या का बहुत बड़ा हिस्सा समाप्त हो गया।
9बाघों की घटती संख्या के मुख्य कारण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बाघों को मारकर उन्हें व्यापार के लिए चोरी करना, आवासीय स्थलों का सिकुड़ना, भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की संख्या कम होना और जनसंख्या में वृद्धि — ये बाघों की घटती संख्या के मुख्य कारण हैं। इसके अलावा बाघों की खाल का व्यापार और उनकी हड्डियों का एशियाई देशों में परंपरागत औषधियों में प्रयोग भी इसका कारण है।
10भारत और नेपाल शिकारियों के मुख्य निशाने पर क्यों हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि भारत और नेपाल दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं। इसीलिए ये दोनों देश शिकार, चोरी और गैर-क़ानूनी व्यापार करने वालों के मुख्य निशाने पर हैं।
11‘प्रोजेक्ट टाईगर’ के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘प्रोजेक्ट टाईगर’ विश्व की बेहतरीन वन्य जीव परियोजनाओं में से एक है और इसकी शुरुआत 1973 में हुई। बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।
12भारत में बाघ संरक्षण परियोजनाओं के कोई चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: उत्तराखण्ड में कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल में सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और राजस्थान में सरिस्का वन्य जीव पशुविहार। इनके अलावा असम में मानस बाघ रिज़र्व और केरल में पेरियार बाघ रिज़र्व भी इसके उदाहरण हैं।
13संरक्षण की सोच में क्या बदलाव आया है?
उत्तर देखिए
उत्तर: आजकल संरक्षण परियोजनाएँ जैव विविधताओं पर केंद्रित होती हैं न कि इसके विभिन्न घटकों पर, और संरक्षण नियोजन में कीटों को भी महत्त्व मिल रहा है। वन्य जीव अधिनियम 1980 और 1986 के तहत सैकड़ों तितलियों, पतंगों, भृंगों और एक ड्रैगनफ्लाई को संरक्षित जातियों में शामिल किया गया, तथा 1991 में पौधों की भी 6 जातियाँ पहली बार इस सूची में रखी गईं।
14आरक्षित और रक्षित वन में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: आरक्षित वन वे हैं जिन्हें वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान माना जाता है, और देश में आधे से अधिक वन क्षेत्र आरक्षित वन घोषित किए गए हैं। रक्षित वन वे हैं जिन्हें और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए सुरक्षा दी जाती है, और वन विभाग के अनुसार देश के कुल वन क्षेत्र का एक-तिहाई हिस्सा रक्षित है।
15अवर्गीकृत वन क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: अन्य सभी प्रकार के वन और बंजरभूमि, जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में होते हैं, अवर्गीकृत वन कहे जाते हैं। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में और गुजरात में अधिकतर वन क्षेत्र अवर्गीकृत वन हैं तथा स्थानीय समुदायों के प्रबंधन में हैं।
16स्थायी वन क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: आरक्षित और रक्षित वन ऐसे स्थायी वन क्षेत्र हैं जिनका रख-रखाव इमारती लकड़ी, अन्य वन पदार्थों और उनके बचाव के लिए किया जाता है। मध्य प्रदेश में स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है, जो कि उसके कुल वन क्षेत्र का 75 प्रतिशत है।
17वन और वन्य जीव संसाधनों का प्रबंधन कठिन क्यों है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि भारत में अधिकतर वन और वन्य जीवन या तो प्रत्यक्ष रूप में सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं या वन विभाग अथवा अन्य विभागों के जरिये सरकार के प्रबंधन में हैं। इतने बड़े और बिखरे हुए क्षेत्र का प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन अपेक्षाकृत कठिन होता है।
18सरिस्का बाघ रिज़र्व में गाँववाले किसके लिए संघर्षरत हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सरिस्का बाघ रिज़र्व में राजस्थान के गाँवों के लोग वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बंद करवाने के लिए संघर्षरत हैं। यह दिखाता है कि स्थानीय समुदाय स्वयं वन्य जीव आवासों की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं।
19भैरोंदेव डाकव ‘सोंचुरी’ के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान के अलवर ज़िले में 5 गाँवों के लोगों ने 1,200 हेक्टेयर वन भूमि को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’ घोषित कर दिया है, जिसके अपने ही नियम-क़ानून हैं। ये नियम शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से यहाँ के वन्य जीवन को बचाते हैं।
20पवित्र पेड़ों के झुरमट क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रकृति की पूजा सदियों पुराना जनजातीय विश्वास है, जिसका आधार प्रकृति के हर रूप की रक्षा करना है; इन्हीं विश्वासों ने विभिन्न वनों को मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है, जिन्हें पवित्र पेड़ों के झुरमट या देवी-देवताओं के वन कहते हैं। वनों के इन बड़े भागों में स्थानीय लोग ही घुसते हैं तथा न ही किसी और को छेड़छाड़ करने देते हैं।
21कौन-सी जनजातियाँ किन पेड़ों की पूजा करती हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करती हैं। ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ शादी के दौरान इमली और आम के पेड़ की पूजा करती हैं, और हममें से बहुत से व्यक्ति पीपल तथा वटवृक्ष को पवित्र मानते हैं।
22बिश्नोई समुदाय का वन्य जीव संरक्षण में क्या योगदान है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान में बिश्नोई गाँवों के आस पास काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोरों के झुंड देखे जा सकते हैं। ये जानवर वहाँ के समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं और कोई उनको नुकसान नहीं पहुँचाता।
23चिपको आंदोलन की दो उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: हिमालय में प्रसिद्ध चिपको आंदोलन कई क्षेत्रों में वन कटाई रोकने में कामयाब रहा। इसके अलावा इसने यह भी दिखाया कि स्थानीय पौधों की जातियों को प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
24बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय ने क्या सिद्ध किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: टिहरी में किसानों के बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय ने दिखा दिया कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन संभव है। इससे पारंपरिक संरक्षण तरीक़ों को पुनर्जीवित करने और परिस्थिकी कृषि के नए तरीक़ों के विकास को बल मिला।
25संयुक्त वन प्रबंधन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम क्षरित वनों के प्रबंध और पुनर्निर्माण में स्थानीय समुदायों की भूमिका के महत्त्व को उजागर करते हैं; इसकी औपचारिक शुरुआत 1988 में हुई जब ओडिशा राज्य ने इसका पहला प्रस्ताव पास किया। इसमें गाँव के स्तर पर संस्थाएँ बनाई जाती हैं जिनमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य करते हैं।
26संयुक्त वन प्रबंधन में समुदाय को क्या मिलता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इसके बदले ये समुदाय मध्य स्तरीय लाभ जैसे गैर-इमारती वन उत्पादों के हक़दार होते हैं। साथ ही वे सफल संरक्षण से प्राप्त इमारती लकड़ी के लाभ में भी भागीदार होते हैं।
27अध्याय का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत में पर्यावरण के विनाश और पुनर्निर्माण की क्रियाशीलताओं से सीख मिलती है कि स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए। अत: वे ही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1जैव विविधता क्या है और यह मानव जीवन के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? (अभ्यास प्रश्न 3-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले पौधों, प्राणियों और सूक्ष्मजीवों की विविधता; वन्य जीवन और कृषि फसल उपजातियों में यह विविधता आकार और कार्य में विभिन्न होते हुए भी अंतर्निर्भरताओं के जटिल जाल द्वारा एक तंत्र में गुँथी हुई है।
- यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे पारिस्थितिकी विविधता बनी रहती है और हमारे जीवन साध्य संसाधन — जल, वायु और मृदा — बने रहते हैं।
- यह विभिन्न जातियों में बेहतर जनन के लिए वनस्पति और पशुओं में जीन विविधता को भी संरक्षित करती है; हम कृषि में अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं और जलीय जैव विविधता मछली पालन बनाए रखने पर निर्भर है।
2मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक हैं? (अभ्यास प्रश्न 3-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना के कारण पिछले कुछ समय से इन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ा है; व्यापार के लिए शिकार और चोरी इसका सबसे बड़ा कारण है, जैसे बाघों को उनकी खाल के लिए मारा गया और उनकी हड्डियाँ एशियाई देशों में परंपरागत औषधियों में इस्तेमाल हुईं।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण वन्य जीवों के आवासीय स्थल सिकुड़ते गए और उनके भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की संख्या भी कम होती गई।
- प्रदूषण भी बड़ा कारण है — जैसे यमुना के गंदे और ठहरे हुए पानी में विषैले तत्त्वों से पक्षियों की मौत हुई, और घड़ियाल की संख्या 1970 के दशक के बाद सबसे कम स्तर पर पहुँच गई; इसके अलावा खनन जैसी गतिविधियाँ भी वन्य जीव आवासों को नष्ट करती हैं, जिसके विरुद्ध सरिस्का में राजस्थान के गाँवों के लोग संघर्षरत हैं।
3वनों के तीनों प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- आरक्षित वन — जहाँ तक वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण की बात है, आरक्षित वनों को सर्वाधिक मूल्यवान माना जाता है; देश में आधे से अधिक वन क्षेत्र आरक्षित वन घोषित किए गए हैं।
- रक्षित वन — वन विभाग के अनुसार देश के कुल वन क्षेत्र का एक-तिहाई हिस्सा रक्षित है; इन वनों को और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए इनकी सुरक्षा की जाती है।
- अवर्गीकृत वन — अन्य सभी प्रकार के वन और बंजरभूमि जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में होते हैं, अवर्गीकृत वन कहे जाते हैं; आरक्षित और रक्षित वन मिलकर स्थायी वन क्षेत्र कहलाते हैं।
4भारत में वनों के राज्यवार वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- मध्य प्रदेश में स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है, जो कि कुल वन क्षेत्र का भी 75 प्रतिशत है।
- जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कुल वनों में एक बड़ा अनुपात आरक्षित वनों का है; जबकि बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में कुल वनों में रक्षित वनों का एक बड़ा अनुपात है।
- पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में और गुजरात में अधिकतर वन क्षेत्र अवर्गीकृत वन हैं तथा स्थानीय समुदायों के प्रबंधन में हैं।
5बाघ परियोजना के बारे में विस्तार से लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- वन्यजीवन संरचना में बाघ एक महत्त्वपूर्ण जंगली जाति है; 1973 में अधिकारियों ने पाया कि देश में 20वीं शताब्दी के आरंभ में बाघों की संख्या अनुमानित 55,000 से घटकर मात्र 1,827 रह गई थी।
- इसके मुख्य कारण थे — बाघों को मारकर व्यापार के लिए चोरी करना, आवासीय स्थलों का सिकुड़ना, भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की कमी और जनसंख्या में वृद्धि; इसके अलावा बाघों की खाल का व्यापार और हड्डियों का औषधियों में प्रयोग भी कारण रहा।
- ‘प्रोजेक्ट टाईगर’ विश्व की बेहतरीन वन्य जीव परियोजनाओं में से एक है और इसकी शुरुआत 1973 में हुई; बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।
6संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम क्षरित वनों के प्रबंध और पुनर्निर्माण में स्थानीय समुदायों की भूमिका के महत्त्व को उजागर करते हैं; इसकी औपचारिक शुरुआत 1988 में हुई जब ओडिशा राज्य ने इसका पहला प्रस्ताव पास किया।
- वन विभाग के अंतर्गत ‘संयुक्त वन प्रबंधन’ क्षरित वनों के बचाव के लिए कार्य करता है और इसमें गाँव के स्तर पर संस्थाएँ बनाई जाती हैं, जिनमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य करते हैं।
- इसके बदले ये समुदाय मध्य स्तरीय लाभ जैसे गैर-इमारती वन उत्पादों के हक़दार होते हैं तथा सफल संरक्षण से प्राप्त इमारती लकड़ी के लाभ में भी भागीदार होते हैं; यही व्यवस्था इसे केवल क़ानून से अलग बनाती है।
7राजस्थान के समुदायों ने वन और वन्य जीव संरक्षण में क्या योगदान दिया है?
उत्तर देखिए
उत्तर:
- सरिस्का बाघ रिज़र्व में राजस्थान के गाँवों के लोग वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बंद करवाने के लिए संघर्षरत हैं।
- राजस्थान के अलवर ज़िले में 5 गाँवों के लोगों ने 1,200 हेक्टेयर वन भूमि को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’ घोषित कर दिया, जिसके अपने ही नियम-क़ानून हैं जो शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से वन्य जीवन को बचाते हैं।
- राजस्थान में बिश्नोई गाँवों के आस पास काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोरों के झुंड देखे जा सकते हैं, जो वहाँ के समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं और कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाता।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)
1भारत में विभिन्न समुदायों ने किस प्रकार वनों और वन्य जीव संरक्षण और रक्षण में योगदान किया है? विस्तारपूर्वक विवेचना करें। (अभ्यास प्रश्न 4-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
वन संरक्षण की नीतियाँ हमारे देश में कोई नई बात नहीं है, क्योंकि वन हमारे देश में कुछ मानव प्रजातियों के आवास भी हैं।
- भारत के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर अपने आवास स्थलों के संरक्षण में जुटे हैं, क्योंकि इसी से ही दीर्घकाल में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है।
- सरिस्का बाघ रिज़र्व में राजस्थान के गाँवों के लोग वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ से खनन कार्य बंद करवाने के लिए संघर्षरत हैं; कई क्षेत्रों में तो लोग स्वयं वन्य जीव आवासों की रक्षा कर रहे हैं और सरकार की ओर से हस्तक्षेप भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
- राजस्थान के अलवर ज़िले में 5 गाँवों के लोगों ने 1,200 हेक्टेयर वन भूमि को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’ घोषित कर दिया, जिसके अपने ही नियम-क़ानून हैं जो शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से वन्य जीवन को बचाते हैं।
- हिमालय में प्रसिद्ध चिपको आंदोलन कई क्षेत्रों में वन कटाई रोकने में कामयाब रहा और उसने यह भी दिखाया कि स्थानीय पौधों की जातियों को प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
- टिहरी में किसानों के बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय ने दिखा दिया कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन संभव है।
- 1988 में ओडिशा राज्य ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया; इसमें गाँव के स्तर पर संस्थाएँ बनती हैं जिनमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य करते हैं, और बदले में समुदाय गैर-इमारती वन उत्पादों के हक़दार तथा इमारती लकड़ी के लाभ में भागीदार होते हैं।
निष्कर्ष — इन सब से सीख मिलती है कि स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए, और वही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।
2वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों पर एक निबन्ध लिखिए। (अभ्यास प्रश्न 4-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- प्रकृति की पूजा सदियों पुराना जनजातीय विश्वास है, जिसका आधार प्रकृति के हर रूप की रक्षा करना है; इन्हीं विश्वासों ने विभिन्न वनों को मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है, जिन्हें पवित्र पेड़ों के झुरमट या देवी-देवताओं के वन कहते हैं।
- वनों के इन बड़े भागों में स्थानीय लोग ही घुसते हैं तथा न ही किसी और को छेड़छाड़ करने देते हैं; इसी कारण ये वन आज तक बचे हुए हैं।
- कुछ समाज कुछ विशेष पेड़ों की पूजा करते हैं और आदिकाल से उनका संरक्षण करते आ रहे हैं — छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करती हैं; ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ शादी के दौरान इमली और आम के पेड़ की पूजा करती हैं; और हममें से बहुत से व्यक्ति पीपल तथा वटवृक्ष को पवित्र मानते हैं।
- भारतीय समाज में अनेकों संस्कृतियाँ हैं और प्रत्येक संस्कृति में प्रकृति और इसकी कृतियों को संरक्षित करने के अपने पारंपरिक तरीक़े हैं; आमतौर पर झरनों, पहाड़ी चोटियों, पेड़ों और पशुओं को पवित्र मानकर उनका संरक्षण किया जाता है, और अनेक मंदिरों के आस पास बंदर तथा लंगूर पाए जाते हैं जिन्हें उपासक खिलाते-पिलाते हैं।
- राजस्थान में बिश्नोई गाँवों के आस पास काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोरों के झुंड देखे जा सकते हैं, जो वहाँ के समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं और कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाता।
निष्कर्ष — इन रीति-रिवाजों ने बिना किसी क़ानून के सदियों तक वनों और वन्य जीवन को बचाए रखा; इसीलिए आज भी संरक्षण की सबसे टिकाऊ व्यवस्था वही मानी जाती है जिसमें समुदाय ख़ुद शामिल हो।
3भारत में वन और वन्य जीवन के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- 1960 और 1970 के दशकों के दौरान पर्यावरण संरक्षकों ने राष्ट्रीय वन्यजीवन सुरक्षा कार्यक्रम की पुरजोर माँग की, जिसके फलस्वरूप भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम 1972 में लागू किया गया।
- इस अधिनियम में वन्य-जीवों के आवास रक्षण के अनेक प्रावधान थे, सारे भारत में रक्षित जातियों की सूची प्रकाशित की गई, तथा संकटग्रस्त जातियों के बचाव, शिकार प्रतिबंधन, वन्यजीव आवासों के क़ानूनी रक्षण और जंगली जीवों के व्यापार पर रोक पर प्रबल ज़ोर दिया गया।
- इसके बाद केंद्रीय सरकार व कई राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव पशुविहार स्थापित किए; कई परियोजनाओं की भी घोषणा हुई जिनमें बाघ, एक सींग वाला गैंडा, कश्मीरी हिरण (हंगुल), तीन प्रकार के मगरमच्छ और एशियाई शेर शामिल थे।
- इसके अतिरिक्त भारतीय हाथी, काला हिरण, चिंकारा, भारतीय गोडावन और हिम तेंदुओं आदि के शिकार तथा व्यापार पर संपूर्ण अथवा आंशिक प्रतिबंध लगाकर क़ानूनी रक्षण दिया गया।
- 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाईगर’ शुरू हुआ, जो विश्व की बेहतरीन वन्य जीव परियोजनाओं में से एक है; और वन्य जीव अधिनियम 1980 तथा 1986 के तहत सैकड़ों तितलियों, पतंगों, भृंगों और एक ड्रैगनफ्लाई को, तथा 1991 में पौधों की 6 जातियों को भी संरक्षित सूची में रखा गया।
निष्कर्ष — इससे पता चलता है कि सरकारी संरक्षण की सोच धीरे-धीरे ‘बड़े जानवरों को बचाने’ से बदलकर ‘पूरे जैव तंत्र को बचाने’ की ओर बढ़ी है।
भाग ङ — स्रोत-आधारित प्रश्न
स्रोत 1 — बाघ परियोजना (बॉक्स, पृष्ठ 14)
“1973 में अधिकारियों ने पाया कि देश में 20वीं शताब्दी के आरंभ में बाघों की संख्या अनुमानित 55,000 से घटकर मात्र 1,827 रह गई। बाघों को मारकर उनको व्यापार के लिए चोरी करना, आवासीय स्थलों का सिकुड़ना, भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की संख्या कम होना और जनसंख्या में वृद्धि बाघों की घटती संख्या के मुख्य कारण हैं… चूँकि भारत और नेपाल दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं, अत: ये देश ही शिकार, चोरी और गैर-क़ानूनी व्यापार करने वालों के मुख्य निशाना पर हैं।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. 1973 में बाघों की संख्या कितनी रह गई थी? | मात्र 1,827। |
| 2. बाघों की घटती संख्या के चार मुख्य कारण बताइए। | व्यापार के लिए चोरी, आवासीय स्थलों का सिकुड़ना, भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की कमी, और जनसंख्या में वृद्धि। |
| 3. भारत और नेपाल शिकारियों के मुख्य निशाने पर क्यों हैं? | क्योंकि ये दोनों देश दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं। |
| 4. ‘प्रोजेक्ट टाईगर’ का असली उद्देश्य क्या है? | बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है। |
स्रोत 2 — पवित्र पेड़ों के झुरमट (बॉक्स, पृष्ठ 16)
“प्रकृति की पूजा सदियों पुराना जनजातीय विश्वास है, जिसका आधार प्रकृति के हर रूप की रक्षा करना है। इन्हीं विश्वासों ने विभिन्न वनों को मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है, जिन्हें पवित्र पेड़ों के झुरमट (देवी-देवताओं के वन) कहते हैं… छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करती हैं।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. पवित्र पेड़ों के झुरमट किसे कहते हैं? | वे वन-भाग जिन्हें जनजातीय विश्वासों ने मूल एवं कौमार्य रूप में बचाकर रखा है; इन्हें देवी-देवताओं के वन भी कहते हैं। |
| 2. इन वनों की रक्षा कैसे होती है? | इन बड़े भागों में स्थानीय लोग ही घुसते हैं तथा न ही किसी और को छेड़छाड़ करने देते हैं। |
| 3. मुंडा और संथाल किन पेड़ों की पूजा करते हैं? | महुआ और कदंब के पेड़ों की, छोटानागपुर क्षेत्र में। |
| 4. इस बॉक्स से क्या सीख मिलती है? | कि वन संरक्षण के लिए हमेशा क़ानून की ज़रूरत नहीं होती; आस्था और परंपरा ने सदियों तक वनों को बचाए रखा है। |
स्रोत 3 — अध्याय का निष्कर्ष (पृष्ठ 17)
“भारत में पर्यावरण के विनाश और पुनर्निर्माण की क्रियाशीलताओं से सीख मिलती है कि स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए। परंतु स्थानीय समुदायों को फैसले लेने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका में आने में अभी देर है। अत: वे ही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हो और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. इस अनुच्छेद के अनुसार सबसे बड़ी सीख क्या है? | कि स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए। |
| 2. लेखक किस बात पर चिंता जताता है? | कि स्थानीय समुदायों को फैसले लेने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका में आने में अभी देर है। |
| 3. कौन-सी विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए? | वे जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों। |
| 4. इस अध्याय में इस निष्कर्ष के दो उदाहरण दीजिए। | संयुक्त वन प्रबंधन (1988, ओडिशा), जिसमें समुदाय को वन उत्पादों में हिस्सा मिलता है; और अलवर की भैरोंदेव डाकव सोंचुरी, जहाँ पाँच गाँवों ने ख़ुद 1,200 हेक्टेयर वन भूमि की रक्षा की। |
भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं
इस अध्याय से मानचित्र में राष्ट्रीय उद्यान और बाघ रिज़र्व पूछे जाते हैं। इन्हें ज़रूर याद कीजिए।
1. छह बाघ रिज़र्व और राष्ट्रीय उद्यान
| # | उद्यान / रिज़र्व | राज्य | दिशा (याद रखने के लिए) |
|---|---|---|---|
| 1 | कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान | उत्तराखण्ड | उत्तर |
| 2 | सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान | पश्चिम बंगाल | पूर्व |
| 3 | बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान | मध्य प्रदेश | मध्य |
| 4 | सरिस्का वन्य जीव पशुविहार | राजस्थान | पश्चिम |
| 5 | मानस बाघ रिज़र्व | असम | पूर्वोत्तर |
| 6 | पेरियार बाघ रिज़र्व | केरल | दक्षिण |
| 7 | काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (चित्र 2.2) | असम | पूर्वोत्तर |
2. वन-वितरण के अनुसार राज्य
| श्रेणी | राज्य जो मानचित्र पर दिखाने हैं |
|---|---|
| स्थायी वनों में सर्वाधिक क्षेत्र (75%) | मध्य प्रदेश |
| आरक्षित वनों का बड़ा अनुपात | जम्मू और कश्मीर · आंध्र प्रदेश · उत्तराखण्ड · केरल · तमिलनाडु · पश्चिम बंगाल · महाराष्ट्र |
| रक्षित वनों का बड़ा अनुपात | बिहार · हरियाणा · पंजाब · हिमाचल प्रदेश · ओडिशा · राजस्थान |
| अवर्गीकृत वन (समुदायों के प्रबंधन में) | पूर्वोत्तर के सभी राज्य · गुजरात |
3. समुदाय-संरक्षण से जुड़े स्थान
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| अलवर ज़िला (राजस्थान) | भैरोंदेव डाकव सोंचुरी — 5 गाँव, 1,200 हेक्टेयर |
| सरिस्का (राजस्थान) | खनन-विरोधी संघर्ष |
| छोटानागपुर क्षेत्र (झारखंड) | मुंडा और संथाल जनजातियाँ — महुआ और कदंब की पूजा |
| टिहरी (उत्तराखण्ड) | बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय |
| हिमालय क्षेत्र | चिपको आंदोलन |
| ओडिशा | संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव, 1988 |
4. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न
| प्रश्न | अंक |
|---|---|
| भारत के दिए गए रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को अंकित कीजिए — (क) कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (ख) सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (ग) सरिस्का वन्य जीव पशुविहार। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर वे दो राज्य दिखाइए जहाँ अधिकतर वन अवर्गीकृत हैं, और वह राज्य भी जहाँ स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर पेरियार और मानस बाघ रिज़र्व अंकित कीजिए तथा उनके राज्यों के नाम लिखिए। | 2 |
★सबसे आसान तरीक़ा — छहों उद्यानों को दिशा से बाँध दीजिए: कॉर्बेट उत्तर · सुंदरबन पूर्व · बांधवगढ़ मध्य · सरिस्का पश्चिम · मानस पूर्वोत्तर · पेरियार दक्षिण। एक बार यह क्रम बैठ गया तो नक़्शा कभी ग़लत नहीं होगा।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | हंगुल किसे कहते हैं? | 1 |
| 2 | प्रोजेक्ट टाईगर की शुरुआत कब हुई? | 1 |
| 3 | संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव किस राज्य ने पास किया? | 1 |
| 4 | वनों और वन्य जीवन का संरक्षण क्यों आवश्यक है? | 2 |
| 5 | भैरोंदेव डाकव सोंचुरी के बारे में लिखिए। | 2 |
| 6 | वनों के तीनों प्रकारों का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | भारत में विभिन्न समुदायों ने वनों और वन्य जीव संरक्षण में किस प्रकार योगदान किया है? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर कॉर्बेट, सुंदरबन और सरिस्का अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | भारत में विश्व की कितने प्रतिशत जैव उपजातियाँ पाई जाती हैं? | 1 |
| 2 | मानस बाघ रिज़र्व किस राज्य में है? | 1 |
| 3 | बिश्नोई गाँवों के आसपास कौन-से चार जानवर देखे जा सकते हैं? | 1 |
| 4 | आरक्षित और रक्षित वन में अंतर बताइए। | 2 |
| 5 | चिपको आंदोलन की दो उपलब्धियाँ बताइए। | 2 |
| 6 | बाघ परियोजना के बारे में विस्तार से लिखिए। | 3 |
| 7 | वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों पर एक निबन्ध लिखिए। | 5 |
| 8 | स्रोत 1 (बाघ परियोजना) पढ़कर चारों प्रश्नों के उत्तर दीजिए। | 4+1 = 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | 1972 का अधिनियम किस नाम से जाना जाता है? | 1 |
| 2 | किस राज्य में स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है? | 1 |
| 3 | 1991 में पहली बार किन्हें संरक्षित सूची में रखा गया? | 1 |
| 4 | संयुक्त वन प्रबंधन में समुदाय को क्या लाभ मिलता है? | 2 |
| 5 | पवित्र पेड़ों के झुरमट क्या हैं? | 2 |
| 6 | मानव क्रियाएँ किस प्रकार वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक हैं? | 3 |
| 7 | भारत में वन और वन्य जीवन के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर पेरियार, बांधवगढ़ और मानस अंकित कीजिए तथा राज्यों के नाम लिखिए। | 5 |
अंतिम सलाह। इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक नामों की सही जोड़ियों से मिलते हैं — उद्यान+राज्य, जनजाति+पेड़, आंदोलन+जगह, वर्ष+घटना। और जहाँ ‘समुदायों का योगदान’ पूछा जाए, वहाँ कम से कम चार उदाहरण दीजिए और अंत में वह निष्कर्ष ज़रूर लिखिए — “वही विकास क्रियाएँ मान्य होनी चाहिए जो जनमानस पर केंद्रित हों, पर्यावरण हितैषी हों और आर्थिक रूप से प्रतिफलित हों।”