इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | उत्तर की लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर लिखिए, भूमिका मत बाँधिए |
| 2 अंक | लगभग 30 से 40 शब्द, या 2 बिंदु | पहले एक वाक्य में उत्तर, फिर एक वाक्य में कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | लगभग 60 से 80 शब्द, या 3 बिंदु | तीन अलग-अलग बातें लिखिए; हर बात पूरे वाक्य में |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द, या 5 बिंदु | एक वाक्य की भूमिका, फिर पाँच बिंदु, फिर एक वाक्य का निष्कर्ष |
| मानचित्र | केवल सही जगह पर सही चिह्न | नाम साफ़ लिखिए और चिह्न बनाइए |
इस अध्याय के लिए तीन विशेष सलाह — 1. जहाँ भी ‘बहुउद्देशीय परियोजना’ का प्रश्न आए, वहाँ लाभ और हानि — दोनों लिखिए। केवल एक पक्ष लिखने पर आधे अंक कट जाते हैं। 2. हर बड़े उत्तर में एक आँकड़ा और एक जगह का नाम ज़रूर दीजिए। 3. ★राजस्थान वाले हिस्से पर सबसे ज़्यादा मेहनत कीजिए — टाँका, खादीन, जोहड़, पालर पानी और सरदार सरोवर। RBSE में यही सबसे ज़्यादा आता है।
भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
1पृथ्वी का कितना भाग जल से ढका है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तीन-चौथाई भाग।
2अलवणीय जल हमें किन दो स्रोतों से प्राप्त होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सतही अपवाह और भौमजल स्रोत से।
3जल का नवीकरण किस प्रक्रिया से होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जलीय चक्र से।
4भविष्यवाणी के अनुसार 2025 में कितने लोग जल की नितांत कमी झेलेंगे?
उत्तर देखिए
उत्तर: 20 करोड़ लोग।
5जल दुर्लभता के तीन मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: जल का अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल का असमान वितरण।
6इज़राइल की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 25 सेंटीमीटर।
7भारत की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 114 सेंटीमीटर।
8भारत में वर्षा के बाद लगभग कितने महीने पानी की कमी रहती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग नौ महीने।
9कोलकाता में कितनी वर्षा का रिकॉर्ड बना था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 180 मिलीमीटर।
10निजी कुओं और नलकूपों से सिंचाई का क्या दुष्परिणाम हो सकता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: भौम जलस्तर नीचे गिर सकता है, जिससे जल की उपलब्धता घटती है और भोजन सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है।
11उद्योगों को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति काफ़ी हद तक किससे होती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जल विद्युत से।
12जल को प्रदूषित करने वाले चार मुख्य स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, कीटनाशक और कृषि में प्रयुक्त उर्वरक।
13जल जीवन मिशन का लक्ष्य क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को लंबी अवधि के आधार पर नियमित रूप से प्रति व्यक्ति 55 लीटर के सेवा स्तर पर पीने योग्य पाइप का पानी उपलब्ध कराना।
14जल जीवन मिशन में प्रति व्यक्ति कितने लीटर जल का सेवा स्तर तय है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 55 लीटर।
15अटल भूजल योजना कितने राज्यों में लागू है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सात राज्यों में।
16अटल भूजल योजना वाले सात राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश।
17अटल भूजल योजना कितने ज़िलों और ग्राम पंचायतों में लागू है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 80 ज़िलों के 229 प्रशासनिक ब्लॉकों/तालुकाओं के 8220 जल की कमी वाले ग्राम पंचायतों में।
18अटल जल का एक प्रमुख पहलू क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जलसंरक्षण और विवेकपूर्ण जल प्रबंधन के मौजूदा ढर्रे के प्रति जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना।
19ईसा से एक शताब्दी पहले जल संग्रहण तंत्र कहाँ बनाया गया था?
उत्तर देखिए
उत्तर: इलाहाबाद के नज़दीक श्रिंगवेरा में, गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए।
20किसके समय बृहत् स्तर पर बाँध, झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: चन्द्रगुप्त मौर्य के समय।
21भोपाल झील कब बनाई गई और उसका क्या महत्त्व है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 11वीं शताब्दी में; यह अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक थी।
22हौज़ खास किसने, कब और कहाँ बनवाया?
उत्तर देखिए
उत्तर: इल्तुतमिश ने 14वीं शताब्दी में दिल्ली के सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई के लिए।
23बाँध की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बाँध बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा है, जो आमतौर पर जलाशय, झील अथवा जलभरण बनाती है।
24बाँध का अर्थ किससे लिया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जलाशय से, न कि इसके ढाँचे से।
25संरचना और प्रयुक्त पदार्थों के आधार पर बाँध कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: लकड़ी के बाँध, तटबंध बाँध और पक्का बाँध।
26बाँधों को बहुउद्देशीय परियोजनाएँ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि इनमें एकत्रित जल के अनेकों उपयोग समन्वित होते हैं।
27बहुउद्देशीय परियोजनाओं के कोई चार उद्देश्य बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और मछली पालन (इनके अलावा घरेलू व औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, मनोरंजन और आंतरिक नौचालन भी)।
28भाखड़ा-नांगल परियोजना किस बेसिन में है और किन कामों के लिए है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सतलुज-ब्यास बेसिन में; यह जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम आती है।
29हीराकुड परियोजना किस बेसिन में है और उसमें किसका समन्वय है?
उत्तर देखिए
उत्तर: महानदी बेसिन में; इसमें जलसंरक्षण और बाढ़ नियंत्रण का समन्वय है।
30बाँधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ किसने कहा था?
उत्तर देखिए
उत्तर: जवाहरलाल नेहरू ने।
31दामोदर नदी को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘शोक की नदी’ के नाम से।
32भादु गीत किस क्षेत्र में गाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: दामोदर घाटी क्षेत्र में।
33बाँध बनाने से नदी के प्राकृतिक बहाव पर क्या असर होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध हो जाता है, जिससे तलछट बहाव कम हो जाता है और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली पर जमा होता रहता है।
34बाँधों से जलीय जीवों को क्या नुक़सान होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं, जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का नदियों में स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है।
35सिंचाई से मृदा को कौन-सा गंभीर पारिस्थितिकीय नुक़सान होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मृदाओं का लवणीकरण।
36बाँधों से जुड़ी सबसे बड़ी विडंबना क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे ही बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं।
37तलछट के बाढ़ के मैदानों तक न पहुँचने से क्या होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तलछट एक प्राकृतिक उर्वरक है, इसलिए उसके न पहुँचने से भूमि निम्नीकरण की समस्याएँ बढ़ती हैं।
38सरदार सरोवर बाँध कहाँ और किस नदी पर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: गुजरात में नर्मदा नदी पर।
39सरदार सरोवर परियोजना में कौन-से चार राज्य शामिल हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान।
40सरदार सरोवर से राजस्थान के किन ज़िलों को सिंचाई मिलेगी और कितने क्षेत्र में?
उत्तर देखिए
उत्तर: बाड़मेर और जालौर ज़िलों के 2,46,000 हेक्टेयर क्षेत्र में।
41सरदार सरोवर से गुजरात में कितने क्षेत्र को सिंचाई मिलेगी?
उत्तर देखिए
उत्तर: 15 ज़िलों के 3112 गाँवों की 18.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को।
42कृष्णा-गोदावरी विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: महाराष्ट्र सरकार द्वारा कोयना पर जल विद्युत परियोजना के लिए बाँध बनाकर जल की दिशा परिवर्तन करने से, जिस पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारों ने आपत्ति जताई।
43प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का प्रसिद्ध नारा क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘प्रति बूंद अधिक फसल’।
44‘हर खेत को पानी’ किस योजना से जुड़ा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से।
45वर्षाजल संग्रहण तंत्र को बहुउद्देशीय परियोजनाओं का विकल्प क्यों माना जा रहा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि ये सामाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक तौर पर अधिक व्यावहारिक हैं।
46पश्चिमी हिमालय में सिंचाई के लिए बनाई जाने वाली वाहिकाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘गुल’ अथवा ‘कुल’।
47गुल या कुल का क्या काम था?
उत्तर देखिए
उत्तर: नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए जल पहुँचाना।
48पश्चिम बंगाल में बाढ़ के मैदान में लोग क्या बनाते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहिकाएँ।
49राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में वर्षा जल एकत्रित करने वाले गड्ढों को क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘खादीन’।
50अन्य क्षेत्रों में ऐसे गड्ढों को क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: ‘जोहड़’।
51टाँका क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए बनाया जाने वाला भूमिगत टैंक।
52टाँका राजस्थान के किन क्षेत्रों में मुख्यत: पाया जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में।
53फलोदी के एक घर के टाँके का माप क्या था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 6.1 मीटर गहरा, 4.27 मीटर लंबा और 2.44 मीटर चौड़ा।
54टाँका कहाँ बनाया जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: मुख्य घर या आँगन में, और वह घरों की ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़ा होता था।
55वर्षा का पहला जल क्यों संग्रहित नहीं किया जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि वह छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था; इसके बाद होने वाली वर्षा का जल संग्रह किया जाता था।
56टाँके में जल कब तक संग्रहित रह सकता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: अगली वर्षा ऋतु तक।
57‘पालर पानी’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: वर्षाजल को, जिसे इन क्षेत्रों में प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है।
58कुछ घरों में टाँकों के साथ भूमिगत कमरे क्यों बनाए जाते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि जल का यह स्रोत इन कमरों को ठंडा रखता था, जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती थी।
59आज पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षाजल संग्रहण की रीति क्यों कम होती जा रही है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण।
60फिर भी कुछ घरों में टाँके क्यों बचे हुए हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है।
61छत वर्षाजल संग्रहण में जल का छनन किससे किया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: रेत और ईंट से।
62छत का वर्षाजल एकत्रित करने के लिए किस पाइप का इस्तेमाल होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पी.वी.सी. पाइप का।
63हौज़ से अतिरिक्त जल कहाँ ले जाया जाता है और क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तर: कुएँ तक, ताकि कुएँ का जल भूमिगत जल का पुनर्भरण कर सके।
64शिलांग किस राज्य की राजधानी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय की।
65चेरापूँजी और मॉसिनराम शिलांग से कितनी दूर हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 55 किलोमीटर।
66शिलांग में छत वर्षा जल संग्रहण से घरेलू माँग का कितना हिस्सा पूरा होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 15 से 25 प्रतिशत।
67‘वर्षा जल संपन्न गाँव’ की ख्याति किस गाँव ने अर्जित की है?
उत्तर देखिए
उत्तर: कर्नाटक के मैसूर ज़िले के गंडाथूर गाँव ने।
68गंडाथूर में कितने घरों में छत वर्षाजल संग्रहण की व्यवस्था है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 200 घरों में।
69गंडाथूर में वार्षिक वर्षा और संग्रहण दक्षता कितनी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 1,000 मिलीमीटर वर्षा और 10 भराई के साथ 80 प्रतिशत संग्रहण दक्षता।
70गंडाथूर के 200 घर हर वर्ष कितना जल एकत्रित करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 10,00,000 लीटर।
71बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली कहाँ प्रचलित है और कितनी पुरानी है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय में; यह लगभग 200 वर्ष पुरानी विधि है।
72बाँस पाइप में कितना सिंचाई पानी आता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लगभग 18 से 20 लीटर।
73बाँस ड्रिप में अंत में पानी का बहाव कितना कर दिया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: 20 से 80 बूँद प्रति मिनट।
74बाँस के पाइपों से जल पहाड़ के निचले स्थानों तक किस बल से पहुँचाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: गुरुत्वाकर्षण द्वारा।
75किस राज्य में हर घर में छत वर्षाजल संग्रहण ढाँचा बनाना क़ानूनन आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तमिलनाडु में।
भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)
1व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है? (अभ्यास प्रश्न 2-i)
उत्तर देखिए
उत्तर: जल हमें सतही अपवाह और भौमजल स्रोत से प्राप्त होता है, जिनका लगातार नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है। सारा जल जलीय चक्र में गतिशील रहता है, जिससे जल का नवीकरण सुनिश्चित होता है और वह बार-बार उपयोग योग्य बनता रहता है।
2जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं? (अभ्यास प्रश्न 2-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर: जल दुर्लभता का अर्थ है आवश्यकता के अनुसार उपयोग योग्य जल का उपलब्ध न होना; यह केवल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि प्रचुर जल वाले शहरों में भी हो सकती है। इसके मुख्य कारण हैं — जल का अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल का असमान वितरण; इसके साथ बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, शहरीकरण और जल का प्रदूषित होना भी इसके कारण हैं।
3इज़राइल और भारत की तुलना से क्या सिद्ध होता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इज़राइल जैसे 25 सेंटीमीटर औसत वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है, जबकि 114 सेंटीमीटर औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश में प्रति वर्ष किसी न किसी भाग में सूखा अवश्य पड़ता है। इससे सिद्ध होता है कि समस्या पानी की मात्रा की नहीं बल्कि समुचित जलप्रबंधन की है, क्योंकि हमारे यहाँ वर्षा का जल नदी-नालों में तेज़ी से बहकर समुद्र में चला जाता है और लगभग नौ महीने पानी की कमी रहती है।
4मात्रात्मक और गुणात्मक जल दुर्लभता में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: मात्रात्मक दुर्लभता में जल की मात्रा ही कम होती है, जैसे कम वर्षा वाले या सूखाग्रस्त क्षेत्रों में। गुणात्मक दुर्लभता में जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, परंतु वह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों तथा उर्वरकों से प्रदूषित होने के कारण मानव उपयोग के लिए ख़तरनाक होता है।
5निजी नलकूपों से सिंचाई का क्या दुष्परिणाम हो सकता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बहुत से किसान अपने निजी कुओं और नलकूपों से सिंचाई करके उत्पादन तो बढ़ा रहे हैं, परंतु इसके कारण भौम जलस्तर नीचे गिर सकता है। इससे लोगों के लिए जल की उपलब्धता में कमी हो सकती है और भोजन सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है।
6औद्योगीकरण से जल संसाधनों पर क्या दबाव पड़ा है?
उत्तर देखिए
उत्तर: उद्योगों की बढ़ती हुई संख्या के कारण अलवणीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि उद्योगों को अत्यधिक जल के अलावा उन्हें चलाने के लिए ऊर्जा की भी आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति काफ़ी हद तक जल विद्युत से होती है। इसके अलावा शहरी आवास समितियों और कालोनियों ने भी जल पूर्ति के लिए अपने नलकूप स्थापित कर लिए हैं, जिससे शहरों में जल संसाधनों का अति शोषण हो रहा है।
7जल जीवन मिशन के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भारत सरकार ने जल जीवन मिशन की घोषणा करके ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और विशेष रूप से जीवनयापन को आसान बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसका लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को लंबी अवधि के आधार पर नियमित रूप से प्रति व्यक्ति 55 लीटर के सेवा स्तर पर पीने योग्य पाइप के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
8अटल भूजल योजना के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: अटल भूजल योजना (अटल जल) सात राज्यों — गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश — के 80 ज़िलों के 229 प्रशासनिक ब्लॉकों के 8220 जल की कमी वाले ग्राम पंचायतों में कार्यान्वित की गई है, जो इन राज्यों के जल की कमी वाले ब्लॉकों का लगभग 37 प्रतिशत है। इसका एक प्रमुख पहलू जलसंरक्षण और विवेकपूर्ण जल प्रबंधन के मौजूदा ढर्रे के प्रति जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना है।
9जल संरक्षण और प्रबंधन क्यों आवश्यक है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह इसलिए आवश्यक है ताकि हम स्वयं को स्वास्थ्य संबंधी ख़तरों से बचाएँ, खाद्यान्न सुरक्षा तथा अपनी आजीविका और उत्पादक क्रियाओं की निरंतरता सुनिश्चित करें, और हमारे प्राकृतिक पारितंत्रों को निम्नीकृत होने से बचाएँ। जल संसाधनों के अतिशोषण और कुप्रबंधन से इन संसाधनों का ह्रास हो सकता है और पारिस्थितिकी संकट की समस्या पैदा हो सकती है।
10प्राचीन भारत की किन्हीं तीन जलीय कृतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ईसा से एक शताब्दी पहले इलाहाबाद के नज़दीक श्रिंगवेरा में गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र बनाया गया था, और चन्द्रगुप्त मौर्य के समय बृहत् स्तर पर बाँध, झील तथा सिंचाई तंत्रों का निर्माण हुआ। 11वीं शताब्दी में अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक भोपाल झील बनाई गई, और 14वीं शताब्दी में इल्तुतमिश ने दिल्ली के सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई के लिए हौज़ खास बनवाया।
11बाँध किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: बाँध बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा है, जो आमतौर पर जलाशय, झील अथवा जलभरण बनाती है। बाँध का अर्थ जलाशय से लिया जाता है न कि इसके ढाँचे से; अधिकतर बाँधों में एक ढलवाँ हिस्सा होता है जिसके ऊपर से या अन्दर से जल बहता है।
12बाँधों को बहुउद्देशीय परियोजनाएँ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि आजकल बाँध सिर्फ़ सिंचाई के लिए नहीं बनाए जाते, अपितु उनका उद्देश्य विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौचालन और मछली पालन भी है। इसलिए इन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है, जहाँ एकत्रित जल के अनेकों उपयोग समन्वित होते हैं।
13भाखड़ा-नांगल और हीराकुड परियोजनाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: सतलुज-ब्यास बेसिन में भाखड़ा-नांगल परियोजना जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम में आती है। इसी प्रकार महानदी बेसिन में हीराकुड परियोजना में जलसंरक्षण और बाढ़ नियंत्रण का समन्वय है।
14नेहरू ने बाँधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ क्यों कहा था?
उत्तर देखिए
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद शुरू की गई बहुउद्देशीय परियोजनाओं को उपनिवेशन काल में बनी बाधाओं को पार करते हुए देश को विकास और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने वाले वाहन के रूप में देखा गया। नेहरू का मानना था कि इन परियोजनाओं के चलते कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगीकरण और नगरीय अर्थव्यवस्था समन्वित रूप से विकास करेगी।
15बाँध बनाने से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: बाँध बनाने से नदी का प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है, तलछट बहाव कम हो जाता है और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली पर जमा होता रहता है, जिससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और जलीय जीव-आवासों में भोजन की कमी हो जाती है। इसके अलावा बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं, जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है।
16बाँधों से जुड़ी सबसे बड़ी विडंबना क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह एक विडंबना ही है कि जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे ही बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं। इसके अलावा अत्यधिक वर्षा होने की दशा में तो बड़े बाँध भी कई बार बाढ़ नियंत्रण में असफल रहते हैं।
17सरदार सरोवर परियोजना से राजस्थान को क्या लाभ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: सरदार सरोवर परियोजना से राजस्थान के सामरिक महत्व के रेगिस्तानी ज़िलों बाड़मेर और जालौर के 2,46,000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होगी। यह इसलिए और भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान में संपूर्ण कमांड क्षेत्र सूखा प्रवण है और सुनिश्चित जल की उपलब्धता इस क्षेत्र को सूखारोधी बना देगी।
18कृष्णा-गोदावरी विवाद क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इस विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र सरकार द्वारा कोयना पर जल विद्युत परियोजना के लिए बाँध बनाकर जल की दिशा परिवर्तन करने से हुई, जिस पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारों ने आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि इससे इन राज्यों में पड़ने वाले नदी के निचले हिस्सों में जल प्रवाह कम हो जाएगा और कृषि तथा उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा।
19प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के उद्देश्य बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इसके उद्देश्य हैं — खेत में पानी की वास्तविक उपलब्धता को बढ़ाना और सुनिश्चित सिंचाई (हर खेत को पानी) के तहत बुवाई योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, तथा अपव्यय कम करके खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करना। इसके अलावा सिंचाई और अन्य जल बचत प्रौद्योगिकियों (प्रति बूंद अधिक फसल) तथा सतत जल संरक्षण प्रणालियों को अपनाना भी इसका उद्देश्य है।
20‘गुल’ या ‘कुल’ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में, विशेषकर पश्चिमी हिमालय में, लोगों ने ‘गुल’ अथवा ‘कुल’ जैसी वाहिकाएँ बनाई थीं। ये नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए जल पहुँचाती थीं।
21खादीन और जोहड़ क्या हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे, ताकि मृदा को सिंचित किया जा सके और संरक्षित जल को खेती के लिए उपयोग में लाया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में इन्हें ‘खादीन’ और अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ कहा जाता है।
22टाँका क्या है और कहाँ पाया जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: टाँका राजस्थान के अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में, पीने का पानी संग्रहित करने के लिए बनाया जाने वाला भूमिगत टैंक है। इसका आकार एक बड़े कमरे जितना हो सकता है; फलोदी में एक घर में 6.1 मीटर गहरा, 4.27 मीटर लंबा और 2.44 मीटर चौड़ा टाँका था।
23टाँके में वर्षा का पहला जल क्यों संग्रहित नहीं किया जाता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि वर्षा का पहला जल छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था, इसलिए उसे संग्रहित नहीं किया जाता था। इसके बाद होने वाली वर्षा का ही जल संग्रह किया जाता था, जिससे संग्रहित जल साफ़ रहता था।
24‘पालर पानी’ क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजस्थान के इन क्षेत्रों में वर्षाजल को ‘पालर पानी’ कहा जाता है। इसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है।
25टाँकों के साथ भूमिगत कमरे बनाने का क्या लाभ था?
उत्तर देखिए
उत्तर: कुछ घरों में टाँकों के साथ भूमिगत कमरे भी बनाए जाते थे। इसका कारण यह था कि जल का यह स्रोत इन कमरों को भी ठंडा रखता था, जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती थी।
26आज राजस्थान में छत वर्षाजल संग्रहण की स्थिति क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह दुख की बात है कि आज पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षाजल संग्रहण की रीति इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कम होती जा रही है। हालाँकि कुछ घरों में टाँकों की सुविधा अभी भी है, क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है।
27शिलांग का उदाहरण क्या सिद्ध करता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय की राजधानी शिलांग विश्व की सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों चेरापूँजी और मॉसिनराम से केवल 55 किलोमीटर दूर है, फिर भी यह शहर पीने के जल की गंभीर समस्या का सामना करता है। इससे सिद्ध होता है कि केवल अधिक वर्षा होने से जल की समस्या हल नहीं होती — इसीलिए यहाँ लगभग हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है, जिससे घरेलू माँग का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा पूरा होता है।
28गंडाथूर गाँव के बारे में लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: कर्नाटक के मैसूर ज़िले में स्थित सूदूर गाँव गंडाथूर में ग्रामीणों ने अपने घरों में जल आवश्यकता पूर्ति के लिए छत वर्षाजल संग्रहण की व्यवस्था की है; गाँव के लगभग 200 घरों में यह व्यवस्था है और गाँव ने ‘वर्षा जल संपन्न गाँव’ की ख्याति अर्जित की है। यहाँ हर वर्ष लगभग 1,000 मिलीमीटर वर्षा होती है और 10 भराई के साथ संग्रहण दक्षता 80 प्रतिशत है, जिससे 200 घरों द्वारा हर वर्ष लगभग 10,00,000 लीटर जल एकत्रित किया जाता है।
29बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बाँस द्वारा बने पाइप से एकत्रित करके ले जाने की 200 वर्ष पुरानी विधि प्रचलित है, जिसमें लगभग 18 से 20 लीटर सिंचाई पानी बाँस पाइप में आता है और उसे सैकड़ों मीटर की दूरी तक ले जाया जाता है। अंत में पानी का बहाव 20 से 80 बूँद प्रति मिनट तक घटाकर पौधे की जड़ों के निकट छोड़ दिया जाता है, और यह पूरा काम गुरुत्वाकर्षण से होता है।
30तमिलनाडु का उदाहरण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर देखिए
उत्तर: तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ पूरे राज्य में हर घर में छत वर्षाजल संग्रहण ढाँचों का बनाना आवश्यक कर दिया गया है। इस संदर्भ में दोषी व्यक्तियों पर क़ानूनी कार्यवाही हो सकती है, यानी वहाँ जल संग्रहण केवल सलाह नहीं बल्कि क़ानून है।
भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)
1बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें। (अभ्यास प्रश्न 2-iii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
| लाभ | हानियाँ |
|---|---|
| सिंचाई, विद्युत उत्पादन, घरेलू व औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौचालन और मछली पालन | नदी का प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है और तलछट जलाशय की तली पर जमा होता है, जिससे नदी का तल चट्टानी हो जाता है |
| कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा औद्योगीकरण का समन्वित विकास; इसीलिए नेहरू ने इन्हें ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा | नदियाँ टुकड़ों में बँट जाती हैं, जिससे अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का स्थानांतरण अवरुद्ध होता है |
| सूखा प्रवण और मरुस्थलीय क्षेत्रों तक जल पहुँचता है — जैसे सरदार सरोवर से बाड़मेर और जालौर तक | मृदाओं का लवणीकरण; बड़े स्तर पर विस्थापन; भूकंप की संभावना; तथा जल-जनित बीमारियाँ और प्रदूषण |
और सबसे बड़ी विडंबना — जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनते हैं, तलछट जमा होने से वे ही बाढ़ का कारण बन जाते हैं।
2जल दुर्लभता के कारणों की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- जल की कमी सुनते ही हमें कम वर्षा वाले क्षेत्र याद आते हैं, और यह सच है कि वार्षिक तथा मौसमी परिवर्तन के कारण जल की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता है; परंतु अधिकतया जल की कमी उसके अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में असमान वितरण के कारण होती है।
- बढ़ती जनसंख्या के लिए जल घरेलू उपयोग में ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी चाहिए, और सिंचित कृषि में जल का सबसे ज़्यादा उपयोग होता है; इसके अलावा औद्योगीकरण और शहरीकरण ने भी अलवणीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है।
- जल की दुर्लभता उसकी ख़राब गुणवत्ता के कारण भी हो सकती है, क्योंकि प्रचुर जल होने पर भी वह घरेलू तथा औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और उर्वरकों से प्रदूषित होकर मानव उपयोग के लिए ख़तरनाक हो जाता है।
3भारत में जल संरक्षण से जुड़ी तीन प्रमुख सरकारी योजनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को लंबी अवधि के आधार पर नियमित रूप से प्रति व्यक्ति 55 लीटर के सेवा स्तर पर पीने योग्य पाइप के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
- अटल भूजल योजना (अटल जल) सात राज्यों — गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश — के 80 ज़िलों के 229 ब्लॉकों के 8220 ग्राम पंचायतों में लागू है, जो कुल जल-कमी वाले ब्लॉकों का लगभग 37 प्रतिशत है; इसका प्रमुख पहलू जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना है।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य खेत में पानी की उपलब्धता बढ़ाना, ‘हर खेत को पानी’ के तहत बुवाई योग्य क्षेत्र का विस्तार, पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ जैसी जल बचत प्रौद्योगिकियों को अपनाना है।
4प्राचीन भारत की जलीय कृतियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- ईसा से एक शताब्दी पहले इलाहाबाद के नज़दीक श्रिंगवेरा में गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र बनाया गया था, और चन्द्रगुप्त मौर्य के समय बृहत् स्तर पर बाँध, झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण करवाया गया।
- कलिंग (ओडिशा), नागार्जुनकोंडा (आंध्र प्रदेश), बेन्नूर (कर्नाटक) और कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में उत्कृष्ट सिंचाई तंत्र होने के सबूत मिलते हैं।
- अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक भोपाल झील 11वीं शताब्दी में बनाई गई, और 14वीं शताब्दी में इल्तुतमिश ने दिल्ली के सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई के लिए हौज़ खास बनवाया।
5छत वर्षाजल संग्रहण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- सबसे पहले पी.वी.सी. पाइप का इस्तेमाल करके छत का वर्षाजल एकत्रित किया जाता है, और फिर रेत तथा ईंट का प्रयोग करके जल का छनन किया जाता है।
- इसके बाद भूमिगत पाइप के द्वारा जल हौज़ तक ले जाया जाता है, जहाँ से इसे तुरंत प्रयोग किया जा सकता है।
- हौज़ से अतिरिक्त जल कुएँ तक ले जाया जाता है, और कुएँ का जल भूमिगत जल का पुनर्भरण करता है, जिससे बाद में भी इस जल का उपयोग किया जा सकता है।
6वर्षा जल संग्रहण के पारंपरिक तरीक़ों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में, विशेषकर पश्चिमी हिमालय में, लोगों ने ‘गुल’ अथवा ‘कुल’ जैसी वाहिकाएँ बनाईं, जो नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए जल पहुँचाती थीं।
- पश्चिमी भारत, विशेषकर राजस्थान में पीने का जल एकत्रित करने के लिए ‘छत वर्षा जल संग्रहण’ का तरीक़ा आम था, जबकि पश्चिम बंगाल में बाढ़ के मैदान में लोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहिकाएँ बनाते थे।
- शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे, ताकि मृदा सिंचित हो सके; राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में इन्हें ‘खादीन’ और अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ कहा जाता है।
7आधुनिक काल में वर्षाजल संग्रहण के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- मेघालय की राजधानी शिलांग में लगभग हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है, जिससे घरेलू जल आवश्यकता की कुल माँग के लगभग 15 से 25 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति होती है; यह इसलिए भी रोचक है क्योंकि विश्व की सबसे अधिक वर्षा वाले चेरापूँजी और मॉसिनराम वहाँ से केवल 55 किलोमीटर दूर हैं।
- कर्नाटक के मैसूर ज़िले के गंडाथूर गाँव के लगभग 200 घरों में यह व्यवस्था है और गाँव ने ‘वर्षा जल संपन्न गाँव’ की ख्याति अर्जित की है; यहाँ 1,000 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा और 80 प्रतिशत संग्रहण दक्षता से हर वर्ष लगभग 10,00,000 लीटर जल एकत्रित होता है।
- तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ पूरे राज्य में हर घर में छत वर्षाजल संग्रहण ढाँचों का बनाना आवश्यक कर दिया गया है और दोषी व्यक्तियों पर क़ानूनी कार्यवाही हो सकती है।
भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)
1राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 3-i)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- राजस्थान के अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में, लगभग हर घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा ‘टाँका’ हुआ करते थे; इसका आकार एक बड़े कमरे जितना हो सकता है और फलोदी में एक घर में 6.1 मीटर गहरा, 4.27 मीटर लंबा और 2.44 मीटर चौड़ा टाँका था।
- टाँका वहाँ के सुविकसित छत वर्षाजल संग्रहण तंत्र का अभिन्न हिस्सा होता था, जिसे मुख्य घर या आँगन में बनाया जाता था और वह घरों की ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़ा होता था; छत से वर्षा का पानी इन नलों से होकर भूमिगत टाँके तक पहुँचता था।
- एक महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि वर्षा का पहला जल छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था और उसे संग्रहित नहीं किया जाता था; इसके बाद होने वाली वर्षा का ही जल संग्रह किया जाता था, जिससे पानी साफ़ रहता था।
- टाँके में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता था, जिससे यह जल की कमी वाली ग्रीष्म ऋतु तक पीने का जल उपलब्ध करवाने वाला स्रोत बन जाता था; वर्षाजल को इन क्षेत्रों में ‘पालर पानी’ कहा जाता है और उसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप माना जाता है।
- कुछ घरों में तो टाँकों के साथ भूमिगत कमरे भी बनाए जाते थे, क्योंकि जल का यह स्रोत इन कमरों को ठंडा रखता था, जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती थी।
- इसके अलावा राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए ‘खादीन’ और अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ नामक गड्ढे बनाए जाते थे, ताकि मृदा को सिंचित किया जा सके और संरक्षित जल खेती में काम आए।
निष्कर्ष — आज पश्चिमी राजस्थान में यह रीति इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कम होती जा रही है, हालाँकि कुछ घरों में टाँके अब भी हैं क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है।
2परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है? (अभ्यास प्रश्न 3-ii)
उत्तर देखिए
उत्तर:
- बहुउद्देशीय परियोजनाओं के अलाभप्रद असर और उन पर उठे विवादों के चलते बहुत से लोगों का मानना है कि वर्षाजल संग्रहण तंत्र इनके सामाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक तौर पर व्यावहारिक विकल्प हो सकते हैं।
- छत वर्षाजल संग्रहण आज एक विकसित तकनीक बन गया है — पी.वी.सी. पाइप से छत का जल एकत्रित किया जाता है, रेत और ईंट से उसका छनन होता है, भूमिगत पाइप से जल हौज़ तक जाता है जहाँ से तुरंत उपयोग हो सकता है, और अतिरिक्त जल कुएँ तक ले जाकर भूमिगत जल का पुनर्भरण किया जाता है।
- कर्नाटक के मैसूर ज़िले के गंडाथूर गाँव के लगभग 200 घरों में यह व्यवस्था है और उसने ‘वर्षा जल संपन्न गाँव’ की ख्याति अर्जित की है; वहाँ 1,000 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा और 10 भराई के साथ 80 प्रतिशत संग्रहण दक्षता से हर वर्ष लगभग 10,00,000 लीटर जल एकत्रित होता है।
- मेघालय की राजधानी शिलांग में लगभग हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण है, जिससे घरेलू जल माँग के लगभग 15 से 25 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति होती है — और यह इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि विश्व की सबसे अधिक वर्षा वाले चेरापूँजी और मॉसिनराम वहाँ से केवल 55 किलोमीटर दूर हैं।
- मेघालय में 200 वर्ष पुरानी बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली आज भी प्रचलित है, जिसमें नदियों और झरनों का 18 से 20 लीटर पानी बाँस के पाइपों से सैकड़ों मीटर दूर ले जाया जाता है और अंत में 20 से 80 बूँद प्रति मिनट की दर से पौधे की जड़ों के पास छोड़ा जाता है; यह पूरा काम गुरुत्वाकर्षण से होता है।
- तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ पूरे राज्य में हर घर में छत वर्षाजल संग्रहण ढाँचों का बनाना क़ानूनन आवश्यक कर दिया गया है और दोषी व्यक्तियों पर क़ानूनी कार्यवाही हो सकती है।
निष्कर्ष — इस प्रकार पुराने पारंपरिक ज्ञान को नयी तकनीक और क़ानून के साथ जोड़कर आज भी जल संरक्षण और भंडारण सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
3“जल दुर्लभता केवल कम वर्षा का परिणाम नहीं है।” इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- जल की कमी की बात करते ही हमारे मानस पटल पर राजस्थान के मरुस्थल और मटके लिए पनिहारिनों के चित्र आ जाते हैं; यह सच है कि वर्षा में वार्षिक और मौसमी परिवर्तन के कारण जल की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता है।
- परंतु अधिकतया जल की कमी उसके अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में असमान वितरण के कारण होती है; यही कारण है कि प्रचुर जल संसाधन वाले हमारे कई शहरों में भी जल की दुर्लभता है।
- बढ़ती जनसंख्या के लिए अधिक अनाज चाहिए, जिसके लिए सिंचित क्षेत्र बढ़ाना पड़ता है और सिंचित कृषि में जल का सबसे ज़्यादा उपयोग होता है; निजी कुओं और नलकूपों से भौम जलस्तर नीचे गिर रहा है।
- औद्योगीकरण और शहरीकरण से भी दबाव बढ़ा है, क्योंकि उद्योगों को जल के साथ ऊर्जा भी चाहिए जिसकी पूर्ति जल विद्युत से होती है, और शहरी कालोनियों ने अपने नलकूप लगा लिए हैं।
- दुर्लभता जल की ख़राब गुणवत्ता के कारण भी होती है — प्रचुर जल होने पर भी वह घरेलू व औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और उर्वरकों से प्रदूषित होकर मानव उपयोग के लिए ख़तरनाक हो जाता है।
निष्कर्ष — इसका सबसे अच्छा प्रमाण यह है कि इज़राइल में मात्र 25 सेंटीमीटर वर्षा होकर भी जल का अभाव नहीं है, जबकि भारत में 114 सेंटीमीटर वर्षा होकर भी हर वर्ष कहीं न कहीं सूखा पड़ता है — यानी समस्या पानी की नहीं, समुचित जलप्रबंधन की है।
4बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं का वर्णन कीजिए और बताइए कि उन्हें ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ क्यों कहा गया।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- बाँध बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा है, जो जलाशय, झील अथवा जलभरण बनाती है; बाँध का अर्थ जलाशय से लिया जाता है न कि इसके ढाँचे से।
- परम्परागत बाँध नदियों और वर्षा जल को इकट्ठा करके बाद में उसे खेतों की सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाते थे, परंतु आजकल बाँध सिर्फ़ सिंचाई के लिए नहीं बनाए जाते।
- इनके उद्देश्य हैं — सिंचाई, विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौचालन और मछली पालन; इसीलिए इन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है, जहाँ एकत्रित जल के अनेकों उपयोग समन्वित होते हैं।
- उदाहरण के तौर पर सतलुज-ब्यास बेसिन में भाखड़ा-नांगल परियोजना जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम आती है, और महानदी बेसिन में हीराकुड परियोजना में जलसंरक्षण तथा बाढ़ नियंत्रण का समन्वय है।
- स्वतंत्रता के बाद शुरू की गई समन्वित जल संसाधन प्रबंधन उपागम पर आधारित इन परियोजनाओं को उपनिवेशन काल में बनी बाधाओं को पार करते हुए देश को विकास और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने वाले वाहन के रूप में देखा गया।
इसीलिए जवाहरलाल नेहरू गर्व से बाँधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा करते थे; उनका मानना था कि इन परियोजनाओं के चलते कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगीकरण और नगरीय अर्थव्यवस्था समन्वित रूप से विकास करेगी।
5बहुउद्देशीय परियोजनाएँ आलोचना का विषय क्यों बन गई हैं? विस्तार से लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- नदियों पर बाँध बनाने और उनका बहाव नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है, जिससे तलछट बहाव कम हो जाता है और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली पर जमा होता रहता है; इससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और जलीय जीव-आवासों में भोजन की कमी हो जाती है।
- बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं, जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का नदियों में स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है; और बाढ़ के मैदान में बनाए जाने वाले जलाशयों से वहाँ की वनस्पति तथा मिट्टियाँ जल में डूबकर कालांतर में अपघटित हो जाती हैं।
- सिंचाई ने कई क्षेत्रों में फसल प्रारूप परिवर्तित कर दिया है, जहाँ किसान जलगहन और वाणिज्य फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं; इससे मृदाओं के लवणीकरण जैसे गंभीर पारिस्थितिकीय परिणाम हो सकते हैं।
- इनसे अंतर्राज्यीय विवाद भी पैदा हुए — जैसे कृष्णा-गोदावरी विवाद, जो महाराष्ट्र द्वारा कोयना पर बाँध बनाकर जल की दिशा बदलने पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की आपत्ति से शुरू हुआ।
- सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकतर आपत्तियाँ इन परियोजनाओं के अपने उद्देश्यों में विफल हो जाने पर हैं — यह एक विडंबना है कि जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे ही बाढ़ का कारण बन जाते हैं, और अत्यधिक वर्षा में बड़े बाँध भी बाढ़ नियंत्रण में असफल रहते हैं।
इसके अलावा तलछट, जो एक प्राकृतिक उर्वरक है, बाढ़ के मैदानों तक नहीं पहुँच पाती जिससे भूमि निम्नीकरण बढ़ता है; और यह भी माना जाता है कि इन योजनाओं से भूकंप की संभावना बढ़ जाती है तथा जल-जनित बीमारियाँ और प्रदूषण फैलते हैं।
भाग ङ — स्रोत/आरेख-आधारित प्रश्न
स्रोत 1 — इज़राइल और भारत की तुलना (चित्र 3.1 का बॉक्स, पृष्ठ 20)
“एक ओर इज़राइल जैसे 25 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है तो दूसरी ओर 114 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश में प्रति वर्ष किसी भाग में सूखा अवश्य पड़ता है। देश में जल की उपलब्धता और उसके स्वरूप के अनुसार समुचित जलप्रबंधन न होने के कारण ही वर्षा का जल नदी-नालों में तेज़ी से बहकर समुद्र में चला जाता है जिससे वर्षा के बाद के लगभग नौ महीने देश के लिए पानी की कमी के होते हैं।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. इज़राइल और भारत की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है? | इज़राइल की 25 सेंटीमीटर और भारत की 114 सेंटीमीटर। |
| 2. अधिक वर्षा होने पर भी भारत में सूखा क्यों पड़ता है? | क्योंकि जल की उपलब्धता और उसके स्वरूप के अनुसार समुचित जलप्रबंधन नहीं है, इसलिए वर्षा का जल नदी-नालों में तेज़ी से बहकर समुद्र में चला जाता है। |
| 3. वर्षा के बाद कितने महीने पानी की कमी रहती है? | लगभग नौ महीने। |
| 4. इस समस्या का हल क्या बताया गया है? | यह जलीय अभाव वांछित प्रबंधन के द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है। |
स्रोत 2 — बाँधों की विडंबना (पृष्ठ 23)
“नदी परियोजनाओं पर उठी अधिकतर आपत्तियाँ उनके उद्देश्यों में विफल हो जाने पर हैं। यह एक विडंबना ही है कि जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे बाढ़ आने के कारण बन जाते हैं। अत्यधिक वर्षा होने की दशा में तो बड़े बाँध भी कई बार बाढ़ नियंत्रण में असफल रहते हैं।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. अधिकतर आपत्तियाँ किस बात पर हैं? | परियोजनाओं के अपने उद्देश्यों में विफल हो जाने पर। |
| 2. यहाँ बताई गई विडंबना क्या है? | कि जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे ही बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं। |
| 3. अत्यधिक वर्षा में क्या होता है? | तब बड़े बाँध भी कई बार बाढ़ नियंत्रण में असफल रहते हैं। |
| 4. तलछट के बाढ़ के मैदानों तक न पहुँचने का क्या नुक़सान है? | तलछट एक प्राकृतिक उर्वरक है, इसलिए उसके न पहुँचने से भूमि निम्नीकरण की समस्याएँ बढ़ती हैं। |
स्रोत 3 — टाँका और पालर पानी (पृष्ठ 26–27)
“राजस्थान के अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों विशेषकर बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में, लगभग हर घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा ‘टाँका’ हुआ करते थे… वर्षा का पहला जल छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था और उसे संग्रहित नहीं किया जाता था… वर्षाजल अथवा ‘पालर पानी’ जैसा कि इसे इन क्षेत्रों में पुकारा जाता है, प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है।”
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. टाँका राजस्थान के किन क्षेत्रों में मुख्यत: पाया जाता था? | बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में। |
| 2. वर्षा का पहला जल संग्रहित क्यों नहीं किया जाता था? | क्योंकि वह छत और नलों को साफ़ करने में प्रयोग होता था; इसके बाद की वर्षा का जल संग्रह किया जाता था। |
| 3. ‘पालर पानी’ किसे कहते हैं और उसे कैसा माना जाता है? | वर्षाजल को; और इसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है। |
| 4. आज इस रीति की क्या स्थिति है? | पश्चिमी राजस्थान में यह इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कम होती जा रही है, हालाँकि कुछ घरों में टाँके अब भी हैं क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है। |
आरेख 1 — चित्र 3.4: छत वर्षाजल संग्रहण
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| इस आरेख में पुनर्भरण के कौन-से दो तरीक़े दिखाए गए हैं? | (अ) हैंडपंप के माध्यम से पुनर्भरण और (ब) बेकार पड़े कुएँ के माध्यम से पुनर्भरण। |
| छत का जल एकत्रित करने के लिए किस पाइप का प्रयोग होता है? | पी.वी.सी. पाइप का। |
| जल का छनन किससे होता है? | रेत और ईंट से। |
| हौज़ से अतिरिक्त जल कहाँ जाता है और उसका क्या लाभ है? | कुएँ तक; कुएँ का जल भूमिगत जल का पुनर्भरण करता है, जिससे बाद में इस जल का उपयोग किया जा सकता है। |
भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं
इस अध्याय से मानचित्र में बाँध और नदियाँ पूछी जाती हैं। पाठ्यपुस्तक का पृष्ठ 24 का मानचित्र ज़रूर देखिए।
1. प्रमुख बाँध — क्षेत्रवार
| क्षेत्र | बाँध |
|---|---|
| उत्तर भारत | सलाल प्रोजेक्ट (चिनाब) · भाखड़ा नांगल (सतलुज) · टिहरी (भागीरथी) · नरोरा (गंगा) |
| मध्य / पश्चिम भारत | राणा प्रताप सागर · गांधी सागर · कोटा बैराज (तीनों चंबल पर) · सरदार सरोवर (नर्मदा) |
| पूर्वी भारत | रिहन्द · तिलैया · कोनार · मेथॉन · पंचेत (दामोदर घाटी क्षेत्र) · हीराकुड (महानदी) |
| दक्षिण भारत | प्रवारा (गोदावरी) · कोयना (कृष्णा) · नागार्जुन सागर (कृष्णा) · तुंगभद्रा · मेट्टूर (कावेरी) · पेरियार |
2. राजस्थान से जुड़े स्थान (RBSE के लिए अनिवार्य)★
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| राणा प्रताप सागर, गांधी सागर, कोटा बैराज | राजस्थान के तीन प्रमुख बाँध — तीनों चंबल नदी पर |
| बाड़मेर और जालौर | सरदार सरोवर से 2,46,000 हेक्टेयर की सिंचाई |
| जैसलमेर | ‘खादीन’ के लिए प्रसिद्ध |
| बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर | ‘टाँका’ वाले क्षेत्र |
| इंदिरा गांधी नहर | पश्चिमी राजस्थान को बारहमासी पेयजल |
3. अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान
| स्थान | क्यों |
|---|---|
| श्रिंगवेरा (इलाहाबाद के पास) | ईसा से एक शताब्दी पहले का जल संग्रहण तंत्र |
| भोपाल | 11वीं शताब्दी की भोपाल झील |
| दिल्ली (सिरी फोर्ट) | हौज़ खास, 14वीं शताब्दी |
| शिलांग (मेघालय) | हर घर में छत वर्षाजल संग्रहण |
| चेरापूँजी और मॉसिनराम | विश्व की सबसे अधिक वर्षा; शिलांग से 55 किमी. |
| मैसूर ज़िला (कर्नाटक) | गंडाथूर — ‘वर्षा जल संपन्न गाँव’ |
| तमिलनाडु | जहाँ छत वर्षाजल संग्रहण क़ानूनन अनिवार्य है |
| दामोदर घाटी | ‘शोक की नदी’; भादु लोकगीत |
4. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न
| प्रश्न | अंक |
|---|---|
| भारत के दिए गए रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित बाँध अंकित कीजिए — (क) भाखड़ा नांगल (ख) हीराकुड (ग) सरदार सरोवर। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर चंबल नदी पर बने तीनों बाँध अंकित कीजिए और उनके नाम लिखिए। | 3 |
| भारत के रेखा-मानचित्र पर नागार्जुन सागर, तुंगभद्रा और मेट्टूर अंकित कीजिए। | 3 |
★सबसे आसान तरीक़ा — बाँधों को नदी से जोड़िए, न कि राज्य से: भाखड़ा नांगल = सतलुज · हीराकुड = महानदी · सरदार सरोवर = नर्मदा · कोयना और नागार्जुन सागर = कृष्णा · मेट्टूर = कावेरी · राणा प्रताप सागर, गांधी सागर, कोटा बैराज = चंबल।
भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | जल जीवन मिशन में प्रति व्यक्ति कितने लीटर का सेवा स्तर तय है? | 1 |
| 2 | बाँधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ किसने कहा था? | 1 |
| 3 | ‘पालर पानी’ किसे कहते हैं? | 1 |
| 4 | जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं? | 2 |
| 5 | टाँके में वर्षा का पहला जल क्यों संग्रहित नहीं किया जाता था? | 2 |
| 6 | बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें। | 3 |
| 7 | राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर भाखड़ा नांगल, हीराकुड और सरदार सरोवर अंकित कीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | इज़राइल की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है? | 1 |
| 2 | अटल भूजल योजना कितने राज्यों में लागू है? | 1 |
| 3 | किस राज्य में छत वर्षाजल संग्रहण क़ानूनन अनिवार्य है? | 1 |
| 4 | जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है? | 2 |
| 5 | बाँधों से जुड़ी सबसे बड़ी विडंबना क्या है? | 2 |
| 6 | वर्षा जल संग्रहण के पारंपरिक तरीक़ों का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | बहुउद्देशीय परियोजनाएँ आलोचना का विषय क्यों बन गई हैं? | 5 |
| 8 | स्रोत 1 (इज़राइल और भारत की तुलना) पढ़कर चारों प्रश्नों के उत्तर दीजिए। | 4+1 = 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | हौज़ खास किसने और कब बनवाया? | 1 |
| 2 | सरदार सरोवर परियोजना में कौन-से चार राज्य शामिल हैं? | 1 |
| 3 | बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली कितनी पुरानी है? | 1 |
| 4 | सरदार सरोवर परियोजना से राजस्थान को क्या लाभ है? | 2 |
| 5 | मात्रात्मक और गुणात्मक जल दुर्लभता में अंतर बताइए। | 2 |
| 6 | छत वर्षाजल संग्रहण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में किस प्रकार अपनाया जा रहा है? | 5 |
| 8 | भारत के रेखा-मानचित्र पर चंबल के तीनों बाँध और नागार्जुन सागर अंकित कीजिए। | 5 |
अंतिम सलाह। इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं — 1. दोनों पक्ष लिखना (बाँधों के लाभ और हानि) 2. राजस्थान वाले उदाहरण (टाँका, खादीन, जोहड़, पालर पानी, बाड़मेर-जालौर) 3. मानचित्र — जिसमें बाँधों को नदी से जोड़कर याद कीजिए।