ये प्रश्न रटने से हल नहीं होते। इनमें आपको सोचना, दूसरों की जगह ख़ुद को रखकर देखना, और अपने आसपास देखना पड़ता है।
तीन आयाम —
| आयाम | क्या जाँचा जाता है | भार |
|---|---|---|
| जागरूकता | तथ्य को समझकर नयी स्थिति में लगाना | 50% |
| संवेदनशीलता | वन्य जीवों, वनवासियों और भावी पीढ़ी के प्रति ज़िम्मेदारी | 20% |
| सृजनात्मकता | योजना बनाना, समाधान सोचना, ‘यदि…तो’ सोच | 30% |
उत्तर देखिए
उत्तर लिखने का तरीक़ा: इन प्रश्नों में ‘सही उत्तर’ एक नहीं होता। जो भी लिखें, उसके साथ कारण ज़रूर लिखें, और हो सके तो एक जगह का नाम या एक उदाहरण भी दें।
भाग क — जागरूकता (50%)
1केस-आधारित 4 अंक
नीचे दी गई स्थिति पढ़िए —
एक गाँव के पास के जंगल में हर साल कुछ पेड़ काटे जाते थे। पिछले साल सरकार ने उस जंगल को ‘आरक्षित वन’ घोषित कर दिया और गाँववालों का वहाँ जाना बंद कर दिया। इस साल पता चला कि जंगल में पेड़ पहले से भी ज़्यादा कट गए हैं।
(क) ऐसा क्यों हुआ होगा? दो कारण सोचकर लिखिए। (2 अंक)
(ख) पाठ्यपुस्तक के अनुसार इसका बेहतर हल क्या हो सकता था? (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) दो दिशाएँ स्वीकार्य — (1) जब समुदाय को जंगल से बाहर कर दिया जाता है तो उसे बचाने में उसका कोई फ़ायदा नहीं रह जाता, इसलिए वह निगरानी करना छोड़ देता है; (2) सरकारी कर्मचारी इतने बड़े क्षेत्र पर लगातार नज़र नहीं रख सकते — पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है कि “उनका प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन अपेक्षाकृत कठिन है।”
- (ख) संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) — जिसमें गाँव के स्तर पर संस्थाएँ बनती हैं और ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी साथ काम करते हैं; बदले में समुदाय गैर-इमारती वन उत्पादों का हक़दार होता है और इमारती लकड़ी के लाभ में भागीदार होता है। यानी — “जंगल बचाओ, और उसका फ़ायदा भी लो।”
2आँकड़ा-व्याख्या 4 अंक
नीचे बाघों की संख्या दी गई है —
| समय | बाघों की संख्या |
|---|---|
| 20वीं शताब्दी के आरंभ में | लगभग 55,000 |
| 1973 में | 1,827 |
(क) लगभग कितने प्रतिशत बाघ ख़त्म हो गए थे? मोटे तौर पर बताइए। (1 अंक)
(ख) इस गिरावट के चार कारण लिखिए। (2 अंक)
(ग) अगर आपसे कहा जाए कि “अब बाघ बढ़ रहे हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं” — तो आप क्या कहेंगे? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) लगभग 96–97 प्रतिशत बाघ समाप्त हो गए थे। (55,000 में से केवल 1,827 बचे, यानी सौ में से तीन से भी कम।)
- (ख) व्यापार के लिए चोरी · आवासीय स्थलों का सिकुड़ना · भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों की कमी · जनसंख्या में वृद्धि। (साथ में खाल का व्यापार और हड्डियों का औषधियों में प्रयोग भी लिख सकते हैं।)
- (ग) सबसे अच्छा उत्तर यह होगा कि आज की संख्या 1973 से ज़्यादा ज़रूर है, पर 20वीं सदी के आरंभ के 55,000 से अब भी बहुत कम है। यानी सुधार हुआ है, पर स्थिति सामान्य नहीं हुई।
3दावा-कारण 4 अंक
हर जोड़े के लिए बताइए कि (i) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है, (ii) दोनों सही हैं पर R व्याख्या नहीं है, (iii) A सही है पर R ग़लत, या (iv) A ग़लत है पर R सही।
| # | दावा (A) | कारण (R) |
|---|---|---|
| 1 | भारत और नेपाल शिकारियों के मुख्य निशाने पर हैं। | ये दोनों देश दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं। |
| 2 | आरक्षित वनों को सर्वाधिक मूल्यवान माना जाता है। | देश में आधे से अधिक वन क्षेत्र आरक्षित वन घोषित है। |
| 3 | पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिकतर वन अवर्गीकृत हैं। | वहाँ वन नष्ट हो चुके हैं इसलिए उन्हें कोई वर्ग नहीं दिया गया। |
| 4 | बाघ संरक्षण से पूरा जंगल बचता है। | बाघ संरक्षण का उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है। |
उत्तर देखिए
- 1 → (i)। यही पाठ्यपुस्तक का दिया हुआ कारण है।
- 2 → (ii)। दोनों कथन सही हैं, पर ‘आधे से अधिक क्षेत्र होना’ उनके ‘मूल्यवान होने’ का कारण नहीं है। असली कारण यह है कि वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण की दृष्टि से वे सबसे मूल्यवान हैं।
- 3 → (iii)। दावा सही है, पर कारण ग़लत है। असली कारण यह है कि वहाँ वन सरकार के नहीं, स्थानीय समुदायों के प्रबंधन में हैं — यह वहाँ की पारंपरिक व्यवस्था है, कोई कमी नहीं।
- 4 → (i)।
4वर्गीकरण 4 अंक
नीचे बारह बातें दी गई हैं। इन्हें तीन ख़ानों में बाँटिए — (अ) सरकारी प्रयास, (ब) समुदाय के प्रयास, (स) वन्य जीवन को ख़तरा।
- भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम, 1972
- चिपको आंदोलन
- बाघों की खाल का व्यापार
- भैरोंदेव डाकव सोंचुरी
- प्रोजेक्ट टाईगर
- यमुना के गंदे पानी से पक्षियों की मौत
- बिश्नोई गाँवों के हिरण
- राष्ट्रीय उद्यान और पशुविहार की स्थापना
- पवित्र पेड़ों के झुरमट
- आवासीय स्थलों का सिकुड़ना
- बीज बचाओ आंदोलन
- सरिस्का में खनन
उत्तर देखिए
- (अ) सरकारी प्रयास — 1, 5, 8
- (ब) समुदाय के प्रयास — 2, 4, 7, 9, 11
- (स) ख़तरा — 3, 6, 10, 12
इसके बाद यह पूछिए“किस ख़ाने में सबसे ज़्यादा चीज़ें आईं?” उत्तर: समुदाय के प्रयास वाले ख़ाने में। और यही इस अध्याय की मुख्य बात है।
और एक और सवाल“संयुक्त वन प्रबंधन किस ख़ाने में रखोगे?” उत्तर: यह दोनों में है — इसीलिए उसका नाम ‘संयुक्त’ है।
5तुलना 4 अंक
नीचे दो व्यवस्थाएँ दी गई हैं —
व्यवस्था A: सरकार ने एक क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया, बाड़ लगाई और वन-रक्षक तैनात किए। व्यवस्था B: अलवर के पाँच गाँवों ने 1,200 हेक्टेयर भूमि को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’ घोषित किया और अपने नियम बनाए।
(क) दोनों में एक बात समान है — वह क्या है? (2 अंक)
(ख) और एक बात अलग है — वह क्या है? (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) दोनों में एक क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया गया और उसमें शिकार तथा बाहरी दख़ल रोका गया।
- (ख) व्यवस्था A में नियम बाहर से आए और उन्हें लागू करने के लिए कर्मचारी चाहिए; व्यवस्था B में नियम ख़ुद समुदाय ने बनाए, इसलिए उन्हें लागू करने के लिए किसी बाहरी व्यक्ति की ज़रूरत नहीं — पूरा गाँव ही निगरानी करता है। पाठ्यपुस्तक कहती है कि वहाँ लोग “सरकार की ओर से हस्तक्षेप भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।”
6मानचित्र-सोच 4 अंक
नीचे छह उद्यान/रिज़र्व दिए हैं। बिना नक़्शा देखे बताइए कि हर एक भारत की किस दिशा में है और वहाँ की भौगोलिक विशेषता क्या होगी —
| उद्यान / रिज़र्व | राज्य | दिशा | संभावित भौगोलिक विशेषता |
|---|---|---|---|
| कॉर्बेट | |||
| सुंदरबन | |||
| सरिस्का | |||
| पेरियार |
उत्तर देखिए
- कॉर्बेट — उत्तराखण्ड, उत्तर; हिमालय की तलहटी, वन मृदा।
- सुंदरबन — पश्चिम बंगाल, पूर्व; गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा, ज्वारीय दलदली वन।
- सरिस्का — राजस्थान, पश्चिम; अरावली की पहाड़ियाँ, शुष्क क्षेत्र।
- पेरियार — केरल, दक्षिण; पश्चिमी घाट, भारी वर्षा और लेटराइट मृदा।
★इस प्रश्न का असली मक़सद अध्याय 1 से जोड़ना है — हर उद्यान की मिट्टी और जलवायु अलग है, इसीलिए वहाँ के जीव भी अलग हैं। यही जैव विविधता है।
7कारण-परिणाम शृंखला 4 अंक
नीचे की शृंखला में तीन कड़ियाँ ग़ायब हैं। उन्हें भरिए —
| क्रम | कड़ी |
|---|---|
| 1 | जंगल के पास खनन शुरू होता है। |
| 2 | __________ |
| 3 | वन्य जीवों के आवासीय स्थल सिकुड़ने लगते हैं। |
| 4 | __________ |
| 5 | बाघ भोजन की तलाश में गाँव की ओर आने लगता है। |
| 6 | __________ |
उत्तर देखिए
- 2 — पेड़ काटे जाते हैं और खदानों के लिए ज़मीन खोदी जाती है, यानी वनोन्मूलन होता है।
- 4 — उनके भोजन के लिए आवश्यक जंगली उपजातियों (हिरण आदि) की संख्या भी कम हो जाती है।
- 6 — मानव और वन्य जीव के बीच टकराव बढ़ता है, जिसमें अकसर बाघ ही मारा जाता है।
इसके बाद पूछिए“यह चक्र कहाँ से तोड़ा जा सकता है?” यही वह सवाल है जिसके कारण सरिस्का के गाँववाले खनन के विरुद्ध संघर्षरत हैं।
8स्थानीय अनुप्रयोग 4 अंक
अपने गाँव या मोहल्ले के बारे में सोचकर उत्तर दीजिए —
(क) आपके आसपास कोई ऐसी जगह है जहाँ पेड़ काटना मना है? वहाँ ऐसा क्यों है? (2 अंक)
(ख) आपके क्षेत्र में कौन-से जंगली जानवर या पक्षी दिखते हैं जो पहले ज़्यादा दिखते थे? (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) राजस्थान में ऐसी जगहों को ओरण या देवबनी कहते हैं; मंदिर के आसपास के पेड़, श्मशान के पेड़ और गोचर भूमि भी इसी श्रेणी में आते हैं। कारण अकसर धार्मिक होता है — यही पाठ्यपुस्तक का ‘पवित्र पेड़ों के झुरमट’ वाला विचार है।
- (ख) कोई भी ईमानदार उत्तर स्वीकार्य — गिद्ध, मोर, चिंकारा, नीलगाय, गौरैया आदि।
मूल्यांकन-नियमजो विद्यार्थी अपने आसपास से सही उदाहरण दे, उसे पूरे अंक दीजिए — भले ही वह पाठ्यपुस्तक के शब्दों में न हो।
भाग ख — संवेदनशीलता (20%)
9दृष्टिकोण-विविधता 4 अंक
एक बाघ रिज़र्व के पास बसे गाँव को हटाकर दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव है। नीचे तीन लोग हैं। हर एक की तरफ़ से दो-दो वाक्य लिखिए —
| व्यक्ति | उसका पक्ष |
|---|---|
| वन अधिकारी | |
| गाँव का एक बुज़ुर्ग | |
| एक पर्यावरण कार्यकर्ता |
उत्तर देखिए
- वन अधिकारी — बाघ को शांत और मानव-रहित क्षेत्र चाहिए; गाँव के पशु जंगल की घास चर जाते हैं जिससे हिरणों का भोजन कम होता है।
- बुज़ुर्ग — यह जंगल पीढ़ियों से हमारा घर है; पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है कि “वन हमारे देश में कुछ मानव प्रजातियों के आवास भी हैं”; हमारी रोज़ी-रोटी इसी से चलती है।
- पर्यावरण कार्यकर्ता — दोनों बातें ठीक हैं; हल यह है कि समुदाय को हटाया न जाए बल्कि संरक्षण में शामिल किया जाए, जैसे संयुक्त वन प्रबंधन में होता है।
मूल्यांकन-नियमसबसे ज़्यादा अंक उस उत्तर को दीजिए जो किसी को ‘ग़लत’ न बताए। पाठ्यपुस्तक का पूरा निष्कर्ष यही है कि समुदाय और संरक्षण को आमने-सामने नहीं, साथ-साथ खड़ा करना चाहिए।
10नैतिक विवेक 4 अंक
पाठ्यपुस्तक कहती है कि “पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना के कारण पिछले कुछ समय से इन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ा है।”
(क) ‘असंवेदना’ शब्द का क्या अर्थ है, और लेखक ने ‘लापरवाही’ या ‘लालच’ की जगह यही शब्द क्यों चुना होगा? (2 अंक)
(ख) अपने रोज़ के जीवन से दो ऐसे काम बताइए जिनमें यह असंवेदना दिखती है। (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) ‘असंवेदना’ का अर्थ है — महसूस न करना। लेखक यह नहीं कह रहा कि लोग बुरे हैं या जान-बूझकर नुक़सान कर रहे हैं; वह कह रहा है कि हमें एहसास ही नहीं होता कि हमारे कामों का असर क्या पड़ रहा है। और यही सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि जिस बात का एहसास न हो उसे सुधारा भी नहीं जा सकता।
- (ख) कोई भी ईमानदार उदाहरण स्वीकार्य — प्लास्टिक फेंकना, नल खुला छोड़ना, पक्षियों के घोंसले उजाड़ना, त्योहारों पर पेड़ों की टहनियाँ तोड़ना।
11परंपरा और आधुनिकता 4 अंक
पाठ्यपुस्तक बताती है कि बिश्नोई गाँवों के आसपास हिरण और मोर बेख़ौफ़ घूमते हैं, और कोई उन्हें नुक़सान नहीं पहुँचाता।
(क) वहाँ यह कैसे संभव हुआ, जबकि वहाँ कोई बाड़ या वन-रक्षक नहीं है? (2 अंक)
(ख) क्या ऐसी व्यवस्था हर जगह बनाई जा सकती है? अपना पक्ष कारण सहित लिखिए। (2 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) क्योंकि वहाँ ये जानवर समुदाय का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं। जब किसी चीज़ को अपना मान लिया जाता है तो उसकी रक्षा के लिए क़ानून की ज़रूरत नहीं पड़ती — यही ‘पवित्र पेड़ों के झुरमट’ वाला विचार भी है।
- (ख) दोनों तरफ़ के तर्क स्वीकार्य। पर सबसे अच्छा उत्तर वह होगा जो यह पहचाने कि आस्था थोपी नहीं जा सकती, पर उसका मूल विचार — यानी ‘संसाधन को अपना मानना’ — हर जगह अपनाया जा सकता है, और संयुक्त वन प्रबंधन इसी को व्यावहारिक रूप देता है।
12सहयोगात्मक बहस 4 अंक
कक्षा को दो दलों में बाँटिए और यह विषय दीजिए —
“वन और वन्य जीवन को बचाने के लिए क़ानून ही काफ़ी है।”
दल अ — पक्ष में। दल ब — विपक्ष में। हर दल को पाठ्यपुस्तक से कम से कम दो प्रमाण देने होंगे।
उत्तर देखिए
| दल अ (क़ानून काफ़ी है) | दल ब (क़ानून काफ़ी नहीं) |
|---|---|
| 1972 के अधिनियम से रक्षित जातियों की सूची बनी, शिकार पर रोक लगी और आवासों को क़ानूनी रक्षण मिला। | पाठ्यपुस्तक कहती है कि वनों का “प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन अपेक्षाकृत कठिन है” — यानी क़ानून लागू करना ही सबसे बड़ी समस्या है। |
| प्रोजेक्ट टाईगर (1973) विश्व की बेहतरीन परियोजनाओं में से एक है। | पवित्र पेड़ों के झुरमट और बिश्नोई गाँवों ने बिना किसी क़ानून के सदियों तक वन बचाए। |
| 1980, 1986 और 1991 में कीट तथा पौधे भी सूची में जोड़े गए। | अध्याय का अपना निष्कर्ष यही है — “स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए।” |
शिक्षक के लिएबहस के अंत में विजेता घोषित मत कीजिए। बोर्ड पर संयुक्त वन प्रबंधन लिख दीजिए और कहिए — “इसका नाम ही ‘संयुक्त’ है। यानी उत्तर दोनों में है।”
भाग ग — सृजनात्मकता (30%)
13अपने गाँव की ‘सोंचुरी’ 5 अंक
अलवर के पाँच गाँवों ने 1,200 हेक्टेयर भूमि को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचुरी’ घोषित किया और अपने नियम बनाए।
मान लीजिए आपके गाँव/मोहल्ले को भी ऐसा कुछ करना है। पाँच नियम बनाइए और हर नियम के आगे लिखिए कि वह किसकी रक्षा करेगा।
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-संकेतसबसे अच्छा उत्तर वह है जिसमें नियम लागू करने योग्य हों — जैसे “गर्मियों में पक्षियों के लिए हर घर के बाहर पानी का कटोरा”, “तालाब में कपड़े धोना मना”, “इस पेड़ की टहनी कोई नहीं तोड़ेगा”। सामान्य नारे (जैसे “पर्यावरण बचाओ”) पर कम अंक दीजिए।
14डिज़ाइन-चुनौती 5 अंक
आपको अपने विद्यालय के लिए एक पोस्टर बनाना है जिसका शीर्षक हो — “बाघ बचाओ, जंगल बचाओ”।
(क) पोस्टर बनाइए। (3 अंक)
(ख) नीचे तीन-चार वाक्यों में समझाइए कि आपने बाघ के साथ और क्या-क्या बनाया और क्यों। (2 अंक)
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-संकेतसबसे अच्छा उत्तर वह है जिसमें पोस्टर में सिर्फ़ बाघ न हो, बल्कि हिरण, पेड़, पक्षी और नदी भी हों — क्योंकि पाठ्यपुस्तक कहती है कि “बाघ संरक्षण का उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।” यानी बाघ एक छाता है, जिसके नीचे पूरा जंगल बचता है।
15प्रति-तथ्यात्मक (‘यदि… तो’) 5 अंक
नीचे तीन ‘यदि’ दिए गए हैं। हर एक के लिए दो-दो परिणाम कारण सहित लिखिए —
| # | यदि… | तो क्या होता? |
|---|---|---|
| 1 | यदि 1972 में वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम न बनता | |
| 2 | यदि पवित्र पेड़ों के झुरमट की परंपरा न होती | |
| 3 | यदि संयुक्त वन प्रबंधन में समुदाय को कोई लाभ न मिलता |
उत्तर देखिए
- 1 — रक्षित जातियों की कोई सूची न बनती, शिकार और व्यापार पर रोक न लगती, और शायद बाघ की तरह कई और जातियाँ विलुप्ति की कगार पर पहुँच जातीं। पर ध्यान रहे — समुदायों की परंपराएँ फिर भी कुछ वनों को बचाए रखतीं।
- 2 — बहुत सारे वन-भाग जो आज ‘मूल एवं कौमार्य रूप’ में बचे हैं, वे न बचते; और उनके साथ वहाँ की दुर्लभ प्रजातियाँ भी चली जातीं।
- 3 — समुदाय को जंगल बचाने में कोई फ़ायदा न दिखता, इसलिए वह उदासीन हो जाता — और तब JFM भी सिर्फ़ एक और सरकारी योजना बनकर रह जाता। यही इस व्यवस्था की सबसे चतुर बात है।
मूल्यांकन-नियमसबसे ऊँचे अंक उस उत्तर को दीजिए जो यह भी कहे कि “फिर भी कुछ न कुछ बच जाता, क्योंकि…” इतिहास और भूगोल दोनों में एक ही कारण पर पूरी कहानी नहीं टिकी होती।
16विचार-संयोजन 5 अंक
अध्याय 1 (संसाधन एवं विकास) और इस अध्याय को जोड़कर एक तालिका बनाइए —
| अध्याय 1 की बात | अध्याय 2 में वह कहाँ दिखती है |
|---|---|
| वन नवीकरण योग्य–जैव संसाधन हैं | |
| राष्ट्रीय वन नीति 1952 में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र वांछित है | |
| वनोन्मूलन भूमि निम्नीकरण का कारण है | |
| “संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं” |
उत्तर देखिए
- पहली — वन ख़ुद को दोबारा पैदा कर सकते हैं, इसीलिए चिपको आंदोलन में स्थानीय प्रजातियों से वनीकरण सफल हुआ।
- दूसरी — इसी लक्ष्य के कारण वनों को आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत वर्गों में बाँटकर उनका प्रबंधन किया जाता है।
- तीसरी — खनन से वनोन्मूलन होता है, इसीलिए सरिस्का के गाँववाले खनन के विरुद्ध संघर्षरत हैं।
- चौथी — यही सबसे गहरी कड़ी है: जब समुदाय वन को अपना मान लेता है (बिश्नोई, ओरण, पवित्र झुरमट), तभी वह वास्तव में ‘संसाधन’ बनकर बचता है।
17साक्षात्कार-परियोजना 5 अंक
अपने घर या मोहल्ले के किसी बुज़ुर्ग से बात कीजिए और नीचे की तालिका भरिए —
| प्रश्न | उनका उत्तर |
|---|---|
| आपके बचपन में यहाँ कौन-कौन से पेड़ थे? | |
| कौन-से जानवर या पक्षी दिखते थे जो अब नहीं दिखते? | |
| क्या कोई पेड़, तालाब या जानवर ऐसा था जिसे नुक़सान पहुँचाना मना था? | |
| वह मनाही किसने की थी — सरकार ने या गाँव ने? |
फिर पाँच-छह वाक्यों में लिखिए कि इस बातचीत से आपने क्या सीखा।
उत्तर देखिए
शिक्षक के लिएयह इस अध्याय की सबसे असरदार गतिविधि है। जब कोई बुज़ुर्ग कहता है कि “पहले यहाँ गिद्ध बहुत होते थे”, तो बच्चों को ‘जैव विविधता का ह्रास’ रटाना नहीं पड़ता।
18इतिहास और भूगोल को जोड़िए 5 अंक
अध्याय के अंत में गौतम बुद्ध (487 ई.पू.) का उद्धरण दिया गया है —
“पेड़ एक विशेष असीमित दयालु और उदारपूर्ण जीवधारी हैं जो अपने सतत् पोषण के लिए कोई माँग नहीं करता… यह सभी की रक्षा करता है और स्वयं पर कुल्हाड़ी चलाने वाले विनाशक को भी छाया प्रदान करता है।”
(क) इस उद्धरण की अंतिम पंक्ति का क्या अर्थ है? (2 अंक)
(ख) अध्याय की शुरुआत लेपचा लोकगीत से हुई थी और अंत इस उद्धरण से हुआ। लेखक ने ऐसा क्यों किया होगा? (3 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) पेड़ उस व्यक्ति को भी छाया देता है जो उसे काट रहा है — यानी वह बदले में कुछ नहीं माँगता, और नुक़सान पहुँचाने वाले से भी बदला नहीं लेता।
- (ख) दोनों ही जगह बात प्रकृति से लेन-देन के रिश्ते की नहीं, सम्मान के रिश्ते की है। लोकगीत में इनसान प्रकृति से कुछ माँगता नहीं, बल्कि उसे लौटाना चाहता है; और बुद्ध के उद्धरण में पेड़ बिना माँगे देता है। लेखक यह दिखाना चाहता है कि पूरे अध्याय के बीच में जो क़ानून, परियोजनाएँ और आँकड़े हैं, वे साधन हैं — पर असली बात यह रिश्ता है।
यह प्रश्न पूरे अध्याय का सबसे अच्छा समापन है।
अंक-विभाजन
| भाग | प्रश्न | कुल अंक |
|---|---|---|
| क — जागरूकता | 1 से 8 | 32 |
| ख — संवेदनशीलता | 9 से 12 | 16 |
| ग — सृजनात्मकता | 13 से 18 | 30 |
(यह वितरण सुझावात्मक है; परीक्षा में कुछ ही प्रश्न चुनकर पूछे जाएँगे।)
मूल्यांकन रूब्रिक
| स्तर | जागरूकता | संवेदनशीलता | सृजनात्मकता |
|---|---|---|---|
| प्रारंभिक | नाम और वर्ष बता पाता है, पर नयी स्थिति पर लागू नहीं कर पाता। | केवल एक पक्ष देख पाता है। | पाठ्यपुस्तक की बात ज्यों-की-त्यों दोहरा देता है। |
| विकासशील | तथ्य को नयी स्थिति पर लागू कर पाता है, पर कारण अधूरा होता है। | दूसरे पक्ष को पहचानता है, पर उसका कारण नहीं समझा पाता। | कुछ नया जोड़ता है, पर अपने क्षेत्र से नहीं जोड़ पाता। |
| दक्ष | तथ्य, कारण और उदाहरण — तीनों जोड़कर लिख पाता है। | दोनों पक्षों के कारण बता पाता है, बिना किसी को ‘ग़लत’ कहे। | अपने गाँव या ज़िले का असली उदाहरण देकर योजना बनाता है। |
| उन्नत | आँकड़ों से ख़ुद निष्कर्ष निकालता है और उनकी सीमा भी पहचानता है। | वन्य जीवों, वनवासियों और भावी पीढ़ी — तीनों के नज़रिये से सोच पाता है। | दूसरे अध्यायों और विषयों से जोड़कर मौलिक निष्कर्ष निकालता है। |
शिक्षक के लिए तीन सुझाव
- इस अध्याय के PARAKH प्रश्नों में ‘किसका फ़ायदा, किसका नुक़सान’ सबसे कारगर सवाल है। हर प्रश्न के बाद यह पूछिए — बाघ का, गाँववाले का, या सरकार का?
- प्रश्न 17 (साक्षात्कार) को गृहकार्य दीजिए और अगली कक्षा में उत्तर सुनवाइए। एक बच्चे का जवाब पूरी कक्षा को वह सिखा देता है जो पन्ने नहीं सिखा पाते।
- यह अध्याय सिर्फ़ जानवरों का नहीं, लोगों का भी है। चित्र 2.1 की तीनों तस्वीरों में आदिवासी महिलाएँ हैं। बच्चों से यह ज़रूर पूछिए कि “जब जंगल कटता है तो सिर्फ़ जानवर नहीं, कौन और बेघर होता है?”